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कोरबा

नागिन झरना : प्रकृति की गोद में उभरता नया पर्यटन केंद्र

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कोरबा/पाली। कोरबा जिले के पाली ब्लाक अंतर्गत ग्राम पोटापानी स्थित नागिन झरना आज क्षेत्र का एक प्रमुख और तेजी से लोकप्रिय होता पर्यटन स्थल बनकर उभर रहा है। पथरीली चट्टानों से दूध जैसी सफेद धाराओं में गिरता यह झरना जब झर-झर की मधुर ध्वनि के साथ बहता है, तो पूरा वातावरण मानो प्राकृतिक संगीत में डूब जाता है। झरने के दोनों ओर फैली हरी-भरी झाड़ियाँ, ठंडी हवाएँ और चमकती चट्टानें… ऐसा दृश्य रचती हैं, जो हर सैलानियों को बार-बार यहाँ लौट आने के लिए मजबूर कर देता है। नागिन झरना केवल प्राकृतिक सौंदर्य तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोमांस प्रेमियों, साहसिक पर्यटकों और अध्यात्म से जुड़े लोगों के लिए भी खास आकर्षण बनता जा रहा है। गर्मी के मौसम में यहाँ की ठंडक सुकून देती है, वहीं बारिश के दिनों में झरने की प्रचंड धाराएँ रोमांच का अनुभव कराती हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, झरने के नीचे जहाँ पानी ठहरता है, उसके समीप एक सुरंगनुमा रास्ता है, जो लक्ष्मण कोठी तक जाने से जुड़ा हुआ बताया जाता है। यह लोककथा झरने को रहस्य और आस्था से जोड़ती है। सुलभ रास्ता, बढ़ती पहुंच कटघोरा-बिलासपुर राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 130 पर स्थित डूमर कछार से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित नागिन झरना अब पहुँच के लिहाज से भी काफी सुविधाजनक हो गया है। बेहतर सड़क और स्पष्ट मार्गदर्शन के चलते आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में पर्यटक यहाँ पहुँच रहे हैं।
सप्ताहांत में उमड़ती पर्यटकों की भीड़


विशेष रूप से शनिवार और रविवार को पोटापानी स्थित नागिन झरना में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिलती है। सप्ताहांत पर पिकनिक मनाने, फोटोग्राफी करने और परिवार व मित्रों के साथ समय बिताने वालों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। झरने के आसपास सन्नाटा नहीं, बल्कि हर ओर चहल-पहल और उत्साह का माहौल रहता है।
स्थानीय व्यवस्था और ग्रामीणों को रोजगार
पर्यटकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए स्थानीय समिति द्वारा दोपहिया और चारपहिया वाहनों की पार्किंग, साफ-सफाई और अन्य बुनियादी सुविधाओं का समुचित प्रबंध किया जा रहा है। इन व्यवस्थाओं के चलते नागिन झरना की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। इससे ग्रामीणों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं और क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिल रही है।
प्रकृति की कलाकृति सा दृश्य भविष्य की अपार संभावनाएँ


नागिन झरना की सबसे बड़ी विशेषता इसकी मनोरम वादियाँ हैं। आसपास फैली खूबसूरत पहाड़ियाँ, चमकते पत्थर और चांदी की तरह दमकता झरने का पानी किसी चित्रकार की कूची से बने सजीव चित्र जैसा प्रतीत होता है। जब सूर्य की किरणें पानी की धाराओं पर पड़ती हैं, तो पूरा दृश्य और भी मनमोहक हो उठता है। कुल मिलाकर, नागिन झरना आज केवल एक झरना नहीं, बल्कि प्राकृतिक सौंदर्य, लोककथाओं, रोमांच और शांति का अद्भुत संगम बन चुका है। यदि इसे सुनियोजित, सुरक्षित और पर्यावरण-अनुकूल पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए, तो यह क्षेत्र की पहचान को जिला स्तर से आगे बढ़ाकर राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुँचा सकता है।
पर्यटन विकास के लिए होगा प्रयास-डॉ. पवन सिंह


जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. पवन सिंह ने कहा-नागिन झरना एक बेहतर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का प्रयास करेंगे। इस विषय को मैं विस्तार से रखूँगा। शासन-प्रशासन जो भी उचित समझेगा, उसके अनुरूप इस स्थान को व्यवस्थित एवं विकसित पर्यटन स्थल के रूप में परिवर्तित किया जाएगा। स्थानीय सुविधाओं, सुरक्षा और संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, ताकि क्षेत्र का समग्र विकास हो सके।
अत्यंत मनोरम है यह स्थल


बिलासपुर निवासी हिम्मत सिंह ने कहा-इस झरने की जानकारी मुझे सोशल मीडिया के माध्यम से मिली। यह स्थान अत्यंत मनोरम, शांत और घने वनों से घिरा हुआ है। पूरे परिवार के साथ यहाँ आकर बहुत अच्छा अनुभव रहा। पर्यटकों की बढ़ती भीड़ देखकर मन प्रसन्न हुआ। हालांकि लगभग एक किलोमीटर तक पथरीले और कठिन मार्ग से पैदल चलना पड़ा। ऐसे सुंदर पर्यटन स्थल तक सुगम सड़क सुविधा उपलब्ध कराना शासन-प्रशासन के लिए आवश्यक है।
नागिन झरना महालीन देवी का स्थान-कोटवार


पोटापानी कोटवार चतुरदास ने बताया- पूर्वजों की मान्यता के अनुसार यहाँ महालीन देवी का स्थान है। इसी स्थल से एक सुरंग पहाड़ के ऊपर स्थित लक्ष्मण कोठी की ओर जाती है। पत्थर की चट्टानों से निर्मित यह स्थान राजवाड़ा महल जैसा भव्य और रहस्यमय दिखाई देता है, जो आज भी लोगों की आस्था और जिज्ञासा का केंद्र बना हुआ है।

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कोरबा

भू-विस्थापितों को राहत, हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा

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कोरबा। एसईसीएल मानिकपुर खदान से प्रभावित भिलाईखुर्द के भ-ूविस्थापितों को बड़ी राहत मिली है। उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन की पहल पर 300 प्रभावितों को मुआवजा देने का रास्ता साफ हो गया है। हर परिवार को 6.78 लाख मुआवजा देने एसईसीएल प्रबंधन ने सहमति दी है।

एसईसीएल विश्राम गृह कोरबा में शुक्रवार को नगर विधायक व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की अध्यक्षता मेंभिलाईखुर्द के भूविस्थापितों, एसईसीएल के अधिकारियों व जिला प्रशासन के अधिकारियों के बीच बैठक हुई। जिसमें देवांगन ने एसईसीएल के अधिकारियों को दो टूक कहा कि 50 वर्ष पूर्व खदान के लिए जमीन का अधिग्रहण किया गया था।

तब ज़मीन का मुआवजा दिया जा चुका था, लेकिन इतने वर्षों बाद आज ज़मीन खाली करवाई जा रही है। भू-विस्थापितों को मकानों और शिफ्टिंग का उचित मुआवजा दिए किसी भी तरह से जमीन खाली करवाना गलत है। उद्योग मंत्री ने बैठक में भू विस्थापितों की मांग को मजबूती से रखते हुए कहा की इतने वर्षों में एक-एक जमीन धारक के एक से अधिक परिवार हो चुके हैं, आज की स्थिति में सिर्फ एक ज़मीन धारक के बजाए एक-एक परिवार के हिसाब से मुआवजा दिया जाए।

देवांगन ने कहा की देश की ऊर्जा के लिए कोयला अतिमहत्वपूर्ण हैं, लेकिन भू- विस्थापितों को साथ में लेकर खदानों का विस्तार करना होगा। एसईसीएल के अधिकारियों ने बैठक में ही सभी परिवारों का मुआवजा देने की मंजूरी दी। भू-विस्थापित के प्रति परिवार को 6.78 लाख देने की घोषणा की गई। पिछले 8 वर्ष से बिना मुआवजा दिए प्रबंधन बस्ती खाली कराने पर आमदा था। मंत्री के दबाव के बाद एसईसीएल बैकफुट पर आए। इस निर्णय का ग्राम भिलाईखुर्द के सभी भू विस्थापितों ने स्वागत करते हुए अपनी सहमति देते हुए मंत्री देवांगन का आभार जताया।

एसईसीएल मानिकपुर खदान से 52 लाख 50 हजार टन कोयला उत्पादन किया गया था। कोरबा एरिया का यह सबसे बड़ा ओपन माइंस है। लगातार 11 साल से लक्ष्य हासिल कर रहा है। इस साल कोरबा एरिया में 83 लाख 60 हजार टन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

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कोरबा

कोरबा में चलती कार में शॉर्ट सर्किट से लगी आग:गैरेज पहुंचते ही भड़की, मिस्त्री ने पाया काबू

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कोरबा। कोरबा के मानिकपुर चौकी क्षेत्र अंतर्गत मुड़ापार स्थित लिटिल स्टेप स्कूल के पास एक ऑटो गैरेज में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक चलती कार में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। गैरेज में मौजूद मिस्त्री ने तत्काल पानी डालकर और केबल वायर काटकर आग पर काबू पा लिया।

जानकारी के अनुसार, एक युवक लाल रंग की कार लेकर गैरेज पहुंचा था। गाड़ी रोकते ही वह तुरंत बाहर निकला और मिस्त्री को आवाज लगाई। मिस्त्री के मौके पर पहुंचते ही कार में अचानक आग की लपटें उठने लगीं, जो देखते ही देखते बढ़ने लगी।

शॉर्ट सर्किट के बाद लगी आग

कार चालक युवक ने बताया कि वह किसी काम से निकला था, तभी उसे गाड़ी से हल्का धुआं आता महसूस हुआ। वह किसी तरह कार को गैरेज तक लाया।

जैसे ही उसने बोनट खोला, धुआं तेजी से निकलने लगा और उसने तुरंत मिस्त्री को बुलाया। बताया जा रहा है कि चूहे ने कार के केबल काट दिए थे, जिसके कारण शॉर्ट सर्किट हुआ और आग लग गई।

समय रहते आग में पाया काबू

समय रहते आग पर काबू पा लिए जाने से एक बड़ी घटना टल गई। यह क्षेत्र आबादी वाला है और पास में ही बच्चों का स्कूल भी है। आगजनी के समय लोगों की आवाजाही भी थी।

घटना की सूचना मानिकपुर चौकी पुलिस और दमकल विभाग को देने की तैयारी थी, लेकिन आग पर जल्द ही नियंत्रण पा लिया गया।

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कोरबा

DMF का कथित मिसयूज…केंद्र ने छत्तीसगढ़ CS को पत्र-जारी किया:तत्कालीन कलेक्टर पर निजी फायदे के लिए 26 करोड़ मंजूर करने का आरोप

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कोरबा। कोरबा में डिस्ट्रिक्ट मिनरल फंड (DMF) के कथित दुरुपयोग के मामले में केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव विकास शील को स्मरण पत्र जारी किया है। यह कार्रवाई भाजपा के वरिष्ठ आदिवासी नेता और पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर की शिकायत के बाद की गई है।

शिकायत में बालको से संबंधित सड़क निर्माण के लिए डीएमएफ फंड के गलत इस्तेमाल का आरोप है। दरअसल, ननकी राम कंवर ने शिकायत की थी कि दर्री ध्यानचंद चौक से बजरंग चौक परसाभाटा बालको तक की सड़क के लिए तत्कालीन कलेक्टर अजीत बसंत ने बालको को निजी फायदे के लिए डीएमएफ फंड से लगभग 26 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे।

ननकी राम के अनुसार, यह सड़क बालको की है और इसका निर्माण-मरम्मत बालको के सीएसआर फंड से होना चाहिए था। इस मामले में केंद्र सरकार ने पहले भी मुख्य सचिव विकास शील को पत्र जारी किया था। पूर्व गृहमंत्री ननकी राम कंवर ने आरोप लगाया कि तत्कालीन कलेक्टर को भारत सरकार में शिकायत होने की जानकारी मिलते ही, उन्होंने अपने ट्रांसफर से पहले ही लोक निर्माण विभाग को आनन-फानन में टेंडर प्रक्रिया जारी कर दी थी।

मुख्य सचिव से जवाब मांगा

इस जानकारी के बाद ननकी राम कंवर ने केंद्र सरकार को फिर पत्र लिखकर अवगत कराया। केंद्र सरकार ने उनके पत्र पर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन विकास शील को पत्र लिखा है। इसमें केंद्र ने नाराजगी जाहिर करते हुए पत्र में लिखे गए तथ्यों के संबंध में जवाब मांगा है और आवेदक को भी अवगत कराने को कहा है।

कलेक्टर ने पुल मरम्मत कार्यों का निरीक्षण किया

इसी बीच कलेक्टर दुदावत ने डीएमएफ के तहत बनने वाले दर्री डेम मार्ग (ध्यानचंद चौक से बालको के बजरंग चौक तक) का निरीक्षण किया। उन्होंने आवश्यक मरम्मत कार्यों को प्राथमिकता के साथ पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही बेलगिरी-ढेंगुरनाला पुल के मरम्मत कार्य के लिए भी शीघ्र निविदा प्रक्रिया शुरू कर समयबद्ध तरीके से कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए हैं।

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