छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ में 6 बजकर 20 मिनट में दिखा चंद्रग्रहण:रायपुर में आंशिक रुप से नजर आया, पश्चिमी इलाकों में नहीं दिखा
रायपुर,एजेंसी। भारत के ज्यादातर हिस्सों में आज यानि मंगलवार को चंद्रग्रहण दिखाई दिया। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में भी 6 बजकर 20 मिनट में आंशिक ग्रहण देखा गया। हालांकि कुछ पश्चिमी इलाकों में यह ग्रहण नजर नहीं आया। छत्तीसगढ़ में सिर्फ आंशिक ही प्रभाव रहा।
जानकारी के मुताबिक, रायपुर में चंद्रमा उदित होने तक ग्रहण का अधिकांश हिस्सा पहले ही समाप्त हो चुका था। इस कारण यहां केवल ग्रहण का अंतिम, आंशिक चरण ही दिखाई दिया।
IMD की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में सामान्य रूप से ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट (IST) पर हुई। इसका समापन शाम 6 बजकर 48 मिनट पर हुआ।
रायपुर में चंद्रग्रहण की तस्वीरें…

तीनों तस्वीरें 7 मिनट के अंतराल में ली गई है। रायपुर के विधानसभा इलाके की है।

रायपुर में चंद्रमा उदित होने तक ग्रहण का अधिकांश हिस्सा पहले ही समाप्त हो चुका था।

इस कारण यहां केवल ग्रहण का अंतिम, आंशिक चरण ही दिखाई दिया।
सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आने पर लगता है ग्रहण
खगोल विज्ञान के अनुसार, चंद्रग्रहण पूर्णिमा के दिन तब लगता है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में आ जाते हैं। पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आकर अपनी छाया चंद्रमा पर डाल देती है। जब पूरा चंद्रमा पृथ्वी की गहरी छाया (उपछाया नहीं बल्कि मुख्य छाया) में आ जाता है, तब उसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहा जाता है।
वहीं जब चंद्रमा का केवल एक हिस्सा छाया में आता है, तो वह आंशिक चंद्रग्रहण होता है। भारत में इससे पहले 7-8 सितंबर 2025 को पूर्ण चंद्रग्रहण देखा गया था। वहीं अगला चंद्रग्रहण जो भारत में दिखाई देगा, वह 6 जुलाई 2028 को लगेगा, जो कि आंशिक चंद्रग्रहण होगा।
मैग्ननिट्यूड 1.0 से ज्यादा तो पूर्ण ग्रहण
जब चंद्रग्रहण लगता है, तो वैज्ञानिक यह मापते हैं कि चंद्रमा का कितना हिस्सा पृथ्वी की गहरी छाया (उम्ब्रा) में गया है। इसी माप को ग्रहण की परिमाण (मैग्ननिट्यूड) कहा जाता है। अगर मैग्ननिट्यूड 1.0 से कम हो यानर चंद्रमा का पूरा भाग छाया में नहीं जाता, इसे आंशिक चंद्रग्रहण कहते हैं।
1.0 के बराबर हो तो चंद्रमा ठीक-ठीक पूरी छाया में आ जाता है। और 1.0 से ज्यादा हो तो चंद्रमा पूरा का पूरा छाया में चला जाता है और कुछ हिस्सा और अंदर तक चला जाता है, इसे पूर्ण चंद्रग्रहण कहते हैं।
आज के इस ग्रहण में परिमाण 1.155 है, यानी चंद्रमा का पूरा भाग तो पृथ्वी की छाया में गया ही, बल्कि उसका लगभग 15.5% अतिरिक्त हिस्सा भी पृथ्वी की गहरी छाया के भीतर चला गया। इसी वजह से यह ग्रहण स्पष्ट और पूरा पूर्ण चंद्रग्रहण माना जाता है।
ऐसे ग्रहण में चंद्रमा अक्सर तांबे या लाल रंग का दिखाई देता है, जिसे आम भाषा में ब्लड मून भी कहा जाता है।
ब्लड मून नहीं दिखेगा
चंद्रोदय के समय चांद थोड़ा-सा कटा या धुंधला नजर आएगा। कुछ समय तक चंद्रमा का एक भाग छाया में रहेगा, लेकिन धीरे-धीरे यह छाया हटती जाएगी। हालांकि, इस दौरान लाल रंग वाला “ब्लड मून” प्रभाव रायपुर में देखने को नहीं मिलेगा, क्योंकि पूर्ण चंद्रग्रहण का चरण यहां दिखाई नहीं देगा।
कोरबा
चित्रा टॉकीज प्रांगण में बिखरेंगे रंग, गोपाल मोदी के संग होली का उमंग
रंगों के पावन पर्व पर होली की भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को दी शुभकामनाएं
कोरबा। रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर भारतीय जनता पार्टी के जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी द्वारा 4 मार्च 2026, बुधवार को होली मिलन समारोह का आयोजन किया जा रहा है। यह कार्यक्रम चित्रा टॉकीज प्रांगण, कोरबा में प्रातः 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित होगा।इस आयोजन का उद्देश्य रंगों के इस पावन पर्व पर समाज में आपसी प्रेम, सौहार्द, भाईचारे और एकता का संदेश देना है। समारोह में पार्टी पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि, कार्यकर्ता एवं शहरवासी शामिल होंगे। इस होली मिलन समारोह में उपस्थितजन एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की शुभकामनाएं देंगे तथा आपसी समरसता का संदेश प्रसारित करेंगे।
भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने दी होली की शुभकामनाएं
रंगों के पावन पर्व होली के इस खास अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी ने जिलेवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने शुभकामना संदेश में कहा कि होली केवल रंगों का उत्सव नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमें पुराने मतभेदों को भुलाकर एक-दूसरे के साथ सौहार्दपूर्ण वातावरण में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कह कि रंगों का यह पर्व सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए।
कोरबा
होली खेलें पर जरा संभलकर, त्वचा और बालों का रखें खास ध्यान- त्वचा रोग विशेषज्ञ डॉ. जय
कोरबा। होली रंगों का त्योहार है। इसे बड़े ही उत्साह और हर्ष के साथ मनाया जाता है। पहले पारंपरिक होली फूलों, सूखे गुलाल, और पानी के साथ मनाई जाती थी, लेकिन अब सिंथेटिक रंगों ने इसकी जगह ले ली है। जिसका दुष्प्रभाव न केवल हमारी त्वचा तथा बाल, आंखों में भी पड़ता हैं यह हमारे स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है। होली की मस्ती के साथ-साथ उत्सव के दौरान अपनी त्वचा और बालों की देखभाल करना भी महत्वपूर्ण है। इसलिए इस होली में कुछ बातों का ध्यान रखने की सलाह एनकेएच के त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट डॉ. जय बावने देतें हैं।
डॉ. जय बताते हैं कि होली से एक दिन पहले अपनी त्वचा को ढेर सारे मॉइस्चराइजर से हाइड्रेट करें। अच्छी तरह से हाइड्रेटेड त्वचा नाजुक नहीं होती है जो आसानी से क्षतिग्रस्त नहीं होगी। होली के दिन अपने बालों में नारियल का तेल, शरीर पर बेबी ऑयल और होंठों पर लिप बाम लगाएं एवं अपनी त्वचा को सुरक्षित रखें। तेल लगाने के बाद सनस्क्रीन लगाना न भूलें। कपड़े पूरी बाजू के पहनें ताकि त्वचा को नुकसान कम से कम हो। अपने नाखूनों की सुरक्षा के लिए नेल पॉलिश लगाएं। होली के दिन भी खूब पानी पिएं और हाइड्रेटेड रहें।
होली के बाद त्वचा और बालों की देखभाल के टिप्स देते हुए डॉ. जय बतातें हैं कि एक बार जब रंग थोड़ा फीका हो जाए, तो त्वचा को हाइड्रेट और मॉइस्चराइज करने के लिए मेडिकल फेशियल करवाना चाहिए। यह आपको आकर्षक लुक वापस पाने में मदद करेगा। अगर आपको लगता है कि आपकी त्वचा हल्की फट रही है, तो एलोवेरा जेल या लैक्टोकैलेमाइन लोशन लगाएं, लेकिन अगर दाने बने रहते हैं, तो बिना किसी देरी के त्वचा विशेषज्ञ से मिलें। बालों को धोने से पहले सप्ताह में एक बार प्राकृतिक हेयर मास्क का उपयोग करें। डॉ. जय सुझाव देते हैं कि होली खेलने में अधिक पानी, फूलों की पंखुड़ियों और ऑर्गेनिक रंग का उपयोग करना बेहतर है। डॉ. जय बावने त्वचा रोग विशेषज्ञ एवं कॉस्मेटोलॉजिस्ट विशेषज्ञ एडीसी लैब निहारिका और न्यू कोरबा हॉस्पिटल में नियमित रूप से उपलब्ध रहते है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : रंगों में घुले प्रेम और सौहार्द का त्योहार है होली : मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने दी होली की शुभकामनाएँ
रायपुर। महिला एवं बाल विकास तथा समाज कल्याण मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने रंगों के पावन पर्व होली के अवसर पर प्रदेशवासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएँ दी हैं।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने अपने संदेश में कहा है कि होली केवल रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि आपसी प्रेम, भाईचारे और सामाजिक समरसता का प्रतीक है। यह पर्व हमारे जीवन में नई ऊर्जा, उल्लास और सकारात्मकता का संचार करता है तथा भेदभाव मिटाकर सभी को एक सूत्र में पिरोने का संदेश देता है।उन्होंने कामना की कि यह होली सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। साथ ही उन्होंने प्रदेशवासियों से अपील की कि त्योहार मनाते समय प्राकृतिक रंगों का उपयोग करें, जल संरक्षण का ध्यान रखें तथा पर्यावरण को स्वच्छ और सुरक्षित बनाए रखने में अपना सक्रिय सहयोग दें।
मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि पारंपरिक मूल्यों और सामाजिक जिम्मेदारी के साथ मनाई गई होली ही सच्चे अर्थों में आनंद और सौहार्द का उत्सव बनती है तथा समाज में प्रेम, भाईचारे और आपसी विश्वास को और अधिक मजबूत करती है।
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