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कोरबा

बिजली दरों में बेतहाशा वृद्धि और बदहाल व्यवस्था के खिलाफ कांग्रेस का हल्लाबोल

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प्रदेश की जनता, मीडिया प्रतिनिधियों और बिजली उपभोक्ताओं का ध्यान भाजपा सरकार द्वारा बिजली दरों में की गई अनुचित वृद्धि की ओर आकर्षित करना
कोरबा। यह केवल राजनीतिक मुद्दा नहीं: कांग्रेस स्पष्ट करती है कि यह निर्णय पूरी तरह से जनविरोधी, किसान-विरोधी और मध्यम वर्ग-विरोधी है। यह सिर्फ बिजली बिल का मुद्दा नहीं, बल्कि आम नागरिक की आर्थिक स्थिति से जुड़ा गंभीर विषय है।

बिजली दर वृद्धि पर मुख्य आरोप
भाजपा सरकार ने एक बार फिर घरेलू एवं व्यावसायिक बिजली दरों में वृद्धि कर जनता पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाल दिया है।
नई दरें 1 जुलाई से लागू होंगी, जिसका सीधा असर जुलाई के बिजली बिलों में दिखाई देगा।
महंगाई से जूझ रहे परिवारों के लिए यह निर्णय अत्यंत कष्टदायक साबित होगा। सरकार जनता की आय बढ़ाने में तो विफल रही है, लेकिन लगातार खर्च बढ़ा रही है।
कांग्रेस सरकार और भाजपा सरकार की तुलना
कांग्रेस सरकार ने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में 200 यूनिट तक मुफ्त बिजली** की योजना लागू की थी, जिससे लाखों परिवारों को सीधी राहत मिली थी।
भाजपा सरकार ने आते ही इस लाभ को सीमित कर दिया है। आज केवल सीमित संख्या में उपभोक्ताओं को ही छूट का लाभ मिल पा रहा है। भाजपा सरकार जनता को राहत देने के बजाय सुविधाएं कम करने में लगी है।
महंगाई और बिजली दर वृद्धि का सीधा संबंध
पहले ही गैस सिलेंडर, पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भारी वृद्धि हो चुकी है।
परिवहन लागत बढ़ने से आवश्यक वस्तुओं के दाम पहले ही आसमान छू रहे हैं।
अब बिजली दरों में वृद्धि से उद्योग, व्यापार और सेवा क्षेत्र की लागत बढ़ेगी, जिसका सीधा असर दूध, सब्जी, किराना, छोटे उद्योग, होटल और दुकान जैसी अन्य सेवाओं पर पड़ेगा। अंततः आम जनता को हर छोटी-बड़ी चीज़ महंगी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
कोरबा एवं प्रदेश की बिजली व्यवस्था पर सवाल
ऊर्जाधानी में बिजली कटौती: कोरबा को ‘ऊर्जा राजधानी’ कहा जाता है, फिर भी यहाँ के लोग अघोषित बिजली कटौती झेल रहे हैं।
वोल्टेज की समस्या: ग्रामीण एवं शहरी दोनों क्षेत्रों में लो-वोल्टेज और हाई-वोल्टेज की गंभीर समस्या बनी हुई है।
खराब ट्रांसफार्मर: कई स्थानों पर ट्रांसफार्मर खराब होने पर कई-कई दिनों तक बिजली आपूर्ति पूरी तरह बाधित रहती है।
अधिक शुल्क, खराब सेवा: उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण बिजली नहीं मिल रही, फिर भी उनसे अधिक शुल्क वसूला जा रहा है।
कांग्रेस का सवाल: जब सेवा में कोई सुधार नहीं हुआ, तो इस दर वृद्धि का औचित्य क्या है?
महतारी वंदन योजना पर राजनीतिक हमला
एक हाथ से देना, दूसरे से लेना: भाजपा सरकार एक ओर महिलाओं को ₹1000 प्रति माह देने का जोर-शोर से प्रचार करती है। दूसरी ओर बिजली, गैस, डीजल और पेट्रोल की कीमतों में वृद्धि कर परिवारों पर उससे कहीं ज्यादा आर्थिक बोझ डाल रही है।
सरकार जवाब दे: सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि जनता को दी गई राहत से अधिक राशि महंगाई के माध्यम से वापस क्यों वसूली जा रही है?
जनता के हक में सरकार से सीधे प्रश्न

  1. बिजली दर वृद्धि की आवश्यकता आखिर क्यों पड़ी?
  2. बिजली उत्पादन करने वाले स्वयं के राज्य में बिजली इतनी महंगी क्यों हो रही है?
  3. उपभोक्ताओं को बेहतर और निर्बाध सेवा कब मिलेगी?
  4. बिजली कटौती और वोल्टेज की समस्याओं का स्थायी समाधान कब होगा?
  5. गरीब, किसान और मध्यम वर्ग को राहत देने के लिए सरकार की क्या योजना है?
    कांग्रेस की प्रमुख मांगें
    0 वृद्धि वापस हो: बिजली दरों में की गई वृद्धि को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए।
    0 विशेष सब्सिडी: घरेलू उपभोक्ताओं को बड़ी राहत देने के लिए विशेष सब्सिडी दी जाए।
    0 किसानों को राहत: किसानों के लिए सस्ती एवं निर्बाध बिजली सुनिश्चित की जाए।
    0 कटौती पर रोक: अघोषित बिजली कटौती पर तुरंत रोक लगाई जाए।
    0 लो-वोल्टेज और हाई-वोल्टेज की समस्या के समाधान के लिए प्रदेश स्तर पर विशेष अभियान चलाया जाए।
    0 बिजली वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए एक समयबद्ध कार्ययोजना (Timeline) जारी की जाए।
    जनता के पक्ष में कांग्रेस का संकल्प संदेश
    0 कांग्रेस जनता के हितों की लड़ाई सड़क से लेकर सदन तक लड़ेगी।
    0 बिजली दर वृद्धि के खिलाफ कांग्रेस का यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि सीधे उपभोक्ताओं और आम जनता के हित में है।
    0 इस अनुचित वृद्धि से प्रदेश का हर वर्ग—किसान, मजदूर, कर्मचारी, व्यापारी, गृहिणी, युवा और वरिष्ठ नागरिक समेत हर वर्ग वृद्धि से प्रभावित होगा। कांग्रेस जनता की मजबूत आवाज़ बनकर इस मुद्दे को उठाती रहेगी।
    0 जब तक बिजली दर वृद्धि का निर्णय वापस नहीं लिया जाता, कांग्रेस का संघर्ष जारी रहेगा। हम सरकार से आग्रह नहीं, बल्कि जनता की ओर से जवाब मांग रहे हैं।

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कोरबा प्रेस क्लब ने कलेक्टर और एसपी को सौंपा ज्ञापन: डिजिटल पत्रकारिता की आड़ में अवैध वसूली और भयादोहन पर प्रभावी कार्यवाही की मांग

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कोरबा। कोरबा प्रेस क्लब द्वारा डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया प्लेटफार्म की आड़ में हो रही कथित अनियमितताओं, आपराधिक गतिविधियों, व्यक्तिगत प्रताड़ना, भयादोहन (ब्लैकमेलिंग) और अवैध वसूली पर रोक लगाने के संबंध में एक कड़ा रुख अपनाया गया है। इस संबंध में कोरबा प्रेस क्लब के पदाधिकारियों द्वारा आज कलेक्टर कुणाल दुदावत और पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी को ज्ञापन सौंपा गया। इस दौरान कोरबा प्रेस क्लब के अध्यक्ष नौशाद खान, संरक्षक कमलेश यादव, उपाध्यक्ष राजकुमार शाह, सचिव दिनेश राज, उप सचिव हरीश तिवारी, कार्यकारिणी सदस्य नवाब हुसैन, राजेश मिश्रा (मिठ्ठू) सहित सम्माननीय सदस्य प्रमुख रूप से उपस्थित रहे।

ज्ञापन के माध्यम से प्रेस क्लब ने कलेक्टर एवं पुलिस अधीक्षक को जानकारी दी है कि वर्तमान में इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर स्वयं को पत्रकार या समाचार पोर्टल संचालक बताने वाले कुछ तथाकथित लोगों की गतिविधियां चिंता का विषय बन गई हैं। आम नागरिकों, व्यापारियों, जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को डरा-धमकाकर विज्ञापन या अन्य माध्यमों से अवैध वसूली करने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
प्रेस क्लब ने विशेष रूप से यह चिंता जताई है कि कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग भी पोर्टल शुरू कर पत्रकारिता की आड़ में अपनी गतिविधियां चला रहे हैं। कुछ मामलों में ऐसे लोगों के खिलाफ थानों में आपराधिक प्रकरण दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। ऐसी प्रवृत्तियों से न केवल आम नागरिक और कारोबारी वर्ग प्रभावित हो रहा है, बल्कि जिम्मेदारी से कार्य कर रहे वास्तविक पत्रकारों की साख पर भी आंच आ रही है।

कोरबा प्रेस क्लब द्वारा प्रस्तुत प्रमुख मांगें और सुझाव
भयादोहन पर कार्रवाई: किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध समाचार प्रसारित करने की धमकी देकर विज्ञापन या आर्थिक लाभ मांगने की शिकायतों को गंभीरता से लिया जाए तथा शिकायतकर्ताओं के लिए सुरक्षित और पारदर्शी व्यवस्था बनाई जाए।
प्रेस लिखे वाहनों की जांच: जिले में दोपहिया एवं चारपहिया वाहनों पर ‘प्रेस’ लिखकर घूमने वाले व्यक्तियों और उनके वाहनों की जांच कराई जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इनका उपयोग वास्तविक पत्रकारिता के लिए हो रहा है या इसकी आड़ में अनावश्यक दबाव बनाने का प्रयास किया जा रहा है।
फर्जी आईडी की जांच: कुछ संस्थाओं द्वारा निजी संबंधों या लाभ के उद्देश्य से फर्जी आईडी जारी किए जाने की आशंका की जांच की जाए और गलत दस्तावेज का उपयोग करने वालों पर कार्रवाई हो।
भ्रामक एवं एकपक्षीय सामग्री पर कानूनी कार्रवाई: सोशल मीडिया पर तथ्यों को तोड़-मरोड़कर भ्रामक सूचना फैलाने या किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने के मामलों में नियमानुसार कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वास्तविक पत्रकारों के अधिकारों की सुरक्षा: किसी भी नियामक व्यवस्था को लागू करते समय वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों और समाचार संस्थानों के अधिकारों का संरक्षण किया जाए, तथा कार्रवाई का आधार किसी की आलोचनात्मक खबर के प्रति असहमति न होकर प्रमाणित गैरकानूनी गतिविधि होनी चाहिए।
कोरबा प्रेस क्लब ने मांग की है कि इन विषयों को गंभीरता से लेते हुए राज्य स्तर पर संबंधित विभागों, पुलिस प्रशासन और सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के बीच समन्वय स्थापित कर एक प्रभावी तंत्र विकसित किया जाए।

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धान खरीदी की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित

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जिला एवं तहसील स्तर पर जांच दल गठित, शिकायत और सुझाव के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

कोरबा 06 नवंबर 2026। खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी को पारदर्शी एवं सुव्यवस्थित बनाने तथा खरीदी केंद्रों में अवैध धान की आवक और धान के पुनर्चक्रण पर निगरानी रखने के लिए जिला प्रशासन ने इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। कलेक्टर कुणाल दुदावत द्वारा 4 नवंबर 2026 को जारी आदेश के अनुसार जिला एवं तहसील स्तर पर जांच समितियों और उड़नदस्ता दलों का गठन किया गया है।
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का नोडल अधिकारी अपर कलेक्टर कटघोरा ओंकार यादव मो.नं. 9826915486 को बनाया गया है। सेंटर में सहायक प्रोग्रामर शिवानंद राठौर (नागरिक आपूर्ति निगम, कोरबा), मो.नं. 7999714099 श्रीमती प्राची चंद्रा मो.नं. 7999406910 और श्रीमती रेचल प्रधान (खाद्य शाखा, कोरबा) मो.नं. 9098679001 तथा दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी पूर्णेन्द कमलसेन (जिला विपणन कार्यालय से खाद्य शाखा में संलग्न), रजनीश शुक्ला और श्रीमती अनीता लहरे (जिला विपणन कार्यालय) की ड्यूटी लगाई गई है।
केंद्रों में धान खरीदी की निगरानी और निरीक्षण के लिए गठित दलों से प्राप्त रिपोर्ट कलेक्टर को भेजी जाएगी। धान खरीदी से संबंधित शिकायत या सुझाव नियंत्रण कक्ष के मोबाइल नंबर 9691901259 पर दर्ज कराए जा सकते हैं। प्राप्त शिकायतों और सुझावों की जानकारी खाद्य शाखा को भेजी जाएगी, ताकि आवश्यक कार्रवाई की जा सके।

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जागृति भू-विस्थापित कामगर सहकारी समिति कोहड़िया के सदस्यों का मतदाता सूची जारी

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दावा- आपत्ति 11 नवम्बर  तक आमंत्रित
कोरबा 06 नवंबर 2026। जागृति भू-विस्थापित कामगर सहकारी समिति मर्यादित कोहड़िया पंजीयन क्रमांक 103 के सदस्यों का मतदाता सूची का प्रकाशन सोसायटी कार्यालय कोहड़िया, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं कोरबा, विकासखंड कार्यालय कोरबा, वित्तदायी बैंक जिला सहकारी केन्द्रीय बैंक शाखा कोरबा के सूचना पटल पर  03 नवंबर 2026 को किया गया है। मतदाता सूची के सम्बंध में सदस्यों से दावा आपत्ति 11 नवम्बर 2026 तक आमंत्रित किया गया है।
रजिस्ट्रीकरण अधिकारी भूपेन्द्र कुमार साहू ने बताया कि दावा- आपत्ति लिखित में मय प्रमाण के साथ सोसायटी के सदस्य राजकुमार पटेल या कार्यालय उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं कोरबा में रजिस्ट्रीकरण अधिकारी के समक्ष  11 नवम्बर 2026 तक कार्यालयीन समय पर सप्रमाण प्रस्तुत किया जा सकता है। दावा- आपत्तियों का निराकरण 12 नवम्बर को 12 बजे से किया जायेगा। निराकरण उपरांत अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाएगा।

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