छत्तीसगढ़
विद्युत संयंत्र दुर्घटना के मृतकों के परिवारों को दिया जा रहा मुआवजा
- छत्तीसगढ़ के प्रभावित परिवारों तक पहुँच रहे कंपनी प्रतिनिधि
- दूसरे प्रदेशों के मृत कर्मचारियों के परिवारजनों को मुआवजा राशि देने की लिए गठित टीमें हुई रवाना
- विद्युत संयंत्र दुर्घटना के घायलों की स्थिति में हो रहा सुधार
- प्रभावितों की मदद के लिए कंपनी द्वारा वेदांता संवेदना केंद्र 24×7 हेल्पलाइन प्रारम्भ
सिंघीतराई/ सक्ती । सिंघीतराई ग्राम पंचायत स्थित 2 गुणा 600 मेगावॉट विद्युत संयंत्र में हाल ही में हुई दुर्घटना के मृतकों के परिवारजनों को मुआवजा दिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ के प्रभावित परिवारों को कंपनी के प्रतिनिधियों द्वारा मुआवजा दिया जा रहा है। दूसरे प्रदेशों के प्रभावित परिवारों को मुआवजा देने के लिए व्हीएलसीटीपीपी संयंत्र एवं ठेका कंपनी प्रबंधन की ओर से प्रतिनिधि रवाना किए जा चुके हैं। घायलों को रायगढ़ एवं रायपुर के अस्पतालों में उच्च स्तरीय चिकित्सा सुविधाएं दी जा रही हैं। एहतियात के तौर पर व्हीएलसीटीपीपी प्रबंधन ने विशेषज्ञ चिकित्सकों की सेवाएं ली हैं। प्रभावितों की मदद के लिए कंपनी द्वारा वेदांता संवेदना केंद्र 24×7 हेल्पलाइन स्थापित की गई है।

दुःखद हादसे में मृतकों के परिवारजनों को 35 लाख रुपए एवं रोजगार सहायता देने की घोषणा की गई है वहीं प्रत्येक घायल को 15 लाख रुपए के साथ उनके पूरी तरह से स्वस्थ होने तक मासिक वेतन दिया जाएगा। मृतकों के नामित परिवारजनों को कर्मचारी राज्य बीमा निगम के प्रावधानों के अंतर्गत एक निश्चित राशि पेंशन के तौर पर दी जाएगी। घायलों के परिवारजनों की मेडिकल काउंसिलिंग भी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर गंभीर रुप से घायल कर्मचारियों को एयर एंबुलेंस के जरिए अन्य उच्च स्तरीय केंद्रों में भेजने की व्यवस्था की गई है।

फोर्टिस अस्पताल, रायगढ़ में भर्ती घायल कर्मचारी ग्राम हरदी अड़भार के केशव चंद्रा की पत्नी सरिता राठौर, डभरा निवासी घायल कर्मचारी भुवनेश्वर चंद्रा की पत्नी प्रियंका चंद्रा, डभरा निवासी घायल कर्मचारी अभिषेक चंद्रा की पत्नी सविता चंद्रा, मेट्रो बालाजी अस्पताल में भर्ती ग्राम ठनगन, डभरा निवासी घायल कर्मचारी बनवारी लाल बरेठ के भाई बालेश्वर बरेठ और ग्राम कांसा, डभरा निवासी घायल कर्मचारी परदेसी लाल चंद्रा की पत्नी फिरतिन बाई चंद्रा ने बताया कि कंपनी की ओर से ईलाज में हरसंभव मदद दी जा रही है। कंपनी के प्रतिनिधि लगातार अस्पताल में मौजूद हैं और घायल कर्मचारियों के परिवारजनों की ठहरने-भोजन आदि की सुविधा का ध्यान रख रहे हैं। इन परिवारजनों का यह भी कहना है कि बेहतरीन ईलाज का सकारात्मक असर हुआ है कि घायलों की स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है।

हादसे से प्रभावित कर्मचारियों एवं उनके परिवारजनों के प्रति कंपनी ने गहरी संवेदनायें व्यक्त की हैं। कंपनी ने कहा है कि संकट की स्थिति में वह प्रभावितों के साथ खड़ी है।
कोरबा
कोरबा कार्बन फैक्ट्री में टैंक फटा:कर्मचारी बाल-बाल बचे, दमकल ने आग पर पाया काबू
कोरबा। कोरबा के इंडस्ट्रियल एरिया स्थित एक कार्बन फैक्ट्री में सोमवार दोपहर एक टैंक फट गया। इस घटना से मौके पर हड़कंप मच गया, हालांकि प्लांट के अंदर काम कर रहे कर्मचारी बाल-बाल बच गए। एक बड़ी दुर्घटना टल गई।

यह फैक्ट्री कार्बन बनाने का काम करती है। इसमें बाहर से टैंकरों के माध्यम से तरल पदार्थ लाकर टैंकों में रखा जाता है, जहां कार्बन तैयार किया जाता है। टैंक फटने के समय फैक्ट्री में कई महिला और पुरुष कर्मचारी मौजूद थे। टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया, जो बेहद गर्म था और किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता था।

टैंक फटने के बाद गर्म हार्ड पीच फैक्ट्री के अंदर फैल गया
गर्म पीच को पानी,फायर फोम की मदद से ठंडा किया गया
फैक्ट्री कर्मचारियों ने तत्काल दमकल विभाग को सूचना दी। सीएसईबी के दमकल वाहन मौके पर पहुंचे और गर्म पीच को पानी तथा फायर फोम की मदद से ठंडा किया। सीएसईबी के फायरमैन धर्मेंद्र कुमार पटेल ने बताया कि फायर टीम को इंडस्ट्रियल एरिया में टैंक फटने की सूचना मिली थी, जिसके बाद मौके पर पहुंचकर दो टैंकर पानी और फोम का छिड़काव कर स्थिति को नियंत्रित किया गया।

टैंक फटने से अस पास फिला मलबा और गर्म हार्ड पीच पर फोम का छिड़काव पर किया गया
फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन:स्थानीय लोग
स्थानीय लोगों का आरोप है कि फैक्ट्री में औद्योगिक नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है और संबंधित अधिकारी इस पर ध्यान नहीं दे रहे हैं। कहीं न कहीं लापरवाही के कारण ही यह घटना सामने आई है। फैक्ट्री के बाहर कोई बोर्ड भी नहीं लगा है, जिससे यह पता चल सके कि यहां क्या काम होता है।
इंडस्ट्रियल एरिया से निकलने वाले जहरीले केमिकल और धुएं से आसपास के लोग, खासकर पुलिस लाइन में रहने वाले परिवार, काफी परेशान हैं। इस संबंध में पर्यावरण विभाग से भी शिकायतें की जा चुकी हैं।
कोरबा
कोरबा में निर्माणाधीन मकान की दीवार गिरी:पड़ोस के घर में सो रहे पति-पत्नी और बच्चा मलबे में दबे, हालत गंभीर
कोरबा/कुसमुंडा। कोरबा में रविवार देर रात संतोष वर्मा के निर्माणाधीन मकान की तीसरी मंजिल की दीवार गिर गई। यह दीवार बगल में स्थित अजय धनवार के घर पर गिरी, जिससे अजय धनवार, उनकी पत्नी और उनका छोटा बच्चा मलबे में दब गए।

घटना कुसमुंडा थाना क्षेत्र के प्रेम नगर की है। हादसा तेज आंधी-तूफान और भारी बारिश के दौरान हुआ। मौसम खराब होते ही निर्माणाधीन मकान की ऊपरी दीवार कमजोर होकर सीधे अजय धनवार के घर की छत पर गिर गई।

छप्पर टूटा, घर में मचा हड़कंप
इससे छप्पर टूट गया और सैकड़ों ईंटें घर के अंदर जा गिरीं। घटना के बाद घर में चीख-पुकार मच गई। आवाज सुनकर पड़ोसी तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में दबे तीनों लोगों को बाहर निकाला। गंभीर रूप से घायल तीनों को तत्काल मोहल्लेवासियों की मदद से कोरबा अस्पताल में भर्ती कराया गया।
घरेलू सामान को भारी नुकसान
हादसे में घर के अंदर रखा दोपहिया स्कूटर, बर्तन, बिस्तर और अन्य घरेलू सामान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। मकान के भीतर अभी भी ईंटों का मलबा पड़ा हुआ है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों का ध्यान नहीं रखा गया था, जिसके कारण तेज हवा और बारिश में दीवार गिर गई।
लापरवाही के आरोप, पुलिस जांच में जुटी
लोगों ने निर्माणकर्ता की लापरवाही पर नाराजगी व्यक्त की है। पुलिस को घटना की सूचना दे दी गई है और घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह घटना निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी का एक गंभीर मामला बनकर सामने आई है।

कोरबा
राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही और भू-अभिलेखों में हेराफेरी पर पटवारी निलंबित
कोरबा। कलेक्टर कुणाल दुदावत ने शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता और घोर लापरवाही बरतने के कारण पटवारी दीपक कुमार सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। तहसीलदार भैंसमा द्वारा प्रस्तुत जांच प्रतिवेदन के आधार पर यह पाया गया कि श्री सिंह ने अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन करने में गंभीर अनियमितताएं की हैं, जो छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम 1965 का उल्लंघन है।
जांच के दौरान ग्राम करूमौहा में राजस्व अभिलेखों के साथ बड़े पैमाने पर छेड़छाड़ की पुष्टि हुई है, जिसमें खसरा नंबर 176/1/ख/1 के वास्तविक रकबे 0.016 हेक्टेयर को नियम विरुद्ध तरीके से बढ़ाकर 1.600 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया था। इसी प्रकार एक अन्य मामले में खसरा नंबर 84/4 ख के रकबे को 0.710 हेक्टेयर से बढ़ाकर सीधे 71.000 हेक्टेयर कर दिया गया और बिना किसी वैध आदेश के इसे ऑनलाइन भुइयां पोर्टल पर दर्ज कर दिया गया।
इन गंभीर वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितताओं के फलस्वरूप छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई करते हुए पटवारी को निलंबित किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय तहसील कार्यालय पसान निर्धारित किया गया है और उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ते की पात्रता होगी।
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