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भारत-नेपाल के बीच अब चाय बनी दरार, सख्ती के बाद शुरू हो गया नया विवाद
नई दिल्ली/काठमांडू, एजेंसी। भारत-नेपाल के बीच इन दिनों चाय को लेकर नया विवाद बढ़ता दिखाई दे रहा है। नेपाल का आरोप है कि भारत लगातार नेपाली चाय के आयात पर सख्ती बढ़ा रहा है, जबकि भारत का कहना है कि दार्जिलिंग चाय के नाम और गुणवत्ता की सुरक्षा जरूरी है। अब इस पूरे विवाद को दोनों देशों के बीच “चाय की जंग” कहा जाने लगा है।

क्या है पूरा मामला?
नेपाल बड़ी मात्रा में ऑर्थोडॉक्स चाय भारत को निर्यात करता है। नेपाल की बड़ी चाय मंडियां झापा और इलाम क्षेत्रों में हैं। नेपाल का दावा है कि उसकी करीब 80 प्रतिशत चाय भारतीय बाजार में बिकती है। हर साल लगभग 10 मिलियन किलोग्राम चाय भारत भेजी जाती है। लेकिन भारत ने हाल के वर्षों में नेपाली चाय पर कई नियम और टेस्टिंग सख्त कर दिए हैं। अप्रैल 2024 में भारतीय अधिकारियों ने नेपाली चाय की 100 प्रतिशत सैंपल टेस्टिंग अनिवार्य कर दी। यानि हर खेप की जांच के बाद ही उसे भारतीय बाजार में प्रवेश मिल सकता है। इसके बाद मई 2026 से कुछ नए प्रतिबंध भी लागू किए गए। ममता बैनर्जी Mamata Banerjee ने भी कहा था कि नेपाल से बिना शुल्क आने वाली चाय दार्जिलिंग ब्रांड को नुकसान पहुंचा रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से नेपाली चाय को दी गई कर छूट वापस लेने की मांग की थी।
दार्जिलिंग चाय क्यों बनी विवाद ?
Darjeeling tea दुनिया की सबसे प्रसिद्ध चायों में गिनी जाती है। इसकी अंतरराष्ट्रीय पहचान और ब्रांड वैल्यू बहुत बड़ी है। भारतीय पक्ष का आरोप है कि कुछ व्यापारी नेपाली चाय को दार्जिलिंग चाय के नाम से बेचते हैं, जिससे असली दार्जिलिंग ब्रांड की पहचान कमजोर होती है। इसी वजह से भारत गुणवत्ता और ब्रांड सुरक्षा के नाम पर सख्ती कर रहा है। नेपाल के चाय कारोबारी और अधिकारी भारत के कदमों को “व्यापारिक दबाव” बता रहे हैं। उनका कहना है कि भारत जानबूझकर देरी करता है। बार-बार टेस्टिंग से व्यापार प्रभावित होता है और यह नेपाल-भारत व्यापार संधि की भावना के खिलाफ है। नेपाल के कारोबारी उदय चपागाईं का कहना है कि अगर भारत को वास्तव में गुणवत्ता की चिंता होती, तो वह सीमा पर आधुनिक लैब बना सकता था। उनके अनुसार भारत का असली मकसद नेपाली चाय की प्रतिस्पर्धा को रोकना है।
असली विवाद बाजार हिस्सेदारी
नेपाल टी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन के नेताओं का मानना है कि असली विवाद बाजार हिस्सेदारी का है। विशेषज्ञों के अनुसार दार्जिलिंग चाय का उत्पादन सीमित है और वैश्विक मांग बहुत ज्यादा है। नेपाली ऑर्थोडॉक्स चाय सस्ती और ज्यादा उपलब्ध है। ऐसे में नेपाली चाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से जगह बना रही है।नेपाल का मानना है कि भारत को डर है कि नेपाली चाय की अलग पहचान बनने से दार्जिलिंग चाय का बाजार कमजोर पड़ सकता है।
नेपाल की भारत पर बड़ी निर्भरता
नेपाल की चाय इंडस्ट्री काफी हद तक भारत पर निर्भर है। नेपाल के नेशनल टी एंड कॉफी डेवलपमेंट बोर्ड के अनुसार नेपाल हर साल 27.5 मिलियन किलोग्राम चाय पैदा करता है जिससे करीब 60,000 लोगों को रोजगार मिलता है। 20,000 हेक्टेयर जमीन पर चाय की खेती होती है। नेपाल के लिए भारत सबसे बड़ा बाजार है, इसलिए भारतीय प्रतिबंध वहां के किसानों और निर्यातकों के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं।
बढ़ सकता तनाव
विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यह विवाद बढ़ता है तो दोनों देशों के व्यापारिक रिश्ते प्रभावित हो सकते हैं। नेपाली किसानों को बड़ा नुकसान हो सकता है। दार्जिलिंग और नेपाली चाय के बीच प्रतिस्पर्धा और तेज हो सकती है। हालांकि दोनों देशों के बीच खुली सीमा और गहरे आर्थिक संबंधों को देखते हुए उम्मीद की जा रही है कि बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा।
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विजय ने नीति आयोग बैठक में NEET का विरोध किया:MBBS-BDS में 12वीं के अंकों पर एडमिशन की मांग, PM समेत सभी राज्यों के CM शामिल हुए
नई दिल्ली, एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में गुरुवार को दिल्ली में नीति आयोग की गवर्निंग काउंसिल की 11वीं बैठक हुई। इसमें सभी 28 राज्यों के मुख्यमंत्री शामिल हुए। तमिलनाडु CM विजय ने PM के सामने NEET परीक्षा का विरोध किया।
उन्होंने कहा कि NEET शुरू होने के बाद ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के छात्रों पर असर पड़ा है। विजय ने केंद्र से तमिलनाडु में MBBS-BDS सीटों पर 12वीं बोर्ड परीक्षा के अंकों के आधार पर एडमिशन देने की इजाजत मांगी।
विजय ने केंद्र से तमिलनाडु का रुका हुआ ₹3,284 करोड़ का शिक्षा फंड बिना नई शिक्षा नीति और तीन-भाषा नीति की शर्त के जारी करने की मांग की। हालांकि पेपर लीक के मुद्दे पर बैठक में कोई चर्चा नहीं हुई।

PM ने नीति आयोग की बैठक में शामिल हुए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिनिधियों के साथ फोटो खिंचवाई।

बैठक में शामिल हुए कर्नाटक CM डीके शिवकुनार, झारखंड CM हेमंत सोरेन और अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री।

नीति आयोग की बैठक के बाद यूपी CM योगी आदित्यनाथ PM मोदी से मिले।

बैठक के बाद विजय ने PM मोदी से मुलाकात की। CM बनने के बाद यह उनकी दूसरी मुलाकात थी।

कर्नाटक CM शिवकुमार ने PM मोदी को एक प्रतिमा गिफ्ट में दी।
बैठक में समान अवसर और डिजिटल गवर्नेंस
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीति आयोग की बैठक में कहा कि सभी राज्यों के विकसित हुए बिना भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। उन्होंने निवेशकों का ध्यान राज्यों की तरफ खींचने के लिए कारोबार करने में आसानी (Ease of Doing Business) पर जोर दिया।
चर्चा का मुख्य विषय ‘समावेशी मानव विकास’ रहा। प्रधानमंत्री ने राज्यों से जिला स्तर पर GDP का आकलन करने को भी कहा, ताकि स्थानीय स्तर पर विकास और प्रगति को बेहतर तरीके से मापा जा सके। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, रूफटॉप सोलर और नियोजित शहरीकरण जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
इस बार नीति आयोग की थीम: समावेशी मानव विकास
इस साल नीति आयोग की बैठक की थीम ‘विकसित भारत @2047 के लिए समावेशी मानव विकास’ है। इसका मतलब 2047 तक हर उम्र, क्षेत्र, लिंग और सामाजिक-आर्थिक बैकग्राउंड से परे हर भारतीय तक विकास का लाभ पहुंचाना है।
भारत 2047 में आजादी के 100 साल पूरे करेगा। केंद्र सरकार का लक्ष्य तब तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाना है। इसके लिए GDP बढ़ाने के साथ मानव पूंजी को मजबूत करना, युवाओं को भविष्य के लिए तैयार करना, रोजगार बढ़ाना, महिलाओं और वंचित वर्गों को अवसर देना क्षेत्रीय असमानताओं को कम करना भी जरूरी है।
इसी वजह से नीति आयोग की बैठक में शिक्षा, कौशल विकास, स्वास्थ्य, पोषण, उद्यमिता, रोजगार और सामाजिक समानता जैसे मुद्दों पर विशेष चर्चा हुई, ताकि विकास का लाभ हर भारतीय तक पहुंच सके।
सिद्धारमैया के अलावा 4 CM पिछली बैठक में नहीं पहुंचे थे
नीति आयोग की 10वीं गवर्निंग काउंसिल बैठक में कर्नाटक के तत्कालीन CM सिद्धारमैया, पश्चिम बंगाल की तत्कालीन CM ममता बनर्जी, केरल के तत्कालीन CM पिनराई विजयन, बिहार के तत्कालीन CM नीतीश कुमार और पुडुचेरी CM एन. रंगासामी शामिल नहीं हुए थे।
नीति आयोग के CEO बीवीआर सुब्रह्मण्यम के अनुसार, 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 31 ने बैठक में भाग लिया था। उन्होंने इसे गवर्निंग काउंसिल की सबसे अधिक भागीदारी वाली बैठकों में से एक बताया था।
वहीं, तमिलनाडु के तत्कालीन CM एम.के. स्टालिन, तेलंगाना के CM रेवंत रेड्डी, हिमाचल प्रदेश CM सुखविंदर सिंह सुक्खू, झारखंड CM हेमंत सोरेन और पंजाब के भगवंत मान जैसे विपक्ष शासित राज्यों के मुख्यमंत्री बैठक में मौजूद रहे थे।
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SBI, ICICI-HDFC समेत कई बैंकों ने FCNR जमा पर ब्याज दरें बढ़ाईं
मुंबई, एजेंसी। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) और आईसीआईसीआई बैंक सहित कई बैंकों ने गुरुवार को प्रवासी भारतीयों (NRI) के लिए ऊंची ब्याज दरों वाली एक नई विदेशी मुद्रा प्रवासी (FCNR-B) जमा योजना शुरू की। एनआरआई फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की ब्याज दरों में यह बढ़ोतरी, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा बैंकों के लिए 30 सितंबर तक विदेशी मुद्रा अदला-बदली खिड़की की घोषणा के कुछ ही दिन बाद आई है।

60-70 अरब डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आने की संभावना
रिजर्व बैंक के इस कदम से बैंकों को इन जमाओं पर वहन की जाने वाली मुद्रा की ‘हेजिंग’ लागत से प्रभावी रूप से राहत मिली है और उनके पास जमा दरों में वृद्धि करने की गुंजाइश बनी है। इस कदम का उद्देश्य प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा जमा आकर्षित करना है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस जमा योजना के तहत करीब 60 से 70 अरब अमेरिकी डॉलर की विदेशी पूंजी भारत आने की संभावना है।
कौन-सा बैंक कितना देगा रिटर्न
- आरबीआई के इस कदम के बाद, ICICI बैंक ने अपनी वेबसाइट पर कहा कि वह 11 जून से एनआरआई एफडी पर 6.50 प्रतिशत ब्याज की पेशकश कर रहा है।
- SBI ने अमेरिकी डॉलर में 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली नई ‘एसबीआई एडवांटेज एफसीएनआर (बी)’ जमा योजना शुरू की है। इस योजना में एक वर्ष की लॉक-इन अवधि होगी। एसबीआई के अनुसार, 10 लाख अमेरिकी डॉलर से अधिक की तीन से चार वर्ष की जमा पर 5.50 प्रतिशत, 4 से 5 वर्ष की जमा पर 5.75 प्रतिशत और 5 वर्ष की जमा पर 6 प्रतिशत ब्याज मिलेगा।
- बैंक ऑफ बड़ौदा (Bank of Baroda)ने भी अपनी नई एफसीएनआर (बी) योजना के तहत अमेरिकी डॉलर, ब्रिटिश पाउंड, यूरो, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और कनाडाई डॉलर में 3 से 5 वर्ष की अवधि वाली जमाओं पर ब्याज दरें बढ़ाई हैं। नई दरों के तहत अमेरिकी डॉलर जमा पर अधिकतम 6 प्रतिशत, ब्रिटिश पाउंड और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जमा पर 4.75 प्रतिशत, कनाडाई डॉलर जमा पर 5.15 प्रतिशत तथा यूरो जमा पर 3.75 प्रतिशत ब्याज दिया जाएगा।
- कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank) ने कहा कि 11 जून से 3 से 5 वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर 10 लाख अमेरिकी डॉलर से कम की जमा के लिए 6 प्रतिशत और इससे अधिक की जमा के लिए 6.15 प्रतिशत ब्याज मिलेगा।
- एचडीएफसी बैंक (HDFC Bank) ने भी 10 जून से 3 से 5 वर्ष की एफसीएनआर (बी) जमा पर ब्याज दर बढ़ाकर 6 प्रतिशत कर दी है। यह दर 10 जून से 30 सितंबर, 2026 के बीच खोली गई जमाओं पर लागू होगी।
- एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Small Finance Bank) ने अमेरिकी डॉलर में एफसीएनआर (बी) जमा पर अधिकतम ब्याज दर 5.15 प्रतिशत से बढ़ाकर 7.10 प्रतिशत सालाना कर दी है। नई दरें 10 जून, 2026 से प्रभावी हैं।
एफसीएनआर (बी) खाते एनआरआई को विदेशी मुद्रा में भारत में धन जमा करने की सुविधा देते हैं। इन खातों पर मिलने वाला ब्याज और मूलधन विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव से सुरक्षित रहता है, इसलिए ये एनआरआई निवेशकों के बीच लोकप्रिय माने जाते हैं।
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एलजी का भारत समेत तीन प्रमुख ‘ग्लोबल साउथ’ बाजारों से 2030 तक राजस्व दोगुना करने का लक्ष्य
नई दिल्ली, एजेंसी। दक्षिण कोरिया की इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एलजी के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) ल्यू जे-चोल ने कहा कि कंपनी भारत सहित तीन उच्च संभावनाओं वाले ‘ग्लोबल साउथ’ बाजारों से अपना कुल राजस्व साल 2030 तक दोगुना करने की योजना बना रही है। उन्होंने कहा कि भारत में मजबूत वृहद आर्थिक वृद्धि, ब्रांड के प्रति उपभोक्ताओं की पसंद तथा रेफ्रिजरेटर, वॉशिंग मशीन और एयर कंडीशनर जैसी प्रमुख श्रेणियों में घरेलू उपकरणों की अपेक्षाकृत कम पहुंच के कारण बड़े अवसर मौजूद हैं।

एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स के सीईओ ने कहा कि भारत, सऊदी अरब और ब्राजील कंपनी की दीर्घकालिक वृद्धि की रणनीति के केंद्र में हैं। कंपनी का लक्ष्य 2030 तक इन तीनों बाजारों से संयुक्त राजस्व को दोगुना करना है और इसके लिए वह इन उच्च संभावनाओं वाले बाजारों में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है। जे-चोल ने कहा, ”2025 में इन क्षेत्रों से हमारा संयुक्त राजस्व 6.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा, जो 2023 की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाता है। यह कंपनी की वैश्विक वृद्धि से दोगुना से भी अधिक है।”
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स का 2025 में एकीकृत राजस्व 89.2 लाख करोड़ कोरियाई वॉन रहा। उन्होंने कहा कि भारत जैसे प्रमुख उभरते बाजारों में तेज वृद्धि केवल कारोबार का विस्तार नहीं, बल्कि दक्षिण कोरिया, उत्तरी अमेरिका और यूरोप में कंपनी की मजबूत उपस्थिति के पूरक के रूप में संतुलित और मजबूत क्षेत्रीय पोर्टफोलियो तैयार करने की रणनीति का हिस्सा है। कंपनी की ‘ग्लोबल साउथ’ रणनीति के तहत अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के जरिये उत्पाद नेतृत्व को मजबूत करने तथा सह-विनिर्माण और आपूर्ति श्रृंखला के अनुकूलन के माध्यम से लागत प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा।
कंपनी की मध्यम से दीर्घावधि की रणनीति के बारे में विस्तार से बताते हुए, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स की निवेशक संबंध (आईआर) संचार टीम के प्रमुख एयरोन किम ने कहा कि कंपनी अपने मुख्य कारोबार को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, जिसमें घरेलू उपकरण, वाहन तथा मीडिया एवं मनोरंजन समाधान शामिल हैं। भारत में योजनाओं के बारे में किम ने कहा कि कंपनी यहां अपनी उत्पादन क्षमता दोगुनी करेगी और अतिरिक्त क्षमता का उपयोग निर्यात बढ़ाने के लिए किया जाएगा।
वर्तमान में एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के कुल राजस्व में निर्यात की हिस्सेदारी छह से सात प्रतिशत है और कंपनी एशिया तथा अफ्रीका के बाजारों को सेवाएं दे रही है। कंपनी दोहरे बाजार और दोहरे खंड वाले निर्यात मॉडल पर काम कर रही है, जिसके तहत विकसित देशों को प्रीमियम उत्पाद तथा उभरते बाजारों को भारत में डिजाइन किए गए ‘एसेंशियल सीरीज’ उत्पाद भेजे जाएंगे।
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