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छत्तीसगढ़

कल से चैत्र-नवरात्रि, डोंगरगढ़ में 10 ट्रेनों का स्टॉपेज:5 शक्तिपीठों में विशेष आरती, ज्योति-कलश के लिए NRI-विदेशियों की एडवांस बुकिंग,श्रद्धालुओं के लिए खास इंतजाम

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रायपुर,एजेंसी। कल यानी 19 मार्च से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है। छत्तीसगढ़ के देवी मंदिरों में भी तैयारियां लगभग पूरी हो चुकी हैं। बस्तर के मां दंतेश्वरी, डोंगरगढ़ के मां बम्लेश्वरी, बिलासपुर के महामाया मंदिर, रायपुर के महामाया मंदिर समेत 10 मंदिरों में विशेष आरती के साथ मनोकामना ज्योति कलश प्रज्जवलित किए जाएंगे।

वहीं, विदेशी और NRI ने भी ज्योति कलश जलवाने के लिए एडवांस बुकिंग की है। इस दौरान डोंगरगढ़ में 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का स्टॉपेज भी दिया गया है। 19 से 27 मार्च तक 4 लोकल गाड़ियों का विस्तार भी किया गया है, डोंगरगढ़-दुर्ग के बीच स्पेशल ट्रेन भी चलाई जाएगी।

वर्षों बाद ऐसा हो रहा है कि कलश स्थापना अमावस्या तिथि में की जाएगी, जिसे बहुत शुभ माना जाता है। 19 मार्च को शुक्ल और ब्रह्म योग का दुर्लभ मेल भी बन रहा है, जिससे इस नवरात्रि का महत्व और बढ़ गया है। खास बात यह है कि प्रतिपदा तिथि का अभाव होने के बावजूद नवरात्रि पूरे 9 दिनों तक चलेगी।

मां महामाया 52 शक्ति पीठों में से एक है

बिलासपुर जिले के रतनपुर स्थित महामाया मंदिर महाकाली, महालक्ष्मी और महासरस्वती को समर्पित है। ये 52 शक्ति पीठों में से एक है। देवी महामाया को कोसलेश्वरी के रूप में भी जाना जाता है, जो पुराने दक्षिण कोसल क्षेत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: पैदल यात्रियों के लिए बस, निशुल्क भंडारा, स्वास्थ्य सुविधा।
  • क्या खास- पार्किंग की परेशानियों को देखते हुए इस बार 20 एकड़ में पार्किंग बनाई गई है।

मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र

डोंगरगढ़ की पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी देवी का विख्यात मंदिर आस्था का केंद्र है। बड़ी बम्लेश्वरी के समतल पर स्थित मंदिर छोटी बम्लेश्वरी के नाम से प्रसिद्ध है। बम्लेश्वरी शक्ति पीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था।

मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयिनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चुरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।

पुलिस ने विशेष क्विक रिस्पांस टीम (QRT) का गठन किया है, जो किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मौके पर पहुंचकर राहत और सुरक्षा व्यवस्था संभालेगी।

श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : मंदिर तक जाने के लिए सीढ़ियों के अलावा रोपवे की सुविधा। ऊपर पेयजल की व्यवस्था, विश्रामालयों के अलावा भोजनालय और धार्मिक सामग्री खरीदने की सुविधा है। पहाड़ी के नीचे 24 घंटे भोजन।

काले पत्थर से तराश कर बनाई गई मां दंतेश्वरी की मूर्ति

देश के 52 शक्ति पीठों में से एक दंतेश्वरी मंदिर है। मान्यता है कि यहां देवी का दांत गिरा था। 14वीं शताब्दी में बना यह मंदिर दंतेवाड़ा में स्थित है। मां की मूर्ति काले पत्थर से तराश कर बनाई गई है। मंदिर को चार भागों में विभाजित किया गया है।

गर्भगृह और महा मंडप का निर्माण पत्थर के टुकड़ों से किया गया था। मंदिर के प्रवेश द्वार के सामने एक गरुड़ स्तंभ है। मंदिर खुद एक विशाल प्रांगण में स्थित है जो विशाल दीवारों से घिरा हुआ है। शिखर को मूर्तिकला से सजाया गया है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: 10 ग्राम चांदी का सिक्का 4100 रुपए में खरीद सकेंगे। धर्मशाला-हॉल में रुकने की सुविधा।
  • क्या खास: इस बार भी VIP दर्शन की सुविधा होगी। 500 रुपए प्रति व्यक्ति रसीद कटानी होगी। धोती यहां से मिलेगी। महिलाएं सलवार और साड़ी पहनकर ही गर्भगृह तक जा सकेंगी।

अंबिकापुर का नाम ही महामाया अंबिका देवी के नाम पर है। किवदंति है कि महामाया का सिर रतनपुर और धड़ अम्बिकापुर में है। माता की प्रतिमा छिन्न मस्तिका है। महामाया के बगल में विंध्यवासिनी विराजी हैं। विंध्यवासिनी की प्राण प्रतिष्ठा विंध्याचल से लाकर की गई है।

शारदीय नवरात्र में छिन्न मस्तिका महामाया के शीश का निर्माण राजपरिवार के कुम्हार हर साल करते हैं। जिस प्रतिमा को मां महामाया के नाम से लोग पूजते हैं, पहले इनका नाम समलाया था। महामाया मंदिर में ही दो मूर्तियां स्थापित थी।

पहले महामाया को बड़ी समलाया कहा जाता था और समलाया मंदिर में विराजी मां समलाया को छोटी समलाया कहते थे। बाद में समलाया मंदिर में छोटी समलाया को स्थापित किया गया, तब महामाया कहा जाने लगा।

सक्ती जिले के चंद्रपुर की छोटी सी पहाड़ी के ऊपर विराजित है मां चंद्रहासिनी। मान्यता है कि देवी सती का अधोदन्त (दाढ़) चंद्रपुर में गिरा था। यह मां दुर्गा के 52 शक्ति पीठों में से एक है। यहां बनी पौराणिक और धार्मिक कथाओं की झाकियां, करीब 100 फीट विशालकाय महादेव पार्वती की मूर्ति आदि आने वाले श्रद्धालुओं का मन मोह लेती है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : ठहरने के लिए चंद्रहासिनी मंदिर धर्मशाला उपलब्ध है।

1400 साल पहले रायपुर के महामाया मंदिर का निर्माण हैहयवंशी राजाओं ने करवाया था। महामाया मंदिर का गर्भगृह और गुंबद का निर्माण श्रीयंत्र के रूप में हुआ है। मंदिर में मां महालक्ष्मी, मां महामाया और मां समलेश्वरी तीनों की पूजा आराधना एक साथ की जाती है।

घटस्थापना से होती है चैत्र नवरात्रि की शुरुआत

नवरात्रि के पहले दिन घरों और मंदिरों में घटस्थापना यानी कलश स्थापना की जाती है। कलश को माता दुर्गा का प्रतीक माना जाता है। घटस्थापना के साथ ही 9 दिनों तक चलने वाली पूजा शुरू हो जाती है। कई लोग इन दिनों व्रत रखते हैं और सुबह-शाम माता की आरती करते हैं। मंत्र जप, ध्यान और देवी मां के ग्रंथों का पाठ करते हैं। इन दिनों में देवी के 51 शक्तिपीठों में काफी भक्त पहुंचते हैं।

रायपुर की पुरानी बस्ती स्थित मां महामाया मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों के लिए घर बैठे दान और दर्शन की सुविधा दी है। इसे लेकर UPI भी जारी किया गया है। माता को शृंगार का सामान चढ़ाने और अपने नाम से भोग लगाने के लिए लोग घर बैठे इस सुविधा का फायदा ले सकते हैं।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: भंडारा, धूप से बचाने मंदिर में ग्रीन नेट लगाया गया।
  • क्या खास: इस बार गुरुवार की वजह से माता पालकी में आएंगी। 9 दिन तक विशेष श्रृंगार किया जाएगा।

यह मंदिर कोरेश के जमींदार परिवार ने बनवाया था। त्रिलोकी नाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन से घिरा हुआ है। वहां भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाती है और दूसरी तरफ निकलती है।

गंगरेल में 52 गांव डूबने के बाद मां अंगार मोती माता की स्थापना की गई थी। माता के चरण पादुका मंदिर में अभी भी विराजित है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: निशुल्क रुकने के लिए धर्मशाला, VIP के लिए अलग से रूम की सुविधा।

महासमुंद जिले के बागबहारा घुंचापाली में मां चंडी का मंदिर स्थित है। किंवदन्ती है कि करीब 150 साल पहले ये तंत्र-मंत्र की साधना स्थल हुआ करता था। यहां महिलाओं का जाना प्रतिबंधित था। प्राकृतिक रूप से माता चंडी के स्वरूप में शिला (पत्थर) ने आकार लिया। वैदिक रीति रिवाज से पूजा-अर्चना शुरू हो गई। इसके बाद महिलाओं का चंडी माता की पूजा करने का प्रतिबंध समाप्त हुआ।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था : पेयजल, नि शुल्क भोजन, ठहरने की व्यवस्था, स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध रहेगी।
  • क्या खास: यहां सुबह शाम, आरती के दौरान कई बार भालूओं के भी दर्शन हो जाते हैं।

बरफानी धाम राजनांदगांव शहर में स्थित है। मंदिर के शीर्ष पर एक बड़ा शिवलिंग देखा जा सकता है। उसके सामने एक बड़ी नंदी प्रतिमा है। मंदिर तीन स्तरों में बनाया जाता है। नीचे की परत में पाताल भैरवी का मंदिर है, दूसरे में नवदुर्गा या त्रिपुर सुंदरी और ऊपरी स्तर में भगवान शिव के द्वादश ज्योतिर्लिंगों की प्रतिमा है।

  • श्रद्धालुओं के लिए व्यवस्था: नि:शुल्क रुकने और भंडारे (प्रसाद) की सुविधा। 24 घंटे दर्शन कर सकेंगे।
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कोरबा

कोरबा के जटगा रेंज में हाथियों का उत्पात,तीन घर तोड़े:फसल और सब्जियों को पहुंचाया नुकसान, 40 हाथियों का दल सक्रिय, वन विभाग अलर्ट

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कोरबा। कोरबा के कटघोरा वनमंडल अंतर्गत जटगा रेंज में हाथियों का उत्पात जारी है। शुक्रवार की आधी रात पटेल पारा और धोबघट गांवों में चार हाथियों के दल ने जमकर उत्पात मचाया। हाथियों ने तीन ग्रामीणों के घरों को क्षतिग्रस्त कर दिया और धान की बोरियों को भी नुकसान पहुंचाया। शनिवार सुबह तक हाथी इन गांवों में डेरा डाले हुए थे, जिससे ग्रामीणों में दहशत फैल गई।

वन विभाग के अनुसार, यह घटना शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात करीब 12 बजे हुई। चार हाथियों का एक दल पहले पटेल पारा गांव में घुसा।

उन्होंने किसान रामलाल के घर की दीवार तोड़ दी और घर में रखी धान की 15 बोरियों को कुचलकर नष्ट कर दिया। इसके बाद हाथियों का दल धोबघट गांव पहुंचा, जहां दो अन्य ग्रामीणों के मकानों को भी क्षतिग्रस्त किया। ग्रामीणों ने शोर मचाकर और मशाल जलाकर हाथियों को जंगल की ओर खदेड़ने का प्रयास किया।

हाथियों ने फलों और सब्जियों को नुकसान पहुंचाया

ग्रामीण निर्मला यादव ने बताया कि हाथियों ने उनके बाड़ी में लगे पपीता, गन्ना, केला और सब्जियों को भी नुकसान पहुंचाया है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों ने किसी तरह अपनी जान बचाई।

जटगा रेंज में पिछले कई महीनों से लगभग 40 हाथियों का एक बड़ा दल डेरा डाले हुए है। ये हाथी दिन के समय जंगल में रहते हैं, लेकिन रात होते ही भोजन की तलाश में आसपास के गांवों में प्रवेश कर जाते हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि हाथी लगातार खेतों में लगी फसलों और घरों में रखे अनाज को नुकसान पहुंचा रहे हैं, जिससे उन्हें रातभर जागकर रखवाली करनी पड़ रही है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची।

डीएफओ ने ग्रामीणों को दी सतर्क रहने की सलाह

कटघोरा डीएफओ ने जानकारी दी कि हाथियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। ग्रामीणों को जंगल की ओर न जाने और हाथियों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी गई है। विभाग द्वारा मुनादी कराकर लोगों को सतर्क किया जा रहा है। प्रभावित परिवारों को नियमानुसार मुआवजा देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

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कोरबा

कटघोरा में अधिवक्ता के घर चोरी के मामले में चार और गिरफ्तार

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02 पहले पकड़ाए थे, 04 और गिरफ्तार, अब तक 06 आरोपी गिरफ्तार, जिसमें जेवर खरीदने वाला चाम्पा का कारोबारी शामिल

कोरबा/कटघोरा। कटघोरा पुलिस ने एक साल पुरानी चोरी की बड़ी वारदात का खुलासा करते हुए 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से सोने-चांदी के जेवर, सोने का बिस्किट और नगदी सहित करीब 8 लाख रुपए का माल बरामद किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया है।

यह चोरी पुरानी बस्ती कटघोरा निवासी अधिवक्ता राकेश पांडेय के घर में हुई थी। आरोपियों ने ताला तोड़कर करीब 10 तोला सोने के जेवर, जिसमें रानी हार सेट, झुमके, सोने की चेन, चांदी की पायल और नगदी पार कर ली थी।

आरोपियों से बरामद गहने

आरोपियों से बरामद गहने

एसपी के निर्देश पर बनी टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी सिद्धार्थ तिवारी के निर्देश पर विशेष जांच टीम गठित की गई। पुलिस ने तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर की सूचना के आधार पर जांच शुरू की।

दो आरोपियों से खुला पूरा राज

सबसे पहले पुलिस ने अमित खांडे और गौतम कुमार जांगड़े को गिरफ्तार किया। पूछताछ में दोनों ने अपने अन्य साथियों के साथ मिलकर चोरी करना कबूल किया।

ज्वेलरी खरीदने वाला व्यापारी भी गिरफ्तार

जांच के दौरान पुलिस ने सुशील शुक्ला, गणेश दास, अनिल नामदेव और चांपा निवासी व्यापारी हिमेश सोनी को भी गिरफ्तार किया। आरोपियों ने चोरी के जेवर हिमेश सोनी को बेच दिए थे।

पुलिस ने आरोपियों के 2 साथियों को पकड़ लिया था उनसे मिले इनपुट से अन्य 4 आरोपियों को भी पकड़ लिया गया है

पुलिस ने आरोपियों के 2 साथियों को पकड़ लिया था उनसे मिले इनपुट से अन्य 4 आरोपियों को भी पकड़ लिया गया है

चांपा से पकड़े गए आरोपी

पुलिस टीम ने सभी आरोपियों को जांजगीर-चांपा जिले के चांपा क्षेत्र से गिरफ्तार किया।

सोने का बिस्किट और जेवर बरामद

  • 10 ग्राम सोने का मंगलसूत्र लॉकेट
  • 2 जोड़ी चांदी की पायल
  • करीब 3 तोला सोने का बिस्किट
  • नगदी
  • रानी हार सेट, झुमका और सोने की चेन

सहित कुल करीब 8 लाख रुपए का चोरी का माल जब्त किया।

पुलिस की अपील

थाना प्रभारी धर्मनारायण तिवारी ने लोगों से घर से बाहर जाते समय सुरक्षा व्यवस्था मजबूत रखने, सीसीटीवी चालू रखने और संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी तुरंत पुलिस को देने की अपील की है।कोरबा पुलिस “सजग कोरबा, सतर्क कोरबा” अभियान के तहत अपराधियों के खिलाफ लगातार सख्त कार्रवाई कर रही है।

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छत्तीसगढ़

ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 टन LPG चुराई:कलेक्टर ने प्लांट में रखने दिए थे, 1.5 करोड़ की गैस निकालकर बेची, अब फरार

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महासमुंद, एजेंसी। छत्तीसगढ़ में ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 1.5 करोड़ की एलपीजी गैस चोरी की है। दिसंबर 2025 में पुलिस ने 6 गैस कैप्सूल गाड़ी पकड़ी थी, जिसमें 90 मीट्रिक टन LPG लोड था। लीगल डॉक्यूमेंट नहीं होने के कारण सभी गाड़ियां थाने में खड़ी कर दी गई।

बाद में थाने में सुरक्षा नहीं होने के कारण ये गाड़ियां ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स कंपनी को सौंप दी थी। इस दौरान कंपनी के मालिक संतोष सिंह ठाकुर और डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने प्लानिंग कर गैस को घरेलू-कमर्शियल सिलेंडरों में भरकर बेच दिया और जिला प्रशासन से शिकायत की कि LPG गैस लीक हो गई।

जांच में चोरी पकड़े जाने के बाद पुलिस ने 3 के खिलाफ मामला दर्ज किया है, मालिक और डायरेक्टर फरार है, कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने पकड़ा है। मामला सिंघोड़ा थाना क्षेत्र का है।

पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 मीट्रिक टन LPG गैस चुराए।

पेट्रोकेमिकल्स कंपनी के मालिक ने 90 मीट्रिक टन LPG गैस चुराए।

जानकारी के अनुसार, दिसंबर 2025 में सिंघोड़ा थाना पुलिस ने 6 एलपीजी गैस से भरे कैप्सूल ट्रक जब्त किए गए थे। थाने में किसी भी हादसे के खतरा देखते हुए, इन ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के लिए महासमुंद पुलिस ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजा।

इसके बाद कलेक्टर ने खाद्य विभाग को ट्रकों को सुरक्षित जगह पर रखने के निर्देश दिए। इसी आदेश के तहत 30 मार्च 2026 को खाद्य विभाग की टीम ने ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स के मालिक संतोष सिंह ठाकुर से संपर्क किया और 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए कहा।

खाद्य निरीक्षक अविनाश दुबे, खाद्य अधिकारी हरिश सोनेश्वरी और मनीष यादव की मौजूदगी में संतोष ठाकुर को ये 6 कैप्सूल ट्रक सुरक्षित रखने के लिए सौंप दिए।

संतोष अपने स्टाफ की मदद से सभी गाड़ियां सिंघोड़ा थाना से रायपुर के अभनपुर के ग्राम उरला स्थित अपने प्लांट ठाकुर पेट्रोकेमिकल्स ले गया।

कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, मालिक फरार है।

कंपनी के एक स्टाफ को पुलिस ने गिरफ्तार किया है, मालिक फरार है।

कंपनी के मालिक गैस बेचने की प्लानिंग की

हैंडओवर के समय या उसके तुरंत बाद कैप्सूल ट्रकों का वजन नहीं कराया गया। इसी लापरवाही का फायदा उठाकर मालिक संतोष ठाकुर (56), डायरेक्टर साकिन ठाकुर ने गैस को अवैध रूप से बेचने की प्लानिंग की।

सिंघोड़ा से अभनपुर तक लगभग 200 किलोमीटर के रास्ते में 15 से ज्यादा धर्मकांटे (वजन करने की जगह) होने के बावजूद कहीं भी वजन नहीं कराया गया। सभी 6 कैप्सूल ट्रकों को प्लांट से करीब 200 मीटर दूर पार्किंग में खड़ा कर दिया गया। इसके बाद 5 गाड़ियों का वजन 6 अप्रैल को और 1 गाड़ी का वजन 8 अप्रैल को कराया गया।

8 दिनों में प्लांट के बुलेट टैंकों में खाली किया गैस

इन 8 दिनों में एक-एक कर कैप्सूल ट्रकों को प्लांट के अंदर मौजूद बुलेट टैंकों में खाली किया गया। जब वे टैंक भी भर गए तो गैस को कंपनी के मालिकाना और वहां चल रहे दो निजी टैंकरों में भर दिया गया।

इसके बावजूद चोरी की गई गैस बची रह गई, जो तय क्षमता से ज्यादा थी। इसके बाद रायपुर की अलग-अलग एजेंसियों और प्लांटों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।

वजन में देरी का मुख्य कारण यह रहा कि कैप्सूल ट्रकों को समय पर खाली नहीं किया गया और प्लांट में एक साथ 6 कैप्सूल खाली करने की कैपेसिटी भी नहीं थी।

इसके बाद कंपनी मालिक ने प्रशासन को बताया कि सभी एलपीजी कैप्सूल ट्रक खाली हैं। इसके बाद जब पुलिस ने मामले की जांच की तो पूरा घोटाला सामने आया।

इतनी बड़ी मात्रा में लीकेज असंभव

इस पूरे मामले में जब राष्ट्रीय स्तर के एक्सपर्ट की मदद से जांच की गई तो पाया गया कि कैप्सूल पूरी तरह सुरक्षित था और इतनी बड़ी मात्रा में गैस का लीकेज होना संभव नहीं था। इससे साफ हुआ कि गैस जानबूझकर किसी ने निकाली है।

एक्सपर्ट ने यह भी बताया कि बिना किसी बड़ी दुर्घटना के 3 महीने में एक कैप्सूल से 20 टन गैस का निकल जाना संभव ही नहीं है।

दस्तावेज में जितनी गैस खरीदी उससे 3 गुना बेचा

जब्त दस्तावेजों की जांच में पता चला कि जितनी गैस खरीदी गई थी, उससे कई गुना ज्यादा बिक्री दिखाई गई है। 3 दिन की जांच और दस्तावेजों की चेकिंग में बड़ी गड़बड़ी सामने आई।

रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल महीने में ठाकुर पेट्रोकेमिकल कंपनी ने सिर्फ 47 टन एलपीजी गैस खरीदी थी, लेकिन कागजों में 107 टन गैस की बिक्री दिखाई गई।

यानी करीब 60 टन गैस ऐसी बेची गई, जो असल में खरीदी ही नहीं गई थी। इसके अलावा कच्चे रजिस्टर में भी और थोक बिक्री का रिकॉर्ड मिला है, जिससे घोटाले का पता चला।

एजेंसियों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।

एजेंसियों को करीब 4 से 6 टन गैस बिना पक्के बिल के, सिर्फ कच्चे चालान पर भेजी गई।

कंपनी का स्टाफ गिरफ्तार, मालिक डायरेक्टर फरार

पुलिस ने अभी तक कंपनी के स्टाफ निखिल वैष्णव (41) को गिरफ्तार किया है, जबकि इस मामले का मुख्य आरोपी संतोष सिंह ठाकुर (मालिक) और अन्य डायरेक्टर के साथ प्लांब मैनेजर फरार हैं, जिनकी तलाश जारी है।

इसके अलावा पुलिस ने 7 एलपीजी टैंकर, 4 बड़े बुलेट टैंक, 100 गैस सिलेंडर, कंप्यूटर, DVR और कई दस्तावेज जब्त किए हैं।

सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश

जांच में यह भी पता चला कि ठाकुर पेट्रोकेमिकल के ऑफिस में आरोपियों ने सबूत और दस्तावेज मिटाने की कोशिश की। प्लांट के गेट पर जो वाहनों की एंट्री-एग्जिट और खरीद-बिक्री का रजिस्टर रखा जाता था, उससे अवैध लेन-देन करने वाली गाड़ियों और एजेंसियों की पहचान हो सकती थी।

इसी तरह ऑफिस में बिना बिल की खरीद-बिक्री का रिकॉर्ड भी रखा जाता था। लेकिन जांच में सामने आया कि अप्रैल महीने का बिना बिल वाला रजिस्टर ही गायब कर दिया गया। जब जांच के दौरान आरोपियों को बुलाया गया, तो उन्होंने सबूतों के साथ छेड़छाड़ करने की कोशिश भी की। इसी आधार पर उनके खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

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