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अमेजन ने स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में बढ़ाया कदम, अब घर बैठे कराएं लैब टेस्ट, 6 शहरों में सेवा शुरू

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नई दिल्ली,एजेंसी। भारत के तेजी से बढ़ते स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में अब ऑनलाइन रिटेल दिग्गज Amazon ने कदम रखा है। Amazon India ने ‘Amazon Diagnostics’ नाम से एक नया घर बैठे स्वास्थ्य जांच सेवा शुरू की है। इस सेवा के जरिए ग्राहक अपने मोबाइल ऐप पर लैब टेस्ट बुक कर सकते हैं, समय तय कर सकते हैं और डिजिटल रिपोर्ट सीधे ऐप पर प्राप्त कर सकते हैं। यह सेवा फिलहाल छह शहरों- बैंगलोर, दिल्ली, गुरुग्राम, नोएडा, मुंबई और हैदराबाद में उपलब्ध है और 450 से ज्यादा पिन कोड्स को कवर करती है। Amazon Diagnostics 800 से अधिक प्रकार के टेस्ट उपलब्ध कराता है। ग्राहक 60 मिनट के अंदर अपने घर पर सैंपल कलेक्शन का अनुरोध कर सकते हैं और नियमित जांच की रिपोर्ट महज छह घंटे में पा सकते हैं।

Orange Health Labs के साथ साझेदारी में सेवा
यह सेवा Amazon की साझेदारी में Orange Health Labs के साथ मिलकर संचालित हो रही है, जो एक मान्यता प्राप्त डायग्नोस्टिक्स प्रदाता है। Amazon का मकसद भारत के स्वास्थ्य-टेक सेक्टर में अपनी पहुंच बढ़ाना और लोगों को आरामदायक, भरोसेमंद स्वास्थ्य सेवा देना है। Amazon Medical के कैटेगरी लीडर जयारामकृष्णन बालासुब्रमण्यम ने कहा, “डायग्नोस्टिक्स क्षेत्र अभी बहुत fragmented है और कम लोगों तक पहुंच पाया है। यह हमारे लिए एक बड़ा अवसर है कि हम लोगों की अनदेखी जरूरतों को पूरा करें।”

पूरे स्वास्थ्य सफर को आसान बनाना मकसद
Amazon अब अपने ग्राहकों को टेली-कंसल्टेशन, दवा डिलीवरी और प्रमाणित जांच जैसी सेवाओं का एक कनेक्टेड प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराएगा, जिससे स्वास्थ्य सेवा सरल और तेज़ होगी। जब Amazon से पूछा गया कि क्या वे बड़े खिलाड़ियों जैसे Dr Lal PathLabs, Thyrocare, Healthians, Metropolis से मुकाबला करेंगे, तो बालासुब्रमण्यम ने कहा, “हमारा फोकस प्रोएक्टिव और नियमित जांच को आसान बनाना है। हमें मार्केट में काफी विस्तार की गुंजाइश दिखती है।” उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि Amazon Diagnostics डिस्काउंट के जरिए ग्राहकों को लुभाने वाला मॉडल नहीं अपनाएगा, बल्कि गुणवत्ता और भरोसे को प्राथमिकता देगा।

भारत के डायग्नोस्टिक्स मार्केट का विस्तार
भारत का डायग्नोस्टिक्स सेक्टर पिछले पांच वर्षों में 8% सालाना वृद्धि के साथ लगभग $12 अरब तक पहुंच चुका है। इसका सिर्फ 15% हिस्सा संगठित क्षेत्र में आता है, जो तेज़ी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अभी भी भारत में स्वास्थ्य जांच की पहुंच बहुत कम है, और गैर-संचारी बीमारियों की बढ़ती संख्या के कारण यह मार्केट आगे और बढ़ेगा। कई विशेषज्ञ मानते हैं कि ग्रामीण इलाकों में जांच की गुणवत्ता में सुधार की जरूरत है और संगठित कंपनियों की भूमिका अहम होगी।

Amazon की तकनीक और ग्राहक अनुभव
Amazon Diagnostics की खासियत है तेज सैंपल कलेक्शन, तेज रिपोर्टिंग और मजबूत डेटा सुरक्षा। ऐप में रियल टाइम स्लॉट उपलब्धता, मैप आधारित पता जांच, सुरक्षित रिपोर्ट एक्सेस और टेस्ट की तैयारी के निर्देश जैसी सुविधाएं हैं। Orange Health Labs के को-फाउंडर ध्रुव गुप्ता ने बताया, “हमारा रिवर्स लॉजिस्टिक्स सिस्टम विश्व का सबसे तेज है, जो समय पर और गुणवत्ता के साथ जांच करता है।” लैब में उन्नत ऑटोमेशन और दो स्तर की डॉक्टर समीक्षा होती है, जिससे रिपोर्ट की सटीकता बढ़ती है।


Amazon पहले भी भारत में कई क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट चला चुका है, जैसे फूड डिलीवरी और एजुकेशन, हालांकि कुछ सफल नहीं रहे। लेकिन कंपनी का मानना है कि हेल्थकेयर में डिजिटल समाधान लोगों की जीवनशैली में बदलाव लाने में मददगार होंगे। बालासुब्रमण्यम ने कहा, “हमारा लक्ष्य है कि हम स्वास्थ्य प्रबंधन को आसान, सहज और प्रभावी बनाएं। हम निरंतर नए तरीके खोजेंगे जिससे ग्राहक अपने स्वास्थ्य पर बेहतर नियंत्रण रख सकें।” Amazon Diagnostics के इस कदम से भारत में स्वास्थ्य जांच और देखभाल की सेवाएं और अधिक सुलभ, भरोसेमंद और तेजी से मिलने वाली बनेंगी। इस नई पहल से उपभोक्ताओं को घर बैठे उच्च गुणवत्ता वाली जांच सुविधा का लाभ मिलेगा, जिससे स्वस्थ भारत का सपना और मजबूत होगा।

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महिला आरक्षण से जुड़ा बिल 54 वोट से गिरा:पास होने के लिए चाहिए थे 352, मिले 298; मोदी सरकार बिल पास कराने में पहली बार नाकाम

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नई दिल्ली,एजेंसी। महिला आरक्षण बिल से जुड़ा संविधान (131वां) संशोधन बिल सरकार लोकसभा में पास नहीं करा पाई। इसमें संसद की 543 सीटें बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान था। 21 घंटे की चर्चा के बाद वोटिंग हुई। लोकसभा में मौजूद 528 सांसदों ने वोट डाले। पक्ष में 298, विपक्ष में 230 वोट पड़े। बिल पास कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की जरूरत थी। 528 का दो तिहाई 352 होता है। इस तरह ये बिल 54 वोट से गिर गया। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं, लेकिन 3 सीटें खाली होने की वजह से मौजूदा सांसद 540 है।

सरकार ने दो बिल वोटिंग के लिए पेश ही नहीं किए

पहला- परिसीमन संशोधन संविधान बिल 2026

दूसरा- केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल 2026

सरकार ने इन पर वोटिंग से इनकार किया। कहा कि ये बिल एक-दूसरे से लिंक है इसलिए वोटिंग की जरूरत नहीं है।

12 साल के शासन में यह पहला मौका जब मोदी सरकार सदन में कोई बिल पास नहीं करा पाई। इससे पहले अमित शाह ने एक घंटा स्पीच दी थी। कहा कि अगर ये बिल पास नहीं होते हैं तो जिम्मेदारी विपक्ष की होगी। देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनकी राह का रोड़ा कौन है।

बिल गिरने के बाद विपक्ष ने कहा- हमने हरा दिया

  • राहुल गांधी ने कहा- हमने संविधान पर हुए हमले को हरा दिया है। हमने साफ कहा है कि यह महिला आरक्षण बिल नहीं है, बल्कि यह भारत की राजनीतिक संरचना को बदलने का एक तरीका है।
  • प्रियंका ने कहा– यह हमारे लोकतंत्र और देश की एकता के लिए एक बड़ी जीत है। जैसा कि मैंने अंदर कहा, यह संविधान पर हमला था, और हमने इसे विफल कर दिया है, जो कि एक अच्छी बात है।
  • शशि थरूर ने कहा– हमने हमेशा कहा है कि हम महिला आरक्षण का पूर्ण समर्थन करते हैं और आज भी इसके पक्ष में मतदान करने को तैयार हैं। हालांकि, इसे परिसीमन से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।
  • एमके स्टालिन ने कहा- 23 अप्रैल को हम दिल्ली का अहंकार और उस अहंकार का समर्थन करने वाले गुलामों को हराएंगे।

संसद के बाहर भाजपा महिला सांसदों के प्रदर्शन की तस्वीरें…

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

बिल गिरने के बाद एनडीए की महिला सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

महिला सांसदों ने ‘महिला का अपमान, नहीं सहेगा हिंदुस्तान’ के नारे लगाए।

सरकार को पता था बिल पास नहीं होगा, मोदी ने 3, शाह ने एक अपील की

सरकार जानती थी कि उसके पक्ष में लोकसभा में नंबर नहीं है, इसीलिए सरकार बार-बार सभी सांसदों से समर्थन की मांग कर रही थी। पीएम नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, संसदीय कार्यमंत्री किरेन रिजिजू समेत बीजेपी और NDA नेताओं ने विपक्ष से बिल को सपोर्ट करने की अपील की।

पीएम की 3 अपील

  • 13 अप्रैल एक कार्यक्रम में: मैं आपसे आग्रह करता हूं कि अपने स्थानीय सांसदों को पत्र लिखें और इस ऐतिहासिक संसद सत्र में हिस्सा लेते समय उनका हौसला बढ़ाएं।
  • 16 अप्रैल लोकसभा में: ‘हमें क्रेडिट नहीं चाहिए, जैसे ही पारित हो जाए तो मैं एड देकर सबको धन्यवाद देने को तैयार हूं। सामने से क्रेडिट का ब्लैंक चेक आपको दे रहा हूं।’
  • 17 अप्रैल सोशल मीडिया में: सभी सांसद वोटिंग से पहले अपनी अंतर्रात्मा की आवाज सुनें।

शाह ने कहा- महिलाएं माफ नहीं करेंगी

17 अप्रैल लोकसभा में अमित शाह ने कहा कि देश की महिलाएं देख रही हैं कि उनके रास्ते का रोड़ा कौन है। यहां पर तो शोर-शराबा करके बच जाओगे लेकिन माताओं-बहनों का आक्रोश बाहर पता चलेगा। चुनाव में वोट मांगने जाएंगे तो मातृशक्ति हिसाब मांगेगी।

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देश

‘परिसीमन एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा’- शशि थरुर का केंद्र सरकार पर तीखा हमला

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नई दिल्ली,एजेंसी। लोकसभा में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ और ‘परिसीमन’ (Delimitation) पर चल रही बहस के दौरान कांग्रेस नेता शशि थरूर ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया की तुलना ‘नोटबंदी’ से करते हुए इसे भारतीय लोकतंत्र की आत्मा के लिए खतरा बताया।

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थरुर ने अपने भाषण में कहा

शशि थरूर ने कहा कि दशकों से महिला आरक्षण का वादा किया गया और इसे टाला गया। आज जब इस पर राजनीतिक सहमति बनी है, तब सरकार ने इसे परिसीमन जैसी जटिल प्रक्रिया से बांधकर महिलाओं की आकांक्षाओं को ‘बंधक’ बना लिया है। थरूर ने सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाते हुए कहा, “आपने परिसीमन का प्रस्ताव वैसी ही जल्दबाजी में पेश किया है जैसी नोटबंदी के समय दिखाई थी। हम सब जानते हैं कि नोटबंदी ने देश का क्या हाल किया था। परिसीमन भी एक ‘राजनीतिक नोटबंदी’ साबित होगा, इसे मत कीजिए।”

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थरूर ने उत्तर और दक्षिण भारत के राज्यों के बीच शक्ति संतुलन बिगड़ने की आशंका जताई। उन्होंने तर्क दिया कि केरल और तमिलनाडु जैसे दक्षिणी राज्यों ने जनसंख्या नियंत्रण और मानव विकास में बेहतरीन काम किया है। यदि परिसीमन जनसंख्या के आधार पर हुआ, तो जनसंख्या नियंत्रण में विफल रहने वाले राज्यों को अधिक राजनीतिक ताकत मिलेगी और अच्छा काम करने वाले राज्य हाशिए पर चले जाएंगे। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि आर्थिक रूप से समृद्ध और विकासशील राज्यों की आवाज को दबाया गया, तो इससे देश के संघीय ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा। उनके अनुसार, यह “बहुसंख्यकवाद की तानाशाही” (Tyranny of the democratic majority) पैदा करने जैसा होगा।

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छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ ब्लास्ट हादसा: धमाके में 20 श्रमिकों की मौत के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन, कई अन्य के खिलाफ मामला दर्ज

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सक्ती,एजेंसी। छत्तीसगढ़ पुलिस ने सक्ती जिले में वेदांता के विद्युत संयंत्र में हुए धमाके में 20 लोगों की मौत की घटना के बाद वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत संयंत्र प्रबंधन के अधिकारियों और अन्य लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस अधिकारियों ने यह जानकारी दी। सक्ती पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने बताया, ”डाभरा पुलिस थाने में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।” अधिकारी ने बताया कि इस मामले में वेदांता कंपनी के चेयरमैन अनिल अग्रवाल, कंपनी प्रबंधक देवेन्द्र पटेल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

यह धमाका 14 अप्रैल को सिंघीतराई गांव में स्थित संयंत्र में हुआ था। उस समय बॉयलर से टर्बाइन तक उच्च दाब वाली भाप ले जाने वाला एक स्टील का पाइप फट गया था, जिससे कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए थे। इस घटना में 20 लोगों की मौत हो गई थी और 16 लोग घायल हो गए। ठाकुर ने ‘पीटीआई भाषा’ को बताया कि यदि जांच के दौरान और लोग भी दोषी पाए जाते हैं, तो उनका नाम भी प्राथमिकी में जोड़ा जाएगा।

उन्होंने बताया कि घटना की जांच जारी है और मृतकों की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फॉरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला की रिपोर्ट और औद्योगिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा विभाग की रिपोर्ट सहित कई रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि धमाके के कारणों की जांच के लिए एक तकनीकी टीम भी बनाई गई है। पुलिस अधीक्षक ने कहा, ”सभी रिपोर्ट मिलने के बाद, अगर जरूरत पड़ी तो प्राथमिकी में और धाराएं भी जोड़ी जाएंगी।” इस घटना के बाद, विपक्षी दल कांग्रेस ने संयंत्र प्रबंधन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने और मामले की न्यायिक जांच कराने की मांग की थी। 

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