कोरबा
नई तकनीकों से जुड़े कृषक दिनेश अग्रवाल, नैनो उर्वरकों को बताया खेती के लिए लाभकारी
नैनो उर्वरक-कम लागत, अधिक उत्पादन, खुशहाल किसान
कोरबा। छत्तीसगढ़ सरकार किसानों को आधुनिक और वैज्ञानिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। नैनो डीएपी और नैनो यूरिया जैसे उन्नत उर्वरकों के उपयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे किसानों को खेती में बेहतर परिणाम प्राप्त हो रहे हैं। सहकारी समितियों के माध्यम से खाद, बीज और उर्वरकों की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित किए जाने से किसानों को कृषि कार्यों की तैयारी में सुविधा मिल रही है तथा वे नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।
कोरबा जिले के ग्राम तिलकेजा निवासी कृषक दिनेश अग्रवाल भी ऐसे ही किसानों में शामिल हैं, जो आधुनिक कृषि तकनीकों के लाभ को समझते हुए खेती को अधिक उन्नत और लाभकारी बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। लगभग 12.5 एकड़ कृषि भूमि में धान की खेती करने वाले श्री अग्रवाल का परिवार लंबे समय से कृषि कार्य से जुड़ा हुआ है।

खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही श्री अग्रवाल अपनी खेती की तैयारियों में जुट गए हैं। इसी क्रम में वे पहली बार सहकारी समिति पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी फसल की आवश्यकता के अनुरूप खाद, बीज और अन्य कृषि आदान सामग्री प्राप्त की। उन्होंने नैनो डीएपी एवं नैनो यूरिया भी प्राप्त किया। इन उर्वरकों की जानकारी उन्हें कृषि विभाग और सहकारी समिति के माध्यम से मिली थी। श्री अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने पिछले वर्ष भी नैनो उर्वरकों का उपयोग किया था, जिससे फसल की बढ़वार एवं उत्पादन पर सकारात्मक परिणाम देखने को मिले। उनके अनुसार, वर्तमान समय में कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों का महत्व निरंतर बढ़ रहा है और नैनो उर्वरक किसानों के लिए एक प्रभावी एवं नवाचारपूर्ण विकल्प के रूप में उभर रहे हैं, जो कम लागत में बेहतर पोषण और अधिक उत्पादकता सुनिश्चित करने में सहायक हैं।
श्री अग्रवाल का कहना है कि नैनो डीएपी और नैनो यूरिया फसलों को आवश्यक पोषक तत्व उपलब्ध कराने का एक प्रभावी माध्यम हैं। इन उर्वरकों के उपयोग से पोषक तत्वों का बेहतर अवशोषण होता है तथा फसल की बढ़वार को आवश्यक सहायता मिलती है। उन्होंने बताया कि किसानों के बीच नैनो उर्वरकों के प्रति जागरूकता बढ़ रही है और अधिक से अधिक किसान इनके उपयोग में रुचि दिखा रहे हैं। आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाने से खेती को अधिक वैज्ञानिक और व्यवस्थित बनाने में मदद मिल रही है।
उन्होंने कहा कि खेती में समय का विशेष महत्व होता है। खाद, बीज और उर्वरक समय पर उपलब्ध हो जाएं तो किसानों को काफी सुविधा मिलती है। इस वर्ष उन्हें सहकारी समिति में आवश्यक कृषि आदान सामग्री आसानी से उपलब्ध हो गई, जिससे खेती की तैयारी समय पर पूरी करने में मदद मिली। इससे किसानों का आत्मविश्वास बढ़ता है और वे पूरी योजना के साथ कृषि कार्य कर पाते हैं।
दिनेश अग्रवाल का मानना है कि कृषि क्षेत्र में हो रहे नवाचार किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोल रहे हैं। आधुनिक तकनीकों, उन्नत बीजों और वैज्ञानिक उर्वरकों के उपयोग से खेती को अधिक उत्पादक और लाभकारी बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बदलते समय के साथ किसानों को भी नई तकनीकों को अपनाना चाहिए, ताकि कृषि क्षेत्र में बेहतर परिणाम प्राप्त किए जा सकें।
श्री अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि किसानों को खाद, बीज, नैनो डीएपी, नैनो यूरिया सहित अन्य आवश्यक कृषि आदान सामग्री समय पर उपलब्ध कराई जा रही है। इससे खेती के कार्यों में सुविधा हो रही है और किसान बिना किसी बाधा के अपने कृषि कार्यों को आगे बढ़ा पा रहे हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि किसानों को इसी प्रकार समय पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध होते रहेंगे, जिससे कृषि क्षेत्र और अधिक सशक्त तथा समृद्ध बनेगा।
कोरबा
क्षतिग्रस्त और अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में आवाजाही होगी बाधित, ग्रामीणों को घूमकर जाना पड़ेगा
कोरबा। क्षतिग्रस्त व अधूरी पुलिया-एप्रोच रोड से बारिश में फिर से आवाजाही बाधित होगी। इससे उपनगर बांकीमोंगरा, हरदीबाजार, चैतमा के ग्रामीणों को वैकल्पिक सड़क से घूमकर जाना पड़ेगा। बारिश में संपर्क टूटने पर स्कूली छात्रों, कामकाजी लोगों को सबसे अधिक परेशानी होगी, जो सड़क मार्ग से रोज आवाजाही करनी पड़ती है। हरदीबाजार से नेवसा, उतरदा, सिल्ली, बोईदा, निरतु की ओर आवाजाही के लिए लीलागर नदी पर बनी पुरानी पुलिया की ऊंचाई कम है। 24 घंटे से भी कम बारिश में नदी का जलस्तर बढ़ने पर पुलिया के ऊपर से पानी बहता है। इससे गांवों को संपर्क टूटने पर सबसे अधिक परेशानी नेवसा समेत आसपास गांवों के स्कूली छात्रों को होती है, जो हरदीबाजार व दीपका के स्कूलों में पढ़ाई करते हैं। यह सड़क हरदीबाजार को बलौदा सीपत व मस्तूरी से भी जोड़ती है, इस कारण यात्री बसें भी मार्ग से गुजरती है।

हरदीबाजार से नेवसा की दूरी लीलागर नदी का पुलिया पारकर 2 किलोमीटर है। वहीं रतिजा की ओर से बायपास सड़क से आवाजाही पर 5 किलोमीटर दूरी पड़ेगी। पुलिया की कम ऊंचाई के मद्देनजर नया पुल का निर्माण कराया है, जो बनकर तैयार हो गया है, लेकिन पुल के दोनों ओर की एप्रोच रोड अब तक नहीं बनाया है। सड़क पर मिट्टी पड़ी है। नौतपा की विदाई से मानसून भी अब करीब है। आने वाले दिनों प्री-मानसून बारिश की संभावना है। एप्रोच रोड को पुल के लेवल के हिसाब से निर्माण नहीं कराने पर वाहनों से आवाजाही मुश्किल होगी। पिछले साल बारिश में पश्चिम क्षेत्र बांकीमोंगरा के + लीलागर नदी पर निर्मित पुल का अधूरा एप्रोच रोड।
कोरबा
लो वोल्टेज और कटौती पर ग्रामीणों का हल्लाबोल
कोरबा/पाली। 5 ग्राम पंचायतों में बिजली आपूर्ति की लचर व्यवस्था पर ग्रामीणों ने पाली सब स्टेशन कार्यालय में जमकर नारेबाजी की। लगभग 2 घंटे धरना देने के बाद पुलिस शासन की मौजूदगी में सब स्टेशन के बिजली अफसरों के साथ परिसर में ही वार्ता हुई। इसके बाद ग्रामीणों का आंदोलन समाप्त हुआ। सब स्टेशन कार्यालय के निकट से ग्रामीणों ने रैली की शक्ल में बिजली दफ्तर पहुंचे। इस दौरान गांवों में बिजली कटौती व लो वोल्टेज का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की। ग्रामीणों ने कहा कि अनाफ-शनाफ बिजली बिल भेजा रहा है। खराब पड़े ट्रांसफार्मर को बदलने में ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

सिल्ली, परसदा, शिवपुर, निरधी, पोलमी पंचायत के गांवों के हजारों उपभोक्ता लो वोल्टेज व बिजली कटौती से परेशान हैं। कई बार मौखिक व लिखित शिकायत के बाद भी अफसरों ने ध्यान नहीं दिया। दफ्तर परिसर में ग्रामीणों के साथ बिजली अधिकारियों की वार्ता हुई। उनकी बिजली संबंधी समस्याओं के निराकरण का भरोसा दिलाया। इसके बाद ग्रामीणों ने आंदोलन स्थगित कर दिया। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि अगर यदि 10 दिनों के भीतर समस्याओं का निराकरण नहीं किया गया तो चक्काजाम आंदोलन करने मजबूर होंगे।
कोरबा
कोरबा निगम सभापति जमीन पर बैठे:मूर्तिकला लोकार्पण कार्यक्रम में अव्यवस्था पर प्रभारी सचिव को नोटिस
कोरबा। कोरबा नगर पालिक निगम में विकास कार्यों के लोकार्पण के बीच निगम के भीतर अव्यवस्था और जनप्रतिनिधियों की नाराजगी खुलकर सामने आ गई। विरोध स्वरूप निगम सभापति ने अपने सभा कक्ष में कुर्सी छोड़कर जमीन पर बैठकर काम किया। मामले के बाद निगम आयुक्त ने प्रभारी सचिव को कारण बताओ नोटिस जारी कर तीन दिन के भीतर जवाब मांगा है।

पूरा मामला बिहारी लाल बहादुर शास्त्री चौक स्थित मूर्तिकला के लोकार्पण कार्यक्रम से जुड़ा है। कार्यक्रम में प्रदेश के उद्योग, वाणिज्य, श्रम, आवास-सार्वजनिक उपक्रम मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। आयोजन के दौरान कई जनप्रतिनिधियों को सूचना और आमंत्रण नहीं मिलने की शिकायतें सामने आईं।
महापौर, सभापति समेत कई वरिष्ठ पार्षदों को भी कथित तौर पर उचित तवज्जो नहीं मिलने से निगम के भीतर असंतोष बढ़ गया। बताया जा रहा है कि कार्यक्रम की व्यवस्थाओं और प्रशासनिक समन्वय को लेकर लंबे समय से नाराजगी थी। आयोजन में प्रोटोकॉल का पालन नहीं होने और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से सभापति खासे नाराज थे।

विरोध के लिए अपनाया अनोखा तरीका
इसी नाराजगी के चलते सोमवार को सभापति ने अपने सभा कक्ष में कुर्सी पर बैठने से इनकार कर दिया। उन्होंने जमीन पर बैठकर ही निगम का कामकाज निपटाया। इसकी तस्वीर सामने आने के बाद निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होने लगे।
प्रभारी सचिव को जारी हुआ कारण बताओ नोटिस
मामले ने तूल पकड़ा तो निगम प्रशासन हरकत में आया। निगम आयुक्त ने प्रभारी सचिव गणेश्वर सिंह कंवर को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में कार्यक्रम के दौरान लापरवाही और जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित नहीं किए जाने को गंभीर माना गया है।
तीन दिन में मांगा जवाब, कार्रवाई की चेतावनी
प्रभारी सचिव से तीन दिनों के भीतर जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है। साथ ही स्पष्ट किया गया है कि संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
निगम में चर्चाओं का दौर तेज
घटनाक्रम के बाद निगम के गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। सभापति ने कहा कि जनप्रतिनिधियों का सम्मान आवश्यक है और प्रोटोकॉल का पालन नहीं होना दुर्भाग्यपूर्ण है।

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