देश
सिंधु जल समझौता रद्द: भारत की बड़ी रणनीतिक पहल, गृह मंत्री अमित शाह की उच्चस्तरीय बैठक
नई दिल्ली ,एजेंसी। भारत सरकार ने 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौते को रद्द कर दिया है। यह निर्णय कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के ठीक बाद लिया गया, जिसमें 26 भारतीयों की जान गई थी। अब गृह मंत्री अमित शाह इस फैसले के बाद की कार्ययोजना और लाभों को लेकर वरिष्ठ मंत्रियों के साथ एक अहम बैठक करेंगे।
बैठक में क्या होगा एजेंडा?
इस बैठक में सिंधु जल समझौते को लेकर:
➤ मंत्रियों को ब्रीफिंग दी जाएगी कि कैसे समझौते के तहत भारत का पानी पाकिस्तान को दिया जा रहा था।
➤ पानी रोकने के उपायों जैसे कि नहरों का निर्माण, जल भंडारण, डिसिल्टिंग, फ्लश आउट जैसी रणनीतियों पर चर्चा होगी।
➤ पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों को होने वाले लाभों पर विस्तृत योजना रखी जाएगी।
भारत के किसानों को कैसे होगा फायदा?
समझौते को रद्द करने के बाद:
➤ भारत अब पाकिस्तान को दिया जाने वाला पानी खुद इस्तेमाल कर पाएगा।
➤ इससे सिंचाई सुविधाओं का विस्तार, सूखे क्षेत्रों में पानी पहुंचाना, और कृषि उत्पादन में वृद्धि संभव होगी।
➤ यह फैसला विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा के किसानों के हित में बताया जा रहा है।
क्या था सिंधु जल समझौता?
➤ यह समझौता 1960 में भारत और पाकिस्तान के बीच विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुआ था।
➤ समझौते के तहत भारत को ब्यास, रावी और सतलुज, जबकि पाकिस्तान को झेलम, चिनाब और सिंधु नदियों पर प्राथमिक अधिकार मिला था।
➤ हालांकि, भारत को अपने हिस्से की नदियों का अधिकतम उपयोग करने की छूट थी, लेकिन तकनीकी और राजनीतिक बाधाओं के चलते ऐसा नहीं हो सका।
समझौता रद्द होने पर पाकिस्तान की बौखलाहट
समझौता रद्द होते ही पाकिस्तान ने कूटनीतिक बयानबाज़ी शुरू कर दी है:
➤ पाक विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि वे अपने अधिकारों की रक्षा के लिए हरसंभव कदम उठाएंगे।
➤ पाकिस्तान के विदेश कार्यालय में उच्च स्तरीय बैठक हुई जिसमें सिंधु जल समझौते को अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया गया।
➤ बिलावल भुट्टो ने बयान दिया कि “या तो सिंधु नदी में पानी बहेगा या खून”, जो स्पष्ट रूप से एक गंभीर चेतावनी या गीदड़भभकी मानी जा रही है।
भारत का आत्मनिर्भर जलनीति की ओर कदम
सिंधु जल समझौते को रद्द करना भारत का एक रणनीतिक और आत्मनिर्भरता की दिशा में अहम फैसला है। इससे जहां भारत की कृषि और जल संसाधनों को मजबूती मिलेगी, वहीं पाकिस्तान पर राजनीतिक और पर्यावरणीय दबाव भी बढ़ेगा। अब यह देखना अहम होगा कि भारत इस निर्णय को जमीनी स्तर पर कितनी प्रभावी ढंग से लागू कर पाता है।
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Why Stock Market Crash: मोदी की अपील-ट्रंप के बयान के बाद बाजार में हाहाकार, निवेशकों के 11 लाख करोड़ स्वाहा, जानें गिरावट के कारण
मुंबई, एजेंसी। भारतीय शेयर बाजार में लगातार दूसरे दिन भारी गिरावट देखने को मिली, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा और लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की वैल्यू वॉशआउट हो गई। इस गिरावट के पीछे कई ग्लोबल और घरेलू कारण बताए जा रहे हैं। इंटरनेशनल लेवल पर ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
इसके अलावा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से हाल ही में ईंधन बचत और सोना न खरीदने की सलाह का भी बाजार पर असर देखा गया। वहीं, अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा यह बयान कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और हालात कभी भी बिगड़ सकते हैं, ने भी वैश्विक अनिश्चितता को और बढ़ा दिया। इन सभी कारणों के चलते बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है और निवेशकों में घबराहट का माहौल देखा जा रहा है।

आज 12 मई का शेयर बाजार का हाल
-सेंसेक्स करीब 1456 अंक (1.92%) गिरकर 74,559 पर बंद हुआ
-निफ्टी में 436 अंक (1.83%) की गिरावट, स्तर 23,380 रहा
-निफ्टी बैंक में भी करीब 884 अंकों की गिरावट दर्ज हुई
-मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी कमजोरी देखने को मिली
इन सेक्टर्स का बुरा हाल
-निफ्टी IT सबसे ज्यादा प्रभावित रहा, करीब 3.5%–3.7% तक गिरा।
-मेटल, ऑयल एंड गैस और PSU बैंक को छोड़कर लगभग सभी सेक्टर लाल निशान में रहे।
-IT सेक्टर में Adani Ports, TCS, Tech Mahindra और HCL Technologies जैसे बड़े शेयरों में तेज गिरावट देखी गई।
निवेशकों को भारी नुकसान
एक न्यूज चैनल की खबर के अनुसार, इस गिरावट के चलते निवेशकों की संपत्ति में लगभग 11 लाख करोड़ रुपये की कमी आई। BSE का कुल मार्केट कैपिटलाइजेशन 467 लाख करोड़ रुपये से घटकर 456 लाख करोड़ रुपये पर आ गया।
गिरावट के बड़े कारण
-IT सेक्टर पर दबाव: IT सेक्टर में करीब 3.7% की गिरावट दर्ज की गई। इस गिरावट की एक वजह यह भी रही कि वैश्विक स्तर पर AI Sectors में तेजी से बदलाव हो रहा है। Open AI से जुड़ी एक बड़ी घोषणा में कंपनियों के लिए AI Technology विकसित और लागू करने हेतु भारी निवेश की बात सामने आई, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ी।
-कच्चे तेल की कीमतों में उछाल: ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत में करीब 2.45% की बढ़ोतरी होकर यह 106.75 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया। तेल की कीमत बढ़ने से भारत जैसे आयात-निर्भर देश में महंगाई बढ़ने की आशंका रहती है। इससे कंपनियों की लागत भी बढ़ती है, जिसका सीधा असर उनके मुनाफे पर पड़ता है।
-वैश्विक तनाव का असर: ईरान और अमेरिका के तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद हालात और अनिश्चित हो गए, जिसमें उन्होंने कहा कि युद्धविराम कमजोर स्थिति में है और स्थिति कभी भी बिगड़ सकती है। एक्सपर्ट का मानना है कि अगर होर्मुज जलडमरूमध्य बाधित होता है, तो वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।
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शेयर बाजार में बड़ी गिरावट: सेंसेक्स 1,456 अंक नीचे गिरकर बंद हुआ, Nifty 23,400 के नीचे
मुंबई, एजेंसी। मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। BSE Sensex 1,456.32 अंक (1.92%) गिरकर 74,558.96 पर बंद हुआ, जबकि NSE Nifty50 454.15 अंक (1.91%) टूटकर 23,361.70 पर आ गया। दिनभर के कारोबार में निवेशकों की लगभग 9.6 से 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति खत्म हो गई, क्योंकि बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली।

बाजार गिरने की मुख्य वजहें थीं-कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी, रुपये का अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर (95.58) पर पहुंचना और वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव। इन कारणों से निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ और बाजार पर दबाव बढ़ गया।
भारत अपनी 85% से ज्यादा तेल जरूरतें आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल की कीमतों में तेजी का सीधा असर अर्थव्यवस्था और शेयर बाजार पर पड़ता है। तेल महंगा होने से महंगाई, आयात बिल और चालू खाता घाटे को लेकर चिंता और बढ़ गई है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों ने भी बाजार की धारणा को प्रभावित किया।
बाजार की गिरावट में IT सेक्टर सबसे ज्यादा दबाव में रहा। वैश्विक मंदी की आशंका और टेक खर्च में कमी के डर से IT कंपनियों के शेयरों में तेज गिरावट आई। TCS में 3.92% की गिरावट, Infosys में 3.23%, HCLTech में 4.21%, Tech Mahindra में 4.54% और Wipro में 3.79% की गिरावट दर्ज की गई। इसके चलते Nifty IT index भी भारी दबाव में रहा। कुल मिलाकर, कमजोर रुपये, महंगा तेल और वैश्विक अनिश्चितता ने भारतीय शेयर बाजार पर बड़ा असर डाला और निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ा।
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10 Gram/Gold Rate 12 May: शुरुआती तेजी के बाद सोना-चांदी में आई गिरावट, देखें 24 कैरेट 10 ग्राम का लेटेस्ट रेट
मुंबई, एजेंसी। भारत में मंगलवार, 12 मई 2026 को सोने और चांदी की कीमतों में शुरुआत में तेजी देखने को मिली, लेकिन बाद में दोनों की कीमतें गिरावट के साथ कारोबार करने लगीं। Middle East में बढ़ते तनाव, डॉलर की मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का असर बुलियन मार्केट पर साफ दिखाई दिया।

MCX पर सोना और चांदी फिसले
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोना शुरुआती कारोबार में 1.54 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम के ऊपर पहुंच गया था, लेकिन बाद में इसकी बढ़त खत्म हो गई। दोपहर तक MCX Gold करीब 1,53,200 रुपये प्रति 10 ग्राम के आसपास कारोबार करता दिखा।
वहीं MCX Silver ने शुरुआती कारोबार में करीब 1.2% की तेजी के साथ 2.82 लाख रुपये का स्तर छुआ, लेकिन बाद में इसमें तेज गिरावट आई। इसके बाद चांदी करीब 1.5% टूटकर 2.74 लाख रुपये के आसपास कारोबार करने लगी।
तेल की कीमतों में उछाल से बढ़ी चिंता
मध्य पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण वैश्विक बाजारों में तेल की कीमतों में भारी तेजी देखी गई। होर्मुज जलडमरूमध्य लंबे समय तक बंद रहने की आशंका से कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित होने का डर बढ़ गया है।
-US WTI Crude लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गया।
-Brent Crude 105 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर कारोबार कर रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर होर्मुज स्ट्रेट में स्थिति लंबे समय तक तनावपूर्ण रहती है, तो वैश्विक बाजारों में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
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