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छत्तीसगढ़

आप सभी पत्रकार साथियों की समस्याओं को ईमानदारी से शासन तक पहुंचाऊंगा- डॉ. महंत

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वरिष्ठ पत्रकार अमित गौतम छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के पुनः प्रदेश अध्यक्ष निर्वाचित

नौ दिसंबर को जांजगीर में यूनियन की आम सभा एवं त्रिवार्षिक चुनाव कार्यक्रम हुआ संपन्न

जांजगीर-चांपा। जिला मुख्यालय जांजगीर के ऑडिटोरियम में नौ दिसंबर 2024 को छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन का राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मेलन एवं त्रिवार्षिक चुनाव व आम सभा का आयोजन किया गया। सम्मेलन का शुभारंभ वीणा वादिनि मां सरस्वती के तैलचित्र पर दीप प्रज्वलन कर एवं माल्यार्पण के साथ हुआ, तत्पश्चात राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मेलन में छत्तीसगढ़ प्रदेश के लगभग 25 जिलों से यूनियन के पदाधिकारी सदस्य पहुंचे तो वहीं इस कार्यक्रम का आयोजन यूनियन की जांजगीर-चांपा जिला इकाई के आतिथ्य में एवं जिला अध्यक्ष राजू शर्मा के मार्गदर्शन में किया गया था ।

सम्मेलन के दौरान मंच पर छग जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम, छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत, जांजगीर-चांपा के विधायक व्यास कश्यप, पामगढ़ की विधायक शेष राज हरबंश, चंद्रपुर के विधायक रामकुमार यादव, छत्तीसगढ़ विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष नारायण चंदेल, जिला भाजपा के उपाध्यक्ष अमर सुल्तानिया, भारत स्काउट गाइड के जिला मुख्य आयुक्त हितेश यादव, भाजपा नेता इंजीनियर रवि पांडेय, नगर पालिका जांजगीर के पूर्व अध्यक्ष रमेश पैंगवार, नगर पालिका जांजगीर के अध्यक्ष भगवान दास गढ़वाल, उपाध्यक्ष आशुतोष गोस्वामी, नगर पालिका चांपा के पूर्व अध्यक्ष राजेश अग्रवाल, यूनियन की जांजगीर-चांपा जिला इकाई के अध्यक्ष राजू शर्मा, जिला महिला कांग्रेस कमेटी की अध्यक्ष सीमा शर्मा, केदार सिंह राठौर, जिला महासचिव राघवेंद्र पाठक, राजेंद्र राठौर, पुरुषोत्तम राठौर, मनोज राठौर, अमरीश राठौर, सहित अन्य दिग्गज हस्तियां उपस्थित थी।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए जिला इकाई जांजगीर-चांपा की ओर से केदार सिंह राठौर ने विस्तार पूर्वक पत्रकार सम्मेलन के विषय पर प्रकाश डाला, साथ ही आगंतुक सभी पत्रकार साथियों का स्वागत किया। मंच पर उपस्थित अतिथियों का भी स्वागत यूनियन की ओर से किया गया तथा कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन प्रदेश के निर्वाचन के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी अनिल साखरे के मार्गदर्शन में सहायक चुनाव अधिकारियों ने विधिवत प्रदेश अध्यक्ष सहित कुल 28 पदों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया की संपूर्ण जानकारी देते हुए 28 पदों के लिए निर्वाचित पदाधिकारी की घोषणा की, जिसमें प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए अमित गौतम, कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष एनआरके पिल्लई, प्रदेश उपाध्यक्ष महेश आचार्य, कमलेश सारस्वत, अर्जुन झा, मुन्नीलाल अग्रवाल, घनश्याम शर्मा, प्रदेश महामंत्री कृष्ण कन्हैया गोयल, प्रदेश कोषाध्यक्ष मनीष तिवारी, प्रदेश सचिव पीके तिवारी, तिलका साहू, विपुल कन्हैया, प्रदेश सलाहकार अश्वनी पटनायक, लक्ष्मी नारायण सोनी, राजेश वैष्णव, प्रदेश संगठन सचिव रुपेश श्रीवास, सुशील तिवारी, विजय लाल, रवि कुमार सेन, प्रदेश संयुक्त सचिव विजयलक्ष्मी चौहान, प्रदेश सह सचिव कमल किशोर, रोमी सलूजा, प्रदेश सचिव सुनील, प्रदेश सलाहकार संजय लिखितकर, प्रदेश संयुक्त सचिव एचडी महंत, प्रदेश सलाहकार शेख मकबूल, प्रदेश सह सचिव मनीष दयाल, प्रदेश सह सचिव राहुल सेन, प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य के रूप में चंद्रशेखर दास वैष्णव निर्वाचित हुए। इस दौरान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष अमित गौतम ने कहा कि आप सभी के सहयोग एवं समर्पित भावना से इस यूनियन ने अल्प समय में ही आज पूरे प्रदेश में एक मजबूत संगठन तैयार किया है तथा आने वाले समय में हम सभी मिलजुल कर इस संगठन को और अधिक ऊंचाइयों की ओर लेकर जाएंगे। कार्यक्रम के दौरान पूर्व विधायक नारायण चंदेल ने पत्रकार जगत को चौथा स्तंभ बताते हुए सम्मेलन के आयोजकों को धन्यवाद ज्ञापित किया तथा जांजगीर-चांपा जिले में आयोजन करने पर प्रदेश संगठन का भी आभार व्यक्त किया। जिला भाजपा के उपाध्यक्ष अमर सुल्तानिया ने कहा कि आज पत्रकार साथी शासन एवं समाज को आईना दिखाने का काम करते हैं तथा सभी निष्पक्ष रूप से अपनी इन जिम्मेदारियों का निर्वहन करते रहे।

कार्यक्रम को छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरण दास महंत ने मुख्य अतिथि की आसंदी से संबोधित करते हुए कहा कि आप सभी ने इस पत्रकार सम्मेलन में जो भी निर्णय लिया है, आपके सभी निर्णय को मैं पूरी ईमानदारी के साथ राज्य शासन तक पहुंचाने का कार्य करूंगा एवं मैं सदैव आपके साथ हूं। आप इसी तरह से एकजुटता के साथ कार्य करें। कार्यक्रम को जांजगीर-चांपा के विधायक व्यास कश्यप ने संबोधित करते हुए कहा कि मुझे बेहद खुशी है कि मेरे विधानसभा क्षेत्र में प्रदेश स्तर का कार्यक्रम हो रहा है एवं आप सभी मुझे अपनी समस्याएं बताते रहे, जिससे हम सदन में आपकी समस्याओं के निराकरण की दिशा में प्रयास करें। पामगढ़ की विधायक शेषराज हरवंश ने कहा कि पत्रकार जगत ने सदैव राष्ट्र की तरक्की के लिए काम किया है तथा आप सभी हमेशा जागरूक होकर कार्य करते हैं।
कार्यक्रम को इंजीनियर रवि पांडेय ने संबोधित करते हुए कहा कि मुझे अत्यंत प्रसन्नता है कि जांजगीर- चांपा जिले में यह कार्यक्रम हो रहा है एवं मैं इस कार्यक्रम में पधारे हमारे प्रदेश के विभिन्न कोनो के सभी पत्रकार साथियों का हार्दिक अभिनंदन करता हूं। इस दौरान जांजगीर-चांपा जिला इकाई के सदस्यों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। राज्य स्तरीय पत्रकार सम्मेलन के दौरान लगभग 700 की संख्या में पत्रकार साथी मौजूद रहे तो वहीं 8 दिसंबर को ही प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पत्रकार साथी जांजगीर पहुंच गए थे, जिनके संपूर्ण आवास, भोजन की व्यवस्था जांजगीर-चांपा जिला इकाई की ओर से की गई एवं 9 दिसंबर को भी पूरे दिन भर ऑडिटोरियम परिसर में स्वल्पाहार तथा भोजन की सुंदर व्यवस्था जांजगीर-चांपा जिला इकाई ने की। पत्रकार सम्मेलन में छत्तीसगढ़ जर्निस्ट वेलफेयर यूनियन के प्रदेश पदाधिकारियों ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया तथा पूरे आयोजन को सफल बनाने में छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट वेलफेयर यूनियन प्रदेश संगठन, जांजगीर- चांपा जिला इकाई का योगदान रहा। कार्यक्रम में पिथौरा, बसना, सरायपाली, महासमुंद, राजनांदगांव, तुमड़ीबोर्ड, दुर्ग-भिलाई, पाटन, कोरबा, बलौदाबाजार, सारंगढ़, बिलाईगढ़, रायपुर, बिलासपुर, सक्ती, भोपालपटनम, बीजापुर, रायगढ़, तमनार, मुंगेली, कांकेर, चिरमिरी, कोरिया, अंबिकापुर, गरियाबंद, देवभोग, धमतरी सहित अन्य जिलों के पदाधिकारी एवं सदस्य सम्मिलित हुए। अंत में आभार प्रदर्शन यूनियन की जांजगीर-चांपा जिला इकाई के महासचिव राघवेंद्र पाठक ने करते हुए आगंतुक सभी पत्रकार साथियों का धन्यवाद ज्ञापित किया।

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जगदलपुर : बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

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जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट, अब शिक्षा, बैंक और योजनाओं तक पहुंच होगी सरल

 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक
 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

जगदलपुर। किसी परिवार के मुखिया की मृत्यु हो जाए और वर्षों बाद भी जमीन के सरकारी कागजों में उनका ही नाम दर्ज रहे। ऐसे में परिवार को हर छोटे-बड़े काम के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। बस्तर में हजारों परिवारों की यही समस्या थी। जिला प्रशासन खुद आगे बढ़कर इस परेशानी को दूर करने का काम कर रही है। बस्तर जिले में पिछले चार वर्षों के लंबित फौती नामांतरण मामलों को निपटाने के लिए विशेष अभियान चलाया गया। इस अभियान का उद्देश्य था कि जिन लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी जमीन के रिकॉर्ड में उनके परिवार के सही वारिसों का नाम दर्ज किया जाए। इस काम की शुरुआत गांवों से हुई। ग्राम सचिवों ने पिछले चार वर्षों में मृत्यु को प्राप्त लोगों की सूची तैयार की। इसके बाद पटवारियों ने उन लोगों की पहचान की जिनके नाम पर जमीन दर्ज थी और जिनके मामलों में फौती नामांतरण की जरूरत थी। कोटवारों ने गांव स्तर पर जानकारी का सत्यापन किया और तहसीलदारों ने पूरे अभियान की निगरानी की।

 बस्तर मॉडल की पूरे देश को सीख: 8241 परिवारों को मिला जमीन पर वैध हक, प्रशासन खुद पहुंचा लोगों तक

अभियान के दौरान बस्तर जिले के 611 गांवों से जानकारी जुटाई गई। ग्राम सचिवों से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले चार वर्षों में 17,405 लोगों की मृत्यु दर्ज हुई थी। इनमें से 8,651 ऐसे मामले मिले जिनमें फौती नामांतरण की आवश्यकता थी। इसके बाद ग्राम सचिव, पटवारी और कोटवार की संयुक्त टीम ने घर-घर जाकर ,जिन परिवारों के पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं था, उनके लिए प्रमाण पत्र बनवाए गए। वारिसों की जानकारी और वंशवृक्ष तैयार किए गए। सभी दस्तावेज पूरे होने के बाद नामांतरण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस विशेष अभियान के परिणाम बेहद उत्साहजनक रहे। अब तक 8,241 मामलों में फौती नामांतरण पूरा कर दिया गया है। इसका मतलब है कि हजारों परिवारों की जमीन के सरकारी रिकॉर्ड अब सही हो गए हैं। केवल 410 मामले ही शेष हैं, जिन पर कार्य जारी है।

यह अभियान बस्तर जिले की सभी प्रमुख तहसीलों में चलाया गया। इनमें तोकापाल, करपावंड, बस्तर, बास्तानार, बकावंड, भानपुरी, नानगुर, जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और दरभा जैसे सुदूर आदिवासी अंचल शामिल हैं। सबसे अधिक प्रगति बकावंड, करपावंड, नानगुर और बास्तानार जैसे क्षेत्रों में देखने को मिली, जबकि जगदलपुर और लोहंडीगुड़ा में लगभग सभी पात्र मामलों का निराकरण कर दिया गया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि सरकार का उद्देश्य केवल योजनाएं बनाना नहीं, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना है। बस्तर में चलाया गया यह विशेष फौती नामांतरण अभियान इसी सोच का परिणाम है। जिन परिवारों के सदस्य अब इस दुनिया में नहीं हैं, उनके वारिसों को उनके अधिकार समय पर मिलें, यह हमारी प्राथमिकता है। हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट होने से उन्हें भविष्य में किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह अभियान सुशासन, संवेदनशील प्रशासन और जनसेवा का एक अच्छा उदाहरण है, जिसमें प्रशासन स्वयं लोगों के घर तक पहुंचकर उनकी समस्या का समाधान कर रहा है।

बस्तर जिले की सभी तहसीलों में इस अभियान को अच्छी सफलता मिली। तोकापाल में 1,454, करपावंड में 504, बस्तर में 1,019, बास्तानार में 337 और बकावंड में 1,142 मामलों का निराकरण किया गया। वहीं भानपुरी में 959, नानगुर में 518, जगदलपुर में 1,057, लोहंडीगुड़ा में 799 और दरभा में 452 परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड अपडेट किए गए। सबसे अच्छी प्रगति जगदलपुर, लोहंडीगुड़ा और बकावंड क्षेत्रों में देखने को मिली।

इस अभियान की खास बात यह रही कि लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़े। प्रशासन खुद गांवों तक पहुंचा, रिकॉर्ड खंगाले, दस्तावेज तैयार कराए और पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा किया। तहसीलदार और नायब तहसीलदार स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग की गई, जिससे कार्य में तेजी आई।

बस्तर कलेक्टर ने कहा कि जिले के कई दूरस्थ और पूर्व में नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को जमीन संबंधी कार्यों के लिए लंबे समय तक सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई परिवारों को केवल इसलिए परेशानी होती थी क्योंकि जमीन के रिकॉर्ड में मृत व्यक्ति का नाम दर्ज था। विशेष अभियान चलाकर प्रशासन ने स्वयं गांवों तक पहुंचकर इस समस्या का समाधान किया। अब हजारों परिवारों के जमीन संबंधी रिकॉर्ड सही हो गए हैं, जिससे उन्हें अपने अधिकार प्राप्त करने, बैंकिंग सुविधाओं का लाभ लेने और शासकीय योजनाओं से जुड़ने में आसानी होगी। इससे न केवल लोगों का प्रशासन पर विश्वास मजबूत होगा, बल्कि जमीन संबंधी विवादों में भी कमी आएगी और ग्रामीणों का जीवन अधिक सरल बनेगा।

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छत्तीसगढ़

सुकमा : बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू

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नक्सल पुनर्वास नीति 2025 ने बदली जिंदगी, मुख्यधारा से जुड़कर बन रहे स्वावलंबी

बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू
बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू
बंदूक छोड़ थामा ई-रिक्शा का हैंडल, आत्मनिर्भरता की राह पर बढ़े राजू, मनीष और कलमू

सुकमा। कभी नक्सल गतिविधियों से जुड़े रहे पोडियाम राजू, मनीष लखमा और कलमू कोसा आज आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक जीवन की नई मिसाल बन गए हैं। छत्तीसगढ़ शासन की नक्सल पुनर्वास नीति 2025 के तहत आत्मसमर्पण करने के बाद इन युवाओं को जिला प्रशासन द्वारा ई-रिक्शा उपलब्ध कराया गया। अब वे सुकमा की सड़कों पर ई-रिक्शा चलाकर अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे हैं और समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीवन जी रहे हैं।

पुनर्वास नीति बनी नई शुरुआत का आधार

        आत्मसमर्पण के बाद जिला प्रशासन ने तीनों युवाओं को पुनर्वास योजना से जोड़ते हुए वाहन संचालन का प्रशिक्षण दिलाया। साथ ही उनके ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने की प्रक्रिया भी पूरी कराई गई। प्रशिक्षण पूर्ण होने के बाद उन्हें निःशुल्क ई-रिक्शा प्रदान किए गए, जिससे वे नियमित आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन सके।

प्रशासन ने बढ़ाया उत्साह

        आज शनिवार को कलेक्टर अमित कुमार, पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण तथा डीआईजी सीआरपीएफ आनंद सिंह राजपुरोहित सहित वरिष्ठ अधिकारियों ने स्वयं इनके ई-रिक्शा में सफर कर उनका उत्साहवर्धन किया। अधिकारियों के इस आत्मीय सहयोग से युवाओं में आत्मविश्वास बढ़ा और उन्हें समाज में सम्मानजनक पहचान मिली।

शासकीय योजना से बदली जीवन की दिशा

        नक्सल पुनर्वास नीति के माध्यम से शासन ऐसे युवाओं को न केवल हिंसा का रास्ता छोड़ने के लिए प्रेरित कर रहा है, बल्कि उन्हें रोजगार, प्रशिक्षण और आत्मनिर्भरता के अवसर भी उपलब्ध करा रहा है। यही कारण है कि कभी समाज से दूर रहने वाले ये युवा आज शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपने पैरों पर खड़े हो गए हैं।

दूसरों के लिए बने प्रेरणा स्रोत

       राजू, मनीष और कलमू की सफलता यह साबित करती है कि सही मार्गदर्शन, शासन की संवेदनशील पहल और दृढ़ संकल्प से जीवन में सकारात्मक बदलाव संभव है। आज ये तीनों युवा उन लोगों के लिए प्रेरणा बन गए हैं जो भटकाव छोड़कर विकास और शांति के मार्ग पर आगे बढ़ना चाहते हैं।

सफलता की नई पहचान

         इन युवाओं की कहानी यह संदेश देती है कि हिंसा और संघर्ष का रास्ता केवल कठिनाइयों की ओर ले जाता है, जबकि शिक्षा, रोजगार और आत्मनिर्भरता से जुड़कर सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य का निर्माण किया जा सकता है। छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति ऐसे अनेक युवाओं के जीवन में उम्मीद और बदलाव की नई रोशनी लेकर आ रही है।

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छत्तीसगढ़

भूपेश के आरोपों के बाद प्रशासन एक्टिव:पाटन में 135 कृषि केंद्रों पर छापे, अमानक खाद जब्त, सात विक्रेताओं को नोटिस

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दुर्ग-भिलाई, एजेंसी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा खाद और बीज की कमी का मुद्दा उठाए जाने के बाद दुर्ग जिला प्रशासन हरकत में आ गया है। प्रशासन ने पाटन विधानसभा क्षेत्र में पर्याप्त खाद-बीज उपलब्ध होने का दावा करते हुए विस्तृत आंकड़े जारी किए हैं। साथ ही कृषि विभाग ने 135 कृषि केंद्रों पर औचक निरीक्षण कर अमानक उर्वरक जब्त किए हैं और सात विक्रेताओं को नोटिस जारी किया है।

भूपेश बघेल ने हाल ही में पाटन क्षेत्र के दौरे के दौरान किसानों से मुलाकात कर खाद-बीज की समस्या को विधानसभा में उठाने की बात कही थी। इसके बाद जिला प्रशासन ने उपलब्धता और भंडारण संबंधी जानकारी सार्वजनिक की।

खरीफ सीजन के लिए पर्याप्त भंडारण का दावा

कृषि विभाग और बीज निगम के अनुसार खरीफ सीजन 2026 के लिए पाटन विकासखंड में पर्याप्त मात्रा में उर्वरकों का भंडारण किया गया है। आईएमएफएस (iMFS) पोर्टल के आंकड़ों के मुताबिक अब तक 5556.78 मीट्रिक टन यूरिया, 2763.07 मीट्रिक टन एसएसपी, 1314.60 मीट्रिक टन पोटाश, 1105.05 मीट्रिक टन डीएपी और 1026.90 मीट्रिक टन एनपीके का भंडारण किया गया है।

प्रशासन का कहना है कि पिछले वर्ष की तुलना में यूरिया का भंडारण 959 मीट्रिक टन, एसएसपी 460 मीट्रिक टन और पोटाश 506 मीट्रिक टन अधिक रखा गया है।

डीएपी की कमी स्वीकार, विकल्पों पर जोर

कृषि विभाग ने डीएपी की आंशिक कमी स्वीकार करते हुए किसानों को वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग के लिए प्रेरित करने की बात कही है। विभाग द्वारा एसएसपी, टीएसपी, एनपीके और नैनो डीएपी के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। अधिकारियों का दावा है कि इन उर्वरकों में फसलों के लिए आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध हैं और किसानों को इनके उपयोग के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक

प्रशासन के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी विपणन संघ और बीज निगम रूआबांधा में पर्याप्त खाद उपलब्ध है। इसके अलावा लगभग 2790 क्विंटल बीज का बफर स्टॉक सुरक्षित रखा गया है। अधिकारियों ने खाद-बीज की किल्लत से इनकार करते हुए आवश्यकता पड़ने पर अतिरिक्त आपूर्ति सुनिश्चित करने का दावा किया है।

135 कृषि केंद्रों की जांच

खरीफ सीजन के दौरान किसानों को गुणवत्तापूर्ण उर्वरक उपलब्ध कराने के लिए कृषि विभाग ने व्यापक निरीक्षण अभियान चलाया। कलेक्टर अभिजीत सिंह के निर्देश पर जिला स्तरीय उड़नदस्ता दल ने निजी और सहकारी कृषि केंद्रों का औचक निरीक्षण किया।

अब तक जिले के 135 कृषि केंद्रों की जांच की जा चुकी है। निरीक्षण में उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के नियमों के उल्लंघन, स्टॉक संधारण में गड़बड़ी और बिना अनुमति अतिरिक्त स्रोतों से उर्वरक बिक्री के मामले सामने आए हैं। इन मामलों में सात विक्रेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।

अमानक खाद जब्त, कई केंद्रों पर कार्रवाई

जांच के दौरान सेलूद, रानीतराई और धमधा क्षेत्र के कृषि केंद्रों में बायो स्टिम्यूलेंट के अनियमित विक्रय के मामले मिले। वहीं ऋषभराज फर्टिलाइजर, विद्या कृषि केंद्र बोरी और कृषि सेवा केंद्र पाटन में उर्वरकों के स्टॉक और अधिक मूल्य पर बिक्री संबंधी अनियमितताएं पाई गईं।

कृषि विभाग ने यूरिया, एनपीके, एसएसपी, पोटाश, ऑर्गेनिक मैन्योर और बायो स्टिम्यूलेंट सहित बड़ी मात्रा में उर्वरक जब्त कर कलेक्टर न्यायालय में प्रकरण प्रस्तुत किया है।

पांच नमूने अमानक पाए गए

विभागीय जांच के दौरान पांच विक्रय केंद्रों से लिए गए उर्वरक नमूनों की प्रयोगशाला जांच में सभी नमूने अमानक पाए गए। इसके बाद संबंधित उर्वरकों की बिक्री पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगा दिया गया है। संबंधित विक्रेताओं को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है।

कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी

कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि खाद-बीज की कृत्रिम किल्लत पैदा करने, कालाबाजारी करने अथवा अमानक उर्वरकों की बिक्री करने वालों के खिलाफ उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निलंबित या निरस्त करने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी।

अधिकारियों ने कहा कि खरीफ सीजन के दौरान खाद-बीज वितरण व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।

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