Connect with us

देश

दिल्ली में साल 2028 से एयर टैक्सी की शुरुआत संभव:3 घंटे तक का सफर 10 से 12 मिनट में पूरा होगा, शुरुआती किराया ₹500 होगा

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। भारत में 2028 तक एयर टैक्सी उड़ान भरने लगेंगी। ये कहीं से भी सीधे उड़ान भर सकती हैं और कहीं भी लैंड कर सकती हैं। पंजाब के मोहाली स्थित स्टार्टअप नलवा एयरो ने स्वदेशी ईवीटॉल (इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग) एयर टैक्सी विकसित की है। DGCA ने इसे डिजाइन ऑर्गेनाइजेशन अप्रूवल (डीओए) सर्टिफिकेट भी दे दिया है।

नलवा एयरो के सीईओ कुलजीत सिंह संधू के मुताबिक- कोविड-19 में एक मित्र ने इमरजेंसी मेडिकल इवैक्युएशन की जरूरत बताई। आसपास कोई एयर एम्बुलेंस या हेलीपैड नहीं था। तभी विचार आया कि क्यों न ऐसी मशीन बनाएं जो कहीं से भी वर्टिकल टेक-ऑफ और लैंडिंग कर सके।

उन्होंने कहा कि इसका डिजाइन चरण पूरा हो चुका है। सब-स्केल प्रोटोटाइप अगले एक माह में तैयार हो जाएगा। यह किफायती एयर मोबिलिटी मध्यम और निम्न मध्यम वर्ग को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। शुरू में दिल्ली-एनसीआर में लॉन्च होगी।

आईजीआई एयरपोर्ट से आनंद विहार, नोएडा, गाजियाबाद और पानीपत जैसी जगहों तक सड़क से जाने में एक से 3 घंटे लगते हैं। ईवीटॉल एयर टैक्सी 10 से 12 मिनट में पहुंचा देगी। आईजीआई एयरपोर्ट से आनंद विहार का शुरुआती किराया लगभग 500 रु. प्रति व्यक्ति रहने का अनुमान है। दिल्ली के बाद ये मुंबई, कोलकाता और बेंगलुरु सहित अन्य मेट्रो शहरों में भी दिखेंगी।

नलवा एयरो के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) का डिजाइन।

नलवा एयरो के इलेक्ट्रिक वर्टिकल टेक-ऑफ एंड लैंडिंग (ईवीटॉल) का डिजाइन।

8 रोटर सिस्टम, क्रैश नहीं होगा

संधू के अनुसार ईवीटॉल में 8 रोटर सिस्टम हैं। दो फेल भी हो जाएं तो विमान क्रैश नहीं होगा। तीन बंद होने पर सुरक्षित लैंडिंग संभव है। यह हेलिकॉप्टर से सुरक्षित है।

हेलिकॉप्टर की तुलना में 10 गुना शांत और परिचालन लागत में 90% से अधिक सस्ती होगी। हेलिकॉप्टर का परिचालन खर्च 5 लाख रु. प्रति घंटे तक पहुंच सकता है, जबकि ईवीटॉल की लागत इसके 10% से भी कम रहेगी।

कंपनी के अनुसार ये एयरक्राफ्ट फेडरेल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) और यूरोपियन यूनियन एविएशन सेफ्टी एजेंसी (EASA) के रेगुलेशन के अनुरूप तैयार किए जा रहे हैं।

अभी गुजरात और आंध्र प्रदेश में ईवीटॉल के लिए सैंड बॉक्स ट्रायल साइट तैयार की जा रही हैं। इनमें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी भागीदार है।

तकनीक: सिंगल चार्ज में 300 किमी तक उड़ान भरेगी टैक्सी

कंपनी दो मॉडलों पर काम कर रही है। पहला, लीथियम आयन बैटरी संचालित है। यह सिंगल चार्ज में 90 मिनट या 300 किमी तक उड़ेगा। दूसरा हाइड्रोजन फ्यूल सेल मॉडल है, जिसकी रेंज 800 किमी तक होगी। फास्ट चार्जर से बैटरी 50 मिनट में चार्ज होगी।

कंपनी के 3 प्रमुख मॉडल हैं। 2 स्ट्रेचर वाला एम्बुलेंस वर्जन, 5 से 7 सीटर यात्री एयर टैक्सी और कार्गो मॉडल। एयर टूरिज्म, निगरानी एवं टोही विमान और मेडिवैक संस्करण (चिकित्सीय निकासी मॉडल) पर भी काम चल रहा है।

टैक्सी की तरह बुक कर सकेंगे

नलवा एयरो का ईवीटॉल भारत में विकसित पहली और सबसे उन्नत एयर टैक्सी तकनीक है। इसके एडवांस फ्लाइंग कंप्यूटर, टिल्टिंग प्रपल्शन सिस्टम और बॉक्स-विंग डिजाइन पर सालों रिसर्च हुआ है।

विमान 4000 किग्रा अधिकतम टेक-ऑफ भार और 1000 किग्रा पेलोड उठा सकता है। क्रूज स्पीड 350 किमी/ घंटा है जो 400 तक जा सकती है। यह एयर टैक्सी, मेडिकल एम्बुलेंस, डिफेंस सर्विलांस, सर्च एंड रेस्क्यू और कार्गो ट्रांसपोर्ट, सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त है।

  • जीरो कार्बन: एटीएफ नहीं, बिजली/हाइड्रोजन से उड़ेगा। जीरो कार्बन, कम खर्च और आवाज।
  • वर्टिकल तकनीक: रनवे पर इंतजार नहीं, सीधे उठना और उतरना संभव। इमारतों की छत से भी टेक-ऑफ और लैंडिंग हो सकेगी।
  • फ्लाई बाइ वायर: पायलट के हाथ में डिजिटल कंट्रोल, सबकुछ कंप्यूटर नियंत्रित।
  • इंडिया मेक: स्वदेशी डिजाइन और मेक इन इंडिया मिशन के तहत विकसित किया गया है। इसमें लगी 60% तकनीक घरेलू ही है।
  • जॉब: नई स्किल, पायलट ट्रेनिंग, मेंटेनेंस व चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर में हजारों रोजगार होंगे।
  • दूरगामी असर: मेडिकल इमरजेंसी में समय की बचत होगी। कम खर्च में मरीज को जल्द से जल्द उपयुक्त अस्पताल में पहुंचा सकेंगे।

भविष्य: तीन साल बाद बिना पायलट के भी उड़ान संभव नलवा एयरो ने पायलट आधारित और ऑटोनॉमस यानी बिना पायलट उड़ान, दोनों तकनीकों पर समानांतर सफलता हासिल की है। पहले 3 सालों तक यात्री उड़ानें पायलट आधारित रहेंगी। कार्गो फ्लाइट्स पहले ही ऑटोनॉमस के तौर पर शुरू की जा सकती हैं।

तीन साल के बाद ऑटोनॉमस यात्री उड़ानों पर विचार किया जाएगा। जब तक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय की सभी सर्टिफिकेशन संबंधी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक ऑटोनॉमस यात्री उड़ानें शुरू नहीं की जाएंगी।

इन्फ्रास्ट्रक्चर: मेट्रो स्टेशन में ही बन सकेंगे वर्टिपोर्ट

वर्टिपोर्ट के लिए मौजूदा शहरी ढांचा आधार बन सकता है। मेट्रो स्टेशन व बड़ी इमारतों की छतों पर इनकी लैंडिंग संभव है। सरकार हर 50 किमी पर 1000 हेली पैड्स विकसित कर रही है। वे वर्टिपोर्ट बन सकते हैं। हेलिकॉप्टर के लिए 20×25 मीटर जगह जरूरी है। ईवीटॉल को सिर्फ 12×12 मीटर जगह चाहिए।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

छत्तीसगढ़

एमपी-छत्तीसगढ़, राजस्थान के युवा विधायकों का सम्मेलन:सीएम बोले- राजनीति में मर्यादा और अनुशासन जरूरी, राजस्थान के स्पीकर ने कहा- विरोध तार्किक हो

Published

on

भोपाल/रायपुर, एजेंसी। मध्य प्रदेश विधानसभा में चल रहे युवा विधायक सम्मेलन में 3 राज्यों के 50 से ज्यादा MLA मौजूद हैं। इनको संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा- जनता के बीच बने रहने के लिए विनम्रता बनाए रखें। इलाके की अच्छाई के साथ कमजोरी को भी समझें। राजनीति में मर्यादा और अनुशासन जरूरी है। आज के दौर में दुनिया हमारी तरफ देख रही है कि भारत किस तरह 2047 के अमृत काल की तरफ बढ़ रहा है।

वहीं, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने अपनी बात रखते हुए छात्र संघ चुनाव कराने की मांग रखी। उन्होंने कहा- हमारे यहां छात्र संघ चुनाव बंद हो गए। नेतृत्व की शुरुआत कॉलेज से होती है। कॉलेज के समय युवाओं के अंदर आग होती है सिस्टम से लड़ने की। वहां से शुरुआत होती है सोचविचार की और सिस्टम से लड़ने की। लोकतंत्र की जड़ें तभी मजबूत होंगी, जब इस देश में डेमोक्रेसी मजबूत रहेगी।

राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने कहा- संसदीय लोकतंत्र में जो कठिनाई आती हैं, उनसे नई परिस्थितियों का निर्माण होता है। विरोध तार्किक प्रक्रिया होनी चाहिए। हमारा प्रतिनिधित्व सार्थक सेवा की ओर बढ़े। हम सब मिलकर नागरिकों और विधायिका के बीच संवाद करें। हम पूरा समय सदन में बैठने का स्वभाव बनाएं। अनुभवी लोगों के भाषण सुनें।

  • युवा विधायकों का स्वागत पारंपरिक लोक नृत्य से किया गया। इसके बाद ग्रुप फोटो खींचा गया। इसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, राजस्थान के विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी, मध्य प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहे।
  • दो दिन तक चलने वाले युवा विधायक सम्मेलन में कुल पांच सत्र होंगे। पहले दिन यानी आज तीन सत्र होंगे। इनमें लोकतंत्र में नागरिकों की भागीदारी को मजबूत करने और विकसित भारत 2047 के विजन तक पहुंचने में युवा विधायकों की भूमिका जैसे विषयों पर चर्चा हो रही है।
  • 31 मार्च को सम्मेलन के दूसरे और आखिरी दिन ‘विकसित भारत 2047: युवा विधायकों के दायित्व एवं चुनौतियां’ विषय पर मंथन होगा। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश समापन सत्र में शामिल होंगे। एमआईटी, पुणे के चेयरमैन डॉ. राहुल वी. कराड भी संबोधन देंगे।
युवा विधायकों का स्वागत लोक नृत्य से किया गया।

युवा विधायकों का स्वागत लोक नृत्य से किया गया।

विधानसभा के प्रवेश द्वार पर विधायकों को गमछा ओढ़ाया गया।

विधानसभा के प्रवेश द्वार पर विधायकों को गमछा ओढ़ाया गया।

विधायकों का सीएम डॉ. मोहन सिंह और स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के साथ ग्रुप फोटो खींचा गया।

विधायकों का सीएम डॉ. मोहन सिंह और स्पीकर नरेंद्र सिंह तोमर के साथ ग्रुप फोटो खींचा गया।

सम्मेलन में तीन राज्यों के 45 विधायक मौजूद हैं।

सम्मेलन में तीन राज्यों के 45 विधायक मौजूद हैं।

सीएम मोहन यादव ने कहा- भारत 2047 के अमृत काल की तरफ बढ़ रहा है।

सीएम मोहन यादव ने कहा- भारत 2047 के अमृत काल की तरफ बढ़ रहा है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- नेतृत्व की शुरुआत कॉलेज से होती है।

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा- नेतृत्व की शुरुआत कॉलेज से होती है।

Continue Reading

देश

अंगोला से LPG खरीदने की तैयारी में भारतीय कंपनियां:जहाजों को होर्मुज से नहीं गुजरना होगा, खाड़ी देशों पर निर्भरता कम करने की प्लानिंग

Published

on

नई दिल्ली,एजेंसी। ईरान जंग की वजह से भारत में आई गैस की कमी से निपटने के लिए सरकारी तेल और गैस कंपनियां अब नए देशों से रसोई गैस (LPG) खरीदने का ऑप्शन तलाश रही है।

इसी वजह से इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और गेल जैसी कंपनियां अफ्रीकी देश अंगोला की सरकारी कंपनी सोनानगोल से LPG खरीदने पर बातचीत कर रही हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये कंपनियां सोनानगोल के साथ लंबे समय का समझौता करने पर विचार कर रही हैं। हालांकि, बातचीत अभी शुरुआती दौर में है और सरकार स्तर पर भी चर्चा चल रही है।

दरअसल, भारत की 92% LPG खाड़ी देशों से आती है। भारत सरकार इस निर्भरता घटाना चाहती है। ऐसे में अगर अंगोला से करार हो जाता है तो जहाज अटलांटिक और अरब सागर से होते हुए सीधे भारत पहुंचेंगे। उन्हें होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजरना होगा।

अंगोला से LPG क्यों खरीद रहा भारत?

भारत और अंगोला के बीच पहले से तेल और गैस का व्यापार होता रहा है, इसलिए दोनों देशों के बीच भरोसा और सप्लाई सिस्टम पहले से बना हुआ है। इसी वजह से नई डील करना आसान हो जाता है।

अंगोला में गैस उत्पादन होता है और वहां LPG के लिए जरूरी प्रोपेन और ब्यूटेन भी मिलते हैं, जिससे भारत को सीधे गैस मिल सकती है।

सप्लाई के लिहाज से भी अंगोला सही विकल्प है, क्योंकि समुद्र के रास्ते गैस 12 से 18 दिन में भारत पहुंच सकती है और वहां एक्सपोर्ट की अच्छी सुविधा भी मौजूद है। अंगोला में एनर्जी सेक्टर सरकार के कंट्रोल में है, जिससे सरकारी स्तर पर समझौता करना आसान होता है।

डील हुई तो भारत में पहली बार अंगोला से LPG आएगी

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अफ्रीका से गैस सप्लाई अमेरिका की तुलना में 10 से 15 दिन जल्दी भारत पहुंच सकती है। ऐसे में अंगोला भारत के लिए एक अच्छा ऑप्शन बन सकता है। अगर यह करार होता है, तो अंगोला पहली बार भारत को रसोई गैस सप्लाई करेगा।

भारतीय कंपनियां LPG के लिए करीब एक साल और LNG के लिए कम से कम 10 साल का करार करने पर विचार कर रही हैं।

अंगोला के पास करीब 4.6 ट्रिलियन क्यूबिक फीट नेचुरल गैस का भंडार है और वह पहले से ही भारत को कच्चा तेल और LNG सप्लाई करता रहा है। वित्त वर्ष 2025 में अंगोला भारत का पांचवां सबसे बड़ा LNG सप्लायर था।

ऑस्ट्रेलिया-अल्जीरिया और रूस से भी LPG खरीदने की तैयारी

भारत सिर्फ अंगोला ही नहीं, बल्कि ऑस्ट्रेलिया, अल्जीरिया और रूस जैसे देशों से भी गैस इम्पोर्ट के ऑप्शन तलाश रहा है, ताकि किसी एक रीजन पर निर्भरता कम की जा सके।

इस गैस संकट का असर उर्वरक (फर्टिलाइजर) और स्टील सेक्टर जैसे उद्योगों पर भी पड़ सकता है। अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो गैस की कीमतें भी बढ़ सकती हैं और भारत को महंगे दामों पर गैस -खरीदनी पड़ सकती है।

पेट्रोलियम मंत्रालय ने कहा है कि देश में गैस और पेट्रोलियम प्रोडक्ट की सप्लाई बनाए रखने के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। हाल ही में दो बड़े जहाज करीब 94 हजार मीट्रिक टन LPG लेकर भारत की ओर रवाना हुए हैं।

भारत की 92% LPG खाड़ी के 4 देशों से आती है

भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा LPG उपभोक्ता है और अपनी जरूरत का लगभग 60% इंपोर्ट करता है। वहीं, करीब 50% LNG भी इंपोर्ट करता है। अभी तक ज्यादातर LPG आयात फारस की खाड़ी के देशों UAE, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है।

खास बात यह है कि इन सभी देशों से आने वाली गैस एक ही रास्ते, होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। यह सिर्फ 33 किलोमीटर चौड़ा समुद्री रास्ता है, लेकिन दुनिया के करीब 20% तेल और गैस का व्यापार यहीं से होता है।

2024-25 में भारत के करीब 92% LPG आयात इन्हीं चार खाड़ी देशों से आए। इनमें यूएई सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है, जिसकी हिस्सेदारी बढ़कर 40% से ज्यादा हो गई है। वहीं, कतर और सऊदी अरब की हिस्सेदारी में गिरावट आई है।

भारत में LPG की मांग बढ़ी लेकिन उत्पादन नहीं

भारत में LPG की मांग तेजी से बढ़ रही है, लेकिन घरेलू उत्पादन लगभग नहीं बढ़ रहा। यही वजह है कि देश को अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से मंगवाना पड़ रहा है, जिससे सप्लाई को लेकर जोखिम भी बढ़ गया है।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत ने साल 2024-25 में 20.67 मिलियन टन LPG आयात किया, जो 2019-20 के 14.81 मिलियन टन के मुकाबले करीब 40% ज्यादा है।

दूसरी तरफ भारत का घरेलू उत्पादन लगभग स्थिर बना हुआ है। 2019-20 में देश ने 12.82 मिलियन टन LPG का उत्पादन किया था, जो 2024-25 में घटकर करीब 12.79 मिलियन टन रह गया। यानी उत्पादन में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई।

2024-25 में भारत ने 31.32 मिलियन टन LPG का इस्तेमाल किया, जो 2019-20 के मुकाबले करीब 19% ज्यादा है। यह बढ़ोतरी खासतौर पर ग्रामीण इलाकों में गैस कनेक्शन बढ़ने की वजह से हुई है।

प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत करोड़ों परिवारों को LPG कनेक्शन दिए गए हैं। अब देश में 33 करोड़ से ज्यादा एक्टिव गैस कनेक्शन हैं, जिससे मांग लगातार बढ़ रही है।

Continue Reading

कोरबा

गूंज उठा ढपढप: “जय श्री राम” के जयघोष में डूबा कोयलांचल, सुंदरकांड पाठ ने रचा भक्ति का विराट इतिहास

Published

on

कोरबा/बांकी मोंगरा (ढपढप)। कोयलांचल क्षेत्र का बांकी मोंगरा स्थित ढपढप मैदान इन दिनों अद्भुत आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र बना हुआ है, जहां आस्था मानो ज्वालामुखी बनकर फूट पड़ी है। विश्व प्रसिद्ध बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के मुखारविंद से प्रवाहित दिव्य श्री हनुमंत कथा के दौरान हजारों-लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा है। छत्तीसगढ़ के कोने-कोने से पहुंचे भक्तों ने इस आयोजन को ऐतिहासिक स्वरूप दे दिया है।

कार्यक्रम के विशेष आकर्षण के रूप में आयोजित सामूहिक सुंदरकांड पाठ ने पूरे वातावरण को राममय और भक्तिमय बना दिया। जैसे ही चौपाइयों की गूंज उठी, पूरा क्षेत्र “जय श्री राम” और “जय बागेश्वर धाम” के जयघोष से थर्रा उठा।

पीतांबरी आस्था का अनुपम दृश्य

कथा के इस विशेष दिवस पर ढपढप मैदान एक अलग ही रंग में नजर आया। हजारों की संख्या में श्रद्धालु पीले वस्त्रों में सजे-धजे पहुंचे, जिससे पूरा पंडाल पीतांबरी आस्था में रंग गया। पीला रंग जहां शुभता और समर्पण का प्रतीक है, वहीं इतनी विशाल संख्या में एकरूपता ने ऐसा आभास कराया मानो स्वर्णिम भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही हो।
संगीतमय सुंदरकांड से झूम उठा जनसागर

कार्यक्रम की शुरुआत संगीतमय सुंदरकांड पाठ से हुई। ढोल-मंजीरों की मधुर थाप और भजनों की स्वर लहरियों के बीच जब चौपाइयों का पाठ हुआ, तो श्रद्धालु भावविभोर होकर झूम उठे। हर कोई भक्ति के सागर में डूबा नजर आया।
भीड़ का ऐसा सैलाब कि मैदान पड़ा छोटा

ढपढप का विशाल मैदान भी श्रद्धालुओं की भीड़ के सामने छोटा प्रतीत होने लगा। चारों ओर सिर्फ सिर ही सिर नजर आ रहे थे। विशेष रूप से महिलाओं की बड़ी संख्या में उपस्थिति ने इस आयोजन को और भी भव्य बना दिया।
भावविभोर हुए श्रद्धालु, हर मन में हनुमान

पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की सहज, सरल और ओजस्वी शैली ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। हनुमान जी के प्रति उनकी अटूट भक्ति और कथा के माध्यम से जीवन के गूढ़ संदेशों ने श्रद्धालुओं के हृदय को छू लिया।
“सुंदरकांड केवल पाठ नहीं, जीवन का समाधान”

कथा के दौरान महाराज श्री ने कहा कि सुंदरकांड केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि जीवन की हर समस्या का समाधान है। उन्होंने श्रद्धालुओं को सनातन धर्म के मार्ग पर चलने, संयम और विश्वास बनाए रखने की प्रेरणा दी।
प्रशासन भी रहा सतर्क, व्यवस्था चाक-चौबंद

इतनी विशाल भीड़ के बावजूद प्रशासन की व्यवस्था सराहनीय रही। सुरक्षा से लेकर यातायात और अन्य व्यवस्थाओं को सुव्यवस्थित रखा गया, जिससे श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

मुख्य बिंदु
स्थान: ढपढप मैदान, बांकी मोंगरा (कोरबा)
मुख्य वक्ता: पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री (बागेश्वर धाम)
आयोजन: दिव्य श्री हनुमंत कथा एवं सामूहिक सुंदरकांड पाठ
विशेषता: हजारों महिलाओं सहित विशाल जनसैलाब की उपस्थिति
मुख्य आकर्षण: संगीतमय सुंदरकांड और गूंजते जयघोष
ढपढप का यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आस्था, एकता और सनातन संस्कृति की जीवंत मिसाल बन गया है। यहां उमड़ा जनसैलाब यह बता रहा है कि भक्ति की शक्ति आज भी लोगों के दिलों में उतनी ही प्रबल है, जितनी सदियों पहले थी।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677