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छत्तीसगढ़

अर्बन नक्सलवाद पर गृहमंत्री विजय शर्मा से सवाल:अर्बन नक्सल पर क्या कार्रवाई हुई है? गृहमंत्री बोले- उस दिशा में अभी कोई काम है नहीं और कहा नहीं जा सकता

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दुर्ग,एजेंसी। छत्तीसगढ़ के गृह मंत्री विजय शर्मा रविवार को दुर्ग जिले में थे। इस दौरान उन्होंने अर्बन नक्सलवाद के सवालों के जवाब में कहा कि अब तक सरकार की एक ही बात थी और वो ये थी कि हथियार छोड़ दें, भारत का संविधान हाथ में रखें और भारत के संविधान के अनुरूप जो करना है वो करें। तो इसमें उस दिशा में अभी कोई काम है नहीं और कहा नहीं जा सकता।

सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा।

सामाजिक कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे गृहमंत्री विजय शर्मा।

गृह मंत्री विजय शर्मा दुर्ग के पाटन क्षेत्र स्थित चन्द्राकर भवन, जामगांव (एम) पहुंचे, जहां उन्होंने चन्द्रनाहू कुर्मी क्षत्रिय समाज, दुर्ग राज के 56वें वार्षिक अधिवेशन में हिस्सा लेने पहुंचे थे। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने नक्सलवाद, सीएएफ वेटिंग अभ्यर्थियों के अलावा बंगाल चुनाव पर भी बात की।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।

106 दिन से धरने पर बैठे हैं सीएएफ वेटिंग के अभ्यर्थी

छत्तीसगढ़ में सीएफ वेटिंग लिस्ट के अभ्यर्थी 106 दिनों से धरना पर बैठे हैं। पुलिस की सख्ती का सामना भी कर रहे हैं। सीएएफ वेटिंग के अभ्यर्थियों के धरने के सवाल पर विजय शर्मा ने कहा कि मैंने उनके लिए स्वंय बात की है। 2017 का वेटिंग लिस्ट अभी कैसे संभव हो सकता है? मैं उनसे हाथ जोड़कर निवेदन करता हूं जो चर्चा है बैठ कर करें, उनके मन में जो शंका है उस पर चर्चा करें। लेकिन ऐसा नहीं करना चाहिए।

बस्तर में अब विकास पर देंगे ध्यान

नक्सल मुद्दे पर गृह मंत्री ने कहा कि बस्तर के गांवों में पहले बुनियादी सुविधाओं का अभाव था। स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी, बिजली, पानी, सड़क और मोबाइल टावर जैसी सुविधाएं नहीं थीं, लेकिन अब सरकार इन सभी व्यवस्थाओं को मजबूत करने पर काम कर रही है। अर्बन नक्सल के सवाल पर उन्होंने कहा कि सरकार की स्पष्ट नीति है कि हथियार छोड़कर संविधान के रास्ते पर चलें, उसी दिशा में काम होना चाहिए।

अभी सुरक्षा बलों को नहीं हटाया जाएगा

नक्सल उन्मूलन के बाद फोर्स वापसी के सवाल पर विजय शर्मा ने कहा कि सुरक्षा बलों की मौजूदगी अभी जरूरी है। उन्होंने कहा कि जैसे ऑपरेशन के बाद तुरंत डॉक्टर को हटाना ठीक नहीं होता, उसी तरह नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अभी एहतियात जरूरी है। उन्होंने कहा कि आईईडी कौन निकालेगा? हम लोग जाकर निकालेंगे कि फोर्स निकालेगी? उसकी टेक्नोलॉजी है, उस पर फोर्स काम करती है। अभी प्रतिदिन यही काम चल रहा है। हम लोग कोशिश करेंगे नक्सल मुक्त गांव की तरह आईईडी फ्री विलेज बना दें वहां पर।

जिन्होंने नक्सलवाद के नाम पर कुछ नहीं किया ये उनके मन का शिगुफा

नक्सल मुक्त गांवों को मिलने वाली एक करोड़ रुपये की सहायता राशि पर उन्होंने बताया कि दो गांवों को राशि मिल चुकी है और यह योजना पंचायत प्रस्ताव के आधार पर लागू होती है। गृहमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि ये तो शिगूफा है इन लोगों का, जिन्होंने नक्सलवाद के नाम पर कुछ नहीं किया, जिन्होंने जेब में रख कर नक्सल के विषय पर कुछ नहीं किया। जिन्होंने झीरम के विषय में शहीद हुए लोगों के संदर्भ में भी कुछ नहीं किया। ये उनके मन का शिगूफा है। ‘इनवद पंचायत’ योजना थी, उसके अंतर्गत गांव के नाम घोषित किए जाते थे कि इन गांव में अगर आप ऐसा करेंगे नक्सल फ्री इसको और पंचायत का प्रस्ताव कर कर लाएंगे तो हम उसको कर देंगे। जिन गांव ने किया उनको दिया गया है।

10 किलो सोना नक्सलियों से मिला

वहीं नक्सलियों से जब्त सोने के मामले में उन्होंने कहा कि लगभग 10 किलो सोना मिला है और यह जांच का विषय है, इसलिए इस पर अभी कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी। ये डंप है, इन्वेस्टिगेशन का विषय है। कुल मिलाकर तो लगभग 10 किलो सोना आया है। पश्चिम बंगाल चुनाव को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि वहां की जनता परिवर्तन का मन बना चुकी है और इस बार बंगाल में बदलाव देखने को मिलेगा।

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कोरबा

महंगाई के विरोध में कांग्रेस ने दर्री में निकाली शवयात्रा

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कोरबा। लगातार बढ़ती महंगाई को लेकर 21 मई को दर्री क्षेत्र जमनीपाली में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल  के नेतृत्व में कांग्रेसजनों द्वारा केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में वरिष्ठ कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता एवं आम नागरिक उपस्थित रहे।

पूर्व मंत्री श्री अग्रवाल ने कहा कि डीजल, पेट्रोल, रसोई गैस (एलपीजी) तथा अन्य दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्रियों के दामों में जिस तेजी से बढ़ोतरी हो रही है, उससे आम जनता का जीवन अत्यंत कठिन हो गया है। महंगाई ने मध्यमवर्गीय एवं गरीब परिवारों की कमर तोड़ दी है और लोगों के लिए गृहस्थी चलाना दुश्वार हो गया है।

उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतों में वृद्धि का सीधा असर परिवहन व्यवस्था एवं आवश्यक वस्तुओं पर पड़ता है, जिसके कारण हर वस्तु महंगी होती जा रही है। रसोई गैस सिलेंडर के बढ़ते दामों ने गृहिणियों का बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है। वहीं खाद्य तेल, दाल, सब्जियां एवं अन्य आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि से आम नागरिक आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।

जयसिंह अग्रवाल ने केंद्र एवं राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को राहत देने के बजाय सरकार केवल बड़े-बड़े दावे कर रही है, जबकि जमीनी हकीकत यह है कि आम आदमी महंगाई से त्रस्त है। उन्होंने मांग की है कि पेट्रोल, डीजल एवं एलपीजी की कीमतों में तत्काल कमी की जाए तथा आवश्यक वस्तुओं के बढ़ते दामों पर नियंत्रण के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। जमनीपाली पेट्रोल पंप के पास पिछले दो दिनों से डीजल के अभाव में दर्जनों ट्रक सड़क किनारे कतार से खड़े हैं ।

विरोध प्रदर्शन रैली में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने प्रतीकात्मक तौर पर मंहगाई का अर्थी सजाकर शवयात्रा निकाला और मातमपुर्शी करते हुए ‘राम नाम सत्य है, मंहगाई जबरजस्त है’, महंगाई की मार, अब नहीं सहेंगे यार । जनता त्रस्तः भाजपा मस्त, जैसे नारे भी लगाये ।

इस आयोजन में प्रमुख रूप से जयसिंह अग्रवाल के साथ प्रदेश सचिव विकास सिंह, कोरबा जिला कांग्रेस अध्यक्ष (शहर) मुकेश कुमार राठौर, जिला कांग्रेस अध्यक्ष (ग्रामीण) मनोज चौहान, पूर्व जिलाध्यक्ष नत्थूलाल यादव, पूर्व सभापति धुरपाल सिंह कँवर, युवा कांग्रेस अध्यक्ष राकेश पंकज, बालको नगर ब्लाक अद्ध्यक्ष ए.डी.जोशी, राजेंद्र तिवारी, पालुराम साहू, बसंत चंद्रा, पूर्व ब्लाक अध्यक्ष सुधीर जैन, पार्षद नारायण लाल कुर्रे, रवि सिंह चंदेल, मंडल अध्यक्ष रोपा तिर्की, इकबाल कुरैशी, पूर्व पार्षद सुरती कुलदीप, अविनाश बंजारे, वरिष्ठ कांग्रेसी राजेंद्र सिंह ठाकुर, रेखा त्रिपाठी, रतन यादव, संजय अग्रवाल, हरवेन्द्र सिंह, अनिल द्विवेदी, राम इकबाल, बिसाहु दास, देवीदयाल तिवारी, भरत साहु, राजकुमार श्रीवास, जाकिर खान, डॉ.डी आर नेताम, सीमा कुर्रे, छत्रपाल कुर्रे, संतोष ठाकुर, रमेश दास महंत, सिकंदर मेमन, शशि साहु, हीरा साहु, संतोष यादव, संगीता श्रीवास, पार्षद अयोध्या मस्तुल कंवर, परमानंद सिंह, प्रवीण कुमार, मधुसुदन दास सहित कांग्रेस के अनेक वरिष्ठ नेता, जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता बड़ी संख्या में उपस्थित रहे।
विरोध प्रदर्शन के दौरान कांग्रेसजनों ने महंगाई के खिलाफ जोरदार नारेबाजी करते हुए कहा कि यदि सरकार ने शीघ्र ही जनता को राहत नहीं दी, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आगे भी व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होगी।

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कोरबा

सिंघाली क्षेत्र में बिजली तार चोरी से ग्रामीण अंधेरे में, राजेश यादव ने तत्काल बिजली व्यवस्था बहाल करने की उठाई मांग

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ढेलवाडीह/कटघोरा। कटघोरा सब स्टेशन ढेलवाडीह से संचालित देवरी फीडर अंतर्गत ढेलवा डीह जंगल से जवाली-सिंघाली पुल तक लगभग 7 से 8 किलोमीटर क्षेत्र में अज्ञात चोरों द्वारा करीब 25 से 30 बिजली पोलों के तार काटकर चोरी कर लिए जाने का मामला सामने आया है। इस घटना से जवाली, सिंघाली और देवरी क्षेत्र की विद्युत व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है और ग्रामीण अंधेरे में जीवन यापन करने को मजबूर हैं।

जानकारी के अनुसार 14 मई को सिंघाली में सुशासन दिवस का कार्यक्रम आयोजित किया गया था, लेकिन इसके अगले ही समय बिजली प्रवाहित खंभों से तार चोरी कर चोरों ने पुलिस और बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना के बाद ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

भारतीय जनता पार्टी झुग्गी झोपड़ी प्रकोष्ठ के प्रदेश सह संयोजक राजेश यादव ने प्रशासन एवं बिजली विभाग से तत्काल क्षतिग्रस्त विद्युत लाइनों की मरम्मत कर बिजली आपूर्ति बहाल करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी के बीच ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली बाधित होने से आमजन को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

ग्रामीणों ने भी क्षेत्र में लगातार बढ़ रही बिजली चोरी की घटनाओं पर चिंता जताते हुए रात्रि गश्त बढ़ाने, दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी करने तथा बिजली लाइनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग प्रशासन से की है।

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कोरबा

तेज धूप और थकान में भी हरा सोना से मिलती है राहत

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गाँव-गाँव इन दिनों तेंदूपत्ता संग्रहण का चल रहा सिलसिला

कोरबा। तेज़ दोपहरी की धूप हो या गाँव के तालाबों में कम होता पानी, गर्मी का मौसम अपने साथ कई चुनौतियाँ लेकर आता है। लेकिन कोरबा जिले के दूरस्थ गाँव लेमरू के परिवारों के लिए यही मौसम खुशियों की सौगात भी लेकर आया है। कारण है—तेंदूपत्ता के बढ़े हुए दाम, जिसने इस क्षेत्र के सैकड़ों संग्राहक परिवारों की उम्मीदों को नई उड़ान दी है।

गाँव की गलियों में दोपहर का सन्नाटा भले ही छाया रहता हो, पर जंगल की ओर जाने वाली पगडंडियों पर सुबह से शाम तक रौनक देखने को मिलती है। महिलाएं, युवा, बच्चे और बुजुर्ग तेंदूपत्ता संग्रहण में जुटे हुए हैं। जंगलों से पत्ते तोड़कर लाना, उन्हें गठरी में भरकर घर तक लाना और फिर घर की परछी में बैठकर 50-50 पत्तों के बंडल बनाना—इन सब कामों के बीच उनके चेहरों पर एक समान चमक दिखाई देती है। सभी के मन में यही खुशी है कि दाम बढ़ने से आमदनी भी बढ़ेगी और जितना अधिक संग्रहण होगा, उतनी ही आमदनी मिलेगी।

लेमरू गाँव के संतोष यादव और उनकी पत्नी दिव्या यादव हर सुबह सूरज निकलने से पहले लाम पहाड़ के जंगल की ओर निकल जाते हैं। दिव्या बताती हैं कि सुबह से दोपहर तक पत्ते तोड़ते हैं, फिर दोपहर के बाद खाना खाकर घर में बैठकर बंडल बनाना शुरू करते हैं। इस बार वे पिछले साल से कहीं अधिक पत्ता तोड़ रहे हैं, क्योंकि कीमत भी बढ़ी है और मेहनत का सीधा लाभ मिलने वाला है। संतोष परसा पेड़ की छाल से रस्सी बनाकर तेंदूपत्तों की गड्डी तैयार करते हैं।
दिव्या, जिन्हें महतारी वंदन योजना से प्रति माह 1000 रुपये की सहायता मिलती है, बताती हैं कि यह राशि उनके परिवार के लिए बेहद उपयोगी है। तेंदूपत्ता संग्रहण और योजना से मिली सहायता मिलकर अब उनके परिवार के लिए बेहतर भविष्य की राह खोल रहे हैं। वे खुशी से बताती हैं कि अब प्रति मानक बोरा की कीमत 5500 रुपये कर दी गई है, जिससे वे अपने घर के निर्माण का सपना पूरा करना चाहती हैं।
गाँव की ही सोना बाई और सुमित्रा बाई भी सुबह-सुबह जंगल जाती हैं। वे कहती हैं कि जितना ज्यादा पत्ता तोड़ेंगे, उतनी ही आय होगी। पहले कीमत 2500 रुपये थी, फिर 4000 हुई और अब 5500 रुपये होने से उनके जीवन में बड़ा बदलाव आया है। तेंदूपत्ता संग्राहक कार्ड के माध्यम से बीमा और बच्चों को छात्रवृत्ति जैसी सुविधाएँ भी मिल रही हैं, जो वन क्षेत्र के परिवारों के लिए महत्वपूर्ण सहारा बन चुकी हैं।
तेंदूपत्ता के बढ़े दामों ने संग्राहकों के चेहरों पर नई रोशनी ला दी है। संग्राहकों ने कीमत वृद्धि पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार जताया है। उन्हें भरोसा है कि बढ़ी हुई कीमतें उनकी मेहनत का उचित प्रतिफल देंगी और उनकी आर्थिक स्थिति को और मजबूत बनाएँगी।
गर्म हवाओं और सूखे खेतों के बीच भी लेमरू के इन परिवारों के चेहरों पर चिंता नहीं, बल्कि उम्मीद की हरियाली है। तेंदूपत्ता सिर्फ उनका रोज़गार नहीं है, बल्कि जीवन बदलने की एक मजबूत ताकत है। यह कहानी तेंदूपत्ते की नहीं, बल्कि उन परिवारों की है जिन्होंने मेहनत, आत्मविश्वास और बढ़ी हुई कीमतों के सहारे अपने जीवन में नई खुशियों की हरियाली उगाई है।

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