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पीएम मोदी ने अजमेर दरगाह के लिए भेजी चादर, मुस्लिम समुदाय के लोगों से कहा- विविधताओं में एकता के साथ बढ़ रहा हमारा देश

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नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बृहस्पतिवार को मुस्लिम समुदाय के सदस्यों के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की और उन्हें एक चादर भेंट की जिसे उनकी ओर से अजमेर में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह पर चढ़ाया जाएगा। प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ”मुस्लिम समुदाय के एक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात की। इस दौरान मैंने पवित्र चादर पेश की, जिसे ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती के उर्स के दौरान मशहूर अजमेर शरीफ दरगाह पर चढ़ाया जाएगा। इस मुलाकात के दौरान अल्पसंख्यक कार्य मंत्री स्मृति ईरानी और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अल्पसंख्यक मोर्चा के अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी, दिल्ली हज कमेटी की अध्यक्ष कौसर जहां, उत्तर प्रदेश विधान परिषद के सदस्य तारिक मंसूर तथा कुछ अन्य लोग मौजूद थे। प्रधानमंत्री मोदी ने अजमेर शरीफ के लिए चादर भेंट की स्मृति ईरानी ने ‘एक्स पर पोस्ट किया, ”हजऱत ख़्वाजा गरीब नवाज़ के 812वें उर्स के मौके पर, आदरणीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने आज मुस्लिम समाज से आए हुए लोगों को चादर सुपुर्द की। उन्होंने कहा, ”हमारा देश विविधता में एकता का उत्सव मनाते हुए आज तेज़ गति से आगे बढ़ रहा है। सूफी संतों के आशीर्वाद से देश इसी तरह तरक्की करे और देशवासियों के जीवन में सेहत-सलामती बरकरार रहे।

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‘Crude Oil सस्ता, फिर भी जनता की जेब काट रही है BJP,’ कांग्रेस के रणदीप सुरजेवाला ने ईंधन की कीमतों में ताज़ा बढ़ोतरी पर केंद्र पर बोला हमला

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सोमवार को ईंधन की कीमतों में ताज़ा बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला और उस पर आरोप लगाया कि वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद वह आम आदमी की “जेब काट रही है”। सुरजेवाला ने पत्रकारों से कहा, “आज कच्चे तेल की कीमत गिरकर 98.6 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल हो गई है। BJP पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में 2.71 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी करके आम आदमी की जेब काट रही है। हमारे पास इस बारे में एक बड़ा खुलासा है।”उनकी यह टिप्पणी सोमवार को पेट्रोल और डीज़ल की कीमतों में एक बार फिर बढ़ोतरी के बाद आई है।

वैश्विक कच्चे तेल के बाज़ारों में लगातार उतार-चढ़ाव और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के बीच, दो हफ़्ते से भी कम समय में यह चौथी बढ़ोतरी है। ताज़ा संशोधन के बाद, दिल्ली में पेट्रोल की कीमतें 100 रुपये के आंकड़े को पार कर गईं; इसमें 2.61 रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 102.12 रुपये प्रति लीटर हो गया, जबकि डीज़ल की कीमतों में 2.71 रुपये की बढ़ोतरी हुई और यह 95.20 रुपये प्रति लीटर हो गया। कोलकाता, मुंबई और चेन्नई में भी इसी तरह की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिससे उपभोक्ताओं और परिवहन संचालकों पर बोझ और बढ़ गया।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया के दिल्ली के निर्धारित दौरे के बारे में पूछे जाने पर, सुरजेवाला – जो कर्नाटक में पार्टी के प्रभारी हैं – ने इस बैठक के उद्देश्य को लेकर लगाई जा रही अटकलों को खारिज कर दिया और इसे राज्यसभा चुनावों को लेकर पार्टी के चल रहे विचार-विमर्श से जोड़ा। उन्होंने कहा, “राज्यसभा चुनावों की अधिसूचना जारी हो चुकी है। पार्टी लगातार विचार-विमर्श कर रही है। इसलिए कृपया अटकलें न लगाएं। मैं अन्य सभी अटकलों को खारिज करता हूं।” मुख्यमंत्री सिद्धारमैया 26 मई को राष्ट्रीय राजधानी में कांग्रेस नेतृत्व से मिलने वाले हैं। राज्य में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर फिर से शुरू हुई अटकलों के बीच, कांग्रेस के केंद्रीय नेतृत्व ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को मंगलवार को दिल्ली बुलाया है।

राष्ट्रीय राजधानी से यह बुलावा कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के तीन साल पूरे होने के मौके पर आया है, और यह ऐसे समय में आया है जब मुख्यमंत्री पद को लेकर सिद्धारमैया और उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। सूत्रों ने बताया कि इस दौरे के दौरान मुख्यमंत्री राहुल गांधी से मुलाकात करने वाले हैं। इस बात की संभावना है कि मुख्यमंत्री आगामी राज्यसभा चुनावों पर चर्चा करेंगे।
इस बैठक के असली मकसद को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। इस बैठक में आगामी विधान परिषद चुनावों की तैयारियों पर भी चर्चा हो सकती है। पिछले 18 महीनों से, शिवकुमार के समर्थक बार-बार यह दावा करते रहे हैं कि वह जल्द ही मुख्यमंत्री का पद संभाल लेंगे, हालांकि अभी तक ऐसा कोई बदलाव नहीं हुआ है।

पार्टी के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने कहा, “पिछले तीन सालों से एक ही बात दोहराई जा रही है।” बताया जा रहा है कि राज्य इकाई के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, और कई नेता आलाकमान से आग्रह कर रहे हैं कि इस असमंजस को जल्द से जल्द खत्म किया जाए। उनका तर्क है कि यह लंबे समय से बनी अनिश्चितता कर्नाटक में पार्टी की छवि को नुकसान पहुंचा रही है। अब तक, केंद्रीय नेतृत्व ने विभिन्न कारणों का हवाला देते हुए कोई भी अंतिम फैसला लेने से परहेज किया है। सिद्धारमैया को 26 मई को दिल्ली बुलाया गया है, ऐसे में अब सभी की निगाहें आलाकमान के साथ होने वाली उनकी बैठक के नतीजों पर टिकी हैं।

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ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी के बाद तेल कंपनियों का घाटा कम होकर 600 करोड़ रुपए प्रतिदिन पर

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नई दिल्ली, एजेंसी। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय में संयुक्त सचिव सुजाता शर्मा ने सोमवार को कहा कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार चरणों में हुई करीब 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी से सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों का घाटा कम होकर लगभग 600 करोड़ रुपए प्रतिदिन रह गया है। संयुक्त सचिव ने कहा कि 15 मई से शुरू हुए मूल्य संशोधन से पहले पेट्रोल, डीजल और घरेलू रसोई गैस एलपीजी की बिक्री पर तेल कंपनियों को करीब 1,000 करोड़ रुपये प्रतिदिन का घाटा हो रहा था। 

शर्मा ने कहा, “घाटा अब कम होकर प्रतिदिन 600 करोड़ रुपए से थोड़ा कम रह गया है।” उन्होंने बताया कि इसमें घरेलू एलपीजी की बिक्री पर होने वाला घाटा भी शामिल है। घरेलू रसोई गैस एलपीजी रियायती दर पर बेची जाती है और लागत तथा खुदरा बिक्री मूल्य के बीच का अंतर सरकार वहन करती है। पेट्रोल और डीजल को बाजार आधारित मूल्य निर्धारण वाले उत्पाद माना जाता है। ईरान युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमतों में 50 प्रतिशत से अधिक वृद्धि होने के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों ने खुदरा कीमतों में लंबे समय तक बदलाव नहीं किया, जिससे इन उत्पादों पर घाटा बढ़ता गया।  

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7.50 रुपए बढ़ने के बाद भी नुकसान में तेल कंपनियां, आगे और महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल

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मुंबई, एजेंसी। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बावजूद देश में पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद फिलहाल कम नजर आ रही है। सरकारी तेल कंपनियां पिछले 10 दिनों में ईंधन के दाम करीब 7.50 रुपए प्रति लीटर तक बढ़ा चुकी हैं लेकिन इसके बावजूद कंपनियों पर लागत का भारी दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती आयात लागत, शिपिंग खर्च और पुराने घाटे की भरपाई के चलते आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में और बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

क्यों कम नहीं होंगे पेट्रोल-डीजल के दाम?

मार्केट एक्सपर्ट्स और ब्रोकरेज रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान-अमेरिका तनाव के दौरान कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 114 डॉलर तक पहुंच गई थीं। इस दौरान तेल कंपनियों ने करीब ढाई महीने तक खुद बढ़ी हुई लागत का बोझ उठाया और कीमतों में तत्काल बढ़ोतरी नहीं की।

विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की लागत में करीब 39% तक उछाल आया, जबकि घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में अब तक सीमित बढ़ोतरी ही की गई है। ऐसे में कंपनियों को अपना पूरा घाटा वसूलने के लिए कीमतों में सैद्धांतिक रूप से 11-14 रुपए प्रति लीटर की ओर बढ़ोतरी करनी पड़ सकती है।

शिपिंग और बीमा लागत भी बढ़ी

हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में फिलहाल गिरावट आई है लेकिन पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। इसके चलते समुद्री मार्गों पर तेल परिवहन महंगा हो गया है।

अमेरिका और उत्तरी यूरोप से आने वाले तेल टैंकरों के बीमा प्रीमियम और माल ढुलाई खर्च में बढ़ोतरी हुई है। माना जा रहा है कि इन अतिरिक्त लागतों का असर भी आगे चलकर खुदरा ईंधन कीमतों पर पड़ सकता है।

अब भी नुकसान में तेल कंपनियां

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालिया बढ़ोतरी के बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर प्रति लीटर करीब 10 रुपए और डीजल पर 13 रुपए तक का नुकसान हो रहा है। लगातार बढ़ते घाटे के चलते कंपनियों के सामने कीमतें बढ़ाने के अलावा सीमित विकल्प ही बचे हैं।

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