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छत्तीसगढ़

पायलट ट्रेनिंग के लिए छात्रों को मिलेंगे 15 लाख:अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक में फैसला, गिरौदपुरी विकास के लिए 2 करोड़ जारी

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जांजगीर-चांपा। जांजगीर चांपा जिले में अनुसूचित जाति विकास प्राधिकरण की बैठक हुई। उप मुख्यमंत्री अरुण साव की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में प्राधिकरण के पिछले कार्यों की समीक्षा की गई। कलेक्टर को अधूरे कार्यों को शीघ्र पूरा करने के निर्देश दिए गए।

बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। प्राधिकरण का बजट 50 करोड़ से बढ़ाकर 75 करोड़ रुपए किया गया है। बाबा गुरु घासीदास की तपोस्थली गिरौदपुरी के विकास के लिए 2 करोड़ रुपए की घोषणा की गई है।

अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं की कोचिंग हेतु 50 लाख रुपए का प्रावधान किया गया है। हर साल 5 छात्रों को पायलट प्रशिक्षण के लिए प्रति छात्र 15 लाख रुपए की सहायता दी जाएगी। जैत खंभ निर्माण के लिए अब लकड़ी या सीमेंट का विकल्प समाज की इच्छानुसार खुला रखा जाएगा।

पलायन के मुद्दे पर बोले उप मुख्यमंत्री

क्षेत्र में पलायन के मुद्दे पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार इसे रोकने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि कई प्रयास किए गए हैं। कुछ लोग शौकिया भी पलायन करते हैं और खेती-बाड़ी छोड़कर बारिश से पहले बाहर चले जाते हैं।

प्रदेश की सड़कों की स्थिति के बारे में उन्होंने कहा कि पिछली सरकार ने पांच सालों में सड़कों पर ध्यान नहीं दिया। वर्तमान सरकार को अभी मात्र डेढ़ साल हुआ है। उप मुख्यमंत्री अरुण साहू के पास लोक निर्माण विभाग है और वे लगातार सुधार कार्यों में संलग्न हैं।

बिजली बिल हाफ योजना पर बोले साव

बिजली बिल हाफ योजना में कटौती के विरोध पर कहा कि हम हाफ बिजली से मुफ्त बिजली की ओर बढ़ रहे हैं। केंद्र की सूर्य घर योजना के तहत 2 किलोवाट के लिए 60 हजार रुपए की सब्सिडी दी जा रही है और राज्य सरकार ने इसके लिए 30 हजार रुपए की अतिरिक्त सब्सिडी दी है।

कुल 90 हजार रुपए की सब्सिडी के साथ लोग सौर ऊर्जा को अपना सकते हैं। बैंक से आसान किस्तों में इसे लागू करने की योजना पर भी काम हो रहा है। गरीबों को अब मुफ्त बिजली की ओर ले जाया जा रहा है।

बता दें कि जांजगीर को अनुसूचित जाति बहुल क्षेत्र होने के कारण बैठक स्थल के रूप में चुना गया था। इसमें प्राधिकरण के उपाध्यक्ष खुशवंत साहब, मंत्रिमंडल के सदस्य, जनप्रतिनिधि, जिला पंचायत अध्यक्ष और सीनियर अधिकारी शामिल हुए।

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छत्तीसगढ़

कांग्रेस नेताओं की संतों से मुलाकात और बयानबाजी:सत्ता में रहते धीरेंद्र शास्त्री को भगवान बताया, फिर BJP का एंजेट, रामभद्राचार्य को जगद्गुरु मानने से इनकार

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रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के चिरमिरी में रामकथा का भव्य मंच सजा था। हजारों की भीड़ मौजूद थी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य कथा सुना रहे थे। इसी दौरान उन्होंने अचानक कहा, ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

उनका यह बयान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की उस टिप्पणी के बाद आया, जिसमें महंत ने कहा था, ‘मैं रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानता, वे BJP के प्रचारक हैं।’ चरणदास महंत के इस बयान के बाद धर्म और राजनीति को लेकर बहस तेज हो गई है।

भाजपा ने इसे सनातन का अपमान बताया, जबकि कांग्रेस नेताओं ने कहा कि यह बयान राजनीतिक संदर्भ में दिया गया था।

रामभद्राचार्य बोले- ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

रामभद्राचार्य बोले- ‘कोई मेरे जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा, तो मैं स्वीकार नहीं करूंगा।’

संतों से मुलाकात और बयानबाजी के कई किस्से

छत्तीसगढ़ की राजनीति में यह पहला मौका नहीं है, जब किसी बाबा, कथावाचक या संत को लेकर राजनीतिक टकराव सामने आया हो। पिछले कुछ सालों में धार्मिक मंच और राजनीतिक बयान कई बार आमने-सामने दिखाई दिए हैं।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया था BJP एजेंट

साल 2025 में भिलाई में आयोजित बागेश्वर बाबा धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा के दौरान बड़ा विवाद सामने आया था। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा था कि “अगर हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोग देश छोड़ दें।”

वहीं, भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा था कि “जब धीरेंद्र शास्त्री पैदा भी नहीं हुए थे, तब से मैं हनुमान चालीसा पढ़ रहा हूं।” उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को BJP का एजेंट तक बता दिया था। इसके बाद BJP ने कांग्रेस पर हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया था।

विकास उपाध्याय ने धीरेंद्र शास्त्री को भगवान का स्वरूप बताया था।

विकास उपाध्याय ने धीरेंद्र शास्त्री को भगवान का स्वरूप बताया था।

धीरेंद्र शास्त्री को बताया था भगवान का स्वरूप

इससे पहले साल 2023 में रायपुर में आयोजित बागेश्वर धाम सरकार के दरबार में विकास उपाध्याय आयोजन के प्रमुख चेहरों में शामिल थे। वह मंच पर मौजूद रहे थे और खुले मंच से धीरेंद्र शास्त्री को भगवान स्वरूप कहा था।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए।

धीरेंद्र शास्त्री ने कहा था- हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए।

संतों के मंच पर भी दिखते रहे कांग्रेस के बड़े चेहरे

कांग्रेस और संत समाज के रिश्ते हमेशा टकराव वाले नहीं रहे हैं। साल 2022 में मुख्यमंत्री रहते हुए भूपेश बघेल रायपुर में आयोजित प्रदीप मिश्रा की शिव महापुराण कथा में पहुंचे थे। उन्होंने मंच साझा किया और आशीर्वाद भी लिया था। इस दौरान की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुए थे।

सीएम बनने के बाद भूपेश बघेल रितेश्वर महाराज से मिलने भी पहुंचे थे। उस समय रितेश्वर महाराज ने शराबबंदी और गरीबों के हित में काम करने को लेकर उन्हें सलाह दी थी। भूपेश बघेल ने सार्वजनिक रूप से उनका सम्मान भी किया था। हालांकि बाद के सालों में कथावाचकों और धार्मिक मंचों को लेकर कांग्रेस नेताओं के सुर बदलते नजर आए।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया था।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कथा वाचक प्रदीप मिश्रा से आशीर्वाद लिया था।

महंत बोले- मैं रामभद्राचार्य को जगतगुरु नहीं मानता

दरअसल, 25 मई 2026 को नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत और सांसद ज्योत्सना महंत मनेंद्रगढ़ पहुंचे थे। मीडिया से बातचीत के दौरान चरणदास महंत ने कहा कि रामभद्राचार्य धर्म के नाम पर राजनीति करने आए हैं और वे भाजपा के प्रचारक हैं। मैं उनको न जगतगुरु मानता हूं और न गांव का गुरु मानता हूं।

इसी मुद्दे पर कोरबा सांसद ज्योत्स्ना महंत ने भी अपनी राय रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि धर्म की आड़ में राजनीति नहीं होनी चाहिए। मैं काम को ही धर्म मानती हूं। मेरे लिए जनता की सेवा सबसे महत्वपूर्ण है। मैं उनसे मिल चुकी हूं, उनकी कथा भी सुन चुकी हूं, लेकिन जनप्रतिनिधियों को सेवा भाव में रहना चाहिए।

संतों को लेकर महंत के बयान पर भाजपा का पलटवार

वहीं, भाजपा के मुख्य प्रदेश प्रवक्ता और सांसद संतोष पांडेय ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत का ‘सनातन विरोधी’ और ‘मानसिक दिवालियापन’ से भरा बयान बताया है। उन्होंने कहा कि तुष्टिकरण की राजनीति और गांधी परिवार की गुलामी में अंधे होकर कांग्रेस नेता महंत अपनी मर्यादा खो चुके हैं।

करोड़ों हिंदुओं की आस्था के केंद्र जगद्गुरु रामभद्राचार्य और धीरेंद्र शास्त्री समेत देश के प्रतिष्ठित संतों को ‘फर्जी’ कहना और उन्हें ‘बाबा’ कहकर संबोधित करना बेहद शर्मनाक और निंदनीय है। छत्तीसगढ़ की धर्मप्राण जनता संतों का यह अपमान कतई बर्दाश्त नहीं करेगी।

राहुल गांधी और सनातन विरोधी नेताओं से तुलना

संतोष पांडेय ने कहा कि चरणदास महंत अब कांग्रेस आलाकमान की नजरों में नंबर वन बनने की होड़ में शामिल हो गए हैं। राहुल गांधी, उदयनिधि स्टालिन और ममता बनर्जी जैसे नेताओं के नक्शे-कदम पर चलते हुए महंत भी ‘सनातन उन्मूलन’ वाली मानसिकता का हिस्सा बन चुके हैं।

उन्होंने कहा कि दिल्ली के आकाओं को खुश करने के लिए महंत छत्तीसगढ़ की पावन धरा पर संतों का अपमान कर रहे हैं।

‘कण-कण में भगवान’ वाले बयान पर तंज

सांसद संतोष पांडेय ने चरणदास महंत के ‘कण-कण में भगवान’ वाले बयान पर कहा कि जिन कांग्रेस नेताओं को भगवान राम के अस्तित्व पर सवाल उठाते समय और रामलला मंदिर के आमंत्रण को ठुकराते समय शर्म तक नहीं आई, आज वही नेता राजनीतिक लाभ के लिए छद्म ज्ञान बांट रहे हैं।

उन्होंने सवाल किया कि यदि कांग्रेस नेताओं के कण-कण में भगवान हैं, तो उन्हें सनातन संस्कृति को आगे बढ़ाने वाले संतों और कथावाचकों से इतनी आपत्ति क्यों है? क्या संतों का अपमान करना और सनातन संस्कृति को नीचा दिखाना ही कांग्रेस का असली एजेंडा है?

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कोरबा

कोरबा में जर्जर सड़क को लेकर ग्रामीणों का फूटा गुस्सा:डीबीएल कंपनी के गेट पर धरना-प्रदर्शन, मरम्मत के आश्वासन के बाद खत्म आंदोलन

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कोरबा। कोरबा में कुदमुरा-स्यांग और बरपाली-दादरपारा मार्ग की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने बुधवार को डीबीएल कंपनी के गेट पर प्रदर्शन किया। छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज, कोरबा के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो के नेतृत्व में यह धरना और गेट जाम आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से सफल रहा।

इस आंदोलन में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा, महिलाएं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सुबह से ही जिल्गा और दादरपारा के पास स्थित डीबीएल के प्लांट/यार्ड के मुख्य गेट पर ग्रामीण इकट्ठा हो गए थे। उन्होंने हाथों में तख्तियां लेकर सड़क मरम्मत और धूल-कीचड़ से निजात दिलाने की मांग करते हुए नारेबाजी की।

कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

ग्रामीणों की मांग

ग्रामीणों की प्रमुख मांगों में कुदमुरा से स्यांग रोड और बरपाली से दादरपारा मार्ग की तत्काल मरम्मत शामिल थी। इसके अलावा, धूल और कीचड़ की समस्या से राहत, भारी वाहनों का नियंत्रित संचालन और आमजन की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी की गई।

ग्रामीणों का कहना था कि डीबीएल कंपनी के भारी वाहनों के लगातार आवागमन से ये दोनों मार्ग पूरी तरह जर्जर हो गए हैं, जिससे स्कूली बच्चों, मरीजों और गर्भवती महिलाओं को रोजाना परेशानी हो रही है।

मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

जिला प्रशासन को ज्ञापन सौंपा जा चुका था

आंदोलन के दौरान, जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने ग्रामीणों की समस्याओं को कंपनी प्रबंधन के सामने गंभीरता से रखा। आंदोलन से पहले जिला प्रशासन को भी इस संबंध में ज्ञापन सौंपा जा चुका था। इसके बाद कंपनी प्रबंधन और आंदोलनकारियों के बीच विस्तृत चर्चा हुई।

चर्चा के दौरान, कंपनी प्रबंधन ने ग्रामीणों की समस्याओं को स्वीकार किया और सड़क मरम्मत तथा आवश्यक सुधार कार्य शीघ्र शुरू करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके अतिरिक्त, आमजन को हो रही परेशानियों को कम करने के लिए नियमित पानी छिड़काव, सड़क समतलीकरण और सुरक्षा संबंधी आवश्यक उपाय करने पर भी सहमति बनी।

मांगे पूरी होने पर आंदोलन खत्म किया

ग्रामीणों ने बताया कि यह आंदोलन पूरी तरह से जनहित और क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं को लेकर किया गया था। कंपनी प्रबंधन द्वारा सकारात्मक पहल और मांगों पर सहमति जताए जाने के बाद, आंदोलन को सफल मानते हुए शांतिपूर्ण ढंग से समाप्त कर दिया गया।

छत्तीसगढ़ सर्व आदिवासी समाज के जिला अध्यक्ष अलेक्जेंडर टोप्पो ने आंदोलन में शामिल सभी ग्रामवासियों, महिलाओं, युवाओं, जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों का आभार व्यक्त किया।

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कोरबा

केमिकल से पकाए फलों पर खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्रवाई:कोरबा में 10 किलो आम और 4 दर्जन केले फेंके, नमूने लैब भेजे गए

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कोरबा। कोरबा में खाद्य सुरक्षा विभाग ने बुधवार को फल दुकानों पर बड़ी कार्रवाई की। इस दौरान सड़े-गले और रसायन से पकाए गए फल मिलने पर 10 किलो आम और 4 दर्जन केले मौके पर ही नष्ट कर दिए गए। यह कार्रवाई आयुक्त खाद्य सुरक्षा दीपक अग्रवाल के निर्देश पर चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत की गई।

विभाग की टीम ने राजा फ्रूट सेंटर, राजेश फ्रूट सेंटर, शारदा फ्रूट सेंटर और सर्वमंगला फ्रूट सेंटर सहित कुल 11 संस्थानों की जांच की। कई दुकानों में फलों को पकाने के लिए प्रतिबंधित कार्बाइड के इस्तेमाल की आशंका जताई गई है। अधिकारियों ने फलों के नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं।

फलों की जांच के लिए विशेष अभियान शुरू

खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने बताया कि यह विशेष अभियान 27 मई से 29 मई 2026 तक पूरे छत्तीसगढ़ में चलाया जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य आम जनता को गुणवत्तापूर्ण फलों की उपलब्धता सुनिश्चित करना है।

गर्मी के मौसम में आम, केला और तरबूज जैसे फलों की मांग बढ़ जाती है। इसका फायदा उठाकर कुछ व्यापारी फलों को रसायन से पकाकर बेचते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है।

रसायन से पके फल बेचने वालों को सख्त चेतावनी

कार्रवाई के दौरान दुकानदारों को सख्त हिदायत दी गई कि वे केवल प्राकृतिक तरीके से पके फल ही बेचें। उन्हें फलों पर रंग या वैक्स का इस्तेमाल न करने और कोल्ड स्टोरेज व दुकानों में साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा गया। बिना लाइसेंस के कारोबार करने वाले विक्रेताओं को नोटिस भी जारी किए गए हैं।

विभाग ने आम जनता से अपील की है कि फल खरीदते समय सावधानी बरतें। अस्वाभाविक रूप से चमकदार, एक जैसे रंग वाले या संदिग्ध फल न खरीदें। किसी भी दुकान पर गड़बड़ी दिखने पर टोल फ्री नंबर पर शिकायत दर्ज कराने को कहा गया है।

खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई

खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम में खाद्य सुरक्षा अधिकारी, सैंपलिंग असिस्टेंट और नगर निगम का अमला शामिल था। अधिकारियों ने बताया कि अभियान अगले दो दिनों तक शहर के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की मंडियों और थोक बाजारों में भी जारी रहेगा।

जांच रिपोर्ट आने के बाद दोषी दुकानदारों पर खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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