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अहमदाबाद प्लेन क्रैश- चेतावनी के बावजूद उड़ा ड्रीमलाइनर:विमान का संतुलन बताने वाला सेंसर फेल होने का अलर्ट था; सरकार बोली- अभी नतीजा न निकालें

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नई दिल्ली,एजेंसी। 12 जून 2025 को एअर इंडिया की अहमदाबाद-लंदन फ्लाइट (बोइंग एआई-171) हादसे की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट शुक्रवार रात करीब ढाई बजे जारी की गई।

इसमें एक गंभीर चूक सामने आई है, जिसके केंद्र में है एक चेतावनी ‘STAB POS XDCR’ यानी विमान का संतुलन बताने वाला सेंसर फेल हो सकता है।

यह तकनीकी अलर्ट विमान की पिछली उड़ान (दिल्ली-अहमदाबाद) के ठीक बाद पायलट द्वारा दर्ज कराया गया था। इसके बावजूद महज एक घंटे में फिर से इस विमान को उड़ान के लिए क्लियर कर दिया गया।

यह बताता है कि विमान का हॉरिजेंटल स्टेबलाइजर (पिच बैलेंस बनाने वाला पिछला पंख) किस स्थिति में है। यदि यह डेटा सही न मिले, तो ऑटोपायलट, पिच कंट्रोल और स्टॉल प्रोटेक्शन जैसी अहम प्रणालियां गलत कमांड देने लगती हैं- विशेषकर टेकऑफ और शुरुआती चढ़ाई जैसे क्रिटिकल चरणों में।

पायलट ने सुबह 11:17 बजे यह अलर्ट दिया ​था और 12:40 बजे विमान को उड़ान की मंजूरी दे दी गई। दोपहर 1:38 बजे यही विमान लंदन के लिए टेकऑफ करता है और महज 30 सेकंड बाद दोनों इंजन बंद हो जाते हैं।

रिपोर्ट को लेकर सरकार ने कहा है कि इस पर स्टडी की जा रही है। अभी कोई निष्कर्ष न निकालें।

टेकऑफ के 3 सेकंड में ही दोनों इंजन के फ्यूल स्विच बंद हुए

अहमदाबाद में क्रैश एअर इंडिया विमान के साथ आखिरी पलों में क्या हुआ था? एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (एएआईबी) ने 15 पेज की शुरुआती रिपोर्ट में इसका उल्लेख किया है।

इसके अनुसार दोनों पायलट अनुभवी और उड़ान के लिए फिट थे। विमान भी फिट था। कुछ समय पहले इंजन बदले थे। हालांकि, उड़ान भरने के 3 सेकंड में ही फ्यूल स्विच बंद हो गए।

रिपोर्ट किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंची है। लेकिन जांच की दिशा काफी हद तक स्पष्ट हो रही है। इंजन फ्यूल कट ऑफ होना असामान्य है। ऐसे में, तकनीकी या मानवीय चूक दोनों पर जांच बढ़ेगी।

क्रिटिकल रिकवरी सिस्टम फेल या देर से एक्टिव होना भी जांच के दायरे में है। आइए विस्तार से जानते हैं रिपोर्ट में क्या-क्या कहा गया है…

अहमदाबाद विमान हादसा जांच रिपोर्ट जारी… तकनीकी दिक्कत थी, पर 1 घंटे में ही विमान रिलीज

  • 12 जून को विमान दिल्ली से एआई 423 के रूप में अहमदाबाद पहुंचा। इसने सुबह 11:17 बजे लैंड किया।
  • क्रू ने लॉग में STAB POS XDCR दर्ज किया। समाधान कर 12:10 बजे अगली उड़ान के लिए विमान रिलीज।
  • इसे एआई 171 के रूप में लंदन जाना था। उड़ान दोपहर बाद 1:10 बजे थी। पायलट पर्याप्त विश्राम कर चुके थे।
  • ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में क्रू पूरी तरह फिट मिला। 54,200 किलो ईंधन था। टेकऑफ वजन 2,13,401 किलो था। यह सब सीमाओं के भीतर था।

…आखिरी उड़ान, टेकऑफ तक सब सामान्य ही दिखा

  • एडवांस्ड सरफेस मूवमेंट गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम के अनुसार विमान बे 34 से दोपहर 1:18:38 बजे रवाना हुआ। टैक्सी क्लियरेंस 1:25:15 बजे मिला।
  • दोपहर 1:26:08 बजे विमान ने टैक्सी करना शुरू किया। टैक्सीवे R4 से रनवे 23 पर पहुंचा। विमान ने इसके बाद बैकट्रैक किया और लाइन अप हुआ।
  • टेकऑफ़ की अनुमति 1:37:33 बजे मिली और विमान ने 1:37:37 बजे टेकऑफ रोल शुरू कर किया।
  • ईएएफआर डेटा के अनुसार, विमान ने टेकऑफ निर्णय गति (V1) पार करते हुए 1:38:33 बजे 153 नॉट्स आईएएस (करीब 283 किमी प्रति घंटा)। विमान के एयर/ग्राउंड सेंसर्स 1:38:39 बजे एयर मोड में स्थानांतरित हो गए। यह लिफ्टऑफ की पुष्टि करता है।
  • विमान के टेक ऑफ करने के इस बिंदु तक सब कुछ सही था। कहीं से भी कोई चीज असामान्य दर्ज नहीं की गई थी।
  • सबसे पहले पेड़ों और फिर ऊंची चिमनी से टकराया विमान
  • गिरते वक्त विमान सबसे पहले आर्मी मेडिकल कॉर्प्स परिसर में कतार में लगे पेड़ों और एक ऊंची चिमनी से टकराया। फिर बिल्डिंग ‘ए’ की उत्तर-पूर्वी दीवार से​ ​टकराया। पेड़ और बिल्डिंग ‘ए’ की दूरी 293 फीट है। विमान आगे बढ़ता गया और टूटता-बिखरता रहा तथा अन्य ढांचों और पेड़ों से टकराया।
  • वर्टिकल स्टैबलाइजर व रडर
  • विमान में दो एन्हांस्ड एयरबोर्न फ्लाइट रिकॉर्डर यानी ईएएफआर थे। पिछले हिस्से के ईएएफआर से डेटा डाउनलोड नहीं हो पाया। अगले ईएएफआर के डेटा में 49 घंटे की 6 उड़ानों का ब्योरा मिला। दो घंटे के ऑडियो में इस उड़ान से जुड़ा डेटा है। इसमें विस्तार से पता चला कि आखिरी समय में क्या हुआ।
  • दायां मुख्य लैंडिंग गियर
  • टक्कर और आग से विमान पूरी तरह नष्ट हो गया। टक्कर और आग से 5 इमारतों को भीषण नुकसान हुआ। इमरजेंसी लोकेटर ट्रांसमीटर एक्टिव नहीं हुआ। मलबा 4 लाख वर्ग फुट क्षेत्र में फैला मिला। नीचे चित्र में ए, बी, सी, डी, ई और एफ के तौर पर चिह्नित इमारतों तक मलबा पड़ा मिला।
  • एसोसिएशन ने कहा- पायलट की गलती बताने वाली रिपोर्ट पक्षपाती
  • एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ने कहा है कि प्रारंभिक रिपोर्ट के बिंदु और दिशा पायलट की गलती का संकेत देते हैं। हम इसे खारिज करते हैं। योग्य, अनुभवी कर्मियों को अभी भी जांच दल में शामिल नहीं किया जा रहा है। सवाल यह भी उठता है कि रिपोर्ट बिना किसी हस्ताक्षर मीडिया में लीक कैसे कर दी गई।
  • सरकार ने कहा- ये प्रारंभिक रिपोर्ट, अभी कोई निष्कर्ष न निकाला जाए
  • केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने कहा, ये शुरुआती जांच रिपोर्ट है। अंतिम रिपोर्ट आने तक आधिकारिक निष्कर्ष नहीं निकाला जाएगा। एएआईबी स्वतंत्र संस्था है और हम उन्हें हरसंभव सहयोग दे रहे हैं। हमें उम्मीद है कि अंतिम रिपोर्ट जल्द आएगी, ताकि हम किसी ठोस निष्कर्ष पर पहुंच सकें।
  • अहमदाबाद प्लेन क्रैश, एक्सपर्ट बोले- पायलट ने जानबूझकर हादसा किया
  • एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन मोहन रंगनाथन ने कहा कि रिपोर्ट देखकर लगता है कि हादसा जानबूझकर किया गया था। हालांकि, AAIB के पूर्व चीफ रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन अरबिंदो हांडा ने कहा- ज्यादातर मामलों में शुरुआती जांच फाइनल रिपोर्ट से अलग होती है।
  • एक्सपर्ट बोले- फ्यूल स्विच को मैनुअली ही चेंज किया जा सकता
    एविएशन एक्सपर्ट कैप्टन रंगनाथन ने NDTV से बातचीत में कहा कि ड्रीमलाइनर के इंजनों में फ्यूल सप्लाई को मैनुअली ही बंद किया जा सकता है। ईंधन बंद करने का और कोई तरीका नहीं है। यह काम हाथ से करना होगा। यह ऑटोमेटिक या पॉवर कट के कारण नहीं हो सकता।
    फ्यूल स्विच को इस तरह से डिजाइन किया जाता है कि इन्हें बदलने के लिए स्लॉट से बाहर निकाला जाता है। यानी गलती या अनजाने में इन्हें बंद नहीं किया जा सकता।
    AAIB के पूर्व डायरेक्टर बोले- शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट में अंतर होता है
    हादसे को लेकर जहां कुछ एक्सपर्ट पायलट की गलती का दावा कर रहे हैं, वहीं AAIB के पूर्व डायरेक्टर रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन अरबिंदो हांडा कहते हैं कि ज्यादातर मामलों में विमान दुर्घटना जांच की शुरुआती और अंतिम रिपोर्ट अलग-अलग होती है।
    NDTV प्रॉफिट से बात करते हुए हांडा ने कहा- अहमदाबाद प्लेन क्रैश की जांच AAIB के लिए बहुत मुश्किल होगी, क्योंकि विमान का ज्यादातर हिस्सा जलकर खाक हो गया है और अंतिम रिपोर्ट आने में समय लग सकता है।
    जांच कर रही टीम को दुर्घटना के सटीक कारण या शायद संभावित कारण पर विचार-विमर्श करना होगा। अभी जो रिपोर्ट आई है उसमें सिर्फ 30 सेकेंड में हुई घटनाओं के तथ्य हैं। यह कोई फाइनल रिपोर्ट नहीं है।


    12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेकऑफ के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गई थी। इसमें 270 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 241 यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे। सिर्फ एक यात्री इस हादसे में जिंदा बचा है।
    12 जून को अहमदाबाद से लंदन जा रही फ्लाइट AI 171 टेकऑफ के कुछ ही देर बाद एक मेडिकल हॉस्टल की इमारत से टकरा गई थी। इसमें 270 लोगों की मौत हो गई थी, जिनमें 241 यात्री और क्रू मेंबर शामिल थे। सिर्फ एक यात्री इस हादसे में जिंदा बचा है।
    जांच रिपोर्ट पर अन्य एक्सपर्ट ने क्या कहा….
    सिविल एविएशन सुरक्षा परिषद (भारत सरकार) के पूर्व सदस्य सनत कौल ने कहा- एआई-171 की प्रारंभिक रिपोर्ट से साफ है कि टेकऑफ के दौरान अचानक फ्यूल सप्लाई रुक गई। वॉयस रिकॉर्डर बताता है कि न पायलट और न ही को-पायलट ने स्विच बंद किया। ऐसे में स्पष्ट है कि यह फ्यूल कटऑफ विमान की किसी आंतरिक तकनीकी गड़बड़ी से हुआ।
    ऑस्ट्रेलिया के एविएशन कंसल्टेंट नील हैंसफोर्ड ने कहा- मैंने नौ एयरलाइनों का संचालन किया है, कभी नहीं सुना कि टेकऑफ के दौरान पायलट खुद ईंधन सप्लाई बंद करें- वो भी दोनों इंजनों की। इतने अनुभवी पायलट ऐसा नहीं करते। जरूरी है कि जांचकर्ता, पायलटों का निजी या मनोवैज्ञानिक पक्ष भी देखें। यह सिर्फ सिस्टम फेल नहीं हो सकता।
    अमेरिका की एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट मेलिसा चेन ने कहा- ये स्विच ‘गार्डेड’ होते हैं- यानी इन्हें गलती से मूव नहीं किया जा सकता, उन्हें पहले खींचना होता है, फिर मूव। ऐसी डिजाइन एयरबस में भी होती है। अगर कोई पायलट इन्हें मूव करता है, तो वह ‘गलती’ नहीं मानी जा सकती। अब भी कई सवाल अनसुलझे हैं, जिनकी जांच कराया जाना जरूरी है।
    एविएशन सेफ्टी एक्सपर्ट मार्क डी मार्टिन ने कहा- टेकऑफ के ठीक बाद फ्यूल कटऑफ स्विच खुद बंद होना एक वैश्विक चिंता का विषय है। बोइंग 787 ऑपरेटरों को पूरी प्रणाली की दोबारा समीक्षा करनी चाहिए। यह एक सामान्य खराबी नहीं है। पायलटों की भूमिका संदिग्ध नहीं लगती। डिजाइन या लॉजिक फेल्योर संभव।
    पायलट कोशिश के बाद क्रैश से नहीं बचा पाए रिपोर्ट के मुताबिक, हादसे वाले विमान में दोनों इंजनों के फ्यूल स्विच बंद थे, जिसके बाद पायलटों ने इसे चालू किया और दोनों इंजन को दोबारा शुरू करने की कोशिश की थी। लेकिन विमान बहुत कम ऊंचाई पर था, इसलिए इंजनों को दोबारा ताकत पाने का समय नहीं मिल सका और विमान क्रैश हो गया। हालांकि ये सामने नहीं आया है कि फ्यूल स्विच बंद कैसे हुए थे।
    15 पन्नों की रिपोर्ट के मुताबिक, टेकऑफ से लेकर हादसे तक की पूरी उड़ान करीब 30 सेकेंड ही चली। इस समय तक रिपोर्ट में Boeing 787-8 विमान और GE GEnx-1B इंजन को लेकर किसी ऑपरेटर के लिए कोई चेतावनी या कार्रवाई की सिफारिश नहीं की गई है। साथ ही रिपोर्ट में मौसम, बर्ड-हिट और सबोटाज जैसे किसी भी कारण का जिक्र नहीं है।
  • तकनीकी दिक्कत थी, पर 1 घंटे में ही विमान रिलीज
  • 12 जून को विमान दिल्ली से एआई 423 के रूप में अहमदाबाद पहुंचा। इसने सुबह 11:17 बजे लैंड किया।
  • क्रू ने लॉग में STAB POS XDCR दर्ज किया। समाधान कर 12:10 बजे अगली उड़ान के लिए विमान रिलीज।
  • इसे एआई 171 के रूप में लंदन जाना था। उड़ान दोपहर बाद 1:10 बजे थी। पायलट पर्याप्त विश्राम कर चुके थे।
  • ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट में क्रू पूरी तरह फिट मिला। 54,200 किलो ईंधन था। टेकऑफ वजन 2,13,401 किलो था। यह सब सीमाओं के भीतर था।
  • आखिरी उड़ान, टेकऑफ तक सब सामान्य ही दिखा
  • एडवांस्ड सरफेस मूवमेंट गाइडेंस एंड कंट्रोल सिस्टम के अनुसार विमान बे 34 से दोपहर 1:18:38 बजे रवाना हुआ। टैक्सी क्लियरेंस 1:25:15 बजे मिला।
  • दोपहर 1:26:08 बजे विमान ने टैक्सी करना शुरू किया। टैक्सीवे R4 से रनवे 23 पर पहुंचा। विमान ने इसके बाद बैकट्रैक किया और लाइन अप हुआ।
  • टेकऑफ़ की अनुमति 1:37:33 बजे मिली और विमान ने 1:37:37 बजे टेकऑफ रोल शुरू कर किया।
  • ईएएफआर डेटा के अनुसार, विमान ने टेकऑफ निर्णय गति (V1) पार करते हुए 1:38:33 बजे 153 नॉट्स आईएएस (करीब 283 किमी प्रति घंटा)। विमान के एयर/ग्राउंड सेंसर्स 1:38:39 बजे एयर मोड में स्थानांतरित हो गए। यह लिफ्टऑफ की पुष्टि करता है।
  • विमान के टेक ऑफ करने के इस बिंदु तक सब कुछ सही था। कहीं से भी कोई चीज असामान्य दर्ज नहीं की गई थी।
  • APAI ने कहा- पायलट्स की बातचीत से किसी निष्कर्ष पर न पहुंचे
    एयरलाइन पायलट्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (APAI) ने एजेंसी PTI को लेटर लिखा है। इसमें कहा है कि एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट से लग रहा है कि क्रैश में पायलट्स की गलती है। हम इस बात को पूरी तरह से खारिज करते हैं। हम निष्पक्ष और सबूत आधारित जांच की मांग करते हैं।
    APAI ने कहा- ​​​​​जांच ​​रिपोर्ट बिना किसी जिम्मेदार अधिकारी के साइन और जानकारी के मीडिया में लीक कर दी गई। जांच में पारदर्शिता की कमी है। जांच की विश्वसनीयता पर सवाल है। जनता का विश्वास कम हो रहा है। योग्य, अनुभवी कर्मचारियों विशेषकर लाइन पायलटों को अभी भी जांच टीम में शामिल नहीं किया जा रहा है।
  • फ्यूल स्विच का काम और तकनीक

    फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं।
    फ्यूल कंट्रोल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं।
    फ्यूल स्विच विमान के कॉकपिट में थ्रस्ट लीवर के पास होते हैं। ये इंजन में फ्यूल की सप्लाई को कंट्रोल करते हैं। इसका मुख्य काम इंजन में फ्यूल की सप्लाई को शुरू करना (‘रन’ पोजिशन) या बंद करना (‘कटऑफ’ पोजिशन) है।
    हर इंजन के लिए अलग-अलग फ्यूल कंट्रोल स्विच होता है। उदाहरण के लिए, बोइंग 787 में दो इंजन हैं, तो दो स्विच होंगे – एक बाएं इंजन के लिए, एक दाएं के लिए।
    रन पोजिशन: जब स्विच ‘रन’ पर होता है, तो फ्यूल वाल्व खुलता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई शुरू हो जाती है। इससे इंजन चालू रहता है और विमान को थ्रस्ट मिलता है।
    कटऑफ पोजिशन: जब स्विच को ‘कटऑफ’ पर किया जाता है तो फ्यूल वाल्व बंद हो जाता है और इंजन में फ्यूल की सप्लाई रुक जाती है। इससे इंजन तुरंत बंद हो जाता है।
    फ्यूल स्विच स्प्रिंग-लोडेड होते हैं और इनमें डिटेंट (एक तरह का लॉक) होता है, जो इन्हें अपनी पोजिशन में स्थिर रखता है। स्विच को हिलाने के लिए तीन स्टेप्स चाहिए – पकड़ना, डिटेंट से बाहर निकालना, और रिलीज करना। ये कोई नॉर्मल स्विच नहीं है जो गलती से धक्का लगने से दब जाए जाए।
    विमान के उड़ते ही रैम एयर टर्बाइन खुली
    AAIB ने CCTV फुटेज में RAT को चालू होने की पुष्टि की है।
    AAIB ने CCTV फुटेज में RAT को चालू होने की पुष्टि की है।
    रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इंजन बंद होते ही रैम एयर टर्बाइन (RAT) खुल गया। यह एक छोटी प्रॉपेलर जैसी डिवाइस होती है। यह हवा की गति से घूमती है और बिजली और हाइड्रॉलिक पावर पैदा करती है। खासतौर पर तब जब विमान की मेन पावर कट हो जाए, या हाइड्रॉलिक सिस्टम फेल हो जाए। RAT विमान को कम से कम नेविगेशन और कंट्रोल सिस्टम को थोड़ा बहुत चालू रखने में मदद करता है।
    सबसे पहले पेड़ों और फिर ऊंची चिमनी से टकराया विमान गिरते वक्त विमान सबसे पहले आर्मी मेडिकल कॉर्प्स परिसर में कतार में लगे पेड़ों और एक ऊंची चिमनी से टकराया। फिर बिल्डिंग ‘ए’ की उत्तर-पूर्वी दीवार से​ ​टकराया। पेड़ और बिल्डिंग ‘ए’ की दूरी 293 फीट है। विमान आगे बढ़ता गया और टूटता-बिखरता रहा तथा अन्य ढांचों और पेड़ों से टकराया।




    लैंडिंग गियर 345 फीट और पंख 670 फीट दूर जा गिरा बाएं मुख्य लैंडिंग गियर और बाएं पंख का बाहरी और मध्य भाग बिल्डिंग ‘सी’ से टकराया और 345 फीट दूर गिरा। पंख का मध्य भाग बिल्डिंग ‘सी’ की चौथी मंजिल के उत्तरी कोने में फंसा मिला। पंख का अंदरूनी भाग बिल्डिंग ‘ए’ से 670 फीट दूर दक्षिण-पश्चिम में पड़ा मिला था। डेटा के अनुसार, इंजन 1 का फ्यूल कटऑफ स्विच कटऑफ से रन स्थिति में स्थानांतरित हुआ। लगभग 01:38:54 बजे एपीयू इनलेट डोर खुलने लगा। ये एपीयू ऑटो स्टार्ट लॉजिक के अनुरूप था।
    8 डिग्री नोज अप की स्थिति में था विमान




    इमारतों और विमान पर मिले निशान संकेत देते हैं कि टक्कर के समय विमान की स्थिति संभवतः ‘नोज-अप’ यानी लगभग 8 डिग्री ऊपर उठी हुई नाेज की थी। वहीं, पंख क्षैतिज स्थिति में थे।
    लैंडिंग गियर डाउन मिला; थ्रस्ट लीवर जल गया




    लैंडिंग गियर लीवर डाउन मिला। थ्रस्ट लीवर जल गया। ईएएफआर डेटा बताता है कि टक्कर तक थ्रस्ट लीवर आगे यानी टेकऑफ थ्रस्ट की स्थिति में थे। रिवर्सर लीवर मुड़े थे लेकिन ‘स्टोव्ड’ स्थिति में थे।
    फ्लैप का हैंडल टेकऑफ की सेटिंग में ही मिला




    फ्लैप हैंडल असेंबली को आग की वजह से काफी ज्यादा नुकसान पहुंचा था। हालांकि, जांच में हैंडल 5 डिग्री की फ्लैप स्थिति में मजबूती से मिला। यह स्थिति सामान्य टेकऑफ फ्लैप सेटिंग के अनुसार थी। इस स्थिति की ईएएफआर डेटा से पुष्टि हुई थी।
    बोइंग बोला- जांच एजेंसियों का सहयोग कर रहे बोइंग ने रिपोर्ट आने के बाद अपने बयान में कहा, ‘हमारी संवेदनाएं एअर इंडिया फ्लाइट 171 के यात्रियों, क्रू मेंबर्स और अहमदाबाद में प्रभावित लोगों के परिवारों के साथ हैं। हम जांच एजेंसियों और अपने कस्टमर के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं।’ यह बयान AAIB की शुरुआती जांच रिपोर्ट के बाद आया है।
    फ्यूल स्विच क्यों है इतना अहम? ड्रीमलाइनर विमान के दोनों इंजनों में रन और कटऑफ नाम के दो पोजिशन होते हैं। अगर विमान हवा में है और स्विच कटऑफ पर चला जाए तो इंजन को फ्यूल मिलना बंद हो जाता है, जिससे ताकत (थ्रस्ट) खत्म हो जाती है और बिजली सप्लाई भी रुक सकती है, जिससे कॉकपिट के कई उपकरण भी बंद हो सकते हैं।

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मोदी बोले- दिमागी नक्सलियों को पहचानें, उन्हें अलग करें:ये समाज को भटका रहे, महिलाओं के आरक्षण पर पार्टियां राजनीति न करें

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नई दिल्ली, एजेंसी। 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पीएम मोदी ने लाल किले पर 75 मिनट की स्पीच दी। पीएम ने कहा- ‘हथियारी नक्सल तो चले गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। समाज को गलत राह पर ले जाने के लिए तरह-तरह के काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा, ‘ऐसे लोग हिंसा अराजकता के रास्ते खोज रहे हैं। इन दिमागी नक्सलियों को पहचानना होगा और इन्हें आइसोलेट करना होगा और विकसित राष्ट्र बनाने की ओर देश की युवा पीढ़ी को जोड़ना होगा।’

पीएम ने 75 मिनट के भाषण में 52 बार युवाओं का जिक्र किया। इसमें ‘युवा’ शब्द 20 बार, ‘नौजवान’ 22 बार और ‘साथियों’ 10 बार कहा। पीएम ने कहा कि सरकार अगले एक साल में 1 करोड़ युवाओं को AI स्किल्स की ट्रेनिंग देगी। गरीब और मिडिल क्लास परिवारों के युवाओं के लिए कई परीक्षाओं की फ्री ऑनलाइन कोचिंग दी जाएगी।

इससे पहले लाल किले पर पहली बार वंदे मातरम गाया गया। पीएम ने तिरंगा फहराया। उसके बाद राष्ट्रगान हुआ, 21 तोपों की सलामी दी गई।

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर 13वीं बार तिरंगा फहराया।

पीएम मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले पर 13वीं बार तिरंगा फहराया।

पीएम का संबोधन, 7 बड़ी बातें, कहा- हथियारबंद नक्सल गए, दिमागी नक्सल मौजूद

1. दिमागी नक्सलियों पर

‘हमने नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया था। आज नक्सल क्षेत्र में नक्सल मुक्त होने के कारण विकास का तिरंगा लहरा रहा है। हमें सावधान रहने की जरूरत है। हथियारबंद नक्सल तो गए, लेकिन दिमागी नक्सल मौके की तलाश में हैं। इन दिमागी नक्सलों को पहचानना होगा। इन्हें युवाओं को भटकाने से बचाना होगा।’

2. महिला आरक्षण पर

हमारी माताओं बहनों को लोकसभा और विधानसभा में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व मिले। वे भारत की नीति में अपना योगदान दें। समय की मांग है। मैं सभी राजनीतिक दलों से आग्रह करता हूं। आइए महिला आरक्षण लागू करके महिलाओं के सम्मान में आप भी जुड़िए और क्रेडिट लीजिए लेकिन मेरी माताओं बहनों को हक दीजिए।

3. 2047 के लक्ष्य पर

2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। हमारी दिशा तय हो चुकी है। हमें उसे प्राप्त करके रहना है। इसके लिए हमें हमारे वर्क कल्चर और हमारी सोच को भी बदलना होगा। जो काम पिछले 5-7 दशक में नहीं हुए हैं, वो काम हमें आगामी 5-7 साल में करने हैं।

4. ग्लोबलाइजेशन पर

एक समय था जब मैं आत्मनिर्भरता की बात कर रहा था तो कुछ एयर कंडीशन चेंबर में बैठकर सोचने वाले लोग हमें बता रहे थे कि ग्लोबलाइजेशन का क्या होगा, लेकिन पूरी दुनिया देख रही है कि पिछले 1 दशक में ऐसा लग रहा है कि लोगों ने ग्लोबलाइजेशन बोलना ही बंद कर दिया।

5. युवाओं पर

‘एक साल में 1 करोड़ युवाओं को एआई (AI) स्किल्स की ट्रेनिंग दी जाएगी। इसके साथ ही छात्रों के लिए ऑनलाइन फ्री कोचिंग व्यवस्था की शुरुआत भी की जाएगी।’

6. आत्मनिर्भर पर

बीते सालों में हमारा दृढ़ विश्वास रहा है कि भारत को अब दूसरे देशों पर निर्भर रहकर नहीं जीना है। हमें आत्मनिर्भर बनना चाहिए। दुनिया में बहुत कुछ मिलता है, सस्ता मिलता है, जल्दी मिलता है लेकिन उससे हमारा सामर्थ्य तैयार नहीं होता। इसलिए हमें भी अपनी क्षमताओं को बढ़ाना है। अपने हितों की सुरक्षा हमें खुद करनी है इसलिए आत्मनिर्भर भारत का संकल्प लेकर हम आगे बढ़ रहे हैं।

7. आपदाओं पर

‘अब छोटे सपनों से काम चलने वाला नहीं है। हमें बड़े सपने देखने होंगे क्योंकि बड़े सपने हमारी सोच को भी विस्तार देते हैं। हमारे संकल्प दृढ़ होने चाहिए। जब संकल्प दृढ़ होता है तो कठिनाइयों से, आपदाओं के बीच से रास्ते निकालने का सामर्थ्य अपने आप उभर कर आता है।

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CJI बोले-छात्र गलत हों, तब भी उन्हें विरोध का अधिकार:हैदराबाद यूनिवर्सिटी में विरोध करने वाले छात्रों का पंजीयन रोकने पर बार काउंसिल को फटकार

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नई दिल्ली, एजेंसी। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी, NALSAR से जुड़े विवाद पर काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) को फटकार लगाई। CJI सूर्यकांत ने कहा कि भले ही छात्रों का फैसला गलत हो या उन्हें किसी ने गलत सलाह दी हो, फिर भी उन्हें अपनी बात रखने और विरोध करने का अधिकार है।

जस्टिस सूर्यकांत ने BCI के उस सर्कुलर पर भी नाराजगी जताई जिसमें NALSAR के 2026 बैच के लॉ ग्रेजुएट्स का वकील के तौर पर एनरोलमेंट रोकने को कहा गया था। CJI ने कहा- यह मेरे और छात्रों के बीच का मामला है। इसे मुद्दा बनाने की जरूरत नहीं थी। बार काउंसिल इसमें दखल देने वाला कौन होता है?

सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को नोटिस भी जारी किया और यूनिवर्सिटी के किसी छात्र या फैकल्टी के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का आदेश दिया। NALSAR के करीब 450 छात्र जस्टिस सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह 2026का चीफ गेस्ट बनाए जाने का विरोध कर रहे हैं।

CJI की टिप्पणी से नाराज हैं छात्र

NALSAR यानी नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च, हैदराबाद की लॉ यूनिवर्सिटी है। यहां करीब 1,400 छात्र पढ़ते हैं। इनमें से करीब 450 छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को पत्र लिखकर CJI को चीफ गेस्ट बनाने का न्योता वापस लेने की मांग की थी। समारोह की तारीख अभी तय नहीं है।

छात्रों की नाराजगी CJI की पिछले महीने की एक टिप्पणी को लेकर थी। यह टिप्पणी दिल्ली में NEET प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी याचिका की सुनवाई के दौरान की गई थी।

बार काउंसिल ने सभी 2026 ग्रेजुएट्स का एनरोलमेंट रोक दिया था

  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने 13 अगस्त को सभी स्टेट बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के किसी भी ग्रेजुएट को अगले आदेश तक वकील के तौर पर एनरोल न किया जाए।
  • साथ ही यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर से तीन दिन के भीतर रिपोर्ट मांगी गई थी। यूनिवर्सिटी से उन लोगों की पहचान करने को कहा गया, जो कैंपेन शुरू करने, उसका ड्राफ्ट तैयार करने, उसे फैलाने, छात्रों को जुटाने, मीडिया से संपर्क करने, ऑनलाइन ग्रुप चलाने या बहिष्कार की अपील करने में मुख्य भूमिका में थे।
  • काउंसिल ने अपने शुरुआती लेटर में कहा था कि कानून के छात्र से देश के सर्वोच्च न्यायिक पद के प्रति सम्मान की उम्मीद की जाती है। सम्मान न करने वाले छात्र भविष्य में जिम्मेदार वकील, शिक्षक या जज बनने की भूमिका के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते। BCI ने यह भी आरोप लगाया था कि कुछ शिक्षकों के बीच ग्रुपिज्म और गंदी राजनीति ने छात्रों को कैंपेन के लिए उकसाने में भूमिका निभाई।

कुछ घंटे बाद ही BCI ने आदेश बदला

आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद BCI ने अपना रुख बदल दिया। काउंसिल ने कहा कि NALSAR के 2026 बैच के ज्यादातर छात्र निर्दोष हैं और वे CJI के अनादर वाले किसी अभियान में शामिल होने के इच्छुक नहीं थे। BCI ने कहा कि कुछ शिक्षकों और बाहरी लोगों ने निर्दोष छात्रों को इस अभियान में शामिल करने की कोशिश की।

इसके बाद सभी छात्रों को अपनी पसंद की स्टेट बार काउंसिल में एनरोल होने की अनुमति दे दी गई। हालांकि उस समय BCI ने कहा था कि वह NALSAR के वाइस चांसलर की रिपोर्ट का इंतजार करेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।

सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी BCI के एक्शन पर सवाल उठाए

बार काउंसिल ऑफ इंडिया के शुरुआती आदेश पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष और सीनियर वकील विकास सिंह ने भी आपत्ति जताई थी। उन्होंने इसे मनमाना, गैरकानूनी और जरूरत से ज्यादा कार्रवाई बताते हुए कहा था कि छात्रों को अपनी बात रखने के कारण वकालत में प्रवेश से वंचित करने की धमकी नहीं दी जानी चाहिए।

CJI सूर्यकांत के हाल की 3 बयान, जिसपर विवाद हुए

15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’

इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।

22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है

दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।

24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”

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देश

आजादी के बाद पहली बार जनगणना में जाति पूछी जाएगी:कोविड वैक्सीन कहां लगवाई, कितने बैंक अकाउंट जैसे 40 सवाल पूछेंगे, लिस्ट जारी

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नई दिल्ली, एजेंसी। केंद्र सरकार ने जनगणना-2027 के लिए 40 सवालों की लिस्ट जारी कर दी है। इसमें लोगों से SC, ST या अन्य जाति के बारे में पूछा जाएगा। आजादी के बाद यह पहली बार होगा जब सभी समुदायों की जाति की जानकारी जनगणना में दर्ज की जाएगी।

इससे पहले 2011 की जनगणना के फॉर्म में 29 सवाल थे। इसमें जाति से जुड़ी जानकारी के लिए सिर्फ SC/ST का विकल्प था। जनगणना-2027 के सवालों की लिस्ट में जाति से जुड़ा सवाल नंबर 10 पर है, जिसमें SC/ST के साथ जाति शब्द भी जोड़ा गया है।

खास बात यह है कि लोगों से कोविड वैक्सीन कहां लगवाई थी, यह सवाल भी पूछा जाएगा। इसके साथ मोबाइल नंबर, आधार, वोटर ID और बैंक अकाउंट से जुड़े सवाल भी होंगे।

1. पहचान और परिवार: 12 सवालों में नाम से जाति तक जानकारी

जनगणना में व्यक्ति का नाम, परिवार के मुखिया से संबंध, लिंग, जन्मतिथि और उम्र पूछी जाएगी। साथ ही वैवाहिक स्थिति, शादी के समय उम्र, पति या पत्नी का नाम, राष्ट्रीयता, धर्म और SC/ST/जाति की जानकारी ली जाएगी। माता-पिता की जानकारी भी दर्ज होगी।

2. शिक्षा और भाषा: 5 सवालों में पढ़ाई और डिजिटल साक्षरता

इस हिस्से में दिव्यांगता, मातृभाषा और दूसरी भाषाएं, साक्षरता और डिजिटल साक्षरता की जानकारी ली जाएगी। साथ ही शैक्षणिक संस्थान में पढ़ाई की स्थिति और उच्चतम शैक्षणिक योग्यता, स्ट्रीम या विषय पूछा जाएगा।

3. रोजगार: 8 सवालों में काम और नौकरी की जानकारी

व्यक्ति ने पिछले एक साल में काम किया या नहीं, उसकी आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय और काम का क्षेत्र पूछा जाएगा। इसके अलावा कामगार की श्रेणी, गैर-आर्थिक गतिविधि, काम की तलाश या उपलब्धता और काम की जगह तक आने-जाने की जानकारी भी ली जाएगी।

4. जन्म और माइग्रेशन: 8 सवालों में जन्मस्थान से बच्चों तक की जानकारी

इस सेक्शन में जन्म स्थान, पिछला निवास स्थान, माइग्रेशन का कारण और वहां रहने की अवधि पूछी जाएगी। स्थायी निवास का पता भी दर्ज होगा। महिलाओं से जीवित बच्चों, अब तक जन्मे बच्चों और पिछले एक साल में जन्मे बच्चों की संख्या भी पूछी जाएगी।

5. बैंक डिटेल्स और आधार नंबर: 7 सवालों में डॉक्यूमेंट्स की जानकारी

इसमें कोविड-19 वैक्सीन कहां लगवाई, कुल बैंक अकाउंट और मोबाइल नंबर पूछा जाएगा। साथ ही आधार नंबर, वोटर ID, पासपोर्ट नंबर और ड्राइविंग लाइसेंस उपलब्ध है या नहीं इसकी जानकारी भी ली जाएगी।

देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी

जनगणना 2027 देश की पहली डिजिटल जनगणना होगी। डेटा डिजिटल माध्यम से दर्ज किया जाएगा और लोगों को खुद अपनी जानकारी देने यानी सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी मिलेगा। जनगणना की कानूनी प्रक्रिया सेंसस एक्ट, 1948 और सेंसस रूल्स, 1990 के तहत होगी।

केंद्र के मुताबिक, लोगों की दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। सेंसस एक्ट की धारा 15 के तहत इसे सार्वजनिक नहीं किया जा सकता, RTI के तहत नहीं दिया जा सकता और किसी कोर्ट में सबूत के तौर पर भी इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। जनगणना पहले 2021 में होने वाली थी। इसे कोरोना महामारी के कारण टाल दिया गया था।

जनगणना के लिए 11,718 करोड़ का बजट मंजूर

केंद्र सरकार ने जनगणना 2027 के लिए 11,718.24 करोड़ रुपए के बजट को मंजूरी दी है। जनगणना पूरे देश में केंद्र के समन्वय से होगी। राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारें इसके क्रियान्वयन में मदद करेंगी।

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