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दावा- जिनपिंग की सीक्रेट चिट्ठी से सुधरे भारत-चीन रिश्ते:राष्ट्रपति मुर्मू को लिखा- हम ट्रम्प के टैरिफ से परेशान, फिर तय हुआ मोदी का चीन दौरा

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नई दिल्ली/बीजिंग,एजेंसी। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक चिट्ठी लिखी थी। इसमें उन्होंने अमेरिका-भारत सौदों से चीन के हितों को हो सकने वाले नुकसान पर चिंता जताई थी। यह दावा ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में किया गया है।

दरअसल, मार्च में जब अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प चीन के खिलाफ अपने व्यापार युद्ध को और तेज कर रहे थे, तभी बीजिंग ने भारत से गुपचुप तरीके से संपर्क साधना शुरू कर दिया था।

चिट्ठी के जरिए उन्होंने दोनों देशों के संबंधों में सुधार की संभावनाएं टटोली थीं। इसके बाद ही दोनों देशों के संबंध बेहतर होने शुरू हुए। इसके कुछ महीने बाद मोदी के चीन जाने का प्लान बना।

ट्रम्प ने मार्च में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने 2 अप्रैल को 70 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

ट्रम्प ने मार्च में दुनियाभर के देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी थी। इसके बाद उन्होंने 2 अप्रैल को 70 से ज्यादा देशों पर टैरिफ लगाने का ऐलान किया।

PM मोदी तक पहुंचाई गई चिट्ठी

रिपोर्ट में एक भारतीय अधिकारी के हवाले से दावा किया गया है कि यह चिट्ठी PM मोदी तक भी पहुंचाई गई थी, ताकि वे इस बात का आकलन कर सकें कि रिश्तों को बेहतर बनाने की कितनी संभावनाएं हैं।

चिट्ठी में चीन ने खास तौर पर इस चिंता को जताया था कि भारत और अमेरिका के बीच होने वाला कोई भी समझौता चीन के हितों को नुकसान पहुंचा सकता है। इसमें में यह भी लिखा गया था कि बीजिंग की ओर से संबंध सुधारने की कोशिशों का नेतृत्व एक प्रांतीय अधिकारी करेगा।

दो फैसलों से बढ़ी भारत की नाराजगी

ब्लूमबर्ग का कहना है कि जून तक भारत ने जिनपिंग की चिट्ठी का कोई ठोस जवाब नहीं दिया था, लेकिन तब हालात तेजी से बदले भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक बातचीत विवादों में फंस गई।

मैगजीन ने इंटरनेशनल एक्सपर्ट्स के हवाले से बताया कि भारत खास तौर पर दो बातों से नाराज था। पहले तो ट्रम्प ने दावा किया कि उन्होंने भारत-पाकिस्तान में सीजफायर कराया, जिसे भारत ने पूरी तरह से खारिज कर दिया था।

भारत की स्थिति को कमजोर करने की कोशिशों से मोदी सरकार पहले ही नाराज थी, फिर इसके बाद भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया गया।

इन दोनों फैसलों ने भारत-अमेरिका संबंधों में असंतोष और तनाव को हवा दी थी। इसके बाद भारत ने जून में चीन की ओर से आई पहल का गंभीरता से जवाब देना शुरू किया।

7 साल बाद चीन जा रहे PM मोदी

इसके बाद हालात तेजी से बदले। अगस्त आते-आते भारत और चीन ने 2020 के गलवान घाटी संघर्ष से आगे बढ़ने के लिए सीमा विवाद सुलझाने की कोशिशों को दोगुना करने पर सहमति जताई। और अब PM मोदी सात साल बाद चीन की यात्रा पर जा रहे हैं।

हालांकि, रिपोर्ट यह भी मानती है कि ट्रम्प के टैरिफ से पहले ही भारत और चीन गंभीर बातचीत में जुटे हुए थे। पिछले साल दोनों देशों ने लद्दाख में जारी गतिरोध को आंशिक तौर पर हल करने के लिए एक समझौता किया था। इसी समझौते ने मोदी और शी जिनपिंग की पहली सीधी मुलाकात का रास्ता खोला।

अब प्रधानमंत्री मोदी शंघाई कोऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन (SCO) समिट के लिए चीन जा रहे हैं। वहां उनकी मुलाकात जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन से होगी। इस मुलाकात को अमेरिका कड़ी नजर से देख रहा है, क्योंकि यह उसके लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकता है।

इकोनॉमी बेहतर करने के लिए चीन से बेहतर रिश्ते जरूरी

रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन से बेहतर संबंध करने को लेकर भारत में पिछले साल से ही माहौल बनना शुरू हो गया था। जनवरी 2024 में ही मोदी सरकार ने सोचना शुरू कर दिया था कि अगर चीन से रिश्ते सुधरें तो डगमगाती अर्थव्यवस्था को मदद मिल सकती है, क्योंकि 3,488 किलोमीटर लंबी सीमा पर सेना तैनात रखने में बहुत खर्च हो रहा था।

2023 के बीच तक दोनों देशों ने सीमा पर सैनिक हटाने पर काफी हद तक सहमति बना ली थी, लेकिन कुछ विवादों के कारण यह समझौता टिक नहीं पाया। उसी साल जोहान्सबर्ग में ब्रिक्स सम्मेलन में मोदी-शी की बैठक भी टल गई थी।

फिर मार्च 2025 में शी जिनपिंग का पत्र आया और बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर भारत-चीन रिश्तों को ‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ कहना शुरू कर दिया था। उनके उपराष्ट्रपति हान झेंग समेत कई नेताओं ने इसी शब्द का इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

‘ड्रैगन-एलिफेंट टैंगो’ एक रूपक है। यहां ड्रैगन से मतलब चीन और एलिफेंट भारत है। जबकि टैंगो एक तरह का डांस है, जिसमें दोनों पार्टनर एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर चलते हैं।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, जो चीन के शीर्ष नेतृत्व से सीधे संपर्क में रहते हैं, इस पूरी प्रक्रिया के अहम चेहरा बने। उन्होंने पिछले महीनों में चीन की यात्राएं कीं और बातचीत को आगे बढ़ाया।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।

भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने 19 अगस्त को चीन के विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की।

जुलाई में विदेश मंत्री एस. जयशंकर भी बीजिंग गए और अपने समकक्ष वांग यी से मिले। यह पांच सालों में पहली मुलाकात थी। जयशंकर ने चीन से व्यापार पर लगाए जा रहे प्रतिबंध और सप्लाई चेन को बाधित करने वाली नीतियां खत्म करने की अपील की। चीन ने इस दौरान भारत को उर्वरक और दुर्लभ खनिजों की आपूर्ति सुनिश्चित करने का भरोसा दिया।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि दोनों देशों का व्यापार जगत भी सुधरते रिश्ते का फायदा उठाने की कोशिश कर रहा है। अडानी समूह चीन की इलेक्ट्रिक वाहन दिग्गज BYD के साथ साझेदारी करने की योजना देख रहा है, ताकि भारत में बैटरी उत्पादन शुरू किया जा सके। इसी तरह रिलायंस और JSW समूह भी चीनी कंपनियों से गुप्त समझौते कर रहे हैं।

एक्सपर्ट बोले- ट्रम्प की वजह से भारत-चीन नजदीक आए

ब्लूमबर्ग लिखता है कि भारत और चीन की नजदीकी का असर सीधे अमेरिका पर पड़ रहा है। पिछले कुछ दशकों में वॉशिंगटन लगातार नई दिल्ली को अपने साथ जोड़कर बीजिंग का मुकाबला करना चाहता था, लेकिन ट्रम्प ने अचानक भारत पर 50% टैरिफ लगा दिया, जिससे मोदी सरकार हैरान रह गई और दिल्ली ने बीजिंग की ओर रुख करना शुरू किया।

अमेरिकी थिंक टैंक कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के विशेषज्ञ एशले टेलिस ने तंज कसा कि “ट्रम्प असली शांतिदूत निकले, जिन्होंने भारत और चीन को करीब ला दिया, क्योंकि उन्होंने भारत को दुश्मन की तरह ट्रीट किया।”

मोदी-जिनपिंग 31 अगस्त को चीन में मिलेंगे:गलवान झड़प के बाद दूसरी औपचारिक मुलाकात, सीमा विवाद पर वार्ता संभव

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 31 अगस्त को चीन के तियानजिन शहर में होने वाली SCO समिट के दौरान मुलाकात करेंगे। 2020 में हुई गलवान झड़प के बाद दोनों नेताओं की यह दूसरी औपचारिक मुलाकात होगी।

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शाह ‘विपक्षी दलों को तोड़ने में व्यस्त, उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे कभी सफल नहीं होंगे’: कांग्रेस

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर लोकसभा में भाजपा के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की कोशिश करने का शुक्रवार को आरोप लगाया और कहा कि वह ”लोकतंत्र का पूरी तरह से मजाक उड़ाते हुए” विपक्षी दलों को तोड़ने में व्यस्त हैं लेकिन उनके ”दुर्भावनापूर्ण मंसूबे” कभी सफल नहीं होंगे।

संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी तरह से बेचैनी में है सरकार 
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ”इससे पहले कभी किसी ने लोकसभा में अपनी पार्टी के लिए दो-तिहाई बहुमत जुटाने की ऐसी कोशिश नहीं की, जैसी केंद्रीय गृह मंत्री इन दिनों संसद के मानसून सत्र से पहले पूरी बेचैनी से कर रहे हैं।” रमेश ने कहा, ”स्वयंभू चाणक्य को 17 अप्रैल, 2026 को अपमानित होना पड़ा था, जब राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) आवश्यक दो-तिहाई बहुमत नहीं जुटा पाई और परिसीमन से जुड़ा खतरनाक संविधान संशोधन विधेयक अच्छे अंतर से खारिज हो गया।

लोकतंत्र का मजाक बनाने” में व्यस्त भाजपा 
उन्होंने आरोप लगाया कि उस करारी हार से तिलमिलाए हुए शाह अब विपक्षी दलों को तोड़ने और ”लोकतंत्र का मजाक बनाने” में व्यस्त हैं। रमेश ने कहा, ”लड़ाई जारी है। उनके दुर्भावनापूर्ण मंसूबे सफल नहीं होने चाहिए और सफल नहीं होंगे।” रमेश का यह बयान तब आया जब तृणमूल कांग्रेस के बागी नेता जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया ने शुक्रवार को कहा कि पार्टी के बागी सांसद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से सोमवार को मुलाकात कर खुद को ”असली तृणमूल कांग्रेस” के तौर पर मान्यता दिये जाने की मांग करेंगे।

लोकसभा में राजग का समर्थन
बसुनिया ने दावा किया कि अभी 19 लोकसभा सदस्य इस गुट का समर्थन कर रहे हैं। कूचबिहार से सांसद और लोकसभा में राजग का समर्थन करने के इच्छुक सांसदों में शामिल बसुनिया ने वीडियो’ को बताया कि यह गुट सोमवार को लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करेगा। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार और पार्टी के अंदर हुई बगावत के कारण तृणमूल कांग्रेस संकट का सामना कर रही है। इस बगावत ने पार्टी की संगठनात्मक और विधायी ताकत को काफी कमजोर कर दिया है।

मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर हासिल की मान्यता 
पिछले हफ्ते, पार्टी के दो-तिहाई से ज़्यादा विधायकों – 80 में से 58 ने आधिकारिक तृणमूल कांग्रेस विधायक दल से अलग होकर, पार्टी से निष्कासित विधायक रिताब्रता बनर्जी के नेतृत्व में पश्चिम बंगाल विधानसभा में मुख्य विपक्षी गुट के तौर पर मान्यता हासिल कर ली। बाद में, यह संकट संसद सदस्यों तक भी पहुंच गया, जहां काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में बागी सांसदों ने 20 से ज़्यादा लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया। 

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राम मंदिर के बनने से अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन को सार्वजनिक किया जाए: भाजपा नेता

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लखनऊ, एजेंसी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता रजनीश सिंह ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान में कथित हेराफेरी को लेकर हो रहे विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ के बनने के समय से लेकर अब तक के सभी वित्तीय लेन-देन और संपत्ति को सार्वजनिक करने की मांग की। सिंह ने शुक्रवार को भेजे पत्र में प्रधानमंत्री से आग्रह किया कि वह ट्रस्ट को निर्देश दें कि न्यास अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर सभी आय, खर्च, दान, बैंक खातों, जमीन के लेन-देन और संपत्तियों का विवरण सार्वजनिक करे।

करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक राम मंदिर 
उन्होंने भगवान राम को सत्य, धर्म और जन-कल्याण का प्रतीक बताते हुए कहा कि राम के नाम पर काम करने वाली संस्थाओं को पारदर्शिता के उच्चतम मानकों का पालन करना चाहिए। उन्होंने पत्र में कहा, “देश-विदेश के करोड़ों भक्तों ने राम मंदिर के निर्माण के लिए अपनी आस्था और जीवन भर की कमाई का योगदान दिया है। यह धन किसी व्यक्ति, समूह या संस्था का नहीं है, बल्कि करोड़ों भक्तों की श्रद्धा का प्रतीक है।” सिंह ने कहा कि हर भक्त को यह जानने का ‘नैतिक और लोकतांत्रिक अधिकार’ है कि दान में मिले पैसे, गहनों और अन्य कीमती चीजों का इस्तेमाल कैसे किया गया है। भाजपा नेता की यह मांग मंदिर के दान के प्रबंधन में कथित अनियमितताओं को लेकर बढ़ते विवाद के बीच आई है। 

पूर्व सांसद ने मंदिर में चोरी को लेकर उठाए सवाल 
पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने बुधवार को दावा किया था कि उन्हें राम मंदिर में दान के कथित दुरुपयोग और चोरी के बारे में जानकारी थी लेकिन वे इसका विवरण बताने की स्थिति में नहीं थे। उन्होंने गोंडा में पत्रकारों से कहा था, “अगर मैं सच बोलूंगा, तो मुसीबत में पड़ जाऊंगा क्योंकि वे बहुत ताकतवर लोग हैं।” रजनीश सिंह ने पत्र में ‘समर्पण निधि’ अभियान के तहत जमा हुए फंड, नकद, चेक, ऑनलाइन अंतरण और दान पेटियों के जरिए मिले दान, सोना, चांदी व गहनों के रूप में मिले योगदान का विवरण सार्वजनिक करने की मांग की। 

श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं
इस बीच उत्तर प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने शुक्रवार को कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने इस मामले की जांच पहले ही शुरू कर दी है। शाही ने कहा, “ट्रस्ट अपने नियमों और कानूनों के अनुसार जरूरी कार्रवाई करेगा। ट्रस्ट इस मामले को लेकर पूरी तरह से जागरूक और सतर्क है।” उन्होंने जोर देकर कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था की रक्षा की जाएगी और कहा, “किसी भी श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।

ट्रस्ट के मामले में सरकार नहीं करेगी हत्क्षेप 
अगर कहीं कोई कमी या गड़बड़ी है, तो उसकी जांच की जा रही है। शाही ने कहा कि राज्य सरकार अभी इस मामले में दखल नहीं दे रही है क्योंकि यह ट्रस्ट का मामला है। उन्होंने कहा, “अगर ट्रस्ट सरकार से किसी मदद या कार्रवाई की उम्मीद करता है, तो सरकार उस पर विचार करेगी।

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ममता बनर्जी के खिलाफ FIR दर्ज, सांप्रदायिक टिप्पणी का आरोप

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कोलकाता, एजेंसी। कोलकाता में Mamata Banerjee के खिलाफ कथित सांप्रदायिक टिप्पणी को लेकर FIR दर्ज की गई है। यह मामला कोलकाता के Hare Street Police Station में दर्ज किया गया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2026 में दिए गए एक राजनीतिक भाषण के दौरान ममता बनर्जी ने ऐसी टिप्पणियां कीं, जिनसे सांप्रदायिक भावनाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसी आधार पर उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर मामला दर्ज कर लिया है और पूरे प्रकरण की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, मामले में अभी तक किसी गिरफ्तारी या अन्य कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल जांच जारी है।
वहीं दूसरी ओर, BJP ने शुक्रवार को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस के 20 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाला एक दस्तावेज़ यह साबित करता है कि ‘असली TMC’ का नेतृत्व काकोली घोष दस्तीदार कर रही हैं, न कि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी। यह बयान ऐसी खबरों के बीच आया है कि 19-20 तृणमूल कांग्रेस (TMC) सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को संबोधित एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं।

एक वीडियो बयान में, BJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि वंशवादी राजनीति और पार्टी के बजाय अपने भतीजे को ममता की प्राथमिकता के कारण TMC में अंदरूनी बिखराव हो रहा है। उन्होंने कहा, “अब सबूत सबके सामने है। काकोली घोष के नेतृत्व में असली TMC के 20 लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाला दस्तावेज़ दिखाता है कि असली TMC उस TMC से अलग है जिसका प्रतिनिधित्व ममता और अभिषेक कर रहे हैं। वे अब नकली TMC हैं।”

2026 में पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार के बाद TMC संकट में घिर गई, क्योंकि BJP ने राज्य में ममता के 15 साल के शासन को खत्म कर दिया। इसमें भवानीपुर सीट पर ममता का सुवेंदु अधिकारी से 15,105 वोटों के अंतर से हारना और पार्टी के विधायकों के एक बड़े हिस्से का बागी हो जाना शामिल था। बाद में यह उथल-पुथल संसद तक फैल गई, जिसमें बागी सांसदों ने 20 से अधिक लोकसभा सदस्यों के समर्थन का दावा किया।

पूनावाला ने आरोप लगाया कि लगभग 65-70 TMC विधायक और कई राज्यसभा सांसद भी “असली TMC” के साथ हैं। उन्होंने कहा, “विधानसभा में भी, लगभग 65-70 विधायक असली TMC के तहत एक साथ आए हैं। राज्यसभा सांसद भी इस गुट के साथ हैं। यह TMC का पूरी तरह से बिखराव है। इसे अब ‘टुकड़ों में कांग्रेस’ कहा जा रहा है।” 

पूनावाला ने कहा, “क्योंकि वह पार्टी से ज़्यादा अपने भतीजे को अहमियत देती हैं, इसलिए पार्टी उनसे दूर हो गई है। परिवारवाद की राजनीति को बढ़ावा देने पर ऐसा ही होता है। जिनके पास संख्या बल है, वही असली TMC है। अफ़सोस की बात है कि ममता के पास अब बहुत कम विकल्प बचे हैं। हो सकता है कि वह अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय करना चाहें।”

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