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कोरबा

बालको के खेल अकादमी में फुटबॉलर बाइचुंग भूटिया ने किया खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन100 से अधिक खिलाड़ियों को भूटिया ने सिखाए अनुशासन के गुर और तकनीकी बारीकियां

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बालको। भारत एल्यूमिनियम कंपनी लिमिटेड (बालको ) ने कोरबा स्थित अपने खेल अकादमी में पूर्व भारतीय फुटबॉल टीम के कप्तान तथा अर्जुन पुरस्कार विजेता एवं पद्मश्री से सम्मानित बाइचुंग भूटिया की मेज़बानी की। इस अवसर पर बाइचुंग भूटिया ने खेल अकादमी के 100 से अधिक युवा खिलाड़ियों को रोल मॉडल, स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग और हाई-परफॉर्मेंस खेलों के तकनीक से अवगत कराया साथ ही अनुशासन व निरंतरता की अहमियत पर बल दिया।

बालको ने 2024 में फुटबॉल, बास्केटबॉल, वॉलीबॉल व तैराकी में युवा प्रतिभाओं को तराशने के लिए एक रिहाइशी और डे बोर्डिंग स्पोर्ट्स ट्रेनिंग सेंटर के तौर पर खेल अकादमी शुरु की थी। इस अकादमी को कोरबा म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन, खेल एवं युवा कल्याण विभाग, कोरबा तथा बालको के बीच एक मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग के ज़रिए शुरू किया गया था, जो युवाओं के विकास के लिए विविध पक्षों की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। विश्व स्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर, एनआईएस-प्रमाणित कोच, स्पोर्ट्स साइंस सपोर्ट, फिजियोथेरेपी व मेडिकल केयर, और दिन में छह संतुलित आहार देने वाले एक स्ट्रक्चर्ड न्यूट्रिशन प्रोग्राम से लैस, यह अकादमी अभी कोरबा, दुर्ग, बिलासपुर और रायपुर के 100 खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रही है। बहुत कम समय में, यह एक बड़ा प्रशिक्षण केंद्र बन गया है, जहां युवा एथलीट राज्य एवं राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं।

इस अवसर पर बाइचुंग भूटिया का स्वागत, आशुतोष पांडे (आयुक्त, नगर निगम, कोरबा), दीनू पटेल (जिला खेल अधिकारी), और विनय मिश्रा (अपर आयुक्त) के साथ-साथ बालको के वरिष्ठ प्रबंधन ने किया।
युवा खिलाड़ियों को संबोधित करते हुए, बाइचुंग भूटिया ने कहा, “यह देखना बहुत उत्साहजनक है कि खेल अकादमी में ज़मीनी स्तर पर खेलों के विकास पर ज़ोर दिया जा रहा है, और इसके लिए अच्छी क्वालिटी का इंफ्रास्ट्रक्चर एवं स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग मुहैया कराए जा रहे हैं। मैं हर प्रतिभवान खिलाड़ी से कहूंगा कि आप जिस जगह से आते हैं वो कितनी बड़ी या छोटी है उससे आपके सपनों का आकार तय नहीं होता। भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले कई लोगों ने छोटे शहरों से अपनी यात्रा शुरु की, वे अनुशासन, हिम्मत और विश्वास के दम पर आगे बढ़े, अपने हालात की वजह से वे रुके नहीं। अब आपके पास पेशेवर मार्गदर्शन और सुविधाएं हैं, आगे क्या होता है यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कितनी मेहनत करते हैं और कितना विश्वास करते हैं।’’
एक्सपोज़र के महत्व पर ज़ोर देते हुए, आशुतोष पांडे ने कहा, ’’खेल युवाओं की ऊर्जा को मकसद और अनुशासन में लगाने का एक मज़बूत माध्यम है, और ऐसे लोगों का चरित्र बनाने का काम करता है जो समाज में अच्छा योगदान देते हैं। खेल अकादमी में इस दौरे के ज़रिए, हमारा उद्देश्य युवा प्रतिभाओं को जागरुक और मज़बूत बनाना है, जिससे उनका संपूर्ण विकास हो सके।’’

खेल अकादमी में 17 साल की फुटबॉल प्रशिक्षु सुगंधित लकड़ा ने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, ’’बाईचुंग सर से मिलना हम सभी के लिए बहुत प्रेरक था। उन्होंने कड़ी मेहनत, लगन और खेल का आनंद लेने के बारे में बात की और इससे मुझे खेलों को गंभीरता से लेने का और ज्यादा भरोसा मिला। यह पहली बार था जब हममें से कई लोगों ने किसी नेशनल आइकन से बात की, और इससे हमें और भी ज्यादा मेहनत सेप्रशिक्षण लेने की प्रेरणा मिली।’’
बालको के सीईओ और डायरेक्टर, राजेश कुमार ने कहा, ’’ बालको में, हम खेलों को संपूर्ण विकास का एक ज़रूरी हिस्सा मानते हैं। खेल अकादमी में जैसा स्ट्रक्चर्ड ट्रेनिंग का परिवेश है वह युवा एथलीटों को सही मार्गदर्शन व दिशा देते हुए परफॉर्मेंस को बेहतर बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। बच्चें और युवा बड़े सपने देखने पर ध्यान दें; और इस तरह के प्लैटफॉर्म उन उम्मीदों को अवसरों में बदलने में सहायता करते हैं। बाइचुंग भूटिया जैसे काबिल खिलाड़ियों के साथ बातचीत इस विज़न को और मज़बूत करती है, यह दिखाकर कि समर्पण और लगन से उच्चतम स्तर पर क्या हासिल किया जा सकता है।’’
अकादमी के अलावा, बालको सामुदायिक विकास के विविध प्रयास करती है, जिसमें विभिन्न समुदायों में बैडमिंटन, हॉकी, क्रिकेट, फुटबॉल, बास्केटबॉल और वॉलीबॉल संबंधी सामान वाली स्पोर्ट्स किट बांटकर ज़मीनी स्तर पर खेलों को बढ़ावा देना शामिल है। कंपनी का दृढ़ विश्वास है कि संपूर्ण विकास एक सामूहिक ज़िम्मेदारी है, जो संगठनों, सरकारी संस्थाओं और स्थानीय समुदायों को मिल जुलकर निभानी होगी।

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कोरबा

पेड़ की डाल नहीं, पूरा विशाल धौरा वृक्ष गिरा था, वन विभाग के दावे पर उठे सवाल

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कोरबा/पाली। पाली थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम चोरका डांड में शनिवार शाम आंधी-तूफान और बारिश के दौरान हुई दर्दनाक घटना में तीन युवकों की मौत के मामले में अब कई सवाल खड़े होने लगे हैं। प्रारंभिक जानकारी में बताया गया था कि तीनों युवक बारिश से बचने के लिए पेड़ के नीचे रुके हुए थे, तभी पेड़ की भारी डाल टूटकर उन पर गिर गई। लेकिन मीडिया टीम के मौके पर पहुंचने पर सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दे दिया है।

घटनास्थल पर देखा गया कि कोई डाल नहीं टूटी थी, बल्कि एक विशाल धौरा का पेड़ जड़ सहित गिरा हुआ था। वहीं ग्रामीणों, मृतक दिनेशु तिर्की के परिजनों तथा निर्माण कार्य में लगी महिलाओं ने बताया कि घटनास्थल पर वन समिति के माध्यम से सूअर पालन के लिए कोठा निर्माण का कार्य चल रहा था। उनके अनुसार दिनेशु तिर्की और कमलेश बड़ा निर्माण कार्य में लगे हुए थे।

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक अचानक तेज आंधी-तूफान शुरू हुआ। इसी दौरान धौरा वृक्ष से आवाज आई और कुछ ही क्षणों में वह घूमकर निर्माण स्थल पर गिर पड़ा। पेड़ के नीचे काम कर रहे युवक उसकी चपेट में आ गए। घटना में एक महिला को भी सिर और हाथ में हल्की चोटें आईं, जिसने शोर मचाकर ग्रामीणों को बुलाया। इसके बाद लोगों ने किसी तरह दबे हुए लोगों को बाहर निकाला और घायल युवकों को वाहन की व्यवस्था कर पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया। जहां जांच उपरांत दो युवकों को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि एक गंभीर रूप से घायल युवक को रेफर किया गया, जिसकी रास्ते में मौत हो गई। ग्रामीणों के अनुसार जंगल क्षेत्र होने के कारण तत्काल वाहन उपलब्ध नहीं हो पाया और अस्पताल पहुंचने में करीब ढाई घंटे का विलंब हुआ।

इधर जब इस संबंध में वन विभाग से जानकारी ली गई तो विभागीय अधिकारियों ने निर्माण कार्य में युवकों को लगाए जाने से इनकार किया। यहीं से कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि निर्माण कार्य में युवक शामिल नहीं थे तो वे घटनास्थल पर क्या कर रहे थे? ग्रामीण, परिजन और वहां मौजूद महिलाएं निर्माण कार्य में लगे होने की बात क्यों कह रही हैं? यदि वन समिति के अंतर्गत निर्माण कार्य चल रहा था तो वहां कार्यरत लोगों की निगरानी कौन कर रहा था? निर्माण स्थल पर सुरक्षा के क्या इंतजाम थे? क्या कार्य शुरू करने से पहले संभावित जोखिमों का आकलन किया गया था? यदि नाबालिग मौके पर मौजूद थे तो उनकी उपस्थिति किन परिस्थितियों में थी? क्या निर्माण कार्य के लिए मजदूरों का कोई पंजीयन या उपस्थिति रजिस्टर रखा गया था? दुर्घटना के समय वहां कितने लोग काम कर रहे थे और उन्हें किसके निर्देश पर लगाया गया था? आखिर घटना के संबंध में सामने आ रहे अलग-अलग दावों में सच्चाई क्या है?

मृतकों में 14 वर्षीय शिवराम टेकाम और 17 वर्षीय दिनेश तिर्की भी शामिल हैं। ऐसे में नाबालिगों से कार्य कराए जाने की आशंका को लेकर मामला और गंभीर हो जाता है। अब आवश्यकता इस बात की है कि पूरे घटनाक्रम की उच्च स्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराई जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि दुर्घटना के समय वहां वास्तव में क्या कार्य चल रहा था और इसके लिए जिम्मेदार कौन है।फिलहाल यह मामला केवल प्राकृतिक दुर्घटना तक सीमित नहीं दिख रहा, बल्कि कई ऐसे सवाल छोड़ गया है जिनके जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेंगे।

चोरकाडांड निवासी हीरा सिंह ने बताया कि वन विभाग द्वारा पशुपालन के लिए भवन निर्माण कराया जा रहा था, जिसमें युवक कार्य कर रहे थे। उनके अनुसार मौसम सामान्य था और केवल हल्की हवा चल रही थी। इसी दौरान अचानक एक विशाल धौरा पेड़ गिर गया, जिसकी चपेट में आने से तीनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में उनकी मौत हो गई।

मृतक दिनेशु तिर्की की मां हीरामणि ने बताया कि उनका बेटा पिछले तीन दिनों से वहां काम पर जा रहा था। घटना की जानकारी गांव के एक युवक ने आकर दी, जिसके बाद वह तत्काल घटनास्थल पहुंचीं। ग्रामीणों की मदद से वाहन की व्यवस्था कर घायल युवकों को पाली सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत की खबर मिली।

काम करने वाली राधाबाई बाइसेम्हर ने बताया कि वह एक अन्य महिला के साथ दो दिनों से निर्माण कार्य में लगी थीं। हादसे के समय वह बालू उठा रही थीं, जबकि दूसरी महिला बालू छान रही थी। तभी कटने जैसी तेज आवाज सुनाई दी। जान बचाने के लिए भागते समय विशाल धौरा वृक्ष गिर पड़ा, जिसकी चपेट में आकर तीन युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। राधाबाई ने बताया कि तीनों युवक पिछले दो दिनों से पानी ढुलाई और मसाला बनाने का काम कर रहे थे।

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कोरबा

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले में एक लाख से अधिक आवास पूर्ण

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मनरेगा के माध्यम से हितग्राहियों को मिल रहा 90 दिवस का रोजगार

कोरबा। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत कोरबा जिले ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए एक लाख से अधिक पक्के आवासों का निर्माण पूर्ण कर लिया है। वर्ष 2016 से अब तक जिले में कुल 1,00,013 आवासों का निर्माण सफलतापूर्वक पूर्ण किया जा चुका है, जिससे हजारों ग्रामीण परिवारों का अपने पक्के घर का सपना साकार हुआ है।

प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों के आवासहीन एवं वंचित परिवारों को सम्मानजनक आवास उपलब्ध कराया जा रहा है। योजना के तहत पात्र हितग्राहियों को आवास निर्माण के लिए चरणबद्ध तरीके से 1.20 लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की जाती है। इसके साथ ही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत आवास निर्माण कार्य हेतु 90 दिवस का रोजगार उपलब्ध कराया जाता है, जिससे हितग्राहियों को मजदूरी भुगतान का लाभ भी प्राप्त होता है।

योजना के अंतर्गत एसईसीसी-2011 सर्वे तथा वर्ष 2018 में आयोजित आवास प्लस सर्वे में पात्र पाए गए परिवारों को क्रमबद्ध रूप से आवास स्वीकृत किए जा रहे हैं। जिला प्रशासन द्वारा सतत निगरानी एवं प्रभावी क्रियान्वयन के परिणामस्वरूप आवास निर्माण कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है।

जिले में वर्ष 2016 से 2023 के दौरान 61,223 आवास पूर्ण किए गए, जबकि वर्ष 2024 से 2026 के बीच 37,804 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इसके अतिरिक्त मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत 478 आवास तथा प्रधानमंत्री जनमन आवास योजना के अंतर्गत 508 आवास पूर्ण किए गए हैं।

इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी दिनेश कुमार नाग ने कहा कि शासन के निर्देशानुसार पात्र ग्रामीण हितग्राहियों को गुणवत्तापूर्ण पक्के आवास उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि जिले में एक लाख से अधिक आवासों का पूर्ण होना ग्रामीण विकास एवं जनकल्याण की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि है, जिससे हजारों परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन आया है।

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कोरबा

05 जून पर्यावरण दिवस: छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से होगी सम्मानित

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बिलासपुर/पाली। पर्यावरण एवं पर्यटन विकास समिति बिलासपुर, छत्तीसगढ़ी राजभाषा परिषद, वन विभाग एवं छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल बिलासपुर के संयुक्त तत्वावधान में 05 जून 2026 को विश्व पर्यावरण दिवस पर सरस्वती शिशु मंदिर सभागार तिलक भवन बिलासपुर में पर्यावरण सुरक्षा एवं संवर्धन विषय पर प्रतियोगिताएं, कार्यशाला, काव्य गोष्ठी, नृत्य, गीत-संगीत, फैंसी ड्रेस, बच्चों के लिए चित्रकला प्रतियोगिता सहित पर्यावरण क्षेत्र में अह्म भूमिका निभाने वाली प्रतिभाओं एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जाएगा। बेलतरा विधायक सुशांत शुक्ला के मुख्य आतिथ्य में यह समारोह सम्पन्न होगा, जिसकी अध्यक्षता विनय पाठक करेंगे।इनके अलावा कई शिक्षाविद, पर्यावरणविद कार्यक्रम का गौरव बढ़ाएंगे। आईएफएस एस एस डी बड़गैया, समाजसेवी शैलेन्द्र सिंह कछवाहा, वरिष्ठ साहित्यकार विष्णु कुमार तिवारी, आईएफएस नीरज जी, डॉ. अभिलाषा बेहार, आईएसएस रमेशचंद्र श्रीवास्तव, समाजसेवी राजीव नयन शर्मा, क्षेत्रीय पर्यावरण संरक्षण अधिकारी श्रीमती रश्मि श्रीवास्तव, पर्यावरणविद हेमंत कुमार गौर सहित अन्य विभूतियां उपस्थित रहेंगी।

इस सम्मान समारोह में पाली स्थित छत्तीसगढ़ पब्लिक हायर सेकेण्डरी स्कूल को भी छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा। विद्यालय के डायरेक्टर डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि विद्यालय परिसर को स्वच्छ, सुंदर एवं हरितिमा बनाने के साथ-साथ जल संरक्षण और वर्षा जलसंचयन, प्लास्टिक मुक्त अभियान एवं बच्चों द्वारा पर्यावरण जागरूकता रैलियों के माध्यम से समाज को पर्यावरण संरक्षण एवं संवर्धन का संदेश देना एवं पौध रोपण जैसे विविध कार्यक्रम के लिए छत्तीसगढ़ पर्यावरण रत्न सम्मान से सम्मानित किया जाएगा।
डॉ. गजेन्द्र तिवारी ने बताया कि यह विद्यालय के लिए गौरव की बात है और एक बड़ी उपलब्धि भी।

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