कोरबा
वर्तमान समय में कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता एवं आमजनों को बहुत ही सचेत रहने की जरूरत-जयसिंह अग्रवाल
कोरबा विधानसभा के ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्षों का शपथ ग्रहण
कोरबा। कोरबा विधानसभा के ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्षों के शपथ ग्रहण एवं सम्मान समारोह में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित होकर कोरबा विधानसभा क्षेत्र के चारों ब्लॉक अध्यक्षों एवं दशों मंडल अध्यक्षों को शपथ दिलवाई ।

पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने बालको, दर्री – जमनीपाली, कुसमुण्डा, एवं कोरबा ब्लॉक के अध्यक्षों क्रमश: ए डी जोशी, राजेन्द्र तिवारी, बसंत चंद्रा, पालुराम साहु सहित मंडल अध्यक्षगण देवीदयाल सोनी, बुद्धेश्वर चौहान, रोपा तिर्की, इकबाल कुरैशी, सुरती कुलदीप, अश्वनी पटेल, सुकसागर निर्मलकर, प्रदीप जायसवाल, मनीष शर्मा एवं जवाहर निर्मलकर को बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए कहा कि अभी आप सभी के लिए परीक्षा का समय है । आपको प्रदेश कांग्रेस एवं एआईसीसी कांग्रेस ने महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी है । वर्तमान समय में कांग्रेस के प्रत्येक कार्यकर्ता एवं आमजनों को बहुत ही सचेत रहने की जरूरत है, चाहे वह एसआईआर का मामला हो, धान खरीदी का मामला हो या फिर मनरेगा का मामला हो ।

श्री अग्रवाल ने कहा कि किस तरीके से कोरबा विधानसभा में फर्जी आवेदन लगाकर पात्र मतदाताओं के नाम विलोपित कराया जा रहा है, जो मूलत: कांग्रेस की विचारधारा को मानने वाले हैं । इस प्रकार से मनरेगा को नियमों में सुधार करने के नाम पर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम हटाया गया और ग्रामीणों की जीवनदायनी राेजगार गारंटी योजना को कमजाेर किया गया है, वहीं पूरे प्रदेश भर में शुरू से लेकर अंत तक किसान धान खरीदी केन्द्रों की अव्यवस्था को लेकर परेशान रहे हैं । धान खरीदी बंद होने के बाद आज भी अनेकों किसान धान बेचने से वंचित रह गये हैं । श्री अग्रवाल ने कहा कि हम सभी को बूथ स्तर पर जिम्मेदारी लेनी होगी ।
सभी नवनियुक्त ब्लॉक एवं मंडल अध्यक्षों ने भी अपने उद्बोधन में कहा कि एआईसीसी का जो मुद्दा रहेगा, यहाँ पर सबको साथ लेकर उसी मुद्दे पर काम करेंगे, साथ ही बूथ स्तर पर कांग्रेस को और मजबूत करने की दिशा में काम किया जावेगा ।
समारोह को जिलाध्यक्ष मुकेश राठौर, नेता प्रतिपक्ष कृपाराम साहु, इंटक अध्यक्ष राम इकबाल ने भी संबोधित किया।
समारोह में दर्री – जमनीपाली के साथ कुसमुण्डा, बालको एवं कोरबा के कांग्रेस नेता उपस्थित थे । कार्यक्रम का संचालन पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष सुधीर जैन ने किया एवं आभार पूर्व जिला अध्यक्ष नत्थूलाल यादव ने व्यक्त किया ।
कोरबा
SECL की वादाखिलाफी से परेशान किसान ने दी चेतावनी, मुआवजा नहीं मिला, तो हरदीबाजार में नहीं होने दूँगा सर्वे और नापी
कोरबा/दीपका। एसईसीएल (SECL) दीपका क्षेत्र द्वारा अधिग्रहित की गई भूमि और मकानों का मुआवजा न मिलने से प्रभावित ग्रामीण अब आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। ग्राम हरदीबाजार निवासी किसान विनय कुमार राठौर ने जिला कलेक्टर और एसईसीएल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उनके पिछले बकाये का भुगतान नहीं हुआ तो वे अपनी अन्य संपत्तियों का सर्वे नहीं होने देंगे ।

मुख्य विवाद और मांगें
किसान विनय कुमार राठौर ने बताया कि ग्राम सुवाभोड़ी (खसरा नंबर 316/4, रकबा 0.117 हेक्टेयर) और ग्राम मलगांव में उनकी भूमि और मकानों का अधिग्रहण SECL दीपका क्षेत्र द्वारा किया जा चुका है ।
- 3-4 वर्षों का लंबा इंतजार:- सर्वे और नापी की प्रक्रिया पूरी हुए 4 साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक मुआवजे की राशि का भुगतान नहीं किया गया है ।
- प्रबंधन की अनदेखी:- पीड़ित किसान के अनुसार उन्होंने पूर्व में कलेक्टर जनदर्शन और महाप्रबंधक कार्यालय में कई बार गुहार लगाई, लेकिन वहां उनकी सुनवाई नहीं हो रही है ।
- कड़ी चेतावनी:- आवेदन में स्पष्ट कहा गया है कि यदि सुवाभोड़ी और मलगांव का मुआवजा तत्काल नहीं दिया गया, तो वे ग्राम हरदीबाजार स्थित अपनी अन्य भूमि और संपत्तियों का सर्वे/नापी कार्य रोक देंगे, इसकी पूरी जिम्मेदारी SECL प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी ।

प्रशासनिक सुस्ती पर उठाए सवाल
विज्ञप्ति के माध्यम से पीड़ित ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि एक तरफ विकास के नाम पर जमीनें ली जा रही हैं, वहीं दूसरी तरफ किसान अपने ही हक के पैसे के लिए कार्यालयों की धूल फांकने को मजबूर है ।
इस मामले की प्रतियां अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक SECL बिलासपुर, तहसीलदार हरदीबाजार और महाप्रबंधक खनन को भी प्रेषित की गई हैं, ताकि शीघ्र अति शीघ्र न्याय मिल सके ।

कोरबा
“सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत कोरबा पुलिस की त्वरित कार्यवाही:चलती मोटरसाइकिल में चाकू लहराकर दहशत फैलाने वाले 06 व्यक्तियों पर कार्रवाई
01 वयस्क आरोपी गिरफ्तार, 05 विधि से संघर्षरत बालकों की संलिप्तता पाई गई
कोरबा। कोरबा जिले में अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण एवं अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से पुलिस अधीक्षक कोरबा सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक एवं अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के मार्गदर्शन में थाना/चौकी स्तर पर लगातार सघन अभियान चलाकर कार्यवाही की जा रही है।
इसी क्रम में “सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत थाना कोतवाली क्षेत्र अंतर्गत सीतामणी स्टेशन रोड में चाकू लहराकर आमजन में भय एवं अशांति फैलाने की घटना पर त्वरित एवं प्रभावी कार्यवाही की गई है।

दिनांक 19.03.2026 को कुछ युवकों द्वारा चलती मोटरसाइकिल में चाकू लहराते हुए आम नागरिकों को भयभीत करने की सूचना प्राप्त हुई थी, जिससे क्षेत्र में दहशत का माहौल निर्मित हो गया था।
प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए थाना कोतवाली में दिनांक 25.03.2026 को अपराध क्रमांक 284/2026 के तहत धारा 25 आर्म्स एक्ट एवं धारा 184, 4/181, 5/180 मोटर व्हीकल एक्ट में अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना प्रारंभ की गई।
विवेचना के दौरान घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज एवं अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान कर उन्हें अभिरक्षा में लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उन्होंने घटना कारित करना स्वीकार किया।

जांच में कुल 06 व्यक्ति संलिप्त पाए गए, जिनमें से 01 वयस्क आरोपी राहुल यादव (उम्र 27 वर्ष), निवासी कुंजनगर नवधा चौक, थाना कोतवाली, जिला कोरबा तथा 05 विधि से संघर्षरत बालक शामिल हैं।
आरोपियों के कब्जे से एक धारदार चाकू (फल की लंबाई लगभग 6.5 इंच) एवं घटना में प्रयुक्त मोटरसाइकिल जप्त की गई है।
वयस्क आरोपी राहुल यादव को विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किया गया है, वहीं 05 विधि से संघर्षरत बालकों को विधिक प्रावधानों के तहत किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष प्रस्तुत किया जा रहा है।
कोरबा पुलिस द्वारा “सजग कोरबा – सदर कोरबा अभियान” के तहत क्षेत्र में अपराध नियंत्रण हेतु निरंतर सख्त कार्यवाही जारी रहेगी तथा आम नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
कोरबा
पूर्व डिप्टी CM के बेटे-बहू-पोती की हत्या, 2 को उम्रकैद:तीन बरी, हाईकोर्ट का फैसला, पैसे के लिए रिश्तेदार ने मारा था
कोरबा/बिलासपुर। अविभाजित मध्यप्रदेश के पूर्व डिप्टी सीएम के बेटे-बहू और पोती की हत्या के 2 आरोपियों को उम्रकैद हुई है। 5 साल बाद हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया है। इस मामले में 5 आरोपियों को दोषी ठहराया गया था, कोर्ट ने सबूतों के अभाव में 3 को बाइज्जत बरी कर दिया है।

साल 2021 में उनके घर घुस कर परिवार के 3 सदस्यों की धारदार हथियार से हत्या की गई थी। आरोप था कि जमीन विवाद और पैसों के लेन-देन को लेकर परिवार के ही बड़े बेटे, बहू, साले और उसके साथी ने मिलकर इस वारदात को अंजाम दिया था। जांच के बाद आरोपियों में बेटा बहू को संदेह का लाभ मिला, साले और दोस्त को सजा हुई है।

इन 5 लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी, इनमें 3 बरी कर दिए गए हैं।
कोरबा जिले के उरगा थाना क्षेत्र के भैंसमा गांव में प्यारे लाल कंवर का परिवार रहता था। उनके 2 बेटों में पैसों और जमीन के लेनदेन को लेकर विवाद था।
21 अप्रैल 2021 को छोटे बेटे, उनकी बहू और 4 साल की पोती की हत्या हुई थी। हत्यारों ने तीनों के चेहरे, सिर, गर्दन, मुंह, नाक, कान, पैर पर धारदार हथियार से कई बार हमला किया था।
जांच में सामने आया था कि बड़े भाई हरभजन के साले और उसके साथी ने घर घुसकर धारदार हथियार से वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस ने इस मामले में 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश किया।
निचली अदालत ने सुनाई थी उम्रकैद
तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश सुनील कुमार नंदेश्वर की अदालत में सरकारी अभिभाषक कृष्णा द्विवेदी ने सभी ठोस साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन साक्ष्यों के आधार पर कोर्ट ने एक महिला और चार पुरुष सहित कुल पांच आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। जिसके बाद आरोपियों ने हाईकोर्ट में फैसले को चुनौती दी।

अब हाईकोर्ट का फैसला
अब हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दो आरोपियों की सजा को सही ठहराते हुए उम्रकैद बरकरार रखी, जबकि तीन आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया। इस फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आ गया है।
2 आरोपियों को उम्रकैद, 3 बरी
एडवोकेट राजीव कुमार दूबे ने जानकारी दी कि आरोपियों में हरभजन सिंह कुंवर, उनकी पत्नी धनकुवंर, साला परमेश्वर, दोस्त राम प्रसाद मान्येवर, सुरेंद कुमार कंवर कुल 5 लोग आरोपी बनाए गए थे। परमेश्वर और रामप्रसाद मन्नेवार को उम्रकैद हुई है, अन्य 3 लोग बरी कर दिए गए हैं।

पूर्व उप मुख्यमंत्री प्यारेलाल कंवर के बेटे हरीश कंवर।
कौन थे हरीश कंवर
अविभाजित मध्यप्रदेश में आदिवासी नेतृत्व का प्रमुख चेहरा स्वर्गीय प्यारेलाल कंवर थे। कांग्रेस नेता प्यारेलाल कंवर कोरबा जिले की रामपुर विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते रहे।
इस विधानसभा से वे और भारतीय जनता पार्टी के ननकीराम कंवर परंपरागत प्रतिद्वंदी रहे। प्यारेलाल कंवर को जातिगत समीकरणों के आधार पर सन 1997-1998 में मध्यप्रदेश का उपमुख्यमंत्री बना दिया गया था।
उस समय दिग्विजय सिंह प्रदेश के मुख्यमंत्री थे। बाद में प्यारेलाल कंवर को जबलपुर के मढ़ाताल भूमि घोटाले में पद से हटा दिया गया था। उसके बाद वे सिर्फ एक बार विधायक रहे और फिर राजनीति में हाशिए पर चले गए। हरीश कंवर उन्हीं के छोटे बेटे थे।
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