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छत्तीसगढ़

ED कार्रवाई के खिलाफ कांग्रेस का कल चक्का जाम: विपक्ष के रूप में पहली बार कांग्रेस की जोरदार हुंकार

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33 जिलों में आर्थिक नाकेबंदी, रायपुर में नेशनल हाईवे करेंगे जाम, भूपेश-बैज-मंहत समेत नेता होंगे शामिल

रायपुर,एजेंसी। भूपेश सरकार जाने के बाद विष्णु सरकार में कांग्रेस पहली बार विपक्ष के रूप में जोरदार हुंकार भरने जा रही है। भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी को राजनीतिक द्वैष करार देते हुए कांग्रेस ने कल पूरे छत्तीसगढ़ में विपक्ष का जोरदार प्रदर्शन जनता को दिखाएगी। सभी जिलों कल कांग्रेस आर्थिक नाकेबंदी और चक्काजाम कर जनता को दिखाएगी, कि किस तरह भाजपा सरकार ईडी सहित केन्द्रीय जांच एजेंसियों का दुरूपयोग कर रही है। छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के खिलाफ सोमवार को प्रदेशभर में चक्का जाम करने का ऐलान किया है। कांग्रेस यह विरोध प्रदर्शन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की गिरफ्तारी के विरोध में कर रही है। कांग्रेस की ओर से बताया गया है कि मंगलवार को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक प्रदेश के हर जिले के मुख्यालयों में सड़क जाम कर प्रदर्शन किया जाएगा।

इस आंदोलन में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज, नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव सहित कई बड़े नेता शामिल होंगे। रायपुर जिले में वीआईपी चौक के पास नेशनल हाईवे को जाम किया जाएगा। इसके साथ ही धरसींवा में भी हाईवे पर चक्का जाम कर प्रदर्शन होगा।

विपक्षी नेताओं कों बनाया जा रहा निशान

कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र सरकार ED जैसी संस्थाओं का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को निशाना बना रही है और डराने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस के नेताओं का कहना है कि शराब घोटाले के नाम पर चल रही जांच का असली मकसद कांग्रेस को कमजोर करना है।

पूर्व सीएम के बेटे चैतन्य बघेल को साजिश के तहत झूठे आरोपों में फंसाया गया है। इस चक्का जाम के दौरान जिलों में प्रमुख सड़कों, चौराहों और व्यापारिक क्षेत्रों में यातायात रोका जाएगा। वहीं कांग्रेस के बड़े नेता भी इस आंदोलन में शामिल होंगे।

रायपुर में यहां होगा चक्का जाम

रायपुर जिला अध्यक्ष गिरीश दुबे ने बताया कि रायपुर के मैग्नेटो मॉल के सामने नेशनल हाईवे को जाम किया जाएगा। इसी के साथ ही रायपुर जिला ग्रामीण कांग्रेस के कार्यकर्ता बड़ी संख्या में धरसींवा में चक्का जाम करेंगे।

कांग्रेस ने चक्का जाम के लिए इन नेताओं को सौंपी जिम्मेदारी

छत्तीसगढ़ कांग्रेस ने 22 जुलाई को होने वाले प्रदेशव्यापी आर्थिक नाकेबंदी (चक्का जाम) को सफल बनाने के लिए राज्य के अलग-अलग नेशनल हाईवे पर सीनियर नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी है। इसमें रायपुर, धमतरी, दुर्ग, सरगुजा, रायगढ़, बस्तर, सरायपाली, कोंडागांव-नारायणपुर, कोरबा, बिलासपुर और जांजगीर-चांपा जैसे इलाकों के लिए प्रभारी नेताओं के नाम तय किए गए हैं।

बिलासपुर में सकरी-पेंड्रीडीह फ्लाई ओवर के नीचे चक्का जाम

बिलासपुर में ईडी के दुरूपयोग के विरोध में 22 जुलाई को दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक कांग्रेसी सकरी-पेंड्रीडीह फ्लाई ओवर के नीचे रास्ता रोककर चक्का जाम करेंगे। शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष विजय पांडेय ने कहा कि पीसीसी के आह्वान पर शहर और जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर आर्थिक नाकेबंदी की जाएगी।

आर्थिक नाकेबंदी में ये नेता शामिल रहेंगे बिलासपुर में पेंड्रीडीह फ्लाई ओवर के नीचे कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी के कार्यक्रम में शहर, जिला कांग्रेस कमेटी के सभी पदाधिकारियों समेत विधायक, पूर्व विधायक, पूर्व सांसद सहित कांग्रेस कार्यकर्ता शामिल होंगे। शहर जिला कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष ने बताया कि कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव, मस्तूरी विधायक दिलीप लहरिया, जिलाध्यक्ष विजय केशरवानी सहित पार्टीजन आर्थिक नाकेबंदी में शामिल रहेंगे।

अंबिकापुर में बनारस रोड पर विरोध प्रदर्शन

सरगुजा जिले में जिला कांग्रेस कमेटी अंबिकापुर के बनारस रोड पर BTI के पास विरोध प्रदर्शन करेगी। बनारस रोड को चक्काजाम के लिए इसलिए चुना गया है, क्योंकि यह रास्ता छत्तीसगढ़ को उत्तर भारत से जोड़ता है और इस मार्ग पर बड़ी संख्या में मालवाहक वाहनों की आवाजाही रहती है। जिला कांग्रेस कमेटी ने बताया कि इस चक्काजाम में एम्बुलेंस और स्कूली बच्चों के वाहनों को मुक्त रखा गया है।

वहीं चक्का जाम के समय BTI के पास भारी भीड़ की उमड़ने की संभावना है। ऐसे में चक्काजाम के समय ट्रैफिक से बचने के लिए आम लोग नवापारा रोड और इंडस्ट्रियल एरिया रोड जैसे वैकल्पिक मार्ग का इस्तेमाल कर सकते हैं।

बस्तर में आमागुड़ा चौक पर होगा प्रदर्शन

जगदलपुर में कांग्रेस का प्रदर्शन आमागुड़ा चौक पर होगा। बस्तर जिला कांग्रेस कमेटी (शहर और ग्रामीण) ने बताया कि 22 जुलाई 2025 को सुबह 11 बजे कांग्रेस पार्टी की ओर से जगदलपुर के आमागुड़ा चौक पर चक्काजाम किया जाएगा। जगदलपुर में विधायक लखेश्वर बघेल के नेतृत्व में कांग्रेसी कार्यकर्ता विरोध करेंगे।

रायगढ़ में कोतरा रोड ओवरब्रिज के पास आर्थिक नाकेबंदी

कांग्रेस की आर्थिक नाकेबंदी और चक्का जाम को लेकर रायगढ़ में भी विरोध प्रदर्शन के लिए तैयारियां पूरी कर ली गई है। जिले के कांग्रेसी नेता कोतरा रोड ओवरब्रिज के पास मंगलवार की दोपहर 12 बजे से कोतरा रोड ओवर ब्रिज के पास 2 बजे तक आर्थिक नाकेबंदी करेंगे। जिले में कांग्रेस के सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को आंदोलन में शामिल होने कहा गया है। इस आंदोलन में खरसिया, लैलूंगा, धरमजयगढ़ के कांग्रेस विधायक शामिल हो सकते हैं।

कांग्रेस कमेटी ग्रामीण अध्यक्ष नगेन्द्र नेगी ने बताया कि, आर्थिक नाकेबंदी करते हुए मालवाहक, ट्रक और डंपरों को रोका जाएगा। इस दौरान किसी भी आम नागरिकों को परेशानी नहीं होगी।

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही में कांग्रेस का चक्का जाम

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले में जिला कांग्रेस कमेटी दुर्गावती चौक, दत्तात्रेय के पास आर्थिक नाकेबंदी के तहत चक्काजाम और प्रदर्शन करेगी। जिला कांग्रेस अध्यक्ष उत्तम वासुदेव ने कहा है कि यह विरोध प्रदर्शन केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी (ED) द्वारा कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ की जा रही कार्रवाई के विरोध में किया जा रहा है। इस मौके पर मुख्य अभियंता (डीई) बिजली कार्यालय का घेराव भी किया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

सर्पदंश नहीं, फिर भी मिला 4 लाख मुआवजा:बिलासपुर में ‘डायमंड गैंग’ 1.5 लाख में करता था डील, डॉक्टर, पुलिस, कर्मचारी सब सेट थे

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बिलासपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में फर्जी स्नेक बाइट मुआवजा घोटाले में अब तक डॉक्टर, पुलिसकर्मी और तहसील कर्मचारियों समेत 17 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच में सामने आया है कि ‘एडवोकेट डायमंड गैंग’ में पुलिस, स्वास्थ्य और राजस्व विभाग के अधिकारी-कर्मचारी शामिल थे। अस्पताल में किसी की मौत की सूचना मिलते ही गैंग एक्टिव हो जाता था और सर्पदंश का फर्जी केस बनाकर करीब 1.5 लाख रुपए में सेटिंग की जाती थी।

पुलिस अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर फर्जी दस्तावेजों के जरिए मुआवजा राशि लेने वाले आरोपियों पर कार्रवाई कर रही है। तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों के बाद अब 2 पुलिसकर्मियों को भी गिरफ्तार किया गया है। वहीं, फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाने के आरोप में सिम्स के कई डॉक्टर फरार बताए जा रहे हैं।

बता दें कि, बिलासपुर में सामान्य मौतों को फर्जी सर्पदंश बताकर प्रति केस 4 लाख रुपए के हिसाब से 431 मामलों में 17.24 करोड़ रुपए का मुआवजा लिया गया। इसके लिए फर्जी दस्तावेज और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनाई गईं, कई मामलों में परिजनों की जानकारी के बिना ही रकम का बंदरबांट कर दिया गया।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

तहसील कार्यालय के 3 कर्मचारियों की भी गिरफ्तारी हुई है।

कैसे काम करता था एडवोकेट डायमंड गैंग

सर्पदंश मुआवजा फर्जीवाड़े की जांच में सिम्स से तहसील तक फैले कथित नेटवर्क की परतें खुल रही हैं। पुलिस जांच में पता चला है कि, सिम्स में मौत की सूचना पुलिसकर्मी और होमगार्ड के जवान गिरोह तक पहुंचाते थे। इसके बाद एडवोकेट हीरा खांडेकर (एडवोकेट डायमंड गैंग का सरगना) और उसके सहयोगी सक्रिय हो जाते थे।

जो मृतक के परिजन को पैसों और मुआवजे का लालच देकर उन्हें सर्पदंश की बात बताने के लिए तैयार करते थे। भले ही व्यक्ति की मौत दूसरे किसी कारण से हुई हो। इस आपराधिक लालच में आकर मृतक के परिवार वाले शासन के आपदा कोष से दी जाने वाली राशि का कुछ हिस्सा पाकर इस गिरोह के कारनामे में खुद शामिल हो जाते थे।

1.5 लाख में सेट करता था तहसील

जांच में पता चला है कि तहसील से जुड़ा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी गोविंद विश्वकर्मा 1 से 1.5 लाख रुपए लेकर तहसील स्तर पर केस आगे बढ़वाने और पूरी प्रक्रिया की सेटिंग कराने का काम करता था। फर्जी पीएम रिपोर्ट, पटवारी प्रतिवेदन और दस्तावेजों के जरिए मुआवजा प्रकरण तैयार कर सरकारी राशि तक पहुंचने का आरोप है।

सिम्स चौकी में तैनात कर्मचारियों से शवों की जानकारी मिलने के बाद गिरोह के सदस्य परिजनों से संपर्क करते थे। आरोप है कि कुछ मामलों में शवों पर सर्पदंश के निशान दिखाने के लिए छेड़छाड़ की गई और संबंधित थाने से मर्ग पंचनामा की कार्रवाई कराई गई।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

महिला डॉक्टर प्रियंका सोनी को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया।

डॉक्टर से मिलकर तैयार कराते थे फर्जी पीएम रिपोर्ट

इसके बाद पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में हेरफेर कराने का खेल चलता था। पुलिस जांच में कुछ मामलों में डॉक्टरों की फर्जी पीएम रिपोर्ट और हस्ताक्षर सामने आने की बात कही जा रही है। इसके बाद फर्जी पटवारी रिपोर्ट तैयार कर मुआवजा केस तहसील में जमा किए जाते थे।

तहसील में रीडरों की आईडी से आगे बढ़ते थे केस

जांच के अनुसार, तहसील और एसडीएम कार्यालय में पदस्थ रीडरों की आईडी से प्रकरणों को आगे बढ़ाया जाता था। आरोप है कि दैनिक वेतनभोगी गोविंद विश्वकर्मा रीडरों के संपर्क में रहकर प्रकरणों को स्वीकृति दिलाने में भूमिका निभाता था।

मुआवजा स्वीकृत होने के बाद राशि मृतकों के परिजनों के बैंक खातों में पहुंचती थी। पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि, गिरोह के सदस्य परिजनों को कुछ रकम देकर बाकी राशि निकलवा लेते थे।

14 ठिकानों पर पुलिस की दबिश, डॉक्टर, पुलिसकर्मी और राजस्व अफसर भी शामिल

सर्पदंश मुआवजा मामले में पुलिस अब तक 14 से ज्यादा ठिकानों पर दबिश दे चुकी है। इनमें तत्कालीन सिम्स चौकी प्रभारी गुलाब सिंह सोनवानी, प्रधान आरक्षक, होमगार्ड के दो जवान, डॉक्टर एनएच बोले, डॉ. प्रियंका सोनी, अधिवक्ता हीरा खांडेकर और गोविंद विश्वकर्मा समेत कई लोगों के नाम शामिल हैं।

कोनी थाने के सभी मामलों में दस्तावेज फर्जी मिले

पुलिस जांच में कोनी थाने में दर्ज सर्पदंश के सभी मामलों में पेश दस्तावेजों में गड़बड़ी मिली है। इनमें पीएम रिपोर्ट, मर्ग इंटीमेशन और पटवारी प्रतिवेदन फर्जी तरीके से तैयार किए जाने की बात सामने आई है। कोनी थाने में 3 मामले दर्ज किए गए थे। इनमें से दो मृतकों के परिजनों को मुआवजा मिलने की जानकारी तक नहीं होने की बात जांच में सामने आई है।

फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टर फरार

पुलिस जांच में डॉ. प्रियंका सोनी के अलावा डॉ. एसएन बोले की ओर से जारी पीएम रिपोर्ट भी जांच के दायरे में आई है। फर्जी पीएम रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉ. बोले के फरार होने की जानकारी है। पुलिस उनके घर पर भी दबिश दे चुकी है।

फर्जी हस्ताक्षरों से बदली मौत की वजह

जांच में डॉ. आरके मरकाम समेत कुछ डॉक्टरों के फर्जी हस्ताक्षरों के इस्तेमाल की बात सामने आई है। रतनपुर थाने में दर्ज एक मामले में हार्ट अटैक से हुई मौत को फर्जी हस्ताक्षर के जरिए सर्पदंश बताकर मुआवजा लेने का आरोप है।

पुलिस अब सर्पदंश मुआवजा से जुड़े सभी मामलों की जांच कर रही है। इसमें शामिल बाकी लोगों की भूमिका भी खंगाली जा रही है।

डीन बोले- डॉ. बोले की छुट्टी खत्म, ड्यूटी पर नहीं लौटे

सिम्स के डीन डॉ. रमणेश मूर्ति ने बताया कि डॉ. एसएन बोले ने तीन दिन की छुट्टी ली थी। उनकी छुट्टी खत्म हो चुकी है। सोमवार को उन्हें ड्यूटी पर आना था, लेकिन वे नहीं आए हैं। इसकी जानकारी विभागाध्यक्ष की ओर से दी गई है।

एसएसपी बोले- किसी को भी नहीं बक्शा जाएगा

सर्पदंश मामले में अधिवक्ता और उसकी टीम सिंडिकेट बनाकर काम कर रही थी। इसमें जिन-जिन लोगों के नाम सामने आएंगे, सभी के खिलाफ कार्रवाई होगी। मामले में अब तक मुख्य आरोपी अधिवक्ता, उसका भांजा, बैंक कर्मी, डॉक्टर और तहसील के चार कर्मचारियों समेत कुछ अन्य लोगों को जेल भेजा जा चुका है।

तहसील ऑफिस के कर्मचारियों की गिरफ्तारी पर बवाल

सर्पदंश मुआवजा घोटाले में तहसील ऑफिस के तीन कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद कर्मचारी संघ में बवाल मच गया है। कर्मचारी की गिरफ्तारी पर लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ ने पुलिस के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

संघ के प्रदेश अध्यक्ष रोहित तिवारी ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर आरोप लगाया है। उनका कहना है कि सरकारी कर्मचारी की गिरफ्तारी से पहले शासन को सूचना दे दी चाहिए। लेकिन, प्रक्रिया का पालन ही नहीं किया जा रहा है।

बड़े अफसरों को जांच के दायरे से बाहर रखने पर सवाल

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि,करोड़ों के इस घोटाले में कर्मचारी केवल केस पेश करते हैं। जबकि, पूरा अधिकार राजस्व अफसरों को रहता है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस घोटाले में छोटे कर्मचारियों को निशाना बनाया जा रहा है। जबकि, जिम्मेदार बड़े अफसर अब भी जांच के दायरे से बाहर हैं।

सोमवार को बड़ी संख्या में कलेक्ट्रेट पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी फेडरेशन के पदाधिकारियों ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर निष्पक्ष जांच की मांग की। उनका कहना है कि कुछ कर्मचारियों को केवल पूछताछ के नाम पर थाने बुलाया गया और बाद में गिरफ्तार कर लिया गया।

संगठन ने आरोप लगाया कि कर्मचारियों के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया। उन्हें न्यायालय में हथकड़ी लगाकर पेश किया गया। कर्मचारियों का कहना है कि अगर घोटाले में किसी की भूमिका है तो उसकी निष्पक्ष जांच हो, लेकिन कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए।

क्या है पूरा मामला

दरअसल, जशपुर जिले में पिछले 3 साल में केवल 96 मौतें दर्ज हुईं। जबकि अकेले बिलासपुर में 431 मौतें बताकर 17 करोड़ 24 लाख रुपए का मुआवजा दिया गया। विधानसभा में काफी हंगामे के बाद इस पर सदन में राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा ने मामले की उच्च स्तरीय जांच और दोषियों पर कार्रवाई की बात कही थी।

शासन के नियमों के अनुसार, सांप काटने पर 4 लाख रुपए मुआवजे का प्रावधान है। यही वजह है कि सरकारी मुआवजा हासिल करने लोगों ने अपने परिजनों की सामान्य मौत को सर्पदंश बताकर सरकार से लाखों रुपए मुआवजा ले लिए।

इसके लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और मौत का कारण बदलकर मुआवजे के लिए आवेदन जमा किया गया। जांच में यह भी पता चला है कि कुछ मामलों में बिना परिजनों की सहमति के आरोपी मुआवजा लेकर बंदरबांट कर चुके हैं।

2025 में सामने आया था पहला मामला

फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट का पहला मामला 2025 में बिल्हा थाना क्षेत्र से सामने आया था। उस केस में जहर खाने से हुई मौत को सर्पदंश बताकर फर्जी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट तैयार की गई थी। उस समय भी डॉ. प्रियंका सोनी, मृतक के परिजन और एक अधिवक्ता को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था।

इसके बाद पुलिस ने पूरे मामले की जांच शुरू की, जिसमें कई और संदिग्ध केस सामने आए।

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छत्तीसगढ़

कल से मंत्री बंगले के बाहर डटे अतिथि शिक्षक:दुर्ग में बारिश के बीच प्रदर्शन, रात सड़क पर गुजारी, संविलियन-समान वेतन की मांग

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के 1 हजार से ज्यादा अतिथि शिक्षक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। दुर्ग में हिंदी भवन के सामने पिछले 20 दिनों से धरने पर बैठे शिक्षक सोमवार को संविलियन, सेवा सुरक्षा, समान वेतन और मानदेय बढ़ाने की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के निवास का घेराव करने की कोशिश की।

बारिश के बीच रैली निकाली, शाम को फ्लैशलाइट जलाकर विरोध जताया और देर रात शिक्षा मंत्री के बंगले के बाहर सड़क पर ही रात बिताई। शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 11 साल से दूर-दराज और नक्सल प्रभावित इलाकों के स्कूलों में पढ़ा रहे हैं, लेकिन आज भी केवल मानदेय के भरोसे काम कर रहे हैं।

मंत्री से मुलाकात नहीं होने पर सभी प्रदर्शनकारी पिछले 28 घंटे से मंत्री बंगले के बाहर डटे हुए हैं। बारिश के बीच रेनकोट पहनकर और छाता लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं। बंगले के आसपास बैरिकेडिंग लगा दी गई है।

‘20 हजार में घर चलाना मुश्किल’

राज्य अतिथि शिक्षक संघ के हड़ताल प्रमुख और मुख्य संरक्षक धर्मेंद्र दास वैष्णव ने कहा कि उन्हें हर महीने सिर्फ 20 हजार रुपए मानदेय मिलता है। इसी राशि में किराया, बिजली-पानी, आने-जाने का खर्च और परिवार की जिम्मेदारी उठानी पड़ती है।

उन्होंने कहा कि कई बार ऐसी स्थिति बन जाती है कि माता-पिता की मदद करने के बजाय खुद उन्हें घर से पैसे मांगकर लौटना पड़ता है। अगर परिवार में कोई बीमार पड़ जाए तो आर्थिक संकट और बढ़ जाता है।

धर्मेंद्र दास ने कहा कि हम आदिवासी क्षेत्र के शिक्षक हैं। हमने नक्सल प्रभावित इलाकों में शिक्षा का प्रसार कर नक्सलवाद को खत्म करने में भूमिका निभाई है। लोगों को बंदूक की जगह कलम पकड़ना सिखाया है। पिछले 11 सालों से हमारा शोषण हो रहा है।

संविलियन या समायोजन पर ठोस फैसले की मांग

धर्मेंद्र दास वैष्णव ने बताया कि उनकी पोस्टिंग कोंडागांव जिले के केशकाल ब्लॉक के एक नक्सल प्रभावित गांव के स्कूल में है। वहां उन्होंने पिछले 11 साल से पढ़ाया है।

उन्होंने कहा कि जिन इलाकों में कभी सड़क तक नहीं थी, वहां शिक्षक बच्चों को पढ़ाकर उन्हें इंजीनियर, वकील और दूसरे पेशों तक पहुंचा रहे हैं, लेकिन सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में कोई फैसला नहीं ले रही है।

उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि संविलियन या समायोजन पर ठोस फैसला चाहिए। हम बच्चों का भविष्य बना रहे है, लेकिन हमारा कौन बनाएगा।

शिक्षा मंत्री के निवास के बाहर सड़क पर बैठे अतिथि शिक्षक।

शिक्षा मंत्री के निवास के बाहर सड़क पर बैठे अतिथि शिक्षक।

आत्मानंद और विवेकानंद स्कूलों का दिया उदाहरण

प्रदर्शन के दौरान शिक्षकों ने कहा कि पिछली सरकार ने आत्मानंद स्कूलों में कार्यरत अतिथि शिक्षकों को बेहतर वेतन और अन्य सुविधाएं दी थीं। उनका आरोप है कि वर्तमान सरकार विवेकानंद स्कूलों में भी इसी तरह की व्यवस्था कर रही है, लेकिन सालों से काम कर रहे विद्यामितान शिक्षकों के लिए अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया।

शिक्षकों का कहना है कि वे किसी विशेष सुविधा की मांग नहीं कर रहे हैं, बल्कि समान कार्य के लिए समान वेतन और सेवा सुरक्षा चाहते हैं।

पहले भी खून से लिखा था पत्र

बता दें कि इससे पहले अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री के नाम खून से पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की मांग भी की थी। उनका कहना था कि अगर सरकार उनके भविष्य को सुरक्षित नहीं कर सकती तो उन्हें सम्मान के साथ जीने का अधिकार भी नहीं मिल रहा है।

अब आंदोलन के 20 दिन पूरे होने के बाद शिक्षकों ने सीधे शिक्षा मंत्री के निवास तक पहुंचकर अपनी मांगों पर जल्द फैसला लेने की अपील की है। इधर, दुर्ग पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि विद्यामितान के मामले में जो भी सही होगा वो निर्णय लिया जाएगा।

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छत्तीसगढ़

सहारा इंडिया धोखाधड़ी मामले का फरार ब्रांच मैनेजर गिरफ्तार:3 सालों से छिप रहा था, 3,848 निवेशकों से 40.78 करोड़ की धोखाधड़ी मामला

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रायगढ़, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में सहारा इंडिया निवेश घोटाले के मामले में करीब 3 साल से फरार चल रहे सहारा इंडिया कबीर चौक शाखा के ब्रांच मैनेजर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी लंबे समय से पुलिस से बचकर छिप रहा था। गिरफ्तार करने के बाद उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।

पुलिस के अनुसार, मामले में कृष्णा विहार कॉलोनी निवासी विकास निगानिया (35) ने 29 सितंबर 2022 को कोतवाली थाना में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि सहारा इंडिया के अधिकारियों, कर्मचारियों ने कंपनी की विश्वसनीयता और आरबीआई से अधिकृत होने का झूठा भरोसा दिलाकर साल 2017 में उनसे, उनकी माता और पत्नी से अलग-अलग योजनाओं में करीब 40 लाख रुपएका निवेश कराया था।

निवेश की अवधि पूरी होने के बाद भी निवेशकों की राशि वापस नहीं की गई। जांच में सामने आया कि निवेशकों से सहारा इंडिया के नाम पर रकम लेकर अलग-अलग सहकारी समितियों के नाम से बॉन्ड जारी किए गए और सुनियोजित तरीके से धोखाधड़ी की गई।

मामले में सहारा इंडिया रायगढ़ के कबीर चौक शाखा के ब्रांच मैनेजर विजय कुमार शराफ (54), निवासी विकास नगर, कोतरारोड, फरार था। ‘ऑपरेशन क्लीन हंट’ अभियान के तहत पुलिस को सूचना मिली कि आरोपी अपने ससुराल कोतरारोड आया हुआ है। सूचना मिलते ही कोतवाली पुलिस ने दबिश देकर उसे हिरासत में ले लिया।

आरोपियों ने हजारों निवेशको से करोड़ो रुपए की धोखाधड़ी की थी।

आरोपियों ने हजारों निवेशको से करोड़ो रुपए की धोखाधड़ी की थी।

आरोपी से कई दस्तावेज जब्त

पूछताछ में आरोपी ने मामले से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों की जानकारी दी। उसके कब्जे से सहारा इंडिया के कबीर चौक फ्रेंचाइजी कार्यालय से संबंधित विकास एवं प्रशासनिक आदेश, कंपनी के एमओयू (MOU) की प्रतियां और अन्य दस्तावेज जब्त किए गए। पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद उसे गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

पहले भी कई आरोपी जा चुके हैं जेल

इस मामले में कोतवाली पुलिस पहले ही सहारा इंडिया रायगढ़ के पूर्व शाखा प्रबंधक ओमप्रकाश शर्मा, खरसिया के पूर्व शाखा प्रबंधक पुष्पेंद्र कुमार साहू, कंपनी डायरेक्टर करुणेश अवस्थी, सेक्टर मैनेजर अमृतलाल श्रीवास और 6 जुलाई 2024 को बिलासपुर के रीजनल मैनेजर रजनीश तिवारी को गिरफ्तार कर विशेष न्यायाधीश रायगढ़ की अदालत में चालान पेश कर चुकी है।

3,848 निवेशकों से 40.78 करोड़ की धोखाधड़ी

पुलिस ने आरोपियों से आईडी कार्ड, नियुक्ति एवं कार्य आदेश संबंधी दस्तावेज, बैंक खातों की जानकारी, जमीन के दस्तावेज तथा धोखाधड़ी की रकम से खरीदी गई कार और बाइक भी जब्त की है।

जांच में रायगढ़ सहित अन्य जिलों से मिली शिकायतों के आधार पर अब तक 3,848 निवेशकों के साथ 40 करोड़ 78 लाख 16 हजार 739 रुपए की धोखाधड़ी का खुलासा हुआ है। मामले में फरार अन्य आरोपियों की तलाश लगातार जारी है।

SSP बोले- किसी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा

एसएसपी शशि मोहन सिंह ने कहा कि निवेशकों के साथ धोखाधड़ी करने वाले किसी भी आरोपी को कानून से बचने नहीं दिया जाएगा। आर्थिक अपराधों में फरार आरोपियों की लगातार तलाश की जा रही है और आम जनता के विश्वास के साथ खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

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