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कोरबा

पाली-तानाखार कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार ने किसानों के साथ काटी धान की फसल, कहा-भूपेश सरकार की किसान न्याय योजना से खेत-खलिहान आबाद, किसान खुशहाल

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कोरबा/पाली तानाखार ( दिव्य आकाश) । जिले में धान की फसल अब पकने लगी है और किसान एक बार फिर खेती की ओर रूख कर गए हैं। प्रत्याशी गांव-गंाव घूम रहे हैं लेकिन अब अधिकांश ग्रामीण घर में नहीं मिल रहे हैं, ऐसे में प्रत्याशियों को जमकर पसीना बहाना पड़ रहा है। अपने-अपने अंदाज से प्रत्याशी मतदाताओं को रिझाने में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक लोक लुभावन तस्वीर सामने आयी। पाली तानाखार विधानसभा क्षेत्र की कांग्रेस प्रत्याशी अपने जनसंपर्क अभियान के तहत पोड़ी-उपरोड़ा ब्लाक के तुमान, रावा, कांसामार, बनखेता, बरभांठा, नगोई,केसलपुर, मुकुआ क्षेत्र में धुंआधार प्रचार पर निकली थीं। जब वह बनखेता की बस्ती में पहुंची, उसके पूर्व खेतों में महिला-पुरूष अपनी कमाई की फसल काट रहे थे, उन पर दुलेश्वरी सिदार की नजर पड़ी और उनका आशीर्वाद लेने खेत तक पहुंच गई। मन उतावला हो रहा था कि खेती-किसानी में कितनी आत्म संतुष्टी मिलती है। उनसे रहा नहीं गया और वे किसानों के साथ कुछ देर के लिए धान की फसल काटना प्रारंभ कर दिया। उनके साथ कारवां में उपस्थित अन्य खेतिहर महिला-पुरूष भी धान काटना प्रारंभ कर दिया। दुलेश्वरी सिदार की सरलता को देखकर किसान काफी प्रभावित हुए। कुछ देर के बाद दुलेश्वरी अपने कारवंा के साथ उनसे आशीर्वाद लेकर आगे बढ़ गईं। चुनावी प्रचार प्रसार के दौरान जहां भी जिस क्षेत्र में प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार का काफिला पहुंच रहा है, वहां कार्यकर्ताओं और ग्रामीणों द्वारा आत्मीयता के साथ स्वागत किया जा रहा है। प्रचार प्रसार अभियान के दौरान भारी जनसमर्थन कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती सिदार को मिलते दिख रहा है। श्रीमती दुलेश्वरी सिदार के जनसंपर्क अभियान के दौरान पहुंचते ही लोगों का जन सैलाब उमड पड़ रहा है और युवाओं के साथ-साथ बड़े बुजुर्गों और खासकर महिलाओं में भी खासा उत्साह देखने को मिल रहा है, तो वहीं कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार ने आम जनता को छत्तीसगढ़ की कांग्रेस सरकार की विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं से अवगत करा रही हंै। उन्होंने मीडिया से चर्चा करते हुए कहा कि भूपेश सरकार ने इन पांच सालों में कोठी-कोठा-कोठार को आबाद किया और किसान न्याय योजना से किसानों का जीवन ही बदल दिया और किसान समृद्ध हुए। किसान न्याय योजना ही कोरोना काल में ग्रामीण किसानों को आर्थिक सम्बल प्रदान किया और जब पूरा देश- विश्व मंदी के दौर से गुजर रहा था, तब छत्तीसगढ़ में मंदी का नामो निशान नहीं दिखा और सबका जीवन सामान्य चलता रहा। भूपेश सरकार ने सभी वर्गों का ध्यान दिया और ग्रामीण क्षेत्रों में रीपा के माध्यम से ग्रामीण महिलाओं के लिए रोजगार सृजन कर महिला सशक्तिकरण की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया। इतना ही नहीं गौठानों से पशु धन की वृद्धि हुई और गोबर तथा गौमूत्र खरीदकर सरकार ने ग्रामीणों का जीवन संवारा।

महिलाओं के साथ मिलकर दुलेश्वरी सिदार ने काटा खेतो में धान

पाली तानाखार विधानसभा कांग्रेस प्रत्याशी श्रीमती दुलेश्वरी सिदार आज जनसंपर्क के दौरान जब ग्राम पंचायत बरभांटा व नगोई पहुंची तो इस बीच खेतों में धान कटाई करती महिलाओं को देखा, तो उनका काफिला कुछ देर के लिए रुक गया और श्रीमती दुलेश्वरी सिदार ने खेतों में धान काट रही महिलाओं से मिला और उनसे मिलकर मतदान करने की अपील की। साथ ही ग्रामीण महिलाओं के साथ मिलकर खेतों में धान भी काटा। यह देख वहां उपस्थित महिलाओं में खुशी देखी गई और महिला प्रत्याशी के समर्पण भाव को देख महिलाओं ने कांग्रेस प्रत्याशी को वोट देकर जीतने के लिए अग्रिम बधाई दी। पोंडी उपरोडा ब्लॉक के सघन जनसम्पर्क के दौरान कांग्रेस प्रत्याशी दुलेश्वरी सिदार के साथ जिला कांग्रेस कमेटी के सचिव सुरेश गुप्ता, पोंडी उपरोडा ब्लॉक अध्यक्ष अशमेर सिंह पोर्ते, सांसद प्रतिनिधि अशोक मिश्रा, जनपद सदस्य विजय दुबे, आयुष सिंह, अरविंद गुप्ता,गुरमिंद दास मंहत तथा बड़ी संख्या में कांग्रेसी एवं क्षेत्र के ग्रामीण काफी संख्या में उपस्थित थे।

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कोरबा

महंगाई के विरोध में कांग्रेस ने दर्री में निकाली शवयात्रा

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कोरबा। लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर 21 मई को दर्री क्षेत्र जमनीपाली में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल  के नेतृत्व में कांग्रेसजनों द्वारा केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।

पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस (एलपीजी) तथा अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्रियों के दामों में जिस तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, उससे आम जनता का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। महंगाई ने मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है और लोगों के लिए गृहस्थी चलाना दुश्वार हो गया है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन व्यवस्था एवं आवश्यक वस्तुओं पर पड़ता है, जिसके कारण हर वस्तु महंगी होती जा रही है। रसोई गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने गृहिणियों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। वहीं खाद्य तेल, दाल, सब्जियां एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से आम नागरिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

जयसिंह अग्रवाल ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार केवल बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी महंगाई से त्रस्त है। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की कीमतों में तत्काल कमी की जाए तथा आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। जमनीपाली पेट्रोल पंप के पास पिछले दो दिनों से डीजल के अभाव में दर्जनों ट्रक सड़क किनारे कतार से खड़े हैं ।

विरोध प्रदर्शन रैली में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक तौर पर मंहगाई का अर्थी सजाकर शवयात्रा निकाला और मातमपुर्शी करते हुए ‘राम नाम सत्य है, मंहगाई जबरजस्त है’, महंगाई की मार, अब नहीं सहेंगे यार । जनता त्रस्तः भाजपा मस्त, जैसे नारे भी लगाये ।

इस आयोजन में प्रमुख रूप से जयसिंह अग्रवाल के साथ प्रदेश सचिव विकास सिंह, कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) मुकेश कुमार राठौर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) मनोज चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष नत्थूलाल यादव, पूर्व सभापति धुरपाल सिंह कँवर, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, बालको नगर ब्लाक अद्ध्यक्ष ए.डी.जोशी, राजेंद्र तिवारी, पालुराम साहू, बसंत चंद्रा, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष सुधीर जैन, पार्षद नारायण लाल कुर्रे, रवि सिंह चंदेल, मंडल अध्यक्ष रोपा तिर्की, इकबाल कुरैशी, पूर्व पार्षद सुरती कुलदीप, अविनाश बंजारे, वरिष्ठ कांग्रेसी राजेंद्र सिंह ठाकुर, रेखा त्रिपाठी, रतन यादव, संजय अग्रवाल, हरवेन्द्र सिंह, अनिल द्विवेदी, राम इकबाल, बिसाहु दास, देवीदयाल तिवारी, भरत साहु, राजकुमार श्रीवास, जाकिर खान, डॉ.डी आर नेताम, सीमा कुर्रे, छत्रपाल कुर्रे, संतोष ठाकुर, रमेश दास महंत, सिकंदर मेमन, शशि साहु, हीरा साहु, संतोष यादव, संगीता श्रीवास, पार्षद अयोध्या मस्तुल कंवर, परमानंद सिंह, प्रवीण कुमार, मधुसुदन दास सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसजनों ने महंगाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही जनता को राहत नहीं दी, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आगे भी व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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कोरबा

सिंघाली क्षेत्र में बिजली तार चोरी से ग्रामीण अंधेरे में, राजेश यादव ने तत्काल बिजली व्यवस्था बहाल करने की उठाई मांग

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ढेलवाडीह/कटघोरा। कटघोरा सब स्टेशन ढेलवाडीह से संचालित देवरी फीडर अंतर्गत ढेलवा डीह जंगल से जवाली-सिंघाली पुल तक लगभग 7 से 8 किलोमीटर क्षेत्र में अज्ञात चोरों द्वारा करीब 25 से 30 बिजली पोलों के तार काटकर चोरी कर लिए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जवाली, सिंघाली और देवरी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार 14 मई को सिंघाली में सुशासन दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन इसके अगले ही समय बिजली प्रवाहित खंभों से तार चोरी कर चोरों ने पुलिस और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने प्रशासन एवं बिजली विभाग से तत्काल क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों की मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बाधित होने से आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने भी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बिजली चोरी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए रात्रि गश्त बढ़ाने, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने तथा बिजली लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन से की है।

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कोरबा

तेज धूप और थकान में भी हरा सोना से मिलती है राहत

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गाँव-गाँव इन दिनों तेंदूपत्ता संग्रहण का चल रहा सिलसिला

कोरबा। तेज़ दोपहरी की धूप हो या गाँव के तालाबों में कम होता पानी, गर्मी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है। लेकिन कोरबा जिले के दूरस्थ गाँव लेमरू के परिवारों के लिए यही मौसम खुशियों की सौगात भी लेकर आया है। कारण है—तेंदूपत्ता के बढ़े हुए दाम, जिसने इस क्षेत्र के सैकड़ों संग्राहक परिवारों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।

गाँव की गलियों में दोपहर का सन्नाटा भले ही छाया रहता हो, पर जंगल की ओर जाने वाली पगडंडियों पर सुबह से शाम तक रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हुए हैं। जंगलों से पत्ते तोड़कर लाना, उन्हें गठरी में भरकर घर तक लाना और फिर घर की परछी में बैठकर 50-50 पत्तों के बंडल बनाना—इन सब कामों के बीच उनके चेहरों पर एक समान चमक दिखाई देती है। सभी के मन में यही खुशी है कि दाम बढ़ने से आमदनी भी बढ़ेगी और जितना अधिक संग्रहण होगा, उतनी ही आमदनी मिलेगी।

लेमरू गाँव के संतोष यादव और उनकी पत्नी दिव्या यादव हर सुबह सूरज निकलने से पहले लाम पहाड़ के जंगल की ओर निकल जाते हैं। दिव्या बताती हैं कि सुबह से दोपहर तक पत्ते तोड़ते हैं, फिर दोपहर के बाद खाना खाकर घर में बैठकर बंडल बनाना शुरू करते हैं। इस बार वे पिछले साल से कहीं अधिक पत्ता तोड़ रहे हैं, क्योंकि कीमत भी बढ़ी है और मेहनत का सीधा लाभ मिलने वाला है। संतोष परसा पेड़ की छाल से रस्सी बनाकर तेंदूपत्तों की गड्डी तैयार करते हैं।
दिव्या, जिन्हें महतारी वंदन योजना से प्रति माह 1000 रुपये की सहायता मिलती है, बताती हैं कि यह राशि उनके परिवार के लिए बेहद उपयोगी है। तेंदूपत्ता संग्रहण और योजना से मिली सहायता मिलकर अब उनके परिवार के लिए बेहतर भविष्य की राह खोल रहे हैं। वे खुशी से बताती हैं कि अब प्रति मानक बोरा की कीमत 5500 रुपये कर दी गई है, जिससे वे अपने घर के निर्माण का सपना पूरा करना चाहती हैं।
गाँव की ही सोना बाई और सुमित्रा बाई भी सुबह-सुबह जंगल जाती हैं। वे कहती हैं कि जितना ज्यादा पत्ता तोड़ेंगे, उतनी ही आय होगी। पहले कीमत 2500 रुपये थी, फिर 4000 हुई और अब 5500 रुपये होने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। तेंदूपत्ता संग्राहक कार्ड के माध्यम से बीमा और बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएँ भी मिल रही हैं, जो वन क्षेत्र के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन चुकी हैं।
तेंदूपत्ता के बढ़े दामों ने संग्राहकों के चेहरों पर नई रोशनी ला दी है। संग्राहकों ने कीमत वृद्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उन्हें भरोसा है कि बढ़ी हुई कीमतें उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल देंगी और उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाएँगी।
गर्म हवाओं और सूखे खेतों के बीच भी लेमरू के इन परिवारों के चेहरों पर चिंता नहीं, बल्कि उम्मीद की हरियाली है। तेंदूपत्ता सिर्फ उनका रोज़गार नहीं है, बल्कि जीवन बदलने की एक मजबूत ताकत है। यह कहानी तेंदूपत्ते की नहीं, बल्कि उन परिवारों की है जिन्होंने मेहनत, आत्मविश्वास और बढ़ी हुई कीमतों के सहारे अपने जीवन में नई खुशियों की हरियाली उगाई है।

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