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एशिया प्रशांत के देशों के मुकाबले भारत पर अमेरिकी शुल्क कम रहने की उम्मीद: मूडीज

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नई दिल्ली,एजेंसी। मूडीज रेटिंग्स ने बृहस्पतिवार को कहा कि एशिया प्रशांत क्षेत्र के कई देशों की तुलना में भारत पर अमेरिकी शुल्क कम रहने की संभावना है, जिससे अर्थव्यवस्था को और अधिक निवेश आकर्षित करने और वैश्विक विनिर्माण आधार बनने में मदद मिल सकती है। एशिया प्रशांत क्षेत्र के परिदृय अपने दृष्टिकोण में मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि कई निर्यात-निर्भर एशिया प्रशांत अर्थव्यवस्थाएं अप्रैल में बहुत अधिक अमेरिकी शुल्क से प्रभावित हुईं। 

हालांकि, बातचीत से द्विपक्षीय आधार पर शुल्क और अन्य व्यापार बाधाओं में कुछ कमी आने की संभावना है लेकिन नीति अनिश्चितता, निवेश निर्णयों को चुनौती दे रही है और व्यापार को बाधित कर रही है। इसने कहा कि व्यापार नीति के बारे में अनिश्चितता और वैश्विक व्यापार के संभावित बदलाव ने एशिया प्रशांत क्षेत्र में चक्रीय और संभवतः संरचनात्मक ऋण जोखिम बढ़ा दिए हैं। मूडीज रेटिंग्स ने कहा कि चीन से बाहर निवेश और विनिर्माण के विविधीकरण से लाभान्वित होने वाली वियतनाम और कंबोडिया जैसी अर्थव्यवस्थायें अब उच्च अमेरिकी शुल्क का सामना कर रही हैं। ये अर्थव्यवस्थायें विशेष रूप से जोखिम में हैं। 

मूडीज रेटिंग्स ने कहा, “कंबोडिया और वियतनाम जैसे देशों के उलट भारत को निवेश और व्यापार प्रवाह में एक शुल्क आधारित बदलाव का लाभ मिल सकता है। एशिया प्रशांत क्षेत्र (एपीएसी) में कई देशों की तुलना में भारत पर कम शुल्क रह सकता है, जो अर्थव्यवस्था को आगे निवेश प्रवाह को आकर्षित करने और एक वैश्विक विनिर्माण आधार के रूप में विकसित होने में मदद कर सकता है।” मई में ब्रिटेन के साथ एक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर और यूरोपीय संघ के साथ इसके लिए जारी प्रयास इस तरह के विकास का और समर्थन करेंगे। दो अप्रैल को, अमेरिका ने भारतीय उत्पादों 26 प्रतिशत का जवाबी शुल्क लगाया था लेकिन बाद में इसे 90 दिन के लिए निलंबित कर दिया।

हालांकि, अमेरिका द्वारा लगाया गया 10 प्रतिशत का मूल शुल्क लागू है। भारत अतिरिक्त 26 प्रतिशत शुल्क से पूरी छूट चाहता है। वर्तमान में, भारत और अमेरिका के अधिकारी दोनों देशों के बीच प्रस्तावित अंतरिम व्यापार समझौते पर बातचीत कर रहे हैं। भारत अपने श्रम-गहन उत्पादों के लिए अधिक बाजार पहुंच की मांग कर रहा है, वहीं अमेरिका अपने कृषि उत्पादों के लिए शुल्क रियायत चाहता है। अमेरिकी जवाबी शुल्क पर रोक नौ जुलाई को समाप्त हो रही है, ऐसे में व्यापारी समझौते के लिए बातचीत महत्वपूर्ण हो जाती है। 

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बैरकपुर में रैली के दौरान पीएम मोदी बोले – अब मैं बंगाल 4 मई के बाद BJP के शपथ ग्रहण में आऊंगा

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बैरकपुर, एजेंसी। पीएम मोदी पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण से पहले बैरकपुर में रैली को संबोधित कर रहे हैं। अपने संबोधन के दौरान पीएम मोदी ने कहा कि बंगाल के माहौल को देखकर मुझे लग रहा है कि मैं भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह के दौरान फिर से आऊंगा।

बंगाल मेरी आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र: PM मोदी

जनसभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री भावुक नजर आए। उन्होंने कहा कि “बंगाल के प्रति मेरा लगाव ‘शक्ति’ की भक्ति जैसा रहा है। यह भूमि मेरी व्यक्तिगत आध्यात्मिक यात्रा का ऊर्जा केंद्र रही है। बंगाल की महान विभूतियों और यहाँ की ‘जनता जनार्दन’ के असीम प्रेम ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है। इस धरती पर मुझे जो अनुभव मिले हैं, उन्हें मैं अपना सौभाग्य मानता हूँ।”

जीत का भरोसा और शपथ ग्रहण का निमंत्रण दिया

इस चुनाव अभियान की अपनी अंतिम रैली बताते हुए पीएम मोदी ने कहा कि उन्होंने पूरे बंगाल में जनता का मिजाज भांप लिया है। उन्होंने आत्मविश्वास के साथ कहा: “यह इस चुनाव में मेरी आखिरी रैली है। मैं इस भरोसे के साथ लौट रहा हूँ कि 4 मई को नतीजे आने के बाद, मुझे यहाँ भाजपा सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए दोबारा आना पड़ेगा।”

जनता के संदेश और कलाकृतियों पर चर्चा

प्रधानमंत्री ने रैलियों और रोड-शो के दौरान मिलने वाले प्रेम का जिक्र करते हुए कहा कि वे लोगों द्वारा दिए गए चित्रों और पत्रों को सहेज कर रखते हैं। उन्होंने बताया कि वे रात के समय इन चित्रों को ध्यान से देखते हैं और लोगों के पत्रों में छिपे दर्द और आशीर्वाद को महसूस करते हैं।

बैरकपुर में दिखेगा त्रिकोणीय मुकाबला

बैरकपुर विधानसभा क्षेत्र में इस बार कड़ा मुकाबला देखने को मिल रहा है:

  • भाजपा: पीएम मोदी यहाँ भाजपा उम्मीदवार कौस्तव बागची के समर्थन में प्रचार कर रहे हैं।
  • TMC: सत्ताधारी दल की ओर से फिल्म निर्देशक और वर्तमान विधायक राज (राजू) चक्रवर्ती मैदान में हैं।
  • CPI(M): वामपंथी दल ने सुमन रंजन बंद्योपाध्याय को उम्मीदवार बनाया है।

आस्था और लोकतंत्र का संगम

इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री ने उत्तर कोलकाता में रोड-शो शुरू करने से पहले ऐतिहासिक ठंठनिया कालीबाड़ी मंदिर में मां काली का आशीर्वाद लिया था। यह मंदिर 1703 में स्थापित हुआ था और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।

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मुख्य वैज्ञानिक की अमेरिका में बसे भारतीयों से भावुक अपीलः “लौट आओ वतन…भारत माता को आपकी ज्यादा जरूरत”

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नई दिल्ली,एजेंसी। आई टी (IT) कंपनी ज़ोहो कॉर्पोरेशन ( Zoho Corporation) के सह-संस्थापक और मुख्य वैज्ञानिक श्रीधर वेम्बु ने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से भारत लौटने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत और कद इस बात पर निर्भर करेगा कि देश टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कितना मज़बूत बनता है। वेम्बु ने सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर एक खुला पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अपने निजी अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि 37 साल पहले, वह भी बिना किसी आर्थिक साधन के अमेरिका गए थे, लेकिन अच्छी शिक्षा और अपने भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की बदौलत उन्होंने सफलता हासिल की। ​​उन्होंने यह भी माना कि अमेरिका ने भारतीयों को अवसर दिए हैं, और इसके लिए हमें आभारी होना चाहिए।

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हालाँकि, वेम्बु ने एक चेतावनी भी दी: अब अमेरिकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा ऐसा है जो मानता है कि भारतीय उनकी नौकरियाँ छीन रहे हैं। उनके अनुसार, भले ही यह भावना बहुमत का विचार न हो, लेकिन बड़ी संख्या में लोग ऐसा मानते हैं जो भविष्य के लिए चिंता का विषय है। अमेरिकी राजनीति पर टिप्पणी करते हुए, उन्होंने कहा कि वहाँ भारतीयों के पास ज़्यादा विकल्प नहीं हैं। उनके विचार में, भारतीय “कट्टर दक्षिणपंथी” (Hard Right) और “जागरूक वामपंथी” (Woke Left) के बीच फँसे हुए हैं, और दोनों ही स्थितियों में इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि उन्हें पूरा सम्मान मिलेगा। वेम्बु ने सफल भारतीयों से भारत लौटने और देश के विकास में योगदान देने की अपील की। ​​उन्होंने तर्क दिया कि भारत की युवा आबादी को तकनीकी नेतृत्व की आवश्यकता है, और जो भारतीय विदेशों में काम कर चुके हैं, वे इस भूमिका को निभाने के लिए सबसे उपयुक्त स्थिति में हैं।

इस बीच, अमेरिका में H-1B वीज़ा कार्यक्रम को लेकर विवाद भी बढ़ता जा रहा है। अमेरिका के कुछ सांसद इस कार्यक्रम को तीन साल के लिए निलंबित करने की माँग कर रहे हैं, उनका आरोप है कि इसका दुरुपयोग सस्ते विदेशी श्रम को नियुक्त करने के लिए किया जा रहा है। कुल मिलाकर, वेम्बु का संदेश केवल भावनात्मक ही नहीं, बल्कि रणनीतिक भी है। वह चाहते हैं कि भारतीय अपनी प्रतिभा और अनुभव का उपयोग करके भारत को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर और मज़बूत बनाएँ, जिससे देश वैश्विक मंच पर अधिक सम्मान प्राप्त कर सके।

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Ladakh New District: लद्दाख में 5 नए जिले घोषित, अब दो की जगह होंगे सात जिले, जानें कौन-कौन से नए district बने

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लद्दाख,एजेंसी। लद्दाख से एक बड़ी खबर सामने आई। उपराज्यपाल VK सक्सेना ने सोमवार को घोषणा की कि उन्होंने केंद्र सरकार की उस अधिसूचना को मंजूरी दे दी है जिसके तहत लद्दाख में  5 नए जिले बनाए जाएंगे। इसके साथ ही केंद्र शासित प्रदेश में जिलों की कुल संख्या 2 से बढ़कर 7 हो गई है।

एक पोस्ट में उपराज्यपाल ने इस कदम को क्षेत्र के लिए ‘ऐतिहासिक दिन’ बताया और कहा कि लोगों की लंबे समय से लंबित मांग अब पूरी हो गई है। उन्होंने X पर एक पोस्ट में कहा, “लद्दाख के लिए एक ऐतिहासिक दिन। मैंने लद्दाख में 5 नए जिलों के गठन की अधिसूचना को मंजूरी दे दी है, जिससे लद्दाख के लोगों की आकांक्षाओं और लंबे समय से लंबित मांग को पूरा किया जा सके।”  

कौन-कौन से बने नए जिले?
-नुब्रा (Nubra)
-शाम (Sham)
-चांगथांग (Changthang)
-ज़ांस्कर (Zanskar)
-द्रास (Drass)

अभी लद्दाख में दो जिले हैं – लेह और कारगिल।
इन नए जिलों के जुड़ने से केंद्र शासित प्रदेश में कुल 7 जिले हो जाएंगे। उपराज्यपाल ने कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित और समृद्ध लद्दाख के दृष्टिकोण के अनुरूप है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के नेतृत्व में गृह मंत्रालय ने अगनस्त 2024 में ही इस निर्णय को मंजूरी दे दी थी।

उपराज्यपाल सक्सेना के अनुसार, नए जिलों के गठन से जमीनी स्तर पर शासन को मजबूती मिलेगी, प्रशासन का विकेंद्रीकरण होगा और सार्वजनिक सेवाओं की त्वरित डिलीवरी सुनिश्चित होगी, विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में। उन्होंने यह भी कहा कि इस कदम से विकास, रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है, साथ ही शासन को जनता के करीब लाया जा सकेगा। अपनी प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि यह सुनिश्चित करने के प्रयास किए जाएंगे कि लद्दाख के प्रत्येक नागरिक को इस परिवर्तनकारी निर्णय से लाभ मिले।

यह घटनाक्रम अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद हुआ, जिससे जम्मू और कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त हो गया और क्षेत्र को दो केंद्र शासित प्रदेशों – जम्मू और कश्मीर और लद्दाख में विभाजित किया गया।

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