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छत्तीसगढ़

5 डे-वर्किंग की मांग…25000 बैंककर्मियों की हड़ताल:छत्तीसगढ़ में 2500 बैंक शाखाओं में लटके ताले, बैंकिंग सेवाएं ठप, खाताधारक बोले- 4 दिन से परेशान हैं

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रायपुर,एजेंसी। 5 डे वर्किंग की मांग को लेकर देशभर समेत छत्तीसगढ़ में भी करीब 2500 सरकारी बैंक के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। बैंकों में ताले लटके हुए हैं। बैंक कर्मचारी रायपुर के मोतीबाग के पास प्रदर्शन कर रहे हैं। इससे पहले शनिवार, रविवार और सोमवार को छुट्टी थी। ऐसे में बैंक से जुड़े काम नहीं हो पाएंगे।

दरअसल, यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सप्ताह में 5 दिन काम प्रणाली को तुरंत लागू करने की एक सूत्रीय मांग को लेकर 27 जनवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया है। इसका असर छत्तीसगढ़ में भी साफ तौर पर दिख रहा है। इससे आम लोगों को परेशानी बढ़ गई है। हालांकि, प्राइवेट बैंक खुले हुए हैं।

हड़ताल से जुड़ी ये तस्वीरें देखिए…

बैंक कर्मचारियों की मांग 5 डे वर्किंग हो। बैंक कर्मचारी हड़ताल में हैं।

बैंक कर्मचारियों की मांग 5 डे वर्किंग हो। बैंक कर्मचारी हड़ताल में हैं।

बैंक कर्मचारी रायपुर के मोतीबाग के पास प्रदर्शन कर रहे हैं।

बैंक कर्मचारी रायपुर के मोतीबाग के पास प्रदर्शन कर रहे हैं।

सड़क पर उतरे करीब 25 हजार बैंक अधिकारी-कर्मचारी।

सड़क पर उतरे करीब 25 हजार बैंक अधिकारी-कर्मचारी।

रायपुर समेत प्रदेशभर में सरकारी बैंक बंद

हड़ताल के चलते रायपुर सहित प्रदेशभर में करीब 2500 बैंक शाखाएं प्रभावित हैं। इसमें करीब 25 हजार बैंक अधिकारी और कर्मचारी शामिल हैं। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, पंजाब नेशनल बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन ओवरसीज बैंक समेत 12 सार्वजनिक बैंकों की सेवाएं प्रभावित रहेंगी।

हालांकि, इस हड़ताल का असर निजी बैंकों पर नहीं पड़ेगा। HDFC, ICICI, Axis, Kotak Mahindra, IndusInd, Yes Bank, IDFC और Bandhan Bank सामान्य रूप से खुले रहेंगे। यहां बैंकिंग सेवाएं जारी हैं।

लगातार चौथे दिन बैंकिंग सेवाएं ठप

बता दें कि, पिछले 4 दिनों से लगातार बैंकिंग सेवाएं बाधित हैं। 24 जनवरी को दूसरा शनिवार, 25 जनवरी को रविवार और 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस के कारण बैंक पहले ही बंद थे। अब 27 जनवरी को हड़ताल के चलते ग्राहकों को कैश लेन-देन, चेक क्लियरेंस और अन्य बैंकिंग काम में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

अधिकांश सरकारी बैंकों ने हड़ताल को लेकर अपने ग्राहकों को पहले ही अलर्ट जारी कर दिया था। वैकल्पिक माध्यमों जैसे नेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग और ATM का उपयोग करने की सलाह दी थी।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सप्ताह में 5 डे वर्किंग की मांग की है।

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) ने सप्ताह में 5 डे वर्किंग की मांग की है।

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कोरबा

प्रतिभा, अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास का उत्सव ‘एसईसीएल नारी राग-रंग महोत्सव 2026’ का भव्य शुभारंभ

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“नारी राग-रंग महोत्सव महिलाओं के भीतर छिपी प्रतिभाओं को निखारने और उन्हें नई पहचान दिलाने का सशक्त मंच है” — श्रीमती शशि दुहन

बिलासपुर/कोरबा। एसईसीएल श्रद्धा महिला मंडल तत्वावधान में आयोजित “नारी राग-रंग महोत्सव 2026” का आज एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर में उत्साह एवं गरिमामय वातावरण के बीच शुभारंभ हुआ। महिलाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता, अभिव्यक्ति एवं आत्मविश्वास को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से आयोजित इस दो दिवसीय महोत्सव में बड़ी संख्या में महिला प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

कार्यक्रम का शुभारंभ श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा श्रीमती शशि दुहन एवं उपाध्यक्षागण श्रीमती अनीता फ्रैंकलिन, श्रीमती इप्सिता दास, श्रीमती हसीना कुमार तथा श्रीमती शुभश्री महापात्र द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया। इस अवसर पर श्रद्धा महिला मंडल की कार्यकारिणी सदस्याएँ, कर्मचारीगण एवं उनके परिजन भी उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में श्रीमती शशि दुहन ने कहा कि “नारी राग-रंग महोत्सव महिलाओं को अपनी प्रतिभा और सृजनात्मकता प्रदर्शित करने का सशक्त मंच प्रदान करने की पहल है। ऐसे आयोजन महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ उन्हें नई प्रेरणा एवं सीख प्राप्त करने का अवसर भी देते हैं।”

महोत्सव के प्रथम दिवस पर गीत गायन, एकल नृत्य, मोनो एक्ट, चित्रकला, रंगोली, मेहंदी एवं वेस्ट मटेरियल आर्ट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। प्रतिभागियों ने अपनी कलात्मक अभिव्यक्ति, मंचीय कौशल एवं रचनात्मकता का उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए दर्शकों का मन मोह लिया।

गीत गायन एवं एकल नृत्य प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों ने प्रभावशाली प्रस्तुतियाँ दीं, वहीं मोनो एक्ट प्रतियोगिता में अभिनय एवं अभिव्यक्ति कौशल का प्रभावशाली प्रदर्शन देखने को मिला। चित्रकला, रंगोली एवं मेहंदी प्रतियोगिताओं में प्रतिभागियों की सृजनात्मकता के विविध रंग उभरकर सामने आए। वेस्ट मटेरियल आर्ट प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने अनुपयोगी सामग्रियों से आकर्षक एवं उपयोगी कलाकृतियाँ तैयार कर पर्यावरण संरक्षण एवं संसाधनों के पुनः उपयोग का संदेश दिया।

विभिन्न प्रतियोगिताओं के निष्पक्ष एवं गुणवत्तापूर्ण मूल्यांकन हेतु संगीत, नृत्य एवं ललित कला क्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों को निर्णायक के रूप में आमंत्रित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान श्रद्धा महिला मंडल की अध्यक्षा एवं उपाध्यक्षों द्वारा सभी निर्णायकों का सम्मान भी किया गया।

महोत्सव का द्वितीय एवं अंतिम दिवस 13 जून 2026 को आयोजित होगा, जिसमें समूह गायन, समूह नृत्य, स्टैंड-अप कॉमेडी/मिमिक्री तथा नाटक/स्किट प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। समापन समारोह में विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को सम्मानित एवं पुरस्कृत किया जाएगा।

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कोरबा

ऐतिहासिक ठेका मजदूर महासभा में भारी संख्या में श्रमिक हुए शामिल, पारित हुए तीन बड़े प्रस्ताव और कुसमुंडा घोषणा-पत्र

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RCWF के प्रो. भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर एकजुट हुए कोयला मजदूर, अधिकारों के लिए फूंक डाला बिगुल

जून से अगस्त तक चलेगा डेटा संग्रह अभियान, सीएमडी बिलासपुर हेडक्वार्टर का होगा महा-घेराव

OSHWC कोड 2020 की धारा 57 को लागू करने और ठेका श्रमिकों को नियमित करने की उठी पुरजोर मांग

कोरबा/कुसमुंडा। राष्ट्रीय कॉलरी वर्कर्स फेडरेशन (RCWF) के वरिष्ठ नेता प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे के आह्वान पर गत शुक्रवार 12 जून 2026 को कुसमुंडा के महतारी अंगना (कबीर चौक) में ठेका मजदूर महासभा का ऐतिहासिक आयोजन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ इस। महासभा में एसईसीएल (SECL) और विभिन्न कोयला खदानों में कार्यरत भारी संख्या में ठेका श्रमिकों, मजदूर प्रतिनिधियों और श्रमिक संगठनों ने हिस्सा लेकर अपनी एकजुटता का शंखनाद किया ।

महासभा के मंच पर प्रमुख अतिथि के रूप में प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे, मोहम्मद नासिर खान, भावेन्द्र तिवारी, UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप, CKS (गैर-राजनीतिक संगठन) के अतुल दास महंत, उमा, गोपाल गोंडवाना पार्टी से गणेश सिंह ऊईके और प्रखर समाजसेवी नेत्री अनुसुईया राठौर सहित कई श्रमिक नेता उपस्थित रहे ।

मजदूरों की रीढ़ पर टिका है कोयला उद्योग- श्रमिक नेता

मंच पर उपस्थित अतिथियों ने अपने संबोधन में ठेका मजदूरों की दयनीय स्थिति पर गहरा प्रकाश डाला। वक्ताओं ने कहा कि कोयला खदानों की मुख्य और अनिवार्य गतिविधियों (Core Activities) जैसे ड्रिलिंग, ब्लास्टिंग, डम्पर संचालन, रूफ बोल्टिंग और कोयला उत्खनन में रात-दिन खटने वाले ठेका मजदूर ही इस उद्योग की असली रीढ़ हैं। नेताओं ने आह्वान किया कि अब वक्त आ गया है, जब सभी मजदूरों को एक मंच पर आकर अपने अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष को और तेज करना होगा ।

महासभा में सर्वसम्मति से पारित हुए तीन ऐतिहासिक प्रस्ताव

प्रस्ताव क्रमांक 1 नियमितीकरण और धारा 57 का क्रियान्वयन:- ओ.एस.एच.डब्ल्यू. कोड, 2020 की धारा 57 का हवाला देते हुए मांग की गई कि खदानों के कोर कार्यों में ठेका प्रथा पूरी तरह बंद हो। दशकों से MDO और EPC मॉडल के तहत काम कर रहे ठेका श्रमिकों को चरणबद्ध तरीके से SECL/प्रधान नियोक्ता के नियमित कर्मचारी का दर्जा दिया जाए ।

प्रस्ताव क्रमांक 2 श्रम कानूनों में विधिक संशोधन की मांग:- कॉन्ट्रैक्ट लेबर एक्ट 1970 के नियम 25(2)(v)(a) के तहत समान कार्य के लिए समान वेतन और ठेका प्रथा के उन्मूलन के जो प्रावधान थे, उन्हें नए OSHW Code 2020 में भी शामिल करने हेतु केंद्र सरकार से आवश्यक संशोधन की मांग की गई ।

प्रस्ताव क्रमांक 3 NCWA-IV की कण्डिका 11.5.1 का स्मरण:- एसईसीएल को याद दिलाया गया कि नेशनल कोल वेज एग्रीमेंट के तहत वह स्थायी प्रकृति के कार्यों में ठेका मजदूर न लगाने के लिए बाध्य है, अतः सभी कोर एक्टिविटी वाले श्रमिकों को तत्काल एसईसीएल के रोल (On-Roll) पर समायोजित किया जाए ।

जारी हुआ कुसमुंडा घोषणा-पत्र

महासभा में सर्वसम्मति से ऐतिहासिक कुसमुंडा घोषणा-पत्र जारी किया गया, जिसमें स्थायी कार्य के लिए स्थायी रोजगार और समान कार्य, समान वेतन, समान सम्मान के सिद्धांतों को बुलंद किया गया। घोषणा-पत्र में मांग की गई कि हर ठेका श्रमिक को नियुक्ति पत्र, वेतन पर्ची, रोजगार कार्ड, सामाजिक सुरक्षा, आवास और चिकित्सा सुविधा अनिवार्य रूप से मिलनी चाहिए ।

बिलासपुर सीएमडी मुख्यालय के घेराव का ऐलान

महासभा को संबोधित करते हुए RCWF के प्रोफेसर भागवत प्रसाद दुबे ने एक बड़े आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की उन्होंने बताया कि जून से अगस्त 2026 के बीच खदानों में कार्यरत सभी ठेका मजदूरों का एक विस्तृत डेटा (आंकड़े) इकट्ठा किया जाएगा। इसके पश्चात मजदूरों के हक में एक विशाल मांग पत्र सौंपने के लिए बिलासपुर स्थित एसईसीएल सीएमडी (CMD) हेडक्वार्टर का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा ।

आयोजनकर्ताओं को साधुवाद, संघर्ष रहेगा जारी

इस विशाल कार्यक्रम को जमीन पर सफल बनाने वाले स्थानीय मजदूर नेताओं अशोक पटेल, गोविंदा सारथी, विनोद सारथी, संतोष चौहान, ललित महिलांगे, प्रकाश जयसवाल, महावीर यादव, छाल से अजय सिंह ठाकुर सहित अन्य कर्मठ कार्यकर्ताओं की दिन-रात की मेहनत को मंच द्वारा साधुवाद दिया गया ।

कार्यक्रम के समापन पर UBKKS संगठन के अध्यक्ष सपुरन कुलदीप ने सभी आगंतुक मजदूरों और मंचस्थ अतिथियों का आभार व्यक्त करते हुए कहा मजदूरों के हक की यह तो सिर्फ शुरुआत है, आगे इस लड़ाई को और पैना और तेज करने के लिए हम सबको अपनी कमर कसनी होगी ।

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छत्तीसगढ़

रायपुर : फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल डेका

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फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका
फिल्में समाज को संदेश देने का सशक्त माध्यम- राज्यपाल श्री डेका

रायपुर। फिल्में और डॉक्युमेंट्री केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज को जागरूक करने और सकारात्मक संदेश देने का एक प्रभावी साधन हैं। राज्यपाल रमेन डेका ने आज राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता डॉक्यूमेंट्री फिल्मों के सम्मान समारोह में उक्त बातें कही। यह कार्यक्रम रायपुर के एक निजी होटल में छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम और संस्कृति विभाग के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया गया था।

          राज्यपाल ने कहा कि आदिम युग से ही मनुष्य विभिन्न माध्यमों से अपने विचार और संदेश व्यक्त करता रहा है। समय के साथ नाटक, रेडियो, टेलीविजन और अब डिजिटल माध्यमों ने इस भूमिका को और व्यापक बनाया है। उन्होंने कहा कि पहले सिनेमा का मूल उद्देश्य केवल धन अर्जित करना नहीं था, बल्कि समाज को संदेश देना और जागरूक करना था। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भी भारतीय सिनेमा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

          राज्यपाल ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से बस्तर में नक्सलवाद के विरुद्ध उल्लेखनीय सफलता मिली है। फिल्म निर्माताओं को चाहिए कि अब वे बस्तर की समृद्ध संस्कृति से  देश और दुनिया  को परिचित कराएं। इससे क्षेत्र की सकारात्मक छवि को मजबूती मिलेगी।

          राज्यपाल ने सद्गति, चरणदास चोर और देवदास जैसी फिल्मों और नाटकों का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन और जागरूकता लाने वाली फिल्मों की आज भी उतनी ही आवश्यकता है। राज्यपाल ने कहा की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और पर्व-त्योहारों जैसे हमारे धरोहर को स्थायी रूप से संरक्षित करने का महत्वपूर्ण माध्यम डॉक्यूमेंट्री फिल्में हैं। उन्होंने कलाकारों से लोककला, लोकगीत, जनजातीय परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। 

          राज्यपाल ने कहा कि मोबाइल की बढ़ती लत आज गंभीर सामाजिक समस्या बनती जा रही है। बच्चे खेल के मैदानों से दूर हो रहे हैं और उनकी रचनात्मकता प्रभावित हो रही है। उन्होंने कलाकारों  से आग्रह किया कि वे नई पीढ़ी को कला, संगीत, नाटक और नृत्य जैसी रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ने के लिए आगे आएं। इस अवसर पर राज्यपाल ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पुरस्कार प्राप्त डॉक्युमेंट्री फिल्मों छत्तीसगढ़ के भीम दाऊ चिंताराम, हैप्पी बर्थडे और स्क्रीन के निर्माता-निर्देशकों को सम्मानित किया।

          कार्यक्रम में स्वागत उद्बोधन संस्कृति विभाग के संचालक संजय कन्नौजे ने दिया। छत्तीसगढ़ फिल्म विकास निगम की अध्यक्ष सुश्री मोना सेन ने कार्यक्रम के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। आभार प्रदर्शन प्रसिद्ध फिल्म निर्माता-निर्देशक मनोज वर्मा ने किया। कार्यक्रम में विधायक पुरंदर मिश्रा, विभिन्न डॉक्युमेंट्री फिल्मों के निर्माता-निर्देशक कलाकार एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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