विदेश
हर साल अरबों खर्च फिर भी सड़कें टूटीः भारत की तरह ब्रिटेन भी परेशान, गड्ढे भरना नेताओं के बस की बात क्यों नहीं?
लंदन, एजेंसी। भारत की तरह अब ब्रिटेन भी सड़कों के गड्ढों की गंभीर समस्या से जूझ रहा है। वहां भी लोग खराब सड़कों और बार-बार होने वाली अस्थायी मुरम्मत से परेशान हैं। ब्रिटेन में हुए एक सर्वे में लोगों ने खराब सड़कों को सबसे बड़ा स्थानीय मुद्दा बताया। यह स्थिति भारत जैसी ही है, जहां हर बारिश के बाद टूटी सड़कें और गड्ढे चर्चा का विषय बन जाते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, सड़कें समय के साथ कमजोर हो जाती हैं। भारी वाहनों का दबाव, बारिश और ठंड सड़क में दरारें पैदा करते हैं। बाद में यही दरारें बड़े गड्ढों में बदल जाती हैं। भारत में मानसून और ब्रिटेन में सर्द मौसम इस समस्या को और बढ़ा देता है।
ब्रिटेन में ज्यादातर जगहों पर गड्ढों को सिर्फ ऊपर से भर दिया जाता है। कुछ समय बाद सड़क फिर टूट जाती है। बिल्कुल भारत की तरह वहां भी लोग प्रशासन पर सवाल उठा रहे हैं कि हर साल खर्च होने के बावजूद सड़कें क्यों नहीं सुधर रहीं। रिपोर्ट के अनुसार ब्रिटेन की करीब 17 प्रतिशत सड़कें खराब हालत में हैं और उन्हें ठीक करने में अरबों पाउंड खर्च होंगे। विशेषज्ञों का कहना है कि केवल पैबंद लगाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि मजबूत सड़क निर्माण और समय पर रखरखाव जरूरी है।
ब्रिटेन में अब AI और नई तकनीक के इस्तेमाल की बात हो रही है ताकि सड़क की कमजोरी पहले ही पता लगाई जा सके और गड्ढे बनने से पहले मुरम्मत हो सके।विशेषज्ञों का कहना है कि गड्ढे अचानक नहीं बनते। समय के साथ सड़क का डामर कमजोर हो जाता है। फिर भारी वाहनों के दबाव और बारिश का पानी सड़क में दरारें पैदा करता है। सर्दियों में पानी जमने और पिघलने से ये दरारें बड़ी होकर गड्ढों में बदल जाती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को सिर्फ गड्ढे भरने के बजाय पूरी सड़क व्यवस्था सुधारनी होगी। मजबूत सड़कें बनानी होंगी और समय रहते उनकी जांच व मरम्मत करनी होगी।
नई तकनीक और AI की मदद से सड़क की कमजोरी पहले ही पता लगाई जा सकती है। इससे गड्ढे बनने से पहले ही मुरम्मत की जा सकेगी। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि अगर समय पर सड़क रखरखाव किया जाए तो लंबे समय में काफी पैसा बच सकता है। साथ ही बार-बार डामर इस्तेमाल करने से होने वाला प्रदूषण भी कम होगा। विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर सरकार सिर्फ अस्थायी मरम्मत करती रही तो आने वाले समय में गड्ढों की समस्या और गंभीर हो सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकारें सिर्फ दिखावटी मरम्मत के बजाय लंबे समय की योजना बनाएं, तो लोगों को राहत मिल सकती है और सड़क हादसे भी कम हो सकते हैं।

देश
बालेन सरकार का नया कड़ा फरमान, नेपाल में ID कार्ड बिना भारतीयों की एंट्री की बैन ! R*मुस्लिम बताए वजह
काठमांडू, एजेंसी। नेपाल ने भारत से आने वाले लोगों के लिए सीमा पर सुरक्षा जांच कड़ी कर दी है। नेपाली मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अब जोगबनी सीमा चौकी से नेपाल में प्रवेश करने वाले भारतीय नागरिकों को पहचान पत्र दिखाना अनिवार्य होगा। इसका उद्देश्य रोहिंग्या मुस्लिमों (R*Muslims) की अवैध घुसपैठ, आपराधिक गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना है । फिलहाल यह फैसला मोरंग जिला सुरक्षा समिति ने लिया है। अधिकारियों का कहना है कि इसका उद्देश्य अवैध घुसपैठ, आपराधिक गतिविधियों और संदिग्ध लोगों की आवाजाही पर रोक लगाना है।

स्थानीय प्रशासन के मुताबिक यह कदम किसी कूटनीतिक विवाद के तहत नहीं बल्कि आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है। हालांकि दोनों देशों के बीच दशकों पुरानी “ओपन बॉर्डर” व्यवस्था जारी रहेगी। अब नेपाल जाने वाले भारतीय यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे अपने साथ आधार कार्ड, पासपोर्ट, वोटर आईडी या अन्य वैध पहचान दस्तावेज जरूर रखें।भारत और नेपाल के बीच लगभग 1,850 किलोमीटर लंबी खुली सीमा है, जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा के यात्रा कर सकते हैं। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग रोजाना व्यापार, पर्यटन, शिक्षा और पारिवारिक कारणों से सीमा पार करते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में सीमा पार तस्करी, अवैध गतिविधियों और सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए नेपाल निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना चाहता है। नेपाल सरकार ने साफ किया है कि यह कदम भारत-नेपाल के ऐतिहासिक और करीबी संबंधों को प्रभावित करने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षा और रिकॉर्ड प्रबंधन बेहतर करने के लिए उठाया गया है। रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि नेपाल प्रशासन को आशंका है कि पश्चिम बंगाल में राजनीतिक बदलाव के बाद रोहिंग्या मुसलमान या अवैध घुसपैठिए नेपाल की ओर आने की कोशिश कर सकते हैं।
नेपाल के अधिकारियों ने कहा कि सीमा पर विशेष निगरानी खासकर ट्रेनों के आने के समय बढ़ाई गई है, क्योंकि एक साथ सैकड़ों लोग सीमा पार करते हैं। ऐसे समय यात्रियों के पहचान पत्र जांचने की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा के लिए प्रशिक्षित खोजी कुत्तों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि यह कदम फरार अपराधियों और संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए भी जरूरी है। भारत और नेपाल के बीच दशकों पुरानी खुली सीमा व्यवस्था है, जहां दोनों देशों के नागरिक बिना वीजा यात्रा कर सकते हैं। लेकिन हाल के वर्षों में सुरक्षा चिंताओं के कारण निगरानी बढ़ाने की मांग लगातार उठती रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेपाल की यह सख्ती आने वाले समय में सीमा प्रबंधन और भारत-नेपाल सुरक्षा सहयोग को नया आयाम दे सकती है।
विदेश
नेतन्याहू ने ईरान युद्ध पर पहली बार खोले पत्ते, बोले-असली मिशन अभी बाकी, ट्रंप और मैं जानते थे हमले का…
तेहरान/तेल अवीव/वाशिंगठन, एजेंसी। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू (Benjamin Netanyahu) ने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने साफ कहा कि यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा उसके प्रॉक्सी नेटवर्क को पूरी तरह खत्म करना अभी बाकी है। अमेरिकी चैनल CBS को दिए इंटरव्यू में नेतन्याहू ने उन आरोपों को खारिज किया, जिनमें कहा जा रहा था कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को “झूठे आकलन” दिखाकर ईरान युद्ध में धकेला। नेतन्याहू ने कहा, “हम दोनों जानते थे कि कार्रवाई में जोखिम है, लेकिन कार्रवाई न करने में उससे भी बड़ा खतरा था।”

उन्होंने दावा किया कि ईरान में सत्ता परिवर्तन और उसके परमाणु कार्यक्रम को रोकना इजरायल और अमेरिका दोनों के लिए जरूरी था। नेतन्याहू ने यह भी खुलासा किया कि ट्रंप ने उनसे कहा था कि अगर मौका मिला तो संवर्धित यूरेनियम को हटाने के लिए अमेरिकी विशेष बल अंदर भेजे जा सकते हैं। नेतन्याहू के मुताबिक अभी भी ईरान के कई संवर्धन स्थल मौजूद हैं, जिन्हें नष्ट करना बाकी है। इसके अलावा हिजबुल्लाह, हमास और हूती जैसे ईरानी समर्थित समूहों को भी खत्म करना इजरायल की रणनीति का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि अगर ईरान की मौजूदा सत्ता कमजोर होती है तो उसका पूरा “प्रॉक्सी नेटवर्क” भी ढह जाएगा। इजरायली प्रधानमंत्री ने चीन पर भी आरोप लगाया कि उसने ईरान को मिसाइल निर्माण में इस्तेमाल होने वाले कुछ अहम पुर्जे उपलब्ध कराए। हालांकि रूस की भूमिका को उन्होंने ज्यादा बड़ा मुद्दा नहीं बताया।नेतन्याहू ने यह भी संकेत दिया कि इजरायल आने वाले वर्षों में अमेरिकी सैन्य सहायता पर अपनी निर्भरता कम करना चाहता है। विशेषज्ञों का मानना है कि नेतन्याहू का यह इंटरव्यू ऐसे समय आया है जब पश्चिम एशिया में युद्धविराम बेहद नाजुक स्थिति में है और ईरान-अमेरिका वार्ता को लेकर नई हलचल तेज हो रही है।
देश
कल से होगा Cannes 2026 का आगाज, जानें कब-कैसे और कहां देखें ये Red Carpet फेस्टिवल
कान्स/मुंबई, एजेंसी। फैशन का सबसे बड़ा महोत्सव Cannes 2026 का कल 12 मई से आगाज होने वाला है। हर साल की तरह इस वर्ष भी भारत के सितारें इस इवेंट में हिस्सा लेने को पूरी तरह से तैयार हैं। देश-विदेश से बड़े-बड़े सितारें रेड कारपेट पर अपना जलवा दिखाएंगे। इस महोत्सव का आयोजन फ्रांस के शहर किया जाएगा। तो चलिए जानते हैं इस इवेंट की पूरी डिटेल, कब, कहाँ और कैसे ?

12 से 23 मई तक चलेगा कान फिल्म फेस्टिवल
आपको बता दें कि यह फेस्टिवल कोई एक या दो दिन नहीं बल्कि 13 दिनों तक चलेगा और फ्रांस के कान्स शहर में इस इवेंट का आयोजन होगा। फ्रांस के समय के अनुसार यह फेस्टिवल 12 मई को शुरू हो जाएगा लेकिन यदि इंडिया के समय अनुसार देखा जाए तो यह 12 की रात से शुरू होगा।

यदि कोई भी व्यक्ति यह इवेंट देखना चाहता है तो उसे फ्रांस जाने की जरुरत नहीं है, वो घर बैठे ही कान के आधिकारिक यूट्यूब चैनल, इंस्टाग्राम और वेबसाइट पर इसे देख सकता है। आपको बता दें यह कोई छोटा-मोटा इवेंट नहीं होता बल्कि इसे विश्व का सबसे बड़ा मंच माना जाता है। इस फेस्टिवल में दिखाने के लिए भारत की तरफ से भी कुछ बेस्ट फिल्में ली जाती हैं।

ये बॉलीवुड सेलेब्स रेड कार्पेट पर दिखाएंगे अपना जलवा
जैसा की आप सबको पता ही है कि बड़ी-बड़ी हस्तियां इस इवेंट में शिरकत करती हैं। भारत की तरफ से कुछ जाने-माने लोग जैसे कि ऐश्वर्या राय, आलिया भट्ट तो हिस्सा लेते ही हैं लेकिन इस बार करण जौहर, तारा सुतारिया, मोनी रॉय के आने की भी सम्भावना है।
इसी के साथ बड़ी बात यह है कि इंडिया के मूवी निर्माता आशुतोष गोविरकर भी इस मंच का हिस्सा होंगे और आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल के सदस्य के रूप में शामिल होंगे।
इसी के साथ पंजाबी इंडस्ट्री से पहली बार Ammy Virk भी इस इवेंट का हिस्सा होंगे।

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