कोरबा
छोटे खातेदारों को रोजगार देने, अधिग्रहित जमीन की वापसी, रोजगार व पुनर्वास ग्रामों की समस्या को लेकर महापंचायत में जुटे 40 से अधिक गांव के भू विस्थापित
जून में कलेक्ट्रेट घेराव का सर्वसम्मत से प्रस्ताव पास किया महापंचायत ने
एसईसीएल के खिलाफ पूरे प्रदेश के भू विस्थापितों को एकजुट कर बिलासपुर सीएमडी का घेराव करेंगे: कपिल पैकरा
कोरबा। छत्तीसगढ़ किसान सभा के नेतृत्व में छोटे खातेदारों को रोजगार देने, भूविस्थापितों के लंबित रोजगार प्रकरणों के निराकरण, जमीन वापसी, पट्टा, बसावट एवं प्रभावित गांव की समस्याओं को लेकर महापंचायत में 40 से अधिक गांव के भू विस्थापित और संगठन से जुड़े हजारों प्रभावित भू विस्थापित शामिल हुए।
महापंचायत में जून माह में विस्थापन प्रभावितों की समस्याओं को लेकर कलेक्ट्रेट घेराव का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास किया गया।
महापंचायत में कलेक्ट्रेट घेराव को सफल बनाने के लिए गांव-गांव में चावल दाल कलेक्शन, मशाल जुलूस और अधिकार यात्रा का जत्था निकलने के साथ नुक्कड़ सभा, पर्चे वितरण का प्रस्ताव भी लिया गया है।
महापंचायत में प्रमुख रूप से किसान सभा के राज्य महासचिव कपिल पैकरा, जवाहर कंवर, प्रशांत झा, छत्तीसगढ़ बचाओ आन्दोलन के बिपासा के साथ चारों क्षेत्र के भू विस्थापित उपस्थित थे और सभा का संचालन किसान सभा के नेता दीपक साहू ने किया।

महापंचायत को संबोधित करते हुए किसान सभा के राज्य महासचिव कपिल पैकरा ने कहा कि पूरे प्रदेश में रायगढ़, कोरबा और सरगुजा संभाग के भू विस्थापित एसईसीएल के अधिग्रहण नीति से परेशान है और अलग-अलग लड़ाई लड़ रहे हैं, जबकि सभी की समस्या एक है। उन सभी को एक मंच में लाने का प्रयास कोरबा जिले के चारों क्षेत्र से शुरू किया गया है और जल्द रायगढ़ और सरगुजा संभाग में भी इसी तरह की बैठक कर सभी क्षेत्रों के हजारों भू विस्थापितों को एकजुट कर सीएमडी मुख्यालय बिलासपुर का घेराव किया जायेगा।
किसान सभा के प्रदेश संयुक्त सचिव प्रशांत झा ने कहा कि एसईसीएल के कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, कोरबा सभी क्षेत्रों में छोटे खातेदारों को रोजगार देने, भू विस्थापितों के लंबित रोजगार, जमीन वापसी, पट्टा, बसावट एवं प्रभावित गांव की मूलभुत समस्याओं के निराकार के लिए जिला प्रशासन और एसईसीएल के अधिकारियों द्वारा कोई ठोस पहल नहीं की जा रही है, जिससे भू विस्थापितों के सब्र का बांध टूट चुका है। एसईसीएल के अधिकारियों का ध्यान केवल भू विस्थापितों के अधिकारों को छीन कर, आपस में लड़वाकर केवल कोयला उत्पादन को बढ़ाने और उच्च अधिकारियों को खुश करने की है, जिसमें जिला प्रशासन भी एसईसीएल के साथ खड़ी है। प्रबंधन और प्रशासन पहले एकजुट था, अब सभी क्षेत्रों के भू विस्थापित अपने अधिकार को लेने के लिए एकजुट हो रहे है, अब भू विस्थापित किसानों की एकजुटता के सामने कोई प्रबंधन टिकने वाली नहीं है।
सभा को छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन से जुड़ी बिपासा ने कहा की कोरबा के खदान इलाकों में एक बड़ी समस्या है, माइनिंग का लगातार विस्तार हो रहा है । लेकिन जिस रफ्तार से माइनिंग हो रही है, एक समय कोयला खनन खत्म हो जाने के बाद कोरबा के इतने बड़े क्षेत्र में केवल abandoned माइनिंग पिट के अलावा कुछ नहीं बचेगा।
इसका कारण है, ठीक तरह से माइनिंग क्लोज़र प्लान का अनुपालन ना होना। जिसके अनुसार खनन पश्चात जो बड़े पिट बन जाते है, उसमें overburden को समय समय पर पाट कर उस जमीन को reclaim किया जाना है। लेकिन backfilling का काम कोरबा में बिल्कुल न के बराबर है। जबकि इसकी पूरी योजना और बजट SECL ने बनाया है और खनन की स्वीकृति के लिए माइनिंग क्लोज़र प्लान में इसका उल्लेख है, लेकिन पालन नहीं किया जा रहा है।
खनन तो backfilling के बिना आगे बढ़ना ही नहीं चाहिए।
महापंचायत को भू विस्थापित रोजगार एकता संघ के रेशम यादव, दामोदर श्याम और सौरा , सुहीन के साथ कुसमुंडा क्षेत्र से सुभम बघेल, पुस्पेंद्र, गेवरा क्षेत्र से राकेश राजपूत, रमेश कठोतिया, प्रेम निर्मलकर, बबिता आदिले, दीपका क्षेत्र से पवन यादव, कोरबा क्षेत्र से शिवरतन कंवर, अमरजीत कंवर, करतली क्षेत्र से किरन मरकाम के साथ बढ़ी संख्या में भू विस्थापितों ने महापांचत को संबोधित किया और सभी ने एकजुट होकर एसईसीएल के खिलाफ संघर्ष करने का ऐलान करते हुए कहा कि एसईसीएल पर भू विस्थापितों को भरोसा नहीं है। एसईसीएल को कार्य धरातल पर करते हुए कार्यों का रिजल्ट दिखाना होगा। हर बार आंदोलन के बाद झूठा आश्वाशन प्रबंधन देता है, जब तक निर्णायक निर्णय भू विस्थापितों के पक्ष में नहीं होगा तो संघर्ष और तेज किया जायेगा।
किसान सभा द्वारा आयोजित महापंचायत में भू विस्थापितों ने प्रस्ताव पास कर मांग की है की
1) छोटे खातेदार के नाम पर भू विस्थापितों के रोके गए रोजगार में तत्काल रोजगार दो । एसईसीएल में जिन किसानों की जमीन अधिग्रहण की गई है और की जा रही है, हर खाते में स्थायी रोजगार प्रदान किया जाये।
2) वन टाइम सेटलमेंट कर रोजगार के पुराने लंबित मामलो का जल्द से जल्द निराकरण किया जाये | अर्जन के बाद जन्म वाले प्रकरण और एक खाता एक रोजगार नियम के विरुद्ध अलग अलग खाता का सयोंजन के कारण रोजगार से वंचितों को रोजगार प्रदान किया जाये |
3) बसावट के नाम पर 3 लाख और 15 लाख रुपए के नाम से भेदभाव बंद किया जाए और सभी क्षेत्रों के भू विस्थापितों को एक समान बसावट की 15 लाख राशि दी जाए।
4) शासन की योजनाओं से प्राप्त पट्टों एवं शासकीय और वन भूमि पर बने मकानों का मुआवजा एवं सौ प्रतिशत सोलिशियम और बसाहट की पात्रता का लाभ दिया जाये ।
5) पुराने अर्जित भूमि को मूल खातेदारों को वापस करायी जाये | अधिग्रहण के बाद जिन जमीनों पर 40 सालों में भी कोल इंडिया ने भौतिक कब्जा नहीं किया है और जिन जमीनों पर किसान ही पीढ़ियों से काबिज हैं उन्हें किसानों के नाम वापस किया जाए।
6)अर्जित गाँव से विस्थापन से पूर्व उनके पुनर्वास स्थल की सर्वसुविधायुक्त व्यवस्था किया जाये |
7) एसईसीएल में आऊट सोर्सिंग से होने वाले कार्यों में भू विस्थापितों एवं प्रभावित गांव के बेरोजगारों को 100% रोजगार में रखा जाये।
8) प्रभावित एवं पुनर्वास गांव की महिलाओं को स्वरोजगार योजना के तहत रोजगार उपलब्ध कराया जाये।
9) पुनर्वास गांव में कबीज भू विस्थापित परिवार को पूर्ण काबिज भूमि का पट्टा दिया जाये।
10) डिप्लेयरिंग प्रभावित गांव सुराकछार बस्ती में किसानों को हुये नुकसान का क्षतिपूर्ति मुआवजा प्रदान किया जाये।
11) पूर्व में विस्थापित ग्रामों के भू विस्थापित जिन्हें बसावट नहीं दिया गया है, उन्हें बसावट प्रदान किया जाए।
12) डंपिंग की मिट्टी को वापस खोदे गए खदान में भरा जाए इस डंपिंग के मिट्टी।
कोरबा
नेशनल लोक अदालत का आयोजन: दुर्गेश को ट्राईसायकिल मिलते ही खिला चेहरा
कई मामलों का किया गया निराकरण
कोरबा। संतोष शर्मा, प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोरबा, अविनाश तिवारी श्रम न्यायाधीश कोरबा, गरिमा शर्मा, प्रथम जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, ममता भोजवानी द्वितीय जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश कोरबा, सीमा प्रताप चंद्र, जिला एवं सत्र न्यायाधीश (एफ. टी. सी.) कोरबा, कु. मयूरा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोरबा, कु. डाली ध्रुव द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कोरबा, सोनी तिवारी प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वरिष्ठ श्रेणी कोरबा, कु. कुमुदिनी गर्ग, प्रथम व्यवहार न्यायाधीश कनिष्ठ श्रेणी कोरबा, कु. डिंपल सचिव, शिशुपाल सिंह सहायक ग्रेड दो जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरबा द्वारा रामसागरपारा वार्ड क्रमांक 1 में रहने वाले दुर्गेश कंवर जिसे बचपन से ही विकलांग होने की वजह से चलने में दिक्कत होती थी, को ट्राई साइकिल प्रदान किया गया।
दुर्गेश कंवर का आवागमन अब आसान होगा। ट्राईसायकिल मिलने पर दुर्गेश कंवर के चेहरे पर मुस्कान बिखर गई और अतिथियों का आभार जताया।


कोरबा
विश्व रेड क्रॉस दिवस पर राम सिंह अग्रवाल सम्मानित
रायपुर में शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव ने किया सम्मान
कोरबा। विश्व रेड क्रॉस दिवस के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी रायपुर में आयोजित सम्मान समारोह में रेड क्रॉस सोसाइटी कोरबा इकाई के चेयरमैन एवं समाजसेवी राम सिंह अग्रवाल को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। कोरबा में “चाचा नेहरू” के नाम से पहचान रखने वाले राम सिंह अग्रवाल को रेड क्रॉस समिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए यह सम्मान प्रदान किया गया।शिक्षासमारोह में प्रदेश के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव विशेष रूप से मौजूद रहे। इस दौरान उन्होंने रेड क्रॉस सोसाइटी के माध्यम से किए जा रहे सामाजिक कार्यों की सराहना की।

राम सिंह अग्रवाल ने अपने कार्यकाल में कोरबा जिले में रेड क्रॉस समिति की गतिविधियों को तेज गति से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके नेतृत्व में अब तक 1370 नए सदस्यों को रेड क्रॉस सोसाइटी से जोड़ा गया है। इसके साथ ही रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए लगातार अभियान चलाए जा रहे हैं।
समाजसेवा और मानवता के प्रति समर्पित कार्यों के लिए मिले इस सम्मान पर जिले के सामाजिक संगठनों एवं नागरिकों ने राम सिंह अग्रवाल को बधाई दी है।
कुसमुंडा
12 वर्षों का अन्याय और प्रशासन की वादाखिलाफी, गेवरा बस्ती के ग्रामीण 21 मई से करेंगे अनिश्चितकालीन खदान बंदी
कोरबा/कुसमुंडा। एसईसीएल (SECL) कुसमुंडा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले ग्राम गेवरा बस्ती के ग्रामीणों का धैर्य अब जवाब दे चुका है। पिछले 12 वर्षों से अपनी जमीन रोजगार और उचित बसाहट के लिए संघर्ष कर रहे ग्रामीणों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। प्रशासन और प्रबंधन को सौंपे गए अल्टीमेटम के अनुसार यदि 15 दिनों के भीतर उनकी मांगों का निराकरण नहीं हुआ, तो 21 मई 2026 से कुसमुंडा खदान का चक्का पूरी तरह जाम कर दिया जाएगा ।

आश्वासनों का जाल और 12 साल का वनवास
ग्रामीणों का आरोप है कि 13 मई 2014 से उनकी जमीनों पर स्टे लगाया गया और 18 जुलाई 2018 को अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन आज तक न तो मुआवजा मिला, न ही नौकरी और बसाहट। ग्रामीणों ने भावुक होते हुए कहा- हम अपने ही घरों में कैदी बन गए हैं। जमीन पर स्टे होने के कारण हम न उसे बेच पा रहे हैं और न ही बच्चों की शादी या अन्य सामाजिक कार्यों के लिए आर्थिक व्यवस्था कर पा रहे हैं ।
जल संकट और खेती की तबाही
विज्ञप्ति के माध्यम से ग्रामीणों ने बताया कि खदान के विस्तार के कारण क्षेत्र का जलस्तर गिर चुका है, खेती पूरी तरह चौपट हो गई है और पीने के पानी की भारी किल्लत है। एसईसीएल प्रबंधन न तो पानी की व्यवस्था कर रहा है और न ही फसल के नुकसान की क्षतिपूर्ति दे रहा है ।
प्रमुख मांगें:-
12 वर्षों से लंबित मुआवजे का तत्काल भुगतान ।
प्रभावित युवाओं को नियमानुसार स्थायी रोजगार ।
बुनियादी सुविधाओं से युक्त बसाहट स्थल का चयन और पुनर्वास ।
खेती और पानी के नुकसान की उचित क्षतिपूर्ति ।
प्रबंधन को अंतिम चेतावनी

ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे पिछले सात महीनों से लगातार धरना-प्रदर्शन और पत्राचार कर रहे हैं। अधिकारी बार-बार आश्वासन देते हैं, लेकिन धरातल पर कुछ नहीं होता। अब दफ्तरों के चक्कर लगाते-लगाते थक चुके ग्रामीण मानसिक और आर्थिक रूप से टूट चुके हैं ।
गेवरा बस्ती के ग्रामीणों ने कहा कि अब और आश्वासन नहीं समाधान चाहिए। अगर 15 दिन में हमारी समस्याएँ हल नहीं हुईं तो होने वाले उग्र आंदोलन और खदान बंदी की पूरी जिम्मेदारी एसईसीएल प्रबंधन और जिला प्रशासन की होगी ।

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