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Black Gold: दुनिया में कहां है सबसे ज्यादा कच्चा तेल? टॉप 10 देशों की लिस्ट जारी
मुंबई, एजेंसी। कच्चे तेल को अक्सर “काला सोना” कहा जाता है, क्योंकि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इससे पेट्रोल, डीजल, प्लास्टिक, केमिकल्स और कई अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं, जो औद्योगिक और घरेलू क्षेत्रों में व्यापक रूप से उपयोग किए जाते हैं। यही वजह है कि इस संसाधन पर नियंत्रण को लेकर दुनिया भर के देशों के बीच रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
तेल उत्पादक देशों के संगठन ओपेक (OPEC) के आंकड़ों के अनुसार, दुनिया का सबसे बड़ा ज्ञात कच्चे तेल का भंडार वेनेजुएला के पास है। दक्षिण अमेरिका का यह देश 303 अरब बैरल के ऑयल रिजर्व के साथ शीर्ष पर है, जो दुनिया के कुल भंडार का 17.3% है।
शीर्ष पर कौन-कौन हैं?
- वेनेजुएला – 303 अरब बैरल (17.3%)
- सऊदी अरब – 267 अरब बैरल (15.2%)
- ईरान – 209 अरब बैरल (11.9%)
- कनाडा – 163 अरब बैरल (9.3%)
- इराक – 145 अरब बैरल (8.3%)
- यूएई – 113 अरब बैरल
- कुवैत – 102 अरब बैरल
- रूस – 80 अरब बैरल
- अमेरिका – 74 अरब बैरल
- लीबिया – 48 अरब बैरल
इन देशों में से वेनेजुएला और ईरान पेट्रोल की सबसे कम कीमतों वाले देशों में शामिल हैं।
अमेरिका सबसे बड़ा उत्पादक, पर भंडार सीमित
वर्तमान में अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कच्चे तेल का उत्पादक और उपभोक्ता है, लेकिन उसके पास अन्य आठ देशों की तुलना में छोटा भंडार है। इसकी भरपाई के लिए अमेरिका को अपने घरेलू उत्पादन को लगातार बनाए रखना पड़ता है।
भारत: 85% कच्चे तेल के लिए आयात पर निर्भर
भारत की बात करें तो यह अपनी कुल आवश्यकता का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है, जिससे दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग और अधिक गहरा हुआ है।
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बुनियादी उद्योगों का उत्पादन मार्च में 0.4% घटा, पांच माह की पहली गिरावट
नई दिल्ली,एजेंसी। कोयला, कच्चे तेल, उर्वरक और बिजली के उत्पादन में गिरावट के कारण मार्च में आठ बुनियादी उद्योगों के उत्पादन में 0.4 प्रतिशत की गिरावट आई है। पांच माह में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन पहली बार घटा है। फरवरी, 2026 में, आठ प्रमुख बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 2.8 प्रतिशत बढ़ा था।
वित्त वर्ष 2025-26 में बुनियादी उद्योगों की उत्पादन वृद्धि दर घटकर 2.6 प्रतिशत रह गई। वित्त वर्ष 2024-25 में बुनियादी उद्योगों का उत्पादन 4.5 प्रतिशत बढ़ा था।

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बिंदी-तिलक विवाद में Lenskart को झटका, डूबे 4500 करोड़!
मुंबई, एजेंसी। देश की बड़ी आईवियर कंपनी में से एक Lenskart को बिंदी, तिलक से जुड़ा विवाद काफी महंगा पड़ गया। सोमवार को कंपनी के शेयर में बड़ी गिरावट आई है, जिससे इसकी मार्केट वैल्यूएशन में करीब 4,500 करोड़ रुपए की कमी आ गई।
विवाद की वजह कंपनी की एक पुरानी इंटरनल ग्रूमिंग पॉलिसी बनी, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हुई। इस पॉलिसी में कथित तौर पर कर्मचारियों को बिंदी, तिलक जैसे कुछ धार्मिक प्रतीकों को पहनने से रोकने की बात कही गई थी। इसके बाद ऑनलाइन विरोध तेज हो गया और कंपनी के बहिष्कार की मांग भी उठने लगी।

शेयर में गिरावट
BSE पर कारोबार के दौरान कंपनी का शेयर करीब 5% तक गिरकर 508.70 रुपए के स्तर तक पहुंच गया। हालांकि बाद में इसमें कुछ रिकवरी आई और यह 533.70 रुपए के आसपास बंद हुआ।
गिरावट के दौरान कंपनी की वैल्यूएशन घटकर लगभग 88,331 करोड़ रुपए रह गई, जो पहले करीब 92,872 करोड़ रुपए थी यानी एक ही सत्र में करीब 4,540 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। बाद में आंशिक सुधार के साथ वैल्यूएशन में कुछ बढ़त भी दर्ज की गई।
कंपनि ने दी थी सफाई
इस विवाद पर कंपनी के फाउंडर Peyush Bansal ने सफाई देते हुए कहा कि वायरल डॉक्यूमेंट पुराना है और मौजूदा पॉलिसी को नहीं दर्शाता। उन्होंने स्पष्ट किया कि कंपनी में किसी भी धार्मिक पहनावे या प्रतीकों पर कोई प्रतिबंध नहीं है और इस गलतफहमी के लिए माफी भी मांगी।
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बंगाल की पहचान बचाने की लड़ाई है यह विधानसभा चुनाव, PM मोदी का बड़ा दावा
झाड़ग्राम, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल में आगामी विधानसभा चुनाव को राज्य की पहचान बचाने की लड़ाई बताते हुए राज्य की ममता बनर्जी सरकार पर मूल निवासियों के बजाय ‘घुसपैठियों’ के पक्ष में राजनीति करने का आरोप रविवार को लगाया। मोदी ने आदिवासी बहुल झाड़ग्राम जिले में एक रैली को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस ”घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की सरकार’ बनाना चाहती है और मतदाताओं से इसे सत्ता से हटाने के लिए एकजुट होने का आह्वान किया।

उन्होंने कहा, ”यह चुनाव इस भूमि की समृद्ध विरासत को बचाने के लिए है। यह बंगाल की पहचान को बचाने के लिए है। आज बंगाल को अपनी पहचान खोने का डर है।” उन्होंने आरोप लगाया, “तृणमूल जिस रास्ते पर चल रही है वह बहुत खतरनाक है। तृणमूल कांग्रेस ‘घुसपैठियों के लिए घुसपैठियों की और सरकार बनाना चाहती है। एक ऐसी सरकार जो बंगाल की जनता के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करने के बजाय केवल घुसपैठियों के धर्म, भाषा और रीति-रिवाजों की रक्षा करेगी।”
मोदी ने दावा किया कि ऐसी सरकार के लिए सबसे बड़ी बाधा पश्चिम बंगाल के आम लोग होंगे। उन्होंने कहा, ”तृणमूल कांग्रेस की घुसपैठियों वाली सरकार के लिए, अगर कोई शत्रु है, तो वे यहीं बैठे भाई-बहन होंगे, जो घुसपैठियों के शत्रु होंगे।” प्रधानमंत्री ने दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस सरकार के खिलाफ असंतोष राज्य के सभी समुदायों और क्षेत्रों में फैल गया है। उन्होंने कहा, “इसलिए, बंगाल के हर समुदाय, हर वर्ग, हर क्षेत्र ने इस बार ठान लिया है और तृणमूल कांग्रेस सरकार को सत्ता से हटाने का संकल्प लिया है।”
मोदी ने तृणमूल कांग्रेस पर जनता की समस्याओं को नजरअंदाज करने और भ्रष्टाचार व जबरन वसूली की व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने आरोप लगाया, “अगर किसी को घर बनाना है, तो उसे तृणमूल कांग्रेस के सिंडिकेट पर निर्भर रहना पड़ता है। तृणमूल कांग्रेस के सांसद और विधायक आपकी समस्याओं की परवाह नहीं करते। वे अपनी जेबें भरने में व्यस्त हैं।”
प्रधानमंत्री ने यह भी आरोप लगाया कि तृणमूल कांग्रेस नेता राज्य के कई हिस्सों में आदिवासियों की जमीनों पर अवैध रूप से कब्जा कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया, “आदिवासियों की हजारों एकड़ जमीन पर तृणमूल कांग्रेस के गुंडों ने कब्जा कर लिया है।” पश्चिम बंगाल में दो चरणों में मतदान होगा। झाड़ग्राम में 23 अप्रैल को मतदान होगा।
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