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छत्तीसगढ़

कांग्रेस न्याय यात्रा…5वें दिन रायपुर में एंट्री:कवर्धा हिंसा के पीड़ित और बीजेपी नेता का परिवार हुआ शामिल,बैज बोले-सड़क से कोर्ट तक जाएंगे

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रायपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ कांग्रेस की न्याय यात्रा पांचवें दिन मंगलवार को रायपुर के पंडरी इलाके पहुंच चुकी है। आज कांग्रेस नेताओं ने सारगांव से पंडरी तक की दूरी तय की। जिसमें कवर्धा के लोहारडीह निवासी शिवकुमार साहू उर्फ कचरू साहू का परिवार और रायपुर विधानसभा थाना क्षेत्र के दौंदेकला निवासी बीजेपी कार्यकर्ता संतोष पटेल के परिवार के सदस्य शामिल हुए।

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि, शिव कुमार साहू की हत्या को सुसाइड करार कर दिया गया। संतोष पटेल के घर में शराब माफियाओं ने हमला किया था। कार्रवाई न होने से उसने आत्महत्या की थी। जब तक इन दोनों परिवार को इंसाफ नहीं मिलेगा, कांग्रेस इनके परिवार के साथ खड़ी रहेगी।साहू और पटेल परिवार को इंसाफ नहीं मिलने पर दीपक बैज ने सड़क से लेकर कोर्ट तक की लड़ाई लड़ने की बात कही है।

न्याय यात्रा में आज शामिल हुए पूर्व मंत्री-विधायक

कांग्रेस की न्याय यात्रा में मंगलवार को पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे, कवासी लखमा, मोहन मरकाम, विधायक संगीत सिन्हा, पूर्व विधायक सावित्री मंडावी सहित कांग्रेस के बड़े नेताओं का साथ मिला। यात्रा के पांचवें दिन बीजेपी नेता एकजुट दिखे और बीजेपी पर हमलावर दिखे।

न्याय यात्रा को मिल रहा अपार जनसमर्थन- चौबे

पूर्व मंत्री रविंद्र चौबे ने कहा कि, कांग्रेस की न्याय यात्रा को अपार जनसमर्थन मिल रहा है। कांग्रेस कार्यकर्ता उत्साहित है। बीजेपी सरकार आज हिल गई है। मुख्यमंत्री, मंत्री इस यात्रा से घबरा गए हैं। इसलिए यात्रा पर उलटे सीधे बयान दे रहे हैं। भाजपा सरकार की असफलता के कारण अराजकता पैदा हुई है। इसलिए यह न्याय यात्रा जरूरी है। आज हर जनता सवाल पूछ रही है कि सरकार कौन चला रहा है।

मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और विधायक को माफी मांगनी चाहिए

बीजेपी नेताओं के माफी यात्रा वाले बयान पर कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज ने पलटवार किया है। बैज ने कहा कि, प्रदेश में हो रही हत्याओं को लेकर मुख्यमंत्री, गृहमंत्री और स्थानीय विधायक को माफी मांगना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में झीरम घाटी की घटना हुई है।

भारतीय जनता पार्टी की सरकार में 200 आदिवासियों के घर जलाए गए हैं। भारतीय जनता पार्टी की सरकार में कलेक्टर-ऑफिस जला है। सरकार कांग्रेस को दोष देना बंद करे और जनता से माफी मांगे।

सचिन पायलट होंगे न्याय यात्रा में शामिल।

सचिन पायलट होंगे न्याय यात्रा में शामिल।

2 अक्टूबर को यात्रा का समापन

कांग्रेस की न्याय यात्रा का समापन 2 अक्टूबर को होगा। रायपुर के सड्डू से यात्रा शुरू होगी और गांधी मैदान में सभा आयोजित होने के बाद खत्म होगी। सड्डू से लेकर गांधी मैदान सभा स्थल तक पदयात्रा का कई स्थानों पर स्वागत होगा। इस दौरान कांग्रेस राजधानी में स्वागत के जरिए माहौल बनाने की कोशिश में है। ब्लॉक और वार्ड स्तर पर इसके लिए जवाबदारी भी तय कर दी गई है।

ब्लॉक और वार्ड अध्यक्षों को निर्देशित किया गया कि, वे अपने साथ अधिक से अधिक लोगों को लेकर पहुंचे। इससे पहले न्याय पदयात्रा का उद्देश्य बताने प्रचार प्रसार शुरू करें। कांग्रेस नेताओं के अनुसार इस यात्रा में सचिन पायलट और उनके साथी भी शामिल होंगे।

आखिरी के तीन किलोमीटर वो साथ चलेंगे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी ने जो सौहार्द (भाईचारा) बिगाड़ा है। हम उसके विरोध में उतरे हैं।

कांग्रेस न्याय यात्रा में राज्य सभा सांसदों के शामिल नहीं होने पर बीजेपी ने कसा तंज।

कांग्रेस न्याय यात्रा में राज्य सभा सांसदों के शामिल नहीं होने पर बीजेपी ने कसा तंज।

तीनों राज्यसभा सांसद न्याय पदयात्रा में शामिल क्यों नहीं- बीजेपी

बीजेपी प्रदेश मीडिया सह प्रभारी अनुराग अग्रवाल ने कांग्रेस की न्याय पदयात्रा में कांग्रेस के तीनों राज्यसभा सांसदों की गैर-मौजूदगी पर कहा कि, एक ओर जहां कांग्रेस के नेता अपनी तथाकथित पदयात्रा के फ्लॉप होने से हताश होकर अब अपने प्रदेश प्रभारी और अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बुलाने के लिए मजबूर हो रहे हैं। वहीं दूसरी ओर अपने राज्यसभा सांसदों के गैर-हाजिर होने पर एक शब्द तक नहीं बोल पा रहे हैं।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज को इस सवाल का जवाब देना चाहिए कि उनकी न्याय पदयात्रा में आखिर कांग्रेस शासन में कांग्रेस से चुनकर भेजे गए तीनों राज्यसभा सांसद रंजीता रंजन, राजीव शुक्ला और के.टी.एस. तुलसी शामिल क्यों नहीं हुए ? क्या ये तीनों सांसद इसे न्याय यात्रा नहीं मानते? या वे यह अच्छी तरह जानते हैं कि यह कांग्रेस की सिर्फ राजनीतिक जमीन तलाशने का स्टंट मात्र है।

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कोरबा

रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े गए सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा निलंबित

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कोरबा। कार्यालय उप पुलिस अधीक्षक, एंटी करप्शन ब्यूरो (एसीबी), बिलासपुर से प्राप्त जानकारी के अनुसार एसीबी/ईओडब्ल्यू इकाई बिलासपुर द्वारा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित अधिनियम 2018) के अंतर्गत दर्ज अपराध क्रमांक 0/2026 की कार्रवाई में कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा में पदस्थ सहायक ग्रेड-02 प्रदीप मिश्रा को 29 मई 2026 को प्रार्थी अमृत बघेल से 40,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया गया।

एसीबी की कार्रवाई के बाद आरोपी मिश्रा को गिरफ्तार कर न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया गया है। प्रकरण को गंभीरता से लेते हुए जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा द्वारा यह माना गया कि उनका यह कृत्य छत्तीसगढ़ सिविल सेवा (आचरण) नियम, 1965 के प्रावधानों के विपरीत है।
फलस्वरूप, प्रदीप मिश्रा, सहायक ग्रेड-02, कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, पोड़ी उपरोड़ा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उनका मुख्यालय कार्यालय विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, कटघोरा निर्धारित किया गया है। उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता प्रदान किया जाएगा।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शासकीय कार्यों में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के प्रति शून्य सहिष्णुता की नीति अपनाई जा रही है तथा ऐसे मामलों में नियमानुसार कठोर कार्रवाई जारी रहेगी।

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कोरबा

अगले तीन घंटे में तूफानी बारिश के आसार

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कोरबा। मौसम विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार अगले तीन घंटों में कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के रायगढ़, सक्ती और सरगुजा के कुछ इलाकों में तूफानी बारिश के आसार हैं। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश एवं बिजली गिरने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है।

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कोरबा

संस्कृत विषय बचाओ अभियान: घोषणा को अमल में लाने संस्कृत शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को सौंपा ज्ञापन

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कोरबा। प्रदेश अध्यक्ष दौलत राम साहू के नेतृत्व में संघ के पदाधिकारी नोयन कुमार बुडेक, मनोज कुमार वर्मा, डॉ नारायण प्रसाद, गंगाराम साहू, हेमंत कुमार हिरवानी, दुर्गेश कुमार साहू, कुलेश्वर प्रसाद, दिनेश मंडावी, सुनील महार, ईश्वरी यदु कामिनी पिल्लई, रेणुका लदेर, शारदा साहू, सुरेखा सेन, सोमप्रभा साहू सहित प्रदेश के पांच शिक्षा संभाग के शिक्षक एवं शिक्षिकाएं भारतीय संविधान में आठवीं अनुसूची की भाषा एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की भावना के अनुरूप संस्कृत विषय के संवर्धन एवं संरक्षण हेतु उल्लेख किया गया है को ध्यान में रखते हुए गजेंद्र यादव शिक्षा मंत्री द्वारा 30 अप्रैल को विधानसभा से घोषणा किया गया कि संस्कृत भाषा को अनिवार्य कर रहे हैं, जिनका लघु चलचित्र सोशल मीडिया पर बहुत प्रसारित हैं।

इसे देख सुनकर प्रदेश भर के संस्कृत शिक्षकों में शासन की सौहार्द्रपूर्ण निर्णय से हर्ष की लहर है। संस्कृत भारतीय ज्ञान परंपरा, सभ्यता और संस्कार परक एक राष्ट्रभाषा है, जिनमें सनातन संस्कृति पूर्ण रूप से समाहित है। संघ के पदाधिकारियों द्वारा 10 मई एवं 26 मई 2026 को नवा रायपुर स्थित एम -14 आवास में शिक्षा मंत्री से मुलाकात कर घोषणा के धरातल पर क्रियान्वयन के लिए शीघ्र अति शीघ्र शासकीय आदेश जारी करवाने हेतु मांग पत्र सौपा, जिससे शिक्षक आश्वस्त हो जावे तथा मंत्री द्वारा संस्कृत विषय को अनिवार्य करने विभागीय अधिकारी को निर्देश दिए यह शिक्षकों के लिए बहुत बड़ा पुरस्कार है, किन्तु आज पर्यन्त कोई कार्यवाही नहीं हुई है। पदाधिकारियों ने आगे बताया कि इस पावन कार्य के लिए निरंतर प्रदेश के जिला शिक्षा अधिकारी, जिला कलेक्टर, विधायकगण, वित्त मंत्री, उच्च शिक्षा मंत्री, विधानसभा अध्यक्ष डॉक्टर रमन सिंह, उपमुख्यमंत्री अरूण साव, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय , राज्यपाल रमेन डेका , संचालक लोक शिक्षण संचालनालय, मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन, सचिव स्कूल शिक्षा विभाग, संचालक राज्य शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद, सचिव छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल, सचिव सहायक संचालक छत्तीसगढ़ संस्कृत विद्या मण्डलम्, प्रदेश संयोजक व अध्यक्ष अधिकारी कर्मचारी फेड़रेशन कमल वर्मा, सांसद बृजमोहन अग्रवाल, डॉ अतुल कोठारी राष्ट्रीय सचिव शिक्षा संस्कृति उत्थान न्यास नई दिल्ली, आयुक्त राज्य परियोजना कार्यालय समग्र शिक्षा सहित 50 से भी अधिक आवेदन बारंबार संस्कृत विषय को पूर्व की भांति अनिवार्य करने तथा नवीन व्यावसायिक शिक्षा को सातवें विषय के रूप में रखने के लिए मांग पत्र ज्ञापन सौपा गया था। 25 अगस्त 2025 को शिक्षा मंत्री की समीक्षा बैठक में एससीईआरटी रायपुर को कक्षा छठवीं से लेकर कक्षा दसवीं का संस्कृत विषय को अनिवार्य करने निर्देशित भी किया गया था। इसी क्रम में 07 सितंबर 2025 को सरयू पारिण भवन मठपुरेना में आयोजित विराट संस्कृत विद्वत सम्मेलन में उपस्थित मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और विधानसभा अध्यक्ष डॉ रमन सिंह को भी मांग पत्र सौपा गया था। वहां पर अध्यक्ष ने अपने उद्बोधन में कहा कि संस्कृत संकल्प का विषय है विकल्प का नहीं। संस्कृत भाषा के साथ अन्याय नहीं होगा। एक तरफ पूरा विश्व संस्कृत भाषा के महत्व को अपना रहा है। अपने देश के विद्यालय, महाविद्यालय एवं विश्वविद्यालयों में संस्कृत भाषा को अनिवार्य शिक्षा कर रहे हैं तथा अनुच्छेद 351 आठवीं अनुसूची की भाषाओं के सम्मान के लिए बनाया गया है।

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