रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि, साय सरकार ने गौठान योजना बंद कर दी। सरकार ने गाय के लिए गौ अभयारण्य और गोधाम बनाने की घोषणा की थी। 20 महीने बीत गए, लेकिन इसकी शुरुआत नहीं हुई है। सड़कों पर सरकार ने मवेशियों को मरने के लिए छोड़ दिया है। ये ऐसे गौ भक्त है, इन्हें गायों का श्राप लगेगा।
भूपेश बघेल ने कहा कि, फसल खेतों में है। किसान फसल की रखवाली के लिए मवेशियों को भगा रहे हैं। जिस कारण मवेशी सड़कों पर आ रहे हैं। बारिश के समय मच्छर और मक्खियों से बचने के लिए भी मवेशी सड़कों पर बैठ जाते हैं। उन्होंने यह बयान दिल्ली से लौटने के बाद रायपुर एयरपोर्ट पर दिया है।
इन आरोपों पर भाजपा प्रवक्ता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि गौ अभयारण्य का ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। जल्द ड्राफ्ट को मूर्त रूप दिया जाएगा। गौ माताओं के साथ हो रही दुर्घटनाएं दुखद है।
घटना के बाद गायों को बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर रखकर गौसेवकों ने नाराजगी जताई थी।
NH से मवेशियों को हटाने का काम किया जा रहा
गौरीशंकर श्रीवास ने आगे कहा कि पंचायत विभाग के पास गौ अभयारण्य की जिम्मेदारी होगी। ये गौ अभयारण्य छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित रहेगा। लगातार हो रही मवेशियों की मौतों पर उन्होंने कहा कि NH पर पेट्रोलिंग करने का निर्देश संबंधित अधिकारियों को जारी किया गया है। NH से मवेशियों को हटाने का काम भी किया जा रहा है।
20 दिन के अंदर 50 से ज्यादा गौवंशों की मौत
बता दें कि, बिलासपुर-रायपुर हाईवे पर 20 दिन के भीतर 50 से अधिक गौवंशों की मौत हो चुकी है। मवेशियों को अज्ञात वाहनों ने कुचल दिया। बिलासपुर हाईकोर्ट ने सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को हटाने के लिए राज्य शासन को आदेश जारी कर चुका है, लेकिन सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है। जिसकी वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं।
गृहमंत्री के जिले में हो रहा धर्मांतरण- भूपेश
धर्मांतरण-मतांतरण मुद्दे पर पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने कहा कि, धर्मांतरण तो गृहमंत्री के जिले में हो रहा है, वो रोक नहीं पा रहे हैं। अगर कोई लालच या दबाव देकर धर्मांतरण कराते हैं, तो वो गलत है। लेकिन अपनी स्वतंत्रता से धर्म बदल सकते हैं।
धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम प्रदेश में अब तक लागू नहीं
उन्होंने कहा कि, रमन सरकार के कार्यकाल में 2006 में कानून बना था। विधानसभा में यह पारित भी हुआ था, लेकिन सरकार इसे लागू नहीं कर पाई। प्रदेश में अब तक धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम लागू नहीं है।
यह वर्तमान सरकार की स्थिति है और ये अधिनियम संशोधन करने की बात कह रहे हैं। ये केवल गुमराह करते हैं। धर्मांतरण के नाम पर केवल राजनीति कर रहे हैं। ये केरल में अलग बात बोलते हैं और छत्तीसगढ़ में अलग।
अफरीदी और अनुराग ठाकुर की फोटो शेयर कर भूपेश बघेल ने कहा कि, एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर अभी बंद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ मैच खेल रहे हैं।
पाकिस्तान से सीरीज होने पर केंद्र सरकार पर किया हमला
पाकिस्तान से क्रिकेट सीरीज होने पर पूर्व सीएम भूपेश ने कहा कि, एक तरफ ऑपरेशन सिंदूर अभी बंद नहीं हुआ है। दूसरी तरफ पाकिस्तान के साथ मैच खेल रहे हैं। उनके साथ स्थिति यह है कि बाप बड़ा न भैया सबसे बड़ा रुपया।
20 दिन के भीतर 50 से अधिक गौवंशों की मौत
बिलासपुर जिले में 30 जुलाई को अज्ञात वाहन ने नेशनल हाईवे पर बैठे 16 से अधिक गायों को कुचल दिया, जिससे 15 की मौत हो गई थी। इसके पहले 14 जुलाई को तेज रफ्तार वाहन ने 22 गायों को कुचल दिया था, जिससे 17 की मौत हो गई थी। 20 दिन में 50 से अधिक गौवंशों की मौत हो चुकी है।
अज्ञात गाड़ी ने सड़क पर बैठे 16 से अधिक गायों को कुचल दिया था।
बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर 15 गायों के पड़े थे शव, सड़क पर खून ही खून फैला हुआ था।
सख्त कार्रवाई की मांग
जानकारी के मुताबिक, 30 जुलाई की रात लिमतरा के पास बिलासपुर-रायपुर नेशनल हाईवे पर मवेशियों का झुंड सड़क पर बैठा था। उसी समय तेज रफ्तार अज्ञात वाहन ने मवेशियों को कुचल दिया। गुरुवार की सुबह लोगों ने देखा तब हाईवे पर गौवंशों की लाशें बिखरी पड़ी थीं।
इस घटना की जानकारी गौ सेवकों को दी गई। वहीं, खबर मिलते ही पुलिस भी मौके पर पहुंच गई। लगातार हो रहे हादसों से गौ सेवकों में आक्रोश है। उन्होंने मामले में सख्त कार्रवाई करने की मांग की है।
हाईकोर्ट का आदेश भी बेअसर
बता दें कि बिलासपुर हाईकोर्ट ने सड़कों पर घूम रहे मवेशियों को हटाने के लिए राज्य शासन को आदेश जारी कर चुका है, लेकिन सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसकी वजह से लगातार हादसे हो रहे हैं।
तखतपुर-मुंगेली, कोटा रोड, मस्तूरी, चकरभाठा के साथ ही सीपत रोड में शाम ढलते ही सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा रहता है। लगातार हो रहे हादसों पर हाईकोर्ट ने जनहित याचिका मानकर सुनवाई शुरू की है।
इस दौरान समय-समय पर राज्य सरकार और जिला प्रशासन को आदेश जारी किया गया है, जिसमें उन्हें सड़कों से मवेशियों को हटाने और निगरानी करने कहा था, लेकिन हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद जिला प्रशासन मवेशियों को हटाने ध्यान नहीं दे रहा।
जिले में लगातार हो रहे हादसे।
जानिए हाईकोर्ट ने क्या कहा था ?
छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सड़कों पर मवेशियों की वजह से हो रही परेशानियों को लेकर जनहित याचिकाओं पर चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच में सुनवाई की थी। इस दौरान सीजे सिन्हा ने कहा था कि बरसात शुरू होते ही सड़कों पर मवेशी नजर आने लगे हैं।
कोर्ट ने कहा था कि यह शहर ही नहीं, पूरे प्रदेश की समस्या है। अब यह गंभीर हो चुकी है। इसका संयुक्त प्रयास से ही समाधान किया जा सकता है। प्रदेश की सड़कों पर मवेशियों के जमघट से होने वाली होने वाली परेशानियों को लेकर वर्ष 2019 में जनहित याचिकाएं लगाई गई थीं।
इसके बाद तब से लेकर अब तक हाई कोर्ट ने कई बार दिशा- निर्देश जारी किए हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की बेंच ने मार्च 2024 में सुनवाई करते हुए राज्य सरकार, एनएचएआई से जवाब मांगा था।
जिले में धारा 163 प्रभावशील, मवेशी मालिकों पर FIR
बिलासपुर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने बताया था कि वह लगातार अफसरों की मीटिंग ली गई है, जिसमें उन्हें सड़क पर बैठे मवेशियों को हटाने के निर्देश दिए गए हैं। मवेशियों को सड़क पर छोड़ने वाले गौ पालकों के खिलाफ FIR दर्ज कराने के निर्देश भी दिए हैं।
जिले में धारा 163 लागू किया गया है, जिसके तहत सड़क पर मवेशी छोड़ने पर गौ पालकों पर जुर्माना और एफआईआर का प्रावधान है।
कोरबा। कोरबा शहर के ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर सड़क हादसे का सीसीटीवी वीडियो सामने आया है। वीडियो में कार से टक्कर के बाद बाइक सवार युवक हवा में उछलकर डिवाइडर पार करते हुए सड़क की दूसरी लेन में गिरता दिखाई दे रहा है।
इसके बाद वह वहां से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी टकरा गया। हादसे में युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसका इलाज जारी है।
कार से टक्कर के बाद डिवाइडर पार कर दूसरी लेन में गिरा
घटना सीएसईबी चौकी क्षेत्र की है। जानकारी के अनुसार, देर शाम रिमझिम बारिश के दौरान बाइक सवार युवक मुख्य मार्ग से गुजर रहा था। इसी दौरान सामने से आ रही कार से उसकी बाइक की जोरदार टक्कर हो गई। टक्कर के कारण युवक उछलकर डिवाइडर पार कर सड़क की दूसरी लेन में जा गिरा।
इसी दौरान दूसरी लेन से गुजर रहे एक अन्य दोपहिया वाहन से भी उसकी टक्कर हो गई। उस वाहन पर एक दंपती सवार थे। अचानक हुए हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने घायल युवक को संभाला और पुलिस को सूचना दी।
हेलमेट नहीं पहनने से सिर में गंभीर चोट
जानकारी के मुताबिक, बाइक सवार युवक ने हेलमेट नहीं पहना था। हादसे में उसके सिर में गंभीर चोट आई है। उसे तत्काल नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है।
पुलिस ने वाहन जब्त कर शुरू की जांच
सीएसईबी चौकी पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी है। दोनों वाहनों को जब्त कर सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हादसे के कारणों का पता लगाया जा रहा है।
घटना के बाद ट्रांसपोर्ट नगर मुख्य मार्ग पर तेज रफ्तार और सड़क सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों ने मार्ग पर स्पीड ब्रेकर और सुरक्षा संकेतक लगाने की मांग की है। बारिश के दौरान सड़क पर फिसलन की आशंका को देखते हुए वाहन चालकों से गति नियंत्रित रखने और यातायात नियमों का पालन करने की अपील की गई है।
कता केवल देश की सीमाओं से नहीं, बल्कि आपसी विश्वास, समान अवसर और सामाजिक सद्भाव से होती है
धनंजय राठौर, संयुक्त संचालक, जनसंपर्क
अशोक कुमार चन्द्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी
भारत की पहचान उसकी विविधता और एकता में है। यहाँ अनेक भाषाएँ बोली जाती हैं, अलग-अलग संस्कृतियों और परंपराओं का पालन किया जाता है, फिर भी देशवासियों को एक सूत्र में बाँधने वाली भावना है-राष्ट्रीय एकता। यह एकता केवल देश की सीमाओं की रक्षा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इस बात से भी जुड़ी है कि हर नागरिक स्वयं को देश के साझा भविष्य का महत्वपूर्ण हिस्सा महसूस करे।
हर वर्ष 31 अक्टूबर को लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती के अवसर पर राष्ट्रीय एकता दिवस मनाया जाता है। यह दिवस हमें उनके ऐतिहासिक योगदान को याद करने के साथ-साथ आज के भारत में एकता, अखंडता और सामाजिक सद्भाव बनाए रखने की जिम्मेदारी का एहसास कराता है।
सरदार पटेल ने रखी एकीकृत भारत की मजबूत नींव
वर्ष 1947 में देश की स्वतंत्रता के समय भारत के सामने अनेक चुनौतियाँ थीं। अंग्रेजी शासन समाप्त होने के बाद देशी रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। ऐसे समय में देश के पहले उपप्रधानमंत्री और गृह मंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने वी. पी. मेनन और अन्य अधिकारियों के सहयोग से संवाद, समझदारी और दृढ़ नेतृत्व के माध्यम से रियासतों के एकीकरण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया, जिन्होंने 560 से अधिक रियासतों का भारत संघ में विलय कर देश को एक सूत्र में पिरोया। देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को मजबूत करने तथा आंतरिक एवं बाहरी चुनौतियों का सामना करने के लिए राष्ट्रीय संकल्प को मजबूत किया।
सरदार वल्लभभाई पटेल के प्रयासों ने एक मजबूत और एकीकृत भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान दिया। वर्ष 2014 से उनकी जयंती को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में विशेष रूप से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर ‘रन फॉर यूनिटी’, राष्ट्रीय एकता की शपथ और विभिन्न जनजागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से देश की एकता और अखंडता का संदेश दिया जाता है। सरदार पटेल की विरासत हमें सिखाती है कि विभिन्न विचारों, हितों और पहचानों के बीच तालमेल बनाकर ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है।
आज विकास के साथ एकता को मजबूत करना भी जरूरी
आज भारत के सामने चुनौती रियासतों को एकजुट करने की नहीं, बल्कि विकास के लाभों को देश के प्रत्येक क्षेत्र और नागरिक तक पहुँचाने की है। सड़क, रेल, बिजली, संचार और डिजिटल सुविधाओं का विस्तार दूरस्थ क्षेत्रों को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ता है। इससे लोगों को शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं और व्यापार के बेहतर अवसर मिल सकते हैं। हालाँकि, केवल बुनियादी ढाँचे का विकास ही राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसके लिए यह भी जरूरी है कि विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को विकास के समान अवसर मिलें, सार्वजनिक सेवाएँ सुलभ हों और उनकी आवश्यकताओं को उचित महत्व दिया जाए।
लोकतंत्र की स्थिरता, स्वतंत्रता की रक्षा और राष्ट्र के सर्वांगीण विकास के लिए राष्ट्रीय एकता और एकीकरण अत्यंत आवश्यक है। जब तक पूरा राष्ट्र एकता की भावना से बंध नहीं जाता, तब तक देश में कोई विकास या आर्थिक प्रगति संभव नहीं है। इसलिए, राष्ट्रीय एकीकरण को सुदृढ़ करने के लिए राष्ट्रवाद को बढ़ावा देना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। राष्ट्रीय एकीकरण की रक्षा के लिए हमें एक मजबूत राष्ट्र की आवश्यकता है। अतः जाति, क्षेत्रवाद, धर्म आदि पर केंद्रित संकीर्ण सोच से दूर रहकर हमें विघटनकारी तत्वों का दमन करना चाहिए।
प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन, राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएँ लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने में योगदान देती हैं। जब शासन की योजनाओं का लाभ जरूरतमंद परिवारों तक पहुँचता है और लोगों को आगे बढ़ने के अवसर मिलते हैं, तब व्यवस्था के प्रति विश्वास बढ़ता है। यही विश्वास राष्ट्रीय एकता की नींव को मजबूत करता है।
सहकारी संघवाद से मजबूत होगा देश
भारत जैसे विशाल और विविधतापूर्ण देश में केंद्र और राज्य सरकारों के बीच समन्वय अत्यंत महत्वपूर्ण है। शिक्षा, स्वास्थ्य, सड़क, रोजगार, उद्योग और आंतरिक सुरक्षा जैसे विषयों पर मिलकर काम करने से विकास को गति मिलती है। लोकतंत्र में राजनीतिक विचारों और क्षेत्रीय आकांक्षाओं में अंतर होना स्वाभाविक है। महत्वपूर्ण यह है कि इन मतभेदों का समाधान संवाद, संवैधानिक मूल्यों और आपसी सम्मान के माध्यम से किया जाए। जब विभिन्न सरकारें और संस्थाएँ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए जनहित को प्राथमिकता देती हैं, तब राष्ट्रीय एकता और मजबूत होती है। विकास की योजनाओं में स्थानीय जरूरतों का ध्यान रखना भी आवश्यक है, ताकि दूरस्थ और पिछड़े क्षेत्रों के नागरिक स्वयं को देश की विकास यात्रा से जुड़ा हुआ महसूस करें।
विविधता का सम्मान ही भारत की असली ताकत
भारत की एकता का अर्थ यह नहीं है कि सभी लोग एक जैसी भाषा बोलें, एक जैसी परंपराएँ अपनाएँ या एक जैसे विचार रखें। भारत की वास्तविक ताकत इस बात में है कि अलग-अलग पहचान और जीवनशैली वाले लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हुए साथ रह सकें। डिजिटल संचार के इस दौर में सूचनाएँ तेजी से फैलती हैं। ऐसे में अफवाहों से बचना, किसी भी सूचना की सत्यता जाँचना और जिम्मेदारी के साथ अपनी बात रखना पहले से अधिक जरूरी हो गया है। समाज में अविश्वास और तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों के बजाय संवाद, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रीय एकता केवल सरकारी कार्यक्रमों या संदेशों से कायम नहीं रह सकती। इसे मजबूत बनाने के लिए नागरिकों के दैनिक व्यवहार में समानता, संवेदनशीलता और परस्पर सम्मान का होना आवश्यक है।
‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’से बढ़ेगी आपसी समझ
देश की सांस्कृतिक विविधता को समझने और राज्यों के बीच आपसी संबंध मजबूत करने के उद्देश्य से वर्ष 2015 में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ पहल शुरू की गई। इसके माध्यम से विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान तथा पारस्परिक समझ को बढ़ावा दिया जाता है। शैक्षणिक गतिविधियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रम, अंतरराज्यीय यात्राएँ और विभिन्न क्षेत्रों की कला एवं परंपराओं से परिचित कराने वाले आयोजन विशेष रूप से युवाओं में राष्ट्रीय एकता की भावना विकसित कर सकते हैं। 1 से 15 नवंबर 2026 तक एक भारत श्रेष्ठ भारत की थीम पर भारत पर्व का आयोजन भी किया जाएगा।
युवा देश का भविष्य हैं। शिक्षा, खेल, सामाजिक सेवा, स्वच्छता और जनजागरूकता जैसे कार्यों में उनकी भागीदारी समाज को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जब युवा क्षेत्रीय और भाषाई भेदभाव से ऊपर उठकर देशहित को प्राथमिकता देते हैं, तब एक मजबूत और समावेशी भारत का मार्ग प्रशस्त होता है।
राष्ट्रीय एकता एक निरंतर जिम्मेदारी
राष्ट्रीय एकता दिवस हमें याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता बनाए रखना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का साझा कर्तव्य है। देश की सुरक्षा के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव, विकास के समान अवसर, सार्वजनिक सेवाओं तक पहुँच और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर विश्वास भी स्थायी शांति के लिए आवश्यक हैं। सरदार वल्लभभाई पटेल ने भारत के राजनीतिक एकीकरण में ऐतिहासिक योगदान दिया। वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि वह समावेशी विकास, सामाजिक न्याय, आपसी सम्मान और संवैधानिक मूल्यों के माध्यम से इस एकता को और मजबूत बनाए।
राष्ट्रीय एकता का वास्तविक अर्थ यह नहीं है कि देश का प्रत्येक नागरिक एक जैसा सोचे, बल्कि यह है कि अलग-अलग विचारों, भाषाओं और संस्कृतियों के बावजूद सभी एक साझा भविष्य के निर्माण के लिए साथ खड़े हों। सरदार पटेल की विरासत से प्रेरणा लेकर एकता, सद्भाव और सहयोग को जीवन का हिस्सा बनाना ही राष्ट्रीय एकता दिवस का सच्चा संदेश है।
राष्ट्रीय एकता राष्ट्र को मजबूत और संगठित बनाती है। यह विभिन्न धर्मों, संप्रदायों, जातियों, पहनावे, सभ्यता और संस्कृति के लोगों को एक साथ बांधे रखती है। अनेक भिन्नताओं के बावजूद, सभी लोग एक-दूसरे के साथ पारस्परिक सद्भाव में रहते हैं। हमारे देश जैसी विविधता अन्य देशों में नहीं पाई जाती। यहाँ विभिन्न जातियों और समुदायों, धर्मो के लोग, जिनकी जीवनशैली, संस्कृति, भाषाएँ और रीति-रिवाज बिल्कुल भिन्न हैं, फिर भी एक साथ रहते हैं। भारत में ये सभी राष्ट्रीय एकता के धागे से बंधे हुए हैं।
कुर्मी समाज मनाएगा भारत रत्न सरदार पटेल की 151वीं जयंती, सुबह 10:30 बजे होगा गरिमामय आयोजन
कोरबा। देश की एकता, अखंडता और राष्ट्रीय एकीकरण के महान शिल्पकार, भारत रत्न लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती के अवसर पर 31 अक्टूबर 2026, शनिवार को कोरबा में कुर्मी समाज द्वारा सादगीपूर्ण एवं गरिमामय जयंती समारोह का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम सुबह 10:30 बजे तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा में आयोजित होगा। इस अवसर पर सरदार पटेल के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी।
सरदार वल्लभभाई पटेल भारतीय इतिहास के ऐसे महान व्यक्तित्व हैं, जिन्होंने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति, अदम्य साहस और दूरदर्शी नेतृत्व से देश की एकता को नई मजबूती प्रदान की। स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद देशी रियासतों के भारतीय संघ में एकीकरण में उनकी ऐतिहासिक भूमिका ने उन्हें ‘लौह पुरुष’ के रूप में विशिष्ट पहचान दिलाई। उनका जीवन राष्ट्रसेवा, कर्तव्यनिष्ठा, अनुशासन और राष्ट्रीय एकता के प्रति अटूट समर्पण का प्रेरणादायी उदाहरण है।
कुर्मी समाज द्वारा आयोजित इस जयंती समारोह का उद्देश्य महान राष्ट्रनायक के विचारों और आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना तथा समाज में एकता, आपसी सद्भाव, सहयोग और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को सुदृढ़ करना है। सरदार पटेल का जीवन संदेश देता है कि सामूहिक एकजुटता, दृढ़ संकल्प और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण से बड़े से बड़े लक्ष्य हासिल किए जा सकते हैं।
समाज की ओर से जयंती समारोह को सादगी और गरिमा के साथ संपन्न कराने की तैयारी की जा रही है। कुर्मी समाज के समस्त सम्माननीय पदाधिकारियों, सदस्यों एवं समाजबंधुओं से अपील की गई है कि वे निर्धारित समय पर कार्यक्रम स्थल पर पहुंचकर लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल को श्रद्धासुमन अर्पित करें और उनके आदर्शों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लें।
कार्यक्रम की जानकारी
आयोजन: लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की 151वीं जयंती दिनांक: 31 अक्टूबर 2026, शनिवार समय: सुबह 10:30 बजे स्थान: तुलसी नगर चौक के पास, पंप हाउस रोड, कोरबा, छत्तीसगढ़
आर. के. वर्मा अध्यक्ष, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति
पवन सिन्हा मीडिया प्रभारी, कुर्मी क्षत्रिय कल्याण समिति