विदेश
अमेरिका द्वारा जब्त ईरानी जहाज का चीन से कनेक्शन, ‘Touska’ का गुप्त मिशन बेनकाब
वाशिंगठन/बीजिंग, एजेंसी। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई रिपोर्ट ने बड़ा खुलासा किया है। ओमान की खाड़ी में अमेरिकी सेना द्वारा जब्त किए गए ईरानी मालवाहक जहाज M/V Touska को लेकर अब चीन कनेक्शन सामने आया है, जिससे इस पूरे मामले की गंभीरता और बढ़ गई है। सरल शब्दों में समझें तो यह जहाज ईरान के एक ऐसे नेटवर्क का हिस्सा बताया जा रहा है, जो चीन के बंदरगाहों से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक यह जहाज हाल ही में चीन के झुहाई पोर्ट पर दो बार गया था और इसके जरिए ऐसे सामान ले जाए जाने की आशंका है, जो नागरिक और सैन्य दोनों तरह के उपयोग में आ सकता है।

अमेरिकी अधिकारियों ने इस जहाज को उस समय रोका जब यह अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को पार करने की कोशिश कर रहा था। चेतावनी के बाद भी न रुकने पर अमेरिकी बलों ने फायरिंग कर जहाज के इंजन को निष्क्रिय किया और फिर उस पर कब्जा कर लिया। हालांकि अभी तक यह साफ नहीं किया गया है कि जहाज में क्या सामान था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह “डुअल-यूज़” यानी संवेदनशील सामग्री हो सकती है। रिपोर्ट यह भी बताती है कि यह जहाज मलेशिया के पोर्ट क्लांग और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई रास्तों से होकर आया था। ऐसे रूट्स का इस्तेमाल अक्सर माल के असली स्रोत को छिपाने के लिए किया जाता है। समुद्र में जहाज-से-जहाज ट्रांसफर के जरिए ट्रैकिंग को मुश्किल बना दिया जाता है।
चीन ने इस मामले में साफ कहा है कि वह ईरान को हथियार नहीं देता और उसके पास डुअल-यूज़ सामान के निर्यात पर नियंत्रण है। लेकिन चीन अमेरिकी प्रतिबंधों को नहीं मानता, इसलिए यह विवाद और गहरा हो गया है। बीजिंग ने जहाज जब्त किए जाने पर चिंता जताई है और संयम बरतने की अपील की है। इस घटना ने यह भी दिखा दिया है कि ईरान-यूएस संघर्ष अब सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार और सप्लाई नेटवर्क से भी जुड़ चुका है। खासकर होर्मुज स्ट्रेट जैसे अहम समुद्री रास्ते पर तनाव बढ़ने से दुनिया की तेल सप्लाई और बाजार पर असर पड़ रहा है। कुल मिलाकर, यह मामला सिर्फ एक जहाज की जब्ती नहीं, बल्कि ईरान, अमेरिका और चीन के बीच बढ़ते रणनीतिक टकराव का संकेत है, जो आने वाले समय में और बड़ा रूप ले सकता है।
विदेश
ट्रंप पर हमले के 161 साल पुरानी घटना से जुड़े तार ! खुद बताया क्यों हुआ उन पर अटैक, “ब्लैक अप्रैल” का खोला राज
वाशिंगठन, एजेंसी। डोनाल्ड ट्रंप पर हुए हमले के बाद उन्होंने खुद बताया कि आखिर उन्हें ही बार-बार निशाना क्यों बनाया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि उन्होंने इतिहास में राजनीतिक हत्याओं का अध्ययन किया है और उनका मानना है कि जो नेता सबसे ज्यादा प्रभावशाली होते हैं, वही हमलावरों के निशाने पर आते हैं हमले के बाद जब उनसे पूछा गया कि आप पर ही क्यों हमले किए जा रहे हैं, तो उन्होंने इसके कहा कि इसकी वजह 161 साल पुरानी है । अगर आज का हमला सफल हो जाता तो एक बार फिर अमेरिका में ब्लैक अप्रैल हो जाता। लेकिन सिक्योरिटी की तुरंत सक्रियता ने उनकी जान बचा ली।

व्हाइट हाउस से बयान देते हुए ट्रंप ने कहा कि जब कोई नेता बड़ा असर डालता है, तो वह विरोधियों के लिए बड़ा लक्ष्य बन जाता है। उन्होंने हाल के हमलों पेंसिल्वेनिया, फ्लोरिडा और अब वॉशिंगटन का जिक्र करते हुए कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। ट्रंप ने इस हमले को इतिहास से जोड़ते हुए अब्राहम लिंकन का उदाहरण दिया। उन्होंने बताया कि लिंकन को भी कई बार धमकियां मिली थीं और आखिरकार अप्रैल 1865 में उनकी हत्या कर दी गई थी। ट्रंप ने इशारा किया कि अप्रैल का महीना अमेरिका के इतिहास में खतरनाक घटनाओं से जुड़ा रहा है, जिसे कुछ लोग “ब्लैक अप्रैल” के रूप में देखते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि अगर सुरक्षा एजेंसियां समय पर सक्रिय नहीं होतीं, तो इस बार भी बड़ा हादसा हो सकता था। इस घटना के दौरान US Secret Service ने तुरंत कार्रवाई करते हुए हमलावर को काबू में कर लिया और ट्रंप सहित फर्स्ट लेडी मेलानिया ट्रंप तथा अन्य नेताओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। ट्रंप ने सुरक्षा एजेंसियों की तारीफ करते हुए कहा कि उनकी तेजी और बहादुरी की वजह से एक बड़ा संकट टल गया। उन्होंने कहा कि यह घटनाएं दिखाती हैं कि अमेरिका में शीर्ष नेताओं की सुरक्षा हमेशा एक बड़ी चुनौती रही है।
विदेश
हमले के बाद बदले ट्रंप के सुरः मीडिया की तारीफों के बांधे पुल, बोले- जिम्मेदार कवरेज
वाशिंगठन, एजेंसी। डोनाल्ड ट्रंप ने वॉशिंगटन डीसी में हुई गोलीबारी के बाद मीडिया को लेकर अपना रुख बदलते हुए उनकी खुलकर तारीफ की। उन्होंने कहा कि पत्रकारों ने इस संवेदनशील घटना की जिम्मेदारी के साथ रिपोर्टिंग की, जो सराहनीय है। यह घटना Washington Hilton में व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स डिनर के दौरान हुई, जब अचानक गोली चलने से हड़कंप मच गया। कुछ समय के लिए वहां मौजूद लोग टेबल के नीचे छिप गए और माहौल पूरी तरह तनावपूर्ण हो गया।

घटना के तुरंत बाद ट्रंप ने प्रेस ब्रीफिंग में कहा कि यह कार्यक्रम सिर्फ एक डिनर नहीं, बल्कि अमेरिकी संविधान में दिए गए फ्री स्पीच (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि मीडिया ने जिस तरह से स्थिति को संभाला और रिपोर्ट किया, वह बेहद जिम्मेदार था। ट्रंप ने यह भी घोषणा की कि यह कार्यक्रम रद्द नहीं किया जाएगा, बल्कि अगले 30 दिनों के भीतर फिर से आयोजित किया जाएगा, और इसे पहले से भी बड़ा और बेहतर बनाया जाएगा। उन्होंने व्हाइट हाउस कॉरेस्पॉन्डेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष Weijia Jiang की भी सराहना की।
गौरतलब है कि ट्रंप और मीडिया के रिश्ते अक्सर तनावपूर्ण रहे हैं। कई बार उन्होंने पत्रकारों पर सख्त टिप्पणी की है, लेकिन इस घटना के बाद उनका यह बदला हुआ रुख चर्चा में है। अपने संबोधन में ट्रंप ने देशवासियों से अपील की कि वे राजनीतिक मतभेदों को शांति और संवाद के जरिए सुलझाएं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में अलग-अलग विचारधाराओं के लोग मौजूद थे, लेकिन संकट के समय सभी एकजुट नजर आए।
विदेश
पाकिस्तान के इंतजाम रह गए धरे: अमेरिका-ईरान वार्ता खटाई में ! इस्लामाबाद से बेरंग लौटे ईरान के विदेश मंत्री
इस्लामाबाद,एजेंसी। ईरान के शीर्ष राजनयिक के पाकिस्तान से प्रस्थान करने और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूतों के इस्लामाबाद नहीं पहुंचने के बाद अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम वार्ता के प्रयास विफल हो गए। अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिया कि अब गेंद ईरान के पाले में है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा, “यदि वे बात करना चाहते हैं, तो उन्हें बस कॉल करने की जरूरत है!!!” ये वार्ता इस महीने की शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच ऐतिहासिक वार्ता के बाद होने वाली थीं, जिसमें अमेरिकी पक्ष का नेतृत्व उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस और ईरान का नेतृत्व संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर गालीबाफ कर रहे थे।

हांलांकि ईरानी अधिकारियों ने कहा कि अमेरिकी सेनाओं ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी शुरू कर दी है, ऐसे में अमेरिका पर कैसे विश्वास किया जा सकता है। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची शनिवार शाम पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद से प्रस्थान कर गए। पाकिस्तान के दो अधिकारियों ने एसोसिएटेड प्रेस (एपी) को यह जानकारी दी। अराघची होर्मुज जलडमरूमध्य के दूसरी ओर स्थित देश ओमान गए हैं, जो पूर्व में शांति वार्ता में मध्यस्थ रह चुका है। ईरान की सराकरी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार अराघची ने कहा कि वह रविवार को पाकिस्तान लौटेंगे और फिर रूस के लिए रवाना होंगे।
दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूतों स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर को पाकिस्तान जाने से रोक दिया, जिसकी वजह से वे इस्लामाबाद नहीं पहुंच सके। अराघची ने पाकिस्तान में हुई बातचीत के बारे में सोशल मीडिया पर कहा, “हमने ईरान के खिलाफ जारी युद्ध को स्थायी रूप से खत्म करने के लिए एक व्यावहारिक ढांचे पर अपना रुख साझा किया। अब यह देखना है कि क्या अमेरिका वास्तव में कूटनीति को लेकर गंभीर है।”
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