छत्तीसगढ़
विधायक देवेंद्र समेत 17 कांग्रेसियों पर FIR:बेमेतरा में मंत्री को मृत बताकर निकाली थी शव-यात्रा, यादव बोले- हम डरने वालों में से नहीं
बेमेतरा, एजेंसी। छत्तीसगढ़ के बेमेतरा जिले में पुलिस ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत 17 कार्यकर्ताओं के खिलाफ FIR दर्ज की है। विधायक और युवा कांग्रेस नेताओं ने शुक्रवार 9 मई को नवागढ़ विधानसभा क्षेत्र के झिरिया गांव में प्रदर्शन किया था।
इस दौरान कथित रूप से 300 से अधिक गौवंशों की मौत के मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मंत्री की प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी।

इस मामले ने खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के बेटे और जिला पंचायत सदस्य अंजय उर्फ अंजू बघेल ने चंदनू थाना में शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद पुलिस ने कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव समेत 17 कार्यकर्ताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
वहीं इस मामले पर विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि ये लोग ताकतवर हैं, उनके खिलाफ आवाज उठाने पर तुरंत FIR कर दी जाती है, लेकिन वे डरने वाले नहीं हैं।

ग्राम झिरिया में कथित रूप से गौवंशों की मौत के मामले को लेकर 9 मई को जिला युवा कांग्रेस ने किया था प्रदर्शन
अब जानिए पूरा मामला
दरअसल, शुक्रवार 9 मई को जिला युवा कांग्रेस ने ग्राम झिरिया में प्रदर्शन करते हुए प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली थी। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने शासन-प्रशासन पर संवेदनहीनता और कार्रवाई में लापरवाही का आरोप लगाया। युवा कांग्रेस नेताओं ने गौवंशों की मौत के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए विरोध प्रदर्शन किया था।
जिला युवा कांग्रेस महासचिव और जनपद सदस्य दीपक दिनकर गौवंशों को न्याय दिलाने की मांग को लेकर पिछले 9 दिनों से अनशन पर बैठे हुए थे। इसी मुद्दे को लेकर युवा कांग्रेस लगातार आंदोलन कर रही थी। प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने तीन प्रतीकात्मक शवों का अंतिम संस्कार भी किया।
युवा कांग्रेस ने इस पूरे मामले के लिए खाद्य मंत्री दयालदास बघेल, पशुपालन मंत्री रामविचार नेताम और गौ सेवा आयोग अध्यक्ष विशेश्वर पटेल को जिम्मेदार ठहराया। प्रदर्शन के दौरान नेताओं ने सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी भी की।
खाद्य मंत्री के बेटे ने थाने में की शिकायत
इस मामले में खाद्य मंत्री दयालदास बघेल के बेटे और जिला पंचायत सदस्य अंजय उर्फ अंजू बघेल ने चंदनू थाना में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि कुछ राजनीतिक और स्थानीय लोगों ने उनके जीवित पिता को मृत बताकर शोक पत्र छपवाया, प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली, जिससे धार्मिक भावनाओं और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है।
शिकायत के अनुसार, 9 मई 2026 को ग्राम झिरिया बाजार चौक में एकत्र होकर मंत्री दयालदास बघेल को मृत घोषित करते हुए शोक सभा, मौन धारण और प्रतीकात्मक शव यात्रा निकाली गई।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि प्रदर्शन के दौरान मुख्य मार्ग को भी रोक दिया गया, जिससे आवाजाही बाधित हुई। साथ ही, मंत्री की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत अपराध दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव।
17 कांग्रेसी नेताओं पर FIR दर्ज
पुलिस ने मामले में कुल 17 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इनमें विधायक देवेंद्र यादव, पूर्व विधायक गुरुदयाल सिंह बंजारे, आरिफ भाटिया, प्रांजल तिवारी सनतधार दीवान, सतीश मारकंडे, अंजलि मारकंडे, देवेंद्र साहू, अरमान साहू, हर्ष बघेल, प्रिंस डेहरे, शक्तिधर दीवान विजय यादव, दीपक दिनकर, विनोद तिवारी, मोटू तिवारी और अजयराज सेन शामिल हैं।
देवेंद्र यादव बोले- हम डरने वालों में से नहीं
इस मामले पर कांग्रेस विधायक देवेंद्र यादव ने कहा, ये लोग ताकतवर हैं। इसलिए जो भी इनके खिलाफ आवाज उठाता है, उस पर तुरंत FIR कर दी जाती है। लेकिन हम डरने वालों में से नहीं हैं।
गौरतलब है कि ग्राम झिरिया में गौवंशों की मौत को लेकर कांग्रेस और विपक्षी दल लगातार सरकार पर हमलावर हैं। वहीं अब प्रतीकात्मक शव यात्रा को लेकर दर्ज FIR ने इस पूरे मामले को राजनीतिक विवाद के साथ कानूनी रंग भी दे दिया है।
छत्तीसगढ़
रायपुर : विशेष लेख : मियावकी वन तकनीक से हरित छत्तीसगढ़ की ओर बढ़ते कदम
’कम समय में घने जंगल तैयार कर पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई दिशा’
- धनंजय राठौर , संयुक्त संचालक
- अशोक कुमार चंद्रवंशी, सहायक जनसंपर्क अधिकारी

वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावाकी तकनीक एक बेहद प्रभावी और लोकप्रिय विधि बन गई है। जापानी वनस्पतिशास्त्री डॉ. अकीरा मियावाकी द्वारा विकसित यह तकनीक केवल 2-3 वर्षों में बंजर भूमि को घने, आत्मनिर्भर सूक्ष्म वनों में बदल देती है। पारंपरिक वृक्षारोपण की तुलना में यह विधि 10 गुना तेजी से बढ़ती है और 30 गुना अधिक घने जंगल बनाती है, जो शहरी क्षेत्रों के लिए आदर्श है।
छत्तीसगढ़ में पर्यावरण संरक्षण और वन क्षेत्र बढ़ाने के लिए मियावकी वन तकनीक तेजी से अपनाई जा रही है। राज्य में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग तथा छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड द्वारा इस तकनीक के जरिए शहरी क्षेत्रों, औद्योगिक क्षेत्रों और खनन प्रभावित इलाकों में बड़े पैमाने पर हरियाली विकसित की जा रही है। मियावकी पद्धति में स्थानीय प्रजातियों के पौधों को अधिक घनत्व में लगाया जाता है, जिससे मात्र 3 से 5 वर्षों में घना जंगल तैयार हो जाता है।

’राज्य में तेजी से बढ़ रहा सघन वनीकरण’
छत्तीसगढ़ में वर्ष 2022 से मियावकी पद्धति के तहत लगातार वृक्षारोपण किया जा रहा है। वर्ष 2022 में कोटा मण्डल में एनटीपीसी लिमिटेड के सहयोग से 1 हेक्टेयर क्षेत्र में 23 हजार पौधे तथा 0.3 हेक्टेयर में 7 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2023 में कोटा के भिल्मी क्षेत्र में 6.4 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधों का रोपण किया गया। वहीं गेवरा क्षेत्र में 2 हेक्टेयर भूमि पर 20 हजार पौधे लगाए गए। वर्ष 2024 में कोटा के उच्चभट्टी क्षेत्र में 3.2 हेक्टेयर में 32 हजार पौधे लगाए गए। इसके अलावा रायगढ़ मण्डल के तिलईपाली और छाल क्षेत्रों में कुल 3.75 हेक्टेयर भूमि पर 37 हजार 500 पौधों का सफल रोपण किया गया।
’वर्ष 2025 में कई महत्वपूर्ण परियोजनाएं जारी’
वर्तमान में राज्य के कई क्षेत्रों में वृक्षारोपण कार्य तेजी से जारी है। बारनवापारा मण्डल में ‘हरियर छत्तीसगढ़’ योजना के तहत 6 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। कोरबा और रायगढ़ क्षेत्रों में साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड के सहयोग से 4 हेक्टेयर क्षेत्र में 40 हजार पौधों का रोपण किया जा रहा है। वहीं विशेष परियोजनाओं के अंतर्गत महानदीकोलफील्ड लिमिटेड द्वारा 1.9 हेक्टेयर भूमि पर 64 हजार पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके साथ ही अरपा नदी के किनारे भी बड़े पैमाने पर पौधारोपण कर हरित क्षेत्र का विस्तार किया जा रहा है।
’पर्यावरण संरक्षण में मिल रहे बहुआयामी लाभ’
विशेषज्ञों के अनुसार मियावकी वन सामान्य जंगलों की तुलना में अधिक कार्बन अवशोषित करते हैं। इससे जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को कम करने में मदद मिलती है। यह तकनीक वायु और ध्वनि प्रदूषण को कम करने, भू-जल स्तर सुधारने और मिट्टी संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इन वनों की शुरुआती वर्षों में देखभाल की जाती है, जिसके बाद ये जंगल स्वतः विकसित होने लगते हैं। इससे रखरखाव की लागत कम होती है और लंबे समय तक पर्यावरणीय लाभ मिलता है।
’बंजर डंप क्षेत्र से हरित जंगल बनने की ओर गेवरा की प्रेरक पहल’
छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम लिमिटेड ने पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक अनूठी पहल करते हुए कोरबा जिले के गेवरा क्षेत्र के 12.45 हेक्टेयर डंप क्षेत्र में 33 हजार 935 मिश्रित प्रजातियों के पौधों का सफल रोपण किया है। वन मंत्री केदार कश्यप ने इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए लगातार प्रभावी कदम उठा रही है।
’जहां हरियाली संभव नहीं थी, वहां तैयार हो रहा जंगल’
कोयला खनन के बाद डंप क्षेत्रों में उपजाऊ मिट्टी नीचे दब जाती है और ऊपर पत्थर, कोयला अवशेष तथा अनुपजाऊ मिट्टी रह जाती है। ऐसे क्षेत्रों में पौधों का उगना बेहद कठिन माना जाता है। लेकिन वैज्ञानिक पद्धति और सतत प्रयासों से इस बंजर भूमि को अब हरियाली में बदला जा रहा है।
’वैज्ञानिक तरीके से किया गया पौधारोपण’
डंप क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों को देखते हुए मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट, नीमखली और डीएपी का उपयोग किया गया। जीपीएस सर्वे और सीमांकन के बाद व्यवस्थित गड्ढे तैयार किए गए तथा 3 से 4 फीट ऊंचाई वाले स्वस्थ पौधों का रोपण किया गया। इस क्षेत्र में नीम, शीशम, सिरस, कचनार, करंज, आंवला, बांस, महोगनी, महुआ और बेल जैसी विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इससे आने वाले समय में यह क्षेत्र पक्षियों और अन्य वन्य जीवों के लिए भी उपयुक्त आवास बन सकेगा।
निरंतर देखभाल से मिल रही सफलता
शुरुआती 2-3 वर्षों की देखभाल के बाद, यह वन पूरी तरह से आत्मनिर्भर हो जाता है और इसे किसी उर्वरक या पानी की आवश्यकता नहीं होती है। रोपण के बाद पौधों की नियमित सिंचाई, खाद, निंदाई-गुड़ाई, घास कटाई और सुरक्षा का कार्य लगातार किया जा रहा है। मृत पौधों का समय पर प्रतिस्थापन भी सुनिश्चित किया जा रहा है। वर्ष 2025 से 2029 तक पांच वर्षों तक रखरखाव के बाद इस विकसित हरित क्षेत्र को साउथ इस्टर्न कोलफील्ड लिमिटेड गेवरा को सौंपा जाएगा।
’हरित भविष्य की ओर मजबूत पहल’
कम जगह में घने जंगल बनाकर शहरों में प्रदूषण (धूल और ध्वनि) को कम करने में सहायक होते हैं। ये वन पारंपरिक वनों की तुलना में 30 गुना अधिक कार्बन डाइऑक्साइड अवशोषित करते हैं। गेवरा की यह पहल दर्शाती है कि सही योजना, वैज्ञानिक तकनीक और निरंतर प्रयासों से बंजर और पत्थरीली भूमि को भी घने जंगल में बदला जा सकता है। आने वाले वर्षों में यह क्षेत्र सघन हरित वन और जैव विविधता से भरपूर मानव निर्मित जंगल के रूप में विकसित होगा, जो पर्यावरण संरक्षण की दिशा में प्रेरणादायक उदाहरण बनेगा।
कोरबा
उद्यमिता विकास प्रशिक्षण हेतु 12 आवेदकों का चयन
कोरबा। रायपुर में आयोजित होने वाले उद्यमिता विकास संबंधी प्रशिक्षण कार्यक्रम के लिए 23 अप्रैल 2026 तक इच्छुक अभ्यर्थियों से आवेदन आमंत्रित किए गए थे। प्राप्त आवेदनों का परीक्षण एवं सारणीकरण किया गया, जिसके आधार पर कुल 12 आवेदकों का चयन किया गया है।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम 15 मई 2026 से प्रारम्भ होना सुनिश्चित है।चयनित आवेदकों की सूची इस प्रकार है-विकास कुमार, कौशलेंद्र सिंह, योगिता धाकड़े, विष्णु सिंह राठिया, आशुतोष मार्वल, अजय डहरिया, गौरव अग्रवाल, अमित कुमार चैहान, स्वप्निल पाटिल, राजकुमारी, वीरेंद्र कुमार तरुण, वंशिका सिंह सेंगर।
प्रशिक्षण कार्यक्रम से संबंधित आगे की जानकारी चयनित अभ्यर्थियों को समय-समय पर उपलब्ध कराई जाएगी।
कोरबा
सुरक्षित भविष्य कि ओर एक कदम – अपनी बेटी को दें सुरक्षा का उपहार
कोरबा। बेटियों के उज्जवल भविष्य और स्वस्थ जीवन में कैंसर जैसी गंभीर बिमारी से बचाव के लिए एचपीवी टीकाकरण अत्यंत आवश्यक है। यह टीका विशेष रूप से सर्वाइकल कैंसर (बच्चेदानी के मुँह का कैंसर) से सुरक्षा प्रदान करने में सहायक है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ.एस.एन.केशरी ने जिले के सभी पात्र बालिकाओं, अभिभावकों एवं नागरिकों से अपील किया है कि वे पात्र बालिकाओं (जिन किशोरियों ने 14 वर्ष की आयु पूर्ण कर ली हो, लेकिन 15 वर्ष का जन्मदिन न मनाया हो ) का एचपीवी का टीकाकरण करावं। यह टीका पूरी तरह सुरक्षित और डॉक्टर द्वारा प्रमाणित है। एचपीवी टीका राष्ट्रीय टीकाकरण के अंतर्गत मेडिकल कालेज संबद्ध जिला चिकित्सालय, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों में निःशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
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