बिज़नस
भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा
वॉशिंगटन,एजेंसी। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो।
पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है।
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
देश
सरकार का बड़ा फैसला: 16 कॉम्बिनेशन दवाओं पर लगा तुरंत बैन
नई दिल्ली, एजेंसी। देश में लोगों की सेहत की सेफ्टी को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया गया है। सरकार ने पूरे भारत में 16 फिक्स्ड-डोज़ कॉम्बिनेशन (FDC) दवाओं के बनाने, बेचने, बांटने और सप्लाई करने पर तुरंत प्रभाव से रोक लगा दी है।
यह कड़ा फैसला केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ की धारा 26A के तहत एक नोटिफिकेशन जारी करके लिया गया है। एक्सपर्ट्स की जांच में सामने आया है कि इन दवाओं को मिलाकर बेचना वैज्ञानिक और मेडिकल तौर पर सही नहीं था। यह कदम एक वैज्ञानिक समीक्षा के बाद उठाया गया है।

क्यों लगाया गया इन दवाओं पर बैन?
क्या होती हैं FDC दवाएं? FDC (Fixed-Dose Combination) दवाएं वे होती हैं, जिनमें दो या दो से ज्यादा दवाओं के एक्टिव साल्ट (सामाग्री) को एक निश्चित मात्रा में मिलाकर एक ही दवा (जैसे एक टैबलेट या सिरप) के रूप में तैयार किया जाता है।
बैन की वजह: सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद ‘ड्रग्स टेक्निकल एडवाइजरी बोर्ड’ ने एक एक्सपर्ट कमेटी बनाई थी। जांच में पाया गया कि इन 16 कॉम्बिनेशन दवाओं को एक साथ मिलाकर देने का कोई मेडिकल आधार नहीं था। सरकार के मुताबिक, इन दवाओं के फायदे से ज्यादा इनके नुकसान या जोखिम होने की आशंका थी, इसलिए इन्हें ‘असुरक्षित और अतार्किक’ माना गया।
कौन-कौन सी दवाओं पर लगी है रोक?
बैन की गई दवाएं अलग-अलग बीमारियों के इलाज में इस्तेमाल होती थीं, जिनमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, पेट दर्द और स्किनकेयर (त्वचा) की दवाएं शामिल हैं:
1. पेट दर्द, दर्द और ऐंठन की दवाएं:
एसिटाइल सैलिसिलिक एसिड + एथोहेप्टाज़ीन
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड
डाइसाइक्लोमाइन + पैरासिटामोल + क्लिडिनियम ब्रोमाइड + क्लोरडायज़ेपॉक्साइड
पैरासिटामोल + लिग्नोकेन
2. डायबिटीज की दवा:
ग्लिक्लाज़ाइड + क्रोमियम पिकोलिनेट
3. एंटीबायोटिक दवाओं के कॉम्बिनेशन:
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़
एमोक्सिसिलिन + सेराटियोपेप्टिडेज़ + लैक्टोबैसिलस स्पोरोजेन्स
एमोक्सिसिलिन + क्लोक्सासिलिन + लैक्टिक एसिड बैसिलस + सेराटियोपेप्टिडेज़
सेफैड्रोक्सिल + प्रोबेनेसिड
सेफुरोक्सिम + सेराटियोपेप्टिडेज़
4. स्किनकेयर और क्रीम :
ऐसी क्रीम या लोशन जिनमे एलोवेरा (Aloe extract) के साथ नीचे दिए गए तत्वों को मिलाया गया था, उन पर भी रोक लगा दी गई है जैसे कि… Vitamin E, Jojoba oil, Orange oil, Wheat germ oil, Tea tree oil, Allantoin, D-Panthenol का कॉम्बिनेशन।
देश
Flipkart ने ऑनलाइन बाजार में बढ़ाई बढ़त, मिंत्रा की फैशन खंड में स्थिति मजबूत
नई दिल्ली, एजेंसी। ई-कॉमर्स क्षेत्र की प्रमुख कंपनी फ्लिपकार्ट ग्रुप ने देश के ऑनलाइन बाजार में अपनी बढ़त को और मजबूत कर लिया है। इसके साथ ही समूह ने अपनी सहयोगी कंपनी मिंत्रा के जरिए ऑनलाइन फैशन क्षेत्र में भी अपनी स्थिति और सुदृढ़ की है। यह जानकारी बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) सिक्योरिटीज की एक रिपोर्ट में दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, इंटरनेट क्षेत्र में बढ़ती कड़ी प्रतिस्पर्धा के बावजूद उपभोक्ताओं की मजबूत मांग के कारण फ्लिपकार्ट अपनी अग्रणी स्थिति बनाए हुए है।

ब्रोकरेज कंपनी ‘बोफा’ ने सेंसर टावर के दैनिक सक्रिय उपयोगकर्ता (डीएयू) आंकड़ों और उद्योग विश्लेषण का हवाला देते हुए कहा कि जून 2026 तक उपयोगकर्ता सहभागिता के मामले में फ्लिपकार्ट प्रमुख ई-कॉमर्स मंच बनी रही। वहीं, फैशन खंड में मिंत्रा ने अपने प्रतिद्वंद्वी मंचों पर स्पष्ट बढ़त हासिल कर ली है। बैंक ऑफ अमेरिका ने कहा कि प्रीमियम फैशन और सौंदर्य श्रेणियों में अपेक्षाकृत सीमित प्रतिस्पर्धा के चलते मिंत्रा की बढ़त और मजबूत होती दिख रही है। ब्रोकरेज कंपनी के अनुसार, मुद्रास्फीति दबाव में कमी और व्यापक आर्थिक परिस्थितियों में सुधार से निकट अवधि में उपभोग वृद्धि को गति मिलने की संभावना है।
देश
RVNL को मिला NMDC से 2,977 करोड़ का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट
नई दिल्ली, एजेंसी। रेल विकास निगम लिमिटेड (RVNL) ने शनिवार को घोषणा की कि उसे सरकारी खनन कंपनी एनएमडीसी से 2,977 करोड़ रुपए का बड़ा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट मिला है, जो आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में बफर स्टॉकयार्ड और ब्लेंडिंग सुविधा के विकास से संबंधित है। स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत 10 मिलियन टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) सामग्री संभालने की क्षमता वाला बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड स्थापित किया जाएगा। यह सुविधा विशाखापट्टनम बंदरगाह पर एनएमडीसी की लॉजिस्टिक्स और सामग्री प्रबंधन क्षमता को मजबूत बनाने में मदद करेगी।

आरवीएनएल ने कहा, “यह सूचित किया जाता है कि रेल विकास निगम लिमिटेड को एनएमडीसी लिमिटेड से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 10 एमटीपीए क्षमता वाले बफर स्टॉकपाइल और ब्लेंडिंग यार्ड की स्थापना के लिए अनुबंध प्रदान करने का पत्र प्राप्त हुआ है।” कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह अनुबंध एक घरेलू संस्था द्वारा सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत दिया गया है और यह किसी भी प्रकार के संबंधित पक्ष (रिलेटेड पार्टी) लेनदेन के दायरे में नहीं आता।
आरवीएनएल ने यह भी कहा कि उसके प्रमोटरों या समूह की किसी भी कंपनी का एनएमडीसी में कोई वित्तीय या अन्य प्रकार का हित नहीं है। इस प्रोजेक्ट को कॉन्ट्रैक्ट मिलने की तारीख से 42 महीनों के भीतर पूरा किया जाना है। प्रोजेक्ट के चालू होने के बाद लौह अयस्क और अन्य कच्चे माल के भंडारण, प्रबंधन और परिवहन में सुधार होने की उम्मीद है, जिससे आपूर्ति शृंखला की दक्षता बढ़ेगी। बफर स्टॉकयार्ड और ब्लेंडिंग सुविधाएं खनन उद्योग में बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती हैं। इनके जरिए कंपनियां अपने भंडार का बेहतर प्रबंधन कर सकती हैं और ग्राहकों को लगातार समान गुणवत्ता वाला कच्चा माल उपलब्ध करा सकती हैं।
विशाखापट्टनम में प्रस्तावित यह नई सुविधा एनएमडीसी की बढ़ती लॉजिस्टिक्स जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ सामग्री प्रबंधन कार्यों को और अधिक कुशल बनाने में मदद करेगी। रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) भारतीय रेलवे मंत्रालय के अधीन एक नवरत्न केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रम है। कंपनी देश भर में रेलवे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के विकास और क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
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