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छत्तीसगढ़

एग्जाम में पूछा-कुत्ते का नाम, ऑप्शन में दिया ‘राम’, शेरू

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जांच में महासमुंद DEO दोषी, MP-CG में विरोध, हिंदू संगठन बोले-भगवान का अपमान बर्दाश्त नहीं

रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में सरकारी स्कूलों की कक्षा चौथी की छमाही परीक्षा के अंग्रेजी प्रश्नपत्र में पूछे गए एक सवाल ने बड़ा विवाद खड़ा कर दिया है। प्रश्नपत्र में एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न के तहत पूछा गया था कि ‘मोना के कुत्ते का नाम क्या है?

इसके चार विकल्पों में ‘राम’ नाम भी शामिल था। अन्य विकल्प बाला, शेरू और ‘कोई नहीं’ दिए गए थे। इस सवाल को लेकर विरोध शुरू हो गया है। ये प्रश्न पत्र रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में बांटा गया है। क्वेश्चन पेपर बिना ठीक से वेरिफाई किए हर जिले में डिस्ट्रीब्यूट किए गए थे।

रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि महासमुंद DEO विजय लाहरे दोषी पाए गए हैं। उनको जानकारी थी कि प्रश्नपत्र और छपे हुए प्रश्नपत्र एक जैसे नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने गलती को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं।

मध्यप्रदेश में हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि यह कृत्य जानबूझकर सनातन धर्म को अपमानित करने के उद्देश्य से किया गया है। देवी-देवताओं के नामों को इस तरह आपत्तिजनक संदर्भ में शामिल करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

प्रश्नपत्र में पूछा गया था कि ‘मोना के कुत्ते का नाम क्या है? विकल्प में 'राम' नाम का भी जिक्र।

प्रश्नपत्र में पूछा गया था कि ‘मोना के कुत्ते का नाम क्या है? विकल्प में ‘राम’ नाम का भी जिक्र।

क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, 6 जनवरी को एग्जाम होने के बाद एग्जाम के बाद क्वेश्चन पेपर सोशल मीडिया में वायरल हो गया। इसके बाद NSUI रायपुर ने बुधवार (7 जनवरी) को जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान जिला शिक्षा अधिकारी हिमांशु भारती ने इसे विभागीय गलती स्वीकार करते हुए कहा कि शिक्षा विभाग से गलती हुई है।

हिमांशु भारती ने बताया कि पूरे प्रकरण की जांच के लिए एक समिति गठित की जा रही है, जो 7 दिनों के अंदर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसमें जिसकी भी गलती सामने आएगी, कार्रवाई होगी।

NSUI ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

NSUI ने दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। प्रदर्शन की चेतावनी दी है।

कैसे बना चौथी कक्षा का पेपर ?

दरअसल, सरकारी स्कूलों में चौथी क्लास के स्टूडेंट्स के लिए मिड-टर्म एग्जाम 6 जनवरी 2025 को था। क्वेश्चन पेपर बनाने की जिम्मेदारी समग्र शिक्षा की APC (असिस्टेंट प्रोजेक्ट कोऑर्डिनेटर) सैम्पा बोस को दी गई थी।

सैम्पा ने एक एक्सपर्ट कमेटी से क्वेश्चन पेपर तैयार करवाया, जिसमें पांच टीचर थे। वहीं मामला सामने आने के बाद सैम्पा ने बयान जारी कर कहा कि उन्होंने जो पीडीएफ भेजा, उसमें से कोई पर्चा अब तक नहीं छपा है।

किसी की भावना को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं- DEO

महासमुंद DEO विजय लहरे ने कहा कि हमारे जिले में छमाही परीक्षा के प्रश्नपत्र में यह सभी बात सामने आई है। राम नाम की बात संज्ञान में आते ही विकल्प को विलोपित किया और अन्य प्रश्न पत्र बांटे हैं। हमारे जिले से जो प्रश्नपत्र बनाए गए थे। वो इसमें नहीं छप पाया है।

DEO विजय लहरे ने बताया कि छपाई करने वाले ने किसी दूसरे सेट का प्रश्न छाप दिया है। मैंने छपाई करने वाले को पत्र लिखा है। इसमें किसी को कष्ट पहुंचा है तो इसका मैं खेद व्यक्त करता हूं। मैं खुद भी हिंदू हूं और श्रीराम का भक्त हूं। मेरा किसी की भावना को आहत करने का कोई उद्देश्य नहीं है।

DEO बोले- जो छपा उनका भेजा हुआ प्रश्न पत्र नहीं

वहीं महासमुंद DEO विजय लहरे का कहना है कि विषय विशेषज्ञ से मिला पर्चा वेंडर आदेश श्रीवास्तव को भेजा गया था, जो छपकर वितरित हुआ, वह उनका भेजा हुआ प्रश्न पत्र नहीं है। कृति ऑफसेट पब्लिशिंग हाउस से गलती हुई है।

वहीं जवाब में कृति ऑफसेट पब्लिशिंग हाउस के मालिक आदेश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने सिर्फ वही पर्चा प्रिंट किया था, जो उन्हें महासमुंद DEO ऑफिस से भेजा गया था। इसके अलावा कोई दूसरा पर्चा नहीं छापा है। उनको जितना बोला गया था, उन्होंने उतना किया है।

यह सिर्फ तकनीकी गलती नहीं- NSUI

NSUI के रायपुर जिला अध्यक्ष शांतनु झा ने कहा कि यह मामला केवल तकनीकी या मुद्रण संबंधी गलती नहीं है, बल्कि भाजपा सरकार के संरक्षण में चल रही शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चूक है। प्रश्नपत्र निर्माण से लेकर छपाई और वितरण तक पूरी प्रक्रिया की जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की बनती है।

शांतनु झा ने आरोप लगाया कि “प्रिंटर की गलती” कहकर हर बार जिम्मेदारी से बचने की कोशिश की जाती है, लेकिन अब यह स्वीकार्य नहीं है। जांच के नाम पर मामले को ठंडे बस्ते में डालने, दोषियों को बचाने या सरकार की जिम्मेदारी से ध्यान भटकाने का प्रयास किया गया, तो संगठन प्रदेशव्यापी और उग्र आंदोलन करेगा।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का अपमान किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, क्योंकि यह पूरे सनातन समाज की आस्था से जुड़ा मामला है।

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कोरबा

सरस्वती शिशु मंदिर एचटीपीपी दर्री में 40 दिवसीय समर कैंप का शुभारंभ,  बच्चों में दिखा उत्साह

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5 से 15 वर्ष के बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए पेंटिंग, एरोबिक्स, इंग्लिश स्पीकिंग और कंप्यूटर कक्षाओं का आयोजन
कोरबा सरस्वती शिशु मंदिर एचटीपीपी दर्री में बच्चों की प्रतिभा को निखारने और उनके सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए वार्षिक ग्रीष्मकालीन शिविर (समर कैंप 2026) का शुभारंभ किया गया है। 40 दिनों तक चलने वाले इस विशेष शिविर में बच्चों की रचनात्मकता, आत्मविश्वास और व्यक्तित्व विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है। समर कैंप के शुरू होते ही बच्चों और अभिभावकों में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है।

विद्यालय प्रबंधन ने बताया कि आज के समय में बच्चों के लिए पढ़ाई के साथ-साथ अतिरिक्त गतिविधियों का ज्ञान भी बेहद आवश्यक है। इसी उद्देश्य से 5 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों के लिए इस शिविर का आयोजन किया गया है, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं के साथ-साथ अन्य स्कूलों के बच्चे भी भाग ले सकते हैं। यह पहल बच्चों को छुट्टियों के समय का सदुपयोग करने और नई चीजें सीखने का सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है।

शिविर के दौरान बच्चों के लिए पेंटिंग, ड्राइंग और क्राफ्ट जैसी रचनात्मक गतिविधियों के माध्यम से उनकी कल्पनाशीलता को बढ़ावा दिया जा रहा है। वहीं एरोबिक्स और फिटनेस गतिविधियों से बच्चों को शारीरिक रूप से सक्रिय और स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। इसके अलावा व्यक्तित्व विकास पर विशेष ध्यान देते हुए इंग्लिश स्पीकिंग और बेसिक ग्रामर की कक्षाएं भी आयोजित की जा रही हैं, ताकि बच्चे आत्मविश्वास के साथ संवाद करना सीख सकें।

डिजिटल युग को देखते हुए बच्चों के लिए कंप्यूटर की बुनियादी जानकारी भी शिविर का अहम हिस्सा बनाई गई है। कंप्यूटर कक्षाओं में बच्चों को टेक्नोलॉजी के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल स्किल्स की प्रारंभिक समझ दी जा रही है।

विद्यालय प्रबंधन का कहना है कि इस तरह के शिविर बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ जीवन कौशल सिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शिविर के माध्यम से बच्चों में अनुशासन, टीमवर्क और नेतृत्व क्षमता विकसित करने का प्रयास किया जा रहा है। अभिभावकों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे आयोजन बच्चों के उज्ज्वल भविष्य के लिए बेहद लाभदायक हैं।

समर कैंप के आगामी दिनों में बच्चों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताएं और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी, जिससे बच्चों का उत्साह और भी बढ़ेगा तथा उन्हें अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा।

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कोरबा

दीपका में 30 अप्रैल को 20वीं राष्ट्रीय संगोष्ठी

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देशभर के विद्वानों का होगा संगम-डॉ गजेंद्र

कोरबा। शासकीय महाविद्यालय दीपका, जिला कोरबा (छत्तीसगढ़) एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर के बौद्धिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। महाविद्यालय एवं अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में ‘भारतीय ज्ञान परंपरा की कसौटी पर विकलांग-विमर्श का पुनर्मूल्यांकनÓ विषय पर 20वीं एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन 30 अप्रैल 2026, गुरुवार को किया जाएगा।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रात: 9:30 बजे महाविद्यालय परिसर में होगा। इस संगोष्ठी में देशभर से विद्वान, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं विषय विशेषज्ञ सहभागी बनेंगे, जिससे विचारों का एक व्यापक और सार्थक आदान-प्रदान संभव होगा।

इस गरिमामयी आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में छत्तीसगढ़ शासन के वाणिज्य एवं उद्योग, श्रम, आबकारी एवं सार्वजनिक उपक्रम विभाग के मंत्री लखनलाल देवांगन उपस्थित रहेंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व अध्यक्ष (राज्यमंत्री दर्जा) छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग एवं कुलपति, थावे विद्यापीठ, गोपालगंज (बिहार) डॉ. विनय कुमार पाठक करेंगे।
संगोष्ठी में विशिष्ट अतिथि के रूप में पूर्व न्यायाधीश उच्च न्यायालय न्यायमूर्ति चंद्रभूषण बाजपेयी, अखिल भारतीय विकलांग चेतना परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री मदनमोहन अग्रवाल, तथा गेवरा प्रोजेक्ट के जनरल मैनेजर अरुण त्यागी अपनी गरिमामयी उपस्थिति से कार्यक्रम को समृद्ध करेंगे। इसके साथ ही कटघोरा विधायक प्रेमचंद पटेल समारोह भूषण विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे।
इस अवसर पर ‘विकलांग-विमर्श : विविध संदर्भÓ शीर्षक पुस्तक का विमोचन भी किया जाएगा, जिसके संपादन का कार्य डॉ. पायल लिल्हारे (निवाड़ी, मध्यप्रदेश) द्वारा किया गया है। यह पुस्तक विकलांग-विमर्श के विभिन्न आयामों को उजागर करते हुए समकालीन संदर्भों में महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करती है।
महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. ममता ठाकुर ने बताया कि यह संगोष्ठी भारतीय ज्ञान परंपरा के संदर्भ में विकलांग-विमर्श के पुनर्मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण प्रयास है, जो समाज में समावेशी दृष्टिकोण को सुदृढ़ करेगा। वहीं 20वी राष्ट्रीय संगोष्ठी के संयोजक डॉ. गजेंद्र तिवारी ने सभी शिक्षाविदों, शोधार्थियों एवं जागरूक नागरिकों से इस आयोजन में अधिकाधिक संख्या में सहभागिता कर इसे सफल बनाने का आह्वान किया है।
यह संगोष्ठी न केवल अकादमिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होगी, बल्कि सामाजिक समरसता एवं समावेशिता के नए आयाम स्थापित करने में भी सहायक सिद्ध होगी।

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छत्तीसगढ़

कोंडागांव : वन मंत्री केदार कश्यप ने दहिकोंगा तेंदूपत्ता फड़ का किया निरीक्षण

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वन मंत्री ने संग्राहकों से किया सीधा संवाद

वन मंत्री ने संग्राहकों से किया सीधा संवाद

कोंडागांव। वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज रविवार को कोंडागांव जिले के दहिकोंगा स्थित तेंदूपत्ता फड़ का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने तेंदूपत्ता की गुणवत्ता देखी और संग्राहकों को हो रहे ऑनलाइन भुगतान की व्यवस्था की जानकारी ली।

          निरीक्षण के दौरान मंत्री श्री कश्यप ने दो संग्राहकों के मोबाइल में स्वयं ऑनलाइन एंट्री कर भुगतान प्रक्रिया को पूरा कराया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार तेंदूपत्ता संग्राहकों को पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए डिजिटल व्यवस्था को बढ़ावा दे रही है।

          वन मंत्री ने संग्राहकों से सीधे संवाद कर उन्हें “तेंदूपत्ता तिहार” की बधाई और शुभकामनाएं दीं तथा शासन की योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तेंदूपत्ता संग्रहण से जुड़े श्रमिकों की आय बढ़ाने और उनकी सुविधाओं में सुधार के लिए राज्य सरकार लगातार प्रयास कर रही है।

           इस अवसर पर कोंडागांव के वन मंडलाधिकारी चूड़ामणि सिंह, संयुक्त वन मंडलाधिकारी डॉ. आशीष कोटरिवार, परिक्षेत्र अधिकारी कोंडागांव, परिक्षेत्र अधिकारी दहिकोंगा सहित अन्य अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।

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