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एक्टर धर्मेंद्र अस्पताल से डिस्चार्ज:डॉक्टर बोले- परिवार घर पर इलाज चाहता है, सांस की दिक्कत के कारण 2 दिन पहले भर्ती हुए थे
मुंबई, एजेंसी। एक्टर धर्मेंद्र को बुधवार सुबह मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। उनके परिवार ने फैसला किया है कि अब उनका इलाज घर पर ही किया जाएगा। यह जानकारी उनके डॉक्टर ने दी।
मीडिया से बात करते हुए डॉ. प्रतीत समदानी ने बताया कि धर्मेंद्र पिछले कई हफ्तों से कभी अस्पताल में भर्ती हो रहे थे, तो कभी घर लौट रहे थे। उन्हें सुबह करीब 7:30 बजे अस्पताल से डिस्चार्ज किया गया।

डॉ. प्रतीत समदानी आंतरिक रोगों और गंभीर मरीजों की देखभाल (क्रिटिकल केयर) के विशेषज्ञ हैं।

ब्रीच कैंडी अस्पताल से डिस्चार्ज हुए धर्मेंद्र।
डिस्चार्ज के बाद परिवार ने प्राइवेसी की अपील की
वहीं, धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद परिवार ने प्राइवेसी की अपील करते हुए आधिकारिक बयान में कहा,
धर्मेंद्र जी को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है और अब वे घर पर आराम करेंगे। हम मीडिया और लोगों से अनुरोध करते हैं कि वे किसी तरह की अफवाह न फैलाएं और इस समय उनकी तथा परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करें। हम सभी का धन्यवाद करते हैं जिन्होंने धर्मेंद्र जी की अच्छी हेल्थ और लंबी उम्र के लिए दुआ की। कृपया उनका सम्मान करें क्योंकि वे आप सभी से बहुत प्यार करते हैं।
धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद जुहू में उनके घर वाली गली पुलिस ने बंद कर दी है, ताकि भीड़ जमा न हो सके।

डायरेक्टर गुड्डू धनोआ धर्मेंद्र के घर पहुंचे। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया धर्मेंद्र अब ठीक हैं।

प्रोड्यूसर असित मोदी, धर्मेंद्र के डिस्चार्ज होने के बाद उनके घर उनसे मिलने पहुंचे।

धर्मेंद्र की सलामती की दुआ मांगते हुए एक फैन ने पोस्टर पर ‘गेट वेल सून’ लिखा।
धर्मेंद्र 10 नवंबर को तबीयत बिगड़ने के बाद से ही मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे। उन्हें सांस लेने में तकलीफ थी। उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया था।
सनी देओल की टीम ने मंगलवार को बताया था कि धर्मेंद्र की सेहत में सुधार आ रहा है। उनकी अच्छी सेहत और लंबी उम्र के लिए दुआ करिए।
परिवार ने निधन की फर्जी खबरों पर नाराजगी जताई थी
इससे पहले 11 नवंबर की सुबह मीडिया में एक्टर की निधन की फर्जी खबर आई थी, जिसके बाद उनकी बेटी ईशा देओल और पत्नी हेमा मालिनी ने नाराजगी जताई थी।
ईशा ने सोशल मीडिया पर बयान जारी कर कहा था-
मीडिया पूरी तरह गलत खबरें फैला रहा है। पापा की हालत स्थिर है और वे रिकवर कर रहे हैं। हम सभी से निवेदन करते हैं कि हमारे परिवार की प्राइवेसी का सम्मान करें। पापा की जल्दी सेहतमंदी के लिए दुआ करने के लिए धन्यवाद।

हेमा मालिनी ने भी निधन की खबरें सामने आने के बाद नाराजगी जताते हुए लिखा था-
जो हो रहा है, वह माफ करने लायक नहीं है। जिम्मेदार चैनल किसी ऐसे व्यक्ति के बारे में झूठी खबरें कैसे फैला सकते हैं जो इलाज का जवाब दे रहा है और ठीक हो रहा है? यह बेहद असम्मानजनक और गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार है। कृपया परिवार और उनकी निजता की आवश्यकता का सम्मान करें।

हेमा मालिनी ने 9 बजकर 40 मिनट पर धर्मेंद्र के निधन की खबरों पर नाराजगी जताई है।
मंगलवार सुबह धर्मेंद्र के निधन की खबर मीडिया में आई थी। इसके बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सोशल मीडिया एक्स पर शोक जताया। हालांकि, बाद में उन्होंने अपनी पोस्ट हटा ली थी।

ये पोस्ट डिलीट हो चुकी है।

जावेद अख्तर ने भी धर्मेंद्र के निधन की खबर मिलने के बाद शोक व्यक्त किया।
अस्पताल में धर्मेंद्र से मिलने पहुंचे थे परिवार के सदस्य
मंगलवार की रात सनी देओल और बॉबी देओल दोनों पिता से मिलने अस्पताल पहुंचे थे। बॉबी अस्पताल से बाहर बेहद भावुक दिखे थे।

पिता से मिलने के बाद घर जाते बॉबी देओल।

अस्पताल से बाहर निकलते सनी देओल।

देर शाम बेटी ईशा और भतीजे अभय देओल के साथ अस्पताल से बाहर जातीं हेमा मालिनी।

बॉबी देओल अल्फा की शूटिंग बीच में छोड़ सोमवार देर रात ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचे थे।

सनी देओल सोमवार को बेहद भावुक दिखे थे।

सोमवार को सनी देओल के दोनों बेटे करण और राजवीर हॉस्पिटल पहुंचे थे।
धर्मेंद्र को देखने कई सेलेब्स ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल पहुंचे थे-

आमिर खान गर्लफ्रेंड गौरी के साथ मंगलवार को धर्मेंद्र को देखने अस्पताल पहुंचे थे।

सलमान खान सोमवार को ही ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे।

शाहरुख खान भी बेटे आर्यन के साथ धर्मेंद्र का हाल जानने ब्रीच कैंडी अस्पताल पहुंचे थे।

गोविंदा भी सोमवार रात हॉस्पिटल पहुंचे थे।

अस्पताल से निकलते समय अमीषा पटेल भावुक नजर आईं।
31 अक्टूबर को भी हुए थे अस्पताल में भर्ती
धर्मेंद्र को 31 अक्टूबर को भी अस्पताल में भर्ती करवाया गया था। रिपोर्टर विक्की ललवानी ने अपनी पोस्ट में बताया था कि सांस लेने में तकलीफ होने के चलते धर्मेंद्र को ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में भर्ती करवाया गया था। उन्हें ICU में रखा गया था। उनके सारे शरीर के पैरामीटर ठीक होने पर उन्हें कुछ ही घंटों में डिस्चार्ज कर दिया गया था।
इसी साल की शुरुआत में धर्मेंद्र की कॉर्निया ट्रांसप्लांट सर्जरी हुई थी। उनकी बाईं आंख की पारदर्शी परत यानी कॉर्निया डैमेज हो गई थी, जिसके बाद उनका कॉर्निया ट्रांसप्लांट (केराटोप्लास्टी) किया गया था।
धर्मेंद्र को साल 2015-2020 के बीच कई बार पीठ दर्द, मांसपेशियों में खिंचाव और कमजोरी की शिकायत हुई थी। उन्हें पीठ दर्द और थकान की वजह से अस्पताल में भर्ती होना पड़ा था।
जल्द रिलीज होगी धर्मेंद्र की फिल्म
धर्मेंद्र फिल्म इक्कीस में नजर आएंगे। ये फिल्म भारत-पाकिस्तान के बीच हुई जंग के यंग सोल्जर अरुण खेत्रपाल की कहानी है। अमिताभ बच्चन के नातिन अगस्त्य नंदा ने फिल्म में अरुण खेत्रपाल की भूमिका निभाई है, जबकि धर्मेंद्र उनके पिता एम.एल.खेत्रपाल के रोल में हैं।

एक नजर धर्मेंद्र के फिल्मी सफर पर-
धर्मेंद्र की कहानी शुरू होती है 1935 से…
ब्रिटिश इंडिया में पंजाब के गांव सहनेवाल के हेडमास्टर केवल किशन देओल के घर 8 दिसंबर 1935 को धर्मेंद्र का जन्म हुआ। जिन्हें नाम दिया गया था धरम केवल किशन। पंजाबी जट परिवार में धर्मेंद्र का बचपन सहनेवाल में ही बीता। जिस गवर्नमेंट सीनियर सेकेंडरी स्कूल में उनके पिता हैडमास्टर थे, वहीं से धर्मेंद्र ने पढ़ाई की। धर्मेंद्र जब दसवीं में थे तब उन्होंने दिलीप कुमार की फिल्म ‘शहीद’ देखी। उन्हें फिल्म इस कदर पसंद आई कि उन्होंने खुद भी हीरो बनने का फैसला कर लिया।
धर्मेंद्र करीब 19 साल के ही थे, जब 1954 में उनके पिता ने उनकी शादी प्रकाश कौर से करवा दी। इसी समय एक दिन अखबार में फिल्मफेयर मैगजीन एक टेलेंट हंट कॉम्पिटिशन का इश्तिहार पढ़ा। इसमें जीतने वाले को फिल्मों में काम मिलने वाला था। नई-नई शादी हुई थी, तो उनके लिए पत्नी को छोड़कर मुंबई जाना मुश्किल था, लेकिन उन्होंने घरवालों को मना ही लिया।

पहली पत्नी प्रकाश कौर के साथ धर्मेंद्र। इस शादी से उन्हें 4 बच्चे सनी, बॉबी, अजेता, विजेता हैं।
धर्मेंद्र चंद रुपए लेकर बॉम्बे (अब मुंबई) पहुंचे और देशभर से आए युवाओं को मात देकर कॉम्पिटिशन जीत गए। शर्त के अनुसार विजेता धर्मेंद्र को फिल्म दी जाने वाली थी, लेकिन उनके साथ कोई फिल्म नहीं बनाई गई। हीरो बनने के लिए धर्मेंद्र बॉम्बे में ही रुके और गुजारे के लिए नौकरी ढूंढ ली। उन्होंने एक ड्रिलिंग फर्म में नौकरी की जहां उनकी तनख्वाह थी 200 रुपए। नौकरी के साथ-साथ वो कई प्रोड्यूसर्स के दफ्तरों के चक्कर काटा करते थे।
मामूली तनख्वाह से कभी भरपेट खाना मिल जाता था, तो कभी खाली पेट ही सो जाया करते थे। ऐसे ही एक रोज धर्मेंद्र काम से लौटे तो भूख से बेहोशी आने लगी। न घर में खाना था, न पैसे। भूख से तड़पते हुए धर्मेंद्र की नजर टेबल पर पड़े इसबगोल के पैकेट पर पड़ गई। उन्हें कुछ नहीं सूझा और उन्होंने पूरा पैकेट एक ग्लास पानी में घोलकर गटक लिया। चंद मिनटों के लिए भूख तो शांत हुई, लेकिन उसके बाद इसबगोल ने अपना काम शुरू कर दिया। आम तौर पर इसबगोल को कब्ज मिटाने या पाचन के लिए इस्तेमाल किया जाता था। धर्मेंद्र के पेट में तेज दर्द शुरू हो गया और उन्हें दस्त लग गए। कुछ घंटों के इंतजार के बाद उनके साथ रहने वाले रूम पार्टनर ने गंभीरता से समझते हुए उन्हें अस्पताल पहुंचाया। जब डॉक्टर को पूरा हाल बताया तो डॉक्टर ने हंसते हुए कहा, इन्हें दवा की नहीं खाने की जरूरत है।
इसी तंगी के दौर में मशक्कत करते हुए उन्हें अर्जुन हिंगोरानी की फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरे मिल गई। इस फिल्म के लिए उन्हें मात्र 51 रुपए मिले थे। वो अर्जुन हिंगोरानी के गैरेज में रहते थे। कुछ समय बाद फिल्म की शूटिंग शुरू हो गई। शूटिंग चल ही रही थी कि धर्मेंद्र को पीलिया हो गया। वजन घट गया और जब रिकवरी के बाद दोबारा शूटिंग शुरू हुई तो उनका चेहरा मुरझा चुका था। एनडीटीवी को दिए एक इंटरव्यू में धर्मेंद्र ने बताया कि जब वो फिल्म के प्रीमियर में पहुंचे तो खुद की शक्ल नहीं पहचान पा रहे थे। अपने लुक से निराश होकर वो फिल्म आधी भी नहीं देख सके और थिएटर छोड़कर निकल गए। उन्हें लगा कि उन्हें कोई पसंद नहीं करेगा, लेकिन हुआ इसका उल्टा।

1960 में रिलीज हुई फिल्म दिल भी तेरा हम भी तेरा जबरदस्त हिट रही और पहली ही फिल्म से धर्मेंद्र को देशभर में पहचान मिल गई। पॉपुलैरिटी मिलते ही धर्मेंद्र को सूरत और सीरत (1962), अनपढ़ (1962), बंदिनी (1963), आई मिलन की बेला (1964), बहारें फिर आएंगी (1966), दिल ने फिर याद किया (1966), दुल्हन एक रात की (1967) जैसी कई हिट फिल्में मिलने लगीं। इन फिल्मों की बदौलत उन्हें 60 के दशक में रोमांटिक हीरो का दर्जा मिला।
फिल्म इंडस्ट्री में तो धर्मेंद्र नाम का हीरो पहचान बना चुका था, लेकिन उन्हें स्टार का दर्जा मिलना अभी बाकी था। ये काम किया मीना कुमारी ने। साल 1964 की फिल्म ‘मैं भी लड़की हूं’ में साथ नजर आए। पहली फिल्म से ही मीना कुमारी धर्मेंद्र को पसंद करने लगीं। उस समय मीना और उनके पति कमाल अमरोही के रिश्ते में दरार आ चुकी थी। मीना कुमारी अपने प्रोड्यूसर्स के सामने शर्त रख दिया करती थीं कि वो तब ही फिल्म की हीरोइन बनेंगी, जब धर्मेंद्र फिल्म के हीरो रहेंगे।
मीना कुमारी जैसी बड़ी एक्ट्रेस को कास्ट करने के लिए फिल्ममेकर्स उनकी हर शर्त मान लेते थे। धर्मेंद्र और मीना कुमारी फिल्म पूर्णिमा, काजल, मंझली दीदी, बहारों की मंजिल और फूल और पत्थर में साथ दिखे और धर्मेंद्र को स्टार का दर्जा मिल गया।
जिन दिलीप कुमार को देखकर हीरो बने, वो धर्मेंद्र जैसा बनना चाहते थे
1997 में 42वें फिल्मफेयर अवॉर्ड सेरेमनी में धर्मेंद्र को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया गया था। यह अवॉर्ड दिलीप कुमार ने खुद धर्मेंद्र को दिया और कहा- जब मैंने पहली बार धरम (धर्मेंद्र) को देखा, तो देखते ही मेरे दिल में उमंग पैदा हुई, अल्लाह मुझे ऐसा ही बनाया होता तो क्या जाता?

धर्मेंद्र को जब दिलीप कुमार ने लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड दिया तो वे काफी भावुक हो गए थे।
देव आनंद भी चाहते थे धर्मेंद्र जैसी शक्ल
पहली बार जब देव आनंद ने धर्मेंद्र को देखा था, तो वे बोले थे कि हे भगवान तुमने ये शक्ल मुझे क्यों नहीं दी। इस बात का खुलासा डायरेक्टर अशोक त्यागी ने दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान किया। अशोक त्यागी ने कहा- ‘जब धरम जी मुंबई फिल्मफेयर कॉन्टेस्ट में भाग लेने आए थे, उस समय कॉन्टेस्ट में जितने लोग भाग लेने आए सभी कंटेस्टेंट्स को शूटिंग दिखाने के लिए ले जाया गया। उस समय देव साहब की फिल्म की शूटिंग चल रही थी।
देव साहब ने अशोक त्यागी को बताया था कि धर्मेंद्र को दूर भीड़ में खड़े देखकर बोले थे कि हे भगवान तुमने मुझे ये शक्ल क्यों नहीं दी। इतना ही नहीं, देव साहब दूर खड़े धर्मेंद्र की पर्सनैलिटी से इस कदर प्रभावित हुए कि उनको बुलाकर अपना लंच भी शेयर किया था।
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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
देश
भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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