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M मोदी को नामीबिया में 21 तोपों की सलामी:एयरपोर्ट पर कलाकारों के साथ ढोल बजाया, 27 साल बाद यहां जाने वाले भारतीय PM

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विंडहोक,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के देश नामीबिया दौरे पर हैं। नामीबिया की राष्ट्रपति डॉ नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया। इसके बाद PM मोदी और राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के बीच डेलिगेशन लेवल पर बातचीत हुई। दोनों देशों ने एकदूसरे के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) एक्सचेंज किए।

विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में PM मोदी को 21 तोपों की सलामी दी गई। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर मिला। इससे पहले विंडहोक एयरपोर्ट पर PM मोदी का नामीबिया के पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत किया गया।

PM ने कलाकारों के साथ ढोल भी बजाया। नामीबिया में प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली और किसी भारतीय प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा है। 27 सालों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नामीबिया दौरे पर है।

इससे पहले 1998 में तत्कालीन PM अटल बिहारी वाजपेयी नामीबिया गए थे। 1990 में उस वक्त PM रहे वीपी सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित बड़े नेता नामीबिया के पहले स्वतंत्रता दिवस पर वहां गए थे।

PM मोदी के नामीबिया दौरे की तस्वीरें…

विंडहोक एयरपोर्ट पर नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने मोदी का स्वागत किया।

विंडहोक एयरपोर्ट पर नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने मोदी का स्वागत किया।

नामीबिया के कलाकारों ने पारंपरिक डांस-गाने के साथ PM मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया।

नामीबिया के कलाकारों ने पारंपरिक डांस-गाने के साथ PM मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया।

नामीबिया की राजधानी विंडहोक के होटल में भारतीय समुदाय के लोगों ने PM का स्वागत किया।

नामीबिया की राजधानी विंडहोक के होटल में भारतीय समुदाय के लोगों ने PM का स्वागत किया।

राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया के अफसरों से मिले।

राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया के अफसरों से मिले।

PM मोदी और राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के बीच स्टेट हाउस में डेलिगेशन लेवल पर बातचीत हुई।

PM मोदी और राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के बीच स्टेट हाउस में डेलिगेशन लेवल पर बातचीत हुई।

PM मोदी और राष्ट्रपति की मौजूदगी में भारत और नामीबिया ने समझौता ज्ञापन एक्सचेंज किए।

PM मोदी और राष्ट्रपति की मौजूदगी में भारत और नामीबिया ने समझौता ज्ञापन एक्सचेंज किए।

प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक 'हीरोज एकर' पर पुष्पांजलि अर्पित की।

प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक ‘हीरोज एकर’ पर पुष्पांजलि अर्पित की।

नामीबिया से डायमंड- यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा संभव PM मोदी नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह के निमंत्रण पर राजकीय यात्रा पर गए हैं। PM मोदी और राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह के बीच डायमंड, जरूरी खनिजों और यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा की संभावना है।

इसके अलावा मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। मोदी का नामीबिया दौरा 2 जुलाई से 10 जुलाई तक 5 देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। नामीबिया हीरा, यूरेनियम, तांबा, फॉस्फेट और अन्य खनिजों से समृद्ध देश है।

नामीबिया में सबसे ज्यादा समुद्री हीरा, भारत को डायरेक्ट नहीं देता नामीबिया में दुनिया का सबसे ज्यादा समुद्री हीरे का भंडार है। यहां समुद्र के नीचे लगभग 80 मिलियन कैरेट से ज्यादा हीरा मौजूद है। हालांकि, नामीबिया भारत को कच्चा हीरा डायरेक्ट एक्सपोर्ट नहीं करता है।

इसके बजाय, ये लंदन, एंट्वर्प और दूसरे वैश्विक व्यापार केंद्रों से होते हुए भारतीय तटों तक पहुंचते हैं। PM मोदी की यात्रा हीरे के डायरेक्ट खरीद-बिक्री के लिए आधार तैयार करने में मदद कर सकती है।

खासकर इसलिए क्योंकि भारत की कई डायमंड प्रोसेसिंग कंपनियां पहले से ही नामीबिया में काम कर रही हैं।

भारत ने नामीबिया में माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, डायमंड प्रोसेसिंग और सर्विसेज सहित कई क्षेत्रों में 800 मिलियन डॉलर (लगभग रू.6,600 करोड़) से ज्यादा का निवेश किया है।

हीरे के अलावा, नामीबिया में कोबाल्ट, लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ने में भारत के लिए जरूरी है।

नामीबिया यूरेनियम का भी प्रमुख उत्पादक है, जो भारत के सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम में मदद कर सकता है।

2022 में बोइंग 747 से नामीबिया से 8 चीते भारत आए थे नामीबिया दुनिया भर में जंगली चीतों की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। 17 सितंबर, 2022 में भारत सरकार ने नामीबिया सरकार के साथ एक औपचारिक समझौते (MoU) के तहत 8 अफ्रीकी चीतों का पहला बैच मंगवाया था।

इनमें 5 मादाएं और 3 नर थे, जिनकी उम्र तब दो से छह साल के बीच थी। 9 दिन क्वारंटाइन में रखने के बाद PM मोदी ने चीतों के मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। PM मोदी ने एक चीते का नाम आशा रखा था। आशा ने दिसंबर 2024 में तीन शावकों को जन्म दिया।

8 चीते एक मोडिफाइड बोइंग 747 पैसेंजर प्लेन से नामीबिया के विंडहोक से मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे थे।

8 चीते एक मोडिफाइड बोइंग 747 पैसेंजर प्लेन से नामीबिया के विंडहोक से मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे थे।

नामीबिया से भारत में चीतों का ट्रांसफर दुनिया में चीतों के पहले अंतरमहाद्वीपीय ट्रांसफर था। भारत में शिकार और जंगलों की कटाई के चलते अफ्रीकी चीतों की प्रजाति 70 साल से विलुप्त हो चुकी थी। अफ्रीकी चीतों को 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था।

सीधे तौर पर भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे नामीबिया ने जंगल में बसाने के लिए चीते ट्रांसफर किए हैं। हालांकि, कुछ चीतों को वैज्ञानिक अध्ययन, चिड़ियाघरों, या जनसंख्या प्रबंधन के लिए अमेरिका और यूरोप के संस्थानों को अस्थायी रूप से भेजा गया है, लेकिन ये सब बहुत ही छोटे पैमाने पर और संरक्षण के मकसद से थे।

दोनों देशों में पिछले साल 4.5 हजार करोड़ का व्यापार पिछले कुछ सालों में भारत और नामीबिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी देखी गई है। साल 2024-25 में दोनों तरफ से करीब रू.4,858 करोड़ का व्यापार हुआ। भारत का निर्यात रू.2,798 करोड़ और नामीबिया से आयात रू.2,061 करोड़ का रहा।

दोनों देशों में वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब रू.2,320 करोड़ का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात रू.2,004 करोड़ था। 2023 में अप्रैल और नवंबर के बीच, 178% की बढ़ोतरी के साथ दोनों देशों के बीच लगभग साढ़े 5 हजार करोड़ का व्यापार हुआ।

8 महीने के दौरान भारत का निर्यात करीब रू.3,488 करोड़ था और नामीबिया से करीब रू.1,962 करोड़ का आयात था। मार्च 24 तक दोनों तरफ से रू.6,735 करोड़ का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात रू.3,785 करोड़ था।

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नेपाल सीमा से गिरफ्तार हुए TMC के पूर्व विधायक जहांगीर खान, STF की बड़ी कार्रवाई

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कोलकाता, एजेंसी। तृणमूल कांग्रेस के नेता जहांगीर खान को ‘जबरन वसूली’ के आरोप में सोमवार को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा के पास से गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने यह जानकारी दी। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने खान को गिरफ्तारी से दी गई अंतरिम सुरक्षा 26 मई को वापस ले ली थी। खान के खिलाफ दक्षिण 24 परगना जिले के फाल्टा थाने में सात प्राथमिकी दर्ज हैं।
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया, ”खान को उत्तर बंगाल में भारत-नेपाल सीमा क्षेत्र से गिरफ्तार किया गया।” हालांकि पुलिस ने गिरफ्तारी के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं दी है। खान 21 मई को फाल्टा विधानसभा उपचुनाव में चौथे स्थान पर रहे थे। हालांकि, उन्होंने चुनाव से कुछ दिन पहले अपनी उम्मीदवारी वापस लेने की घोषणा की थी, लेकिन नाम वापस लेने की अवधि समाप्त हो चुकी थी इसीलिए उनका नाम ईवीएम में दर्ज रहा।

कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान को मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ली
इससे पहले कलकत्ता हाई कोर्ट ने खान के खिलाफ दर्ज कई आपराधिक मामलों में पुलिस की किसी भी सख्त कार्रवाई से उन्हें मिली अंतरिम सुरक्षा वापस ले ली थी। कोर्ट ने 18 मई को खान को सख्त कार्रवाई से राहत दी थी, लेकिन बाद में इसे रद्द कर दिया गया। जजों ने कहा कि राज्य में राजनीतिक स्थिति में बदलाव और याचिकाकर्ता द्वारा राजनीतिक बदले की भावना के दावों के कारण ऐसी सुरक्षा जारी रखना उचित नहीं होगा।

खान के वकील किशोर दत्ता ने कोर्ट में तर्क दिया कि 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद उनके मुवक्किल के खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज किए गए थे। उन्होंने दावा किया कि ये मामले राजनीतिक बदले की भावना का नतीजा थे और कहा कि सुरक्षा न केवल चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी थी, बल्कि खान को कथित उत्पीड़न से बचाने के लिए भी थी। दूसरी ओर, अतिरिक्त महाधिवक्ता राजदीप मजूमदार ने सुरक्षा बढ़ाने की मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि पहले दी गई सुरक्षा केवल खान को 21 मई को फाल्टा में हुए दोबारा मतदान (रीपोल) में भाग लेने में सक्षम बनाने के लिए थी, जिसके नतीजे 24 मई को घोषित किए गए थे।

 पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना जिले में फाल्टा विधानसभा उपचुनाव (रीपोल) के बीच एक बड़ी राजनीतिक घटनाक्रम में, जहांगीर खान ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जो पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए एक बड़ा झटका था। उन्होंने कहा कि दौड़ से हटने का फैसला फाल्टा के लोगों की भलाई के लिए लिया गया था। खान ने कहा, “मैं फाल्टा का बेटा हूं और चाहता हूं कि फाल्टा शांतिपूर्ण रहे और तरक्की करे। हमारे मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी फाल्टा के विकास के लिए एक विशेष पैकेज दे रहे हैं, इसलिए मैंने निर्वाचन क्षेत्र में दोबारा मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का फैसला किया है।”

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भाजपा की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी, क्रॉस वोटिंग की आशंका पर दिग्विजय सिंह का तीखा हमला

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भोपाल, एजेंसी। मध्य प्रदेश में कांग्रेस से राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन ने अपना नामाकंन दाखिल किया। उनका मुकाबले में भाजपा ने तीसरे उम्मीदवार के रूप में महेश केवट को उतारा है। ऐसे में मुकाबला बेहद रोचक हो गया है। वहीं कांग्रेस में क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ गया है। हालांकि कांग्रेस ने इसे भाजपा की गलतफहमी बताया है।

कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह का कहना है, “बीजेपी को गलतफहमी है कि वे पार्टी में फूट डाल सकते हैं। कांग्रेस पूरी तरह से संगठित और एकजुट है; सभी कांग्रेस विधायक पार्टी की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन को मजबूती से अपना पूरा समर्थन देंगे और बीजेपी की फूट डालने की पुरानी चाल कामयाब नहीं होगी। मीनाक्षी नटराजन कांग्रेस की उम्मीदवार हैं और हम कांग्रेस में एकजुट हैं।”

बता दें कि 230 सदस्यों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में प्रभावी वोट संख्या 228 है। इनमें से BJP के पास 164 और कांग्रेस के पास 64 विधायक हैं। बीना की विधायक निर्मला सप्रे के वोट की स्थिति साफ न होने (जो BJP की तरफ झुकती दिख रही है) और विजयपुर के विधायक मुकेश मल्होत्रा ​​के वोटिंग पर रोक के कारण, कांग्रेस की प्रभावी संख्या घटकर 62 रह गई है।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए हर उम्मीदवार को 58 वोटों की ज़रूरत होती है। इस तरह, BJP को दो सीटें जीतने के लिए 116 वोटों की ज़रूरत है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कुल 164 वोटों में से 116 वोट डालने के बाद BJP के पास 48 वोट बचेंगे, जबकि तीसरी सीट पक्की करने के लिए उसे 10 और वोटों की ज़रूरत होगी। कांग्रेस के पास एक सीट जीतने के लिए ज़रूरी संख्या तो है, लेकिन BJP द्वारा तीसरे उम्मीदवार के ऐलान ने उसकी चिंताएं बढ़ा दी हैं और नटराजन के चुनाव जीतने की राह मुश्किल कर दी है।

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क्या शिवसेना की तहर दो गुटों में बंट जाएगी TMC?, सांसद के इस्तीफे से बंगल में गरमाई सियासत

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कोलकाता, एजेंसी। बंगाल चुनाव में बीजेपी की शानदार जीत की पूरे देश में चर्चा है तो वहीं तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी के बीच अंदरूनी कलह भी सामने आने लगी है इसे लेकर अब पार्टी के भविष्य की रणनीति पर लोग चर्चा कर रहे हैं। राजनीतिक गलियारों में अब इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई है कि क्या तृणमूल कांग्रेस में भी Shiv Sena की तरह अंदरूनी खींचतान बढ़ेगी या पार्टी नेतृत्व समय रहते हालात संभाल लेगा। विपक्ष लगातार TMC में असंतोष और गुटबाजी के आरोप लगा रहा है, जबकि पार्टी नेतृत्व इसे सामान्य राजनीतिक घटनाक्रम बता रहा है।

अगल गुट बनाने को लेकर चर्चा तेज इस्तीफा 
दरअसल, अंदरूनी कलह के बीच पार्टी के सांसदों के एक समूह ने भविष्य की रणनीति और पार्टी से अलग होकर एक नया गुट बनाने की संभावना पर चर्चा करने के लिए सोमवार को यहां बैठक की। बैठक में हिस्सा लेने वाले नेताओं में सुखेंदु शेखर राय भी शामिल थे, जिन्होंने सोमवार को ही पार्टी से इस्तीफा दे दिया और राज्यसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। उनके अलावा तृणमूल के लोकसभा सांसद प्रसून बनर्जी, शर्मिला सरकार, जगदीश चंद्र बसुनिया, कालीपद सरन खेरवाल और अरूप चक्रवर्ती भी बैठक में मौजूद थे। 

ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप पर भेजा 
मीडिया से बातचीत में राय ने कहा कि उन्होंने राज्यसभा के सभापति सी. पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर उन्हें अपना इस्तीफा सौंप दिया है। राय ने कहा, ”मैंने पार्टी से इस्तीफा देने के अपने फैसले से ममता बनर्जी को व्हाट्सऐप और ईमेल के जरिये अवगत करा दिया है। यह घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल के 60 विधायकों द्वारा एक अलग गुट बनाने के बाद सामने आया है, जहां रिताब्रता बनर्जी ने ममता बनर्जी के नामित उम्मीदवार के बजाय नेता प्रतिपक्ष का कार्यभार संभाल लिया है।

इस्तीफे को लेकर दिया ये बयान 
राय ने कहा, “विधानसभा में जो कुछ भी हुआ, क्या कोई यह बता सकता है कि राज्यसभा या लोकसभा में वैसी ही स्थिति पैदा नहीं होगी?” हालांकि, राय ने स्पष्ट किया कि राज्यसभा और पार्टी से उनका इस्तीफा राज्य विधानसभा में हुए घटनाक्रम से अलग है, क्योंकि वहां के विधायकों ने इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने कहा, ”उनके कदम और मेरे कदम के बीच कोई संबंध नहीं है। यह पूरी तरह से अलग है। मैंने पार्टी से इस्तीफा दिया है, उन्होंने नहीं। राज्यसभा में मेरा कार्यकाल 2029 में समाप्त होना था, लेकिन मैंने सैद्धांतिक तौर पर इस्तीफा दे दिया, क्योंकि मेरे लिए (पार्टी में) बने रहना मुश्किल हो गया था।”

‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में शामिल हुए अभिषेक बनर्जी
यह राजनीतिक घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब तृणमूल प्रमुख ममता बनर्जी और उनके भतीजे एवं पार्टी सांसद अभिषेक बनर्जी यहां ‘इंडिया’ गठबंधन की बैठक में भाग ले रहे हैं। इस बैठक में गठबंधन के भीतर एकजुटता पर जोर दिया गया और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा करने तथा जनता की आजीविका से जुड़े मुद्दों को उठाने की आवश्यकता बताई गई।

तृणमूल के इन दोनों नेताओं के अलावा बैठक में कांग्रेस की सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे, समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव, राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के तेजस्वी यादव, नेशनल कॉन्फ्रेंस के उमर अब्दुल्ला और पीडीपी की महबूबा मुफ्ती के साथ-साथ वामपंथी नेता भी मौजूद थे। हालांकि ममता से नाराज विधायकों ने अभी तक अलग पार्टी बनाए जाने को लेकर कोई भी अधिकारिक ऐलान नहीं किया। 

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