विंडहोक,एजेंसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बुधवार को दक्षिण अफ्रीका के देश नामीबिया दौरे पर हैं। नामीबिया की राष्ट्रपति डॉ नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत किया।
दोनों नेताओं ने हाथ मिलाकर एक दूसरे का अभिवादन किया। इसके बाद PM मोदी और राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के बीच डेलिगेशन लेवल पर बातचीत हुई। दोनों देशों ने एकदूसरे के साथ समझौता ज्ञापन (MoUs) एक्सचेंज किए।
विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में PM मोदी को 21 तोपों की सलामी दी गई। उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर मिला। इससे पहले विंडहोक एयरपोर्ट पर PM मोदी का नामीबिया के पारंपरिक नृत्य के साथ स्वागत किया गया।
PM ने कलाकारों के साथ ढोल भी बजाया। नामीबिया में प्रधानमंत्री मोदी की यह पहली और किसी भारतीय प्रधानमंत्री की तीसरी यात्रा है। 27 सालों बाद कोई भारतीय प्रधानमंत्री नामीबिया दौरे पर है।
इससे पहले 1998 में तत्कालीन PM अटल बिहारी वाजपेयी नामीबिया गए थे। 1990 में उस वक्त PM रहे वीपी सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी सहित बड़े नेता नामीबिया के पहले स्वतंत्रता दिवस पर वहां गए थे।
PM मोदी के नामीबिया दौरे की तस्वीरें…
विंडहोक एयरपोर्ट पर नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह ने मोदी का स्वागत किया।
नामीबिया के कलाकारों ने पारंपरिक डांस-गाने के साथ PM मोदी का एयरपोर्ट पर स्वागत किया।
नामीबिया की राजधानी विंडहोक के होटल में भारतीय समुदाय के लोगों ने PM का स्वागत किया।
राजधानी विंडहोक स्थित स्टेट हाउस में प्रधानमंत्री मोदी नामीबिया के अफसरों से मिले।
PM मोदी और राष्ट्रपति नंदी-नदैतवा के बीच स्टेट हाउस में डेलिगेशन लेवल पर बातचीत हुई।
PM मोदी और राष्ट्रपति की मौजूदगी में भारत और नामीबिया ने समझौता ज्ञापन एक्सचेंज किए।
प्रधानमंत्री मोदी ने नामीबिया के राष्ट्रीय युद्ध स्मारक ‘हीरोज एकर’ पर पुष्पांजलि अर्पित की।
नामीबिया से डायमंड- यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा संभव PM मोदी नामीबिया की राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह के निमंत्रण पर राजकीय यात्रा पर गए हैं। PM मोदी और राष्ट्रपति नेटुम्बो नंदी-नदैतवाह के बीच डायमंड, जरूरी खनिजों और यूरेनियम सप्लाई पर चर्चा की संभावना है।
इसके अलावा मोदी नामीबिया की संसद को भी संबोधित करेंगे। मोदी का नामीबिया दौरा 2 जुलाई से 10 जुलाई तक 5 देशों की यात्रा का हिस्सा है, जिसमें घाना, त्रिनिदाद एंड टोबैगो, अर्जेंटीना, ब्राजील और नामीबिया शामिल हैं। नामीबिया हीरा, यूरेनियम, तांबा, फॉस्फेट और अन्य खनिजों से समृद्ध देश है।
नामीबिया में सबसे ज्यादा समुद्री हीरा, भारत को डायरेक्ट नहीं देता नामीबिया में दुनिया का सबसे ज्यादा समुद्री हीरे का भंडार है। यहां समुद्र के नीचे लगभग 80 मिलियन कैरेट से ज्यादा हीरा मौजूद है। हालांकि, नामीबिया भारत को कच्चा हीरा डायरेक्ट एक्सपोर्ट नहीं करता है।
इसके बजाय, ये लंदन, एंट्वर्प और दूसरे वैश्विक व्यापार केंद्रों से होते हुए भारतीय तटों तक पहुंचते हैं। PM मोदी की यात्रा हीरे के डायरेक्ट खरीद-बिक्री के लिए आधार तैयार करने में मदद कर सकती है।
खासकर इसलिए क्योंकि भारत की कई डायमंड प्रोसेसिंग कंपनियां पहले से ही नामीबिया में काम कर रही हैं।
भारत ने नामीबिया में माइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, डायमंड प्रोसेसिंग और सर्विसेज सहित कई क्षेत्रों में 800 मिलियन डॉलर (लगभग रू.6,600 करोड़) से ज्यादा का निवेश किया है।
हीरे के अलावा, नामीबिया में कोबाल्ट, लिथियम और दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements) और मिनरल्स पाए जाते हैं, जो क्लीन एनर्जी की तरफ बढ़ने में भारत के लिए जरूरी है।
नामीबिया यूरेनियम का भी प्रमुख उत्पादक है, जो भारत के सिविलियन न्यूक्लियर एनर्जी प्रोग्राम में मदद कर सकता है।
2022 में बोइंग 747 से नामीबिया से 8 चीते भारत आए थे नामीबिया दुनिया भर में जंगली चीतों की सबसे ज्यादा आबादी वाला देश है। 17 सितंबर, 2022 में भारत सरकार ने नामीबिया सरकार के साथ एक औपचारिक समझौते (MoU) के तहत 8 अफ्रीकी चीतों का पहला बैच मंगवाया था।
इनमें 5 मादाएं और 3 नर थे, जिनकी उम्र तब दो से छह साल के बीच थी। 9 दिन क्वारंटाइन में रखने के बाद PM मोदी ने चीतों के मध्य प्रदेश के कूनो नेशनल पार्क में छोड़ा था। PM मोदी ने एक चीते का नाम आशा रखा था। आशा ने दिसंबर 2024 में तीन शावकों को जन्म दिया।
8 चीते एक मोडिफाइड बोइंग 747 पैसेंजर प्लेन से नामीबिया के विंडहोक से मध्य प्रदेश के ग्वालियर पहुंचे थे।
नामीबिया से भारत में चीतों का ट्रांसफर दुनिया में चीतों के पहले अंतरमहाद्वीपीय ट्रांसफर था। भारत में शिकार और जंगलों की कटाई के चलते अफ्रीकी चीतों की प्रजाति 70 साल से विलुप्त हो चुकी थी। अफ्रीकी चीतों को 1952 में आधिकारिक रूप से विलुप्त घोषित किया गया था।
सीधे तौर पर भारत ही एकमात्र ऐसा देश है जिसे नामीबिया ने जंगल में बसाने के लिए चीते ट्रांसफर किए हैं। हालांकि, कुछ चीतों को वैज्ञानिक अध्ययन, चिड़ियाघरों, या जनसंख्या प्रबंधन के लिए अमेरिका और यूरोप के संस्थानों को अस्थायी रूप से भेजा गया है, लेकिन ये सब बहुत ही छोटे पैमाने पर और संरक्षण के मकसद से थे।
दोनों देशों में पिछले साल 4.5 हजार करोड़ का व्यापार पिछले कुछ सालों में भारत और नामीबिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार में तेजी देखी गई है। साल 2024-25 में दोनों तरफ से करीब रू.4,858 करोड़ का व्यापार हुआ। भारत का निर्यात रू.2,798 करोड़ और नामीबिया से आयात रू.2,061 करोड़ का रहा।
दोनों देशों में वित्तीय वर्ष 2022-23 में करीब रू.2,320 करोड़ का व्यापार हुआ था, जिसमें भारत का निर्यात रू.2,004 करोड़ था। 2023 में अप्रैल और नवंबर के बीच, 178% की बढ़ोतरी के साथ दोनों देशों के बीच लगभग साढ़े 5 हजार करोड़ का व्यापार हुआ।
8 महीने के दौरान भारत का निर्यात करीब रू.3,488 करोड़ था और नामीबिया से करीब रू.1,962 करोड़ का आयात था। मार्च 24 तक दोनों तरफ से रू.6,735 करोड़ का व्यापार हुआ, जिसमें भारत का निर्यात रू.3,785 करोड़ था।
पटना, एजेंसी। IRCTC मनी लॉन्ड्रिंग मामले में लालू परिवार की मुश्किलें बढ़ गई हैं। दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरुवार को लालू, तेजस्वी, राबड़ी समेत 9 लोगों के खिलाफ आरोप तय कर दिए। कोर्ट ने 7 आरोपियों को बरी कर दिया है।
इस मामले ED 16 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। इस मामले में अगली सुनवाई 3 अक्टूबर को होगी।
कोर्ट ने कहा-
राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव पर अपराध से इनकम और पद के गलत इस्तेमाल का मजबूत शक है। दोनों पटना की उस जमीन का फायदा उठा रहे हैं, जिसे कथित तौर पर 2005 से 2014 के बीच लालू यादव के कहने पर उनके पक्ष में ट्रांसफर किया गया था। तब लालू रेल मंत्री थे।
निचली अदालत के आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी
लालू परिवार ने निचली अदालत के अक्टूबर 2025 के उस आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें उनके खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप तय किए गए थे।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस याचिका का विरोध करते हुए अदालत में कहा कि उनके पास मामले से जुड़े पर्याप्त और पुख्ता सबूत मौजूद हैं। CBI ने कहा कि जांच में कई अहम दस्तावेज और साक्ष्य सामने आए हैं, जो आरोपों को मजबूत करते हैं।
ED ने दाखिल की है चार्जशीट
जांच एजेंसियों के अनुसार, इन होटलों और उनसे जुड़ी जमीनों को निजी कंपनियों को नियमों की अनदेखी करते हुए पट्टे पर दिया गया। इस प्रक्रिया में पारदर्शिता का अभाव था और इससे कुछ निजी कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाया गया।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने लालू प्रसाद यादव परिवार समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इसमें पूर्व रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव समेत कई लोगों को आरोपी बनाया गया है।
मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान IRCTC के तहत आने वाले रांची और पुरी स्थित दो होटलों के टेंडर में अनियमितताएं की गईं।
16 आरोपी और कंपनियां मामले में शामिल
इस मामले में लारा प्रोजेक्ट्स, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, सरला गुप्ता, प्रेम चंद गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथ मल ककरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी, देवकी नंदन तुलस्यान, सुजाता होटल्स, विनय कोचर, विजय कोचर, राजीव कुमार रेलन और अभीषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड आरोपी हैं। इनमें से कोर्ट ने 7 लोगों को आरोपों से मुक्त कर दिया है।
कोर्ट ने कहा- लालू को साजिश का पता था
राउज एवेन्यू कोर्ट ने 13 अक्टूबर को कहा था कि इस पूरे टेंडर घोटाले की साजिश लालू यादव की जानकारी में रची गई। अदालत के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया में उनका हस्तक्षेप था और इससे उनके परिवार को आर्थिक फायदा हुआ।
कोर्ट ने इसी आधार पर लालू यादव, राबड़ी देवी और तेजस्वी यादव को आरोपी मानते हुए उनके खिलाफ मुकदमा चलाने का फैसला लिया था।
लालू परिवार ने आरोपों को बताया निराधार
दूसरी ओर, लालू प्रसाद यादव ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि यह मामला राजनीतिक साजिश के तहत उन्हें और उनके परिवार को फंसाने के लिए बनाया गया है। उन्होंने अदालत में भी अपनी बेगुनाही का दावा किया है।
नई दिल्ली, एजेंसी। भारत के पास 190 परमाणु हथियार हैं। अगले कुछ सालों में यह 35 और बना सकता है, इस तरह यह संख्या 225 तक पहुंच सकती है। यह जानकारी अमेरिकी थिंक टैंक फेडरेशन ऑफ अमेरिकन साइंटिस्ट्स (FAS) की नई रिपोर्ट में सामने आई है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता को भी लगातार मजबूत कर रहा है। परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बियों के बेड़े के जरिए भारत समुद्र में अपना ‘न्यूक्लियर कवच’ बना रहा है।
इन 190 परमाणु हथियारों में से 160 से ज्यादा मौजूदा मिसाइलों के लिए हैं, बाकी नई मिसाइलों के लिए तैयार रखे गए हैं। FAS का अनुमान है कि आने वाले समय में भारत के परमाणु हथियारों की संख्या बढ़ सकती है।
भारत के पास 730 किलो प्लूटोनियम
भारत लगातार अपनी परमाणु ताकत को आधुनिक बना रहा है। पिछले कुछ वर्षों में कई नए परमाणु सक्षम हथियार सेना में शामिल किए गए हैं। वहीं, कुछ नए हथियार सिस्टम अभी तैयार किए जा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, 2026 की शुरुआत तक भारत के पास करीब 730 किलो हथियार बनाने वाला प्लूटोनियम होने का अनुमान है। इतने प्लूटोनियम से 225 तक वॉरहेड बनाए जा सकते हैं। हालांकि रिपोर्ट खुद साफ करती है कि यह सिर्फ अनुमान है, वास्तविक संख्या वॉरहेड के डिजाइन और रिजर्व में रखी सामग्री पर निर्भर करती है।
रिपोर्ट में अग्नि-V का भी जिक्र: एक मिसाइल, कई निशाने
FAS की रिपोर्ट में अग्नि-V बेहतर बनाने का भी जिक्र है। कहा गया है कि इस मिसाइल में MIRV तकनीक का परीक्षण किया गया है। इसका मतलब एक मिसाइल में कई ऐसे वॉरहेड ले जाने की क्षमता विकसित करना है, जिन्हें अलग-अलग लक्ष्यों की ओर भेजा जा सकता है।
2024 के बाद मई 2026 में भी कई पेलोड के साथ परीक्षण हुआ। FAS का अनुमान है कि अग्नि-V संभवतः तीन वॉरहेड ले जा सकती है, हालांकि ऐसा करने पर इसकी अधिकतम रेंज प्रभावित हो सकती है।
नया रिएक्टर भी गेमचेंजर
अप्रैल 2026 में भारत के 500 मेगावाट प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) ने पहली बार क्रिटिकलिटी हासिल की। FAS के अनुमान के मुताबिक 80% क्षमता पर चलने पर यह सालाना करीब 140 किलो प्लूटोनियम-239 पैदा कर सकता है। इससे करीब 35 वॉरहेड बन सकते हैं। आगे ऐसे और फास्ट ब्रीडर रिएक्टरों की योजना है।
मार्च, 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर के नियंत्रण कक्ष का दौरा किया था।
जमीन के साथ समुद्र में भी बढ़ रही ताकत
FAS के मुताबिक, भारत अपनी न्यूक्लियर ट्रायड को भी मजबूत कर रहा है। इसका मतलब है कि देश जमीन, हवा और समुद्र तीनों माध्यमों से परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की क्षमता विकसित कर रहा है।
भारत ने अप्रैल 2026 में अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु ऊर्जा से चलने वाली बैलिस्टिक मिसाइल पनडुब्बी INS अरिधमान को कमीशन किया। FAS के मुताबिक इस पनडुब्बी में 8 मिसाइल ट्यूब हैं, यह क्षमता INS अरिहंत और INS अरिघात में मौजूद संख्या से दोगुनी है। अरिहंत- क्लास पनडुब्बी, INS अरिसुदन पनडुब्बियों को 2027 में कमीशन किए जाने की योजना है।
भारत का फोकस अब लंबी दूरी की मिसाइलों पर
FAS के मुताबिक, भारत की परमाणु नीति लंबे समय से पाकिस्तान को ध्यान में रखकर बनाई गई है। लेकिन अब भारत लंबी दूरी की मिसाइलें और समुद्र से परमाणु हमला करने की क्षमता भी बढ़ा रहा है। इससे भारत की परमाणु ताकत का फोकस चीन तक भी बढ़ रहा है। भारत की घोषित नीति ‘नो फर्स्ट यूज’ की है। यानी भारत पहले परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं करने की बात कहता है। इसके बावजूद, नए मिसाइल सिस्टम और परमाणु हथियारों के आधुनिकीकरण से दक्षिण एशिया में परमाणु ताकत का संतुलन बदल रहा है।
दुनिया के 9 देशों के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार
SIPRI इयरबुक 2026 के अनुसार फ्रांस, चीन, भारत,पाकिस्तान,उत्तर कोरिया और इजराइल के पास कुल 12,187 परमाणु हथियार हैं। इसमें से 9,745 इस्तेमाल के लिए तैयार हैं।
नई दिल्ली, एजेंसी। BRICS समिट में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन दोनों भारत आएंगे। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को जिनपिंग के भारत दौरे की पुष्टि की। इससे दो दिन पहले रूस ने भी पुतिन के भारत आने की पुष्टि की थी।
जिनपिंग का यह 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत का पहला दौरा होगा। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की भी उम्मीद है।
15 जून 2020 को पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई झड़प में 20 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे। चीन ने बाद में अपने चार सैनिकों के मारे जाने की बात मानी थी।
नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को BRICS समिट आयोजित होगा। इसमें चीन और रूस समेत 11 सदस्य देशों के नेता शामिल होंगे।
जिनपिंग ने आखिरी बार अक्टूबर 2019 में भारत का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने तमिलनाडु के महाबलीपुरम में मोदी से मुलाकात की थी।
गलवान हिंसा के बाद बिगड़े थे भारत-चीन के रिश्ते
भारत और चीन के रिश्ते 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद बुरी तरह बिगड़ गए थे। इस झड़प में दोनों देशों के सैनिक मारे गए थे। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा विवाद को लेकर तनाव काफी बढ़ गया।
हालांकि, इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति शी की कई मौकों पर मुलाकात हुई है। दोनों नेता दूसरे अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के दौरान आमने-सामने आए हैं। पिछले साल चीन में हुई शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक के दौरान भी दोनों नेताओं की मुलाकात हुई थी।
इस बार नई दिल्ली में होने वाले BRICS समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक होने की उम्मीद है।
भारत और चीन के अधिकारी पिछले कई महीनों से दोनों देशों के रिश्तों को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं। भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल 24 अगस्त को चीन गए थे।
NSA अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25 अगस्त को सीमा विवाद समेत कई मुद्दों पर बातचीत हुई थी।
सीमा विवाद समेत कई मुद्दे भारत के एजेंडे में
भारत और चीन के बीच सिर्फ सीमा विवाद ही नहीं, बल्कि व्यापार और आर्थिक रिश्ते भी बातचीत का हिस्सा हैं। भारत चीन के साथ अपने बड़े व्यापार घाटे को कम करना चाहता है।
इसके अलावा रेयर अर्थ मैगनेट और इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट जैसे जरूरी सामान की सप्लाई को लेकर भी भारत अपनी निर्भरता कम करने की कोशिश कर रहा है।
BRICS समिट की अध्यक्षता कर रहा है भारत
इस साल BRICS की कमान भारत के पास है। BRICS दुनिया की बड़ी उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह है। इसमें भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ मिस्र, ईरान, इथियोपिया, UAE और इंडोनेशिया भी शामिल हैं।
भारत की अध्यक्षता में पूरे साल अलग-अलग शहरों में बैठकें, मंत्रीस्तरीय सम्मेलन और कई स्तर की चर्चाएं हो रही हैं।
भारत का फोकस ग्लोबल साउथ की आवाज मजबूत करने, आर्थिक सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल तकनीक, आतंकवाद से निपटने और सप्लाई चेन मजबूत करने पर है। यानी BRICS को सिर्फ राजनीतिक मंच नहीं, बल्कि व्यापार, निवेश और विकास के बड़े मंच के तौर पर आगे बढ़ाने की कोशिश है।