Connect with us

छत्तीसगढ़

जैन मुनि आचार्य विद्यासागर महाराज ने ली समाधि-डोंगरगढ़ के चन्द्रगिरि में अंतिम संस्कार, छत्तीसगढ़-एमपी में आधे दिन का राजकीय शोक

Published

on

डोंगरगढ़, एजेंसी। दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज ने शनिवार (17 फरवरी) देर रात 2.35 बजे अपना शरीर त्याग दिया। उन्होंने छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में आचार्य पद का त्याग करने के साथ 3 दिन का उपवास और मौन धारण कर लिया था। उनके शरीर त्यागने की खबर मिलने के बाद जैन समाज के लोग डोंगरगढ़ में बड़ी संख्या में पहुंचे। पूजन के बाद उनका अंतिम संस्कार किया गया। वहीं मध्यप्रदेश में सरकार के सभी सांस्कृतिक कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। इसके अलावा मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में आधे दिन का राजकीय शोक घोषित किया गया है।

मैं शोक में हूं- पीएम मोदी

पीएम मोदी ने आचार्य विद्यासागर को नमन किया, श्रद्धांजलि दी। कहा- मैं शोक में हूं, मेरे लिए ये व्यक्तिगत क्षति है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विधानसभा चुनाव के दौरान 5 नवंबर को डोंगरगढ़ भी पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने आचार्य विद्यासागर जी महाराज से चंद्रगिरी पर्वत में मुलाकात की। प्रधानमंत्री ने उनसे आशीर्वाद लिया और चर्चा की थी।

1946 में कर्नाटक में हुआ जन्म

आचार्य विद्यासागर महाराज का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को शरद पूर्णिमा को कर्नाटक के बेलगांव जिले के सद्लगा ग्राम में हुआ था। दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज देश के ऐसे अकेले आचार्य थे, जिन्होंने 505 मुनियों को दीक्षा दी। आचार्य श्री कुन्थु सागर महाराज का नाम दूसरे नंबर पर आता है, उन्होंने अब तक 325 मुनियों को दीक्षा दी है। दमोह के कुंडलपुर में चल रहे महोत्सव में आचार्य श्री अब एक साथ 500 से ज्यादा दीक्षा देने जा रहे हैं। वर्तमान में आचार्य श्री का ससंघ देश का सबसे बड़ा ससंघ है। जिसमें 300 से ज्यादा मुनि श्री और आर्यिका हैं। विद्यासागर जी महाराज ने 505 मुनियों को दीक्षा दी।

गुरु ज्ञान सागर महाराज ने आचार्य पद दिया था

विद्यासागर महाराज को आचार्य पद की दीक्षा आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को अजमेर राजस्थान के नसीराबाद में दी थी। इसके बाद आचार्य श्री ज्ञान सागर महाराज ने आचार्य श्री के मार्गदर्शन में ही 1 जून 1973 को समाधि ली थी। विद्या सागर महाराज ने 22 नवंबर 1972 को आचार्य पद की दीक्षा ली थी। विद्यासागर जी ने 1980 में दी थी पहली दीक्षा विद्यासागर जी ने 8 मार्च 1980 को पहली दीक्षा छतरपुर में मुनि श्री समय सागर महाराज को दी। दूसरी दीक्षा सागर जिले में योग सागर और नियम सागर महाराज को दी थी। दीक्षा लेने वालों में आचार्य श्री के गृहस्थ जीवन के भाई मुनि श्री समय सागर और मुनि श्री योग सागर हैं। आचार्य श्री की दो बहनें शांता और सुवर्णा दीदी भी दीक्षा ले चुकी हैं। आचार्य श्री की ओर से पिछले 4 साल से दीक्षा नहीं दी गई। आखिरी बार उत्तरप्रदेश के ललितपुर में 28 नवंबर 2018 को दीक्षांत समारोह हुआ। इसमें 10 को मुनि दीक्षा दी गई थी।

विद्यासागर जी ने 22 की उम्र में दीक्षा ली थी-आजीवन नमक-चीनी, हरी सब्जी, दूध-दही नहीं खाया; दिन में एक बार पानी पीते थे

जैन मुनि विद्यासागर जी महाराज ने शनिवार रात 2.30 बजे देह त्याग दी थी। आज दोपहर उनका अंतिम संस्कार किया गया। आचार्यश्री का जन्म 10 अक्टूबर 1946 को कर्नाटक प्रांत के बेलगांव जिले के सदलगा गांव में हुआ था। उस दिन शरद पूर्णिमा थी। उन्होंने 30 जून 1968 को राजस्थान के अजमेर में अपने गुरु आचार्य श्रीज्ञानसागर जी महाराज से मुनिदीक्षा ली थी। आचार्यश्री ज्ञानसागर जी महाराज ने उनकी कठोर तपस्या को देखते हुए उन्हें अपना आचार्य पद सौंपा था। आचार्य ने 44 साल पहले कहा था-बुलाने को तरस जाओगे,आचार्य विद्यासागर की बात सच हुई, फिर राजस्थान नहीं आए, दीक्षा में होने लगी थी बारिश दिगंबर मुनि परंपरा के आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज का राजस्थान से विशेष लगाव रहा था। उन्होंने अजमेर में दीक्षा ली थी। नसीराबाद में उन्हें आचार्य की उपाधि मिली थी। छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ स्थित चन्द्रगिरि तीर्थ में शनिवार देर रात 2.35 बजे मुनि श्री ने शरीर त्याग दिया। 44 साल पहले उन्होंने अजमेर में विहार (आए थे) किया था। उस समय कहकर गए थे- आप मेरे यहां पर दर्शन के लिए तरस जाएंगे। उनकी ये बात सत्य भी हुई। इसके बाद उन्होंने न तो राजस्थान में विहार किया और न ही चातुर्मास के लिए यहां आए।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

कोरबा

बिहान ने बदली तकदीर – संघर्ष से सफलता तक सावित्री बिस्वास की प्रेरक उड़ान

Published

on

कोरबा। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत संचालित बिहान योजना ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन का माध्यम बन रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में महिलाओं को स्व-सहायता समूहों से जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता और स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसका परिणाम है कि अनेक महिलाएं आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार और समाज में नई पहचान स्थापित कर रही हैं।

विकासखंड कोरबा के ग्राम पंचायत गुरमा की निवासी श्रीमती सावित्री बिस्वास ऐसी ही प्रेरणादायक महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने संघर्षपूर्ण परिस्थितियों से निकलकर आर्थिक सशक्तिकरण की मिसाल कायम की है। सीमित आय और आजीविका के सीमित साधनों के बीच जीवनयापन कर रहीं सावित्री बिस्वास ने स्व-सहायता समूह से जुड़कर अपने जीवन की दिशा बदल दी। बिहान योजना के माध्यम से उन्हें वित्तीय साक्षरता, उद्यम विकास, समूह प्रबंधन और आजीविका संवर्धन संबंधी प्रशिक्षण प्राप्त हुआ, जिससे उनमें आत्मविश्वास और व्यवसायिक समझ विकसित हुई।
जिला प्रशासन और राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के सहयोग से उनके समूह को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ा गया। रिवॉल्विंग फंड, सामुदायिक निवेश निधि और बैंक ऋण जैसी सुविधाओं का लाभ उठाते हुए उन्होंने लगभग 60 हजार रुपये की पूंजी से किराना और फैंसी स्टोर की शुरुआत की। व्यवसाय में सफलता मिलने पर उन्होंने एक लाख रुपये के निवेश से चप्पल दुकान शुरू की। बाद में सीएलएफ से दो लाख रुपये का ऋण लेकर कृषि सेवा केंद्र स्थापित किया तथा बैंक और सीएलएफ से लगभग छह लाख रुपये का ऋण प्राप्त कर मेडिकल स्टोर एवं कृषि सेवा केंद्र का विस्तार किया।
आज सावित्री बिस्वास फैंसी स्टोर, कपड़ा दुकान, चप्पल दुकान, राशन दुकान, बर्तन दुकान, मेडिकल स्टोर और कृषि सेवा केंद्र सहित विभिन्न व्यवसायों का सफल संचालन कर रही हैं। उनके परिश्रम, दूरदर्शिता और वित्तीय प्रबंधन का परिणाम है कि उनकी वार्षिक आय लगभग 7 लाख 70 हजार रुपये तक पहुंच गई है। आर्थिक प्रगति का असर उनके परिवार के जीवन स्तर पर भी स्पष्ट दिखाई देता है। उनका एक पुत्र बी. फार्मेसी की पढ़ाई कर रहा है, पुत्री बीएससी नर्सिंग की शिक्षा प्राप्त कर रही है, जबकि छोटा पुत्र चॉइस सेंटर का संचालन कर आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ रहा है।
सावित्री बिस्वास की सफलता अब केवल उनके परिवार तक सीमित नहीं है। वे गांव की अन्य महिलाओं को भी स्व-सहायता समूहों से जुड़ने, नियमित बचत करने और स्वरोजगार अपनाने के लिए प्रेरित कर रही हैं। उनकी प्रेरणा से अनेक महिलाएं किराना, कपड़ा, चप्पल व्यवसाय और होटल संचालन जैसे कार्यों से जुड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत बना रही हैं।
सावित्री बिस्वास का मानना है कि यदि महिलाओं को अवसर, प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन मिले तो वे किसी भी क्षेत्र में सफलता हासिल कर सकती हैं। वे अपनी इस उपलब्धि का श्रेय मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन कोरबा को देती हैं, जिनके सहयोग से उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिला। उनकी कहानी यह साबित करती है कि संकल्प, मेहनत और सही मार्गदर्शन के बल पर ग्रामीण महिलाएं न केवल अपने जीवन को बदल सकती हैं, बल्कि पूरे समाज में परिवर्तन की नई मिसाल भी स्थापित कर सकती हैं।

Continue Reading

कोरबा

खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में कोरबा ने रचा नया कीर्तिमान, लगातार तीसरी बार राज्य में प्रथम स्थान प्राप्त

Published

on

कोरबा। खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण द्वारा निर्धारित विभिन्न मानकों और दिशा-निर्देशों का प्रभावी ढंग से पालन करते हुए कोरबा जिले ने एक बार फिर उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। जिले ने खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए लगातार तीसरी बार छत्तीसगढ़ राज्य के फूड सेफ्टी इंडेक्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष है क्योंकि कोरबा ने रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख जिलों को पीछे छोड़ते हुए यह स्थान बरकरार रखा है। इतना ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी जिले ने अपनी रैंकिंग में सुधार करते हुए पिछले वर्ष के 118वें स्थान से आगे बढ़कर 112वें स्थान पर अपनी पहचान स्थापित की है।
जिले की इस सफलता के पीछे खाद्य प्रतिष्ठानों के नियमित निरीक्षण, खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की सतत निगरानी, जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन, लाइसेंस एवं पंजीयन की प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने तथा खाद्य सुरक्षा मानकों के प्रभावी क्रियान्वयन जैसे अनेक महत्वपूर्ण प्रयास शामिल हैं। निर्धारित सभी मापदंडों का गंभीरता से अनुपालन सुनिश्चित करने के परिणामस्वरूप कोरबा ने यह गौरवपूर्ण उपलब्धि अर्जित की है।
इस उल्लेखनीय सफलता में कलेक्टर मार्गदर्षन में खाद्य सुरक्षा अधिकारी विकास भगत एवं संघर्ष कुमार मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। दोनों अधिकारियों द्वारा खाद्य सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए सतत प्रयासों, प्रभावी निरीक्षणों एवं जनजागरूकता गतिविधियों की व्यापक स्तर पर सराहना की जा रही है। उनके नेतृत्व और समर्पण ने जिले को राज्य एवं राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जिले की इस उपलब्धि से न केवल खाद्य सुरक्षा व्यवस्था को मजबूती मिली है, बल्कि आम नागरिकों में सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण खाद्य पदार्थों के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। कोरबा की यह सफलता अन्य जिलों के लिए भी प्रेरणा का विषय बनी हुई है।

Continue Reading

कोरबा

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना बनी सहारा, श्रवण दास मानिकपुरी को मिली नई ऊर्जा

Published

on

कोरबा/पाली। पाली विकासखंड के ग्राम पुलालीकला के किसान श्रवण दास मानिकपुरी प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित होकर बेहद प्रसन्न हैं। योजना की 23वीं किस्त की राशि उनके बैंक खाते में सफलतापूर्वक प्राप्त हुई है, जिससे उन्हें खेती-किसानी के कार्यों में आर्थिक सहयोग मिला है।

श्री मानिकपुरी बताते हैं कि प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण और लाभकारी योजना है। इस योजना के माध्यम से समय-समय पर मिलने वाली सहायता राशि से बीज, खाद तथा अन्य कृषि आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सुविधा होती है। इससे खेती की लागत का कुछ भार कम होता है और किसानों को आत्मविश्वास के साथ खेती करने में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, मैं स्वयं को उन भाग्यशाली किसानों में शामिल मानता हूँ जिनके खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की राशि नियमित रूप से प्राप्त होती है। यह सहायता हमारे लिए बहुत उपयोगी साबित हो रही है।
श्रवण दास मानिकपुरी ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लिए भारत सरकार एवं कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह योजना किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने और कृषि कार्यों को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। योजना का लाभ सीधे किसानों के खाते में पहुंचने से पारदर्शिता भी सुनिश्चित हुई है और किसानों का विश्वास बढ़ा है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लाभान्वित किसान आज अधिक आत्मनिर्भरता के साथ खेती कर रहे हैं तथा कृषि क्षेत्र में नई संभावनाओं की ओर अग्रसर हो रहे हैं।

Continue Reading
Advertisement

Trending

Copyright © 2020 Divya Akash | RNI- CHHHIN/2010/47078 | IN FRONT OF PRESS CLUB TILAK BHAVAN TP NAGAR KORBA 495677