छत्तीसगढ़
युक्तियुक्तकरण पर बघेल ने उठाए सवाल,कहा- शाला बंद, मधुशाला चालू…:बिलासपुर पहुंचे पूर्व सीएम भूपेश, राज्य सरकार पर लगाया किसान-आदिवासी विरोधी होने का आरोप
बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल शुक्रवार को निजी प्रवास पर बिलासपुर पहुंचे। यहां उन्होंने मौजूदा राज्य सरकार पर जमकर हमला बोला। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को हतोत्साहित करने की साजिश कर रही है, ताकि उन्हें धान न खरीदना पड़े।
उन्होंने आरोप लगाया कि धान की नीलामी में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे किसानों को 500-600 रुपए प्रति क्विंटल तक का नुकसान उठाना पड़ रहा है। बघेल ने कहा, ये किसान विरोधी सरकार है।
बिजली और रोजगार पर भी साधा निशाना
पूर्व सीएम ने बिजली संकट को लेकर भी सरकार को घेरा और कहा, बिजली कटौती सांय-सांय हो रही है, और लोगों के पास रोजगार नहीं, वे पलायन करने मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि बस्तर क्षेत्र में 30-40 हजार युवा रोजगार की तलाश में दूसरे राज्यों में जा चुके हैं, और वहां उन्हें दहशत के माहौल का सामना करना पड़ रहा है।
शिक्षा के मुद्दे पर भी जताई चिंता
बघेल ने कहा कि 16 जून से स्कूल खुल रहे हैं, लेकिन सरकार स्कूलों को बंद करने में लगी है। शिक्षकों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है, जिससे बच्चों को दूर-दराज जाना पड़ेगा। उन्होंने आरोप लगाया, जितने स्कूल खुले हैं, वे लोगों की मांग और सहयोग से खुले, सरकार की नीयत साफ नहीं है।

पूर्व सीएम भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की मंशा पर उठाए सवाल
महतारी वंदन योजना को लेकर सरकार को घेरा
पूर्व मुख्यमंत्री ने महतारी वंदन योजना को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा, सरकार भुगतान नहीं कर पा रही है, इसलिए महतारी वंदन योजा से 70 हजार नाम काट दिए गए।
नक्सलवाद मुद्दे पर लगाए गंभीर आरोप
भूपेश बघेल ने कहा कि मौजूदा सरकार आदिवासी विरोधी है। आदिवासी युवक-युवतियों को जेल में डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि एक 6 महीने के बच्चे को नक्सली बताकर मार दिया गया। उन्होंने कहा, हमारे समय में एक क्रॉस फायरिंग हुई थी, उसे भी हमने स्वीकार किया था।
झीरम कांड को लेकर पीएम से सवाल
बघेल ने झीरम कांड को लेकर भी प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, पीएम ने कहा था कि झीरम के आरोपियों को 15 दिन में जेल भेजेंगे, क्या विजय शर्मा उनसे अब इस बारे में सवाल पूछेंगे?”
रेत और शराब नीति पर कसा तंज
बघेल ने कहा, हमने रेत नीति के नियम बनाए थे, लेकिन अब तो फायरिंग हो रही है। उन्होंने सरकार पर तंज कसते हुए कहा, शालाएं बंद हो रही हैं, मधुशालाएं खुल रही हैं।
राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ जारी रहेगी लड़ाई
भूपेश बघेल ने कहा कि कांग्रेस सरकार ने गंगाजल उठाकर कसम खाई थी और किसानों से किए हर वादे निभाए। उन्होंने दोहराया कि वे इस सरकार की नीतियों के खिलाफ लड़ाई जारी रखेंगे।
कोरबा
कोरबा कार्बन फैक्ट्री में टैंक फटा:कर्मचारी बाल-बाल बचे, दमकल ने आग पर पाया काबू
कोरबा। कोरबा के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक कार्बन फैक्ट्री में सोमवार दोपहर एक टैंक फट गया। इस घटना से मौके पर हड़कंप मच गया, हालांकि प्लांट के अंदर काम कर रहे कर्मचारी बाल-बाल बच गए। एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

यह फैक्ट्री कार्बन बनाने का काम करती है। इसमें बाहर से टैंकरों के माध्यम से तरल पदार्थ लाकर टैंकों में रखा जाता है, जहां कार्बन तैयार किया जाता है। टैंक फटने के समय फैक्ट्री में कई महिला और पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया, जो बेहद गर्म था और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया
गर्म पीच को पानी,फायर फोम की मदद से ठंडा किया गया
फैक्ट्री कर्मचारियों ने तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी। सीएसईबी के दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और गर्म पीच को पानी तथा फायर फोम की मदद से ठंडा किया। सीएसईबी के फायरमैन धर्मेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि फायर टीम को इंडस्ट्रियल एरिया में टैंक फटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर दो टैंकर पानी और फोम का छिड़काव कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

टैंक फटने से अस पास फिला मलबा और गर्म हार्ड पीच पर फोम का छिड़काव पर किया गया
फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन:स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और संबंधित अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कहीं न कहीं लापरवाही के कारण ही यह घटना सामने आई है। फैक्ट्री के बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे यह पता चल सके कि यहां क्या काम होता है।
इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले जहरीले केमिकल और धुएं से आसपास के लोग, खासकर पुलिस लाइन में रहने वाले परिवार, काफी परेशान हैं। इस संबंध में पर्यावरण विभाग से भी शिकायतें की जा चुकी हैं।
कोरबा
कोरबा में निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरी:पड़ोस के घर में सो रहे पति-पत्नी और बच्चा मलबे में दबे, हालत गंभीर
कोरबा/कुसमुंडा। कोरबा में रविवार देर रात संतोष वर्मा के निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल की दीवार गिर गई। यह दीवार बगल में स्थित अजय धनवार के घर पर गिरी, जिससे अजय धनवार, उनकी पत्नी और उनका छोटा बच्चा मलबे में दब गए।

घटना कुसमुंडा थाना क्षेत्र के प्रेम नगर की है। हादसा तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान हुआ। मौसम खराब होते ही निर्माणाधीन मकान की ऊपरी दीवार कमजोर होकर सीधे अजय धनवार के घर की छत पर गिर गई।

छप्पर टूटा, घर में मचा हड़कंप
इससे छप्पर टूट गया और सैकड़ों ईंटें घर के अंदर जा गिरीं। घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल तीनों को तत्काल मोहल्लेवासियों की मदद से कोरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घरेलू सामान को भारी नुकसान
हादसे में घर के अंदर रखा दोपहिया स्कूटर, बर्तन, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान के भीतर अभी भी ईंटों का मलबा पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था, जिसके कारण तेज हवा और बारिश में दीवार गिर गई।
लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी
लोगों ने निर्माणकर्ता की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह घटना निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर मामला बनकर सामने आई है।

कोरबा
राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही और भू-अभिलेखों में हेराफेरी पर पटवारी निलंबित
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और घोर लापरवाही बरतने के कारण पटवारी दीपक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार भैंसमा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि श्री सिंह ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।
जांच के दौरान ग्राम करूमौहा में राजस्व अभिलेखों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिसमें खसरा नंबर 176/1/ख/1 के वास्तविक रकबे 0.016 हेक्टेयर को नियम विरुद्ध तरीके से बढ़ाकर 1.600 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया था। इसी प्रकार एक अन्य मामले में खसरा नंबर 84/4 ख के रकबे को 0.710 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 71.000 हेक्टेयर कर दिया गया और बिना किसी वैध आदेश के इसे ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इन गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पसान निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
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