देश
कर्नाटक में राहुल बोले- जो वादे किए थे, पूरे किए:कहा- PM ने कहा था हम ये काम नहीं कर पाएंगे, लेकिन हमने करके दिखाए
बेंगलुरु,एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी मंगलवार को कर्नाटक के विजयनगर में समर्पण संकल्प रैली में पहुंचे हैं। कार्यक्रम में उन्होंने 1 लाख 11 हजार 111 लोगों को घर के मालिकाना हक के डिजिटल डॉक्यूमेंट सौंपे।
राहुल ने कहा- हमने आपसे जो 5 वादे किए थे, वो सब पूरे किए। बीजेपी के लोगों ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ये वादे पूरे नहीं करेगी। प्रधानमंत्री ने भी कहा ये काम नहीं किए जाएंगे। लेकिन हमने करके दिखाए।
कर्नाटक सरकार आज 1 लाख परिवारों को उनकी जमीन का मालिकाना हक देने जा रही है। जो इंदिरा गांधी का सपना था, उसको पूरा करने के लिए हमने बड़ा कदम लिया है। 2 हजार बस्तियों को हम राजस्व गांव कर रहे हैं।
प्रदेश में कांग्रेस की सरकार के 2 साल पूरे होने पर कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इसमें घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और ग्रामीण खेतिहर समुदायों को जमीन के सरकारी डॉक्यूमेंट्स दिए गए। इनकी बस्तियां सार्वजनिक या निजी जमीन पर थी।
अब इनको ‘रेवेन्यू विलेज’ यानी राजस्व गांव का दर्जा मिलेगा। इससे इन लोगों को कानूनी तौर पर अपने घर का मालिकाना हक मिलेगा। 2015 में कर्नाटक दौरे के दौरान राहुल गांधी ये वादा किया था।

कर्नाटक में 224 में से 135 सीटों पर जीत के साथ कांग्रेस की सरकार बनी। तस्वीर 20 मई 2023 के शपथ ग्रहण समारोह की है।
राहुल ने पांच वादे याद दिलाए, बोले- हमने सब वादे पूरे किए
राहुल ने लोगों से कहा कि दो साल पहले चुनाव के समय हमने 5 गारंटी देने के वादे दिए थे।
पहला वादा- गृह लक्ष्मी 2 हजार रुपए प्रति महीना 2 करोड़ महिलाओं को मिली। आज में कह सकता हूं कि करोड़ों की महिलाओं के बैंक अकाउंट में सरकार के पैसा डालती है।
दूसरा वादा- गृह ज्योति योजना थी जिसमें करोड़ों परिवारों क 200 यूनिट बिजली फ्री दी जाएगी।
तीसरा वादा- अन्नभाग्या योजना, जिसमें 4 करोड़ लोगों को 10 किलो अनाज देने का वादा था।
चौथा वादा- शक्ति योजना जिसमें हमने गारंटी करके कहा था। कि महिलाओं को बस में जाने के लिए पैसा नहीं देना पड़ेगा। फ्री में बस में घूमेंगी। हमने 400 बस ट्रिप्स मुफ्त में दी हैं।
पांचवां वादा- युवा निधि स्कीम यहां हम युवाओं का महीने का 3 हजार रुपए देते हैं।
राहुल के भाषण की प्रमुख बातें…
1. कांग्रेस ने आपका पैसा आपको वापस दिया:
राहुल ने कहा कि हमने आपसे कहा था हम कर्नाटक के गरीब लोगों के बैंक अकाउंट में पैसा डालेंगे। और आज हजारों करोड़ रुपए सीधे आपके बैंक अकाउंट में जाता है। ये पैसा आपने अपने बच्चों की शिक्षा और स्वास्थ्य में डाल रहे हैं। यही हम चाहते थे जो आपका धन है आपकी जेब में वापस जाए।
2. भाजपा के मॉडल में सिर्फ 2-3 अरबपतियों को फायदा मिलता है:
राहुल ने कहा कि हम चाहते हैं कि कर्नाटक की गरीब जनता की जेब में सीधा पैसा जाए। जब हम पैसा आपके जेब में डालते हैं तो ये पैसा मार्केट में जाता है। इससे प्रोडक्शन बढ़ती है और गांव-गांव में पैसा का इंजेक्शन होता है। इस पैसा को आप अपने गांव और शहरों में खर्च करते हो। इस पैसे से कर्नाटक की अर्थव्यवस्था और फायदा मिलता है।
बीजेपी चाहती है कि चुने हुए लोगों को देश का पूरा धन मिले। बीजेपी के मॉडल में 2-3 अरबपतियों को पैसा पहुंचा दिया जाता है। ये अरबपति अपना पैसा गांव-कस्बों में खर्च नहीं करते हैं। लंदन और न्यूयॉर्क में असेट खरीदते हैं। आपका पैसा चुने हुए लोगों के हाथों में चला जाता है।
3. भाजपा रोजगार खत्म करती है, हम पैदा करते हैं:
राहुल ने कहा कि भाजपा के मॉडल में रोजगार खत्म होता है। हमारे मॉडल में रोजगार पैदा होता है। उनके मॉडल में आप बीमार होते हैं तो आपको कर्ज में डूबना पड़ता है। हमारे मॉडल में आप बीमार होते हैं तो आपके जेब में इलाज के लिए पैसा होता है। उनके मॉडल में लाखों-करोड़ रुपए में प्राइवेट-स्कूल और यूनिवर्सिटी को देते हो। लाखों परिवारों को कर्ज में जाना पड़ता है। हमारे मॉडल में हम आपको पैसा देते हैं। जब हम 5 गारंटी की बात कर रहे थे मैंने एक और मुद्दा उठाया है।
4. हमने लोगों को जमीन का हक देकर छठी गारंटी पूरी की:
राहुल गांधी ने कहा कि मुझे पता लगा था कि कर्नाटक में ऐसे बहुत सारे लोग है जिनके पास जमीन है लेकिन मालिकाना हक नहीं है। दलित, आदिवासी लोगों को रेवेन्यू विलेज माना ही नहीं जाता था। ये लोग गांव में रहते थे लेकिन हक नहीं मिलता है। इसमें हर जात और धर्म के लोग थे। इनको मालिकाना हक नहीं था, प्रॉपर्टी अधिकार नहीं था। सरकार की कोई फैसिलिटी नहीं मिलती थी।
सालों से ये परिवार उस जमीन पर रहे रहे हैं। मगर उनको अपनी ही जमीन का अधिकार नहीं था। ये मामला मैंने कांग्रेस पार्टी के सीनियर नेताओं के उठाया। मैंने कहा- कर्नाटक में जिनके पास भी जमीन हो उसके पास मालिकाना हक जरूर हो। आज मैं बहुत खुशी के साथ कह सकता हूं कि हम छठी गारंटी को भी पूरा करने में सफल हुए।
राजस्व मंत्री बोले- 2023 से 1 लाख से ज्यादा लोगों को लाभ मिला
कर्नाटक सरकार में राजस्व मंत्री कृष्णा बायरे गौड़ा ने कहा- यह भारत का सबसे बड़ा टाइटल डीड (जमीन या मकान के मालिकाना हक का कानूनी डॉक्यूमेंट) वितरण कार्यक्रम है। करीब 6 लाख लोगों को इसका फायदा मिलेगा। कार्यक्रम में कांग्रेस सरकारी की 2 साल की मेहनत लोगों को समर्पित की जाएगी। हम भविष्य के लिए नई संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने बताया- 2017 से 2019 तक करीब 36,000 टाइटल डीड्स जारी हुए। 2019 से 2023 तक 72,000 डॉक्यूमेंट दिए गए। 2023 से अब तक दो साल में कांग्रेस सरकार ने 1 लाख से ज्यादा परिवारों को घर का मालिकाना हक दिया है। अगले 6 महीने में बाकी 50,000 लोगों को भी डॉक्यूमेंट दिए जाएंगे।
हर परिवार को डिजिटल खतौनी मिलेगा कृष्णा बायरे गौड़ा ने डिजिटल डॉक्यूमेंट के बारे में कहा- अब जो टाइटल डीड्स मिल रहे हैं, वो डिजिटल फॉर्मेट में होंगे। इससे डॉक्यूमेंट खोने, फटने या फर्जीवाड़े की समस्या नहीं होगी। सरकार हर डॉक्यूमेंट को ग्राम पंचायत की ऑनलाइन संपत्ति रजिस्टर से सीधे लिंक कर रही है। यानी हर परिवार को अब डिजिटल खतौनी (खाता) भी मिलेगा, जिससे कोई उन्हें आसानी से जमीन या घर से बेदखल नहीं कर सकेगा।
मंत्री ने बताया- 2017 से 2023 के बीच जारी किए गए 1.2 लाख टाइटल डीड में से केवल 5,000 को ही ग्राम पंचायत के रिकॉर्ड में शामिल किया गया। बाकी लोग स्थानीय स्तर पर शोषण का शिकार होते रहे। अब नई डिजिटल व्यवस्था के तहत हर डॉक्यूमेंट्स सीधे ही रजिस्टर में जुड़ जाएगा।
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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई
कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।
खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।
पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”
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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला
भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”
बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।
राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।
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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत
कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे।
ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।
इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”
‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।
तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया।
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