नई दिल्ली,एजेंसी। अहमदाबाद प्लेन हादसे के एक महीने बाद शुरुआती जांच रिपोर्ट आ गई है। एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने 12 जुलाई को 15 पेज की रिपोर्ट सार्वजनिक की। प्रारंभिक जांच के मुताबिक यह हादसा विमान के दोनों इंजन बंद होने की वजह से हुआ था।
टेकऑफ के तुरंत बाद एक-एक करके दोनों फ्यूल स्विच बंद हो गए थे, इस वजह से दोनों इंजन भी बंद हो गए। इस दौरान कॉकपिट की रिकॉर्डिंग से पता चला है कि एक पायलट ने दूसरे से पूछा था कि क्या तुमने स्विच बंद किया है? दूसरे ने जवाब दिया, नहीं।
अमेरिकी मीडिया न्यूयॉर्क टाइम्स ने एक्सपर्ट के हवाले से कहा है कि रिपोर्ट में शामिल सभी प्वाइंट्स प्लेन में टेक्निकल गड़बड़ी न होने और पायलट से चूक की ओर इशारा कर रहे हैं।
12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेकऑफ के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गई थी। इसमें 270 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 241 यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे। सिर्फ एक यात्री इस हादसे में जिंदा बचा है।
पायलट कोशिश के बाद क्रैश से नहीं बचा पाए
रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे वाले विमान में दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच बंद थे, जिसके बाद पायलटों ने इसे चालू किया और दोनों इंजन को दोबारा शुरू करने की कोशिश की थी। लेकिन विमान बहुत कम ऊंचाई पर था, इसलिए इंजनों को दोबारा ताकत पाने का समय नहीं मिल सका और विमान क्रैश हो गया। हालांकि ये सामने नहीं आया है कि फ्यूल स्विच बंद कैसे हुए थे।
15 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ से लेकर हादसे तक की पूरी उड़ान करीब 30 सेकेंड ही चली। इस समय तक रिपोर्ट में Boeing 787-8 विमान और GE GEnx-1B इंजन को लेकर किसी ऑपरेटर के लिए कोई चेतावनी या कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है। साथ ही रिपोर्ट में मौसम, बर्ड-हिट और सबोटाज जैसे किसी भी कारण का जिक्र नहीं है।
जांच में क्या सामने आया, सवाल-जवाब फॉर्मेट में जानिए…
सवाल: हवा में क्या हुआ था?
जवाब: रिपोर्ट में बताया गया कि उड़ान भरने के कुछ ही सेकेंड बाद दोनों इंजन हवा में ही बंद हो गए – ईंधन कटऑफ स्विच एक के बाद एक केवल एक सेकेंड में RUN (चालू इंजन) से CUTOFF (बंद इंजन) में बदल गए। इंजनों को ईंधन की आपूर्ति मिलना बंद हो गई थी।
सवाल: पायलटों ने क्या बातचीत की?
जवाब: कॉकपिट ऑडियो भी सामने आया है जिसमें एक पायलट ने पूछा, “आपने क्यों बंद (इंजन) किया?” दूसरे ने उत्तर दिया, “मैंने नहीं किया।”
सवाल: क्या इंजन दोबारा चालू करने की कोशिश हुई?
जवाब: पायलटों ने इंजन को फिर से चालू करने का प्रयास किया। N1 या इंजन 1 कुछ हद तक चालू हो गया, लेकिन इंजन 2 क्रैश होने से पहले स्टार्ट नहीं हो सका। विमान केवल 32 सेकेंड के लिए हवा में रहा था।
सवाल: क्या फ्यूल में कोई दिक्कत थी?
जवाब: फ्यूल टेस्टिंग में पाया गया कि ईंधन में किसी प्रकार की कोई दिक्कत नहीं थी। थ्रस्ट लीवर पूरी तरह टूट चुके थे, लेकिन ब्लैक बॉक्स से पता चला है कि टेकऑफ थ्रस्ट उस वक्त चालू था, जो डिस्कनेक्ट होने का संकेत देता है। थ्रस्ट लीवर के जरिए विमान के इंजन की ताकत को कंट्रोल किया जाता है।
सवाल: क्या बर्ड हिटिंग की कोई समस्या थी?जवाब: फ्लैप सेटिंग (5 डिग्री) और गियर (नीचे) उड़ान भरने के लिए सामान्य थे। बर्ड हिटिंग संबंधी कोई समस्या नहीं थी।
सवाल: हादसे के वक्त मौसम कैसा था?
जवाब: आसमान पूरी तरह साफ था। विजिबिलिटी भी ठीक थी। आंधी-तूफान जैसी भी कोई स्थिति नहीं थी।
सवाल: क्या पायलट मेडिकली फिट थे?
जवाब: दोनों पायलट मेडिकली फिट थे। उन्हें किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं थीं। पायलट इन कमांड के पास 15 हजार घंटे और को-पायलट के पास 3400 घंटे उड़ान का अनुभव था।
सवाल: जांच में विमान कंपनी के लिए कोई एडवाइजरी जारी की गई?
जवाब: रिपोर्ट में कहा गया कि यह प्रारंभिक जांच है, अभी यह जारी है। फिलहाल बोइंग विमान कंपनी या इंजन बनाने वाली जनरल इलेक्ट्रिक (GE) को कोई एडवाइजरी जारी नहीं की जा रही है।
APAI ने कहा- पायलट्स की बातचीत से किसी निष्कर्ष पर न पहुंचे
एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (APAI) ने एजेंसी PTI को लेटर लिखा है। इसमें कहा है कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट से लग रहा है कि क्रैश में पायलट्स की गलती है। हम इस बात को पूरी तरह से खारिज करते हैं। हम निष्पक्ष और सबूत आधारित जांच की मांग करते हैं।
APAI ने कहा- जांच रिपोर्ट बिना किसी जिम्मेदार अधिकारी के साइन और जानकारी के मीडिया में लीक कर दी गई। जांच में पारदर्शिता की कमी है। जांच की विश्वसनीयता पर सवाल है। जनता का विश्वास कम हो रहा है। योग्य, अनुभवी कर्मचारियों विशेषकर लाइन पायलटों को अभी भी जांच टीम में शामिल नहीं किया जा रहा है।
फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं।
फ्यूल स्विच का काम और तकनीक
फ्यूल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं। ये इंजन में फ्यूल की सप्लाई को कंट्रोल करते हैं। इसका मुख्य काम इंजन में फ्यूल की सप्लाई को शुरू करना (‘रन’ पोजिशन) या बंद करना (‘कटऑफ’ पोजिशन) है।
हर इंजन के लिए अलग-अलग फ्यूल कंट्रोल स्विच होता है। उदाहरण के लिए, बोइंग 787 में दो इंजन हैं, तो दो स्विच होंगे – एक बाएं इंजन के लिए, एक दाएं के लिए।
रन पोजिशन: जब स्विच ‘रन’ पर होता है, तो फ्यूल वाल्व खुलता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई शुरू हो जाती है। इससे इंजन चालू रहता है और विमान को थ्रस्ट मिलता है।
कटऑफ पोजिशन: जब स्विच को ‘कटऑफ’ पर किया जाता है तो फ्यूल वाल्व बंद हो जाता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई रुक जाती है। इससे इंजन तुरंत बंद हो जाता है।
फ्यूल स्विच स्प्रिंग-लोडेड होते हैं और इनमें डिटेंट (एक तरह का लॉक) होता है, जो इन्हें अपनी पोजिशन में स्थिर रखता है। स्विच को हिलाने के लिए तीन स्टेप्स चाहिए – पकड़ना, डिटेंट से बाहर निकालना, और रिलीज करना। ये कोई नॉर्मल स्विच नहीं है जो गलती से धक्का लगने से दब जाए जाए।
विमान के उड़ते ही रैम एयर टर्बाइन खुली
AAIB ने CCTV फुटेज में RAT को चालू होने की पुष्टि की है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इंजन बंद होते ही रैम एयर टर्बाइन (RAT) खुल गया। यह एक छोटी प्रॉपेलर जैसी डिवाइस होती है। यह हवा की गति से घूमती है और बिजली और हाइड्रॉलिक पावर पैदा करती है। खासतौर पर तब जब विमान की मेन पावर कट हो जाए, या हाइड्रॉलिक सिस्टम फेल हो जाए। RAT विमान को कम से कम नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम को थोड़ा बहुत चालू रखने में मदद करता है।
बोइंग बोला- जांच एजेंसियों का सहयोग कर रहे
बोइंग ने रिपोर्ट आने के बाद अपने बयान में कहा, ‘हमारी संवेदनाएं एअर इंडिया फ्लाइट 171 के यात्रियों, क्रू मेंबर्स और अहमदाबाद में प्रभावित लोगों के परिवारों के साथ हैं। हम जांच एजेंसियों और अपने कस्टमर के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।’ यह बयान AAIB की शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद आया है।
पायलट ने मेडे कॉल किया था
विमान का आखिरी सिग्नल 190 मीटर (625 फीट) की ऊंचाई पर मिला, जो उड़ान भरने के तुरंत बाद आया था। विमान ने 12 जून की दोपहर 1:39 बजे रनवे 23 से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के बाद विमान के पायलट ने एयर ट्रैफिक कंट्रोलर को मेडे कॉल (इमरजेंसी मैसेज) भेजा, लेकिन इसके बाद कोई जवाब नहीं मिला।
फ्यूल स्विच क्यों है इतना अहम?
ड्रीमलाइनर विमान के दोनों इंजनों में रन और कटऑफ नाम के दो पोजिशन होते हैं। अगर विमान हवा में है और स्विच कटऑफ पर चला जाए तो इंजन को फ्यूल मिलना बंद हो जाता है, जिससे ताकत (थ्रस्ट) खत्म हो जाती है और बिजली सप्लाई भी रुक सकती है, जिससे कॉकपिट के कई उपकरण भी बंद हो सकते हैं।
लंदन/नई दिल्ली, एजेंसी। लंदन में रह रहे कारोबारी विजय माल्या ने बुधवार देर रात फिर भारत सरकार पर अन्याय करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन में चल रही कानूनी प्रक्रिया के कारण वे भारत नहीं लौट पा रहे हैं।
माल्या ने दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल हलफनामे में माना है कि उनकी रू.14,000 करोड़ से ज्यादा की संपत्ति से बैंकों को वसूली हुई है। यह रकम उन बैंकों को लौटाई गई, जिनका पैसा किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज के रूप में बकाया था।
विजय माल्या पर किंगफिशर एयरलाइंस के लिए SBI समेत कई बैंकों से करीब रू.9,000 करोड़ का कर्ज लेने और उसे नहीं चुकाने का आरोप है।
बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने और CBI-ED की जांच के बीच 2 मार्च 2016 यानी 10 साल 6 महीने पहले पहले वे माल्या भारत छोड़कर ब्रिटेन चले गए। बाद में उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया गया था।
माल्या का दावा- ED ने बैंकों को 14 हजार करोड़ लौटाए
माल्या ने बुधवार देर रात भी X पर कई पोस्ट किए। इनमें उन्होंने हाल के कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शनों का जिक्र किया और कहा कि उनके साथ अब भी अन्याय हो रहा है।
विजय ने एक पोस्ट में यह भी कहा, “मेरे साथ हो रहे अन्याय को देखते हुए मुझे लगता है कि मुझे कॉकरोच बन जाना चाहिए। शायद कॉकरोच बनकर बेहतर जिंदगी जी सकूं। मैं भगोड़ा नहीं हूं। ब्रिटेन की कानूनी प्रक्रिया ने मुझे भारत लौटने से रोक रखा है।”
माल्या ने ED की ओर से बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल बताए गए हलफनामे का एक हिस्सा साझा किया। उन्होंने दावा किया कि उसमें उनसे 14,131.60 करोड़ रुपए की वसूली का जिक्र है।
उन्होंने लिखा, “बॉम्बे हाईकोर्ट में ED की ओर से दाखिल हलफनामा। पैराग्राफ 7 में तय कर्ज है और पैराग्राफ 17 में 2021 में वसूल किए गए 14,131.60 करोड़ रुपए दिखाए गए हैं।”
माल्या ने कहा, “पांच साल बाद भी मुझे ऐसा व्यक्ति बताया जा रहा है, जिसने बैंकों को धोखा दिया। मुझे गलत तरीके से भगोड़ा बताया गया है।” उन्होंने वसूली का लेखा-जोखा दिखाने वाली एक टेबल भी शेयर की।
उन्होंने लिखा, “जो लोग निष्पक्ष और सही हिसाब-किताब पर भरोसा करते हैं, वे यह तालिका देखें। क्या मीडिया की ओर से मुझे इस तरह निशाना बनाया जाना और किसी पत्रकार की स्क्रिप्ट की शुरुआत में ही मुझे धोखेबाज कहना सही है? यह पूछना शुरू क्यों नहीं किया जाता कि मुझे मेरा रिफंड कब मिलेगा।”
मार्च 2016 में देश छोड़कर गए थे, 2019 में भगोड़ा घोषित
माल्या मार्च 2016 में यूके चले गए थे। इसके बाद साल 2019 में अधिकारियों ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) के तहत उन्हें भगोड़ा आर्थिक अपराधी घोषित कर दिया था।
इस कानून के तहत प्राधिकारियों को संपत्तियों को जब्त करने का अधिकार मिला है। भारत सरकार लगातार यूके से उनके प्रत्यर्पण की कोशिश कर रही है।
क्या है भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम
भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम (FEOA) कानून उन आर्थिक अपराधियों पर नकेल कसने के लिए बनाया गया है जो भारतीय अदालतों की कार्रवाई और गिरफ्तारी से बचने के लिए देश छोड़कर भाग जाते हैं।
इस कानून के तहत अदालतों को मामले की सुनवाई पूरी होने से पहले ही आरोपी की देश और विदेश में मौजूद संपत्तियों को अटैच यानी जब्त करने और उन्हें नीलाम/बेचकर बैंकों का बकाया वसूलने का अधिकार मिलता है।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने फरवरी में दी थी अंतिम मोहलत
इस साल फरवरी में बॉम्बे हाईकोर्ट ने विजय माल्या को फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि जानबूझकर अदालती कार्यवाही से बचने वाला व्यक्ति न्यायसंगत राहत की मांग नहीं कर सकता।
कोर्ट ने माल्या से कहा था कि यह आखिरी मौका है, वे बताएं कि भारत लौटना चाहते हैं या नहीं। माल्या ने भगोड़ा आर्थिक अपराधी कानून और उन्हें भगोड़ा घोषित किए जाने को चुनौती दी है।
काठमांडू/नई दिल्ली, एजेंसी। नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद भारत ने 35 टन राहत और बचाव सामग्री की 8वीं खेप भेजी। भारतीय वायुसेना का विमान बुधवार को काठमांडू पहुंचा। इसके साथ भारत अब तक 130 टन से ज्यादा राहत सामग्री भेज चुका है।
खेप में टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप, दवाएं और रेस्क्यू उपकरण शामिल हैं। भारत ने राहत अभियान 26 अगस्त को शुरू किया था।
नेपाल पुलिस के मुताबिक, बाढ़ प्रभावित इलाकों से अब तक 1367 शव बरामद हुए हैं। 102 शवों की पहचान हो चुकी है। पहचान के लिए DNA सैंपल जुटाए जा रहे हैं और भारत समेत कई देशों के फोरेंसिक विशेषज्ञ मदद कर रहे हैं।
नेपाल त्रासदी से जुड़ी तस्वीरें…
नेपाल के नुवाकोट जिले के देवीघाट में फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद कीचड़ से दबे मकान।
हादसे में जान गंवाने वाले रिश्तेदार की फोटो देखते परिजन। ये तस्वीरें मार्चुरी के बाहर लगाई गई हैं।
चिलिमे टनल में 105 मीटर तक पहुंची नेपाली-भारतीय सेना की टीम
रसुवा जिले के चिलिमे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में नेपाली और भारतीय सेना की टीम मिलकर सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। टीम अब तक सर्विस टनल के अंदर करीब 105 मीटर तक पहुंच गई है।
प्रोजेक्ट तक जाने वाली सड़क से मलबा हटाने का काम भी चल रहा है। प्रभावित इलाके के दोनों तरफ आने-जाने के लिए रोप लाइन लगा दी गई है।
बाढ़ आने के दिन ही नेपाली सेना की टीम मौके पर पहुंच गई थी। टीम ने पहले इलाके का जायजा लिया और फिर टनल के मुहाने से मिट्टी और मलबा हटाकर अंदर गई। यहां से दो लोगों के शव बरामद किए गए।
रेस्क्यू ऑपरेशन को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए मौके पर मौजूद एक्सकेवेटर के साथ बॉबकैट एक्सकेवेटर भी लगातार मलबा हटाने और खुदाई में लगाया गया है।
नेपाल में रेस्क्यू से जुड़ी तस्वीरें…
नेपाल बाढ़ में AI से शवों की पहचान की कोशिश
नेपाल में भोटेकोशी नदी की बाढ़ के बाद लापता लोगों और अज्ञात शवों की पहचान के लिए FaceTagr AI तकनीक की मदद ली जा रही है। यह तस्वीरों और वीडियो में चेहरों का मिलान कर लापता लोगों से संभावित मैच तलाशती है।
FaceTagr हजारों रिकॉर्ड में से 5-10 संभावित मैच सामने लाता है। परिवार इन मैचों को देख सकते हैं, जबकि अंतिम पहचान नेपाल पुलिस या संबंधित सरकारी एजेंसियां करती हैं।
FaceTagr से जुड़े समीर पंथी के मुताबिक, अब तक करीब 500 लापता लोगों का रजिस्ट्रेशन हुआ है। सिस्टम ने करीब 90 शवों की पहचान में मदद की है। हालांकि, यह नेपाल पुलिस के कुल आधिकारिक पहचान आंकड़े से अलग है।
रेस्क्यू और फोरेंसिक मदद के लिए 54 विशेषज्ञ नेपाल भेजे
भारत ने राहत सामग्री के साथ 54 विशेषज्ञों को भी नेपाल भेजा है। इनमें टनल रेस्क्यू और फोरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हैं।
विशेष रेस्क्यू टीम नेपाली सेना के साथ चिलिमे और लांगटांग में अभियान चला रही है, जबकि फोरेंसिक विशेषज्ञ काठमांडू की दो लैब में DNA जांच में मदद कर रहे हैं।
भारत ने इसके लिए DNA किट, रिऐजेंट और प्रोफाइलिंग उपकरण भी उपलब्ध कराए हैं।
पणजी, एजेंसी। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा, ‘मुझे मुंबई-गोवा हाईवे के चौड़ीकरण में हो रही देरी को लेकर शर्मिंदगी महसूस होती है। ये काम 2016 तक पूरा होना था, लेकिन 15 साल में सिर्फ 94% ही पूरा हुआ है।’
गडकरी ने यह बात बुधवार को पणजी में छह लेन वाले एलिवेटेड रोड कॉरिडोर के उद्घाटन समारोह में कही। उन्होंने कहा, ‘हाईवे का काम पूरा होने के बाद मैं इसके उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल नहीं होऊंगा। मैं ऐसे ठेकेदारों को ब्लैकलिस्ट करने का रिकॉर्ड बनाना चाहता हूं।’
गडकरी ने इस साल 22 जुलाई को राज्यसभा में बताया था कि पिछले 3 साल में नेशनल हाईवे निर्माण में खराब गुणवत्ता वाले काम के लिए 103 ठेकेदार और कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया गया और उन पर जुर्माना लगाया गया।
मुंबई-गोवा हाईवे: 15 साल से काम चल रहा, कई जगह गड्ढे
मुंबई-गोवा हाईवे का चौड़ीकरण का काम 2011 में शुरू हुआ था। इसके बाद भी यह अब तक पूरा नहीं हुआ है। 440 किलोमीटर लंबे इस हिस्से में काम पूरा होने के बावजूद कई जगह सड़क पर गड्ढे, पानी भरने, मरम्मत और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं।
हाईवे पर मई में खारपाड़ा टोल प्लाजा पर टोल लेना शुरू किया गया था। इसके बावजूद परियोजना के कुछ हिस्सों में काम और सुधार जारी है। हाईवे पर बंदरों के लिए 2021 में बनाया गया एक ओवरपास भी ढह चुका है, जिससे सुरक्षा को लेकर सवाल उठे हैं।
हाईवे का काम 2016 तक पूरा होना था
मुंबई-गोवा हाईवे का काम पहले 2016 तक पूरा किया जाना था। जमीन अधिग्रहण, निर्माण से पहले की मंजूरियों और ठेकेदारों से जुड़ी समस्याओं के कारण काम में लगातार देरी हुई।
2024 में केंद्र सरकार ने भी संसद में बताया था कि जमीन अधिग्रहण और कुछ ठेकेदारों की आर्थिक दिक्कतों के कारण परियोजना में देरी हुई।
यह हाईवे मुंबई को कोंकण के रास्ते गोवा से जोड़ता है। इसका महाराष्ट्र वाला हिस्सा करीब 460 किलोमीटर है। परियोजना का यह मार्ग पर्यटन और स्थानीय कारोबार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जाता है।