देश
नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के सर्कुलेशन पर FIR:राहुल इसकी कॉपी लेकर संसद पहुंचे थे, दावा किया- चीन ने लद्दाख में घुसपैठ की थी
नई दिल्ली,एजेंसी। पूर्व आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी (Four Stars of Destiny)’ के सर्कुलेशन को लेकर दिल्ली पुलिस ने सोमवार को FIR दर्ज की है।
यह कार्रवाई अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और ऑनलाइन न्यूज फोरम पर सामने आई जानकारी के आधार पर की गई, जिसमें दावा किया गया था कि किताब की प्री-प्रिंट कॉपी सर्कुलेट हो रही है।
पुलिस के मुताबिक, इस किताब के पब्लिकेशन के लिए अभी संबंधित अधिकारियों से आवश्यक मंजूरी नहीं मिली है। पुलिस जांच में सामने आया कि इसी टाइटल वाली एक टाइप-सेट किताब की PDF कॉपी कुछ वेबसाइट्स पर उपलब्ध थी।
आशंका जताई गई है कि पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने जो कॉपी तैयार की थी, यह वही हो सकती है। इसके अलावा, कुछ ऑनलाइन मार्केटिंग प्लेटफॉर्म्स पर किताब के कवर को इस तरह दिखाया गया, जैसे वह खरीद के लिए उपलब्ध हो।
इस पूरे मामले की जांच के लिए दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने केस दर्ज किया है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि अप्रकाशित और बिना मंजूरी वाली किताब की सामग्री कैसे सार्वजनिक हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं।
यह FIR ऐसे समय दर्ज की गई है, जब 4 फरवरी को कांग्रेस सांसद राहुल गांधी को संसद परिसर में किताब की एक कॉपी दिखाते हुए देखा गया था। राहुल ने कहा था- अगर पीएम मोदी संसद आए तो उन्हें यह किताब दूंगा।

राहुल ने कहा था कि वह इस किताब के अंश लोकसभा में पढ़ना चाहते हैं लेकिन स्पीकर ओम बिरला ने इसकी इजाजत नहीं दी।

देश
अब इस कंपनी ने मचाया हाहाकार, बढ़ाए Petrol-Diesel के दाम, जानें कितना हुआ महंगा?
मुंबई, एजेंसी। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जाने का असर अब भारतीय बाजार में दिखने लगा है। हालांकि राहत की बात यह है कि सरकारी तेल कंपनियों ने आम जनता के लिए रेट स्थिर रखे हैं लेकिन निजी (Private) तेल कंपनियों ने अपने घाटे को कम करने के लिए कीमतों में भारी बढ़ोतरी कर दी है। Shell India ने पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा कर सबको चौंका दिया है।

निजी कंपनियों का बड़ा फैसला: रु.25 तक का उछाल
निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी Shell India ने 1 अप्रैल से अपने फ्यूल रेट्स में भारी बदलाव किया है:
डीजल: कीमतों में 25 रुपये प्रति लीटर की रिकॉर्ड बढ़ोतरी की गई है।
पेट्रोल: इसके दाम 7.41 रुपये प्रति लीटर तक बढ़ गए हैं।
असर: इस बढ़ोतरी के बाद निजी आउटलेट्स पर पेट्रोल और डीजल की कीमतें 119 से 123 रुपये के करीब पहुंच गई हैं। Nayara Energy के बाद अब शेल के इस कदम से निजी पंपों पर तेल भरवाना महंगा हो गया है।
सरकारी कंपनियों ने दी राहत: बड़े शहरों के रेट्स
इंडियन ऑयल (IOC), भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) जैसी सरकारी कंपनियों ने कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया है। प्रमुख शहरों में आज के रेट इस प्रकार हैं:

Premium Fuel भी हुआ महंगा
सिर्फ निजी कंपनियां ही नहीं सरकारी कंपनियों के प्रीमियम वैरिएंट्स की कीमतों में भी उछाल आया है:
XP100 (Indian Oil): इसकी कीमत में 11 रुपये का इजाफा हुआ है जिससे यह रु.149 से बढ़कर रु.160 प्रति लीटर पर पहुंच गया है।
एक्स्ट्रा ग्रीन (डीजल): इसकी कीमत रु.91.49 से बढ़कर रु.92.99 हो गई है।
क्यों बढ़ रही हैं कीमतें?
रूस-यूक्रेन या अन्य वैश्विक तनावों के कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं। सरकारी कंपनियां घाटा सहकर भी कीमतें स्थिर रखे हुए हैं लेकिन निजी कंपनियों के पास सब्सिडी का सहारा न होने के कारण वे सीधे ग्राहकों पर बोझ डाल रही हैं।

देश
RBI की नीति, अमेरिका-ईरान तनाव और तेल की कीमतों में उछाल से अगले सप्ताह शेयर बाजार में तेजी आने की संभावना
मुंबई,एजेंसी। वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू चिंताओं के कारण बढ़ी अस्थिरता के बीच भारतीय शेयर बाजार लगातार छठे सप्ताह गिरावट के साथ बंद हुए। बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई। निवेशक अब एक और महत्वपूर्ण सप्ताह के लिए तैयार हैं, जहां भारतीय रिजर्व बैंक के नीतिगत निर्णय, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से बाजार की दिशा तय होने की उम्मीद है।

छुट्टियों के कारण छोटा हुआ यह सप्ताह कमजोर शुरुआत के साथ शुरू हुआ, क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों के विश्वास को प्रभावित किया और व्यापक बिकवाली को जन्म दिया। हालांकि, तत्काल तनाव बढ़ने की आशंका कम होने और तेल की कीमतों में कुछ नरमी के संकेत मिलने से सप्ताह के मध्य में बाजारों में सुधार देखने को मिला। इस सुधार के बावजूद, अस्थिर वैश्विक संकेतों, विदेशी संस्थागत निवेशकों की लगातार निकासी, मुद्रास्फीति की चिंताओं और कमजोर रुपये के कारण अस्थिरता बनी रही।
सप्ताह के अंत तक निफ्टी 22,713.10 पर स्थिर हुआ, जबकि सेंसेक्स 73,319.55 पर बंद हुआ। निफ्टी के तकनीकी विश्लेषण पर टिप्पणी करते हुए विशेषज्ञों ने कहा कि तकनीकी दृष्टि से 22,150-21,900 का स्तर महत्वपूर्ण समर्थन क्षेत्र साबित हो सकता है। एक विश्लेषक ने बताया, “ऊपर की ओर, 23,000-23,500 के स्तर में प्रतिरोध देखा जा रहा है। साप्ताहिक सापेक्ष शक्ति सूचकांक (RSI) 27.88 पर है।”
आगे की बात करें तो, सभी की निगाहें RBI के आगामी मौद्रिक नीति निर्णय पर टिकी होंगी। मौद्रिक नीति समिति (MPC) की वित्त वर्ष 2027 के पहले सत्र के लिए 6 से 8 अप्रैल तक बैठक होनी है। भू-राजनीतिक घटनाक्रम भी एक महत्वपूर्ण कारक बने रहेंगे। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा संघर्ष और भी तीव्र होता दिख रहा है, सैन्य तनाव बढ़ने की खबरें आ रही हैं और डोनाल्ड ट्रंप ने कड़ी चेतावनी जारी की है।
स्थिति में और अधिक गिरावट वैश्विक जोखिम भावना को काफी हद तक प्रभावित कर सकती है और शेयर बाजारों में नई अस्थिरता पैदा कर सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, जो पहले से ही तेजी से बढ़ रही हैं, एक और महत्वपूर्ण कारक होंगी। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद ब्रेंट क्रूड की कीमत लगभग 109 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है। फरवरी के अंत से 50 प्रतिशत से अधिक की इस वृद्धि ने भारतीय कंपनियों के लिए मुद्रास्फीति के दबाव और इनपुट लागतों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

छत्तीसगढ़
ओडिशा में भूकंप, बस्तर में भी महसूस हुए झटके:करीब 5 किमी नीचे 4.4 तीव्रता के झटके, किसी भी तरह का कोई नुकसान नहीं
जगदलपुर,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के पड़ोसी राज्य ओडिशा के कोरापुट में शनिवार देर भूकंप आया, जिसके हल्के झटके बस्तर के कुछ इलाकों में भी महसूस किए गए हैं। रात करीब 11:31 बजे आए 4.4 तीव्रता के इस भूकंप का केंद्र ओडिशा का कोरापुट में था। झटके हल्के रहे और अब तक किसी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।

नजदीक का इलाका होने की वजह से जगदलपुर के आसपास के इलाकों में लोगों ने भूकंप के झटकों को महसूस किया। शहर के आडावाल क्षेत्र में भी कंपन महसूस होते ही कई लोग घरों से बाहर निकल आए। हालांकि, झटकों की अवधि बेहद कम होने के कारण अधिकांश लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला।

ओडिशा के कोरापुट था भूकंप का केंद्र
भूकंप का केंद्र ओडिशा के कोरापुट क्षेत्र में था, जो बस्तर मुख्यालय से करीब 80 किलोमीटर दूर स्थित है। यही वजह रही कि इसका असर बस्तर में भी महसूस किया गया। भूकंप मॉनिटरिंग ऐप से मिले आंकड़ों के मुताबिक, इसकी तीव्रता 4.4 मापी गई, जबकि केंद्र जमीन से लगभग 5 किलोमीटर गहराई में था।
कम गहराई के बावजूद तीव्रता कम होने के कारण झटके हल्के रहे। प्रशासन के अनुसार अब तक कहीं से किसी तरह के जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं मिली है।

अप्रैल 2024 में भी 2.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज हुआ था
दरअसल, एक समय बस्तर और कोरापुट क्षेत्र को भूकंप मुक्त माना जाता था, लेकिन पिछले कुछ समय में यहां बार-बार हल्के झटके महसूस किए जा रहे हैं। इससे पहले अप्रैल 2024 में भी 2.6 तीव्रता का भूकंप दर्ज किया गया था, जिसका केंद्र नजदीक होने के कारण उस समय कंपन ज्यादा महसूस हुआ था।
विशेषज्ञों का कहना है कि, इस क्षेत्र में भूकंप के केंद्र लगातार दर्ज हो रहे हैं, लेकिन तीव्रता कम होने से बड़े नुकसान की आशंका नहीं रहती। इसके बावजूद लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है।

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