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छत्तीसगढ़

बीजापुर में IED ब्लास्ट…एक जवान शहीद, 3 जख्मी:सर्चिंग पर निकली थी DRG की टीम, पैर रखते ही फटा, प्रेग्नेंट पत्नी-बेटे ने दी अंतिम विदाई

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बीजापुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बीजापुर में नक्सलियों के लगाए गए प्रेशर IED की चपेट में आने से DRG का एक जवान शहीद हो गया है। जबकि 3 जवान घायल हैं। घायलों का जिला अस्पताल में इलाज जारी है। बता दें कि रविवार सुबह DRG की टीम नक्सल विरोधी अभियान पर सर्चिंग पर निकली थी।

इसी दौरान प्रेशर आईईडी पर पैर रखते ही ब्लास्ट हो गया जिसमें DRG जवान दिनेश नाग (38) शहीद हो गए। घटना भोपालपट्नम थाना इलाके की है।

जानकारी के मुताबिक, 17 अगस्त को बीजापुर के नेशनल पार्क क्षेत्र में DRG की टीम नक्सली विरोधी अभियान पर निकली थी। सर्चिंग के दौरान भोपालपट्नम इलाके के उल्लूर के जंगल में 18 अगस्त की सुबह IED ब्लास्ट हो गया।

शहीद जवान को बीजापुर में अंतिम विदाई दी गई। शहीद वाटिका में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। बता दें कि शहीद दिनेश नाग की पत्नी पूजा 4 माह की गर्भवती है। उनका एक लड़का है, जो 8 साल का है।

शहीद जवान को बीजापुर में अंतिम विदाई दी गई। शहीद वाटिका में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

शहीद जवान को बीजापुर में अंतिम विदाई दी गई। शहीद वाटिका में गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।

शहीद दिनेश नाग की पत्नी पूजा 4 माह की गर्भवती है। पति को अंतिम विदाई देते हुए।

शहीद दिनेश नाग की पत्नी पूजा 4 माह की गर्भवती है। पति को अंतिम विदाई देते हुए।

शहीद का 8 साल का बेटा है। बेटे ने पिता को नमन किया और अंतिम विदाई दी।

शहीद का 8 साल का बेटा है। बेटे ने पिता को नमन किया और अंतिम विदाई दी।

शहीद जवान दिनेश नाग बीजापुर जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 15 के रहने वाले थे।

शहीद जवान दिनेश नाग बीजापुर जिला मुख्यालय के वार्ड क्रमांक 15 के रहने वाले थे।

नक्सल ऑपरेशन के दौरान की शहीद जवान दिनेश नाग की फोटो।

नक्सल ऑपरेशन के दौरान की शहीद जवान दिनेश नाग की फोटो।

भोपालपट्नम के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती जवान, घटना के बारे में दी जानकारी ।

भोपालपट्नम के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती जवान, घटना के बारे में दी जानकारी ।

ब्लास्ट के बाद घायल जवान को एम्बुलेंस के जरिए लाया गया जिला अस्पताल।

ब्लास्ट के बाद घायल जवान को एम्बुलेंस के जरिए लाया गया जिला अस्पताल।

घायल जवानों को एम्बुलेंस में ही चढ़ाया गया ड्रिप।

घायल जवानों को एम्बुलेंस में ही चढ़ाया गया ड्रिप।

ब्लास्ट में 3 जवान घायल

जबकि 3 जवान घायल हुए हैं। घायल जवानों की स्थिति सामान्य और खतरे से बाहर है। शुरुआती इलाज के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए जगदलपुर रेफर किया जा सकता है। पुलिस अफसरों ने बाद में विस्तार से जानकारी देने की बात कही है।

6 अगस्त को 1 नक्सली ढेर

बता दें कि इससे पहले बीजापुर जिले में 6 अगस्त को जवानों ने मुठभेड़ में एक नक्सली को ढेर किया था। मारे गए नक्सली का शव और हथियार बरामद कर लिया गया था। मामला गंगालूर थाना इलाके का है।

वहीं बीजापुर में एनकाउंटर के डर से एक महिला नक्सली समेत 9 नक्सलियों ने सरेंडर किया था। 9 नक्सलियों में से 6 नक्सलियों पर 24 लाख रुपए का इनाम घोषित हैं। इनमें एक नक्सली 8 लाख और दो 5-5 लाख के साथ तीन नक्सली 2-2 लाख रुपए के इनामी हैं।

26 जुलाई को मारे गए थे 17 लाख के 4 इनामी

इसके पहले बीजापुर जिले के बासागुड़ा इलाके में 26 जुलाई की शाम 17 लाख रुपए के इनामी 4 नक्सली मारे गए थे। इनमें 2 महिला और 2 पुरुष नक्सली शामिल हैं। सभी के शव, INSAS, SLR समेत बड़ी संख्या में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए।

पुलिस के मुताबिक जिले के दक्षिण-पश्चिमी जंगलों में नक्सलियों की मौजूदगी की पुख्ता जानकारी मिली थी। इसी के आधार पर सुरक्षाबलों ने इलाके में सर्च ऑपरेशन शुरू किया था। एनकाउंटर में 4 हार्डकोर नक्सली मारे गए थे।

18 जुलाई को मारे गए थे 6 नक्सली

इसके पहले 18 जुलाई को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों का एनकाउंटर किया था। मुखबिर की सटीक सूचना पर सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम सर्चिंग पर निकली थी। जहां फोर्स ने माओवादियों को घेर कर मार गिराया।

बारिश के मौसम में भी नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन मानसून जारी है। इस दौरान पुलिस का नक्सलियों से सामना हुआ। दोनों तरफ से फायरिंग हुई थी। जवानों ने जवाबी कार्रवाई में नक्सलियों को ढेर कर दिया। एनकाउंटर वाली जगह से AK-47 और SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार भी बरामद हुए थे।

18 जुलाई को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों को ढेर किया था।

18 जुलाई को नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ में जवानों ने 6 नक्सलियों को ढेर किया था।

बारिश के मौसम में भी नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन मानसून जारी है। ये तस्वीर अबूझमाड़ एनकाउंटर के बाद की है।

बारिश के मौसम में भी नक्सलियों के खिलाफ ऑपरेशन मानसून जारी है। ये तस्वीर अबूझमाड़ एनकाउंटर के बाद की है।

अबूझमाड़ में एनकाउंटर वाली जगह से AK-47 और SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए थे।

अबूझमाड़ में एनकाउंटर वाली जगह से AK-47 और SLR जैसे ऑटोमैटिक हथियार बरामद हुए थे।

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छत्तीसगढ़

बिलासपुर में 331 मीटर टनल में अब नहीं टूटेगा सिग्नल:रेलवे ने भनवारटंक की सुरंग में पहली बार कम्युनिकेशन-सिस्टम किया इंस्टॉल,हादसों का जोखिम हुआ कम

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बिलासपुर,एजेंसी। SECR ने सुरक्षा और तकनीक में एक नई सफलता हासिल की है। बिलासपुर रेल मंडल के भनवारटंक स्टेशन और इसके आस-पास के खतरनाक अप और डाउन 331 मीटर लंबे टनल में सिग्नल समस्या को हमेशा के लिए समाप्त कर दिया है।

100 साल से भी अधिक पुराने दोनों हाई रिस्क टनल हैं, जिसमें रेलवे ने आधुनिक कम्युनिकेशन सिस्टम की सफल कमीशनिंग की है। इस तकनीक के बाद अब पहाड़ों के बीच से निकलने वाली ट्रेनों और वहां काम करने वाले स्टाफ के बीच जीरो गैप कनेक्टिविटी रहेगी। इस सिग्नलिंग सिस्टम में पहाड़ों के बीच भी भरपूर सिग्नल मिलेगा।

दरअसल, ब्रिटिश शासन काल में भनवारटंक रेलवे स्टेशन के बाद दो पहाड़ों के बीच की 115 फीट की गहराई पर पुल बनाकर सुरंग बनाई गई है। छत्तीसगढ़ के सबसे ऊंचे पहाड़ों को काटकर बनाई गई सुरंग में ट्रेनों को 10 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से निकाला जाता है। ताकि हादसे का कोई खतरा न हो।

अब SECR के जीएम तरूण प्रकाश के मार्गदर्शन में रेलवे की यह प्रणाली सुरक्षित और स्मार्ट रेल परिवहन की दिशा में बड़ी सफलता है। इससे न केवल परिचालन दक्षता बढ़ेगी, बल्कि रखरखाव कार्यों में लगे कर्मचारियों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी।

भनवारटंक रेलवे स्टेशन।

भनवारटंक रेलवे स्टेशन।

क्यों खास है यह हाईटेक तकनीक

आमतौर पर रेल सुरंगों के भीतर जाते ही मोबाइल और वॉकी-टॉकी के सिग्नल फेल हो जाते हैं, जो आपात स्थिति में बड़ा खतरा साबित होता है। नई प्रणाली में लीकी केबल और ऑप्टिकल फाइबर का ऐसा जाल बिछाया गया है, जो रेडियो तरंगों को सुरंग के आखिरी कोने तक पहुंचाता है।

ऐसे काम करेगा यह डिजिटल कवच

स्टेशन पर एक मुख्य यूनिट यानी मास्टर यूनिट लगाई गई है, जो सिग्नल को कंट्रोल करेगी। सुरंग के भीतर रिमोट यूनिट्स लगाई गई हैं, जो ऑप्टिकल सिग्नल को फिर से रेडियो सिग्नल में बदलकर रेलकर्मियों के हैंडहेल्ड सेट तक पहुंचाएंगी। सिस्टम फेल न हो, इसके लिए हाई-कैपेसिटी यूपीएस और एडवांस ग्राउंडिंग सिस्टम तक लगाया गया है।

भनवारटंक रेलवे टनल।

भनवारटंक रेलवे टनल।

वीएचएफ बैंड पर काम करेगा सिग्नल

यह सिस्टम 146–163 मेगाहर्ट्ज के वीएचएफ बैंड पर काम करता है। इस फ्रीक्वेंसी के जरिए दुर्घटना या खराबी की स्थिति में टनल के अंदर से भी तुरंत स्टेशन मास्टर और ड्राइवर से संपर्क साधा जा सकेगा हो सकेगा। किसी भी तकनीकी खराबी का पता सॉफ्टवेयर के जरिए दूर बैठे ही लगाया जा सकेगा।

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छत्तीसगढ़

गर्भस्थ शिशु की मौत, डॉक्टर्स पर भड़कीं मंत्री राजवाड़े:बोलीं- मेरा ब्लड ले लो, सूरजपुर अस्पताल में खून की कमी से रुका प्रसूता का ट्रीटमेंट

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सूरजपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिला अस्पताल में भर्ती गर्भवती महिला के गर्भस्थ शिशु की मौत हो गई। इसके बाद अस्पताल में इलाज में लापरवाही की जानकारी मिलने पर महिला-बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल पहुंचीं। लापरवाही और दुर्व्यवहार के मामले में उन्होंने सिविल सर्जन और डॉक्टरों को फटकार लगाई।

जानकारी के अनुसार, महिला को गंभीर हालत में शनिवार को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जांच के बाद रविवार को पता चला कि गर्भस्थ शिशु की मौत हो चुकी है और उसका ऑपरेशन कर मृत शिशु को निकालना आवश्यक था, लेकिन अस्पताल में ब्लड की कमी बताते हुए उसका इलाज शुरू नहीं किया गया, जिस पर लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि मेरा ब्लड ले लो और इलाज करो।

इस मामले में सूरजपुर के सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा ने डॉक्टर निकिता को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।

जिला अस्पताल में अव्यवस्था पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल ने नाराजगी जताई।

जिला अस्पताल में अव्यवस्था पर मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े अस्पताल ने नाराजगी जताई।

शिकायत मिली तो सीधे हॉस्पिटल पहुंचीं मंत्री

सोमवार को मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े को मरीज का इलाज शुरू न होने की शिकायत मिली, जिसके बाद वे शाम को अस्पताल पहुंचीं। उनके पहुंचते ही सीएस डॉ. मरकाम सहित अन्य चिकित्सक मौके पर मौजूद हो गए।

मंत्री ने इलाज में लापरवाही पर सीएस को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही डॉक्टरों और नर्सों के दुर्व्यवहार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि इससे पूरी चिकित्सा व्यवस्था की छवि खराब हो रही है।

दरअसल, परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन से मदद मांगी थी, लेकिन उन्हें दुर्व्यवहार का सामना करना पड़ा। शिकायत भाजपा नेताओं तक पहुंची तो उन्होंने डॉक्टर से संपर्क किया, जिस पर डॉक्टर ने कथित तौर पर कहा-मंत्री या विधायक को बुला लो, कुछ नहीं होगा।

लापरवाही पर मंत्री ने सिविल सर्जन और अन्य स्टाफ को जमकर फटकार लगाई।

लापरवाही पर मंत्री ने सिविल सर्जन और अन्य स्टाफ को जमकर फटकार लगाई।

मंत्री ने कहा- व्यवस्था सुधारें, यह बर्दाश्त नहीं

लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि अस्पताल की व्यवस्था में सुधार किया जाए। पहले भी कई शिकायतें मिल चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़े तो मेरा ब्लड निकाल लो, लेकिन मरीज का इलाज तुरंत होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने अस्पताल में फैली बदबू और गंदगी पर भी अपनी नाराजगी जताई।

पहले भी सामने आ चुकी है लापरवाही

सूरजपुर अस्पताल में इलाज में लापरवाही के आरोप पहले भी लग चुके हैं। इलाज न करने और हालत बिगड़ने पर अंबिकापुर रेफर करने की दो घटनाओं में प्रसूता और नवजात की मौत हो चुकी है। इन मामलों में केवल नर्सों पर कार्रवाई की गई।

सीएमएचओ बोले- प्रसूता की हालत खतरे से बाहर

सूरजपुर सीएमएचओ डॉ. अनिल पैकरा के अनुसार गर्भवती महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसमें खून की कमी थी। गर्भ में ही शिशु की मौत हो चुकी थी, इसलिए अबॉर्शन के लिए ब्लड की जरूरत थी।

सीएमएचओ ने बताया कि महिला का अबॉर्शन कर दिया गया है और एक यूनिट ब्लड चढ़ाया जा चुका है। अब वह खतरे से बाहर है, हालांकि एक यूनिट और ब्लड चढ़ाया जाना है। डॉक्टर निकिता की ड्यूटी ब्लड बैंक में है। उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया गया है।

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छत्तीसगढ़

4 करोड़ 61 लाख का गांजा और नशीली-टैबलेट पकड़ाया:ड्राई-फ्रूट और पैकर्स की आड़ में तस्करी,महासमुंद में छत्तीसगढ़-ओडिशा और MP-UP के 13 अंतरराज्यीय तस्कर गिरफ्तार

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महासमुंद,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में पुलिस ‘ऑपरेशन निश्चय’ चल रही है। जिसके तहत सोमवार को महज 10 घंटे के अंदर 4 थाना इलाके से 6 क्विंटल 85 किलो गांजा और 700 नशीली टैबलेट बरामद किया है। जिसकी कीमत 4 करोड़ 61 लाख रुपए है। 13 तस्करों को भी गिरफ्तार किया गया, जिसमें से 7 दूसरे राज्य के निवासी हैं।

यह कार्रवाई बसना, कोमाखान, सिंघोड़ा और महासमुंद थाना क्षेत्रों में की गई है। गिरफ्तार आरोपी छत्तीसगढ़, ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के रहने वाले हैं। यह आरोपी ड्राई फ्रूट से भरे ट्रक, घरेलू सामान, पैकर्स एंड मूवर्स की आड़ तस्करी कर रहे थे।

नशीली दवाओं के साथ गिरफ्तार हुए आरोपी।

नशीली दवाओं के साथ गिरफ्तार हुए आरोपी।

गांजे के साथ पकड़ाए आरोपी।

गांजे के साथ पकड़ाए आरोपी।

इस कार्रवाई से ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से जुड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

इस कार्रवाई से ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से जुड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है।

इन 4 थाना इलाके में हुई कार्रवाई

कोमाखान थाना: एनएच-353 टेमरी नाका पर नाकाबंदी के दौरान ट्रक क्रमांक सीजी 04 एनजे 9286 से 25 किलो गांजा जब्त किया गया। एमपी के मोहित साहू (27) और पुष्पेन्द्र साहू (21) को गिरफ्तार किया गया।

इसी थाने की टीम ने डिजायर कार क्रमांक जेएच 01 एफजेड 4071 से 200 किलो गांजा बरामद किया। इस कार में उत्तर प्रदेश के 3 आरोपी सवार थे। पकड़े गए गांजे की कीमत 1.08 करोड़ रुपए बताई गई है।

बसना थाना: पैकर्स एंड मूवर्स एंड पैकर्स कंपनी के बोलेरो पिकअप में रायगढ़ से घरेलू सामान हैदराबाद ले जाने के लिए निकले थे। लेकिन बीच में ओडिशा से सामान के नीचे 454.890 किलो गांजा छिपाकर ले जा रहे थे।

पिकअप चालक इमरान (37) राजस्थान का रहने वाला है। पुलिस ने आरोपी से एक मोबाइल और 10 हजार कैश समेत 2.38 करोड़ रुपए का गांजा बरामद किया है।

सिंघोड़ा थाना: नेशनल हाईवे 53 रेहटीखोल से बाइक सीजी 11 एजेड 3766 में सवार बलौदा जिला जांजगीर-चांपा निवासी देवचरण रात्रे (46) और पेटूपाली बरगढ़ ओडिशा निवासी किशोर राउतिया (25) बैग में 6 किलो गांजा ले जा रहे थे। जब्त गांजे की कीमत 3 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने आरोपी से दो मोबाइल भी जब्त किया है।

सिटी कोतवाली महासमुंद: रेलवे स्टेशन के पास रेड कार्रवाई में पुलिस ने 700 नग नशीली दवाई जब्त की है। पुलिस 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। राकेश कुमार (32), मनोज कुमार सोनबेर (33), सद्दाम कुरेशी (32), रिंकू चंद्राकर (34) और कामेश चंद्राकर (30) सभी महासमुंद निवासी शामिल है।

एनएच-353 टेमरी नाका पर नाकाबंदी के दौरान ट्रक क्रमांक सीजी 04 एनजे 9286 से 25 किलो गांजा जब्त किया गया।

एनएच-353 टेमरी नाका पर नाकाबंदी के दौरान ट्रक क्रमांक सीजी 04 एनजे 9286 से 25 किलो गांजा जब्त किया गया।

पुलिस ने कारें और बाइक-ट्रक किया जब्त

पुलिस ने सिर्फ गांजे की अनुमानित कीमत 3 करोड़ 42 लाख 50 हजार रुपए आंकी है। इसके अलावा, तस्करी में इस्तेमाल एक ट्रक, एक पिकअप, दो कार और एक बाइक समेत कई सामग्रियों को जब्त किया है। जिसकी कुल कीमत 4 करोड़ 61 लाख 67 हजार 506 रुपए बताई गई है।

ऐसे आड़ में करते थे तस्करी

पुलिस जांच में सामने आया है कि, तस्कर नशे की खेप पहुंचाने के लिए कई तरीकों का इस्तेमाल कर रहे थे। इनमें ड्राई फ्रूट से भरे ट्रक, घरेलू सामान, पैकर्स एंड मूवर्स की आड़, कार, बाइक और ट्रेन जैसे माध्यम शामिल थे। हालांकि, पुलिस की सतर्कता के कारण उनके सभी प्रयास विफल रहे।

4 राज्यों से जुड़ा नेटवर्क

इस कार्रवाई से ओडिशा, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश से जुड़े अंतरराज्यीय तस्करी नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कुछ मामलों में थोक विक्रेताओं, सप्लायरों और लॉजिस्टिक कोऑर्डिनेटरों को भी गिरफ्तार किया है, जबकि कुछ आरोपी अभी फरार बताए जा रहे हैं। इस बड़े ऑपरेशन में बिलासपुर पुलिस और रायपुर कमिश्नरेट की क्राइम ब्रांच ने भी मदद की है।

3 महीने में बड़ी सफलताएं

महासमुंद पुलिस ने पिछले 3 महीने में 63 केस दर्ज कर 4054.350 किलो गांजा जब्त कर चुकी है। 165 आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें 117 अन्य राज्यों के हैं। पुलिस अधीक्षक प्रभात कुमार के अनुसार, जिले में नशे के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। तस्करों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने के लिए सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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