छत्तीसगढ़
पीईकेबी खदान को पांच सितारा खिताब,कोयला मंत्रालय ने सरगुजा स्थित खदान को श्रेष्ठ संचालन के लिए नवाजा

सरगुजा, एजेंसी। पीईकेबी खदान को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में केन्द्रीय कोयला मंत्री, प्रल्हाद जोशी द्वारा पांच सितारा खान से सम्मानित करते हुए पुरस्कार प्रदान किया गया, जिसे राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओर से निदेशक (तकनीकी) देवेन्द्र श्रृंगी ने प्राप्त किया।
भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा खदानों के संचालन प्रणाली, पर्यावरण सुरक्षा और सुरक्षा इंतजामों ने नए उपकरणों के उपयोग से उत्कृष्ठ प्रदर्शन के लिए परसा ईस्ट कांता बासन (पीईकेबी) ओपनकास्ट कोयला खदान को लगातार चौथे साल में भी पांच सितारा खदान के खिताब से नवाजा गया है।
जिले के उदयपुर ब्लॉक में राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) की पीईकेबी कोयला खदान ने ओपन कास्ट कोयला खदानों के अनुभागों में पांच सितारा सम्मान पिछले चार साल से लगातार मिलने से छत्तीसगढ़ में नया रिकार्ड कायम किया है।
राजस्थान के निगम की इस खदान से राज्य की 4340 मेगावाट क्षमता की तापीय विद्युत परियोजनाओं को कोयले की आपूर्ति की जाती है, जिससे आठ करोड़ उपभोक्ताओ को सस्ती और निरंतर बिजली मिल पा रही है।
भारत सरकार के कोयला मंत्रालय द्वारा आयोजित और राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के मार्गदर्शन में खदानों को पांच सितारा रेटिंग के लिए बेहद सख्त सात मॉड्यूलों में खुली खानों और भूमिगत खानों के मूल्यांकन पैरामीटर विनिर्दिष्ट किये गए हैं, जिनमें भारत की 47 भूमिगत और 50 खुली खानों द्वारा स्व-मूल्यांकन के लिए विस्तृत मापदंडों के तहत आवेदन करना होता है।
पीईकेबी खदान को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक सार्वजनिक समारोह में केन्द्रीय कोयला मंत्री, प्रल्हाद जोशी द्वारा पांच सितारा खान से सम्मानित करते हुए पुरस्कार प्रदान किया गया। जिसे राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम की ओर से निदेशक (तकनीकी) देवेन्द्र श्रृंगी ने प्राप्त किया।
एक नजर स्व-मूल्यांकन एवं सत्यापन के पारदर्शी प्रक्रिया पर
पीईकेबी खदान द्वारा खनन संचालन, पर्यावरण, प्रौद्योगिकियों को अपनाना एवं सर्वोत्तम खनन अभ्यास, आर्थिक प्रदर्शन, पुनर्वास और पुनस्र्थापन, कर्मचारी स्वास्थ्य और सुरक्षा अनुपालन संबंधी कारक में वर्ष 2022-23 में 93 फीसदी अंक के साथ उत्कृष्ठ प्रदर्शन किया गया।
दरअसल, राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र की टीम द्वारा मूल्यांकन पैरामीटर में सभी लागू मापदंडों के अधिकतम अंकों का योग और उनके उच्चतम प्रतिशत के अनुसार ही सितारा का खिताब आवंटित किया जाता है, जैसे 91 से 100 फीसदी अंकों को 5 स्टार, 81 से 90 फीसदी में 4 स्टार, 71 से 80 फीसदी को 3 स्टार, 61 से 70 फीसदी को 2 स्टार, 41 से 60 फीसदी को 1 स्टार का सम्मान दिया जाता है।
वहीं 0 से 40 फीसदी अंकों पर कोई भी सितारा नहीं दिया जाता है। खान प्रबंधन द्वारा घोषित स्व-मूल्यांकन के बाद इसके मान्यकरण के लिए कोयला मंत्रालय का ‘कोयला नियंत्रक संगठन’ उत्तरदायी होता है। मुख्य नियंत्रण अधिकारी के क्षेत्रीय कार्यालय अपने अधिकार क्षेत्र के तहत कोयला खानों के लिए सत्यापन व समन्वय के लिए जिम्मेदार होते हैं।
प्रत्येक टीम में मुख्य नियंत्रण अधिकारी प्रतिनिधि सहित 3 सदस्य होते हैं और टीम का कोई भी सदस्य उसी खदान से ताल्लुक नहीं रखता, जिसकी खदान का सत्यापन किया जा रहा हो। सीसीओ द्वारा निर्दिष्ट समय-सीमा में पारदर्शी तौर पर उन्हीं खानों को सौंपा जाता है जिन्हें प्रत्येक समिति द्वारा मान्य किया गया हो।
चार साल से निरंतर पांच सितारा खदान घोषित
उपरोक्त प्रक्रिया को नियमत: पूर्ण करने के पश्चात कोयला मंत्रालय द्वारा खानों को पाँच सितारा मान्यता और पुरस्कारों से सम्मानित किया जाता है, जिनमें वित्तीय वर्ष 2018-19 से 2022-23 तक के सत्यापित कुल 20 भूमिगत खदानों और 48 ओपेनकास्ट खदानें शामिल हुई।
इसमें आरआरवीयूएनएल की पीईकेबी खुली खदान को वर्ष 2019-20, 2020-21,2021,22 और 2022-23 के लिए सभी सत्यापन प्रक्रियाएं पूर्ण की गईं। इसके साथ ही सीसीओ द्वारा पीईकेबी को क्रमश: स्टार रेटिंग और रिपोर्टिंग वर्ष का उल्लेख करते हुए आधिकारिक प्रमाण पत्र भी प्रदान किया गया।
पांच सितारा पुरस्कार से सम्मानित आरआरवीयूएनएल की सरगुजा जिले के उदयपुर ब्लॉक में स्थित पीईकेबी खदान के माइनिंग डेवलपर और ऑपरेटर के तौर अदाणी समूह की अदाणी नेचुरल रिसोर्सेस कार्यरत है।
छत्तीसगढ़
सुकमा : मरीज को मिला समय पर उपचार, सुकमा के चिकित्सकों की टीम ने दिखाई तत्परता
जिला अस्पताल में मौत के मुंह से लौटाई महिला की सांसें
सुकमा। सुकमा जिला अस्पताल में स्वास्थ्य सेवा की तत्परता और आधुनिक संसाधनों की उपलब्धता का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है। सिविल सर्जन डॉ. एमआर कश्यप से प्राप्त जानकारी के अनुसार छिंदगढ़ विकासखंड के कुन्ना निवासी 38 वर्षीय श्रीमती पाली कवासी को गंभीर अवस्था में जिला अस्पताल सुकमा में भर्ती कराया गया।

देरी से अस्पताल पहुंचने के कारण स्थिति अत्यंत जोखिमपूर्ण थी और तत्काल सर्जरी आवश्यक हो गई। अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुजा ने बिना समय गंवाए तुरंत एलएससीएस (सीजर) ऑपरेशन कर मरीज का उपचार प्रारंभ किया। हालांकि ऑपरेशन के दौरान मृत बच्चा पैदा होने से महिला की स्थिति और अधिक जटिल हो गई।
महिला की हालत लगातार बिगड़ती चली गई और रेफर करने की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान महिला का श्वास बंद सा हो गया, साथ ही नाड़ी और हृदय की धड़कन भी थम सी गई। ऐसे संकट की घड़ी में जिला अस्पताल की मेडिकल टीम ने त्वरित निर्णय लेते हुए महिला को दो बार सीपीआर दिया और तत्काल वार्ड में शिफ्ट कर आधुनिक वेंटीलेटर की सहायता से उपचार शुरू किया गया। इसके बाद महिला को दो यूनिट रक्त चढ़ाया गया।
डॉक्टरों की सतर्कता और उपलब्ध संसाधनों के कारण महिला की जान बचा ली गई। आज श्रीमती पाली कवासी पूरी तरह स्वस्थ हैं और जिला अस्पताल के डॉक्टरों व स्टाफ के प्रयासों की सराहना कर रही हैं।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के मातृत्व वन में किया सीता अशोक के पौधे का रोपण
जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने सर्किट हाउस जशपुर के मातृत्व वन में एक पेड़ मां के नाम अभियान के तहत सीता अशोक के पौधे का रोपण कर पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन को बढ़ावा देने के लिए लोगों को प्रोत्साहित किया।
इस अवसर पर कलेक्टर रोहित व्यास वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार और वनमंडला अधिकारी शशि कुमार और अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

लगभग 2 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस मातृत्व वन में 400 से अधिक विभिन्न प्रजातियों के पौधों का रोपण किया गया है, जो पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक संवेदनाओं के अद्वितीय समन्वय का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मातृत्व वन में ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के तहत जिले के जनप्रतिनिधियों द्वारा अपनी माताओं के नाम पर पौधरोपण किया गया है। इस पहल ने अभियान को भावनात्मक और सामाजिक रूप से विशेष महत्व प्रदान किया है।
राज्यपाल रमेन डेका ने इस अवसर पर कहा कि माँ हमारे जीवन की प्रथम गुरु होती हैं और उनका स्थान सर्वोच्च होता है। ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान के माध्यम से हम माँ के प्रति सम्मान को प्रकृति से जोड़ रहे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ सामाजिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करेगी। उन्होंने कहा कि मातृत्व वन जैसी पहल न केवल हरित क्षेत्र बढ़ाने में सहायक होगी, बल्कि समाज में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी का भाव भी विकसित करेंगी।
मातृत्व वन के अंतर्गत पर्यावरणीय एवं औषधीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पौधों का चयन कर उनका रोपण किया गया है। इनमें टिकोमा, झारुल, सीता अशोक, गुलमोहर, लक्ष्मीतरु, आंवला, बीजा, सिन्दूर, नागकेसरी, अर्जुन एवं जामुन जैसी प्रजातियाँ प्रमुख हैं। ये पौधे न केवल पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में सहायक होंगे, बल्कि आने वाले समय में औषधीय एवं जैव विविधता के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मातृत्व वन की स्थापना का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना, माताओं के प्रति सम्मान को प्रकृति के माध्यम से अभिव्यक्त करना तथा नई पीढ़ी में संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। यह पहल ‘हर घर एक पेड़, हर पेड़ में माँ की ममता’ के संदेश को साकार करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

छत्तीसगढ़
जशपुर : राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर के केरेगांव होम-स्टे का किया अवलोकन

जशपुर। राज्यपाल रमेन डेका ने जशपुर प्रवास के दौरान शनिवार को जिले के प्रमुख पर्यटन स्थल देशदेखा के समीप स्थित केरेगांव में विकसित होम-स्टे का अवलोकन किया। इस दौरान वे स्थानीय आदिवासी संस्कृति, जनजीवन और पारंपरिक आतिथ्य परंपरा से रूबरू हुए। होम-स्टे प्रवास के दौरान उन्होंने देशदेखा समूह की महिलाओं द्वारा पारंपरिक विधि से तैयार किए गए व्यंजनों का स्वाद चखा। राज्यपाल श्री डेका ने ग्रामीण परिवेश में विकसित होम-स्टे को प्रेरणादायक कदम बताया और कहा कि यह प्रयास न केवल ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देते हैं, बल्कि स्थानीय महिलाओं और ग्रामीण परिवारों की आजीविका को सशक्त बनाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका भी निभाते हैं।
इस दौरान स्व-सहायता समूहों की महिलाओं ने ‘जसक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत छिंद एवं कांसा से निर्मित पारंपरिक आभूषण माला एवं झुमके राज्यपाल को भेंट किए। राज्यपाल श्री डेका ने स्थानीय महिलाओं द्वारा निर्मित उत्पादों की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल कौशल विकास, रोजगार सृजन तथा आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई गति प्रदान करेगी।

इस दौरान ‘देशदेखा क्लाइंबिंग कम्पनी’ के सदस्यों ने भी राज्यपाल से भेंट की। उन्होंने क्षेत्र में एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देने के प्रयासों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नियमित रूप से रॉक क्लाइंबिंग जैसे खेलों का आयोजन किया जाता है। राज्यपाल ने अधिकारियों को ऐसे खेलों को निरंतर सहयोग और प्रोत्साहन देने को कहा, ताकि पर्यटन को बढ़ावा मिले और अधिक से अधिक युवा इन गतिविधियों की ओर आकर्षित हों। इस दौरान कलेक्टर रोहित व्यास, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. लाल उमेद सिंह, जिला पंचायत सीईओ अभिषेक कुमार,वनमंडलाधिकारी शशि कुमार सहित अन्य अधिकारीगण एवं ग्रामीणजन उपस्थित थे।

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