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छत्तीसगढ़

कल से चैत्र-नवरात्रि, डोंगरगढ़ में 10 ट्रेनों का स्टॉपेज:5 शक्तिपीठों में विशेष आरती, ज्योति-कलश के लिए NRI-विदेशियों की एडवांस बुकिंग,श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम

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रायपुर,एजेंसी। कल यानी 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। छत्तीसगढ़ के देवी मंदिरों में भी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बस्तर के मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी, बिलासपुर के महामाया मंदिर, रायपुर के महामाया मंदिर समेत 10 मंदिरों में विशेष आरती के साथ मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाएंगे।

वहीं, विदेशी और NRI ने भी ज्योति कलश जलवाने के लिए एडवांस बुकिंग की है। इस दौरान डोंगरगढ़ में 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज भी दिया गया है। 19 से 27 मार्च तक 4 लोकल गाड़ियों का विस्तार भी किया गया है, डोंगरगढ़-दुर्ग के बीच स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी।

वर्षों बाद ऐसा हो रहा है कि कलश स्थापना अमावस्या तिथि में की जाएगी, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। 19 मार्च को शुक्ल और ब्रह्म योग का दुर्लभ मेल भी बन रहा है, जिससे इस नवरात्रि का महत्व और बढ़ गया है। खास बात यह है कि प्रतिपदा तिथि का अभाव होने के बावजूद नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक चलेगी।

मां महामाया 52 शक्ति पीठों में से एक है

बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। ये 52 शक्ति पीठों में से एक है। देवी महामाया को कोसलेश्वरी के रूप में भी जाना जाता है, जो पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: पैदल यात्रियों के लिए बस, निशुल्क भंडारा, स्वास्थ्य सुविधा।
  • क्या खास- पार्किंग की परेशानियों को देखते हुए इस बार 20 एकड़ में पार्किंग बनाई गई है।

मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र

डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी शक्ति पीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था।

मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चुरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।

पुलिस ने विशेष क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी।

श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा। ऊपर पेयजल की व्यवस्था, विश्रामालयों के अलावा भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा है। पहाड़ी के नीचे 24 घंटे भोजन।

काले पत्थर से तराश कर बनाई गई मां दंतेश्वरी की मूर्ति

देश के 52 शक्ति पीठों में से एक दंतेश्वरी मंदिर है। मान्यता है कि यहां देवी का दांत गिरा था। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है। मां की मूर्ति काले पत्थर से तराश कर बनाई गई है। मंदिर को चार भागों में विभाजित किया गया है।

गर्भगृह और महा मंडप का निर्माण पत्थर के टुकड़ों से किया गया था। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने एक गरुड़ स्तंभ है। मंदिर खुद एक विशाल प्रांगण में स्थित है जो विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। शिखर को मूर्तिकला से सजाया गया है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: 10 ग्राम चांदी का सिक्का 4100 रुपए में खरीद सकेंगे। धर्मशाला-हॉल में रुकने की सुविधा।
  • क्या खास: इस बार भी VIP दर्शन की सुविधा होगी। 500 रुपए प्रति व्यक्ति रसीद कटानी होगी। धोती यहां से मिलेगी। महिलाएं सलवार और साड़ी पहनकर ही गर्भगृह तक जा सकेंगी।

अंबिकापुर का नाम ही महामाया अंबिका देवी के नाम पर है। किवदंति है कि महामाया का सिर रतनपुर और धड़ अम्बिकापुर में है। माता की प्रतिमा छिन्न मस्तिका है। महामाया के बगल में विंध्यवासिनी विराजी हैं। विंध्यवासिनी की प्राण प्रतिष्ठा विंध्याचल से लाकर की गई है।

शारदीय नवरात्र में छिन्न मस्तिका महामाया के शीश का निर्माण राजपरिवार के कुम्हार हर साल करते हैं। जिस प्रतिमा को मां महामाया के नाम से लोग पूजते हैं, पहले इनका नाम समलाया था। महामाया मंदिर में ही दो मूर्तियां स्थापित थी।

पहले महामाया को बड़ी समलाया कहा जाता था और समलाया मंदिर में विराजी मां समलाया को छोटी समलाया कहते थे। बाद में समलाया मंदिर में छोटी समलाया को स्थापित किया गया, तब महामाया कहा जाने लगा।

सक्ती जिले के चंद्रपुर की छोटी सी पहाड़ी के ऊपर विराजित है मां चंद्रहासिनी। मान्यता है कि देवी सती का अधोदन्त (दाढ़) चंद्रपुर में गिरा था। यह मां दुर्गा के 52 शक्ति पीठों में से एक है। यहां बनी पौराणिक और धार्मिक कथाओं की झाकियां, करीब 100 फीट विशालकाय महादेव पार्वती की मूर्ति आदि आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : ठहरने के लिए चंद्रहासिनी मंदिर धर्मशाला उपलब्ध है।

1400 साल पहले रायपुर के महामाया मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजाओं ने करवाया था। महामाया मंदिर का गर्भगृह और गुंबद का निर्माण श्रीयंत्र के रूप में हुआ है। मंदिर में मां महालक्ष्मी, मां महामाया और मां समलेश्वरी तीनों की पूजा आराधना एक साथ की जाती है।

घटस्थापना से होती है चैत्र नवरात्रि की शुरुआत

नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। कलश को माता दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के साथ ही 9 दिनों तक चलने वाली पूजा शुरू हो जाती है। कई लोग इन दिनों व्रत रखते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं। मंत्र जप, ध्यान और देवी मां के ग्रंथों का पाठ करते हैं। इन दिनों में देवी के 51 शक्तिपीठों में काफी भक्त पहुंचते हैं।

रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित मां महामाया मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के लिए घर बैठे दान और दर्शन की सुविधा दी है। इसे लेकर UPI भी जारी किया गया है। माता को शृंगार का सामान चढ़ाने और अपने नाम से भोग लगाने के लिए लोग घर बैठे इस सुविधा का फायदा ले सकते हैं।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: भंडारा, धूप से बचाने मंदिर में ग्रीन नेट लगाया गया।
  • क्या खास: इस बार गुरुवार की वजह से माता पालकी में आएंगी। 9 दिन तक विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

यह मंदिर कोरेश के जमींदार परिवार ने बनवाया था। त्रिलोकी नाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन से घिरा हुआ है। वहां भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाती है और दूसरी तरफ निकलती है।

गंगरेल में 52 गांव डूबने के बाद मां अंगार मोती माता की स्थापना की गई थी। माता के चरण पादुका मंदिर में अभी भी विराजित है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: निशुल्क रुकने के लिए धर्मशाला, VIP के लिए अलग से रूम की सुविधा।

महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर स्थित है। किंवदन्ती है कि करीब 150 साल पहले ये तंत्र-मंत्र की साधना स्थल हुआ करता था। यहां महिलाओं का जाना प्रतिबंधित था। प्राकृतिक रूप से माता चंडी के स्वरूप में शिला (पत्थर) ने आकार लिया। वैदिक रीति रिवाज से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। इसके बाद महिलाओं का चंडी माता की पूजा करने का प्रतिबंध समाप्त हुआ।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : पेयजल, नि शुल्क भोजन, ठहरने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध रहेगी।
  • क्या खास: यहां सुबह शाम, आरती के दौरान कई बार भालूओं के भी दर्शन हो जाते हैं।

बरफानी धाम राजनांदगांव शहर में स्थित है। मंदिर के शीर्ष पर एक बड़ा शिवलिंग देखा जा सकता है। उसके सामने एक बड़ी नंदी प्रतिमा है। मंदिर तीन स्तरों में बनाया जाता है। नीचे की परत में पाताल भैरवी का मंदिर है, दूसरे में नवदुर्गा या त्रिपुर सुंदरी और ऊपरी स्तर में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमा है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: नि:शुल्क रुकने और भंडारे (प्रसाद) की सुविधा। 24 घंटे दर्शन कर सकेंगे।
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जगदलपुर : बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

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जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट, अब शिक्षा, बैंक और योजनाओं तक पहुंच होगी सरल

 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक
 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

जगदलपुर। किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाए और वर्षों बाद भी जमीन के सरकारी कागजों में उनका ही नाम दर्ज रहे। ऐसे में परिवार को हर छोटे-बड़े काम के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में हजारों परिवारों की यही समस्या थी। जिला प्रशासन खुद आगे बढ़कर इस परेशानी को दूर करने का काम कर रही है। बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों के लंबित फौती नामांतरण मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य था कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में उनके परिवार के सही वारिसों का नाम दर्ज किया जाए। इस काम की शुरुआत गांवों से हुई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत्यु को प्राप्त लोगों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने उन लोगों की पहचान की जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी और जिनके मामलों में फौती नामांतरण की जरूरत थी। कोटवारों ने गांव स्तर पर जानकारी का सत्यापन किया और तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी की।

 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

अभियान के दौरान बस्तर जिले के 611 गांवों से जानकारी जुटाई गई। ग्राम सचिवों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई थी। इनमें से 8,651 ऐसे मामले मिले जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी। इसके बाद ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार की संयुक्त टीम ने घर-घर जाकर ,जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, उनके लिए प्रमाण पत्र बनवाए गए। वारिसों की जानकारी और वंशवृक्ष तैयार किए गए। सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस विशेष अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर दिया गया है। इसका मतलब है कि हजारों परिवारों की जमीन के सरकारी रिकॉर्ड अब सही हो गए हैं। केवल 410 मामले ही शेष हैं, जिन पर कार्य जारी है।

यह अभियान बस्तर जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में चलाया गया। इनमें तोकापाल, करपावंड, बस्तर, बास्तानार, बकावंड, भानपुरी, नानगुर, जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और दरभा जैसे सुदूर आदिवासी अंचल शामिल हैं। सबसे अधिक प्रगति बकावंड, करपावंड, नानगुर और बास्तानार जैसे क्षेत्रों में देखने को मिली, जबकि जगदलपुर और लोहंडीगुड़ा में लगभग सभी पात्र मामलों का निराकरण कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बस्तर में चलाया गया यह विशेष फौती नामांतरण अभियान इसी सोच का परिणाम है। जिन परिवारों के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके वारिसों को उनके अधिकार समय पर मिलें, यह हमारी प्राथमिकता है। हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट होने से उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें प्रशासन स्वयं लोगों के घर तक पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान कर रहा है।

बस्तर जिले की सभी तहसीलों में इस अभियान को अच्छी सफलता मिली। तोकापाल में 1,454, करपावंड में 504, बस्तर में 1,019, बास्तानार में 337 और बकावंड में 1,142 मामलों का निराकरण किया गया। वहीं भानपुरी में 959, नानगुर में 518, जगदलपुर में 1,057, लोहंडीगुड़ा में 799 और दरभा में 452 परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट किए गए। सबसे अच्छी प्रगति जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और बकावंड क्षेत्रों में देखने को मिली।

इस अभियान की खास बात यह रही कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचा, रिकॉर्ड खंगाले, दस्तावेज तैयार कराए और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्य में तेजी आई।

बस्तर कलेक्टर ने कहा कि जिले के कई दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जमीन संबंधी कार्यों के लिए लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई परिवारों को केवल इसलिए परेशानी होती थी क्योंकि जमीन के रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति का नाम दर्ज था। विशेष अभियान चलाकर प्रशासन ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर इस समस्या का समाधान किया। अब हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड सही हो गए हैं, जिससे उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने, बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने और शासकीय योजनाओं से जुड़ने में आसानी होगी। इससे न केवल लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा, बल्कि जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी और ग्रामीणों का जीवन अधिक सरल बनेगा।

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छत्तीसगढ़

सुकमा : बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू

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नक्सल पुनर्वास नीति 2025 ने बदली जिंदगी, मुख्यधारा से जुड़कर बन रहे स्वावलंबी

बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू
बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू
बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू

सुकमा। कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे पोडियाम राजू, मनीष लखमा और कलमू कोसा आज आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई मिसाल बन गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद इन युवाओं को जिला प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। अब वे सुकमा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।

पुनर्वास नीति बनी नई शुरुआत का आधार

        आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन ने तीनों युवाओं को पुनर्वास योजना से जोड़ते हुए वाहन संचालन का प्रशिक्षण दिलाया। साथ ही उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें निःशुल्क ई-रिक्शा प्रदान किए गए, जिससे वे नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सके।

प्रशासन ने बढ़ाया उत्साह

        आज शनिवार को कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण तथा डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं इनके ई-रिक्शा में सफर कर उनका उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों के इस आत्मीय सहयोग से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें समाज में सम्मानजनक पहचान मिली।

शासकीय योजना से बदली जीवन की दिशा

        नक्सल पुनर्वास नीति के माध्यम से शासन ऐसे युवाओं को न केवल हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि कभी समाज से दूर रहने वाले ये युवा आज शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।

दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

       राजू, मनीष और कलमू की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, शासन की संवेदनशील पहल और दृढ़ संकल्प से जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। आज ये तीनों युवा उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो भटकाव छोड़कर विकास और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

सफलता की नई पहचान

         इन युवाओं की कहानी यह संदेश देती है कि हिंसा और संघर्ष का रास्ता केवल कठिनाइयों की ओर ले जाता है, जबकि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़कर सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति ऐसे अनेक युवाओं के जीवन में उम्मीद और बदलाव की नई रोशनी लेकर आ रही है।

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भूपेश के आरोपों के बाद प्रशासन एक्टिव:पाटन में 135 कृषि केंद्रों पर छापे, अमानक खाद जब्त, सात विक्रेताओं को नोटिस

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा खाद और बीज की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद दुर्ग जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रशासन ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध होने का दावा करते हुए विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। साथ ही कृषि विभाग ने 135 कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर अमानक उर्वरक जब्त किए हैं और सात विक्रेताओं को नोटिस जारी किया है।

भूपेश बघेल ने हाल ही में पाटन क्षेत्र के दौरे के दौरान किसानों से मुलाकात कर खाद-बीज की समस्या को विधानसभा में उठाने की बात कही थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने उपलब्धता और भंडारण संबंधी जानकारी सार्वजनिक की।

खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त भंडारण का दावा

कृषि विभाग और बीज निगम के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए पाटन विकासखंड में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है। आईएमएफएस (iMFS) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 5556.78 मीट्रिक टन यूरिया, 2763.07 मीट्रिक टन एसएसपी, 1314.60 मीट्रिक टन पोटाश, 1105.05 मीट्रिक टन डीएपी और 1026.90 मीट्रिक टन एनपीके का भंडारण किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया का भंडारण 959 मीट्रिक टन, एसएसपी 460 मीट्रिक टन और पोटाश 506 मीट्रिक टन अधिक रखा गया है।

डीएपी की कमी स्वीकार, विकल्पों पर जोर

कृषि विभाग ने डीएपी की आंशिक कमी स्वीकार करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने की बात कही है। विभाग द्वारा एसएसपी, टीएसपी, एनपीके और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इन उर्वरकों में फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध हैं और किसानों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक

प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ और बीज निगम रूआबांधा में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। अधिकारियों ने खाद-बीज की किल्लत से इनकार करते हुए आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है।

135 कृषि केंद्रों की जांच

खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने निजी और सहकारी कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।

अब तक जिले के 135 कृषि केंद्रों की जांच की जा चुकी है। निरीक्षण में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के नियमों के उल्लंघन, स्टॉक संधारण में गड़बड़ी और बिना अनुमति अतिरिक्त स्रोतों से उर्वरक बिक्री के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में सात विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

अमानक खाद जब्त, कई केंद्रों पर कार्रवाई

जांच के दौरान सेलूद, रानीतराई और धमधा क्षेत्र के कृषि केंद्रों में बायो स्टिम्यूलेंट के अनियमित विक्रय के मामले मिले। वहीं ऋषभराज फर्टिलाइजर, विद्या कृषि केंद्र बोरी और कृषि सेवा केंद्र पाटन में उर्वरकों के स्टॉक और अधिक मूल्य पर बिक्री संबंधी अनियमितताएं पाई गईं।

कृषि विभाग ने यूरिया, एनपीके, एसएसपी, पोटाश, ऑर्गेनिक मैन्योर और बायो स्टिम्यूलेंट सहित बड़ी मात्रा में उर्वरक जब्त कर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया है।

पांच नमूने अमानक पाए गए

विभागीय जांच के दौरान पांच विक्रय केंद्रों से लिए गए उर्वरक नमूनों की प्रयोगशाला जांच में सभी नमूने अमानक पाए गए। इसके बाद संबंधित उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। संबंधित विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद-बीज की कृत्रिम किल्लत पैदा करने, कालाबाजारी करने अथवा अमानक उर्वरकों की बिक्री करने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

अधिकारियों ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद-बीज वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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