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छत्तीसगढ़

रायपुर : बीजापुर के अंकित सकनी ने यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा में पाई सफलता, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने दी बधाई

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रायपुर। बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ विकासखंड के छोटे से ग्राम गुदमा के युवा अंकित सकनी ने संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की सिविल सेवा परीक्षा 2025 में 816वीं रैंक प्राप्त कर न केवल अपने परिवार और गांव का, बल्कि पूरे बस्तर संभाग और छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया है।

इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने अंकित सकनी और उनके माता-पिता से वीडियो कॉल के माध्यम से बातचीत कर उन्हें हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। मुख्यमंत्री ने अंकित की इस सफलता को प्रदेश के युवाओं के लिए प्रेरणादायी बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि सीमित संसाधनों और कठिन परिस्थितियों के बावजूद अंकित ने अपनी मेहनत, लगन और दृढ़ संकल्प के बल पर यह सिद्ध कर दिया है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और प्रयास निरंतर हो, तो सफलता अवश्य मिलती है।उन्होंने कहा कि बीजापुर जैसे दूरस्थ और आदिवासी अंचल के छोटे से गांव से निकलकर देश की सबसे कठिन मानी जाने वाली यूपीएससी परीक्षा में सफलता प्राप्त करना अत्यंत गौरव और प्रेरणा का विषय है। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि बस्तर क्षेत्र के युवाओं के लिए भी एक सकारात्मक संदेश है कि वे भी अपने सपनों को साकार कर सकते हैं।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : ‘मन की बात’ में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

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प्रधानमंत्री ने छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण प्रयासों की सराहना कर बढ़ाया प्रदेश का मान – मुख्यमंत्री साय

जनभागीदारी और नवाचार को राष्ट्रीय मंच पर मिल रही पहचान उत्साहजनक : “मन की बात”  देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम – मुख्यमंत्री

'मन की बात' में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय
'मन की बात' में छत्तीसगढ़ का निरंतर जिक्र गौरव की बात : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा अपने लोकप्रिय मासिक रेडियो कार्यक्रम “मन की बात” में छत्तीसगढ़ में काले हिरण के संरक्षण के प्रयासों का उल्लेख किए जाने पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे प्रदेश के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंच पर छत्तीसगढ़ की उपलब्धियों का लगातार जिक्र होना न केवल राज्य की पहचान को सुदृढ़ करता है, बल्कि प्रदेशवासियों के मनोबल को भी नई ऊंचाई प्रदान करता है। 

मुख्यमंत्री श्री साय ने राजधानी रायपुर के भाटागांव स्थित विनायक सिटी में विशाल जनसमूह के साथ “मन की बात” की 133वीं कड़ी का श्रवण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि “मन की बात” आज देश के जनमानस को जोड़ने वाला एक सशक्त माध्यम बन चुका है, जिसके जरिए देश के कोने-कोने में हो रहे नवाचार, जनभागीदारी और जमीनी स्तर के उत्कृष्ट प्रयासों को राष्ट्रीय पहचान मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक अभिभावक की तरह देशवासियों से संवाद करते हुए न केवल प्रेरणादायक कहानियों को सामने लाते हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित भी करते हैं। इस संवाद के माध्यम से लोगों में सहभागिता की भावना मजबूत होती है और राष्ट्र निर्माण की दिशा में सामूहिक प्रयासों को नई ऊर्जा मिलती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में काले हिरण संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का राष्ट्रीय स्तर पर उल्लेख होना राज्य के लिए विशेष सम्मान का विषय है। इससे यह स्पष्ट होता है कि पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता मजबूत है। साथ ही, यह अन्य राज्यों के लिए भी एक प्रेरणादायक मॉडल के रूप में उभर रहा है।

उन्होंने आगे कहा कि बांस को पेड़ की श्रेणी से अलग कर विशेष श्रेणी में शामिल किए जाने के बाद इसके उपयोग में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे विशेष रूप से महिलाओं की आय में सकारात्मक बदलाव आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री द्वारा पवन ऊर्जा की आवश्यकता और संभावनाओं पर दिए गए विशेष जोर का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में निरंतर और ठोस प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे भविष्य में ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा मिलेगा। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने एक अनूठी पहल करते हुए उपस्थित जनसमूह के साथ घर से लाए गए छत्तीसगढ़ी व्यंजनों को साझा कर साथ में भोजन किया। उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में आपसी विश्वास, अपनापन और एकता की भावना को मजबूत करते हैं।
इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, वन मंत्री केदार कश्यप, विधायक पुरन्दर मिश्रा, विधायक संपत अग्रवाल, छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन, अजय जामवाल, अखिलेश सोनी, रमेश ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में  गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

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कोरबा

कोरबा में बैंक कर्मी की सड़क हादसे में मौत

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कोरबा/उरगा। कोरबा के उरगा गुमिया के पास भारतमाला मुख्य मार्ग पर शुक्रवार देर रात एक सड़क हादसे में आईसीआईसीआई बैंक के एक कर्मचारी की मौत हो गई। तेज रफ्तार कार मवेशी से टकराने के बाद अनियंत्रित होकर डिवाइडर से जा भिड़ी थी। घायल चालक को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां शनिवार को उसकी मौत की पुष्टि हुई। मृतक की पहचान कोरबा पुरानी बस्ती, दुरपा रोड निवासी प्रज्वल राठौर (26) के रूप में हुई है। वह आईसीआईसीआई बैंक में कार्यरत थे और मूल रूप से सक्ती के पासिद (सुआ डेरा) के रहने वाले थे, जो पिछले कई सालों से कोरबा में रह रहे थे।

अचानक मवेशी के आने से हुआ हादसा
बताया जा रहा है कि प्रज्वल कोरबा से रायपुर किसी परिचित को देखने हॉस्पिटल जा रहे थे। भारतमाला मार्ग पर अचानक एक मवेशी सामने आ गया, जिससे यह हादसा हुआ। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया और मवेशी की भी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद कार के एयरबैग खुल गए थे।
सिविल लाइन थाना पुलिस ने अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर परिजनों के बयान दर्ज किए हैं। पुलिस ने आगे की कार्रवाई करते हुए पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है।

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कोरबा

मजदूरों के हक में गूंजा न्याय, RCWF ने सेंट्रल ट्रिब्यूनल में जीती दो बड़ी कानूनी लड़ाइयाँ

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चिरमिरी कोलियरी के श्रमिकों को मिलेगा 6प्रतिशत ब्याज के साथ एरियर और पदोन्नति का लाभ
कोरबा/चिरमिरी। राष्ट्रीय कालरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) ने श्रमिकों के हितों की रक्षा करते हुए केंद्रीय औद्योगिक अधिकरण (Central Industrial Tribunal) से दो महत्वपूर्ण मामलों में ऐतिहासिक जीत हासिल की है। ट्रिब्यूनल ने प्रबंधन की गलतियों को सुधारते हुए श्रमिकों के पक्ष में फैसला सुनाया है और उन्हें बकाया राशि पर 6प्रतिशत ब्याज भुगतान करने का आदेश दिया है ।

प्रमुख मामले और ट्रिब्यूनल का फैसला
मोहम्मद जमील:- 32 साल बाद मिला ऑफिशिएटिंग अलाउंस का हक।

पृष्ठभूमि:- मोहम्मद जमील की नियुक्ति 1994 में कैटेगरी -1 में हुई थी, लेकिन उनसे क्लर्क ग्रेड का POL इश्यूअर कार्य लिया गया। प्रबंधन ने लंबे समय तक उन्हें उचित भत्ता नहीं दिया और मांग करने पर उनका स्थानांतरण कर दिया गया।
फैसला:- ट्रिब्यूनल ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद यह माना कि मो. जमील ऑफिशिएटिंग अलाउंस के हकदार हैं। कोर्ट ने आदेश दिया है कि उन्हें पूरी कार्य अवधि का भत्ता 6′ वार्षिक ब्याज के साथ भुगतान किया जाए ।
जे.पी. वर्मा:- 39 साल पुराने ‘कैडर स्कीमÓ विवाद पर जीत
पृष्ठभूमि: फार्मासिस्ट जे.पी. वर्मा के मामले में प्रबंधन की प्रशासनिक देरी (कैडर स्कीम 1987 को चिरमिरी एरिया में 1989 में लागू करना) की वजह से उनकी वरिष्ठता प्रभावित हुई थी जिससे वे पदोन्नति में पिछड़ गए थे ।
फैसला:- ट्रिब्यूनल ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए आदेश दिया कि वर्मा को पिछली तारीखों से सभी पदोन्नतियों का लाभ दिया जाए और उनके वेतन का पुन: निर्धारण कर 6प्रतिशत ब्याज सहित एरियर का भुगतान किया जाए ।
यूनियन की प्रतिबद्धता
RCWF के महामंत्री प्रो. भागवत प्रसाद दुबे ने स्वयं इन मामलों में स्टेटमेंट ऑफ क्लेम तैयार किया और पैरवी की जीत पर खुशी जाहिर करते हुए उन्होंने कहा:- यह केवल दो श्रमिकों की जीत नहीं है बल्कि उन सभी कामगारों की जीत है, जो प्रबंधन की विसंगतियों के कारण अपने हक से वंचित रह जाते हैं। चूँकि प्रबंधन के साथ वार्ता प्रणाली (IR System) फिलहाल बाधित है, इसलिए यूनियन पूरी ताकत के साथ कन्सीलिएशन मशीनरी और ट्रिब्यूनल के माध्यम से लड़ाई लड़ रही है ।

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