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बिज़नस

Hotel Hilton! जहां चलीं ट्रंप की डिनर पार्टी में गोलियां, जानिए यहां एक रात का किराया कितना और इसकी खासियत?

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वाशिंगठन, एजेंसी। वॉशिंगटन का मशहूर ‘हिल्टन होटल’ इस समय चर्चा का केंद्र बना हुआ है। ‘व्हाइट हाउस कॉरस्पॉन्डेंट्स डिनर’ के दौरान यहां हुई गोलीबारी ने सुरक्षा पर तो सवाल खड़े किए ही हैं साथ ही लोगों की दिलचस्पी इस आलीशान होटल को लेकर भी बढ़ गई है। आइए जानते हैं कि इस ऐतिहासिक होटल में एक रात गुजारने का किराया कितना है और इसकी खासियत क्या है? वाशिंगटन हिल्टन में रुकना हर किसी के बस की बात नहीं है।

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यहां के कमरों का किराया मांग और सीजन के हिसाब से बदलता रहता है। सामान्यतः यहां एक रात रुकने का खर्च $300 से $400 के बीच आता है जो भारतीय मुद्रा में लगभग रू.25,000 से रू.33,000 के करीब बैठता है। जब भीड़ कम होती है तो किराया घटकर $121 (करीब रू.10,000) तक भी आ जाता है। वहीं कॉरस्पॉन्डेंट्स डिनर जैसे बड़े आयोजनों के वक्त किराया $344 (रू.28,000 से ज्यादा) के पार पहुंच जाता है।

सिर्फ कमरे का किराया ही काफी नहीं!

सिर्फ कमरे का किराया ही काफी नहीं है। बिल में टैक्स के अलावा एक ‘डेली डेस्टिनेशन चार्ज’ भी जुड़ता है। इसके कारण आपके कुल बिल में रू.4,000 से रू.5,000 की अतिरिक्त बढ़ोतरी हो जाती है।

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जानिए क्या है इस होटल की खासियत?

यह सिर्फ एक 4-स्टार प्रॉपर्टी नहीं बल्कि एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है। 1965 में खुले इस होटल को मशहूर आर्किटेक्ट विलियम बी. टैबलर ने डिजाइन किया था। इसका ‘डबल आर्क’ आकार इसे दुनिया के अन्य होटलों से अलग बनाता है। इसके साथ ही यहां का 30,000 वर्ग फीट का विशाल बॉलरूम बिना किसी खंभे के बना है जो वॉशिंगटन के सबसे बड़े हॉल में गिना जाता है।

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यही वजह है कि यहां राष्ट्रपतियों और वैश्विक नेताओं के बड़े कार्यक्रम होते हैं। वहीं यहां जिम, स्विमिंग पूल और ‘पेट फ्रेंडली’ कमरों जैसी तमाम लग्जरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। पिछले कई दशकों से यह होटल दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेताओं का ठिकाना रहा है। यहां की सुरक्षा बेहद कड़ी रहती है लेकिन ताजा फायरिंग की घटना ने इस ऐतिहासिक इमारत के नाम के साथ एक नया विवाद जोड़ दिया है।

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देश

AI मॉडल्स कंट्रोल से बाहर, 100 संस्थानों में सेंधमारी:गलती पकड़ने के लिए AI से ही 50 पेटाबाइट डेटा जांचना होगा, इंसान को लगेंगे 6.6 करोड़ साल

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मुंबई, एजेंसी। चैटजीपीटी बनाने वाली कंपनी ओपनएआई के मॉडल ने 100 से ज्यादा संस्थानों के सिस्टम में जबरन घुसपैठ की कोशिश की है। कंपनी ने खुद इसका खुलासा किया है।

50 पेटाबाइट डेटा जांच रही कंपनी, इंसान को लगेंगे 6.6 करोड़ साल

कंपनी अब अपने AI मॉडल्स के ट्रेनिंग और टेस्टिंग से जुड़े 50 पेटाबाइट डेटा की जांच कर रही है, ताकि अब तक मिले मामलों के अलावा भी कोई गड़बड़ी हुई हो, तो उसे पकड़ा जा सके।

इस जांच के लिए 7 हजार अत्याधुनिक GB200 और GB300 GPUs लगाए गए हैं। इसमें रोज करीब 5 करोड़ रुपए खर्च हो रहे हैं। ये डेटा कितना ज्यादा है इसे उदाहरण से समझें।

अगर यह पूरा डेटा सामान्य अंग्रेजी शब्दों में लिखा हो, तो एक इंसान 240 शब्द प्रति मिनट की तेज रफ्तार से बिना रुके भी पढ़े, तो इसे खत्म करने में करीब 6.6 करोड़ साल लग जाएंगे।

इंसानों के बस से बाहर होने के कारण इस काम को भी AI मॉडल्स से कराया जा रहा है। जांच को ज्यादा सटीक बनाने के लिए ज्यादा कंप्यूटिंग पावर लगाई जा रही है।

ओपनएआई ने संस्थानों को अलर्ट किया

कंपनी ने अपने AI एजेंट की चपेट में आए 100 से ज्यादा संस्थानों को अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि, कंपनी का दावा है कि इन संस्थानों का डेटा चोरी नहीं हुआ है। ओपनएआई ने बचाव में दलील दी कि AI एजेंट्स ने सिस्टम का ताला नहीं तोड़ा, बल्कि सिर्फ बंद दरवाजे को जबरन खटखटाकर और उसका हैंडल घुमाकर अंदर घुसने की कोशिश भर की थी।

वेबसाइट्स को गलत कमांड दिए

जांच में सामने आया है कि इन AI एजेंट्स ने कई वेबसाइट्स को मनमाने और अनाधिकृत कमांड भेजकर उनसे गलत प्रोसेस एग्जीक्यूट कराने का प्रयास किया।

इतना ही नहीं, सुरक्षा तंत्र को चकमा देने के लिए इन एजेंट्स ने वेबसाइट्स को आपस में संपर्क साधने का जरिया (कम्युनिकेशन चैनल) बना लिया और तय सुरक्षा पैमानों को पूरी तरह नजरअंदाज कर बायपास करने की कोशिश की।

ओपनएआई ने माना सुरक्षा घेरे नाकाम साबित हुए

ओपनएआई ने माना है कि उसके सुरक्षा घेरे AI एजेंट्स को काबू में रखने में नाकाम साबित हुए। कंपनी के प्रवक्ता ने कहा कि प्रभावित संस्थानों को तकनीकी डेटा दे दिया गया है ताकि वे सिस्टम में लगी सेंध और सुरक्षा खामियों की जांच कर सकें।

अपनी नाकामी के बाद अब ओपनएआई ने दावा किया है कि वह AI मॉडल के इस असामान्य व्यवहार और सुरक्षा की कमियों से जुड़े निष्कर्षों को सार्वजनिक करेगी, ताकि दुनिया भर के साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट्स मिलकर इस खतरे का तोड़ निकाल सकें।

जुलाई की हगिंग फेस घटना के बाद सुरक्षा नियम कड़े

इस घटना के सामने आने के बाद ओपन एआई ने सुरक्षा तंत्र को काफी सख्त किया गया है:

  • AI मॉडल्स के इंटरनेट इस्तेमाल पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं।
  • रिसर्च और लाइव सिस्टम को पूरी तरह एक-दूसरे से अलग कर दिया गया है।
  • किसी भी संदिग्ध गतिविधि पर तुरंत पकड़ने के लिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग बढ़ाई गई है।

हगिंग फेस घटना के बारे में जानें…

यह मामला एआई की दुनिया की अब तक की सबसे चौंकाने वाली घटनाओं में से एक है। आसान शब्दों में समझें कि असल में हुआ क्या था:

1. ‘आंसर की’ चुराने के लिए किया गया हैक

ओपनएआई अपने एक AI मॉडल की साइबर सुरक्षा क्षमता जांचने के लिए उसका टेस्ट ले रही थी। टेस्ट में अच्छा स्कोर करने के लिए AI ने एक खतरनाक शॉर्टकट चुना। उसने सोचा कि सवालों को हल करने से बेहतर है कि सीधे ‘आंसर की’ चुरा ली जाए।

2. पाबंदियां तोड़कर इंटरनेट पर पहुंचा

उस AI मॉडल को एक सुरक्षित और बंद टेस्टिंग एनवायरनमेंट में रखा गया था, जहां उसे इंटरनेट चलाने की इजाजत नहीं थी। इसके बावजूद AI ने उस सिस्टम की सुरक्षा तोड़ी, इंटरनेट तक अपनी पहुंच बनाई और मशहूर AI प्लेटफॉर्म हगिंग फेस के सिस्टम को हैक कर लिया, ताकि वहां से जवाब हासिल कर सके। 16 जुलाई को हगिंग फेस ने इस हैक का खुलासा किया था।

3. दो महीने से चल रहा था सीक्रेट नेटवर्क

जांच में सामने आया कि यह किसी एक अकेले AI मॉडल का काम नहीं था। यह सिलसिला घटना से करीब दो महीने पहले यानी मई की शुरुआत से ही चल रहा था।

ओपनएआई के ही सर्वरों के भीतर कई AI एजेंट्स आपस में सीक्रेट नोट्स छोड़ रहे थे। इन नोट्स में वे एक-दूसरे को बता रहे थे कि सिस्टम की सुरक्षा कैसे तोड़नी है और प्रतिबंधित डेटा तक कैसे पहुंचना है। ये एजेंट्स खुद को एक ‘स्वार्म’ यानी संगठित झुंड कह रहे थे।

4. अनकंट्रोल्ड बर्ताव

इंजीनियर्स ने इन मॉडल्स को ऐसा करने के लिए कोई ट्रेनिंग नहीं दी थी। AI ने सिस्टम में मौजूद संसाधनों का इस्तेमाल करके यह तरीका खुद ही विकसित कर लिया था। ओपनएआई को अपने ही सर्वर में चल रहे इस पूरे नेटवर्क की भनक तक नहीं थी।

चिंता की असली वजह क्या है?

इसे एक उदाहरण से समझते हैं: अगर आपको अपनी रसोई में दो चींटियां दिखती हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि घर में सिर्फ दो ही चींटियां हैं। यह घटना किसी तरह पकड़ में आ गई, लेकिन सबसे बड़ा डर यह है कि बंद दरवाजों और सुरक्षित सर्वरों के पीछे ऐसे कितने AI सिस्टम हैं जो इंसानों की जानकारी के बिना अपनी सीमाएं लांघ रहे हैं।

अमेरिकी और ऑस्ट्रेलियाई सरकारी साइट्स में भी सेंधमारी

हगिंग फेस घटना के बाद ओपनएआई के एआई एजेंट्स ने अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया की सरकारी वेबसाइट्स में भी सेंधमारी की थी। इस स्थिति को देखते हुए ओपनएआई ने मॉनिटरिंग बढ़ा दी है और अपने नए मॉडल डेवलपमेंट पर फिलहाल रोक लगा दी है।

AI से मानवता के खात्मे का खतरा

AI रिसर्चर जैकब कॉक्सन का दावा है कि अगर एआई पर समय रहते कड़ा नियंत्रण नहीं लगाया गया, तो यह जल्द ही मानवता के अंत का कारण बन सकता है। वहीं एआई कंपनी एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोदेई ने भी माना कि AI के डेवलपमेंट को धीमा करने की जरूरत है।

ये घटनाएं इस बात का संकेत है कि टेस्टिंग स्टेज में ही टेक कंपनियों के हाथ से उनके एडवांस AI मॉडल्स की कमान छूट रही है। AI मॉडल्स ना सिस्टम की सुरक्षा को बायपास कर रहे हैं, बल्कि तय दायरों को तोड़कर इंसानी नियंत्रण से बाहर हो रहे हैं।

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देश

लगातार 3 दिन बंद रहेगा शेयर बाजार, BSE-NSE पर ट्रेडिंग बंद

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नई दिल्ली, एजेंसी। आमतौर पर शेयर बाजार सोमवार से शुक्रवार तक खुले रहते हैं। मार्केट में शनिवार और रविवार को छुट्टी रहती है। कई बार किसी खास मौके, पर्व और त्योहार पर भी बाजार बंद होता है। कल से लगातार तीन दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं होगा। शुक्रवार (02 अक्टूबर) को गांधी जयंती है, ऐसे में BSE और NSE बंद रहेंगे। इसके बाद शनिवार और रविवार की नियमित छुट्टी के कारण बाजार अब सीधे सोमवार, 5 अक्टूबर को खुलेगा।

2 अक्टूबर को क्यों बंद रहेगा बाजार?

महात्मा गांधी की जयंती 2 अक्टूबर को देशभर में राष्ट्रीय अवकाश के रूप में मनाई जाती है। इसी के चलते भारतीय शेयर बाजार में भी इस दिन ट्रेडिंग नहीं होगी। निवेशकों को शुक्रवार को इक्विटी, डेरिवेटिव्स समेत बाजार से जुड़े कारोबार के लिए बाजार बंद मिलेगा।

2026 में शेयर बाजार की प्रमुख छुट्टियां

अवसरतारीखदिन
दशहरा20 अक्टूबरमंगलवार  
दिवाली बलिप्रतिपदा10 नवंबरमंगलवार
गुरु नानक देव जी का प्रकाश गुरुपर्व24 नवंबरमंगलवार
क्रिसमस25 दिसंबरशुक्रवार 

आज बाजार में रही गिरावट

आज (1 अक्टूबर) शेयर बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। सेंसेक्स 0.79 फीसदी यानी कि 570.59 अंक गिरकर लाल निशान में 71,909.70 पर बंद हुआ। इस दौरान इसके 30 शेयरों में से केवल 6 में बढ़त दिखी, जबकि 24 शेयर गिरावट के साथ बंद हुए। इनमें इन्फोसिस में सबसे अधिक 4.02 फीसदी की तेजी और मारुति में सबसे ज्यादा गिरावट 4.59 फीसदी नजर आई।

वहीं, 50 शेयरों वाला निफ्टी 0.88 फीसदी यानी 198.50 अंक लुढ़ककर 22,421.95 पर बंद हुआ। इसके 50 शेयरों में से 13 में तेजी और 37 में गिरावट दर्ज की गई।

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देश

त्योहारों से पहले सरकार ने चीनी डीलर के लिए स्टॉक सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल की

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नई दिल्ली, एजेंसी। सरकार ने त्योहारों के मौसम में चीनी की पर्याप्त आपूर्ति और उचित कीमत सुनिश्चित करने के लिए डीलर के पास चीनी रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी। यह सीमा 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगी और डीलर अधिकतम 15 दिन तक का स्टॉक रख सकेंगे। इसके साथ ही, खाद्य मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम में क्षेत्र विशेष की जरूरतों को देखते हुए स्टॉक सीमा 2,000 क्विंटल होगी। 

मंत्रालय ने बयान में कहा कि एक अक्टूबर से नए चीनी सत्र की शुरुआत के साथ त्योहारी अवधि में ग्राहकों को उचित कीमत पर चीनी की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सरकार कदम उठा रही है। मंत्रालय ने कहा, ”चीनी की मात्रा और उसे रखने की अवधि सीमित करके सरकार का उद्देश्य आपूर्ति शृंखला में चीनी की व्यवस्थित आवाजाही सुनिश्चित करना और उपभोक्ताओं के लिए इसकी लगातार उपलब्धता बनाए रखना है।” 

कोलकाता और असम के लिए अलग सीमा

कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्र तथा असम के लिए अलग स्टॉक सीमा उस क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय की गई है। मंत्रालय ने कहा कि कोलकाता… उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और कर्नाटक से चीनी खरीदता है और पूर्वी भारत के साथ पूर्वोत्तर राज्यों को भी इसकी आपूर्ति करता है। 

मंत्रालय ने कहा कि असम के लिए सीमा तय करते समय भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं और पूर्वोत्तर के उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखा गया है। उसने कहा कि संशोधित नियमों का उद्देश्य आपूर्ति श्रृंखला में चीनी के अनावश्यक भंडारण को रोकना और मिलों से डीलर के जरिये अंतिम उपभोक्ता तक इसकी सुचारू आपूर्ति सुनिश्चित करना है। 

भंडारण और जमाखोरी पर रोक का उद्देश्य

यह कदम जमाखोरी, सट्टेबाजी और डीलर द्वारा स्टॉक जमा करने पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है। इससे पहले अगस्त में सरकार ने डीलर के लिए देशभर में 4,000 क्विंटल की स्टॉक सीमा तय की थी। यह सीमा एक अगस्त से 30 नवंबर तक लागू की गई थी। इसके तहत चीनी मिलने की तारीख से अधिकतम 30 दिन तक स्टॉक रखने की अनुमति थी। बाद में 15 सितंबर से यह सीमा घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी गई। 

चीनी के खुदरा दाम में 15% गिरावट

मंत्रालय के मुताबिक, चीनी का औसत खुदरा मूल्य अगस्त के उच्चतम स्तर से अब 15 प्रतिशत घट चुका है और आपूर्ति शृंखला में कम कीमतों का लाभ मिलने के साथ इसमें आगे भी गिरावट आने की उम्मीद है। मिलों की कीमतों में करीब 28 प्रतिशत की गिरावट आई है और वे पिछले तीन सप्ताह से स्थिर हैं। 

सरकार ने कहा कि चीनी मिलों, डीलर, थोक विक्रेताओं और अन्य बाजार प्रतिभागियों को चीनी की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करनी चाहिए और जमाखोरी एवं सट्टेबाजी रोकनी चाहिए। थोक और खुदरा विक्रेताओं से मिलों की कीमतों में आई तेज गिरावट का लाभ उपभोक्ताओं तक ‘तत्काल’ पहुंचाने को कहा गया है। 

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