देश
एक्टर धर्मेंद्र अस्पताल से डिस्चार्ज:डॉक्टर बोले- परिवार घर पर इलाज चाहता है, सांस की दिक्कत के कारण 2 दिन पहले भर्ती हुए थे
मुंबई, एजेंसी। एक्टर धर्मेंद्र को बुधवार सुबह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उनके परिवार ने फैसला किया है कि अब उनका इलाज घर पर ही किया जाएगा। यह जानकारी उनके डॉक्टर ने दी।
मीडिया से बात करते हुए डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि धर्मेंद्र पिछले कई हफ्तों से कभी अस्पताल में भर्ती हो रहे थे, तो कभी घर लौट रहे थे। उन्हें सुबह करीब 7:30 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

डॉ. प्रतीत समदानी आंतरिक रोगों और गंभीर मरीजों की देखभाल (क्रिटिकल केयर) के विशेषज्ञ हैं।

ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज हुए धर्मेंद्र।
डिस्चार्ज के बाद परिवार ने प्राइवेसी की अपील की
वहीं, धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद परिवार ने प्राइवेसी की अपील करते हुए आधिकारिक बयान में कहा,
धर्मेंद्र जी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है और अब वे घर पर आराम करेंगे। हम मीडिया और लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और इस समय उनकी तथा परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करें। हम सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने धर्मेंद्र जी की अच्छी हेल्थ और लंबी उम्र के लिए दुआ की। कृपया उनका सम्मान करें क्योंकि वे आप सभी से बहुत प्यार करते हैं।
धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद जुहू में उनके घर वाली गली पुलिस ने बंद कर दी है, ताकि भीड़ जमा न हो सके।

डायरेक्टर गुड्डू धनोआ धर्मेंद्र के घर पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया धर्मेंद्र अब ठीक हैं।

प्रोड्यूसर असित मोदी, धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद उनके घर उनसे मिलने पहुंचे।

धर्मेंद्र की सलामती की दुआ मांगते हुए एक फैन ने पोस्टर पर ‘गेट वेल सून’ लिखा।
धर्मेंद्र 10 नवंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद से ही मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
सनी देओल की टीम ने मंगलवार को बताया था कि धर्मेंद्र की सेहत में सुधार आ रहा है। उनकी अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए दुआ करिए।
परिवार ने निधन की फर्जी खबरों पर नाराजगी जताई थी
इससे पहले 11 नवंबर की सुबह मीडिया में एक्टर की निधन की फर्जी खबर आई थी, जिसके बाद उनकी बेटी ईशा देओल और पत्नी हेमा मालिनी ने नाराजगी जताई थी।
ईशा ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा था-
मीडिया पूरी तरह गलत खबरें फैला रहा है। पापा की हालत स्थिर है और वे रिकवर कर रहे हैं। हम सभी से निवेदन करते हैं कि हमारे परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करें। पापा की जल्दी सेहतमंदी के लिए दुआ करने के लिए धन्यवाद।

हेमा मालिनी ने भी निधन की खबरें सामने आने के बाद नाराजगी जताते हुए लिखा था-
जो हो रहा है, वह माफ करने लायक नहीं है। जिम्मेदार चैनल किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में झूठी खबरें कैसे फैला सकते हैं जो इलाज का जवाब दे रहा है और ठीक हो रहा है? यह बेहद असम्मानजनक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। कृपया परिवार और उनकी निजता की आवश्यकता का सम्मान करें।

हेमा मालिनी ने 9 बजकर 40 मिनट पर धर्मेंद्र के निधन की खबरों पर नाराजगी जताई है।
मंगलवार सुबह धर्मेंद्र के निधन की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर शोक जताया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट हटा ली थी।

ये पोस्ट डिलीट हो चुकी है।

जावेद अख्तर ने भी धर्मेंद्र के निधन की खबर मिलने के बाद शोक व्यक्त किया।
अस्पताल में धर्मेंद्र से मिलने पहुंचे थे परिवार के सदस्य
मंगलवार की रात सनी देओल और बॉबी देओल दोनों पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। बॉबी अस्पताल से बाहर बेहद भावुक दिखे थे।

पिता से मिलने के बाद घर जाते बॉबी देओल।

अस्पताल से बाहर निकलते सनी देओल।

देर शाम बेटी ईशा और भतीजे अभय देओल के साथ अस्पताल से बाहर जातीं हेमा मालिनी।

बॉबी देओल अल्फा की शूटिंग बीच में छोड़ सोमवार देर रात ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचे थे।

सनी देओल सोमवार को बेहद भावुक दिखे थे।

सोमवार को सनी देओल के दोनों बेटे करण और राजवीर हॉस्पिटल पहुंचे थे।
धर्मेंद्र को देखने कई सेलेब्स ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचे थे-

आमिर खान गर्लफ्रेंड गौरी के साथ मंगलवार को धर्मेंद्र को देखने अस्पताल पहुंचे थे।

सलमान खान सोमवार को ही ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे।

शाहरुख खान भी बेटे आर्यन के साथ धर्मेंद्र का हाल जानने ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे।

गोविंदा भी सोमवार रात हॉस्पिटल पहुंचे थे।

अस्पताल से निकलते समय अमीषा पटेल भावुक नजर आईं।
31 अक्टूबर को भी हुए थे अस्पताल में भर्ती
धर्मेंद्र को 31 अक्टूबर को भी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्टर विक्की ललवानी ने अपनी पोस्ट में बताया था कि सांस लेने में तकलीफ होने के चलते धर्मेंद्र को ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। उन्हें ICU में रखा गया था। उनके सारे शरीर के पैरामीटर ठीक होने पर उन्हें कुछ ही घंटों में डिस्चार्ज कर दिया गया था।
इसी साल की शुरुआत में धर्मेंद्र की कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई थी। उनकी बाईं आंख की पारदर्शी परत यानी कॉर्निया डैमेज हो गई थी, जिसके बाद उनका कॉर्निया ट्रांसप्लांट (केराटोप्लास्टी) किया गया था।
धर्मेंद्र को साल 2015-2020 के बीच कई बार पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी की शिकायत हुई थी। उन्हें पीठ दर्द और थकान की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
जल्द रिलीज होगी धर्मेंद्र की फिल्म
धर्मेंद्र फिल्म इक्कीस में नजर आएंगे। ये फिल्म भारत-पाकिस्तान के बीच हुई जंग के यंग सोल्जर अरुण खेत्रपाल की कहानी है। अमिताभ बच्चन के नातिन अगस्त्य नंदा ने फिल्म में अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभाई है, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता एम.एल.खेत्रपाल के रोल में हैं।

एक नजर धर्मेंद्र के फिल्मी सफर पर-
धर्मेंद्र की कहानी शुरू होती है 1935 से…
ब्रिटिश इंडिया में पंजाब के गांव सहनेवाल के हेडमास्टर केवल किशन देओल के घर 8 दिसंबर 1935 को धर्मेंद्र का जन्म हुआ। जिन्हें नाम दिया गया था धरम केवल किशन। पंजाबी जट परिवार में धर्मेंद्र का बचपन सहनेवाल में ही बीता। जिस गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में उनके पिता हैडमास्टर थे, वहीं से धर्मेंद्र ने पढ़ाई की। धर्मेंद्र जब दसवीं में थे तब उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म ‘शहीद’ देखी। उन्हें फिल्म इस कदर पसंद आई कि उन्होंने खुद भी हीरो बनने का फैसला कर लिया।
धर्मेंद्र करीब 19 साल के ही थे, जब 1954 में उनके पिता ने उनकी शादी प्रकाश कौर से करवा दी। इसी समय एक दिन अखबार में फिल्मफेयर मैगजीन एक टेलेंट हंट कॉम्पिटिशन का इश्तिहार पढ़ा। इसमें जीतने वाले को फिल्मों में काम मिलने वाला था। नई-नई शादी हुई थी, तो उनके लिए पत्नी को छोड़कर मुंबई जाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने घरवालों को मना ही लिया।

पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ धर्मेंद्र। इस शादी से उन्हें 4 बच्चे सनी, बॉबी, अजेता, विजेता हैं।
धर्मेंद्र चंद रुपए लेकर बॉम्बे (अब मुंबई) पहुंचे और देशभर से आए युवाओं को मात देकर कॉम्पिटिशन जीत गए। शर्त के अनुसार विजेता धर्मेंद्र को फिल्म दी जाने वाली थी, लेकिन उनके साथ कोई फिल्म नहीं बनाई गई। हीरो बनने के लिए धर्मेंद्र बॉम्बे में ही रुके और गुजारे के लिए नौकरी ढूंढ ली। उन्होंने एक ड्रिलिंग फर्म में नौकरी की जहां उनकी तनख्वाह थी 200 रुपए। नौकरी के साथ-साथ वो कई प्रोड्यूसर्स के दफ्तरों के चक्कर काटा करते थे।
मामूली तनख्वाह से कभी भरपेट खाना मिल जाता था, तो कभी खाली पेट ही सो जाया करते थे। ऐसे ही एक रोज धर्मेंद्र काम से लौटे तो भूख से बेहोशी आने लगी। न घर में खाना था, न पैसे। भूख से तड़पते हुए धर्मेंद्र की नजर टेबल पर पड़े इसबगोल के पैकेट पर पड़ गई। उन्हें कुछ नहीं सूझा और उन्होंने पूरा पैकेट एक ग्लास पानी में घोलकर गटक लिया। चंद मिनटों के लिए भूख तो शांत हुई, लेकिन उसके बाद इसबगोल ने अपना काम शुरू कर दिया। आम तौर पर इसबगोल को कब्ज मिटाने या पाचन के लिए इस्तेमाल किया जाता था। धर्मेंद्र के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया और उन्हें दस्त लग गए। कुछ घंटों के इंतजार के बाद उनके साथ रहने वाले रूम पार्टनर ने गंभीरता से समझते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जब डॉक्टर को पूरा हाल बताया तो डॉक्टर ने हंसते हुए कहा, इन्हें दवा की नहीं खाने की जरूरत है।
इसी तंगी के दौर में मशक्कत करते हुए उन्हें अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे मिल गई। इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र 51 रुपए मिले थे। वो अर्जुन हिंगोरानी के गैरेज में रहते थे। कुछ समय बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई। शूटिंग चल ही रही थी कि धर्मेंद्र को पीलिया हो गया। वजन घट गया और जब रिकवरी के बाद दोबारा शूटिंग शुरू हुई तो उनका चेहरा मुरझा चुका था। एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने बताया कि जब वो फिल्म के प्रीमियर में पहुंचे तो खुद की शक्ल नहीं पहचान पा रहे थे। अपने लुक से निराश होकर वो फिल्म आधी भी नहीं देख सके और थिएटर छोड़कर निकल गए। उन्हें लगा कि उन्हें कोई पसंद नहीं करेगा, लेकिन हुआ इसका उल्टा।

1960 में रिलीज हुई फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरा जबरदस्त हिट रही और पहली ही फिल्म से धर्मेंद्र को देशभर में पहचान मिल गई। पॉपुलैरिटी मिलते ही धर्मेंद्र को सूरत और सीरत (1962), अनपढ़ (1962), बंदिनी (1963), आई मिलन की बेला (1964), बहारें फिर आएंगी (1966), दिल ने फिर याद किया (1966), दुल्हन एक रात की (1967) जैसी कई हिट फिल्में मिलने लगीं। इन फिल्मों की बदौलत उन्हें 60 के दशक में रोमांटिक हीरो का दर्जा मिला।
फिल्म इंडस्ट्री में तो धर्मेंद्र नाम का हीरो पहचान बना चुका था, लेकिन उन्हें स्टार का दर्जा मिलना अभी बाकी था। ये काम किया मीना कुमारी ने। साल 1964 की फिल्म ‘मैं भी लड़की हूं’ में साथ नजर आए। पहली फिल्म से ही मीना कुमारी धर्मेंद्र को पसंद करने लगीं। उस समय मीना और उनके पति कमाल अमरोही के रिश्ते में दरार आ चुकी थी। मीना कुमारी अपने प्रोड्यूसर्स के सामने शर्त रख दिया करती थीं कि वो तब ही फिल्म की हीरोइन बनेंगी, जब धर्मेंद्र फिल्म के हीरो रहेंगे।
मीना कुमारी जैसी बड़ी एक्ट्रेस को कास्ट करने के लिए फिल्ममेकर्स उनकी हर शर्त मान लेते थे। धर्मेंद्र और मीना कुमारी फिल्म पूर्णिमा, काजल, मंझली दीदी, बहारों की मंजिल और फूल और पत्थर में साथ दिखे और धर्मेंद्र को स्टार का दर्जा मिल गया।
जिन दिलीप कुमार को देखकर हीरो बने, वो धर्मेंद्र जैसा बनना चाहते थे
1997 में 42वें फिल्मफेयर अवॉर्ड सेरेमनी में धर्मेंद्र को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया था। यह अवॉर्ड दिलीप कुमार ने खुद धर्मेंद्र को दिया और कहा- जब मैंने पहली बार धरम (धर्मेंद्र) को देखा, तो देखते ही मेरे दिल में उमंग पैदा हुई, अल्लाह मुझे ऐसा ही बनाया होता तो क्या जाता?

धर्मेंद्र को जब दिलीप कुमार ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया तो वे काफी भावुक हो गए थे।
देव आनंद भी चाहते थे धर्मेंद्र जैसी शक्ल
पहली बार जब देव आनंद ने धर्मेंद्र को देखा था, तो वे बोले थे कि हे भगवान तुमने ये शक्ल मुझे क्यों नहीं दी। इस बात का खुलासा डायरेक्टर अशोक त्यागी ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान किया। अशोक त्यागी ने कहा- ‘जब धरम जी मुंबई फिल्मफेयर कॉन्टेस्ट में भाग लेने आए थे, उस समय कॉन्टेस्ट में जितने लोग भाग लेने आए सभी कंटेस्टेंट्स को शूटिंग दिखाने के लिए ले जाया गया। उस समय देव साहब की फिल्म की शूटिंग चल रही थी।
देव साहब ने अशोक त्यागी को बताया था कि धर्मेंद्र को दूर भीड़ में खड़े देखकर बोले थे कि हे भगवान तुमने मुझे ये शक्ल क्यों नहीं दी। इतना ही नहीं, देव साहब दूर खड़े धर्मेंद्र की पर्सनैलिटी से इस कदर प्रभावित हुए कि उनको बुलाकर अपना लंच भी शेयर किया था।
देश
‘महिला आरक्षण बिल का समर्थन न करना विपक्ष की बड़ी राजनीतिक गलती है’: कैबिनेट बैठक में पीएम मोदी बोले
नई दिल्ली,एजेंसी। संसद में महिला आरक्षण बिल पर सत्ता पक्ष और विपक्ष में टकराव जारी है। प्रियंका गांधी ने महिला आरक्षण बिल को परिसीमन का धोखा बताया है। पीएम मोदी ने कैबिनेट बैठक में विपक्ष पर कड़ा प्रहार किया है। सूत्रों के मुताबिक, पीएम ने कहा है कि महिला आरक्षण बिल का समर्थन का इनकार विपक्ष की एक बड़ी राजनीतिक गलती है और इसके लिए उन्हें भविष्य में गंभीर परिणाम भुगतने पड़ेंगे।


देश
महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम
नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए
पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026
दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026
सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।
12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।
बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया
- राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
- प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
- शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
- एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।
संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।
सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की
सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।
पीएम की 3 अपील
- 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
- 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
- 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी
17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

देश
‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला
नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

थरुर ने अपने भाषण में कहा
शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”


थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

-
कोरबा2 years agoकटघोरा विधायक पुरूषोत्तम कंवर के गुर्गों द्वारा दिव्य आकाश कर्मियों पर हमला की कोशिश
-
Uncategorized7 months agoसुमेधा पुल पर लुट कांड सहित तीन अलग अलग जगह पर लुटकांड करने वाले आरोपी पुलिस के गिरफ्त में,,,दो आरोपी नाबालिक,,,देखे पूरी खबर
-
कोरबा2 years agoग्राम पंचायत पोड़ी के पूर्व सरपंच सचिव पर गबन के आधार पर अधिरोपित राशि 3341972/- रुपये शीघ्र वसूल हो- कय्युम बेग
-
कोरबा2 years agoकुसमुंडा खदान में डंपर पलट कर लगी आग, सरकारी गाड़ी में कोयला और डीजल चोर सवार थे, जलने से दोनों गंभीर
-
कोरबा2 years agoश्रीमती स्वाति दुबे का निधन
-
छत्तीसगढ़2 years agoबिलासपुर में अपोलो अस्पताल के 4 सीनियर डॉक्टर अरेस्ट
-
कोरबा2 years agoकटघोरा जनपद की 25 करोड़ की जमीन उनके करीबी कांग्रेसियों की 25 लाख में कैसे हो गई?
-
कोरबा2 years agoदर्री में 1320 मेगावाट विद्युत परियोजना के लिए नई सरकार गठन के बाद होगी पर्यावरणीय जनसुनवाई
