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अमेरिका में 100 साल में सबसे ज्यादा टैरिफ:हर अमेरिकी को सालाना ₹2 लाख का नुकसान, दुनिया पर मंदी का खतरा बढ़ा

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वॉशिंगटन डीसी,एजेंसी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में पहली बार विदेशी सामानों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया। इसका सीधा असर अमेरिका के शेयर बाजार पर पड़ा।

डाउ जोंस, S&P और नैस्डैक जैसे मार्केट इंडेक्स में 2 दिन में 10% से ज्यादा की गिरावट आई। बाजार की हालत बिगड़ती देख ट्रम्प सरकार ने टैरिफ को 90 दिनों के लिए टाल दिया।

अब ट्रम्प ने एक बार फिर से 9 अगस्त से दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया है। अमेरिकी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे अमेरिकी मार्केट को फिर नुकसान हो सकता है और दुनियाभर में मंदी आने का खतरा है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प 2 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में 69 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान करते हुए।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प 2 अप्रैल 2025 को व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में 69 देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान करते हुए।

हर अमेरिकी को साल में 2 लाख ज्यादा खर्च करना होगा

अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी के बजट लैब के अनुमान के मुताबिक अमेरिका में औसत टैरिफ रेट 18.3% हो चुका है। इससे पहले 1909 में अमेरिका में औसत टैरिफ रेट 21% था। यानी मौजूदा टैरिफ 100 साल में सबसे ज्यादा है।

बढ़े हुए टैरिफ की वजह से अमेरिकी परिवारों को इस साल औसतन 2400 डॉलर (2 लाख रुपए) का एक्स्ट्रा खर्च उठाना पड़ेगा। पहले वे जो विदेशी सामान 100 डॉलर में खरीद रहे थे, अब उसके लिए उन्हें 118.3 डॉलर चुकाने होंगे।

कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के अर्थशास्त्री वेंडोंग झांग का कहना है कि आने वाले समय में अमेरिका में उन चीजों की कीमतें और बढ़ेंगी, जिनमें स्टील और एल्युमीनियम का इस्तेमाल होता है, जैसे रेफ्रिजरेटर या वॉशिंग मशीन।

अमेरिका की GDP को 11.6 लाख करोड़ का नुकसान

बजट लैब के मुताबिक टैरिफ से अमेरिका की GDP 0.5% गिर सकती है। इसका मतलब है कि अमेरिका की 28 ट्रिलियन डॉलर की इकोनॉमी को एक साल में 140 बिलियन डॉलर का नुकसान होगा। भारतीय रुपए में यह 11.6 लाख करोड़ है।

टैक्स फाउंडेशन का कहना है कि टैरिफ का असर खाने-पीने की चीजों पर भी पड़ेगा। अमेरिका में केला और कॉफी पर्याप्त मात्रा में नहीं उगाई जाती है, इसलिए इनकी कीमत बढ़ेगी। मछली, बीयर और शराब पर भी महंगाई का असर पड़ेगा।

चीजें ज्यादा महंगी होंगी तो लोग कम खरीदेंगे। हालांकि, ट्रम्प का दावा है कि टैरिफ से अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, लेकिन एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे महंगाई बढ़ेगी और नौकरियां घटेंगी।

हाल ही में जारी सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई में सिर्फ 73,000 नई नौकरियां जुड़ीं। सरकार के अनुमान के मुताबिक 1.09 लाख नई नौकरियां बढ़ने की उम्मीद थीं। मई और जून में भी नौकरियों में गिरावट आई। इससे एक तिमाही में औसतन 35,000 प्रति महीने नौकरियां जुड़ीं। यह 2010 के बाद सबसे कम आंकड़ा है।

इस आंकड़े से नाराज होकर ट्रम्प ने 1 अगस्त को ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की कमिश्नर एरिका मैकएंटरफर को नौकरी से निकाल दिया। ट्रम्प ने आरोप लगाया कि रिपोर्ट में ‘राजनीतिक मकसद’ से हेराफेरी की गई थी।

ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की कमिश्नर एरिका मैकएंटरफर। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एरिका को 2024 में नियुक्त किया था। (फाइल फोटो)

ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स की कमिश्नर एरिका मैकएंटरफर। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने एरिका को 2024 में नियुक्त किया था। (फाइल फोटो)

जवाबी टैरिफ से शुरू हो सकती है ट्रेड वॉर

जब अमेरिका जैसा बड़ा देश टैरिफ लगाता है, तो दूसरे देश भी जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं। इससे देशों के बीच ट्रेड वॉर शुरू हो जाती है। अभी कई देश अमेरिकी सामानों पर जवाबी टैरिफ से बच रहे हैं, लेकिन वे अमेरिका पर दबाव डालने के लिए जवाबी टैरिफ लगा सकते हैं।

उदाहरण के लिए 2018-19 के टैरिफ वॉर में जब ट्रम्प ने चीन पर ज्यादा टैरिफ लगाए थे, तो चीन ने भी सोयाबीन, ऑटोमोबाइल्स और कई अमेरिकी सामानों पर टैक्स लगाया था।

अमेरिकी सोयाबीन की चीन में काफी खपत है। चीन के टैरिफ लगाने से सोयाबीन की कीमत 25% ज्यादा महंगी हो गई, जिससे निर्यात में 50% की गिरावट आई। इससे अमेरिकी किसानों को बहुत नुकसान हुआ था।

तब किसानों की मदद के लिए अमेरिकी सरकार को सोयाबीन के किसानों के लिए 7.3 बिलियन डॉलर का राहत पैकेज जारी करना पड़ा था।

दुनिया पर मंदी आने का खतरा बढ़ा

डोनाल्ड ट्रम्प की टैरिफ नीति के कारण दुनिया में मंदी आने का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों और आर्थिक विशेषज्ञों ने इस पर चेतावनी दी है कि अगर टैरिफ वॉर आगे बढ़ा तो वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार धीमी हो सकती है।

IMF ने 22 अप्रैल को प्रकाशित रिपोर्ट में कहा कि अगर अमेरिका और अन्य देश टैरिफ वॉर में उलझते हैं, तो वैश्विक विकास दर 2025 में 3.3% से घटकर 3.0% हो सकती है।

ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक को-ऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (OECD) ने 3 जून को अपनी रिपोर्ट में कहा कि ट्रम्प के टैरिफ से जुड़े फैसलों का असर न सिर्फ अमेरिका, बल्कि यूरोप और एशिया की अर्थव्यवस्थाओं पर भी पड़ेगा।

इससे मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट्स में कमी आ सकती है, जिसके चलते पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था में एक साथ सिंक्रोनाइज्ड स्लोडाउन (मंदी) का खतरा पैदा हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक मंदी का असर सबसे ज्यादा अमेरिका और फिर चीन, भारत, कनाडा, इटली और आयरलैंड पर पड़ेगा।

अमेरिका की सॉफ्ट पावर का असर घटा

ट्रम्प के टैरिफ का असर ये हुआ है कि अमेरिका के कई नजदीकी देश ही अब उससे नाराज हो गए हैं। कनाडा, जापान, दक्षिण कोरिया, फ्रांस जैसे देश जो अमेरिका के काफी नजदीकी हैं, अब अपने संबंधों पर फिर से विचार करने लगे हैं।

ट्रम्प की टैरिफ नीतियों का असर अमेरिका के पुराने सहयोगियों और मित्र देशों के साथ संबंधों पर पड़ा है। ऐसे में उनका अमेरिका पर भरोसा घटने लगा है। कनाडा और अमेरिका के संबंध हमेशा से बेहद करीबी रहे हैं, लेकिन ट्रम्प के दौर में इनमें काफी तनाव आ गया।

एशिया में भी स्थिति अलग नहीं है। जापान और साउथ कोरिया, जो सुरक्षा के लिए अमेरिका पर निर्भर हैं, अब खुद को अधिक आत्मनिर्भर बनाने की कोशिश कर रहे हैं, क्योंकि उन्हें डर है कि भविष्य में अमेरिका पर भरोसा करना मुश्किल हो सकता है।

जापान को शुरू में उम्मीद थी कि वह ट्रम्प की मांगों को पूरा करके अमेरिका के और करीब आ सकेगा। उसने अपने रक्षा बजट में काफी बढ़ोतरी भी की थी, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों ने और ज्यादा मांगें रख दीं। टोक्यो ने इससे नाराज होकर जुलाई में अमेरिका और जापान के रक्षा व विदेश मंत्रियों की बैठक को ही रद्द कर दिया।

हालांकि, बाद में अमेरिका और जापान ने एक व्यापार समझौते पर दस्तखत किए, लेकिन यह सिर्फ ऊपर से सामान्य स्थिति दिखाने की कोशिश है। असल में जापान अब अमेरिका पर पूरी तरह निर्भर न रहने के रास्ते तलाश रहा है, क्योंकि उसे ट्रम्प के फैसलों की अनिश्चितता का डर है।

वहीं, ऑस्ट्रेलिया ने भी अमेरिका की नई मांगों की खुलकर आलोचना की। इसके कुछ ही दिनों बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने AUKUS नामक एक अहम रक्षा समझौते की समीक्षा की घोषणा कर दी, जिसे ऑस्ट्रेलिया के लिए अमेरिका की सुरक्षा गारंटी का सबसे अहम संकेत माना जाता था।

अमेरिका की ‘सॉफ्ट पावर’ यानी अपने प्रभाव से दुनिया को जोड़ने की क्षमता में भी गिरावट आई है। यह गिरावट दक्षिण प्रशांत देशों में साफ दिख रही है, जहां चीन और अमेरिका में सीधी प्रतिस्पर्धा है।

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PM मोदी के काशी दौरे की तैयारी: आज वाराणसी पहुंचेंगे CM योगी, 6500 करोड़ की सौगातों और सिग्नेचर ब्रिज पर लगेगी अंतिम मुहर

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वाराणसी,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 28 अप्रैल को काशी दौरा संभावित है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तैयारियों का जायजा लेने दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी पहुंचेंगे। प्रधानमंत्री के काशी आगमन की तैयारियों को लेकर जिले के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों के साथ सर्किट हाउस में बैठक करेंगे। बैठक के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर और काल भैरव मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे तथा रात्रि विश्राम करेंगे।

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों शिलान्यास और लोकार्पण होने वाली परियोजनाओं पर अंतिम मुहर लगा सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, अगले दिन बुधवार को मुख्यमंत्री कुछ परियोजनाओं का स्थलीय निरीक्षण भी कर सकते हैं। बरेका में होने वाले नारी शक्ति महोत्सव और जनसभा स्थल पर तैयारियों का जायजा लेंगे।

मुख्यमंत्री के दौरे को लेकर रूट डायवर्जन प्लान जारी कर दिया गया है। शाम के समय बीएलडब्ल्यू परिसर में सिनेमा हाल से लेकर सूर्य सरोवर और सभा स्थल की ओर वाहनों के प्रवेश पर रोक रहेगी। शहर के कई हिस्सों में वीवीआईपी आगमन को देखते हुए अतिक्रमण हटाने का अभियान चलाकर मार्गों को खाली कराया जा रहा है। यह व्यवस्था प्रधानमंत्री के दौरे को लेकर भी की जा रही है।

सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी 28 अप्रैल को 6500 करोड़ रुपए की विभिन्न परियोजनाओं की सौगात देंगे। इनमें मुख्य रूप से गंगा नदी पर बनने वाले सिग्नेचर ब्रिज का शिलान्यास शामिल है। इसके अलावा पर्यटन, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़ी कई योजनाओं का लोकार्पण व शिलान्यास भी किया जाएगा। हालांकि, अंतिम सूची अभी जारी नहीं की गई है।

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Bengal Assembly elections: कोई नहीं चाहता कि बंगाल में भाजपा बनाए सरकार, ममता का दावा फिर लौटेगी TMC

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पूर्ब मेदिनीपुर,एजेंसी। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस लगातार चौथी बार राज्य की सत्ता में आएगी और कोई नहीं चाहता कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार बनाए। 

बंगाल में चुनाव नहीं जीतेगी बीजेपी 
पूर्ब मेदिनीपुर जिले के हल्दिया में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने विपक्षी दलों का आह्वान किया कि केंद्र से भाजपा नीत राजग सरकार को हटाने के लिए सब साथ में आएं। उन्होंने कहा, ”भाजपा इस बार पश्चिम बंगाल में चुनाव नहीं जीतेगी।

दिल्ली से भी भाजपा को हटा देंगी तृणमूल कांग्रेस 
तृणमूल कांग्रेस एक बार फिर सरकार बनाएगी। हम 2026 में ही दिल्ली से भी भाजपा को हटा देंगे।” तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वह पिछले एक महीने से पश्चिम बंगाल का गहन दौरा कर रही हैं और इस अवधि में ”मैं समझ गई कि जनता क्या चाहती है, यह साफ है कि कोई भी भाजपा को नहीं चाहता। तृणमूल कांग्रेस सरकार पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए भाजपा द्वारा जारी ‘आरोपपत्र’ पर उसे आड़े हाथ लेते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वह भी हल्दिया डॉक कॉम्प्लैक्स और उससे लगे औद्योगिक क्षेत्र में ‘कट-मनी’ लेने के लिए भाजपा के खिलाफ आरोपपत्र जारी कर रही हैं।

आरोप प्रत्यारोप को दौर जारी 
बनर्जी ने कहा, ”आपने तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ आरोपपत्र जारी किया, मैं भी भाजपा के खिलाफ आरोपपत्र जारी कर रही हूं।” केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने तृणमूल सरकार के खिलाफ एक आरोपपत्र जारी करते हुए 28 मार्च को राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार का, कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने का और घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। 

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खड़गे के बयान पर हमलावार हुई BJP: तरुण चुग बोले- PM मोदी को “Terrorist” कहना 140 करोड़ देशवासियों का अपमान

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नई दिल्ली,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा दिए गए बयान पर अब सियासत तेज हो गई है। इसे लेकर बीजेपी नेता तरुण चुग ने एक्स पर वीडियो पोस्ट कर कांग्रेस पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि देश के प्रधानमंत्री के लिए “Terrorist” जैसे शब्दों का इस्तेमाल करना राजनीतिक मतभेद नहीं, बल्कि लोकतंत्र और 140 करोड़ देशवासियों के जनादेश का अपमान है।

उन्होंने कहा कि दिशाहीनता और घटिया मानसिकता के ग्रसित कांग्रेस पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे का यह बयान निम्नस्तरीय, घृणित और राष्ट्रविरोधी है। इसकी जितनी निंदा की जाए कम है। यह बयान सिर्फ एक व्यक्ति पर नहीं, बल्कि देश की गरिमा और लोकतांत्रिक मूल्यों पर सीधा आघात है। जिसे देश की जनता कताई बर्दाश्त नहीं करेगी।
हालांकि इस बयान को लेकर जहां बीजेपी कांग्रेस पर हमलावार है तो वहीं कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इसे लेकर सफाई दी है। उन्होंने प्रेसवार्ता कर कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनका मतलब था कि प्रधानमंत्री देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने को ‘आतंकित’ कर रहे हैं। खरगे ने कहा, ”वह लोगों और राजनीतिक दलों को आतंकित कर रहे हैं। मैंने कभी नहीं कहा कि वह (शब्दश:) आतंकवादी हैं। इसे आतंकित करना… वह अपनी सत्ता और सरकारी मशीनरी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं और विपक्षी पार्टियों को गाली दे रहे हैं, बदनाम कर रहे हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि निर्वाचन आयोग ”भाजपा कार्यालय का एक्सटेंशन” बन गया है। उन्होंने प्रधानमंत्री पर चुनाव प्रचार के आखिरी चरण में आदर्श आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि सीबीआई, ईडी और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों को राजनीतिक लोगों को डराने-धमकाने के औजार के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है। खरगे ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को लेकर भी केंद्र पर निशाना साधा। 
उन्होंने प्रधानमंत्री पर यह दावा करके जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया कि विपक्ष ने महिला आरक्षण से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक को पारित नहीं होने दिया। उन्होंने तर्क दिया, ”अगर वह सच में इसे लागू करना चाहते हैं, तो वह मौजूदा 543 लोकसभा सीटों में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दे सकते हैं। वह इसे क्यों नहीं दे रहे हैं?’

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