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Canada Visa Alert: बिना वर्क परमिट कनाडा में काम करने का बड़ा मौका, इन 3 तरह के लोगों को मिली विशेष छूट
नई दिल्ली, एजेंसी। कनाडा में नौकरी करने या करियर बनाने की योजना बना रहे विदेशी नागरिकों के लिए एक बेहद काम की खबर है। आमतौर पर कनाडा में किसी भी तरह का काम करने के लिए वैध Work Permit की जरूरत होती है लेकिन कनाडाई इमिग्रेशन नियमों के तहत कुछ ऐसी विशेष परिस्थितियां भी हैं जिनमें विदेशी नागरिक बिना वर्क परमिट के भी वहां कानूनी रूप से काम कर सकते हैं। हालांकि यह छूट हर किसी के लिए नहीं है बल्कि केवल कुछ खास श्रेणियों और कड़े नियमों के दायरे में आने वाले लोगों को ही दी जाती है।

अब हम जानते हैं उन 3 प्रमुख श्रेणियों के बारे में जो बिना वर्क परमिट कनाडा में काम करने के पात्र हैं:

1. Business Visitor
अगर कोई व्यक्ति विशुद्ध रूप से व्यापारिक गतिविधियों के सिलसिले में कनाडा आता है और वह वहां के स्थानीय श्रम बाजार (Labor Market) का हिस्सा नहीं बनता तो उसे बिजनेस विजिटर माना जाता है। ऐसे लोगों को वर्क परमिट की आवश्यकता नहीं होती।
वहीं इस तरह के लोगों के लिए महत्वपूर्ण शर्तें भी लागू की गई हैं। पहला यह कि व्यक्ति किसी कनाडाई कंपनी का कर्मचारी नहीं होना चाहिए। उसका वेतन और अन्य आर्थिक लाभ कनाडा के बाहर (उसकी मूल विदेशी कंपनी) से मिलना चाहिए। उसकी गतिविधियां ऐसी न हों जिससे स्थानीय कनाडाई कर्मचारियों के रोजगार को नुकसान पहुंचे।

जानें क्या काम कर सकते हैं?
बिजनेस मीटिंग्स, ट्रेड शो, बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स की बैठकों में शामिल होना या विदेश से खरीदे गए विशेष उपकरणों की मरम्मत और तकनीकी सहायता देना। इन्हें आमतौर पर 6 महीने तक रुकने की अनुमति मिलती है।
2. Digital Nomad और रिमोट वर्कर
बदलते दौर में लैपटॉप और इंटरनेट के जरिए दुनिया के किसी भी कोने से काम करने वाले ‘डिजिटल नोमैड’ के लिए कनाडाई नियम काफी लचीले हैं। इनकी महत्वपूर्ण शर्तें हैं:
अगर आप कनाडा में रहकर किसी ऐसी विदेशी कंपनी के लिए ऑनलाइन काम कर रहे hain जिसका कनाडा में कोई ऑफिस या वित्तीय संबंध नहीं है तो आपको वर्क परमिट की जरूरत नहीं है। आपकी कमाई पूरी तरह से कनाडा के बाहर से आनी चाहिए और आप कनाडाई ग्राहकों को सीधे सेवा नहीं दे सकते।

यह प्रोफेशनल्स हैं शामिल
सॉफ्टवेयर डेवलपर, डिजिटल मार्केटिंग एक्सपर्ट, कंटेंट क्रिएटर, बिजनेस कंसल्टेंट और ऑनलाइन ट्यूटर। ऐसे लोग विजिटर वीजा या ईटीए (eTA) के जरिए 6 महीने तक वहां रहकर काम कर सकते हैं।
3. International Students
कनाडा के मान्यता प्राप्त संस्थानों (DLI) में पढ़ रहे विदेशी छात्र भी बिना अलग से वर्क परमिट लिए काम कर सकते हैं बशर्ते उनके स्टडी परमिट (Study Permit) में इसका साफ जिक्र हो।
काम करने के नियम
कैंपस के अंदर: छात्र सालभर बिना किसी समय सीमा (असीमित घंटे) के काम कर सकते हैं।
कैंपस के बाहर: पढ़ाई के दौरान वे हफ्ते में अधिकतम 24 घंटे तक काम कर सकते हैं।

छुट्टियों में: गर्मी और सर्दी की आधिकारिक छुट्टियों के दौरान उन्हें असीमित घंटे काम करने की छूट होती है।
जरूरी दस्तावेज: नौकरी शुरू करने से पहले छात्रों के पास एक वैध सोशल इंश्योरेंस नंबर (SIN) होना अनिवार्य है जो वहां की सरकार द्वारा पहचान के लिए जारी किया जाता है। नियमों से ज्यादा घंटे काम करने पर स्टडी परमिट रद्द भी हो सकता है।
इन लोगों को भी मिलती है विशेष छूट
इन तीन मुख्य श्रेणियों के अलावा कुछ अन्य क्षेत्रों से जुड़े लोगों को भी बिना वर्क परमिट कनाडा में शॉर्ट-टर्म काम करने की इजाजत है। इनमें विदेशी राजनयिक (Diplomats), अंतरराष्ट्रीय पत्रकार, खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाले एथलीट, धार्मिक कार्यकर्ता, गेस्ट स्पीकर और आपातकालीन सेवाएं देने वाले कर्मचारी शामिल हैं।
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CBSE चेयरमैन और सचिव का तबादला, ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं की खरीद की होगी जांच
नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता का तबादला कर दिया है. अधिकारियों के अनुसार, कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं में अपनाई गई डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली और ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सेवाओं की खरीद में कथित अनियमितताओं की जांच के कारण यह कदम उठाया गया है.

डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली पर उठे सवाल
सीबीएसई हाल के दिनों में उस समय विवादों में घिर गया था, जब कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि बोर्ड की ओर से उपलब्ध कराई गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन प्रतियां उनकी वास्तविक लिखावट से मेल नहीं खाती थीं. इन शिकायतों के बाद ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान और मूल्यांकन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे.
मामले की गंभीरता को देखते हुए केंद्र सरकार ने ऑन-स्क्रीन मार्किंग सेवाओं की खरीद और उससे जुड़ी प्रक्रियाओं की जांच के लिए एक समिति का गठन किया है. यह समिति मूल्यांकन प्रणाली, खरीद प्रक्रिया और तकनीकी पहलुओं की समीक्षा करेगी और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी.
एक महीने में समिति देगी अपनी रिपोर्ट
गठित एक सदस्यीय समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान करेंगी. समिति की अध्यक्ष जरूरत के हिसाब से अन्य कार्यालयों के अधिकारियों की सहायता ले सकती हैं. समिति को सचिवालयी सहायता क्षमता निर्माण आयोग की ओर से प्रदान की जाएगी. समिति एक महीनें के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट पेश करेंगी.
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कभी ‘पनौती’ कहकर हुई थीं ट्रोल, आज पति की ‘Lucky Charm’ बनीं अनुष्का शर्मा, 8 साल से फिल्मों से हैं दूर
अहमदाबाद, एजेंसी। भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार खिलाड़ी विराट कोहली और बॉलीवुड अभिनेत्री अनुष्का शर्मा की जोड़ी देश की सबसे चर्चित जोड़ियों में से एक मानी जाती है। हाल ही में आईपीएल 2026 के फाइनल में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB) की शानदार जीत के बाद एक बार फिर अनुष्का शर्मा चर्चा में आ गई हैं। टीम की जीत के जश्न के दौरान कैमरा बार-बार उनकी ओर घूमता नजर आया और सोशल मीडिया पर भी उनकी खुशी भरे वीडियो तेजी से वायरल होने लगे।

RCB की जीत के बाद फिर चर्चा में आईं अनुष्का
अहमदाबाद में खेले गए आईपीएल 2026 के फाइनल मुकाबले में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने गुजरात टाइटन्स को हराकर लगातार दूसरी बार ट्रॉफी अपने नाम की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद जहां विराट कोहली और पूरी टीम सुर्खियों में रही, वहीं स्टैंड्स में मौजूद अनुष्का शर्मा की प्रतिक्रियाओं ने भी लोगों का ध्यान खींच लिया। मैच खत्म होने के बाद सोशल मीडिया पर फैंस ने अनुष्का को विराट कोहली की “लकी चार्म” बताना शुरू कर दिया। कई यूजर्स का मानना है कि अनुष्का की मौजूदगी टीम के लिए शुभ साबित हुई है।

एक वक्त था जब ट्रोलिंग का करना पड़ता था सामना
हालांकि, आज जो लोग अनुष्का को लकी चार्म बता रहे हैं, कुछ साल पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी। शादी से पहले जब भी अनुष्का किसी मैच में विराट कोहली या टीम इंडिया को सपोर्ट करने पहुंचती थीं और टीम का प्रदर्शन अच्छा नहीं होता था, तो सोशल मीडिया पर उन्हें निशाना बनाया जाता था। कई बार लोगों ने बिना किसी वजह के टीम की हार का जिम्मेदार भी उन्हें ठहराया। यहां तक कि उन्हें “पनौती” और “मनहूस” जैसे अपमानजनक शब्दों से भी ट्रोल किया गया। क्रिकेट और निजी जीवन को जोड़कर देखे जाने की इस सोच की उस समय काफी आलोचना भी हुई थी।
वक्त बदला और बदल गई लोगों की सोच
समय के साथ हालात भी बदले और लोगों का नजरिया भी। आज वही अनुष्का शर्मा फैंस के बीच विराट कोहली की सबसे बड़ी ताकत और सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखी जाती हैं। RCB की लगातार दूसरी खिताबी जीत के बाद सोशल मीडिया पर उनके लिए प्यार और सम्मान से भरे पोस्ट देखने को मिल रहे हैं। मैदान पर विराट की उपलब्धियों के साथ-साथ फैंस अब अनुष्का के समर्थन और उनकी मौजूदगी को भी सकारात्मक नजरिए से देखने लगे हैं।

फिल्मों से दूर लेकिन चर्चा में हमेशा रहती हैं
अनुष्का शर्मा पिछले कुछ वर्षों से फिल्मों से दूरी बनाए हुए हैं। उनकी आखिरी रिलीज फिल्म ‘जीरो’ थी, जो साल 2018 में सिनेमाघरों में आई थी। इसके बाद उन्होंने किसी फिल्म में अभिनय नहीं किया। हालांकि, फिल्मों से दूर रहने के बावजूद अनुष्का अक्सर अपनी पर्सनल लाइफ, परिवार और क्रिकेट मैचों में मौजूदगी को लेकर सुर्खियों में बनी रहती हैं।

परिवार को दे रही हैं प्राथमिकता
विराट कोहली और अनुष्का शर्मा आज दो बच्चों के माता-पिता हैं और दोनों अपने परिवार के साथ ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं। यही वजह है कि अनुष्का ने पिछले कुछ सालों में अपने प्रोफेशनल काम से ज्यादा अपने परिवार और बच्चों पर ध्यान दिया है।
ट्रोलिंग से तारीफ तक का सफर
अनुष्का शर्मा की कहानी इस बात का उदाहरण है कि सार्वजनिक जीवन में लोगों की राय कितनी जल्दी बदल सकती है। कभी सोशल मीडिया पर आलोचना झेलने वाली अनुष्का आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा हैं। चाहे वह अपनी फिटनेस हो, परिवार के प्रति समर्पण हो या फिर मुश्किल समय में मजबूत बने रहना, अनुष्का ने हर दौर में खुद को गरिमा और आत्मविश्वास के साथ संभाला है।

आज जब लोग उन्हें विराट कोहली की “लकी चार्म” कह रहे हैं, तो यह सिर्फ क्रिकेट की जीत का जश्न नहीं बल्कि उस सफर की भी पहचान है, जिसमें उन्होंने आलोचनाओं के बीच खुद को मजबूत बनाए रखा।
देश
अमेरिकी संसद में हिंदुओं के समर्थन में उठी आवाज, सांसद रो खन्ना ने किया ऐतिहासिक प्रस्ताव का समर्थन
वाशिंगठन, एजेंसी। अमेरिका के एक प्रमुख सांसद ने प्रतिनिधि सभा के उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जिसमें अमेरिकी अर्थव्यवस्था में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के योगदान की सराहना की गई है और हिंदुओं के प्रति घृणा, हिंदू-विरोधी कट्टरता तथा समुदाय के पूजा स्थलों पर हमलों की निंदा की गई है। भारतीय मूल के अमेरिकी सांसद रो खन्ना ने सोमवार को इस प्रस्ताव का समर्थन किया। यह प्रस्ताव मिशिगन से डेमोक्रेटिक पार्टी के सांसद श्री थानेदार ने पेश किया था। पिछले साल 24 जनवरी को लाए गए इस प्रस्ताव को अब तक राजा कृष्णमूर्ति और सुहास सुब्रमण्यम सहित 32 सांसद सह-प्रायोजित कर चुके हैं।

कैलिफोर्निया का प्रतिनिधित्व करने वाले डेमोक्रेट सांसद खन्ना ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस प्रस्ताव के समर्थन की घोषणा की। भारतीय मूल के खन्ना ने कहा, ”मुझे श्री थानेदार के प्रतिनिधि सभा में पेश प्रस्ताव संख्या 69 को सह-प्रायोजित करने पर गर्व है। यह प्रस्ताव अमेरिका में हिंदू-अमेरिकी समुदाय के निरंतर योगदान और उसकी जीवंत विविधता की ऐसे समय में सराहना करता है जब हम अपने देश के बहुजातीय लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए काम कर रहे हैं।” प्रस्ताव में कहा गया है कि हिंदू धर्म दुनिया के सबसे बड़े और सबसे प्राचीन धर्मों में से एक है तथा 100 से अधिक देशों में 1.2 अरब से अधिक हिंदू हैं। इसमें कहा गया है कि हिंदू धर्म में विविध परंपराएं और आस्था प्रणालियां समाहित हैं जिनमें स्वीकार्यता, परस्पर सम्मान और शांति जैसे सार्वभौमिक मूल्य निहित हैं।
प्रस्ताव के अनुसार, अमेरिका ने 1900 के दशक से दुनिया भर से आए 40 लाख से अधिक हिंदुओं का स्वागत किया है जो अलग-अलग नस्लीय, भाषायी और जातीय पृष्ठभूमि का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसमें कहा गया है कि हिंदू-अमेरिकियों के योगदान से अमेरिका की अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र और हर उद्योग को काफी लाभ हुआ है। प्रस्ताव में रेखांकित किया गया है कि हिंदू-अमेरिकियों ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था और विभिन्न उद्योगों में अहम योगदान दिया है तथा हिंदू परंपराओं एवं प्रथाओं ने दर्शन, आयुर्वेद, कला, संगीत, नृत्य, फैशन, ध्यान, योग और सामुदायिक सेवा के माध्यम से अमेरिकी समाज को समृद्ध किया है। प्रस्ताव में अमेरिका में बढ़ती ”हिंदुओं के प्रति घृणा, हिंदू-विरोधी कट्टरता, नफरत और असहिष्णुता” की निंदा करते हुए कहा गया है कि देश में सकारात्मक योगदान के बावजूद हिंदू-अमेरिकियों को अपनी विरासत और प्रतीकों को लेकर रूढ़ धारणाओं तथा दुष्प्रचार का सामना करना पड़ता है।
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