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बंगाल चुनाव हार के बाद TMC में बढ़ी अंदरूनी कलह, वरिष्ठ सांसद के पोस्ट से तेज हुई सियासी हलचल

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कोलकाता, एजेंसी। हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में टीएमसी की करारी हार के बाद पार्टी में चल रही उथल-पुथल के संकेत मंगलवार को और अधिक स्पष्ट हो गए, जब राज्यसभा के वरिष्ठ सदस्य सुखेन्दु शेखर रॉय ने पार्टी की दशा और दिशा को लेकर असहमति जताते हुए असहज सवाल उठाए। पार्टी सांसद काकोली घोष दस्तीदार द्वारा सार्वजनिक रूप से अपना असंतोष व्यक्त करने के कुछ दिनों बाद, पार्टी के सबसे अनुभवी सांसदों में से एक रॉय ने ‘एक्स’ पर ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए पोस्ट किए, जिससे तीव्र राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई और चुनावी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस के भीतर बेचैनी के संकेत और बढ़ गए।

“लोकतंत्र जनता की इच्छा पर आधारित है
रॉय ने ‘एक्स’ पर लिखा, “44 ईसा पूर्व में, रोमन सम्राट जूलियस सीजर की सीनेट में मार्च के मध्य में चाकू मारकर हत्या कर दी गई थी। रोमन पंचांग के अनुसार, मध्य का अर्थ आमतौर पर मार्च, मई, जुलाई और अक्टूबर की 15 तारीख होता था। लेकिन मई के मध्य से पहले ही, पश्चिम बंगाल के लोगों ने असहनीय अराजकता की स्थिति का अंत कर दिया।” साम्राज्यों के पतन और “असहनीय अराजक स्थिति के अंत” का जिक्र करने वाली इस पोस्ट ने राजनीतिक हलकों और टीएमसी के भीतर तुरंत अटकलों को जन्म दिया, खासकर इसलिए क्योंकि यह चुनाव के बाद के आत्मनिरीक्षण और पार्टी में स्पष्ट दरारों के बीच आया था। एक सप्ताह पहले, 19 मई को, रॉय ने लिखा था: “लोकतंत्र जनता की इच्छा पर आधारित है। गणतंत्र तब पतन की ओर जाते हैं जब भ्रष्ट लोग फलते-फूलते हैं और बुद्धिमानों को परिषद से बाहर कर दिया जाता है। 

29 लोकसभा सीटें जीती फिर TMC विधानसभा में क्यों बुरी तहर हारी?
स्वतंत्र विचार और उसका अभ्यास लोकतांत्रिक व्यवस्था में आवश्यक है। कोई भी इसका खंडन नहीं कर सकता, अन्यथा व्यवस्था का पतन निश्चित है।” रॉय ने हालांकि सार्वजनिक रूप से दोनों पोस्ट पर कोई विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन उनके करीबी लोगों ने बताया कि अनुभवी राजनेता ने निजी तौर पर टीएमसी के महज दो साल पहले की अपनी प्रभुत्वशाली स्थिति से नाटकीय रूप से नीचे गिरने के कारणों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। उनके करीबी लोगों के अनुसार, रॉय ने बार-बार यह सवाल उठाया है कि पश्चिम बंगाल में 2024 में 29 लोकसभा सीटें जीतने और एक मजबूत स्थिति बनाए रखने वाली पार्टी को अपेक्षाकृत कम समय में इतनी बड़ी हार का सामना कैसे करना पड़ सकता है।

जनभावना को समझने में फेल हुई टीएमसी 
सूत्रों के अनुसार, उनका आकलन चुनावी गणित से परे है। ऐसा माना जाता है कि रॉय ने आरजी कर आंदोलन के दौरान पार्टी की कथित तौर पर जनभावना को समझने में असमर्थता की ओर इशारा किया था जिसमें आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में एक महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार और हत्या के बाद बड़े पैमाने पर सड़कों पर विरोध प्रदर्शन हुए थे। उनके विचारों से परिचित लोगों के अनुसार, रॉय का मानना ​​है कि उस समय सड़कों पर अभूतपूर्व भीड़ ने ऐसे राजनीतिक संकेत दिए थे जिन्हें पार्टी पर्याप्त रूप से समझने में विफल रही। 

पार्टी ढांचे के भीतर “भ्रष्टाचार 
उन्होंने निजी बातचीत में पार्टी ढांचे के भीतर “भ्रष्टाचार के संस्थागत रूप” पर भी चिंता व्यक्त की है। ये टिप्पणियां इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि रॉय पार्टी के भीतर कोई हाशिए पर रहने वाली आवाज नहीं हैं। कांग्रेस की परंपरा से जुड़े एक अनुभवी राजनीतिज्ञ और कभी पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के करीबी माने जाने वाले रॉय बाद में टीएमसी में शामिल हुए और संसद में उसके प्रमुख चेहरों में से एक बन गए। संवैधानिक मामलों, संसदीय प्रक्रियाओं और संघीय मुद्दों पर अपनी पकड़ के लिए जाने जाने वाले रॉय, वर्तमान में राज्यसभा में टीएमसी के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक हैं और उन्होंने छह दशकों में पश्चिम बंगाल के राजनीतिक परिदृश्य में कई बदलाव देखे हैं।

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Ram Rahim को फिर मिली 30 दिन की पैरोल, 16वीं बार आया रोहतक जेल से बाहर

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चंडीगढ़, एजेंसी। साध्वियों के यौन उत्पीड़न (Sexual Harassment) और एक पत्रकार की हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम को एक बार फिर जेल से राहत मिल गई है। हरियाणा सरकार ने राम रहीम को इस बार 30 दिनों की पैरोल (Parole) मंजूर की है। रोहतक की सुनारिया जेल से रिहा होने के बाद वह सीधे सिरसा स्थित अपने मुख्य आश्रम के लिए रवाना हो गया है। साल 2017 में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से यह १६वां मौका है जब राम रहीम पैरोल या फर्लो पर जेल से बाहर आया है।

राम रहीम को पैरोल मिलने की खबर आते ही सिरसा स्थित डेरा सच्चा सौदा आश्रम में उसके समर्थकों (साध-संगत) और डेरा प्रेमियों के बीच उत्साह का माहौल है। वहीं आश्रम में राम रहीम के स्वागत के लिए बड़े पैमाने पर तैयारियां की जा रही हैं। बता दें कि इस साल में राम रहीम को मिलने वाली यह दूसरी पैरोल है। इससे पहले वह इसी साल जनवरी महीने में भी जेल से बाहर आया था।

साध्वी यौन शोषण मामले में मिली है 20 साल की सजा

गुरमीत राम रहीम 25 अगस्त 2017 से जेल में बंद है। उसे दो अलग-अलग साध्वियों के यौन उत्पीड़न के मामलों में सीबीआई (CBI) की विशेष अदालत ने कुल 20 साल की जेल की सजा सुनाई थी। इसके बाद, इसी साल 5 जनवरी को ‘शाह सतनाम दिवस’ के मौके पर उसे 40 दिनों की पैरोल दी गई थी जिसे पूरा करने के बाद वह वापस जेल लौट गया था।

पत्रकार हत्याकांड में उम्रकैद, एक मामले में हाई कोर्ट से मिल चुकी है राहत

पत्रकार हत्याकांड: जनवरी 2019 में पंचकुला की विशेष सीबीआई अदालत ने पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या के मामले में राम रहीम को दोषी मानते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई थी।

रणजीत सिंह हत्याकांड (बरी): अक्टूबर 2021 में सीबीआई कोर्ट ने डेरा के पूर्व प्रबंधक रणजीत सिंह की हत्या के मामले में भी राम रहीम को उम्रकैद की सजा दी थी। हालांकि, करीब तीन साल बाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने इस मामले में राम रहीम को राहत देते हुए साक्ष्यों के अभाव में पूरी तरह बरी (Acquit) कर दिया था। फिलहाल राम रहीम को मिली इस 30 दिनों की पैरोल पर एक बार फिर कानूनी और राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

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पुणे में ऑनलाइन ठगी का ‘महा-जाल’: कारोबारी को लगा रू.7 करोड़ का चूना; टेलीग्राम पर भारी मुनाफे का लालच देकर लुटा

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पुणे, एजेंसी। महाराष्ट्र के पुणे शहर से साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर गिरोह ने ऑनलाइन फॉरेक्स ट्रेडिंग के नाम पर एक कारोबारी की गाढ़ी कमाई के करोड़ों रुपये डकार लिए। पुणे के कोंढवा इलाके में रहने वाले 53 वर्षीय कारोबारी ने साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है कि उनके साथ 7 करोड़ रुपये से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई है।

टेलीग्राम के जरिए बिछाया जाल
पुलिस के अनुसार, इस ठगी की शुरुआत अक्टूबर 2025 में हुई थी, जब साइबर अपराधियों ने टेलीग्राम के जरिए कारोबारी से संपर्क किया। आरोपियों ने खुद को निवेश और फॉरेक्स ट्रेडिंग का एक्सपर्ट बताकर कारोबारी का भरोसा जीता और उन्हें भारी मुनाफे का लालच दिया। इसके बाद उन्हें ‘PU Prime’ नाम के एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म का लिंक भेजकर अकाउंट बनाने को कहा गया।

किस्तों में हड़प लिए रू.7.07 करोड़
कारोबारी को भरोसा दिलाया गया कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित है और उन्हें कुछ ही समय में मोटा रिटर्न मिलेगा। झांसे में आकर शिकायतकर्ता ने 10 अक्टूबर 2025 से लेकर 4 अप्रैल 2026 के बीच कई बैंक खातों में कुल 7,07,61,876 रुपये ट्रांसफर कर दिए। जब लंबे समय तक कोई लाभ नहीं मिला और कारोबारी ने अपनी रकम वापस मांगनी शुरू की, तो आरोपियों ने बहाने बनाने शुरू कर दिए। तब जाकर उन्हें एहसास हुआ कि वे एक संगठित साइबर गिरोह का शिकार हो चुके हैं।

पुणे में साइबर क्राइम की ‘बाढ़’
पुणे साइबर पुलिस अब उन टेलीग्राम अकाउंट्स, बैंक खातों और मोबाइल नंबरों की जांच कर रही है जिनका इस्तेमाल ठगी में किया गया। गौरतलब है कि पुणे में साइबर अपराध के मामलों में डराने वाला उछाल आया है। आंकड़ों के मुताबिक, जहां साल 2022 में 357 मामले दर्ज हुए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,504 पहुंच गई है।

पुलिस की अपील: सावधानी ही बचाव है
डीसीपी विवेक मसल ने बताया कि अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और आईटी अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने आम जनता को सलाह दी है कि किसी भी अनजान लिंक, लुभावने निवेश ऑफर या टेलीग्राम ग्रुप पर आंख मूंदकर भरोसा न करें और किसी भी प्रकार के निवेश से पहले पूरी जांच-पड़ताल जरूर करें।

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इबोला का खतरा: भारतीय हवाई अड्डों पर हाई अलर्ट; DGCA ने जारी की सख्त गाइडलाइंस, संदिग्धों के लिए विमान में होगी अलग व्यवस्था

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नई दिल्ली, एजेंसी। कांगो और युगांडा जैसे अफ्रीकी देशों में इबोला वायरस के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए भारत सरकार ने अपनी सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने इस खतरनाक वायरस को देश में प्रवेश करने से रोकने के लिए विमानन कंपनियों के लिए नई और सख्त गाइडलाइंस जारी की हैं।

संदिग्ध यात्रियों के लिए ‘अलग’ सीटिंग और SOP जारी
DGCA द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के तहत अब प्रभावित क्षेत्रों से आने वाले यात्रियों की अनिवार्य स्क्रीनिंग की जाएगी। इन दिशानिर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि यदि यात्रा के दौरान कोई संदिग्ध मामला सामने आता है, तो एयरलाइंस को विमान के भीतर ही उनके लिए अलग बैठने की विशेष व्यवस्था सुनिश्चित करनी होगी। यह नियम मुख्य रूप से कांगो, युगांडा और दक्षिण सूडान से आने वाले यात्रियों पर लागू होंगे।

हेल्थ डिक्लेरेशन और आइसोलेशन के कड़े नियम

  • अनिवार्य घोषणा पत्र: प्रभावित देशों से यात्रा करने वाले हर यात्री को विमान में चढ़ने से पहले एक ‘स्वास्थ्य घोषणा पत्र’ (Health Declaration Form) भरना होगा।
  • उड़ान के दौरान निगरानी: यदि उड़ान के दौरान किसी यात्री में इबोला जैसे लक्षण दिखते हैं, तो क्रू सदस्यों की जिम्मेदारी होगी कि उसे अन्य यात्रियों से अलग कर आइसोलेट करें।
  • APHO को रिपोर्टिंग: जो यात्री किसी संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आए हैं या जिनमें लक्षण दिख रहे हैं, उन्हें इमिग्रेशन क्लीयरेंस से पहले हवाई अड्डा स्वास्थ्य अधिकारी (APHO) को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट करना होगा।

सरकार और स्वास्थ्य एजेंसियां अलर्ट मोड पर
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने भी वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर तैयारियों की समीक्षा की है और ICMR तथा NCDC जैसी प्रमुख एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि दिल्ली और हैदराबाद जैसे अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डों, बंदरगाहों और सीमाओं पर निगरानी में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यदि यात्रा के 21 दिनों के भीतर उन्हें लक्षण महसूस हों, तो तुरंत स्थानीय अधिकारियों को सूचित करें।

इबोला के लक्षण और बचाव के उपाय
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति को तेज बुखार, उल्टी, कमजोरी, सिरदर्द, दस्त या शरीर से असामान्य ब्लीडिंग की समस्या हो, तो उसे तुरंत जांच करानी चाहिए। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने या लार जैसे शारीरिक तरल पदार्थों के सीधे संपर्क में आने से तेजी से फैलता है।

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