देश
महाराष्ट्र में अजित पवार के साथ रिश्ता खत्म कर सकती है बीजेपी, RSS भी जता चुका है नाराजगी
नई दिल्ली, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ संबंध तोड़ सकती है। एक रिपोर्ट की मानें तो बीजेपी आगामी महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना के साथ मिलकर लड़ सकती है। अजित पवार ने जहां एक ओर 80 सीटों की मांग की है तो वहीं दूसरी तरफ बीजेपा का बड़ा गुट अजित को महायुति में रखने का पक्षधर नहीं है।
एनसीपी के साथ गठबंधन महाराष्ट्र में हार का कारण
यह बात तब सामने आई है जब आरएसएस के मुखपत्र में एक लेख में कहा गया था कि उपमुख्यमंत्री अजित पवार के नेतृत्व वाली एनसीपी के साथ गठबंधन महाराष्ट्र में भाजपा की लोकसभा चुनाव में हार का एक कारण था। हाल ही में संपन्न लोकसभा चुनाव 2024 में विपक्षी महा विकास अघाड़ी (एमवीए) ने महाराष्ट्र की 48 में से 30 सीटें जीतीं। एनडीए का हिस्सा सत्तारूढ़ महायुति को सिर्फ 17 सीटें मिलीं। 2019 में एनडीए ने महाराष्ट्र की 48 में से 43 सीटें जीती थीं, जबकि तत्कालीन यूपीए ने शेष पांच सीटें हासिल की थीं। यद्यपि मतदाताओं ने लोकसभा और विधानसभा चुनावों में अलग-अलग तरीके से चुनाव किया, लेकिन लोकसभा चुनाव के परिणाम का इन दोनों राज्यों में होने वाले आगामी विधानसभा चुनावों पर असर पड़ेगा।
घोटालों से जुड़े होने के कारण अजित पवार के विरोधी हैं
एक रिपोर्ट में एक वरिष्ठ भाजपा नेता के हवाले से कहा गया है, “आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ताओं को पवार विरोधी नारे पर तैयार किया जा रहा है। सिंचाई और महाराष्ट्र राज्य सहकारी बैंक घोटालों से जुड़े होने के कारण वे अजित पवार के विरोधी हैं। लेकिन जूनियर पवार के भाजपा से हाथ मिलाने के बाद पवार विरोधी बयान पीछे छूट गया। घाव पर नमक छिड़कते हुए उन्हें महायुति सरकार में उपमुख्यमंत्री बना दिया गया।”
एनसीपी ने भाजपा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया
रविवार को मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल के शपथ ग्रहण से कुछ घंटे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) ने पार्टी नेता प्रफुल्ल पटेल को नई सरकार में स्वतंत्र प्रभार वाला राज्य मंत्री बनाने के भाजपा के प्रस्ताव को ठुकरा दिया। एनसीपी के अजित पवार गुट के सदस्य पटेल ने कहा कि राज्य मंत्री का पद स्वीकार करना उनके लिए एक तरह से पदावनत करने जैसा होगा क्योंकि वह पहले भी कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
प्रचार को तैयार नहीं थे RSS-BJP कार्यकर्ता
भाजपा नेता ने कहा, “लोकसभा चुनावों में यह स्पष्ट था कि आरएसएस-भाजपा कार्यकर्ता एनसीपी उम्मीदवारों के लिए प्रचार करने के लिए तैयार नहीं थे और कई जगहों पर वे उदासीन बने रहे।नतीजतन, 2019 में भाजपा की सीटों की संख्या 23 से घटकर 2024 में नौ रह गई।” आम चुनावों में एनसीपी का अजित पवार गुट पांच सीटों पर चुनाव लड़कर केवल एक सीट – रायगर – ही जीत सका था।
भाजपा की ब्रांड वैल्यू कम हो गई – आरएसएस
आरएसएस के मुखपत्र ऑर्गनाइजर में छपे लेख में आजीवन आरएसएस कार्यकर्ता रतन शारदा ने लिखा कि अजित पवार के साथ गठबंधन करने से “भाजपा की ब्रांड वैल्यू” कम हो गई और यह “बिना किसी अंतर वाली एक और पार्टी” बन गई।
समझौता न करने का क्या असर होगा?
रिपोर्ट के अनुसार, सूत्रों ने बताया कि भाजपा नेतृत्व इस बात पर विचार कर रहा है कि इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनावों में अजित के साथ कोई समझौता न करने का क्या असर होगा। अगर यह सच है, तो यह कदम अजित पवार के लिए एक झटका हो सकता है, जो लोकसभा में हार के बाद अनिश्चित राजनीतिक भविष्य की ओर देख रहे हैं। महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन का हिस्सा होने और अपने चाचा शरद पवार से मूल पार्टी का नाम और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) का चुनाव चिन्ह हासिल करने के बावजूद ऐसा हुआ है।
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फारूक अब्दुल्ला बोले- ऊपर वाले ने बचाया:हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी, सुरक्षाकर्मी की वजह से बचे
श्रीनगर,एजेंसी। नेशनल कॉन्फ्रेंस अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार रात एक व्यक्ति ने फायरिंग कर दी। हमलावर ने सिर पर कुछ इंच दूर से गोली चलाई थी। गनीमत रही कि सुरक्षाकर्मियों ने हमलावर का हाथ ऊपर कर दिया और उन्हें गोली नहीं लगी।
अधिकारियों के मुताबिक फारूक जम्मू में एक शादी समारोह में पहुंचे थे। उनके साथ राज्य के डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी भी थे। फारूक अब्दुल्ला ने गुरुवार को कहा-
मुझे ऊपर वाले ने बचाया है। शादी से निकलते समय मैंने कुछ आवाज सुनी, मुझे लगा कि यह पटाखा है। बाद में मुझे बताया गया कि एक आदमी ने पिस्तौल से दो गोलियां चलाईं। सुरक्षाकर्मियों ने बीच-बचाव किया, जिससे हथियार ऊपर की ओर हो गया और नुकसान होने से बच गया।
वहीं, हमलावर कमल ने पुलिस को बताया कि वह पिछले 20 सालों से फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था। हमलावर को कोर्ट ने 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया है।
वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जम्मू में फायरिंग की घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला से फोन पर बात की और उनका हालचाल पूछा।
फारूक अब्दुल्ला ने ये भी बताया…
- मेरे पास मेरी सिक्योरिटी की तारीफ करने के लिए शब्द नहीं हैं। लोकल पुलिस वाले, मेरे साथ रहने वाले सिक्योरिटी वाले और NSG के सदस्य शामिल थे, जो मेरी सुरक्षा के लिए मेरे सामने खड़े थे।
- मैं उस आदमी को नहीं जानता, न ही किसी ने मुझे उसके बारे में कभी कुछ बताया। जहां तक उसके मकसद की बात है मुझे कैसे पता चलता कि वह क्या हो सकता था?
- सवाल यह है कि इस शादी में कई जाने-माने लोग मौजूद थे, इसलिए पुलिस को सही सावधानी बरतनी चाहिए थी। लेकिन पुलिस का कोई इंतजाम नहीं था।
- सिर्फ मेरे लिए नहीं, बल्कि उस शादी में कई जाने-माने लोग आए थे। ऐसे इवेंट में प्रोटेक्शन होना जरूरी था, खासकर आज जिस तरह के माहौल में हम रह रहे हैं।
- इस मामले की सही जांच होनी चाहिए। अब यह गृहमंत्री पर है कि वे जांच करें और पता लगाएं कि ऐसा क्यों हुआ और इसका क्या कारण था। आजकल इस तरह की चीजें होती रहती हैं।
- हमलावर को हमेशा फायदा होता है। उसे पता होता है कि वह आपको कहां टारगेट करना चाहता है। लेकिन मैं यह नहीं कहूंगा कि सिक्योरिटी और बढ़ानी चाहिए। यह मुख्य मुद्दा नहीं है।

हमलावर कमल सिंह जमवाल को गुरुवार को मेडिकल चेकअप के लिए ले जाया गया।
हमलावर ने पहले कहा यही मकसद था, फिर बोला- गलती हो गई
नेशनल कॉन्फ्रेंस के प्रेसिडेंट फारूक अब्दुल्ला पर हमला करने का आरोपी कमल सिंह जामवाल पर पूछताछ में कई बार बयान बदल चुका है। घटना के बाद रात में उसने दावा किया था कि पिछले 20 साल से वो फारूक अब्दुल्ला को मारना चाहता था।
आरोपी ने कहा था कि यही मेरी जिंदगी का मकसद था। लेकिन घटना के बाद अगली सुबह उसने कहा कि हमसे गलती हो गई। अब पछतावा हो रहा है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि ये घटना के समय थोड़ा नशे में भी था। गुरुवार को मेडिकल जांच के लिए ले जाते वक्त जामवाल ने कहा- मैंने किसी के कहने पर गोली नहीं चलाई। मैंने अपनी मर्जी से गोली चलाई है।
जांचकर्ताओं ने शुरुआती तौर पर ये माना है कि आरोपी फायरिंग करते समय कथित तौर पर शराब पी हुई थी। पुलिस सूत्रों ने कहा कि आरोपी अगले दिन पछतावे की हालत में लग रहा था और उसने ऐसे बयान दिए जो उसके पहले के दावों से उलट थे।
आरोपी ने पूछताछ के दौरान कई अलग-अलग बातें बताई हैं। इसलिए उससे अलग-अलग कई अधिकारियों ने बारी-बारी से पूछताछ की है। जिससे उसके असली वजह का पता लगाया जा सके। इसके साथ ही पुलिस उसके 20 साल पुराने बैकग्राउंड की भी जांच कर रही है। आरोपी के पड़ोसियों और रिश्तेदारों से भी पूछताछ की गई है।
सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुई घटना…
घटना का सीसीटीवी भी सामने आया है। इसमें देखा जा सकता है कि 70 साल के हमलावर कमल सिंह जामवाल ने पीछे से आकर फारूक के सिर पर रिवॉल्वर तान दी। सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत हमलावर का हाथ हटाया जिससे फायर हवा में हो गया।
हमलावर ने फारूक का पीछा किया

हमलावर कमल पीछे चलते हुए फारूक अब्दुल्ला के करीब आता है।
सिर पर रिवॉल्वर तानी

इसके बाद वह फारूक अब्दुल्ला के सिर के पास रिवॉल्वर लेकर जाता है और फायर करता है।
सिक्योरिटी गार्ड ने हमलावर की कोहनी पकड़कर हाथ उठाया

फायर करते ही सुरक्षाकर्मी कमल को पकड़कर जमीन पर गिरा देते हैं।
हमलावर को भीड़ ने पकड़ लिया

घटना के तुरंत बाद सुरक्षाकर्मी और वहां मौजूद लोगों ने हमलावर को पकड़ लिया।
हमलावर के साथ मारपीट

कुछ लोगों ने आरोपी कमल सिंह को पकड़ने के बाद उसके साथ मारपीट भी की।
थाने में हमला करना कबूल किया

ये हमलावर कमल सिंह है। सुरक्षाकर्मी उससे पूछताछ कर हमले के कारणों का पता लगा रहे हैं।
जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन
नेशनल कॉन्फ्रेंस के हजारों कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने बुधवार को पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर हाल ही में हुए हमले की निंदा करते हुए जम्मू में एक बड़ा विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारी पार्टी के झंडे, प्लेकार्ड और बैनर लिए हुए थे और केंद्र और लेफ्टिनेंट गवर्नर मनोज सिन्हा के नेतृत्व वाले प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए।
पार्टी नेताओं ने इस घटना को केंद्र शासित प्रदेश में लोकतांत्रिक राजनीति के लिए एक गंभीर चुनौती बताया। नेशनल कॉन्फ्रेंस के एक सीनियर नेता ने रैली को संबोधित करते हुए प्रदर्शनकारियों से कहा, हमारे नेता पर हमला मंजूर नहीं है और इसके लिए जिम्मेदार लोगों को सजा मिलनी चाहिए।

जम्मू में नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं ने प्रदर्शन किया।
पुलिस बोली- हमलावर के पास कई साल से लाइसेंसी हथियार
पुलिस के मुताबिक, हमलावर पिछले कई सालों से लाइसेंसी हथियार इस्तेमाल कर रहा है। फारूक अब्दुल्ला, सुरिंदर चौधरी और दूसरे बड़े नेता नेशनल कॉन्फ्रेंस के कार्यकर्ता सुरजीत सिंह के बेटे की शादी में शामिल हुए थे। हमलावर सुरजीत सिंह का कजिन है। वह बिजनेसमैन है और उसकी पुराने शहर में कुछ दुकानें हैं।
CM उमर बोले- Z+ सिक्योरिटी में कोई करीब कैसे आया
फारूक के बेटे और जम्मू-कश्मीर के CM उमर अब्दुल्ला ने X पर लिखा कि एक आदमी लोडेड पिस्टल लेकर पॉइंट-ब्लैंक रेंज में आ गया और गोली चला दी। अल्लाह का शुक्र है कि मेरे पिता बाल-बाल बचे। सवाल उठता है कि कोई Z+ NSG प्रोटेक्टेड पूर्व CM के इतने करीब कैसे पहुंच गया।
घटना के बाद डिप्टी CM सुरिंदर चौधरी ने कहा- पुलिस से पूछना चाहिए कि रॉयल पार्क में इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। वहां लोकल पुलिस से कोई नहीं था। यह बहुत बड़ी सिक्योरिटी चूक है।

घटना के बाद फारूक अब्दुल्ला के घर के बाहर सिक्योरिटी बढ़ा दी गई है।
फारूक अब्दुल्ला 3 बार CM रह चुके हैं
डॉं फारूक जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस पार्टी के अध्यक्ष हैं। वे तीन बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री रहे हैं। उनके पिता शेख अब्दुल्ला भी मुख्यमंत्री थे। फारूक के बेटे उमर अब्दुल्ला अभी राज्य के मुख्यमंत्री हैं।
फारूक ने मेडिकल की पढ़ाई की और कुछ समय तक डॉक्टर के रूप में काम किया, लेकिन बाद में वे राजनीति में आ गए और अपने पिता की पार्टी से जुड़कर सक्रिय राजनीति करने लगे।
सीएम के रूप में फारूक का पहला कार्यकाल 1982 से 1984 तक रहा। 1986 से 1990 तक वे दूसरी बार और 1996 से 2002 तक तीसरी बार मुख्यमंत्री रहे। वे लोकसभा सदस्य भी रह चुके हैं। अब्दुल्ला 2009 से 2014 तक केंद्रीय ऊर्जा मंत्री भी रह चुके हैं।
देश
SC बोला-पेरेंट्स की सैलरी OBC क्रीमी लेयर का आधार नहीं:सिविल सेवा पास करने वाले कैंडिडेट्स को राहत, आरक्षण का फायदा नहीं मिला था
नई दिल्ली,एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि OBC आरक्षण में क्रीमी लेयर का फैसला केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं किया जा सकता। माता-पिता या अभिभावकों के पद (पोस्ट) और सामाजिक स्थिति (स्टेटस) को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
साथ ही कहा कि अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों और प्राइवेट या PSU कर्मचारियों के बच्चों को अलग-अलग तरीके से आरक्षण दिया जाए तो यह अनुचित भेदभाव होगा।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यह फैसला दिया। कोर्ट ने केंद्र सरकार की अपील को खारिज करते हुए दिल्ली, मद्रास और केरल हाईकोर्ट के फैसलों को सही माना।
कोर्ट ने उन UPSC कैंडिडेट्स को बड़ी राहत दी है, जिन्हें सिविल सेवा परीक्षा पास करने के बावजूद नौकरी नहीं दी गई थी। सरकार ने उनके माता-पिता की सैलरी को आधार मानकर उन्हें क्रीमी लेयर की श्रेणी में डाल दिया था। कोर्ट ने साफ किया कि सरकार ने कैंडिडेट्स को आरक्षण से बाहर करने के लिए गलत पैमाना अपनाया।
सरकार ने सैलरी को आय में जोड़ दिया
- यह पूरा विवाद उन कैंडिडेट्स से जुड़ा है जिनके माता-पिता पब्लिक सेक्टर्स (पीएसयू), बैंक या इसी तरह के संस्थानों में काम करते थे। इन कुछ कैंडिडेट्स ने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (CAT) में याचिका दायर की थी। वे सिविल सेवा परीक्षा में OBC (नॉन क्रीमी लेयर) का लाभ चाहते थे। ट्रिब्यूनल ने सरकार को आदेश दिया था कि उन्हें उनके OBC श्रेणी के आरक्षण के आधार पर नौकरी दी जाए।
- केंद्र सरकार ने 1993 का ऑफिस मेमोरेंडम (OM) जारी किया था, जिसमें बताया गया था कि OBC में क्रीमी लेयर कौन होगा। उसमें कहा गया था कि वेतन और कृषि आय को आय सीमा तय करने में शामिल नहीं किया जाएगा। लेकिन 14 अक्टूबर 2004 के स्पष्टीकरण में PSU और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों के वेतन-आय को शामिल करने की बात कही गई थी।
- सरकार ने इस स्पष्टीकरण पत्र का सहारा लेकर कैंडिडेट्स के माता-पिता की सैलरी को आय में जोड़ दिया था। इस वजह से कैंडिडेट्स को आरक्षण का फायदा नहीं मिला था।
कोर्ट ने कहा- एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता
कोर्ट ने कहा कि 2004 का एक पत्र मुख्य नीति को नहीं बदल सकता। कोर्ट यह भी पाया कि सरकारी कर्मचारियों और पीएसयू कर्मचारियों के बीच भेदभाव करना गलत है।
अगर सरकारी कर्मचारियों के बच्चों को पद के आधार पर छूट मिलती है, तो पीएसयू कर्मचारियों के बच्चों को केवल सैलरी के आधार पर आरक्षण से बाहर करना समानता के अधिकार का उल्लंघन है।
सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि वह 6 महीने के भीतर इन कैंडिडेट्स के दावों पर फिर से विचार करे। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर जरूरी हो तो इन कैंडिडेट्स को नौकरी देने के लिए अलग से पद बनाए जाएं।
खेल
हार्दिक पंड्या के खिलाफ तिरंगे के अपमान की शिकायत:वर्ल्ड कप जीत के जश्न के दौरान फ्लैग ओढ़कर जमीन पर लेटने का आरोप
बेंगलुरु,एजेंसी। क्रिकेटर हार्दिक पंड्या के खिलाफ तिरंगे के अपमान को लेकर बेंगलुरु में शिकायत दर्ज कराई गई है। पुणे के वकील वाजिद खान बिडकर ने यह शिकायत की है।
टी-20 वर्ल्ड कप में भारत की जीत के बाद अहमदाबाद में जश्न के दौरान पंड्या पर तिरंगे का सम्मान न करने का आरोप लगाया गया है।
वायरल वीडियो के आधार पर शिकायत
शिकायतकर्ता के अनुसार, टीम इंडिया की जीत के बाद मैदान पर जश्न मनाते हुए कई वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए। एक वीडियो में पंड्या अपने कंधे पर तिरंगा ओढ़कर मैदान पर नाचते और दौड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं।
आरोप है कि जश्न के दौरान पंड्या अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मंच पर लेटे दिखे। उस समय भी उनके कंधे पर तिरंगा था। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान के खिलाफ है।

हार्दिक पंड्या टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद गर्लफ्रेंड के साथ जश्न मनाते हुए दिखे। तिरंगा उनके कंधे पर था।
राष्ट्रीय ध्वज कानून का हवाला
वकील वाजिद खान ने कहा कि द प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट्स टु नेशनल ऑनर एक्ट, 1971 के अनुसार तिरंगे की गरिमा बनाए रखना अनिवार्य है। उनका आरोप है कि जश्न के दौरान हार्दिक पंड्या इस बात का ध्यान नहीं रख पाए, जिसे राष्ट्रीय ध्वज का अपमान माना जा सकता है। इस मामले में उन्होंने इसी कानून की धारा 2 के तहत शिकायत दर्ज कराई है।
यह कानून राष्ट्रीय ध्वज, संविधान और राष्ट्रगान जैसे राष्ट्रीय प्रतीकों के अपमान को रोकने के लिए बनाया गया है। इसके तहत तिरंगे को जमीन पर गिरने देना, उसे अनुचित तरीके से पहनना या किसी भी तरह उसकी गरिमा को ठेस पहुंचाना दंडनीय माना जाता है।
खान ने बताया कि उन्होंने शिवाजी नगर पुलिस स्टेशन में लिखित शिकायत दी है। शुरुआत में पुलिस ने कहा कि घटना अहमदाबाद में हुई है, इसलिए मामला वहीं दर्ज होना चाहिए। हालांकि, खान ने तर्क दिया कि तिरंगा पूरे देश का राष्ट्रीय प्रतीक है, इसलिए इसकी शिकायत कहीं भी दर्ज कराई जा सकती है। बाद में पुलिस ने उनकी शिकायत स्वीकार कर ली और उसकी कॉपी भी उन्हें दे दी।

पुणे के वकील वाजेद खान बिडकर जिन्होंने पंड्या के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है।
भारत ने न्यूजीलैंड को हराकर जीता खिताब
भारत ने फाइनल में न्यूजीलैंड को 96 रन से हराकर टी-20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता। यह भारत का तीसरा टी-20 वर्ल्ड कप खिताब है।
भारत इससे पहले 2007 और 2024 में भी यह ट्रॉफी जीत चुका है। साथ ही, यह पहली बार है जब किसी टीम ने अपने ही देश में टी-20 वर्ल्ड कप जीता और लगातार दो बार खिताब अपने नाम किया।

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