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IBC कानून आने के बाद हो चुकी है चार लाख करोड़ रुपए की वसूलीः आईबीबीआई प्रमुख

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नई दिल्ली, एजेंसी। दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी) लागू होने के 10 साल के भीतर कर्ज समाधान प्रक्रियाओं के जरिये कर्जदाताओं को चार लाख करोड़ रुपए से अधिक की वसूली हुई है। भारतीय दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता बोर्ड (आईबीबीआई) के प्रमुख रवि मित्तल ने बताया कि मार्च, 2026 तक इस कानून के तहत 1,419 मामलों में समाधान योजनाएं लागू हुईं, जिनसे कर्जदाता चार लाख करोड़ रुपए से अधिक बकाया की वसूली करने में सफल रहे। यह राशि उनके ‘उचित मूल्य’ का 95 प्रतिशत और ‘परिसमापन मूल्य’ का 167 प्रतिशत है।

मित्तल ने आईबीसी कानून लागू होने के 10 साल पूरे होने पर जारी अपने संदेश में कहा कि इस कानून का निवारक प्रभाव भी स्पष्ट है। राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) के समक्ष दाखिल 30,000 से अधिक मामले प्रवेश-पूर्व चरण में ही समझौते या वापसी के जरिये निपटा लिए गए। इन मामलों में करीब 14 लाख करोड़ रुपये की राशि शामिल थी। आईबीबीआई प्रमुख ने कहा कि ये समझौते दर्शाते हैं कि आईबीसी ने कर्जदाता और कर्जदार के बीच संबंधों को बदला है और औपचारिक दिवाला प्रक्रिया से पहले ही वित्तीय संकट के समाधान को बढ़ावा दिया है। मार्च, 2026 तक कुल 8,987 मामलों को एनसीएलटी में स्वीकार किया गया, जिनमें से 7,102 मामलों का निपटान हो चुका है। 

बंद हो चुके मामलों में 4,099 कंपनियां (करीब 58 प्रतिशत) सफलतापूर्वक फिर खड़ी हो गईं, जबकि 3,003 मामलों में उन्हें बंद कर दिया गया। मित्तल ने कहा कि पुनरुद्धार वाली कंपनियों में से 1,388 मामलों का निपटारा अपील, समीक्षा या समझौते के जरिये हुआ, जबकि 1,292 मामलों को वापस ले लिया गया। केंद्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री निर्मला सीतारमण के कार्यालय ने भी एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि आईबीसी ने भारत में कारोबारी संकट के समाधान के तरीके को बदल दिया है। सीतारमण के कार्यालय ने कहा कि इस कानून ने पहले की जटिल और कर्जदार के नियंत्रण वाली प्रक्रिया को बदलकर एक ऐसी प्रणाली बनाई है, जिसमें कर्जदाता प्रमुख भूमिका निभाते हैं और मामलों का समाधान तय समय में होता है। 

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कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने किया इस्तीफे का ऐलान, मुख्यमंत्री आवास पहुंचे शिवकुमार

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बेंगलुरु, एजेंसी।  कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने अपने आवास पर आयोजित नाश्ते के दौरान अपने मंत्रिमंडल के सहयोगियों को अपने पद छोड़ने के फैसले की जानकारी दी। नाश्ते की बैठक में उनके वर्तमान उप मुख्यमंत्री और संभावित उत्तराधिकारी डी.के. शिवकुमार और अन्य मंत्रिमंडल के सहयोगी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा साझा की गई एक तस्वीर में, सिद्धारमैया भावुक शिवकुमार को गले लगाते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक अन्य तस्वीर में, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार शिवकुमार सिद्धारमैया के पैर छूते और उनका आशीर्वाद लेते हुए दिखाई दे रहे हैं। मुख्यमंत्री कार्यालय के सूत्रों के अनुसार, पार्टी उच्च कमान द्वारा राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए रास्ता बनाने के लिए कहे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने राज्यपाल से नियुक्ति का अनुरोध किया।

हालांकि, लोक भवन सूत्रों ने बताया कि सिद्धारमैया ने अभी तक राज्यपाल थावरचंद गहलोत से मिलने का समय नहीं मांगा है, जो निजी कारणों से अपने गृह नगर इंदौर के लिए रवाना हो गए हैं। दक्षिणी राज्य में नए मुख्यमंत्री की प्रतीक्षा में राजनीतिक माहौल गरमा रहा है। बुधवार को कर्नाटक के प्रभारी एआईसीसी महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला ने स्पष्ट किया कि कांग्रेस ने राज्य में अपने विधायक दल की बैठक नहीं बुलाई है और अभी तक कोई अन्य निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने मीडिया से इस मुद्दे पर अटकलें न लगाने का अनुरोध किया।

विधानसभा दल अपने नेता का चयन करता है, जो मुख्यमंत्री पद के लिए स्वाभाविक पसंद होता है। बुधवार को यहां पहुंचे सुरजेवाला ने सिद्धारमैया और अन्य वरिष्ठ नेताओं से भी मुलाकात की। यह घटनाक्रम तब सामने आया है जब कांग्रेस हाई कमांड ने कथित तौर पर सिद्धारमैया को राज्य में नेतृत्व परिवर्तन के लिए रास्ता बनाने को कहा और उन्हें राज्यसभा सीट के साथ पार्टी में एक केंद्रीय भूमिका की पेशकश की। खबरों के अनुसार, सिद्धारमैया ने तुरंत केंद्रीय भूमिका स्वीकार नहीं की है।

कुछ सूत्रों का कहना है कि सिद्धारमैया ने पार्टी के शीर्ष नेता राहुल गांधी से सीधे संदेश मिलने के कारण पद छोड़ने का फैसला किया होगा। मुख्यमंत्री ने बार-बार कहा है कि यदि लोकसभा में विपक्ष के नेता उनसे ऐसा करने को कहेंगे तो वे पद छोड़ देंगे। मंगलवार को पार्टी द्वारा सिद्धारमैया और शिवकुमार को दिल्ली बुलाया गया, जहां कांग्रेस मुख्यालय में राहुल गांधी, एआईसीसी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खर्गे, पार्टी के महासचिव के सी वेणुगोपाल और सुरजेवाला के साथ लगातार बैठकें हुईं।  

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PM मोदी और मायावती ने दी बकरीद की मुबारकबाद, BSP सुप्रीमो बोलीं-‘हमारी सरकार में रहा कानून का राज’

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लखनऊ, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को ईद उल-अजहा के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं और आशा जताई कि यह पर्व समाज में भाईचारे एवं खुशी की भावना को और गहरा करेगा। ईद उल-अजहा यानी बकरीद गुरुवार को देश के अधिकांश हिस्सों में मनाई जा रही है। मोदी ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ईद उल-अजहा की बधाई ! यह पर्व हमारे समाज में भाईचारे व खुशी की भावना को और गहरा करे। सभी की सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए कामना करता हूं।

मायावती ने दी बकरीद की मुबारकबाद, शांति और भाईचारे से त्योहार मनाने की अपील 
बहुजन समाज पार्टी (BSP) की राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने गुरुवार को ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। मायावती ने ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि ईद-उल-अजहा, अर्थात आम बोलचाल की जुबान में बकरीद पर्व की दुनिया भर में रहने वाले सभी भारतीय मुस्लिम भाई-बहनों व उनके परिवार वालों को दिली मुबारकबाद। साथ ही समस्त देशवासियों के खुश व खुशहाल जिन्दगी की शुभकामनाएं।” उन्होंने अपील की कि सभी, पर्व व त्योहार पूरी शान्ति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाए जाएं।

मायावती ने कहा कि यह देश व जनहित में हमेशा बेहतर रहेगा, ताकि देश-प्रदेश के विकास और यहां के लोगों की तरक्की पर पूरी ऊर्जा, शक्ति व संसाधन लग सकें।” पूर्व मुख्यमंत्री ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में रही बसपा की चारों सरकारों में हमेशा ‘कानून द्वारा कानून का राज’ रहा। उन्होंने कहा कि उनकी सरकारें पूरी तरह से सर्वसमाज-हितैषी और ‘सर्वजन हिताय व सर्वजन सुखाय’ की नीति पर चलने वाली बेहतरीन सरकारें थीं।

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स्पेस में ISRO की बड़ी खोज, Chandrayaan-2 ने चांद के साउथ पोल पर खोज डाली ‘बर्फ’

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नई दिल्ली, एजेंसी। एक नए अध्ययन में चंद्रमा के south polar क्षेत्र के कुछ सबसे ठंडे गड्ढों (crater) के नीचे बर्फ मौजूद होने के मजबूत संकेत मिलने का दावा किया गया है। अध्ययन में Double Shadowed Craters पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया, जो चंद्रमा के स्थायी रूप से छायायुक्त क्षेत्रों (psr) के भीतर स्थित विशेष प्रकार के गड्ढे हैं।

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को जारी एक बयान में कहा कि इस अध्ययन के निष्कर्ष भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण हैं। इससे भविष्य में, पृथ्वी के एकमात्र उपग्रह की सतह पर उतरने के संभावित स्थलों और स्थानीय संसाधन उपयोग गतिविधियों के लिए बर्फ युक्त क्षेत्रों की पहचान में मदद मिल सकती है। यह अध्ययन अहमदाबाद स्थित फिजिकल रिसर्च लेबोरेटरी (PRL) के वैज्ञानिकों ने किया है।

विश्लेषण के लिए वैज्ञानिकों ने Chandrayaan-2 Orbiter के ‘Dual Frequency Synthetic Aperture Radar’ (DFSAR) से प्राप्त आंकड़ों का अध्ययन किया। यह एक प्रकार की मानचित्रण तकनीक है, जिसमें दो अलग-अलग रेडियो तरंग आवृत्तियों का उपयोग कर सतह की विस्तृत तस्वीरें ली जाती हैं। इसरो ने कहा कि स्थायी रूप से छायायुक्त क्षेत्र लगातार सूर्य के प्रकाश और ऊष्मीय विकिरण से सुरक्षित रहने के कारण अत्यधिक ठंडे बने रहते हैं। यही वजह है कि इन्हें लंबे भू-वैज्ञानिक कालखंड तक जल-बर्फ को सुरक्षित रखने के लिए अनुकूल माना जाता है।

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