विदेश
होर्मुज स्ट्रेट में तेल टैंकरों को सुरक्षा नहीं देगा अमेरिका:ऊर्जा मंत्री बोले- हमारी नौसेना तैयार नहीं, फिलहाल ईरान को निशाना बनाने पर फोकस
तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। अमेरिका फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा नहीं देगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि उनकी नौसेना अभी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।
CNBC न्यूज से बातचीत में राइट ने कहा कि अमेरिका का फोकस इस समय ईरान की आक्रामक क्षमताओं और उन्हें सपोर्ट करने वाले उद्योगों को निशाना बनाने पर है। इसी वजह से टैंकरों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट मिशन अभी शुरू नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द लागू हो सकती है और अमेरिकी नौसेना महीने के अंत तक इस मिशन के लिए तैयार हो सकती है। इस मामले पर रक्षा अधिकारियों के साथ चर्चा जारी है।
अमेरिका फिलहाल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तेल टैंकरों को सैन्य सुरक्षा नहीं देगा। अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट ने कहा है कि उनकी नौसेना अभी टैंकरों को एस्कॉर्ट करने के लिए तैयार नहीं है।
CNBC न्यूज से बातचीत में राइट ने कहा कि अमेरिका का फोकस इस समय ईरान की आक्रामक क्षमताओं और उन्हें सपोर्ट करने वाले उद्योगों को निशाना बनाने पर है। इसी वजह से टैंकरों की सुरक्षा के लिए एस्कॉर्ट मिशन अभी शुरू नहीं किया गया है।
उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था जल्द लागू हो सकती है और अमेरिकी नौसेना महीने के अंत तक इस मिशन के लिए तैयार हो सकती है। इस मामले पर रक्षा अधिकारियों के साथ चर्चा जारी है।
बिज़नस
भारत पर फिर से टैरिफ लगाने की तैयारी में अमेरिका:16 बिजनेस पार्टनर्स के खिलाफ जांच शुरू, अनुचित व्यापार के सबूत मिले तो भारी टैक्स लगेगा
वॉशिंगटन,एजेंसी। अमेरिका के डोनाल्ड ट्रम्प प्रशासन ने भारत और चीन समेत अपने 16 प्रमुख ट्रेडिंग पार्टनर्स के खिलाफ ‘सेक्शन 301’ के तहत नई जांच शुरू कर दी है। ‘सेक्शन 301’ अमेरिका को उन देशों पर एकतरफा टैक्स बढ़ाने की शक्ति देता है, जो उसकी कंपनियों को नुकसान पहुंच रहे हो।
पिछले महीने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति ट्रम्प के टैरिफ को अवैध बताने के बाद, प्रशासन अब नए कानूनी रास्तों से टैरिफ का दबाव वापस बनाने की तैयारी में है।
यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) जेमिसन ग्रीर के मुताबिक, इस जांच के कारण इस साल गर्मियों तक भारत, चीन, यूरोपीय संघ और मैक्सिको जैसे देशों पर नए टैरिफ लगाए जा सकते हैं।
विदेश
गुजरात आ रहे थाई जहाज पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला:20 क्रू मेंबर का रेस्क्यू, तीन लोग अभी भी शिप पर
तेल अवीव/तेहरान,एजेंसी। गुजरात आ रहे थाईलैंड के एक कार्गो जहाज पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ है। ओमान के पास चल रहे इस जहाज को प्रोजेक्टाइल से निशाना बनाया गया, जिसके बाद थाई नौसेना ने बचाव अभियान शुरू किया।
अधिकारियों के मुताबिक थाई झंडे वाला बल्क कैरियर मयूरी नारी ओमान के उत्तर में करीब 11 नॉटिकल मील (करीब 18 किमी) दूर यात्रा कर रहा था, तभी उस पर हमला हुआ।
थाई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार जहाज पर मौजूद 20 क्रू मेंबर को बचा लिया गया है, जबकि तीन लोग अभी भी जहाज पर मौजूद बताए जा रहे हैं। रॉयल थाई नेवी ने कहा कि वह अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के साथ मिलकर जहाज और क्रू की मदद कर रही है।
इस बीच UNSC आज एक प्रस्ताव पर वोटिंग करने वाली है। इसमें ईरान से कहा गया है कि वो बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, UAE और जॉर्डन पर हमले बंद करे।
इजराइल-अमेरिका और ईरान के बीच जंग से जुड़ी तस्वीरें…

इजराइल ने मंगलवार रात लेबनान की राजधानी बेरुत में ईरान समर्थक हिजबुल्लाह के ठिकानों पर हमला किया।

अमेरिका ने मंगलवार को फारस की खाड़ी में ईरानी जहाज पर हमला किया।

अमेरिका ने सोमवार को ईरानी मिसाइलों को इंटरसेप्ट करने का वीडियो शेयर किया।

बहरीन की राजधानी मनामा में 10 मार्च को ईरानी ड्रोन हमले में इमारत का एक हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया।

अमेरिकी नेवी का EA-18G ग्राउलर विमान एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन के डेक से उड़ान भरते हुए।
विदेश
दावा- ट्रम्प ईरान के खार्ग आइलैंड पर कब्जा चाहते हैं:90% ईरानी तेल का एक्सपोर्ट यहां से, एक्सपर्ट बोले- इस पर हमले से विश्वयुद्ध का खतरा
तेहरान,एजेंसी। अमेरिका, इजराइल और ईरान में जारी जंग के बीच होर्मुज स्ट्रेट के पास मौजूद खार्ग आइलैंड की अहमियत अचानक बढ़ गई है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि ट्रम्प सरकार इस आइलैंड पर कब्जे को लेकर सैन्य विकल्पों पर विचार कर रही है, क्योंकि यह ईरान की तेल कमाई का सबसे बड़ा सेंटर माना जाता है।
दरअसल ईरान के करीब 80 से 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी आइलैंड से होता है। यहां बड़े तेल टर्मिनल, पाइपलाइन, स्टोरेज टैंक और जहाजों में तेल भरने की फैसिलिटी मौजूद हैं। इसे हर दिन करीब 70 लाख बैरल तक तेल जहाजों में भरा जा सकता है।
1960 के दशक में विदेशी निवेश के बाद इस जगह को बड़े ऑयल एक्सपोर्ट सेंटर के तौर पर डेवलप किया गया था और तब से यह ईरान की ऑयल सप्लाई की रीढ़ बन गया। हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो माइकल डोरान ने कहा,
ट्रम्प सरकार युद्ध के बाद भी ईरान की पूरी अर्थव्यवस्था को तबाह नहीं करना चाहती है। अमेरिका की पुरानी ‘रेड लाइन’ यानी तय सीमा यह रही है कि कुछ खास और अहम ठिकानों पर हमला नहीं किया जाए।
डोरान के मुताबिक अगर इन जगहों पर हमला हुआ, तो ईरान बड़े पैमाने पर जवाबी हमला कर सकता है, जिससे तीसरे विश्व युद्ध जैसे हालात बन सकते हैं।
जंग के बीच भी जारी है तेल निर्यात
अमेरिका और इजराइल ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों और न्यूक्लियर फैसिलिटी को निशाना बनाया है, लेकिन खार्ग आइलैंड पर अब तक हमला नहीं हुआ है। सैटेलाइट डेटा और जहाजों की निगरानी करने वाली कंपनियों के मुताबिक जंग जारी होने के बावजूद ईरान यहां से लगातार तेल निर्यात कर रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी से अब तक करीब 1.2 करोड़ बैरल से ज्यादा तेल टैंकरों के जरिए बाहर भेजा गया है। असली आंकड़ा इससे ज्यादा भी हो सकता है क्योंकि ईरान के कई जहाज अपनी ट्रैकिंग सिस्टम बंद करके चलते हैं।
डार्क फ्लीट से भेजा जा रहा तेल
ईरान कई बार ऐसे टैंकरों का इस्तेमाल करता है जिन्हें डार्क फ्लीट कहा जाता है। ये जहाज अपनी लोकेशन दिखाने वाली ट्रैकिंग मशीन बंद कर देते हैं, जिससे उन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है। खार्ग आइलैंड फारस की खाड़ी में ईरान के तट से करीब 25 से 30 किलोमीटर दूर स्थित है।
हाल ही में एक बड़ा तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट पार करते समय कुछ समय के लिए ट्रैकिंग से गायब हो गया था और बाद में फिर दिखाई दिया। रिपोर्ट्स में कहा गया कि वह जहाज एशिया की ओर जा रहा था ।

ईरान के खार्ग आइलैंड स्थित तेल टर्मिनल की 25 फरवरी 2026 को ली गई सैटेलाइट तस्वीर।
खार्ग आइलैंड के पास दुनिया के अहम तेल रास्ते
खार्ग आइलैंड स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के बेहद करीब है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्गों में से एक है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी रास्ते से गुजरता है। अगर इस इलाके में हमला होता है या जहाजों की आवाजाही रुकती है तो पूरी दुनिया में तेल की सप्लाई प्रभावित हो सकती है और कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन इस बात पर विचार कर रहा है कि अगर खार्ग आइलैंड के तेल टर्मिनल को तबाह कर दिया जाए या उस पर कब्जा कर लिया जाए, तो ईरान की सबसे बड़ी आय बंद हो सकती है।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि तेल की बिक्री से मिलने वाला पैसा ईरान की सरकार और उसकी सैन्य ताकत के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा है। अगर यह कमाई रुक जाती है तो ईरान के लिए लंबे समय तक युद्ध जारी रखना मुश्किल हो सकता है।
हमला हुआ तो क्या असर होगा
एक्सपर्ट्स का मानना है कि अगर खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ तो इसके दो बड़े असर हो सकते हैं:
- ईरान की तेल से होने वाली कमाई अचानक गिर सकती है
- दुनिया भर में तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं
कुछ अनुमानों के मुताबिक अगर यहां से सप्लाई रुकती है तो तेल की कीमत प्रति बैरल करीब 10 डॉलर तक बढ़ सकती है।
ईरान की तेल उत्पादन क्षमता
इस समय ईरान करीब 33 लाख बैरल कच्चा तेल का प्रोडक्शन करता है। इसके अलावा लगभग 13 लाख बैरल कंडेन्सेट और अन्य लिक्विड ईंधन का भी प्रोडक्शन करता है है। इस तरह कुल ग्लोबल एनर्जी सप्लाई का 4.5% हिस्सा ईरान से आता है।
ईरान के बड़े तेल क्षेत्र जैसे अहवाज, मरून और गचसरान से पाइपलाइन सीधे खार्ग आइलैंड तक आती हैं। यहां तेल को बड़े स्टोरेज टैंकों में रखा जाता है और फिर टैंकर जहाजों में भरकर दुनिया के अलग-अलग देशों में भेजा जाता है।
आइलैंड पर करीब 3 करोड़ बैरल तेल स्टोर करने की क्षमता है। फिलहाल अनुमान है कि यहां लगभग 1.8 करोड़ बैरल तेल स्टोरेज में मौजूद है, जो सामान्य हालात में 10 से 12 दिन के निर्यात के बराबर है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जंग शुरू होने से ठीक पहले ईरान ने खार्ग आइलैंड से ऑयल एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा दिया था।
15 से 20 फरवरी के बीच तेल निर्यात 30 लाख बैरल प्रतिदिन से ज्यादा हो गया था, जो सामान्य से लगभग तीन गुना था। माना जा रहा है कि ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले ज्यादा से ज्यादा तेल बाहर भेजने की कोशिश की।
ईरान-इराक वॉर में खार्ग आइलैंड पर हमला हुआ था
खार्ग आइलैंड पहले भी कई बार रणनीतिक चर्चा का हिस्सा रहा है। 1979 के ईरान बंधक संकट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर को सलाह दी गई थी कि इस आइलैंड पर कब्जा कर लिया जाए, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया।
1980 के दशक में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के समय अमेरिका ने ईरान की कुछ अन्य तेल सुविधाओं पर हमला किया था, लेकिन खार्ग आइलैंड को निशाना नहीं बनाया गया। हालांकि ईरान-इराक वॉर के दौरान इराकी हमलों में इस आइलैंड के तेल टर्मिनल को भारी नुकसान पहुंचा था, लेकिन बाद में ईरान ने इसे दोबारा बना लिया।
अभी तक हमला क्यों नहीं किया गया
एक्सपर्ट्स का कहना है कि खार्ग आइलैंड पर हमला करने से दुनिया भर के तेल बाजार में बड़ा संकट पैदा हो सकता है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ सकती हैं, जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है और खाड़ी क्षेत्र में युद्ध और फैल सकता है।
यही वजह है कि अभी तक अमेरिका और उसके सहयोगी देश पहले ईरान की सैन्य और न्यूक्लियर कैपिसिटी को कमजोर करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। इसलिए फिलहाल यह छोटा सा आइलैंड सीधे युद्ध का मैदान नहीं बना है, लेकिन आने वाले समय में जंग की दिशा तय करने में इसकी बड़ी भूमिका हो सकती है।
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