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इंदौर में खेला जाएगा भारत-न्यूजीलैंड वनडे मैच:जनवरी 2026 में होगा सीरीज का तीसरा मुकाबला, बीसीसीआई ने वेन्यू किया फाइनल
इंदौर , एजेंसी।इंदौर के क्रिकेट प्रेमियों के लिए अच्छी खबर है। इंदौर के होलकर स्टेडियम में 18 जनवरी को भारत और न्यूजीलैंड के बीच वनडे मैच खेला जाएगा। न्यूजीलैंड के साथ भारत में होने वाली वनडे सीरीज का यह तीसरा मैच होगा।
शनिवार देर रात हुई बीसीसीआई एपेक्स काउंसिल की मीटिंग में जनवरी 2026 में होने वाली सीरीज के वेन्यू फाइनल हो गए हैं।
मध्यप्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन प्रबंधन से मिली जानकारी के अनुसार बीसीसीआई ने पिछले दिनों एमपीसीए पदाधिकारियों से मैच के आयोजन को लेकर बात की थी। एमपीसीए ने इंदौर में मैच देने के लिए बीसीसीआई का धन्यवाद किया है।
3 वनडे और 5 टी-20 की सीरीज भारत और न्यूजीलैंड के बीच अगले साल जनवरी में टी-20 वर्ल्ड कप से पहले सीरीज खेली जानी है। न्यूजीलैंड और भारत के बीच अगले साल 8 व्हाइट बॉल मैचों के वेन्यू लिस्ट बीसीसीआई ने जारी कर दी हैं।
पहला वनडे मैच बड़ोदरा, दूसरा राजकोट और तीसरा इंदौर में खेला जाएगा। इसी तरह पहला टी20 नागपुर, दूसरा रायपुर, तीसरा गुवाहाटी, चौथा विजाग और पांचवां त्रिवेंद्रम में खेला जाएगा। बता दें कि टीम इंडिया अगले साल न्यूजीलैंड के खिलाफ जनवरी में 3 वनडे और 5 टी-20 मैचों की सीरीज खेलेगी।
सीरीज भारत के बिजी कैलेंडर का हिस्सा है, जिसमें टीम को वेस्टइंडीज के खिलाफ 2 टेस्ट, ऑस्ट्रेलिया में व्हाइट बॉल सीरीज और साउथ अफ्रीका से तीनों फॉर्मेट की सीरीज खेलनी है।
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पहली बार छत्तीसगढ़ के खिलाड़ी का इंडिया A में चयन:आयुष पांडेय श्रीलंका के खिलाफ खेलेंगे, 25 जून से होने वाले 4 दिवसीय-सीरीज में दिखेंगे
रायपुर, एजेंसी। छत्तीसगढ़ क्रिकेट के लिए बड़ी उपलब्धि सामने आई है। प्रदेश के रणजी खिलाड़ी और बाएं हाथ के सलामी बल्लेबाज आयुष पांडे का चयन भारतीय ए टीम में हुआ है। राज्य में यह पहली बार है, जब किसी खिलाड़ी का चयन भारतीय ए टीम के लिए हुआ है।

आयुष 25 जून 2026 से शुरू होने वाली श्रीलंका ए के खिलाफ चार दिवसीय सीरीज में भारत ए टीम का हिस्सा होंगे। आयुष पांडे ने पिछले रणजी ट्रॉफी सीजन में छत्तीसगढ़ की ओर से शानदार प्रदर्शन किया था।
उन्होंने 7 मैचों की 13 पारियों में 57.30 की औसत से 573 रन बनाए। इस दौरान उनके बल्ले से 2 शतक और 2 अर्धशतक निकले। उनका सर्वोच्च स्कोर 183 रन रहा। रणजी ट्रॉफी में लगातार अच्छे प्रदर्शन के दम पर आयुष का चयन दलीप ट्रॉफी के लिए भी हुआ था।
वहां भी उन्होंने अपनी बल्लेबाजी से प्रभावित किया। दलीप ट्रॉफी में 2 मैचों की 3 पारियों में उन्होंने 53.92 की औसत से 102 रन बनाए।
भारत A टीम क्या है?
भारत A टीम को भारतीय क्रिकेट की “दूसरी राष्ट्रीय टीम” या राष्ट्रीय टीम की फीडर टीम कहा जाता है। इसमें घरेलू क्रिकेट (रणजी ट्रॉफी, दलीप ट्रॉफी, विजय हजारे आदि) में लगातार अच्छा प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को मौका दिया जाता है।
इसका मुख्य उद्देश्य सीनियर भारतीय टीम के संभावित खिलाड़ियों को अंतरराष्ट्रीय स्तर जैसी प्रतिस्पर्धा में परखना होता है।

भारत A टीम का रोल क्या होता है?
- सीनियर भारतीय टीम के लिए खिलाड़ियों की तैयारी करना।
- घरेलू क्रिकेट और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के बीच की खाई को कम करना।
- चयनकर्ताओं को यह देखने का मौका देना कि खिलाड़ी विदेशी या मजबूत विपक्ष के खिलाफ कैसा प्रदर्शन करता है।
- टेस्ट क्रिकेट के संभावित खिलाड़ियों को लंबे प्रारूप के मैचों में परखना।
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कवर्धा: उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने राष्ट्रीय पदक विजेता बेसबॉल खिलाडि़यों का किया सम्मान
कवर्धा के पांच खिलाडि़यों ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में जीते 3 स्वर्ण और 2 रजत पदक


कवर्धा। ओडिशा के भुवनेश्वर में आयोजित 31वीं राष्ट्रीय सब जूनियर बेसबॉल बालक एवं बालिका प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर प्रदेश का गौरव बढ़ाने वाले कवर्धा के खिलाडि़यों से उप मुख्यमंत्री एवं विधायक कवर्धा विजय शर्मा ने अपने कवर्धा स्थित निवास कार्यालय में मुलाकात कर उन्हें शुभकामनाएं दीं तथा उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

एमेच्योर बेसबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के तत्वावधान में 24 से 29 मई तक आयोजित राष्ट्रीय प्रतियोगिता में प्रयास स्पोर्ट्स अकादमी कवर्धा के पांच खिलाडि़यों का छत्तीसगढ़ टीम में चयन हुआ था। इनमें बालक वर्ग से चंद्रेश कोर्राम, पंकज मेरावी और शुभम सेन तथा बालिका वर्ग से चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे शामिल थीं। प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया, जबकि बालिका टीम ने रजत पदक जीतकर प्रदेश का नाम रोशन किया।
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने खिलाडि़यों को बधाई देते हुए कहा कि ग्रामीण अंचलों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करना पूरे प्रदेश के लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने और उन्हें बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। खिलाडि़यों की यह सफलता आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणा बनेगी।
अकादमी के प्रशिक्षक राजा जोशी ने बताया कि खिलाडि़यों का चयन राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के आधार पर हुआ था। राष्ट्रीय प्रतियोगिता के दौरान छत्तीसगढ़ की बालक टीम ने मध्यप्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना, राजस्थान और दिल्ली जैसी मजबूत टीमों को हराकर फाइनल में महाराष्ट्र को 6-2 से पराजित कर राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किया। फाइनल मुकाबले में चंद्रेश कोर्राम ने शानदार होमरन लगाकर टीम की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में तीन होमरन लगाए।
वहीं बालिका वर्ग में छत्तीसगढ़ टीम ने दिल्ली, तेलंगाना और मेजबान ओडिशा को हराकर फाइनल में प्रवेश किया। हालांकि फाइनल मुकाबले में महाराष्ट्र के खिलाफ टीम को हार का सामना करना पड़ा, लेकिन रजत पदक जीतकर खिलाडि़यों ने शानदार प्रदर्शन किया। चांदनी साहू और जयश्री घृतलहरे ने टीम की सफलता में महत्वपूर्ण योगदान दिया। खिलाडि़यों की इस राष्ट्रीय उपलब्धि पर खेल प्रेमियों, अभिभावकों और जिलेवासियों में उत्साह का माहौल है। सभी ने खिलाडि़यों एवं उनके प्रशिक्षकों को बधाई देते हुए भविष्य में और बड़ी सफलताओं की शुभकामनाएं दी हैं।
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20 साल के प्रज्ञानानंदा ने रचा इतिहास, प्रतिष्ठित ‘नार्वे शतरंज’ का खिताब जीतने वाले बने पहले भारतीय
ओस्लो/नई दिल्ली/चेन्नई, एजेंसी। भारतीय ग्रैंडमास्टर आर प्रज्ञानानंदा (R Praggnanandhaa) ने वैश्विक शतरंज की दुनिया में एक नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने सबसे कड़े और प्रतिष्ठित टूर्नामेंटों में से एक ‘नार्वे शतरंज’ (Norway Chess) का खिताब अपने नाम कर लिया है। वह इस महामुकाबले को जीतने वाले देश के पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं। अंतिम दौर (लास्ट राउंड) के करो या मरो के मुकाबले में चेन्नई के इस 20 वर्षीय युवा खिलाड़ी ने जर्मनी के दिग्गज विन्सेंट कीमर को क्लासिकल बाजी में मात देकर पूरे 3 अंक बटोरे और एलीट शतरंज की सबसे चमचमाती ट्रॉफी अपने नाम कर ली। प्रज्ञानानंदा ने आखिरी दिन की शुरुआत 15 अंक के साथ तीसरे स्थान से की।

उन्होंने सबसे अहम मौके पर बेहतरीन खेल दिखाया और क्लासिकल बाजी में जीत हासिल करके पूरे तीन अंक बटोरे। इस तरह वे 18 अंक पर पहुंचे और एलीट शतरंज की सबसे प्रतिष्ठित ट्रॉफियों में से एक अपने नाम की। चेन्नई के इस 20 वर्षीय खिलाड़ी ने वह उपलब्धि हासिल की जो 2013 में टूर्नामेंट की शुरुआत के बाद से भारतीय शतरंज के दिग्गज विश्वनाथन आनंद और मौजूदा विश्व चैंपियन डी गुकेश जैसे खिलाड़ी भी हासिल नहीं कर पाए थे।

नार्वे शतरंज में दूसरी बार हिस्सा ले रहे प्रज्ञानानंदा की शुरुआत धीमी रही थी लेकिन टूर्नामेंट के दूसरे हाफ में उन्होंने रफ्तार पकड़ी और लगातार चार जीत हासिल की। प्रज्ञानानंदा के अभियान की सबसे खास बात यह रही कि उन्होंने नार्वे शतरंज के सात बार के चैंपियन और दुनिया के नंबर एक खिलाड़ी मैग्नस कार्लसन को क्लासिकल बाजी में दो बार हराया। मौजूदा विश्व चैंपियन गुकेश के अंतिम चरण में खिताब की दौड़ से बाहर होने के बाद प्रज्ञानानंदा ने भारत की उम्मीदों को जीवंत रखा और आखिरकार खिताब अपने नाम किया।
अमेरिकी ग्रैंडमास्टर वेस्ली सो आखिरी दौर से पहले 15.5 अंक के साथ सबसे आगे थे लेकिन अलीरेजा फिरोजा के खिलाफ उनकी क्लासिकल बाजी ड्रॉ रही जिससे मुकाबला आर्मागेडन टाईब्रेक में चला गया। इस नतीजे ने प्रज्ञानानंदा के लिए रास्ता खोल दिया। उन्हें पता था कि कीमर के खिलाफ क्लासिकल बाजी में जीत उन्हें अंक तालिका में सबसे ऊपर पहुंचा देगी और यादगार खिताब दिला देगी।

हालांकि वेस्ली सो ने टाईब्रेक जीत लिया लेकिन उस जीत से उन्हें सिर्फ डेढ़ अंक मिला जिससे उनके कुल अंक 17 रहे जबकि प्रज्ञानानंदा ने 18 अंक के साथ खिताब जीता। खिताब जीतने की उम्मीद के साथ आखिरी दौर में उतरे अलीरेजा 15.5 अंक के साथ तीसरे स्थान पर रहे। मैच के बाद प्रज्ञानानंदा ने बताया कि चेन्नई में अपनी मां से हुई बातचीत ने उनका हौसला बढ़ाया था।
उन्होंने कहा, उन्होंने मेरे से कहा था कि जून का महीना मेरे लिए अच्छा रहेगा और उनकी यह भविष्यवाणी सच साबित हुई। प्रज्ञानंदा ने कहा, मैं एक जून को अलीरेजा के खिलाफ मुकाबले से पहले अपनी मां से बात कर रहा था और वह मुझे कह रही थी, ‘यह नया महीना है, तुम अच्छा खेलोगे।’ यह वैसी ही बात है जो मां हमेशा कहती हैं और फिर मैंने ये चार बाजी जीतीं। मुझे लगता है कि उन्हें कुछ पता था।
इसके बाद प्रज्ञानानंदा ने लगातार चार जीत हासिल कीं। यहां तक कि कार्लसन ने भी प्रज्ञानानंदा की जमकर तारीफ की और पूरे टूर्नामेंट में इस युवा भारतीय खिलाड़ी के प्रदर्शन को ‘शानदार’ बताया। कार्लसन ने प्रसारणकर्ता से कहा, ”यह वाकई कमाल की बात है। यह बहुत ही निर्णायक और जबरदस्त प्रदर्शन था और इससे पता चलता है कि अगर मैं भी इसी तरह का नतीजा हासिल करता तो मेरे लिए भी यह मुमकिन हो सकता था लेकिन हां यह अविश्वसनीय है।

वह एक जबरदस्त फाइटर है और उसे इसका इनाम मिलते देखना अच्छा लगता है। इस बीच गुकेश का निराशाजनक सफर जारी रहा। टूर्नामेंट में उनकी तीसरी मौजूदगी भी उस कामयाबी के बिना खत्म हुई जिसकी उन्हें उम्मीद थी विशेषकर ऐसे साल में जब उन्हें चैलेंजर जावोखिर सिंदारोव के खिलाफ अपने विश्व खिताब का बचाव करना है।
आखिरी दौर में सफेद मोहरों से खेलते हुए कार्लसन ने क्लासिकल बाजी में 20 साल के गुकेश को हराकर तीन अंक हासिल किए। नार्वे का यह दिग्गज हालांकि इस जीत के बावजूद 13 अंक के साथ पांचवें स्थान पर रहा।
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SECL के बंद मकान में लगी भीषण आग, DJ-लाइट व टेंट का लाखों का सामान जलकर खाक, असामाजिक तत्वों पर जताई जा रही शंका
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकीमोंगरा :– पुराने थाना परिसर के पीछे स्थित रहवासी क्षेत्र में एक बंद पड़े SECL के मकान में शनिवार दोपहर करीब 12:30 बजे अचानक भीषण आग लग गई। आग इतनी तेजी से फैली कि कुछ ही देर में पूरे मकान को अपनी चपेट में ले लिया। घटना से क्षेत्र में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
जानकारी के अनुसार, मकान से उठते धुएं को सबसे पहले वहां खेल रहे बच्चों ने देखा और इसकी सूचना अपने परिजनों को दी। देखते ही देखते धुआं आग की भयावह लपटों में बदल गया। सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों ने डायल 112 को फोन किया, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची। वहीं नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा के कर्मचारी विद्यासागर पानी का टैंकर लेकर घटनास्थल पहुंचे।

स्थानीय रहवासियों, पुलिस एवं नगर पालिका के सहयोग से बाल्टियों और टैंकर के पानी की मदद से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। लोगों की तत्परता से आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोक लिया गया, जिससे एक बड़ी दुर्घटना टल गई।
बताया जा रहा है कि उक्त मकान का उपयोग एक लाइट एवं साउंड संचालक द्वारा गोदाम के रूप में किया जा रहा था, जहां डीजे, साउंड सिस्टम, लाइटिंग उपकरण, टेंट एवं अन्य सामग्री रखी हुई थी। आग की चपेट में आने से लगभग 5 लाख रुपये से अधिक मूल्य का डीजे, लाइट एवं टेंट का सामान पूरी तरह जलकर खाक हो गया।

घटना को लेकर क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। स्थानीय लोगों द्वारा असामाजिक तत्वों के द्वारा आग लगाए जाने की शंका भी जताई जा रही है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का अभी खुलासा नहीं हो सका है और पुलिस मामले की जांच कर रही है।
वहीं लोगों में इस बात को लेकर भी नाराजगी देखने को मिली कि हमेशा की तरह अग्निशमन वाहन आग से अधिकांश सामान जलकर खाक हो जाने के बाद मौके पर पहुंचा। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि फायर ब्रिगेड केंद्र दूर होने के कारण आपात स्थितियों में अक्सर विलंब होता है, जिससे नुकसान बढ़ जाता है।
खबर लिखे जाने तक आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया था। राहत की बात यह रही कि घटना में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई, लेकिन लाखों रुपये की संपत्ति नष्ट हो गई। अब सभी की नजर पुलिस जांच पर टिकी है कि आग हादसा थी या इसके पीछे किसी असामाजिक तत्व का हाथ है।
नगर पालिका परिषद बांकीमोंगरा
बांकी – एसईसीएल कॉलोनी में चरम पर अवैध बेजा कब्जा, रहवासियों ने सौंपा ज्ञापन, प्रबंध की नजर अनदेखी समझ से परे…देखे पूरी खबर
संवाददाता साबीर अंसारी
बांकी मोंगरा :- नगर पालिका परिषद बांकी मोगरा के वॉर्ड क्रमांक 14 एसईसीएल कॉलोनी में इन दिनों अवैध कब्जा निर्माण जोरो पर है, किसी ने कॉलोनी के बिछे बची जगह में अपना मकान निर्माण करा लिया तो कही क्वाटर के सामने पक्का निर्माण कराकर अतिक्रमण किया गया है।
इसी विषय पर गंभीर होकर कॉलोनी के रहवासियों ने एसईसीएल प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र में कथित बेजा कब्जे को हटाने की मांग की है। ज्ञापन में संतराम साहू का नाम उल्लेखित करते हुए आरोप लगाया गया है कि उनके द्वारा कॉलोनी क्षेत्र में अतिक्रमण किया गया है, जिससे स्थानीय नागरिकों को विभिन्न समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है और भविष्य में इससे बड़ी बड़ी समस्याएं भी उत्पन्न होगी ।

• शिकायत के बाद भी प्रबंधन की नजर अनदेखी करना समझ से परे।
• आखिर क्यों नहीं की जाती कार्यवाही, क्या पर्दे के पीछे चलता है की और खेल।

स्थानीय निवासियों ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार शिकायतों के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है, इस ज्ञापन में एसईसीएल प्रबंधन से मामले की जांच कर कार्रवाई करने तथा भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की गई है साथ ही चेतावनी दी है कि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई तो हम आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे, जिसकी संपूर्ण जवाबदारी प्रबंधन की होगी ।
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‘PM को बच्चों के भविष्य की नहीं, अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है’ : राहुल गांधी
नई दिल्ली, एजेंसी। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की गड़बड़ी पर चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं किया जाना यह दर्शाता है कि उन्हें केवल अपनी सरकार के अस्तित्व की चिंता है, लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया मंच 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि वह पहले दिन से ही सीबीएसई की 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (ओएसएम) और 'सीओईएमपीटी' को अनुबंध दिए जाने के मामले में स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग कर रहे हैं, क्योंकि देश के युवाओं को सच जानने का अधिकार है। गांधी ने मीडिया की खबरों को साझा किया और लोगों से उन्हें ध्यानपूर्वक पढ़ने का आह्वान किया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया, ”सीबीएसई ने ओएसएम निविदाएं तीन बार आमंत्रित कीं। पहली बार एक भी बोली नहीं लगी। दूसरी बार कोई भी बोलीदाता पात्र नहीं पाया गया। और अंततः, तकनीकी मानकों को तब तक कमतर किया गया जब तक कि ‘सीओईएमपीटी’ उन्हें पार नहीं कर गई। स्कैनिंग रेजोल्यूशन कम कर दिया गया। रोबोटिक स्कैनर की अनिवार्यता हटा दी गई। सीएमएमआई प्रमाणन स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उत्तर पुस्तिकाओं में त्रुटियों के लिए जुर्माने के प्रावधान भी हटा दिये गए।” राहुल गांधी ने कहा, ”भारत की सबसे बड़ी आईटी सेवा कंपनी टीसीएस ने भी तीसरे दौर के लिए अर्हता प्राप्त की थी। लेकिन टीसीएस दौड़ में हार गई और सीओईएमपीटी-एक ऐसी कंपनी जिसका रिकॉर्ड विफलताओं से भरा रहा है-वह जीत गई। और आज सीबीएसई के छात्र किस बात की शिकायत कर रहे हैं? खराब तरीके से स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाएं, गायब पन्ने और एक खराब मूल्यांकन पोर्टल।”

गांधी ने कहा कि शिक्षकों ने सीबीएसई को चेतावनी दी थी कि ओएसएम प्रणाली को राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन से पहले कम से कम एक या दो साल की अतिरिक्त तैयारी की आवश्यकता है, फिर भी इसे जल्दबाजी में आगे बढ़ा दिया गया। लोकसभा में विपक्ष के नेता गांधी ने कहा, ”तो मैं फिर से पूछता हूं – कौन चाहता था कि सीओईएमपीटी जीते? किसने धीरे-धीरे मानकों को इतना कम किया कि यह कंपनी इसे पार कर सके?” उन्होंने कहा, “प्रधान जी और सीबीएसई का कहना है कि ‘कानूनी प्रक्रिया का पालन किया गया’। यह कोई जवाब नहीं है, यह जवाबदेही नहीं है। सवाल यह है कि क्या अनुबंध ईमानदारी से उस सर्वश्रेष्ठ कंपनी को दिया गया था जो काम को सही ढंग से कर सकती थी?”

गांधी ने कहा कि 18.5 लाख बच्चों का भविष्य एक ऐसी कंपनी के हाथों में सौंप दिया गया, जो केवल तब अर्हता प्राप्त कर सकी जब उसके लिए नियमों में ”ढील दी गई।” उन्होंने कहा, ”सवाल पूछने के कारण मुझ पर हमला करने वाले भाजपा मंत्रियों के लिए – मैंने पहले दिन से ही स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग की। इसे (जांच को) सीबीएसई से लेकर सीओईएमपीटी को दिए गए हर अनुबंध तक विस्तारित करें। हमारे युवाओं को सच्चाई जानने का हक है।” गांधी ने कहा, “मोदी जी, सीबीएसई की गड़बड़ी पर आपकी चुप्पी और शिक्षा मंत्री के खिलाफ आपकी निष्क्रियता देश को बताती है कि आपको वास्तव में किसकी परवाह है – लाखों छात्रों के भविष्य की नहीं, बल्कि सिर्फ अपनी सरकार के अस्तित्व की।”

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मीडिया की खबरों का हवाला देते हुए कहा कि उनसे यह खुलासा हुआ है कि सीबीएसई ने इस साल की कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं के लिए ‘ऑन-स्क्रीन मार्किंग’ (ओएसएम) प्रणाली प्रदान करने वाले ठेकेदारों के लिए प्रस्तावों के वास्ते अपने अनुरोध में तकनीकी शर्तों को लगातार नरम किया। रमेश ने अन्य चिंताओं का उल्लेख करते हुए कहा कि न्यूनतम ‘स्कैनिंग रेजोल्यूशन’ को 300 डीपीआई से घटाकर 200 डीपीआई कर दिया गया और अनिवार्य ‘कैपेबिलिटी मैच्योरिटी मॉडल इंटीग्रेशन’ (सीएमएमआई) प्रमाणन को स्तर-5 से घटाकर स्तर-3 कर दिया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि जुर्माना के प्रावधानों को इस तरह बदला गया कि उनका ध्यान त्रुटियों के बजाय गति पर केंद्रित हो गया। उन्होंने कहा कि साथ ही, उत्तर पुस्तिकाओं की ‘स्पाइन’ (बाइंडिंग) काटे बिना स्कैन करने की शर्त हटा दी गई और रोबोटिक स्कैनर के प्रावधान को भी खत्म कर दिया गया।

जयराम रमेश ने शेयर किया पोस्ट
रमेश ने अपने पोस्ट में कहा, “अंतिम ‘आरएफपी’ अगस्त 2025 में जारी किया गया था, जो सीबीएसई कक्षा 12 की बोर्ड परीक्षाओं से केवल छह महीने पहले था। हम पहले से ही जानते हैं कि ओएसएम को लागू करने की जल्दबाजी में क्षेत्रीय केंद्रों पर प्रायोगिक परियोजना आयोजित करने के सीबीएसई बोर्ड के समझदारी भरे सुझाव को नजरअंदाज कर दिया गया था।” उन्होंने आरोप लगाया कि स्पष्ट रूप से, सीबीएसई की कार्रवाई में अनावश्यक जल्दबाजी तथा गुणवत्ता एवं छात्र-केंद्रित प्रावधानों को कमजोर करने की झलक मिलती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इस वर्ष से ही ओएसएम को अपना लिया जाए। कांग्रेस नेता ने अपनी पोस्ट में प्रश्न किया, ”कई सवाल उठते हैं- ‘आरएफपी’ में तकनीकी शर्तों को क्यों कमजोर किया गया? क्या यह निविदा के लिए बोली लगाने वाले ठेकेदारों के कहने पर किया गया था? सीबीएसई ने उन प्रावधानों (उच्च स्कैनिंग रिज़ॉल्यूशन, गलत तरीके से स्कैन की गई प्रतियों के लिए जुर्माना आदि) को क्यों कमजोर किया जो त्रुटियों को कम कर सकते थे और छात्रों व मूल्यांकनकर्ताओं की सहायता कर सकते थे? किस तरह का दबाव था?”

रमेश ने यह सवाल भी उठाया कि क्षेत्रीय स्तर पर प्रायोगिक परियोजना के जरिए गहन जांच किए बिना और तकनीकी बुनियादी ढांचे की गुणवत्ता से समझौता करके ‘ओएसएम’ को अपनाने में इतनी जल्दबाजी दिखाने के पीछे क्या कारण था। उन्होंने सवाल किया, “क्या सीओईएमपीटी की पृष्ठभूमि की जांच की गई थी, जिसे अंततः सीबीएसई ने अनुबंध दिया? क्या सीबीएसई ने इस तथ्य पर विचार किया कि सीओईएमपीटी का नाम पहले ‘ग्लोबारेना’ था और वह विवादों में घिरी रही थी? क्या मोदी सरकार के राजनीतिक आकाओं की ओर से यह सुनिश्चित करने का दबाव था कि ठेका सीओईएमपीटी को ही मिले?”
कांग्रेस नेता रमेश ने कहा, ”सीबीएसई को पाक साफ होना चाहिए और वेंडर के चयन, आरएफपी में किए गए संशोधनों, ओएसएम को अपनाने में दिखाई गई जल्दबाजी के कारणों और परीक्षाओं से पहले आयोजित बोर्ड बैठकों के विवरण से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक करने चाहिए। शायद मंत्री प्रधान कीचड़ उछालने और राजनीति करने के बजाय इन सवालों के जवाब दे सकते हैं।”
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