देश
100-200-500 के नोटों पर बड़ा अपडेट, जल्द होने वाला है ये काम
मुंबई, एजेंसी। 100, 200 और 500 रुपए के नोटों को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है, जो आम लोगों से लेकर व्यापारियों तक के लिए राहत भरी खबर है। वैश्विक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के बीच सरकार ने नकदी आपूर्ति को मजबूत करने की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। इसी के तहत करंसी पेपर का उत्पादन बढ़ाया गया है, जिससे जल्द ही बाजार में नए नोटों की उपलब्धता बढ़ने की उम्मीद है। मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम स्थित प्रतिभूति कागज कारखाना (एसपीएम) ने उत्पादन बढ़ाकर हालात को संभालने का संकेत दिया है।

कारखाने ने तय लक्ष्य से अधिक करंसी पेपर तैयार किया है, जिससे आने वाले समय में 100, 200 और 500 रुपए के नए नोट बाजार में उपलब्ध हो सकेंगे। इससे आम लोगों और व्यापारियों को लेनदेन में आसानी मिलने की उम्मीद है, खासकर ऐसे समय में जब वैश्विक अनिश्चितता के चलते नकदी की मांग बढ़ सकती है।
एसपीएम देश का प्रमुख करंसी पेपर उत्पादन केंद्र है, जहां भारतीय नोटों के लिए कागज तैयार किया जाता है। पहले भी नोटों की कमी के समय यहां 10 और 20 रुपए के नोटों के लिए कागज तैयार किया जा चुका है।
लक्ष्य से ज्यादा उत्पादन
कारखाने ने 31 मार्च 2025 से 31 मार्च 2026 के बीच 7 मीट्रिक टन करंसी पेपर का उत्पादन किया, जबकि लक्ष्य 6 मीट्रिक टन का था। प्रबंधन और कर्मचारियों के बीच बेहतर तालमेल के चलते यह उपलब्धि हासिल हुई है। नए वित्तीय वर्ष में भी उत्पादन लगातार जारी है, जिससे भविष्य में नोटों की आपूर्ति और मजबूत होने की संभावना है।
कैश की बढ़ती जरूरत में मददगार
विशेषज्ञों का कहना है कि 500 रुपए के नोट के बाद 100 रुपए के नोट का सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है, जबकि 200 रुपए के नोट तीसरे स्थान पर आते हैं। यही कारण है कि एटीएम में इन नोटों की अधिक उपलब्धता जरूरी मानी जाती है।
अगर वैश्विक हालात के चलते इंटरनेट सेवाओं या डिजिटल लेनदेन में कोई बाधा आती है, तो ये नए नोट नकद लेनदेन को सुचारू बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।
अर्थव्यवस्था को मजबूती
प्रतिभूति कागज कारखाना देश की एक महत्वपूर्ण इकाई है, जिसने पहले 1000 रुपए के नोट के लिए भी कागज तैयार किया था। इसके अलावा पासपोर्ट और स्टांप पेपर के निर्माण में भी यह आत्मनिर्भरता को मजबूत करता है।
कारखाने के अधिकारियों के अनुसार, हर परिस्थिति में काम करने की क्षमता और टीमवर्क के दम पर उत्पादन लक्ष्य से आगे निकलना संभव हुआ है। वहीं, बैंकिंग और व्यापार जगत के जानकारों का मानना है कि नए नोटों की उपलब्धता से बाजार में लेनदेन और सुचारू होगा, जिससे आमजन को सीधा फायदा मिलेगा।
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JEE Advanced Result: शुभम कुमार ने किया टॉप, सोशल मीडिया से दूरी और नेगेटिव खबरों को नज़रअंदाज़ कर पास की परीक्षा
नई दिल्ली, एजेंसी। देश के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों (IITs) में दाखिले के लिए आयोजित होने वाली प्रवेश परीक्षा ‘जेईई एडवांस्ड 2026’ (JEE Advanced 2026) के परिणाम आज घोषित कर दिए गए हैं। इस साल परीक्षा का आयोजन आईआईटी रुड़की (IIT Roorkee) द्वारा किया गया था। नतीजों के जारी होते ही देश भर के करीब 1.8 लाख इंजीनियरिंग उम्मीदवारों का लंबा इंतजार खत्म हो गया है।
इस वर्ष की परीक्षा में IIT दिल्ली ज़ोन के शुभम कुमार ने ऑल इंडिया रैंक-1 (AIR 1) हासिल कर पूरे देश में टॉप किया है। वहीं, छात्राओं (महिला वर्ग) में आरोही देशपांडे देश भर में अव्वल रहीं।
कॉमन रैंक लिस्ट (CRL) में पहला स्थान पाने वाले शुभम कुमार ने 360 अंकों में से 330 अंक प्राप्त कर यह ऐतिहासिक सफलता हासिल की है। इस साल की मेरिट लिस्ट में आईआईटी दिल्ली ज़ोन का दबदबा देखने को मिला है। टॉप-3 में शामिल अन्य दो छात्र-कबीर छिल्लर (दूसरा स्थान) और जतिन चाहर (तीसरा स्थान) भी इसी ज़ोन से आते हैं।

कैसे देखें नतीजे
उम्मीदवार JEE Advanced के आधिकारिक पोर्टल के ज़रिए अपने नतीजे देख सकते हैं। अपना स्कोरकार्ड डाउनलोड करने के लिए, छात्रों को अपने रजिस्ट्रेशन या रोल नंबर, जन्म तिथि और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर का इस्तेमाल करके लॉग इन करना होगा। अधिकारियों ने उम्मीदवारों को सलाह दी है कि वे अपने स्कोरकार्ड की एक प्रिंटेड कॉपी अपने पास सुरक्षित रखें, क्योंकि एडमिशन और काउंसलिंग की प्रक्रिया के दौरान इसकी ज़रूरत पड़ेगी।
आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि JEE Advanced 2026 के लिए 1,87,389 उम्मीदवारों ने रजिस्ट्रेशन कराया था, जबकि 17 मई को आयोजित दोनों परीक्षा पत्रों में 1,79,694 उम्मीदवार शामिल हुए थे। परीक्षा देने वालों में से 56,880 उम्मीदवार क्वालिफ़ाई हुए, जिनमें 10,107 छात्राएँ शामिल हैं।
यह परीक्षा एक ही दिन दो सत्रों में आयोजित की गई थी। पेपर 1 सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक हुआ, जबकि पेपर 2 दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक देश भर के केंद्रों पर आयोजित किया गया था। JEE Advanced, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) द्वारा पेश किए जाने वाले अंडरग्रेजुएट प्रोग्राम्स में दाखिले का ज़रिया है; IITs को भारत के सबसे प्रतिष्ठित इंजीनियरिंग संस्थानों में से एक माना जाता है। जो उम्मीदवार इस परीक्षा में सफल हुए हैं, वे अब Joint Seat Allocation Authority (JoSAA) द्वारा आयोजित काउंसलिंग और सीट आवंटन प्रक्रिया में हिस्सा लेंगे।
इस परीक्षा के स्कोर को सभी IITs स्वीकार करते हैं, जिनमें बॉम्बे, दिल्ली, मद्रास, कानपुर, खड़गपुर, रुड़की, गुवाहाटी, हैदराबाद, वाराणसी और धनबाद के IITs शामिल हैं।
अब जब नतीजे घोषित हो चुके हैं, तो सफल उम्मीदवार अपनी शैक्षणिक यात्रा के अगले चरण की शुरुआत कर सकते हैं; वहीं, अन्य उम्मीदवारों के लिए NITs, IIITs और कई प्रमुख सरकारी इंजीनियरिंग संस्थानों के माध्यम से अभी भी अवसर मौजूद हैं।
देश
जानिए कौन हैं नागेंद्र नाथ त्रिपाठी… जिन्हें भाजपा ने दी बड़ी जिम्मेदरी?
नई दिल्ली, एजेंसी। लगभग पांच राज्यों में 2027 में हाेने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी संगठन को मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। इसी कड़ी में भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने पार्टी के वरिष्ठ नेता नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को राष्ट्रीय संगठक नियुक्त किया है। पार्टी के एक पदाधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।
भाजपा के लिए बिहार और झारखंड में कर चुके हैं काम
त्रिपाठी बिहार और झारखंड के लिए भाजपा के क्षेत्रीय महामंत्री के रूप में सेवाएं दे रहे थे। भाजपा के राष्ट्रीय महामंत्री (संगठन) अरुण सिंह ने एक अधिसूचना में कहा, भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने नागेंद्र नाथ त्रिपाठी को पार्टी का राष्ट्रीय संगठक (विशिष्ट कार्यकर्ता संपर्क) नियुक्त किया है।” सिंह ने कहा, ”उनका केंद्र दिल्ली रहेगा।

वरिष्ठ कार्यकर्ताओं से समन्वय पर रहेगा फोकस
पार्टी सूत्रों के अनुसार, इस पद का प्रमुख उद्देश्य वरिष्ठ कार्यकर्ताओं के साथ संवाद, समन्वय और संगठनात्मक अनुभवों को पार्टी की गतिविधियों से जोड़ना है। भाजपा लगातार संगठन विस्तार और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संपर्क को प्राथमिकता देती रही है। ऐसे में यह नियुक्ति संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि नागेंद्र नाथ त्रिपाठी की नियुक्ति तत्काल प्रभाव से प्रभावी होगी। नियुक्ति की सूचना पार्टी के सभी राष्ट्रीय पदाधिकारियों, प्रदेश प्रभारियों और प्रदेश अध्यक्षों को भी भेज दी गई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से शुरू की रामाजिक सेवा
आप को बता दें कि नागेंद्र नाथ त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के बेलौली गांव के एक कृषक परिवार से हैं। वह अपने भाई-बहनों में सबसे बड़े हैं। उनके पिता का नाम गिरिजा पति त्रिपाठी और माता का नाम गणेशा देवी है। त्रिपाठी लम्बे से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े। उसके बाद उन्होंने पार्टी में कई अहम पदों पर जिम्मेदारी निभाई है।
विद्यार्थी परिषद से बीजेपी संगठन महामंत्री तक का सफर
संघ के बाद उन्होंने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद में विभिन्न पदों पर रहते हुए काम किया, जहां उनके नेतृत्व और संगठन कौशल को पहचान मिली। उनके इसी हुनर को देखते हुए साल 2003 में उन्हें उत्तर प्रदेश बीजेपी का संगठन महामंत्री नियुक्त किया गया। इस दौरान उन्होंने कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित करने और चुनावी रणनीति को धार देने पर पूरा ध्यान केंद्रित किया। उत्तर प्रदेश में करीब आठ सालों तक शानदार सांगठनिक सेवाएं देने के बाद, साल 2011 में पार्टी ने उन्हें बिहार बीजेपी के संगठन महामंत्री पद की जिम्मेदारी सौंपी।
क्षेत्रीय संगठन महामंत्री के रूप में प्रभावी भूमिका
पार्टी आलाकमान ने अगस्त 2021 में उनके सांगठनिक कद को और बढ़ाते हुए उन्हें बिहार और झारखंड का क्षेत्रीय संगठन महामंत्री नियुक्त किया। सांगठनिक नजरिए से यह पद बेहद अहम माना जाता है, क्योंकि क्षेत्रीय संगठन महामंत्री पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी के बीच बेहतर तालमेल बिठाने, चुनावी खाका तैयार करने और राज्यों में पार्टी का दायरा बढ़ाने का बड़ा जिम्मा होता है। नागेंद्र नाथ त्रिपाठी अंदरूनी रणनीतियों, बड़ी बैठकों और महत्वपूर्ण सांगठनिक निर्णयों में उनकी राय हमेशा बेहद असरदार साबित होती रही है। फिलहाल अब बीजेपी ने उन्हें राष्ट्रीय संगठक नियुक्त किया है। उनका केन्द्र दिल्ली रहेगा।
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ब्रिटेन में भारतीय युवक ने सिखाया सबकः वादा तोड़ने वाली कंपनी पर ठोका मुकद्दमा, मिला लाखों का मोटा मुआवजा
लंदन, एजेंसी। ब्रिटेन में रहने वाले केरल के युवक शाबिन शाजी (Shabin Shaji) को रोजगार विवाद में बड़ी कानूनी जीत मिली है। ब्रिटेन के एक रोजगार न्यायाधिकरण (Employment Tribunal) ने उनकी पूर्व नियोक्ता कंपनी Swan Care Solutions Ltd को लगभग 30,000 पाउंड (करीब 38 लाख रुपए) मुआवजा देने का आदेश दिया है। शाबिन शाजी पोस्ट-ब्रेक्जिट वीजा योजना के तहत केयर वर्कर के रूप में भारत से ब्रिटेन गए थे। इस योजना के तहत नियोक्ता पर यह कानूनी जिम्मेदारी होती है कि वह कर्मचारी को वास्तविक रोजगार उपलब्ध कराए। हालांकि, न्यायाधिकरण के अनुसार कंपनी ने अनुबंध पर हस्ताक्षर करने के बावजूद शाजी को वादा किया गया काम नहीं दिया। इससे उनकी आय का कोई स्रोत नहीं बचा और वे गंभीर आर्थिक संकट में फंस गए।

सुनवाई के दौरान शाजी ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि उनके पास खाने तक के पैसे नहीं बचे थे। उन्होंने कहा कि जीवित रहने के लिए उन्हें नल का पानी पीना पड़ता था और एक्सपायरी डेट के करीब पहुंच चुकी सस्ती ब्रेड खरीदनी पड़ती थी। शाजी के अनुसार, वे स्थानीय दुकानों में उन मुफ्त केले और ब्रेड की तलाश करते थे जो जरूरतमंदों के लिए रखे जाते थे। रविवार को चर्च जाने पर वहां मिलने वाली चाय और स्नैक्स भी उनके लिए सहारा बनते थे।
शाजी ने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम का उनके और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पर दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव पड़ा। उनके शब्दों में “मुझे लगा था कि यह मेरे जीवन का बड़ा अवसर होगा, लेकिन ब्रिटेन पहुंचने के बाद मैं बेहद कठिन हालात में फंस गया। ऐसा महसूस होता था कि किसी को इस बात की परवाह नहीं है कि मैं जीवित हूं या नहीं।” रोजगार न्यायाधिकरण ने माना कि शाजी काम करने के लिए तैयार, सक्षम और इच्छुक थे, लेकिन कंपनी ने उन्हें रोजगार उपलब्ध नहीं कराया। इसी आधार पर अदालत ने कंपनी को उनके बकाया वेतन और मुआवजे का भुगतान करने का आदेश दिया।
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